20 june 2026 PIB Summary for upsc की समसामयिकी (Current Affairs) का यह संकलन UPSC सिविल सेवा परीक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अंक में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (GS Paper 3) के तहत ओडिशा के लखनपुर में भारत के पहले वाणिज्यिक ‘कोल-टू-अमोनियम नाइट्रेट’ प्रोजेक्ट और ब्रह्मांडीय रहस्यों को उजागर करने वाले ‘फास्ट एक्स-रे ट्रांजिएंट्स’ (FXTs) के शोध को शामिल किया गया है। पर्यावरण खंड के अंतर्गत हिमालयी क्षेत्र में ‘भारत जलवायु वेधशाला नेटवर्क’ (BCON) की स्थापना तथा शासन व्यवस्था (GS Paper 2) के तहत राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) के ‘प्रोजेक्ट सुपर 50’ और भारत-उज्बेकिस्तान अंतर-सरकारी आयोग (IGC) सत्र के नीतिगत निर्णयों का विश्लेषण प्रस्तुत है।
भारत का पहला कमर्शियल कोल-टू-अमोनियम नाइट्रेट प्रोजेक्ट
पाठ्यक्रम (Syllabus):
- GS Paper 3: बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर: ऊर्जा), वैज्ञानिक नवाचार, औद्योगिक नीति और आत्मनिर्भर भारत।
- प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): कोयला गैसीकरण (Coal Gasification), सिनगैस (Syngas), BCGCL, महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (MCL)।
चर्चा में क्यों?
भारत की ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ओडिशा के झारसुगुडा जिले के लखनपुर में ₹25,016 करोड़ की लागत वाले कोयला गैसीकरण (Coal Gasification) प्रोजेक्ट की आधारशिला रखेंगे। यह परियोजना भारत का पहला वाणिज्यिक पैमाने का (Commercial-Scale) ‘कोल-टू-अमोनियम नाइट्रेट’ प्रोजेक्ट है।
परियोजना की मुख्य विशेषताएं (Key Highlights)
- विकासकर्ता: इस प्रोजेक्ट का विकास भारत कोल गैसीकरण और रसायन लिमिटेड (BCGCL) द्वारा किया जा रहा है, जो भेल (BHEL) और कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) का एक संयुक्त उद्यम (Joint Venture) है।
- स्वदेशी तकनीक: इसमें भेल (BHEL) द्वारा घरेलू स्तर पर विकसित कोयला गैसीकरण तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
- उत्पादन क्षमता: यह संयंत्र प्रतिदिन 2,000 टन अमोनियम नाइट्रेट का उत्पादन करेगा।
- भूमि और वित्तीय सहायता: यह प्रोजेक्ट महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (MCL) की 350 एकड़ भूमि पर बनेगा। इसके लिए केंद्रीय कोयला मंत्रालय अपने इंसेंटिव स्कीम के तहत ₹1,350 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है।
कोयला गैसीकरण (Coal Gasification) क्या है?
यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें थर्मल पावर प्लांटों की तरह कोयले को सीधे जलाने के बजाय, उसे उच्च तापमान और दबाव पर ऑक्सीजन और भाप के साथ रासायनिक रूप से प्रतिक्रिया कराई जाती है।
- सिनगैस (Syngas) का निर्माण: इस प्रक्रिया से सिंथेसिस गैस (समान्यतः सिनगैस) का उत्पादन होता है। सिनगैस मुख्य रूप से कार्बन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोजन, कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन का मिश्रण होती है।
- डाउनस्ट्रीम उत्पाद: सिनगैस का उपयोग मेथनॉल, यूरिया, अमोनियम नाइट्रेट, सिंथेटिक प्राकृतिक गैस (SNG) और अन्य रासायनिक कच्चे माल बनाने के लिए किया जा सकता है।
भारत के लिए इस परियोजना का रणनीतिक महत्व
1. आयात प्रतिस्थापन (Import Substitution)
- भारत वर्तमान में हर साल लगभग ₹2.7 लाख करोड़ के अंतिम-उपयोग और मध्यवर्ती रसायनों का आयात करता है।
- यह परियोजना प्राकृतिक गैस, अमोनिया और मेथनॉल जैसे रसायनों के आयात पर देश की निर्भरता को कम करेगी, जिससे विदेशी मुद्रा की भारी बचत होगी।
2. विशाल कोयला भंडार का सही उपयोग
- भारत के पास 400 अरब टन से अधिक का कोयला भंडार है (विश्व का पांचवां सबसे बड़ा भंडार)।
- कोयला गैसीकरण को ‘क्लीन कोल टेक्नोलॉजी’ माना जाता है। यह पर्यावरण को पारंपरिक दहन की तुलना में कम नुकसान पहुँचाए बिना कोयले का औद्योगिक मूल्यवर्धन (Value Addition) सुनिश्चित करता है।
3. आर्थिक लाभ और रोजगार
- सरकार ने देश भर में सतह कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए ₹46,000 करोड़ की प्रोत्साहन योजनाओं को मंजूरी दी है।
- इस पहल से ₹2.5 से ₹3 लाख करोड़ के निवेश को आकर्षित करने और कोयला उत्पादक क्षेत्रों में लगभग 50,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।
क्विक फैक्ट्स (Prelims Booster)
- अमोनियम नाइट्रेट का उपयोग: इसका मुख्य रूप से उपयोग उर्वरक (Fertilizers) बनाने में और खनन/निर्माण क्षेत्रों में औद्योगिक विस्फोटकों (Industrial Explosives) के निर्माण में किया जाता है।
- कोल इंडिया लिमिटेड (CIL): यह दुनिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी है।
26वीं अखिल भारतीय फिंगरप्रिंट कॉन्फ्रेंस 2026 और आपराधिक न्याय सुधार
पाठ्यक्रम (Syllabus):
- GS Paper 2: शासन व्यवस्था; विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप।
- GS Paper 3: आंतरिक सुरक्षा; अपराध नियंत्रण में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सुरक्षा।
- प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): NAFIS, NCRB-अभिज्ञान, CrPI, e-Forensics 2.0, e-Prosecution 2.0, CCTNS।
चर्चा में क्यों?
हाल ही में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में 26वीं अखिल भारतीय फिंगरप्रिंट कॉन्फ्रेंस 2026 के उद्घाटन सत्र को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया. इस अवसर पर उन्होंने आपराधिक न्याय प्रणाली को गति देने के लिए राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के चार नए डिजिटल एप्लिकेशन लॉन्च किए.

चार नए तकनीकी एप्लिकेशन और उनके कार्य
ये एप्लिकेशन ‘एकीकृत आपराधिक न्याय प्रणाली’ (ICJS) को एक डिजिटल श्रृंखला में जोड़ते हैं:
- NCRB-अभिज्ञान (Abhigyan): यह एक मोबाइल ऐप है। इसके जरिए फील्ड में तैनात पुलिसकर्मी फिंगरप्रिंट स्कैनर की मदद से मौके पर ही राष्ट्रीय फिंगरप्रिंट डेटाबेस से संदिग्धों की पहचान कर सकते हैं।
- CrPI एप्लिकेशन: यह मल्टी-मोडल बायोमेट्रिक तकनीक पर आधारित है। इसमें फेशियल रिकग्निशन (चेहरे की पहचान), आइरिस (आंख की पुतली) मैचिंग और डीएनए (DNA) मैचिंग की क्षमताएं शामिल हैं। इसका मुख्य उपयोग बार-बार अपराध करने वालों और सीसीटीवी के जरिए संदिग्धों को पहचानने में होता है।
- e-Forensics 2.0: यह प्लेटफॉर्म देश भर की फोरेंसिक प्रयोगशालाओं और जांच एजेंसियों को डिजिटल रूप से जोड़ता है। यह केस की प्राप्ति, डिजिटल ट्रैकिंग, सैंपल रजिस्ट्रेशन और चेन ऑफ कस्टडी को मजबूत करता है।
- e-Prosecution 2.0: यह ऐप पुलिस, अभियोजन (Prosecution) और न्यायिक प्रक्रियाओं के बीच डिजिटल समन्वय स्थापित करता है ताकि समय पर सजा सुनिश्चित की जा सके।
सरकार के आपराधिक न्याय सुधारों के मुख्य उद्देश्य
- 3 साल में न्याय (FIR से सजा तक): सरकार का मुख्य लक्ष्य एक ऐसा मजबूत ढांचा तैयार करना है जिससे एफआईआर (FIR) दर्ज होने से लेकर अदालत से सजा (Conviction) मिलने तक की पूरी प्रक्रिया 3 साल के भीतर पूरी हो सके।
- पेंडेंसी कम करने का ब्लूप्रिंट: गृह मंत्रालय मामलों के लंबित होने (Pendency) की समस्या को कम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों के साथ मिलकर एक खाका (Blueprint) तैयार कर रहा है। इसके तहत इवनिंग कोर्ट और नए तंत्र स्थापित किए जा रहे हैं।
- बल-प्रयोग से वैज्ञानिक जांच की ओर: पारंपरिक बल-आधारित पुलिसिंग मॉडल के स्थान पर अब वैज्ञानिक साक्ष्य-आधारित जांच (Scientific evidence-based investigation) को अपराध नियंत्रण का मुख्य माध्यम बनाया जा रहा है।
डेटा को ‘ऐक्शनेबल इंटेलिजेंस’ में बदलना (Predictive Policing)
गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि निष्क्रिय पड़ा डेटा केवल एक बोझ है, उसका वास्तविक मूल्य तब है जब उसे खुफिया जानकारी (Actionable Intelligence) में बदला जाए।
- विशाल राष्ट्रीय डेटाबेस का विश्लेषण: भारत के पास वर्तमान में 1.29 करोड़ फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड, 9.91 लाख मादक पदार्थों के तस्करों का रिकॉर्ड और 3.65 लाख मानव तस्करी के मामलों का डेटा उपलब्ध है।
- CCTNS की सफलता: अपराध और आपराधिक ट्रैकिंग नेटवर्क एवं सिस्टम (CCTNS) देश के सभी 17,840 पुलिस स्टेशनों में सफलतापूर्वक लागू हो चुका है, जिसमें 37 करोड़ से अधिक FIR का लेगेसी डेटा उपलब्ध है।
- AI और मशीन लर्निंग का उपयोग: अब इस विशाल डेटाबेस का विश्लेषण करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग का उपयोग किया जाएगा। इससे अंतर-राज्यीय आपराधिक नेटवर्क और बार-बार अपराध करने वालों की पहचान उनके अपराध करने से पहले ही की जा सकेगी, जिसे प्रेडिक्टिव पुलिसिंग (Predictive Policing) कहा जाता है।
हिमालयी क्षेत्र में ‘भारत जलवायु वेधशाला नेटवर्क’ (BCON) की स्थापना
पाठ्यक्रम (Syllabus):
- GS Paper 3: पर्यावरण प्रदूषण और गिरावट; जलवायु परिवर्तन पर भारत की पहल। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियां; स्वदेशी तकनीक का विकास।
- प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): भारत जलवायु वेधशाला नेटवर्क (BCON), मिशन मौसम, IITM, ARIES (देवस्थल)।
चर्चा में क्यों?
हाल ही में भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM), पुणे और आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान अनुसंधान संस्थान (ARIES), नैनीताल के बीच एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) के ‘मिशन मौसम’ (Mission Mausam) के तहत यह समझौता 50 से अधिक वर्षों की लंबी अवधि के लिए किया गया है।
समझौते का मुख्य उद्देश्य (Key Objectives)
- दीर्घकालिक निगरानी स्टेशन: इसका मुख्य लक्ष्य हिमालयी क्षेत्र में ‘भारत जलवायु वेधशाला नेटवर्क’ (Bharat Climate Observation Network – BCON) के तहत एक दीर्घकालिक जलवायु निगरानी स्टेशन स्थापित करना है।
- सहयोग स्थल: इस वेधशाला को उत्तराखंड के देवस्थल (ARIES) में स्थापित किया जाएगा, जो एक उच्च ऊंचाई वाला पहाड़ी क्षेत्र है।
देवस्थल (ARIES) का चयन क्यों किया गया? (Significance of the Location)
- यह क्षेत्र ऊंचाई पर होने के कारण प्रदूषण से काफी मुक्त और स्वच्छ वातावरण प्रदान करता है।
- यह वायुमंडल की मूल विशेषताओं को समझने, ग्रीनहाउस गैसों के अध्ययन और हिमालयी क्षेत्र में प्रदूषकों के परिवहन को ट्रैक करने के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है।
भारत जलवायु वेधशाला नेटवर्क (BCON) क्या है?
- नोडल एजेंसी: यह पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) के तहत IITM, पुणे द्वारा परिकल्पित और कार्यान्वित की जाने वाली एक राष्ट्रीय अवलोकन पहल है।
- क्या मॉनिटर करेगा?: यह नेटवर्क मौसम के विभिन्न मापदंडों, जलवायु-सक्रिय ट्रेस गैसों (जैसे ग्रीनहाउस गैसें और कम समय तक रहने वाले जलवायु प्रदूषक), वायुमंडलीय रसायन और मिट्टी की नमी (Soil Moisture) की सख्त निगरानी करेगा।
- महत्वपूर्ण डेटाबेस: इसका उद्देश्य भारत के अग्रणी जलवायु अनुसंधान के लिए एक उच्च गुणवत्ता और अत्यधिक सटीक डेटाबेस तैयार करना है।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) का “प्रोजेक्ट सुपर 50”
“प्रोजेक्ट सुपर 50” क्या है?
यह राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) द्वारा शुरू की गई एक अनूठी पहल है। इसका प्राथमिक उद्देश्य अनुसूचित जाति (SC) के मेधावी युवाओं को सिविल सेवा परीक्षा (UPSC) के लिए उचित मार्गदर्शन, रणनीति और प्रशासनिक जीवन के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराना है।
- रणनीतिक मार्गदर्शन: इस कार्यक्रम में वरिष्ठ IAS और IRS अधिकारियों ने भाग लिया और उम्मीदवारों के साथ परीक्षा की तैयारी के गुर तथा अपने व्यक्तिगत प्रशासनिक अनुभव साझा किए।
- अंबेडकर का विजन: कार्यक्रम के दौरान डॉ. बी.आर. अंबेडकर के प्रेरक मंत्र “शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो” (Educate, Organise, Agitate) को अपनाने पर बल दिया गया, ताकि शैक्षणिक और प्रशासनिक क्षेत्रों में वंचित युवाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जा सके।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) के बारे में
- संवैधानिक निकाय: NCSC एक संवैधानिक निकाय (Constitutional Body) है।
- संवैधानिक प्रावधान: मूल रूप से अनुच्छेद 338 के तहत अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए एक राष्ट्रीय आयोग का प्रावधान था।
- विभाजन (89वां संशोधन):89वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 के द्वारा पूर्ववर्ती राष्ट्रीय आयोग को दो भागों में विभाजित कर दिया गया:
- राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC): अनुच्छेद 338 के तहत।
- राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST): अनुच्छेद 338A के तहत।
- कार्य और शक्तियां: आयोग का मुख्य कार्य अनुसूचित जातियों के लिए संविधान और अन्य कानूनों के तहत दिए गए सुरक्षा उपायों की जांच और निगरानी करना है। किसी मामले की जांच करते समय आयोग को सिविल कोर्ट (Civil Court) की शक्तियां प्राप्त होती हैं।
फास्ट एक्स-रे ट्रांजिएंट्स (FXTs) और ब्रह्मांडीय विस्फोट
पाठ्यक्रम (Syllabus):
- GS Paper 3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियां। अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में नवीनतम विकास।
- प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): फास्ट एक्स-रे ट्रांजिएंट्स (FXTs), अनाथ प्रदीप्ति (Orphan Afterglow), हानले वेधशाला (लद्दाख), आइंस्टीन प्रोब (Einstein Probe)।
चर्चा में क्यों?
भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) और IIT बॉम्बे के वैज्ञानिकों ने ‘फास्ट एक्स-रे ट्रांजिएंट्स’ (FXTs) नामक ब्रह्मांडीय एक्स-रे चमक के पीछे के तंत्र का पता लगाया है। वैज्ञानिकों ने ‘EP241107a’ नामक एक विशिष्ट एक्स-रे चमक को किसी विशाल तारे के ढहने या दो न्यूट्रॉन तारों के विलय से जोड़ा है।
फास्ट एक्स-रे ट्रांजिएंट्स (FXTs) क्या हैं?
- परिभाषा: यह ब्रह्मांड में होने वाली हिंसक घटनाओं से उत्पन्न होने वाली अत्यधिक ऊर्जावान और गैर-पुनरावर्ती (Non-repeating) एक्स-रे चमक है।
- अवधि: यह आकाश में अचानक प्रकट होती है। यह कुछ मिनट से लेकर कई घंटों तक रहती है और फिर गायब हो जाती है।
- उत्पत्ति के कारण: यह मुख्य रूप से सुपरनोवा विस्फोट, न्यूट्रॉन तारों के टकराने या ब्लैक होल द्वारा किसी तारे को निगलने से पैदा होती है।
‘अनाथ प्रदीप्ति’ (Orphan Afterglow) और मुख्य खोजें
- खोज: इस घटना को पहली बार चीन के ‘आइंस्टीन प्रोब’ (Einstein Probe) अंतरिक्ष मिशन ने खोजा था।
- दुर्लभ घटना: आम तौर पर ऐसे विस्फोटों में गामा-किरणें निकलती हैं। इस घटना में सीधे गामा-किरणें नहीं दिखीं। इसके बावजूद इसकी बाद की चमक (Afterglow) बिल्कुल गामा-रे बर्स्ट (GRB) जैसी थी। इसलिए इसे ‘अनाथ प्रदीप्ति’ (Orphan Afterglow) कहा गया है।
- अतुलनीय ऊर्जा: इस विस्फोट से निकले जेट की गतिज ऊर्जा हमारी आकाशगंगा (Milky Way) के सभी तारों द्वारा कई महीनों में उत्सर्जित कुल ऊर्जा के बराबर थी।
इस शोध में शामिल भारतीय वेधशालाएं
भारत के खगोलविदों ने इस घटना की निगरानी के लिए देश की तीन प्रमुख प्रणालियों का उपयोग किया है:
- हिमालयन चंद्र टेलीस्कोप (HCT): यह भारतीय खगोलीय वेधशाला (IAO), हानले (लद्दाख) में स्थित है।
- ग्रोथ-इंडिया टेलीस्कोप (GIT): यह भी हानले (लद्दाख) में स्थित है। इसे IIA व IIT बॉम्बे मिलकर चलाते हैं।
- अपग्रेडेड जाइंट मेट्रिपेव रेडियो टेलीस्कोप (uGMRT): यह पुणे (महाराष्ट्र) में स्थित एक रेडियो टेलीस्कोप है।
14वां भारत-उज्बेकिस्तान अंतर-सरकारी आयोग (IGC) सत्र
पाठ्यक्रम (Syllabus):
- GS Paper 2: भारत के हितों पर विकसित और विकासशील देशों की नीतियों और राजनीति का प्रभाव। द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से जुड़े समझौते।
- प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): भारत-उज्बेकिस्तान अंतर-सरकारी आयोग (IGC), चाबहार पोर्ट/कनेक्टिविटी, द्विपक्षीय व्यापार डेटा।
चर्चा में क्यों?
हाल ही में ताशकंद में भारत-उज्बेकिस्तान अंतर-सरकारी आयोग (IGC) के 14वें सत्र का आयोजन किया गया। इस बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के वाणिज्य सचिव श्री राजेश अग्रवाल और उज्बेकिस्तान के निवेश, उद्योग और व्यापार उप-मंत्री श्री शोखरूख गुलामव ने की।
बैठक के मुख्य बिंदु और निर्णय (Key Outcomes)
- व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य: दोनों देश अगले तीन वर्षों में अपने द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने पर सहमत हुए हैं।
- गैर-टैरिफ बाधाओं (NTBs) का समाधान: मानकों, परीक्षण, प्रमाणन और सीमा शुल्क प्रक्रियाओं की नियमित समीक्षा के लिए एक समयबद्ध तंत्र बनाने का सुझाव दिया गया है।
- व्यापार विस्तार के क्षेत्र: फार्मास्यूटिकल्स, कृषि मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्मार्टफोन, कपड़ा, चिकित्सा उपकरण और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में भारतीय आपूर्ति बढ़ाने पर चर्चा हुई。
प्रमुख रणनीतिक एवं तकनीकी सहयोग क्षेत्र
1. डिजिटल और वित्तीय समावेशन (ICT & Fintech)
- भारत ने डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI), फिनटेक और साइबर सुरक्षा में अपनी क्षमताओं को रेखांकित किया।
- पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों के भुगतान बुनियादी ढांचे (Payment Infrastructure) को आपस में जोड़ने पर विचार किया जा रहा है।
2. ऊर्जा सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals)
- भारत की बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था और एआई (AI) डेटा सेंटरों के लिए स्वच्छ ऊर्जा की मांग बढ़ रही है।
- इस संदर्भ में दोनों देशों के बीच क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों) की आपूर्ति सुनिश्चित करने को रणनीतिक सहयोग का हिस्सा बनाया गया है।
3. कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स
- दोनों पक्षों ने माना कि आर्थिक क्षमता का पूरा लाभ उठाने के लिए मजबूत परिवहन और लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी आवश्यक है। उज्बेकिस्तान ने डिजिटल लॉजिस्टिक्स प्लेटफॉर्म साझा करने का प्रस्ताव दिया है।
द्विपक्षीय व्यापार की वर्तमान स्थिति
- व्यापार में वृद्धि: वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा बढ़कर 1.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 33.3% की वृद्धि दर्शाता है।
- भारत का निर्यात: पिछले एक दशक में उज्बेकिस्तान को होने वाले भारतीय निर्यात में 12.9% की चक्रवर्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दर्ज की गई है।