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Author name: Nirmanias

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27 June 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf

27 June 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत हम परिवहन क्षेत्र में सहकारिता की नई क्रांति ‘भारत टैक्सी’, फ्रंटियर टेक्नोलॉजीज में भारत की छलांग और राष्ट्रीय क्वांटम मिशन, ग्रामीण महिला उद्यमिता को वैश्विक मंच देने वाली सरस आजीविका पहल, सामाजिक न्याय के प्रणेता राजर्षि छत्रपति शाहू जी महाराज की जयंती और पर्यावरण संरक्षण के मोर्चे पर राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) द्वारा संकटग्रस्त प्रजातियों के लिए जारी किए गए नए SOP का संपूर्ण विश्लेषण करेंगे। एससीओ महिला मंच 2026: ‘महिला-नीत विकास’ और भारत की वैश्विक प्रतिबद्धता चर्चा में क्यों? (Why in News?) किर्गिज गणराज्य की राजधानी बिश्केक (Bishkek) में आयोजित ‘एससीओ महिला मंच (SCO Women’s Forum) 2026’ में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने भारत का प्रतिनिधित्व किया। एक विशेष वीडियो संदेश के माध्यम से इस मंच को संबोधित करते हुए भारत ने शंघाई सहयोग संगठन के बुनियादी सिद्धांतों जैसे आपसी सम्मान, समानता और आम सहमति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया तथा आर्थिक विकास में महिलाओं की भूमिका पर विशेष बल दिया। मुख्य बिंदु: आर्थिक विकास में महिलाओं की भूमिका और भारतीय मॉडल (Key Notes) 1. ‘महिला-नीत विकास’ (Women-Led Development) का दृष्टिकोण 2. स्वयं सहायता समूह (SHGs) और ‘लखपति दीदी’ की सफलता 3. प्रमुख नीतिगत स्तंभ: मिशन शक्ति और मिशन पोषण 2.0 4. क्षेत्रीय सहयोग के लिए भारत की तत्परता 10वीं शीर्ष स्तरीय NCORD बैठक: ‘विज़न डॉक्यूमेंट ऑन ड्रग कंट्रोल (2026-2029)’ और नशामुक्त भारत का रोडमैप चर्चा में क्यों? (Why in News?) केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने नई दिल्ली में नार्को-समन्वय केंद्र (NCORD) की 10वीं शीर्ष स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में नशीली दवाओं के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए ‘विज़न डॉक्यूमेंट ऑन ड्रग कंट्रोल (2026-2029)’ और ‘एनसीबी वार्षिक रिपोर्ट-2025’ जारी की गई। साथ ही, ड्रग्स निपटान पाक्षिक अभियान’ (Online Drugs Disposal Fortnight Campaign) की शुरुआत की गई, जिसके तहत ₹6,000 करोड़ मूल्य के 2,09,500 किलोग्राम नशीले पदार्थों को नष्ट करने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्य बिंदु: भारत की नई नार्को-कंट्रोल रणनीति 1. उभरता हुआ नार्को-आतंकवाद इकोसिस्टम (Evolving Narco-Terrorism Ecosystem) 2. त्रि-स्तरीय रणनीति: ‘Detect, Disrupt, and Destroy’ 3. रोडमैप के 4 मुख्य स्तंभ (Four Pillars) यह रणनीति सरकार और समाज के सामूहिक प्रयास (Whole of Government & Whole of Society Approach) पर आधारित है: 4. प्रशासनिक और संस्थागत सुधार (Institutional Reforms) 10 वर्षों में मादक पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई की प्रगति (Comparative Data) मापदंड / अवधि 2004 – 2014 2014 – 2026 जब्त दवाओं का मूल्य ₹40,000 करोड़ (26 लाख किग्रा) ₹1,84,000 करोड़ (1.18 करोड़ किग्रा) नष्ट की गई दवाएं ₹8,000 करोड़ (3.26 लाख किग्रा) ₹89,896 करोड़ (42.47 लाख किग्रा) दर्ज किए गए मामले 1,73,000 मामले 8,75,000 मामले की गई गिरफ्तारियां 1,95,000 गिरफ्तारियां 10,97,000 गिरफ्तारियां अवैध अफीम खेती नष्ट की 10,000 एकड़ (2020 में) 42,282 एकड़ (2025 में) छत्रपति शाहू जी महाराज: सामाजिक न्याय और आधुनिक सुधारों के प्रणेता चर्चा में क्यों? (Why in News?) 26 जून 2026 को भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने महान सामाजिक सुधारक और कोल्हापुर रियासत के दूरदर्शी राजा, राजर्षि छत्रपति शाहू जी महाराज की जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने समाज के वंचित, शोषित और पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए उनके द्वारा किए गए जीवनपर्यंत संघर्ष और आदर्शों को याद करते हुए उन्हें देश का मार्गदर्शक बताया। मुख्य बिंदु: शाहू जी महाराज का योगदान और ऐतिहासिक महत्व (Key Historical Notes) शाहू जी महाराज (1874-1922) कोल्हापुर के छत्रपति भोंसले राजवंश के एक ऐसे राजा थे, जिन्होंने अपने राजपाट का उपयोग केवल सत्ता चलाने के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक क्रांति के लिए किया: 1. सामाजिक न्याय और आरक्षण के जनक 2. शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी सुधार 3. डॉ. बी.आर. आंबेडकर के संरक्षक और सहयोगी 4. उपाधि ‘राजर्षि’ (Rajarshi) का इतिहास ऐतिहासिक घटक (Component) परीक्षा उपयोगी त्वरित तथ्य (Exam Facts) नाम और जीवनकाल राजर्षि छत्रपति शाहू जी महाराज (26 जून 1874 – 6 मई 1922)। संबद्ध रियासत कोल्हापुर रियासत (मराठा भोंसले राजवंश)। ऐतिहासिक कदम (1902) प्रशासन और नौकरियों में पिछड़े वर्गों के लिए 50% आरक्षण की घोषणा करने वाले पहले भारतीय शासक। ‘राजर्षि’ उपाधि वर्ष 1919 में कानपुर की कुर्मी क्षत्रिय सभा द्वारा प्रदान की गई। डॉ. आंबेडकर से जुड़ाव डॉ. आंबेडकर की शिक्षा और उनके समाचार पत्र ‘मूकनायक’ (1920) को वित्तीय सहायता दी। प्रमुख सुधार अंतर्जातीय और विधवा विवाह को कानूनी मान्यता दी, बंधुआ मजदूरी और अस्पृश्यता को प्रतिबंधित किया। फ्रंटियर टेक्नोलॉजीज: भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता और आर्थिक संवृद्धि का नया रोडमैप चर्चा में क्यों? (Why in News?) केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने एक प्रमुख मीडिया कॉन्क्लेव में घोषणा की कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), परमाणु (Nuclear), अंतरिक्ष (Space) और क्वांटम (Quantum) प्रौद्योगिकियां ही भारत के भविष्य की आर्थिक संवृद्धि और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को तय करेंगी। उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि वर्ष 2023 में लॉन्च हुए भारत के राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (National Quantum Mission) ने अपने शुरुआती तीन वर्षों के भीतर ही अपने निर्धारित लक्ष्यों में से आधे से अधिक परिणाम समय से पहले हासिल कर लिए हैं। मुख्य बिंदु: फ्रंटियर टेक्नोलॉजीज और भारत का बढ़ता प्रभाव 1. राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) की ऐतिहासिक प्रगति 2. नीतिगत सुधार और ट्रिपल-इंजन ग्रोथ (Space, Nuclear & AI) 3. अनुसंधान मॉडल में संरचनात्मक बदलाव (Structural Shift in R&D) 4. एनईपी 2020: नए इनोवेटर्स की नींव प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य घटक / मिशन (Component) परीक्षा उपयोगी त्वरित तथ्य (Exam Facts) राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) वर्ष 2023 में लॉन्च किया गया था। (वर्तमान में इसे संचालित होते हुए 3 वर्ष हो चुके हैं)। मुख्य फोकस क्षेत्र क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम कम्युनिकेशन, क्वांटम सेंसिंग और मौसम विज्ञान। प्राथमिक सफलता (2026) डिफेंस और रणनीतिक महत्व के लिए क्वांटम-सुरक्षित संचार लक्ष्यों की समय से पहले प्राप्ति। नवाचार का नया ढांचा सरकार-केंद्रित मॉडल से बदलकर “अकादमिक + उद्योग + स्टार्टअप” का पीपीपी मॉडल। लक्षित वर्ष वर्ष 2047 तक भारत को नवाचार-संचालित विकसित अर्थव्यवस्था बनाना। ‘भारत टैक्सी’: सहकारिता आधारित मोबिलिटी मॉडल और आर्थिक सशक्तिकरण चर्चा में क्यों? (Why in News?) केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने 27 जून 2026 को महात्मा मंदिर कन्वेंशन सेंटर, गांधीनगर (गुजरात) से देश की पहली सहकारिता-आधारित टैक्सी सेवा “भारत टैक्सी” (Bharat Taxi) को आधिकारिक तौर

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NCERT Notes Class 6 Social science (Geography) Chapter 5: India That Is Bharat

NCERT Notes Class 6 Social science (Geography) Chapter 5: India, That Is Bharat अध्याय हमारी अपनी मातृभूमि के भौगोलिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नामकरण की कड़ियों को आपस में जोड़ता है। UPSC प्रीलिम्स और मुख्य परीक्षा (GS-1) के नजरिए से यह समझना बेहद जरूरी है कि जिस भूमि को आज हम आधुनिक सीमाओं में ‘भारत’ के रूप में जानते हैं, उसका अतीत कितना गतिशील और विविधता से भरा रहा है। हम जानेंगे कि कैसे ऋग्वेद के ‘सप्त सिंधु’ से शुरू होकर, पुराणों के ‘भारतवर्ष’ और सम्राट अशोक के ‘जम्बुद्वीप’ से गुजरते हुए, प्राचीन पारसियों, यूनानियों और चीनियों के भाषाई रूपांतरण से ‘हिंदू’, ‘इंडिया’ और ‘यिन्दु’ जैसे वैश्विक नामों की उत्पत्ति हुई। हमारा देश: भारत / Our Country: India THINK ABOUT IT नाम की उत्पत्ति और ऐतिहासिक स्रोत / Names of India इतिहास के अलग-अलग कालखंडों में भारत को यहाँ के निवासियों और विदेशी यात्रियों द्वारा कई नामों से पुकारा गया है। इन नामों की जानकारी हमें निम्नलिखित तीन मुख्य माध्यमों से मिलती है: भारतीयों ने भारत का नाम कैसे रखा / How Indians Named India सप्त सिंधु और ऋग्वैदिक काल महाभारत में वर्णित क्षेत्रीय नाम समय के साथ भारतीय साहित्य में देश के अन्य हिस्सों के नाम सामने आने लगे। महाभारत में पूरे उपमहाद्वीप के विभिन्न क्षेत्रों की सूची मिलती है, जिन्हें आज हम इस तरह पहचानते हैं: प्राचीन नाम (Ancient Name) वर्तमान क्षेत्र (Modern Region) काश्मीर (Kāshmīra) कश्मीर कुरुक्षेत्र (Kurukṣhetra) हरियाणा का हिस्से वंग (Vanga) बंगाल का हिस्से प्राग्ज्योतिष (Prāgjyotiṣha) असम कच्छ (Kaccha) कच्छ (गुजरात) केरल (Kerala) केरल संपूर्ण उपमहाद्वीप के लिए प्रयुक्त नाम प्राचीन भारतीय ग्रंथों की सटीक तिथि तय करना कठिन है, लेकिन विद्वानों के अनुसार ईसा पूर्व कुछ शताब्दियों (Centuries BCE) से लिखे गए ग्रंथों में पूरे उपमहाद्वीप के लिए दो मुख्य शब्दों का प्रयोग मिलता है: 1. भारतवर्ष (Bhāratavarṣha) 2. जम्बुद्वीप (Jambudvīpa) अशोक के अभिलेख का प्रमाण (250 BCE): सम्राट अशोक ने अपने शिलालेखों में पूरे भारत का वर्णन करने के लिए ‘जम्बुद्वीप’ शब्द का उपयोग किया था। उस समय के भारत में आज का बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के हिस्से भी शामिल थे। भौगोलिक परिभाषा और निरंतरता कुछ शताब्दियों बाद ‘भारत’ शब्द पूरे उपमहाद्वीप के लिए सर्वमान्य नाम बन गया। इसकी भौगोलिक सीमा को प्राचीन ग्रंथों में स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया: विदेशियों ने भारत का नाम कैसे रखा / How Foreigners Named India पारसियों (Persians) का योगदान यूनानियों (Greeks) का योगदान चीनियों (Chinese) का योगदान प्राचीन चीन के लोगों ने भी भारत के साथ गहरे संबंध बनाए और अपने ग्रंथों में भारत को अलग-अलग नामों से पुकारा: भारतीय संविधान की कड़ियाँ नामकरण की संक्षिप्त तालिका (Summary Table) विभिन्न भाषाओं में सिंधु (Sindhu) नदी के आधार पर भारत के नाम इस प्रकार बदले: भाषा / विदेशी स्रोत भारत को दिया गया नाम प्राचीन पारसी (Persian) हिन्द (Hind), हिदु (Hidu), हिन्दू (Hindu) प्राचीन ग्रीक (Greek) इन्दोई (Indoi), इन्दिके (Indike) प्राचीन चीनी (Chinese) यिन्तु (Yintu), यिन्दु (Yindu), तिएनझू (Tianzhu) बाद की अरबी व फारसी हिंदुस्तान (Hindustān) अंग्रेजी (English) व लैटिन इंडिया (India) फ्रेंच (French) इंद (Inde) CH -4 यहाँ पढ़ें

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NCERT Notes class 6 Social Science (Geography) Chapter 4: Timeline and Sources of History

 NCERT Notes Class 6 Social Science (Geography) Chapter 4: Timeline and Sources of History के अन्तर्गत इतिहास में समय का मापन कैसे किया जाता है (BCE/CE का नियम), 300,000 BCE से प्रमुख घटनाओं की समय-सीमा (Timeline), इतिहास के विभिन्न स्रोत (पुरातात्विक, साहित्यिक और आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकें), मानव इतिहास की शुरुआत तथा हिमयुग की समाप्ति के बाद पहली फसलों व स्थायी बस्तियों के उदय को बेहद संक्षिप्त, बिंदुवार और टू-द-पॉइंट (Concise Notes) तरीके से संकलित किया गया है। यह क्रिस्प नोट्स न केवल आपकी समझ को मजबूत करेंगे बल्कि यूपीएससी प्रीलिम्स और मुख्य परीक्षा (GS-1) के लिए एक अचूक क्विक-रिवीजन गाइड साबित होंगे।  हम अतीत के बारे में केसे जानते हैं ?How Do We Learn About the Past? THINK ABOUT IT अतीत की समझ और वर्तमान: हमारी सबसे पुरानी यादें हमारे व्यक्तिगत अतीत का हिस्सा हैं, लेकिन जब हम बड़े पैमाने पर अतीत यानी इतिहास को समझते हैं, तभी हमें आज के वर्तमान विश्व (Present world) के ताने-बाने को समझने में मदद मिलती है। इतिहास (History) की परिभाषा: मानव अतीत के अध्ययन को ही सरल शब्दों में इतिहास (The study of the human past) कहा जाता है। Tapestry of the Past विज्ञान हमें सिखाता है कि पृथ्वी का अपना एक बहुत ही लंबा और गहरा इतिहास रहा है, जिसमें हम इंसान (Humans) केवल सबसे हालिया और एक बेहद छोटा सा हिस्सा (Tiny part) साझा करते हैं। जीवन के विकास के इस क्रमिक इतिहास को समझने के लिए नीचे दी गई समय-सीमा (Timeline) को कंठस्थ कर लें, क्योंकि प्रीलिम्स में इसका कालानुक्रमिक क्रम (Chronological order) पूछा जा सकता है। Timeline of Life and Human Evolution समय (Time Period) जीवन के विकास के चरण (Stages of Evolution) 4.54 Billion Years Ago पृथ्वी (Earth) की प्रारंभिक उत्पत्ति या इतिहास की शुरुआत। 2.33 Billion Years Ago वायुमंडलीय ऑक्सीजन (Atmospheric oxygen) का विकास। 700 Million Years Ago प्रथम कोशिकाएं (First cells), बैक्टीरिया (Bacteria), तथा स्पंज और कवक (Sponges and fungi) का उद्भव। 500 Million Years Ago मछलियां (Fish), रीढ़धारी जीव (Vertebrates), शार्क (Sharks) और मूंगा (Corals) का विकास। 300 Million Years Ago उभयचर (Amphibians), सरीसृप (Reptiles), कीड़े (Insects) और डायनासोर (Dinosaurs) का काल। 100 Million Years Ago फूलों वाले पौधे और मधुमक्खियाँ (Flowers and bees)। 60 Million Years Ago पक्षी (Birds) और स्तनधारी जीव (Mammals) अस्तित्व में आए। 10,000,000 Years Ago प्राइमेट्स (Primates) का आगमन (1 करोड़ वर्ष पहले)। 1,000,000 Years Ago मानव द्वारा आग (Fire) का उपयोग/خोज (10 लाख वर्ष पहले)। 300,000 Years Ago आधुनिक मानव यानी होमो सेपियन्स (Homo sapiens) का उदय (3 लाख वर्ष पहले)। 6,500 Years Ago मानव इतिहास में लेखन (Writing) कला की शुरुआत (6500 वर्ष पहले)। Specialists Studying the Earth and Our Past पृथ्वी की सतह के नीचे छिपे रहस्यों को खोजने और हमारे अतीत को डिकोड करने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों के प्रशिक्षित वैज्ञानिक काम करते हैं, जिन्हें मुख्य रूप से चार श्रेणियों में विभाजित किया जाता है: Geologists (भूवैज्ञानिक): ये पृथ्वी की भौतिक विशेषताओं (Physical features) का गहन अध्ययन करते हैं, जिसके अंतर्गत मिट्टी, पत्थर, पहाड़ियाँ, पर्वत, नदियाँ, समुद्र और महासागर जैसे प्राकृतिक घटकों की जांच की जाती है। Palaeontologists (जीवाश्म वैज्ञानिक): इनका मुख्य कार्य लाखों वर्ष पहले पाए जाने वाले पौधों, जानवरों और शुरुआती मनुष्यों के अवशेषों का जीवाश्म (Fossils) के रूप में अध्ययन करना है। Anthropologists (मानवविज्ञानी): ये सबसे प्राचीन काल (Oldest times) से लेकर बिल्कुल आज के वर्तमान समय तक के मानव समाजों और उनकी संस्कृतियों (Human societies and cultures) के क्रमिक विकास का अध्ययन करते हैं। Archaeologists (पुरातत्वविद): ये जमीन की खुदाई (Digging) करके मनुष्यों, पौधों और जानवरों द्वारा पीछे छोड़े गए भौतिक अवशेषों के माध्यम से अतीत का विश्लेषण करते हैं। पुरातत्वविदों के अध्ययन के मुख्य स्रोत: उनके द्वारा खोजे गए औजार (Tools), बर्तन (Pots), मनके (Beads), छोटी मूर्तियां (Figurines), खिलौने, इंसानों और जानवरों की हड्डियां व दांत, जले हुए अनाज (Burnt grains), तथा पुराने घरों या ईंटों के अवशेष शामिल हैं। इतिहास में समय का मापन कैसे किया जाता है? / How Is Time Measured in History? THINK ABOUT IT समय मापन के पारंपरिक तरीके: हर संस्कृति के पास समय मापने के अपने अनूठे तरीके रहे हैं। किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति के जन्म या शासक के शासनकाल की शुरुआत जैसे बड़े आयोजनों को अक्सर एक नए युग (Era – एक विशिष्ट समय अवधि) की शुरुआत माना जाता था। कैलेंडरों का सह-अस्तित्व: वर्तमान में दुनिया भर में ग्रेगोरियन कैलेंडर (Gregorian calendar) का उपयोग किया जाता है। इसके साथ ही त्योहारों और अन्य शुभ (Auspicious – अनुकूल या भाग्यशाली) अवसरों की गणना के लिए हिंदू, मुस्लिम, यहूदी और चीनी कैलेंडर भी चलन में हैं। ईसा मसीह के जन्म का संदर्भ: पश्चिम में ईसा मसीह के पारंपरिक जन्म वर्ष को इस कैलेंडर का शुरुआती बिंदु माना गया है। AD और CE: इस बिंदु से आगे बढ़ने वाले वर्षों को पहले ‘AD’ (एनो डोमिनी) कहा जाता था, जिसे अब वैश्विक स्तर पर Common Era (CE) कहा जाता है (जैसे: भारत का स्वतंत्रता वर्ष 1947 CE)। BC und BCE: ईसा के जन्म से पहले के वर्षों की गणना पीछे की ओर की जाती है। इन्हें पहले BC (Before Christ) और अब Before Common Era (BCE) कहा जाता है (जैसे: गौतम बुद्ध का जन्म वर्ष लगभग 560 BCE है)।  LET’S EXPLORE ‘वर्ष शून्य’ (Year Zero) का अभाव: ग्रेगोरियन कैलेंडर में कोई ‘वर्ष शून्य’ नहीं होता है। वर्ष 1 BCE के तुरंत बाद वर्ष 1 CE आता है। इसी कारण 2 BCE से 2 CE के बीच केवल 3 वर्ष ही बीतते हैं। BCE और CE के बीच कुल वर्षों की गणना का नियम: एक BCE तिथि और एक CE तिथि के बीच के कुल वर्षों को जानने के लिए दोनों को जोड़कर उसमें से 1 घटाया जाता है। बुद्ध के जन्म का उदाहरण (यदि वर्तमान वर्ष 2026 CE माना जाए): 560 + 2026 – 1 = 2585 वर्ष पहले 300,000 BCE से प्रमुख घटनाओं की समय-सीमा / Timeline of Main Events Since 300,000 BCE ऐतिहासिक घटनाओं का सही कालक्रम (Chronological order) इस प्रकार है: समय (Time) प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएँ (Main Historical Events) 300,000 BCE मानव इतिहास की शुरुआत और हिमयुग (Ice Age) का काल। 40,000 BCE विश्व में रॉक आर्ट (Rock Art – शैल चित्रकला) के पहले उदाहरण।

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26 June 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf

26 June 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के इस व्यापक सारांश में हम उत्तर बंगाल की समृद्ध भवाईया लोक संगीत परंपरा और कोच राजबंशी समुदाय के इतिहास पर चर्चा करेंगे, जो आपके मुख्य परीक्षा के कला एवं संस्कृति खंड के लिए बेहद प्रासंगिक है। इसके साथ ही, विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) योजना का बजट विस्तार, भारतीय वायुसेना को स्वदेशी ‘नेत्र’ (Netra) AEW&C प्रणाली की अंतिम परिचालन मंजूरी (FOC), सामाजिक न्याय मंत्रालय का वृद्धजनों के लिए विशेष ‘शतायु’ (SHATAYU) डैशबोर्ड, वेनेजुएला में आया भीषण भूकंप और आपदा के समय अरुणाचल प्रदेश में चालू की गई इंट्रा-सर्किल रोमिंग (ICR) तकनीक जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों का गहन विश्लेषण शामिल है। सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट योजना (REPM Scheme) चर्चा में क्यों? (Why in News?) भारी उद्योग मंत्रालय (Ministry of Heavy Industries – MHI) ने REPM योजना के तहत जारी वैश्विक निविदा (Global Tender) की समय-सीमा को एक महीने के लिए बढ़ा दिया है। अब बोली जमा करने की अंतिम तिथि 29 जून 2026 से बढ़ाकर 29 जुलाई 2026 कर दी गई है। इसका मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक वैश्विक कंपनियों को इस बोली प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर देना है। इस खबर का मुख्य बैकग्राउंड (Background) REPM योजना क्या है और यह क्यों जरूरी है? (The Core Scheme) यह भारत में अपनी तरह की पहली अनूठी पहल है। इसका सीधा लक्ष्य भारत को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) क्या होते हैं? (Actionable Tech Knowledge) यह दुनिया के सबसे शक्तिशाली चुंबकों में से होते हैं। इनका उपयोग निम्नलिखित आधुनिक और रणनीतिक क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर किया जाता है: प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Prelims Facts) घटक / टर्म परीक्षा उपयोगी त्वरित तथ्य (Exam Facts) संबंधित मंत्रालय भारी उद्योग मंत्रालय (Ministry of Heavy Industries – MHI) कुल बजट (Outlay) ₹7,280 करोड़ उत्पादन क्षमता का लक्ष्य 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MTPA) प्रमुख कच्चा माल NdPr ऑक्साइड (Neodymium-Praseodymium Oxide) मुख्य अनुप्रयोग (Uses) इलेक्ट्रिक वाहन (EV), विंड टर्बाइन, डिफेंस सिस्टम, एयरोस्पेस पोर्टल का नाम सेंट्रल पब्लिक प्रोक्योरमेंट (CPP) पोर्टल (जहाँ संशोधन जारी हुआ है भवाईया लोक परंपरा (Bhawaiya Folk Tradition) चर्चा में क्यों? (Why in News?) हाल ही में भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने नई दिल्ली के उपराष्ट्रपति भवन में एक नई पुस्तक का विमोचन किया है। इस पुस्तक का नाम “संस्कृतिर रत्न भंडार: भवाईयार इतिब्रित्तो” (Sanskritir Ratna Bhandar: Bhaowaiyar Itibritto) है। यह पुस्तक भवाईया लोक परंपरा के इतिहास और उसकी यात्रा को रेखांकित करती है। मुख्य बिंदु: पुस्तक और उसके लेखक भवाईया संगीत क्या है? (What is Bhawaiya?) उपराष्ट्रपति के संबोधन के मुख्य विचार (Mains Perspective) “सांस्कृतिक आत्मविश्वास के बिना विकास अधूरा है।” — श्री सी. पी. राधाकृष्णन (उपराष्ट्रपति) प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Prelims Facts) घटक / टर्म विवरण / परीक्षा उपयोगी तथ्य भवाईया (Bhawaiya) उत्तरी बंगाल और असम का पारंपरिक लोक संगीत। कोच राजबंशी (Koch Rajbanshi) उत्तरी बंगाल और असम के क्षेत्रों से संबंधित समुदाय, जिसकी संस्कृति भवाईया संगीत से जुड़ी है। नाट्यशास्त्र (Natya Shastra) भरत मुनि द्वारा रचित ग्रंथ, जिसे कला और संगीत का प्राचीनतम प्रामाणिक स्रोत माना जाता है। सामवेद (Sama Veda) वह वेद जो मुख्य रूप से संगीत, मंत्रों और धुन से संबंधित है। महाकवि सुब्रमण्यम भारती तमिल भाषा के महान कवि और स्वतंत्रता सेनानी, जिन्होंने भारत की सांस्कृतिक एकता पर बल दिया। मिशन LiFE (Lifestyle for Environment) भारत द्वारा शुरू की गई वैश्विक पर्यावरण पहल, जिसका उल्लेख उपराष्ट्रपति ने योग के साथ किया। वेनेजुएला में भूकंप और आपदा कूटनीति (Earthquake in Venezuela) चर्चा में क्यों? (Why in News?) हाल ही में वेनेजुएला में आए भीषण भूकंप के कारण जान-माल की भारी तबाही हुई है। इस दुखद घटना पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने भारत के नागरिकों की ओर से वेनेजुएला की सरकार और वहां के लोगों के प्रति संवेदना प्रकट की है। मुख्य बिंदु: भारत का रुख और वैश्विक एकजुटता Geographical & Strategic Perspective प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Prelims Facts) घटक / टर्म परीक्षा उपयोगी त्वरित तथ्य (Exam Facts) वेनेजुएला (Venezuela) दक्षिण अमेरिकी महाद्वीप का एक देश, जिसकी राजधानी काराकास (Caracas) है। भूकंप का कारण कैरेबियन और दक्षिण अमेरिकी टेक्टोनिक प्लेट्स की आपसी हलचल। वैश्विक स्थिति यह देश ओपेक (OPEC) का संस्थापक सदस्य है और यहाँ दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार है। भारत की नीति आपदा के समय त्वरित सहायता प्रदान करना (HADR – Humanitarian Assistance and Disaster Relief)। स्वदेशी ‘नेत्र’ AEW&C प्रणाली (Indigenous ‘Netra’ AEW&C System) चर्चा में क्यों? (Why in News?) 25 जून 2026 को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने भारतीय वायुसेना (IAF) को स्वदेशी ‘नेत्र’ (Netra) एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) सिस्टम का फाइनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस (FOC) प्रमाण पत्र सौंप दिया है। यह कार्यक्रम बेंगलुरु (कर्नाटक) में वायु सेना के उप प्रमुख एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती की अध्यक्षता में आयोजित हुआ। ‘नेत्र’ (Netra) प्रणाली क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है? इसे आसान भाषा में “आसमान में उड़ती आंख और कमांड सेंटर” कहा जा सकता है। यह रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में एक मील का पत्थर है। किन संस्थाओं ने मिलकर इसे बनाया? इस कार्यक्रम की सफलता तीन स्तंभों के आपसी तालमेल (Synergy) का परिणाम है: प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Prelims Facts) घटक / टर्म परीक्षा उपयोगी त्वरित तथ्य (Exam Facts) नेत्र (NETRA) भारत का पहला स्वदेशी एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) सिस्टम। निर्माता संस्था DRDO (मुख्य रूप से सेंटर फॉर एयर बोर्न सिस्टम – CABS)। IOC और FOC वर्ष IOC (शुरुआती मंजूरी): 2017 | FOC (अंतिम परिचालन मंजूरी): 2026। महत्वपूर्ण ऑपरेशन्स बालाकोट स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर में इसका सफल उपयोग हुआ। रक्षा नेतृत्व (2026) केंद्रीय रक्षा मंत्री: श्री राजनाथ सिंह | रक्षा सचिव और DRDO अध्यक्ष: श्री राजेश कुमार सिंह। शतायु डैशबोर्ड (SHATAYU Dashboard) और वृद्धजन देखभाल चर्चा में क्यों? (Why in News?) सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने हाल ही में ‘शतायु’ (SHATAYU) डैशबोर्ड शुरू किया है। इस डैशबोर्ड को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही कुछ भ्रामक सूचनाओं के बाद मंत्रालय ने स्पष्टीकरण जारी

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NCERT Notes class 6 Social Science (Geography) Chapter 3: Landforms and Life

NCERT Notes class 6 Social Science (Geography) Chapter 3: Landforms and Life “हमारी पृथ्वी की सतह हर जगह एक जैसी नहीं है; कहीं ऊंचे बर्फ से ढके पहाड़ हैं, कहीं खनिजों से भरे पठार, तो कहीं फसलों से लहलहाते विशाल मैदान। नए NCERT पैटर्न के तहत कक्षा 6 सामाजिक विज्ञान (भूगोल) का अध्याय 3: भू-आकृतियाँ और जीवन (Landforms and Life) हमें इसी भौगोलिक और मानवीय विविधता के सफर पर ले जाता है। यह अध्याय केवल स्कूली बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि UPSC (IAS/IPS) प्रारंभिक परीक्षा के बुनियादी भूगोल (Basics of Geography) को मजबूत करने के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। भू-आकृतियाँ: सामान्य परिचय (Landforms: An Introduction) परिभाषा: भू-आकृति (Landform) हमारे ग्रह पृथ्वी की सतह पर मौजूद एक भौतिक विशेषता (Physical feature) है। निर्माण अवधि: भू-आकृतियों का आकार/निर्माण लाखों वर्षों (Millions of years) की लंबी अवधि में तय होता है। पर्यावरण और जीवन से संबंध: इन भौतिक आकृतियों का पर्यावरण (Environment) और पृथ्वी पर मौजूद जीवन के साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण व गहरा संबंध होता है। भू-आकृतियों का वर्गीकरण (Classification of Landforms) पृथ्वी की सतह पर पाई जाने वाली भू-आकृतियों को व्यापक रूप से तीन प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है: पर्वत (Mountains) पठार (Plateaus) मैदान (Plains) पारिस्थितिक एवं मानवीय विशेषताएँ: इन तीनों भू-आकृतियों में अलग-अलग प्रकार की जलवायु (Climate) पाई जाती है, जिसके कारण ये विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों (Flora) और जीवों (Fauna) के आवास स्थान हैं। यद्यपि मनुष्यों ने इन सभी भू-आकृतियों के अनुकूल खुद को ढाल (Adapt) लिया है, फिर भी दुनिया भर में विभिन्न भू-आकृतियों पर रहने वाले लोगों की संख्या (जनसंख्या घनत्व) में काफी भिन्नता पाई जाती है। भारत के संदर्भ में भू-आकृतिक विविधता (उदाहरण) यदि कोई व्यक्ति भारत के विभिन्न राज्यों के बीच सड़क मार्ग से यात्रा करता है, तो उसे परिदृश्य (Landscape) में अत्यधिक बदलाव देखने को मिलता है। गद्यांश में दिए गए यात्रा मार्ग के अनुसार तीन प्रमुख भू-आकृतिक परिवर्तन इस प्रकार देखे जा सकते हैं: छोटा नागपुर (झारखंड): यात्रा का प्रारंभिक बिंदु, जो अपनी विशिष्ट भू-आकृति (पठारी क्षेत्र) को प्रदर्शित करता है। प्रयागराज (उत्तर प्रदेश): यात्रा का मध्यवर्ती बिंदु, जो मैदानी भू-आकृति को दर्शाता है। अल्मोड़ा (उत्तराखंड): यात्रा का अंतिम बिंदु, जो पर्वतीय भू-आकृति का प्रतिनिधित्व करता है। पारिभाषिक शब्दावली: तुंगता/ऊंचाई (Altitude) अर्थ: समुद्र तल (Sea level) के ऊपर किसी भी वस्तु या भौगोलिक पिंड की ऊर्ध्वाधर ऊंचाई को ‘अल्टीट्यूड’ (Altitude) कहा जाता है। प्रमुख उदाहरण: किसी पर्वत (Mountain) की समुद्र तल से ऊंचाई। उड़ान के दौरान किसी पक्षी या हवाई जहाज (Plane) की ऊंचाई। अंतरिक्ष में चक्कर लगा रहे किसी उपग्रह (Satellite) की समुद्र तल से ऊंचाई। पर्वत (Mountains) भौतिक विशेषताएँ पर्वत (Mountains): ये ऐसी भू-आकृतियाँ हैं जो अपने आस-पास के परिदृश्य (Landscape) से काफी ऊंची होती हैं। इन्हें इनके विस्तृत आधार (Broad base), तीव्र ढाल (Steep slopes) और संकीर्ण शिखर (Narrow summit) द्वारा पहचाना जाता है। पहाड़ियाँ (Hills): पर्वतों की तुलना में कम ऊंचाई, कम तीव्र ढाल (Less steep slopes) और गोलाकार शीर्ष (Rounded tops) वाले उच्च अंचलों को पहाड़ियाँ कहा जाता है। पर्वतों पर बर्फ और नदियों का संबंध कम ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्र: यहाँ गर्मियों में बर्फ पिघलकर पानी में बदल जाती है, जो नदियों को जल प्रदान करती है (Feeds rivers)। अधिक ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्र: अत्यधिक ऊंचाई (High altitudes) पर बर्फ कभी नहीं पिघलती, जिससे पर्वत स्थायी रूप से बर्फ से ढके (Permanently snow-capped) रहते हैं। पर्वतों की आयु और भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ युवा पर्वत (Young Mountains): ऊंचे और तीखे/नुकीले शिखर वाले पर्वत (जैसे हिमालय) अपेक्षाकृत ‘युवा’ हैं। इसका अर्थ यह है कि इनका निर्माण पृथ्वी के इतिहास में हाल ही में (लाखों वर्ष पूर्व) हुआ है। हिमालय जैसे पर्वतों में उत्थान (Upliftment) और अपरदन (Erosion) की प्रक्रिया आज भी जारी है, जिसके कारण इनकी ऊंचाई अभी भी बढ़ रही है। प्राचीन पर्वत (Older Mountains): कम ऊंचे और अधिक गोलाकार पर्वत या पहाड़ियाँ (जैसे अरावली पर्वतमाला) बहुत पुरानी हैं। समय के साथ अपरदन (Erosion) की निरंतर प्रक्रिया ने इन्हें गोलाकार आकार दे दिया है। विश्व की प्रमुख पर्वत श्रृंखलाएँ और चोटियाँ संसार के अधिकांश पर्वत समूहों या श्रृंखलाओं (Mountain ranges) में व्यवस्थित हैं, जो हजारों किलोमीटर तक फैली हुई हैं। प्रमुख श्रृंखलाएं और चोटियां निम्नलिखित हैं: पर्वत चोटी (Mountain Peak) पर्वत श्रृंखला (Range) भौगोलिक अवस्थिति / मुख्य विशेषता माउंट एवरेस्ट (Mount Everest) हिमालय (Himalayas) – एशिया तिब्बत (चीन) और नेपाल के बीच; विश्व की सर्वोच्च चोटियों में से एक। कांचनजंगा (Kanchenjunga) हिमालय (Himalayas) – एशिया नेपाल और भारत के सिक्किम राज्य के बीच स्थित। माउंट अकोंकागुआ (Mount Aconcagua) एंडीज (Andes) – दक्षिण अमेरिका एंडीज पर्वतमाला की सबसे ऊंची चोटी। मोंट ब्लांक (Mont Blanc) आल्प्स (Alps) – पश्चिमी यूरोप आल्प्स पर्वतमाला का सबसे ऊंचा पर्वत। माउंट किलिमंजारो (Mount Kilimanjaro) — (कोई श्रृंखला नहीं) पूर्वी अफ्रीका में स्थित एक एकाकी पर्वत (Isolated mountain) जो किसी श्रृंखला का हिस्सा नहीं है। अनामुडी (Anamudi / Anai Peak) — दक्षिण भारत का सबसे ऊंचा पर्वत (केरल में स्थित)। पारिभाषिक शब्दावली (पर्वतीय पारिस्थितिकी) पर्वतीय वन (Montane forest): एक विशेष प्रकार के वन जो केवल पर्वतीय क्षेत्रों में उगते हैं। मॉस (Moss): बिना फूल या वास्तविक जड़ों (True roots) वाला एक छोटा हरा पौधा, जो अक्सर गद्देदार आवरण (Cushion-like cover) के रूप में फैलता है। लाइकेन (Lichen): पौधे जैसा दिखने वाला एक जीव (Plant-like organism) जो सामान्यतः चट्टानों, दीवारों या पेड़ों से चिपका रहता है। वर्षण (Precipitation) और बर्फ (Snow) वर्षण (Precipitation) की परिभाषा: वायुमंडल से किसी भी रूप में पानी का पृथ्वी की सतह तक पहुँचना वर्षण कहलाता है। वर्षा (Rain), बर्फ (Snow) और ओले (Hail) वर्षण के सबसे सामान्य रूप हैं। बर्फ और ओले: ये दोनों पानी के ठोस रूप (Solid state) में होने वाले वर्षण हैं। भारत के अधिकांश हिस्सों में वर्षण मुख्य रूप से बारिश और ओलों के रूप में होता है, लेकिन अत्यधिक ऊंचाई वाले ठंडे क्षेत्रों (जैसे हिमालयी क्षेत्र: कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश) में यह बर्फबारी (Snowfall) के रूप में होता है। पर्वतीय पर्यावरण (Mountain Environment) पर्वतीय वन (Montane Forest): पर्वतीय ढालों पर एक विशेष प्रकार के वन पाए जाते हैं जिन्हें ‘मोंटेन वन’ या पर्वतीय वन कहा जाता है। शंकुधारी वृक्ष (Conifer Trees): इन वनों में मुख्य रूप से शंकुधारी वृक्ष पाए जाते हैं। प्रमुख उदाहरण: चीड़ (Pine), फर (Fir),

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New NCERT Notes class 11 Geography Chapter-2: पृथ्वी की उत्पति और विकास PDF

New NCERT Notes class 11 Geography Chapter-2: The Origin and Evolution of the Earth PDF के अंतर्गत हम ब्रह्मांड की उत्पति से लेकर पृथ्वी की उत्त्पति और जीवन विकास को विस्तृत रूप में समझेंगे। पृथ्वी और ब्रह्मांड की उत्पत्ति (The Origin and Evolution of the Earth) ये सिद्धांत मुख्य रूप से दो श्रेणियों में विभाजित हैं: प्रारंभिक सिद्धांत (पृथ्वी और सौरमंडल पर केंद्रित) तथा आधुनिक सिद्धांत (ब्रह्मांड पर केंद्रित)। 1. प्रारंभिक सिद्धांत (Early Theories): पृथ्वी की उत्पत्ति प्रारंभिक दौर में दार्शनिकों और वैज्ञानिकों ने केवल पृथ्वी और ग्रहों की उत्पत्ति को केंद्र में रखकर अपने सिद्धांत प्रस्तुत किए। क. निहारिका परिकल्पना (Nebular Hypothesis) प्रतिपादक: जर्मन दार्शनिक इमैनुएल कांट (Immanuel Kant) ने इस संबंध में प्रारंभिक तर्क दिए। संशोधन: 1796 में गणितज्ञ लाप्लास (Laplace) द्वारा इसका संशोधन किया गया। मुख्य बिंदु: इस परिकल्पना के अनुसार, ग्रहों का निर्माण एक घूर्णन करते हुए (rotating) धीमे और युवा सूर्य से संबंधित मलबे या पदार्थ के बादलों से हुआ है। ख. संशोधित निहारिका परिकल्पना (1950) संशोधनकर्ता: रूस के ओटो श्मिट (Otto Schmidt) और जर्मनी के कार्ल वीज़ास्कर (Carl Weizascar)। मुख्य बिंदु: इनके अनुसार, सूर्य एक ‘सौर निहारिका’ (Solar Nebula) से घिरा हुआ था, जिसमें मुख्य रूप से हाइड्रोजन, हीलियम और धूलकण शामिल थे। इन कणों के बीच घर्षण और टकराव (Friction and Collision) के कारण एक तश्तरीनुमा (Disk-shaped) बादल का निर्माण हुआ। अंततः, अभिवृद्धि की प्रक्रिया (Process of Accretion) के माध्यम से ग्रहों का निर्माण हुआ। 2. आधुनिक सिद्धांत (Modern Theories): ब्रह्मांड की उत्पत्ति आधुनिक समय में वैज्ञानिकों ने केवल पृथ्वी तक सीमित न रहकर पूरे ब्रह्मांड की उत्पत्ति के प्रश्नों को सुलझाने का प्रयास किया। क. बिग बैंग सिद्धांत (Big Bang Theory) इसे ‘विस्तारित ब्रह्मांड परिकल्पना’ (Expanding Universe Hypothesis) भी कहा जाता है। यह वर्तमान में ब्रह्मांड की उत्पत्ति का सबसे लोकप्रिय और स्वीकृत सिद्धांत है। प्रमाण: 1920 में एडविन हबल (Edwin Hubble) ने प्रमाण दिए कि ब्रह्मांड का निरंतर विस्तार हो रहा है और समय के साथ आकाशगंगाएँ (Galaxies) एक-दूसरे से दूर जा रही हैं। गुब्बारे का उदाहरण (आंशिक सत्य): यदि एक गुब्बारे पर निशान लगाकर उसे फुलाया जाए, तो निशान एक-दूसरे से दूर जाते हैं। ठीक इसी तरह आकाशगंगाओं के बीच की दूरी भी बढ़ रही है। हालाँकि, गुब्बारे के विपरीत, वास्तविक प्रेक्षणों (Observations) के अनुसार स्वयं आकाशगंगाओं का विस्तार नहीं हो रहा है, केवल उनके बीच के अंतरिक्ष (Space) का विस्तार हो रहा है। बिग बैंग की प्रमुख अवस्थाएँ (Stages): प्रारंभिक अवस्था (विलक्षणता/Singularity): शुरुआत में ब्रह्मांड का निर्माण करने वाला संपूर्ण पदार्थ एक ही स्थान पर “एक छोटे गोले” (Singular Atom) के रूप में स्थित था। इसका आयतन अत्यंत सूक्ष्म (Unimaginably small), जबकि तापमान और घनत्व अनंत (Infinite) था। महाविस्फोट और विस्तार: इस छोटे गोले में एक भीषण विस्फोट (Big Bang) हुआ, जिससे अत्यधिक तीव्र गति से विस्तार हुआ। यह घटना वर्तमान से 13.7 बिलियन (अरब) वर्ष पूर्व हुई थी। यह विस्तार आज भी जारी है। पदार्थ का निर्माण: विस्फोट के कुछ सेकंड के भीतर ही अत्यधिक तीव्र विस्तार हुआ, जिसके बाद विस्तार की गति धीमी हो गई। इस प्रक्रिया में कुछ ऊर्जा (Energy) पदार्थ (Matter) में परिवर्तित हो गई। प्रथम परमाणु का निर्माण: बिग बैंग की घटना के पहले 3 मिनट के भीतर पहले परमाणु का निर्माण शुरू हुआ। ब्रह्मांड का पारदर्शी होना: बिग बैंग के 3,00,000 वर्ष के भीतर तापमान गिरकर 4,500 K (केल्विन) तक आ गया और परमाण्विक पदार्थ (Atomic Matter) का उदय हुआ, जिससे ब्रह्मांड पारदर्शी (Transparent) हो गया। ख. स्थिर अवस्था संकल्पना (Steady State Concept) प्रतिपादक: यह हॉयल (Hoyle) द्वारा प्रस्तुत एक वैकल्पिक अवधारणा थी। मुख्य बिंदु: इसके अनुसार ब्रह्मांड समय के किसी भी मोड़ पर (भूत, वर्तमान या भविष्य में) हमेशा एक समान (Roughly the same) ही रहता है। वर्तमान स्थिति: विस्तारित ब्रह्मांड (Expanding Universe) के पक्ष में अधिक वैज्ञानिक साक्ष्य मिलने के कारण, वर्तमान वैज्ञानिक समुदाय स्थिर अवस्था संकल्पना के स्थान पर बिग बैंग सिद्धांत को प्राथमिकता देता है। PIB News Analysis तारों का निर्माण (The Star Formation) आरंभिक कारक (घनत्व में भिन्नता): प्रारंभिक ब्रह्मांड में पदार्थ (Matter) और ऊर्जा (Energy) का वितरण समान नहीं था। घनत्व में मौजूद इस प्रारंभिक अंतर के कारण गुरुत्वाकर्षण बलों (Gravitational forces) में असमानता पैदा हुई। आकाशगंगाओं (Galaxies) का आधार: गुरुत्वाकर्षण में अंतर के कारण पदार्थ एक दूसरे की ओर आकर्षित होकर एकत्रित होने लगा, जिसने आकाशगंगाओं के विकास का आधार तैयार किया। आकाशगंगा (Galaxy) की विशेषताएँ: एक आकाशगंगा में बड़ी संख्या में तारे होते हैं। इनका विस्तार हजारों प्रकाश-वर्ष (Light-years) की विशाल दूरी में होता है। एक व्यक्तिगत आकाशगंगा का व्यास (Diameter) 80,000 से 150,000 प्रकाश-वर्ष के बीच होता है। तारों के निर्माण की प्रक्रिया: निहारिका (Nebula) का निर्माण: आकाशगंगा की शुरुआत हाइड्रोजन गैस के एक बहुत बड़े बादल के संचय (Accumulation) से होती है, जिसे ‘निहारिका’ कहा जाता है। गैस के झुंड (Clumps): समय के साथ इस बढ़ती हुई निहारिका के भीतर गैस के स्थानीयकृत झुंड (Localised clumps) विकसित होने लगते हैं। तारों का जन्म: ये झुंड निरंतर बढ़ते हुए और अधिक घने गैसीय पिंडों में बदल जाते हैं, जिससे अंततः तारों का निर्माण होता है। समय: माना जाता है कि तारों का निर्माण लगभग 5 से 6 बिलियन (अरब) वर्ष पूर्व हुआ था। प्रकाश-वर्ष (Light Year) का वैज्ञानिक मापन परिभाषा: प्रकाश-वर्ष दूरी का माप है, न कि समय का। प्रकाश की गति: प्रकाश की गति 3,00,000 किमी प्रति सेकंड होती है। इस गति से प्रकाश द्वारा एक वर्ष में तय की गई कुल दूरी को एक प्रकाश-वर्ष कहा जाता है। गणितीय मान: 1 प्रकाश-वर्ष = 9.4607 × 1012 किमी। पृथ्वी और सूर्य की दूरी: सूर्य और पृथ्वी के बीच की औसत दूरी 14,95,98,000 किमी है। प्रकाश-समय (Light-time) के संदर्भ में, यह दूरी 8.311 मिनट के बराबर है। ग्रहों का निर्माण (Formation of Planets) ग्रहों के विकास की प्रक्रिया को निम्नलिखित तीन मुख्य अवस्थाओं (Stages) में समझा जा सकता है: 1.प्रथम चरण: कोर और घूर्णन डिस्क का निर्माण: गैसीय कोर विकास: तारे निहारिका के भीतर गैस के स्थानीयकृत झुंड होते हैं। इन झुंडों के भीतर काम करने वाले आंतरिक गुरुत्वाकर्षण बल के कारण गैस के बादल के केंद्र में एक ‘कोर’ (Core) का निर्माण होता है। इसके बाद, इस गैसीय कोर के चारों ओर गैस और धूलकणों की एक विशाल घूर्णन करती हुई डिस्क (Rotating

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25 June 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf

आज का 25 June 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi यूपीएससी (UPSC) परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों को समेटे हुए है। इसमें सतत विकास के लिए क्लीन कोल टेक्नोलॉजी और अर्बन रिवर मैनेजमेंट प्लान (URMP), प्रशासन में सुधार हेतु ‘VIP कल्चर इन इंडिया’ पुस्तक विमोचन, आर्थिक संकेतकों में सेवा उत्पादन सूचकांक (ISP), तथा युवाओं और कृषि को वैश्विक मंच देने वाले यूथ को:लैब चैलेंज व ‘भारती’ (BHARATI) कार्यक्रम शामिल हैं। VIP कल्चर इन इंडिया (पुस्तक विमोचन और नागरिक-केंद्रित शासन) चर्चा में क्यों? (Why in News?) हाल ही में भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने उपराष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में “VIP Culture in India: Power, Privilege and the Distance from Democracy” नामक पुस्तक का विमोचन किया। यह पुस्तक भारतीय लोकतंत्र और सार्वजनिक जीवन में ‘वीआईपी संस्कृति’ के प्रभावों की पड़ताल करती है। मुख्य बिंदु पुस्तक के बारे में और उसके संदर्भ लोकतंत्र बनाम वीआईपी संस्कृति (Vice-President’s Observations) नागरिक-प्रथम शासन (Citizen-First Governance) के उदाहरण उपराष्ट्रपति ने वर्तमान सरकार द्वारा वीआईपी संस्कृति को समाप्त करने के लिए उठाए गए कदमों और उदाहरणों का उल्लेख किया: क्लीन कोल टेक्नोलॉजी और कोल गैसीफिकेशन (BRICS Side Event) चर्चा में क्यों? (Why in News?) हाल ही में कोयला मंत्रालय (Ministry of Coal) ने ‘क्लीन कोल टेक्नोलॉजी’ (Clean Coal Technologies) पर एक BRICS साइड इवेंट का आयोजन किया, जिसका मुख्य फोकस कोल गैसीफिकेशन (Coal Gasification – कोयला गैसीकरण) पर था। इस कार्यक्रम में भारत सहित रूस, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के ब्रिक्स प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया। मुख्य बिंदु व तकनीकी तथ्य कोल गैसीकरण क्या है और इसका महत्व? भारत सरकार का लक्ष्य और नीतिगत प्रयास चुनौतियाँ (Challenges in India) प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Prelims Facts) अर्बन रिवर मैनेजमेंट प्लान (URMPs) और गंगा बेसिन शहर चर्चा में क्यों? (Why in News?) हाल ही में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स (NIUA) के सहयोग से नदी-केंद्रित शहरी नियोजन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इसके तहत पहले चरण में 13 शहरों के लिए अर्बन रिवर मैनेजमेंट प्लान (URMPs – शहरी नदी प्रबंधन योजना) पूरे कर लिए गए हैं। अब इसका विस्तार गंगा बेसिन के 63 शहरों (प्रथम चरण में 27 और द्वितीय चरण में 33 नए शहर) तक किया जा रहा है। मुख्य बिंदु पृष्ठभूमि और दृष्टिकोण URMP फ्रेमवर्क के तीन मुख्य स्तंभ और 10-सूत्रीय एजेंडा यह योजना तीन मुख्य स्तंभों—पर्यावरणीय, आर्थिक और सामाजिक पर टिकी है। इसके 10-सूत्रीय एजेंडे में निम्नलिखित शामिल हैं: राज्यों के अनुसार प्रमुख रणनीतियाँ और केस स्टडीज यह योजना उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार लागू की जा रही है: राज्य शामिल शहर (प्रमुख) मुख्य फोकस क्षेत्र व नवीन पहलें उत्तराखंड हल्द्वानी-काठगोदाम, रामनगर, ऋषिकेश • रामनगर: कोसी नदी को कॉर्बेट इको-टूरिज्म कॉरिडोर से जोड़ना (एवियन पार्क और वॉच टॉवर)।• ऋषिकेश: हिमालयी शहरों में पर्यावरण, सीवरेज अपग्रेड और अध्यात्म का सह-अस्तित्व। उत्तर प्रदेश गोरखपुर, शाहजाहनपुर, बिजनौर, प्रयागराज • गोरखपुर: बाढ़ से निपटने के लिए ‘ब्लू-ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर’ (स्पंज पार्क, बायोस्वैल्स)।• शाहजाहनपुर: “मेरी नदी, मेरा शहर” जन अभियान।• प्रयागराज: नदियों को “लिविंग हेरिटेज कॉरिडोर” के रूप में विकसित करना। बिहार बक्सर, छपरा, गया • छपरा: बाढ़ और नदी के बदलते मार्ग (Morphology) के लिए फ्लडप्लेन ज़ोनिंग।• गया: फाल्गु नदी के हाइड्रो-इकोलॉजी को बहाल करने के लिए भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge)। कानपुर पायलट प्रोजेक्ट और जमीनी क्रियान्वयन योजनाओं को केवल कागजों तक सीमित न रखकर जमीन पर उतारने के लिए प्रदर्शन परियोजनाएं (Demonstration Projects) शुरू की गई हैं: प्रोत्साहन प्रणाली (Incentive Mechanism) यूथ को:लैब नेशनल इनोवेशन चैलेंज 2026 (सतत युवा स्टार्टअप) चर्चा में क्यों? (Why in News?) हाल ही में टी-हब (T-Hub), हैदराबाद में आयोजित एक समारोह में भारत के 6 युवा नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स को ‘यूथ को:लैब’ नेशनल इनोवेशन चैलेंज 2026 (Youth Co:Lab National Innovation Challenge 2026) के आठवें संस्करण के विजेताओं के रूप में सम्मानित किया गया है। मुख्य बिंदु यूथ को:लैब (Youth Co:Lab) क्या है? इनोवेशन चैलेंज 2026 के प्रमुख विषय (Thematic Areas) इस वर्ष देश के 28 राज्यों से आए 350 से अधिक आवेदकों में से स्टार्टअप्स को मुख्य रूप से तीन महत्वपूर्ण पर्यावरण-अनुकूल क्षेत्रों में उनके काम के लिए चुना गया: विजेता कड़े मूल्यांकन के बाद शीर्ष 6 स्टार्टअप्स को वित्तीय अनुदान (Seed Grant) और क्षमता निर्माण सहायता प्रदान की गई। भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में असमानताएँ (Distribution Challenges) नीति आयोग (AIM) के अनुसार, वर्तमान में भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में ‘वितरण की समस्या’ (Distribution Problem) है, जिसे यूथ को:लैब जैसे कार्यक्रम ठीक करने का प्रयास कर रहे हैं: प्रमुख संगठन 1. यूथ को:लैब (Youth Co:Lab) 2. अटल इनोवेशन मिशन (AIM) 3. संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) 4. सिटी फाउंडेशन (Citi Foundation) 5. टी-हब (T-Hub) सेवा उत्पादन सूचकांक (Index of Services Production – ISP) चर्चा में क्यों? (Why in News?) सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) जुलाई 2026 में एक नया व्यापक आर्थिक संकेतक— सेवा उत्पादन सूचकांक (Index of Services Production – ISP) लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। यह सूचकांक सेवा क्षेत्र (Services Sector) में अल्पकालिक विकास और बदलावों को मापने का काम करेगा। मुख्य बिंदु व आर्थिक तथ्य ISP क्या है और इसकी आवश्यकता क्यों है? संस्थागत ढांचा और क्रियान्वयन टाइमलाइन कवरेज और डेटा स्रोत (सकारात्मक व नकारात्मक सूची) ISP मुख्य रूप से तीन प्रमुख डेटा स्रोतों— प्रशासनिक डेटा, GST डेटा और ASISSE पर निर्भर करेगा। कार्यप्रणाली: संकेतक और डिफ्लेटर (Deflator) चूंकि सेवाएं अमूर्त (Intangible) होती हैं, इसलिए उनके उत्पादन को मापना जटिल होता है: प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Prelims Facts) भारती (BHARATI) कार्यक्रम और कृषि-खाद्य निर्यात चर्चा में क्यों? (Why in News?) हाल ही में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत संचालित कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने अपने प्रमुख निर्यात त्वरण कार्यक्रम ‘भारती’ (BHARATI) के पहले बैच (First Cohort) का सफलतापूर्वक समापन किया है। मुख्य बिंदु भारती (BHARATI) कार्यक्रम क्या है? पहले बैच (Inaugural Cohort) की विशेषताएं कार्यक्रम के तहत दर्ज की गई प्रमुख निर्यात सफलताएं (Case Studies) कार्यक्रम शुरू होने के मात्र 3 महीनों के भीतर भारतीय स्टार्टअप्स और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs/FPCs) ने वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं: प्रारंभिक व मुख्य परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Prelims & Mains Facts) 24 June 2026 PIB

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24 June 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf 

24 June 2026 PIB Summary for UPSC प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विकास को समाहित करता है। आज के प्रमुख घटनाक्रमों में भारत के ‘क्रिटिकल मिनरल मिशन’ के तहत रणनीतिक खनिज ब्लॉकों की सफल नीलामी, वस्त्र मंत्रालय द्वारा कपड़ा निर्यात को 2030 तक $100 बिलियन पहुंचाने का रोडमैप, और IEPFA द्वारा लावारिस वित्तीय संपत्तियों को अनलॉक करने की नई पहल शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, INCOIS द्वारा जारी भारत का पहला विशेष ‘एल नीनो बुलेटिन’ हमारी ब्लू इकोनॉमी और तटीय सुरक्षा के लिए नए नीतिगत आयाम प्रस्तुत करता है। INCOIS द्वारा पहला एल नीनो बुलेटिन जारी: भारतीय समुद्री क्षेत्र पर प्रभाव चर्चा में क्यों? (Why in News?) 22 जून 2026 को संसद सदस्य श्री कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी द्वारा INCOIS का पहला विशेष एल नीनो बुलेटिन जारी किया गया। इस एडवाइजरी का मुख्य उद्देश्य चालू एल नीनो (El Niño) इवेंट के कारण भारत के समुद्री क्षेत्रों और तटीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों के प्रति सचेत करना है। मुख्य चेतावनी: वर्तमान एल नीनो नवंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच अपने चरम (Peak) पर होगा, जिसके प्रभावस्वरूप हिंद महासागर में समुद्र की सतह का तापमान (SST) अप्रैल/मई 2027 तक सामान्य से अधिक बना रहेगा। समुद्री क्षेत्रों पर एल नीनो का प्रभाव (Impacts of El Niño) बुलेटिन के अनुसार, उत्तर हिंद महासागर (अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों) का समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र आगामी महीनों में, विशेष रूप से मार्च-मई 2027 के दौरान, भारी थर्मल स्ट्रेस (तापीय तनाव) से गुजरेगा। 24 June 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf  क) मरीन इकोसिस्टम और मत्स्य पालन पर प्रभाव ख) तटीय और समुद्री स्थिति (Sea State Indicator) समुद्री परिस्थितियों को समझने के लिए नीचे दी गई तालिका को देखें: क्षेत्र / तट संभावित समुद्री स्थिति (Sea State) आर्थिक और सुरक्षा प्रभाव बंगाल की खाड़ी / पूर्वी तट अत्यधिक अशांत (Rough) मानसून तटीय क्षरण (Coastal Erosion) और बाढ़/जलभराव का खतरा अधिक। अरब सागर / पश्चिमी तट सामान्य से अधिक शांत (Calmer) समुद्री ऑपरेटरों के लिए बेहतर वर्किंग विंडो; तटीय क्षरण का कम खतर INCOIS के बारे में (About INCOIS) VOC पोर्ट बना हरित समुद्री विकास का मॉडल: कार्बन उत्सर्जन में 45% की कमी चर्चा में क्यों? (Why in News?) 23 जून 2026 को केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट अथॉरिटी (VOCPA – तूतीकोरिन, तमिलनाडु) में हरित ऊर्जा, डिजिटल नवाचार और सामाजिक बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई दूरगामी परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित किया। इस अवसर पर पोर्ट की पहली ‘सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट’ जारी की गई, जिसमें बताया गया कि बंदरगाह ने अपने नेट कार्बन उत्सर्जन में 45% की ऐतिहासिक कमी दर्ज की है। इसके अतिरिक्त, स्वच्छ ऊर्जा और कम कार्बन वाले ऑपरेशन्स को सफलतापूर्वक अपनाने के कारण इसे आधिकारिक तौर पर ‘स्कोप-2 एमिशन फ्री पोर्ट’ (Scope-2 Emission Free Port) के रूप में मान्यता दी गई है, जो भारतीय समुद्री क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर है। मुख्य आकर्षण और उपलब्धियां (Key Highlights & Achievements) VOC पोर्ट ने पिछले चार वर्षों के भीतर पर्यावरण, तकनीक और समाज के मोर्चे पर व्यापक बदलाव किए हैं, जिन्हें नीचे वर्गीकृत किया गया है: क) पर्यावरण और हरित ऊर्जा संक्रमण (Green Energy Transition) ख) डिजिटल और सामाजिक बुनियादी ढांचा (Digital & Social Infrastructure) 24 June 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf  VOC पोर्ट (VOCPA at a Glance) विशेषता विवरण अवस्थिति (Location) तूतीकोरिन (Thoothukudi), तमिलनाडु (पूर्वी तट)। प्रकृति (Nature) यह भारत के 12 प्रमुख बंदरगाहों (Major Ports) में से एक है और पूरी तरह एक कृत्रिम बंदरगाह (Artificial Port) है। रणनीतिक महत्व मन्नार की खाड़ी में स्थित होने के कारण यह पूर्व-पश्चिम अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों के अत्यंत निकट है। भारत का ‘क्रिटिकल मिनरल मिशन’ तेज: 56 महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉकों और 11 अन्वेषण लाइसेंसों की सफल नीलामी चर्चा में क्यों? (Why in News?) 23 जून 2026 को खान मंत्रालय (Ministry of Mines) ने भारत की खनिज सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की। केंद्र सरकार द्वारा आयोजित सातवें दौर (Seventh Tranche) की नीलामी के तहत 10 नए क्रिटिकल और रणनीतिक खनिज ब्लॉकों को सफलतापूर्वक नीलाम किया गया है। इसके साथ ही, देश में अब तक सफलतापूर्वक नीलाम किए जा चुके महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉकों की कुल संख्या बढ़कर 56 हो गई है। इसके अलावा, अन्वेषण पारिस्थितिकी तंत्र (Exploration Ecosystem) को गति देने के लिए अन्वेषण लाइसेंस (Exploration Licence – EL) के दूसरे दौर के तहत 11 ब्लॉकों की नीलामी भी पूरी कर ली गई है। मुख्य विशेषताएं और भौगोलिक विस्तार (Key Highlights) खनिज क्षेत्र में किए गए इन हालिया सुधारों और नीलामियों के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं: क) महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉक (Critical Mineral Blocks) ख) अन्वेषण लाइसेंस (EL) फ्रेमवर्क का विस्तार महत्वपूर्ण खनिज: रणनीतिक उपयोग (Critical Minerals & Strategic Sectors) महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals) प्रमुख रणनीतिक अनुप्रयोग (Strategic Applications) दुर्लभ मृदा तत्व (REE) और वेनेडियम इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उपकरण, उन्नत विनिर्माण (Advanced Manufacturing)। ग्रेफाइट और टाइटेनियम इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बैटरी, स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियां, एयरोस्पेस। रॉक फॉस्फेट और ग्लौकोनाइट कृषि क्षेत्र (उर्वरक उत्पादन) और औद्योगिक रसायन। वस्त्र मंत्रालय द्वारा “ग्लोबल मार्केट्स के लिए टेक्सटाइल” पर विभागीय शिखर सम्मेलन का आयोजन चर्चा में क्यों? (Why in News?) 23 जून 2026 को वस्त्र मंत्रालय (Ministry of Textiles) ने नई दिल्ली में दो दिवसीय विभागीय शिखर सम्मेलन का उद्घाटन किया, जिसका मुख्य विषय “Textiles for Global Markets: Strategy for Achieving USD 100 Billion Exports by 2030” है। यह सम्मेलन कैबिनेट सचिवालय की ‘विभागीय शिखर सम्मेलन’ पहल के तहत आयोजित किया जा रहा है। इसका प्राथमिक उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग को मजबूत करके भारत के कपड़ा निर्यात को वर्तमान के लगभग 37 बिलियन डॉलर से बढ़ाकर 2030 तक 100 बिलियन डॉलर करना है। शिखर सम्मेलन के मुख्य बिंदु और रणनीतिक स्तंभ (Key Highlights & Strategies) यह शिखर सम्मेलन 36 राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों और लगभग 200 जिला-स्तरीय परामर्शों के बाद आयोजित किया गया है, जिसके तहत 36 राज्य निर्यात कार्य योजना (SEAPs) और 200 जिला निर्यात कार्य योजना (DEAPs) तैयार की गई हैं। सम्मेलन की रणनीतियों को तीन मुख्य स्तंभों में विभाजित किया गया है: क) पीएम का ‘5F’ विजन (The 5F Vision) यह पूरा रोडमैप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 5F दृष्टिकोण पर आधारित है:

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23 June 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf

23 June 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के इस अंक में भारत की बहुआयामी उपलब्धियों का सार है। इसमें UNCTAD 2025 के अनुसार भारत का वैश्विक जहाज पुनर्चक्रण (HKC) में शीर्ष स्थान, न्याय तक पहुँच के लिए ‘दिशा 2.0’ व अनुच्छेद 39A का विश्लेषण, राखीगढ़ी के मानव कंकालों पर AnSI का शोध और भारत के उभरते प्रौद्योगिकी (AI, सेमीकंडक्टर, क्वांटम) इकोसिस्टम के नवीनतम डेटा को शामिल किया गया है। भारत बना दुनिया का नंबर-1 शिप रीसाइक्लिंग देश: UNCTAD रिपोर्ट चर्चा में क्यों है? संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (UNCTAD) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत वर्ष 2025 में दुनिया का शीर्ष जहाज पुनर्चक्रण (Ship Recycling) देश बन गया है। भारत ने अपने ‘मैरिटाइम इंडिया विज़न (MIV) 2030’ के लक्ष्य को तय समय से 5 साल पहले ही हासिल कर लिया है। मुख्य आंकड़े पैरामीटर वर्ष 2024 वर्ष 2025 विकास / प्रभाव वैश्विक हिस्सेदारी 30.1% 35.4% दुनिया में सबसे ज्यादा रीसाइक्लिंग वॉल्यूम 1.86 मिलियन GT 2.99 मिलियन GT लगभग 60% की भारी वृद्धि भविष्य की संभावना (BIMCO) – – अगले दशक में भारत हर साल 500-600 जहाजों को रीसायकल करेगा। सरकार की 5 प्रमुख पहलें भारत को इस मुकाम तक पहुँचाने में सरकार की इन रणनीतिक पहलों का सबसे बड़ा हाथ रहा है: हांगकांग कन्वेंशन (HKC) हांगकांग कन्वेंशन (Hong Kong Convention – HKC) जहाजों को रीसायकल (यानी पुराने जहाजों को तोड़ने और उनके पार्ट्स का दोबारा इस्तेमाल करने) से जुड़ा एक अंतरराष्ट्रीय समझौता (Global Treaty) है। इसे 2009 में इंटरनेशनल मैरिटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) द्वारा अपनाया गया था, और यह 26 जून 2025 से पूरी दुनिया में कानूनी रूप से लागू हो चुका है। मुख्य उद्देश्य जहाजों को तोड़ना दुनिया के सबसे खतरनाक कामों में से एक है। पुराने जहाजों में एस्बेस्टस, भारी धातुएं (Heavy Metals) और कई तरह के जहरीले रसायन होते हैं। इसका उद्देश्य दो चीजों को सुरक्षित करना है: भारत दुनिया का सबसे बड़ा शिप रीसाइक्लिंग हब है (गुजरात का अलंग-सोसैया यार्ड दुनिया का सबसे बड़ा जहाज तोड़ने वाला यार्ड है)। भारत ने 2019 में इस कन्वेंशन की पुष्टि (Ratify) की थी। सर्कुलर इकोनॉमी (Circular Economy) और ब्लू इकोनॉमी: जहाजों को तोड़कर जो स्टील और अन्य कीमती धातुएं निकलती हैं, उन्हें रीसायकल करके दोबारा इस्तेमाल किया जाता है। इससे नए खनन (Mining) की जरूरत कम होती है, पर्यावरण बचता है, और तटीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होता है। आगे की राह (Way Forward) नंबर-1 बनने के बाद अब भारत के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं जिन पर काम करना होगा: दिशा 2.0 (DISHA 2.0): न्याय तक समग्र पहुँच के लिए केंद्रीय योजना को मंजूरी चर्चा में क्यों? (Why in News?) हाल ही में केंद्रीय कानून और न्याय मंत्रालय ने केंद्रीय क्षेत्र की योजना ‘डिजाइनिंग इनोवेटिव सॉल्यूशंस फॉर होलिस्टिक एक्सेस टू जस्टिस (DISHA)’ के पुनर्गठित और अपग्रेड संस्करण ‘DISHA 2.0’ को अगले 5 वर्षों के लिए मंजूरी दे दी है। योजना के मुख्य तथ्य 23 June 2026 PIB Summary for UPSC DISHA 2.0 के 4 प्रमुख घटक (Four Core Components) पहले इस योजना में 3 घटक थे, लेकिन DISHA 2.0 में एक नया तकनीकी घटक जोड़ा गया है। घटक (Component) मुख्य कार्य और लक्ष्य तकनीक/पहुँच 1. टेली-लॉ (Tele-Law) मुकदमों से पहले मुफ्त कानूनी सलाह देना। देश के 36 राज्यों/UTs के 784 जिलों में 2,50,000 कॉमन सर्विस सेंटर्स (CSCs) का नेटवर्क। आकांक्षी ब्लॉकों में ‘न्याय सहायक’ घर-घर जाकर मदद करेंगे। 2. न्याय बंधु (Nyaya Bandhu) वकीलों और लॉ स्टूडेंट्स में मुफ्त कानूनी सहायता (Pro-Bono) की संस्कृति को बढ़ावा देना। कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 12 के तहत पात्र लोगों को मुफ्त अदालती प्रतिनिधित्व देना और लॉ कॉलेजों में ‘प्रो-बोनो क्लब’ बनाना। 3. कानूनी साक्षरता और जागरूकता (LLLAP) मंत्रालयों, गैर-सरकारी संगठनों (CSOs) और लॉ यूनिवर्सिटीज के साथ मिलकर आम जनता में कानूनी जागरूकता फैलाना। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से देशव्यापी अभियान चलाना। 4. विधि-संजीवनी (VIDHI-Sanjeevani)(नया घटक) पूरे कार्यक्रम की निगरानी और डेटा-संचालित निर्णय लेने के लिए एक सेंट्रलाइज्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म। ‘भाषिणी’ (BHASHINI) के सहयोग से विकसित एआई-संचालित बहुभाषी ‘न्याय सेतु’ (Nyaya Setu) चैटबॉट को शामिल किया गया है, जो कानूनी सवालों के तुरंत जवाब देगा। संवैधानिक और वैश्विक जुड़ाव यह योजना केवल एक डिजिटल पोर्टल नहीं है, बल्कि यह हमारे देश के बड़े विज़न्स को पूरा करती है: 1. संवैधानिक जनादेश (Constitutional Mandate): यह भारतीय संविधान की प्रस्तावना (सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक न्याय), अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता), अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) और विशेष रूप से अनुच्छेद 39A (सभी के लिए समान न्याय और मुफ्त कानूनी सहायता) को जमीन पर उतारती है। 2. ईज ऑफ जस्टिस (Ease of Justice): प्रधानमंत्री के विज़न के अनुसार, ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘ईज ऑफ लिविंग’ तब तक अधूरे हैं जब तक देश के गरीब से गरीब नागरिक को ‘ईज ऑफ जस्टिस’ (आसानी से न्याय) न मिले। 3. वैश्विक लक्ष्य (SDG-16): यह संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य-16 (SDG-16: शांति, न्याय और मजबूत संस्थाएं) और भारत के ‘विकसित भारत @ 2047’ के संकल्प को सीधा समर्थन देती है। पुराना ट्रैक रिकॉर्ड (DISHA 1.0: 2021-26) अनुच्छेद 39A (Article 39A): समान न्याय और मुफ्त कानूनी सहायता यह अनुच्छेद राज्य के नीति निदेशक तत्वों (DPSP) का हिस्सा है। इसे 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में जोड़ा गया था। नालसा (NALSA) की संगठनात्मक संरचना अनुच्छेद 39A के उद्देश्यों को कानूनी रूप देने के लिए संसद ने कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 (Legal Services Authorities Act, 1987) पास किया। इसी एक्ट के तहत 1995 में NALSA (National Legal Services Authority – राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण) का गठन हुआ। इसकी संगठनात्मक संरचना शीर्ष से लेकर जमीनी स्तर तक एक पिरामिड की तरह काम करती है: प्रमुख पद (Composition): NALSA के मुख्य कार्य (Core Functions) 23 June 2026 PIB Summary for UPSC मुफ्त कानूनी सहायता के लिए कौन पात्र है? (Section 12 of the Act) हर कोई NALSA के तहत मुफ्त वकील का दावा नहीं कर सकता। अधिनियम की धारा 12 के तहत निम्नलिखित लोग इसके पात्र हैं: राखीगढ़ी से मिले मानव कंकाल: वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए AnSI को सौंपे गए चर्चा में क्यों? (Why in News?) हाल ही में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने हरियाणा के राखीगढ़ी पुरास्थलीय उत्खनन (2025-26 सीजन) से मिले मानव कंकालों को विस्तृत वैज्ञानिक

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21 June 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi 

21 June 2026 PIB Summary for UPSC में भारत की वैश्विक सॉफ्ट पावर और पर्यावरण नीतियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम शामिल हैं। मुख्य आकर्षणों में कोलकाता में आयोजित ‘स्वस्थ आयु के लिए योग’ थीम पर आधारित 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस, जैव विविधता अधिनियम के तहत स्थानीय समुदायों को लाभ पहुंचाने वाला सफल एबीएस (ABS) फ्रेमवर्क, और पश्चिम बंगा दिवस के अवसर पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान का स्मरण प्रमुख हैं। ‘निर्भय चेतना’ अभियान (Nirbhay Chetna) यह टॉपिक UPSC Civil Services Examination के GS Paper II (Governance, Panchayati Raj Institutions) और GS Paper III (Issues Related to Women & Gender Equality) के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। चर्चा में क्यों है? हाल ही में, पंचायती राज मंत्रालय (MoPR) ने नई दिल्ली में 17-19 जून 2026 तक ‘निर्भय चेतना’ (Nirbhay Chetna) के तहत तीन दिवसीय ‘ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स’ (ToT) कार्यक्रम का आयोजन किया। यह जमीनी स्तर पर लैंगिक समानता और महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुरुषों को संवेदनशील बनाने की अपनी तरह की पहली वैश्विक पहल है। ‘निर्भय चेतना’ (Nirbhay Chetna) क्या है? यह निर्भया फंड (Nirbhaya Fund) के तहत पंचायती राज मंत्रालय की एक अनूठी राष्ट्रीय पहल है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर शासन को जेंडर-रिस्पॉन्सिव (Gender-Responsive Governance) बनाना है। ‘निर्भय रहो’ (Nirbhay Raho) पहल के तीन स्तंभ ‘निर्भय चेतना’ वास्तव में पंचायती राज मंत्रालय द्वारा 11 मार्च 2026 को शुरू की गई ‘निर्भय रहो’ व्यापक योजना का एक हिस्सा है। इस योजना के तीन प्रमुख घटक (Components) हैं: घटक का नाम मुख्य फोकस / कार्य 1. निर्भय नेत्री (Nirbhay Netri) निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों (EWRs) की क्षमता निर्माण (Capacity Building) और उन्हें कानूनी रूप से जागरूक बनाना। 2. निर्भय चेतना (Nirbhay Chetna) निर्वाचित पुरुष प्रतिनिधियों को जेंडर इक्वलिटी और महिला सुरक्षा के मुद्दों पर संवेदनशील बनाना। 3. निर्भय दृष्टि (Nirbhay Drishti) तकनीकी सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पंचायतों के रणनीतिक ग्रामीण स्थानों पर CCTV कैमरे लगाना। इस पहल के बड़े लक्ष्य (Data & Targets) मुख्य विषय और कार्यप्रणाली (Themes & Methodology) इस कार्यक्रम में केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया गया है: पश्चिम बंगा दिवस और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी यह टॉपिक UPSC Civil Services Examination के GS Paper I (Modern Indian History & Post-Independence Consolidation) और Prelims (Important Personalities) के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। चर्चा में क्यों है? 20 जून 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘पश्चिम बंगा दिवस’ (Paschimbanga Divas) के अवसर पर पश्चिम बंगाल के नागरिकों को बधाई दी। इसके साथ ही, उन्होंने भारत के एकीकरण में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के अमूल्य योगदान को याद किया। आपको बता दें कि वर्ष 2026 डॉ. मुखर्जी की 125वीं जयंती (125th Jayanti) का वर्ष भी है। पश्चिम बंगा दिवस (20 जून) का ऐतिहासिक महत्व UPSC प्रीलिम्स और मेन्स दोनों के लिए इस तारीख का बैकग्राउंड समझना जरूरी है: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और उनका योगदान डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी आधुनिक भारत के इतिहास में एक बेहद प्रभावशाली व्यक्तित्व रहे हैं। क्षेत्र महत्वपूर्ण तथ्य / योगदान जन्म एवं प्रारंभिक जीवन उनका जन्म 1901 में हुआ था (वर्ष 2026 उनकी 125वीं जयंती है)। वे कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे कम उम्र के कुलपति (Vice-Chancellor) बने थे। बंगाल विभाजन में भूमिका उन्होंने मुस्लिम लीग के पूरे बंगाल को पाकिस्तान में मिलाने के प्लान का कड़ा विरोध किया और हिंदू बहुल क्षेत्रों के लिए पश्चिम बंगाल राज्य की स्थापना सुनिश्चित की। राजनीतिक करियर वे स्वतंत्र भारत की पहली कैबिनेट (1947) में उद्योग और आपूर्ति मंत्री (Minister for Industry and Supply) बने। इस्तीफा और नई पार्टी जवाहरलाल नेहरू के साथ ‘लियाकत-नेहरू समझौते’ (1950) पर वैचारिक मतभेद के कारण उन्होंने कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद 1951 में उन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना की। जम्मू-कश्मीर मुद्दा उन्होंने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 का पुरजोर विरोध किया और ‘एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे’ का नारा दिया। पश्चिम बंगाल का भारत में योगदान अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 (International Day of Yoga) यह टॉपिक UPSC Civil Services Examination के GS Paper I (Indian Culture – Ancient Knowledge Traditions), GS Paper II (Social Sector – Health & Governance) और Prelims के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। चर्चा में क्यों है? 21 जून 2026 को दुनिया भर में 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (IDY 2026) मनाया गया। इस वर्ष का मुख्य राष्ट्रीय कार्यक्रम कोलकाता में आयोजित किया गया। 2015 में अपनी शुरुआत के बाद से, यह आयोजन अब एक वार्षिक उत्सव से आगे बढ़कर प्रिवेंटिव हेल्थकेयर (बीमारियों से बचाव वाली स्वास्थ्य प्रणाली) का दुनिया का सबसे बड़ा जन-आंदोलन बन चुका है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 की थीम (Theme) थीम: ‘स्वस्थ आयु के लिए योग’ (Yoga for Healthy Ageing) योग का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक सफर (Historical Legacy) कॉमन योग प्रोटोकॉल (Common Yoga Protocol – CYP) दुनिया भर के लोग एक साथ, एक ही लय में योग कर सकें, इसके लिए आयुष मंत्रालय (Ministry of Ayush) ने शीर्ष योग गुरुओं के साथ मिलकर इसे तैयार किया है। योग दिवस 2026 से जुड़े प्रमुख मील के पत्थर (Key Highlights) इस वर्ष योग दिवस की तैयारियों को देश की संस्कृति और वैश्विक मंच से जोड़ने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए: आयोजन / अभियान मुख्य विशेषता / स्थान मुख्य राष्ट्रीय समारोह कोलकाता (पश्चिम बंगाल) में आयोजित। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड 14 जून 2026 को एक विशेष लाइव सत्र में 4 लाख से अधिक लोगों ने एक साथ भाग लेकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया। 100 दिवसीय काउंटडाउन इसकी शुरुआत विज्ञान भवन (नई दिल्ली) से हुई। इसके बाद 75वें दिन लोनार क्रेटर (महाराष्ट्र), 50वें दिन कान्हा शांति वनम (हैदराबाद) और 25वें दिन खजुराहो के स्मारकों में योग कार्यक्रम हुए। विशेष अभियान ‘100 दिन, 100 शहर, 100 संगठन’ अभियान के जरिए योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया। स्वस्थ उम्र बढ़ने (Healthy Ageing) में योग की भूमिका उम्र बढ़ने के साथ शरीर में होने वाले बदलावों को रोकने में योग विज्ञान बेहद व्यावहारिक भूमिका निभाता है: भारत का ABS फ्रेमवर्क और जैव विविधता संरक्षण यह टॉपिक UPSC Civil Services Examination के GS Paper III (Environment & Biodiversity – Conservation, Environmental Impact Assessment) और Prelims के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। चर्चा में क्यों है? हाल ही

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