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NCERT Notes class 6 Social Science (Geography) Chapter 4: Timeline and Sources of History

 NCERT Notes Class 6 Social Science (Geography) Chapter 4: Timeline and Sources of History के अन्तर्गत इतिहास में समय का मापन कैसे किया जाता है (BCE/CE का नियम), 300,000 BCE से प्रमुख घटनाओं की समय-सीमा (Timeline), इतिहास के विभिन्न स्रोत (पुरातात्विक, साहित्यिक और आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकें), मानव इतिहास की शुरुआत तथा हिमयुग की समाप्ति के बाद पहली फसलों व स्थायी बस्तियों के उदय को बेहद संक्षिप्त, बिंदुवार और टू-द-पॉइंट (Concise Notes) तरीके से संकलित किया गया है। यह क्रिस्प नोट्स न केवल आपकी समझ को मजबूत करेंगे बल्कि यूपीएससी प्रीलिम्स और मुख्य परीक्षा (GS-1) के लिए एक अचूक क्विक-रिवीजन गाइड साबित होंगे। 

हम अतीत के बारे में केसे जानते हैं ?How Do We Learn About the Past?

THINK ABOUT IT

  • अतीत की समझ और वर्तमान: हमारी सबसे पुरानी यादें हमारे व्यक्तिगत अतीत का हिस्सा हैं, लेकिन जब हम बड़े पैमाने पर अतीत यानी इतिहास को समझते हैं, तभी हमें आज के वर्तमान विश्व (Present world) के ताने-बाने को समझने में मदद मिलती है।

  • इतिहास (History) की परिभाषा: मानव अतीत के अध्ययन को ही सरल शब्दों में इतिहास (The study of the human past) कहा जाता है।

Tapestry of the Past

विज्ञान हमें सिखाता है कि पृथ्वी का अपना एक बहुत ही लंबा और गहरा इतिहास रहा है, जिसमें हम इंसान (Humans) केवल सबसे हालिया और एक बेहद छोटा सा हिस्सा (Tiny part) साझा करते हैं। जीवन के विकास के इस क्रमिक इतिहास को समझने के लिए नीचे दी गई समय-सीमा (Timeline) को कंठस्थ कर लें, क्योंकि प्रीलिम्स में इसका कालानुक्रमिक क्रम (Chronological order) पूछा जा सकता है।

Timeline of Life and Human Evolution

समय (Time Period)जीवन के विकास के चरण (Stages of Evolution)
4.54 Billion Years Agoपृथ्वी (Earth) की प्रारंभिक उत्पत्ति या इतिहास की शुरुआत।
2.33 Billion Years Agoवायुमंडलीय ऑक्सीजन (Atmospheric oxygen) का विकास।
700 Million Years Agoप्रथम कोशिकाएं (First cells), बैक्टीरिया (Bacteria), तथा स्पंज और कवक (Sponges and fungi) का उद्भव।
500 Million Years Agoमछलियां (Fish), रीढ़धारी जीव (Vertebrates), शार्क (Sharks) और मूंगा (Corals) का विकास।
300 Million Years Agoउभयचर (Amphibians), सरीसृप (Reptiles), कीड़े (Insects) और डायनासोर (Dinosaurs) का काल।
100 Million Years Agoफूलों वाले पौधे और मधुमक्खियाँ (Flowers and bees)।
60 Million Years Agoपक्षी (Birds) और स्तनधारी जीव (Mammals) अस्तित्व में आए।
10,000,000 Years Agoप्राइमेट्स (Primates) का आगमन (1 करोड़ वर्ष पहले)।
1,000,000 Years Agoमानव द्वारा आग (Fire) का उपयोग/خोज (10 लाख वर्ष पहले)।
300,000 Years Agoआधुनिक मानव यानी होमो सेपियन्स (Homo sapiens) का उदय (3 लाख वर्ष पहले)।
6,500 Years Agoमानव इतिहास में लेखन (Writing) कला की शुरुआत (6500 वर्ष पहले)।

Specialists Studying the Earth and Our Past

पृथ्वी की सतह के नीचे छिपे रहस्यों को खोजने और हमारे अतीत को डिकोड करने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों के प्रशिक्षित वैज्ञानिक काम करते हैं, जिन्हें मुख्य रूप से चार श्रेणियों में विभाजित किया जाता है:

  • Geologists (भूवैज्ञानिक): ये पृथ्वी की भौतिक विशेषताओं (Physical features) का गहन अध्ययन करते हैं, जिसके अंतर्गत मिट्टी, पत्थर, पहाड़ियाँ, पर्वत, नदियाँ, समुद्र और महासागर जैसे प्राकृतिक घटकों की जांच की जाती है।

  • Palaeontologists (जीवाश्म वैज्ञानिक): इनका मुख्य कार्य लाखों वर्ष पहले पाए जाने वाले पौधों, जानवरों और शुरुआती मनुष्यों के अवशेषों का जीवाश्म (Fossils) के रूप में अध्ययन करना है।

  • Anthropologists (मानवविज्ञानी): ये सबसे प्राचीन काल (Oldest times) से लेकर बिल्कुल आज के वर्तमान समय तक के मानव समाजों और उनकी संस्कृतियों (Human societies and cultures) के क्रमिक विकास का अध्ययन करते हैं।

  • Archaeologists (पुरातत्वविद): ये जमीन की खुदाई (Digging) करके मनुष्यों, पौधों और जानवरों द्वारा पीछे छोड़े गए भौतिक अवशेषों के माध्यम से अतीत का विश्लेषण करते हैं।

पुरातत्वविदों के अध्ययन के मुख्य स्रोत: उनके द्वारा खोजे गए औजार (Tools), बर्तन (Pots), मनके (Beads), छोटी मूर्तियां (Figurines), खिलौने, इंसानों और जानवरों की हड्डियां व दांत, जले हुए अनाज (Burnt grains), तथा पुराने घरों या ईंटों के अवशेष शामिल हैं।

इतिहास में समय का मापन कैसे किया जाता है? / How Is Time Measured in History?

THINK ABOUT IT

  • समय मापन के पारंपरिक तरीके: हर संस्कृति के पास समय मापने के अपने अनूठे तरीके रहे हैं। किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति के जन्म या शासक के शासनकाल की शुरुआत जैसे बड़े आयोजनों को अक्सर एक नए युग (Era – एक विशिष्ट समय अवधि) की शुरुआत माना जाता था।

  • कैलेंडरों का सह-अस्तित्व: वर्तमान में दुनिया भर में ग्रेगोरियन कैलेंडर (Gregorian calendar) का उपयोग किया जाता है। इसके साथ ही त्योहारों और अन्य शुभ (Auspicious – अनुकूल या भाग्यशाली) अवसरों की गणना के लिए हिंदू, मुस्लिम, यहूदी और चीनी कैलेंडर भी चलन में हैं।

  • ईसा मसीह के जन्म का संदर्भ: पश्चिम में ईसा मसीह के पारंपरिक जन्म वर्ष को इस कैलेंडर का शुरुआती बिंदु माना गया है।

    • AD और CE: इस बिंदु से आगे बढ़ने वाले वर्षों को पहले ‘AD’ (एनो डोमिनी) कहा जाता था, जिसे अब वैश्विक स्तर पर Common Era (CE) कहा जाता है (जैसे: भारत का स्वतंत्रता वर्ष 1947 CE)।

    • BC und BCE: ईसा के जन्म से पहले के वर्षों की गणना पीछे की ओर की जाती है। इन्हें पहले BC (Before Christ) और अब Before Common Era (BCE) कहा जाता है (जैसे: गौतम बुद्ध का जन्म वर्ष लगभग 560 BCE है)।

 LET’S EXPLORE

  • ‘वर्ष शून्य’ (Year Zero) का अभाव: ग्रेगोरियन कैलेंडर में कोई ‘वर्ष शून्य’ नहीं होता है। वर्ष 1 BCE के तुरंत बाद वर्ष 1 CE आता है। इसी कारण 2 BCE से 2 CE के बीच केवल 3 वर्ष ही बीतते हैं।

  • BCE और CE के बीच कुल वर्षों की गणना का नियम: एक BCE तिथि और एक CE तिथि के बीच के कुल वर्षों को जानने के लिए दोनों को जोड़कर उसमें से 1 घटाया जाता है।

    • बुद्ध के जन्म का उदाहरण (यदि वर्तमान वर्ष 2026 CE माना जाए):

      560 + 2026 – 1 = 2585 वर्ष पहले

300,000 BCE से प्रमुख घटनाओं की समय-सीमा / Timeline of Main Events Since 300,000 BCE

ऐतिहासिक घटनाओं का सही कालक्रम (Chronological order) इस प्रकार है:

समय (Time)प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएँ (Main Historical Events)
300,000 BCEमानव इतिहास की शुरुआत और हिमयुग (Ice Age) का काल।
40,000 BCEविश्व में रॉक आर्ट (Rock Art – शैल चित्रकला) के पहले उदाहरण।
14,000 BCEहिमयुग (Ice Age) की निरंतरता।
12,000 BCEअंतिम हिमयुग की समाप्ति (End of last ice age)।
10,000 BCEपहली मानव बस्तियाँ और कृषि की शुरुआत (Beginning of agriculture)।
8,000 BCEभारतीय उपमहाद्वीप में मिट्टी के बर्तन बनाने की तकनीक (Pottery technology)।
6,000 BCEतांबा धातु कर्म (Copper metallurgy) की शुरुआत।
4,000 BCEमेसोपोटामिया में दुनिया के पहले शहर और सिंधु-सरस्वती सभ्यता (Indus-Sarasvatī civilisation) का उद्भव।
560 BCEगौतम बुद्ध का जन्म (Birth of the Buddha)।
2000 BCE के बादसम्राट अशोक का काल।
1 CE / 1 BCEईसा मसीह का जन्म (Birth of Jesus)।
2000 CE – वर्तमानआधुनिक काल (हम यहाँ हैं)।

नोट: टाइमलाइन में बिंदुवार या टूटी हुई रेखा (Dotted portion) छोड़ी गई लंबी अवधि को दर्शाती है। टाइमलाइन घटनाओं के सटीक क्रम को समझने में मदद करती है, जैसे बुद्ध का जन्म ईसा से पहले हुआ था।

लंबी अवधियों को समझने के लिए इतिहास में दो महत्वपूर्ण शब्दों का प्रयोग किया जाता है:

  1. शताब्दी (Century): यह 100 वर्षों की अवधि होती है। CE में इसकी गणना वर्ष 1 CE से शुरू होती है (जैसे: 21वीं सदी वर्ष 2001 से 2100 CE तक है)। BCE में गणना 1 BCE से पीछे की ओर होती है (जैसे: तीसरी शताब्दी BCE में वर्ष 300 BCE से 201 BCE शामिल होंगे)।

  2. सहस्राब्दी (Millennium): यह 1,000 वर्षों की अवधि होती है। वर्तमान में हम तीसरी सहस्राब्दी (3rd millennium CE) में हैं जो 2001 CE से 3000 CE तक चलेगी। इसी तरह 1st millennium BCE में वर्ष 1 BCE से 1000 BCE तक का समय शामिल था। (अंग्रेजी में इसका बहुवचन ‘millenniums’ या ‘millennia’ दोनों सही है)।

LET’S EXPLORE

  • खगोलीय आधार: भारत में पारंपरिक कैलेंडर सूर्य और चंद्रमा की गतियों (positions of the sun and the moon) पर आधारित होते हैं।

  • पंचांग (Pañchāngas): यह तालिकाओं (tables) की एक ऐसी पुस्तक है जिसमें प्रत्येक महीने के दिनों के साथ-साथ महत्वपूर्ण खगोलीय डेटा (Astronomical data) दर्ज होता है।

  • उपयोगिता: पंचांग का उपयोग आज भी भारत में सूर्य ग्रहण, चंद्र ग्रहण, सूर्योदय और सूर्यास्त के सटीक समय की भविष्यवाणी करने, मौसम के पूर्वानुमान और त्योहारों के समय निर्धारण के लिए व्यापक रूप से किया जाता है।

ग्लोसरी फैक्ट्स (Glossary Facts):

  • जीवाश्म (Fossils): मिट्टी या चट्टानों की परतों के भीतर सुरक्षित पाए जाने वाले पौधों, जानवरों या पैरों के निशानों के अवशेष (Impressions)।

  • लीप वर्ष का नियम (Gregorian calendar): प्रत्येक 4 वर्ष में एक लीप वर्ष (366 दिन) होता है। सामान्यतः शताब्दी वर्ष (जैसे 1800, 1900) लीप वर्ष नहीं होते, वे केवल तभी लीप वर्ष होते हैं जब वे 400 के गुणज (multiples) हों। इसीलिए 1800 और 1900 लीप वर्ष नहीं थे, लेकिन वर्ष 2000 एक लीप वर्ष था।

इतिहास के स्रोत क्या हैं? / What Are the Sources of History?

THINK ABOUT IT

  • अतीत के सुराग: हमारे घरों में मिलने वाले पुराने सिक्के, किताबें, कपड़े, गहने या पुराने बर्तन अपने आप में एक कहानी छिपाए होते हैं।

  • इतिहास एक पहेली (Jigsaw Puzzle): इतिहास की कड़ियों को विभिन्न स्रोतों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन याद रहे कि इस पहेली के कई हिस्से हमेशा के लिए गायब भी हो सकते हैं।

इतिहास के विभिन्न स्रोत / SOURCES OF HISTORY (Classification)

इतिहास को जानने के स्रोतों को मुख्य रूप से निम्नलिखित श्रेणियों में बांटा गया है, 

1. पुरातात्विक स्रोत / Archaeological Sources

  • उत्खनन (Excavations): टीले (Mounds), मानव, पशु और पौधों के अवशेष।

  • संरचनाएं (Structures): स्मारक (Monuments), बस्तियाँ (Habitations) और समाधान/कब्रें (Burials)।

  • अभिलेख (Inscriptions): पांडुलिपियाँ (Manuscripts) और ताम्रपत्र (Copper plates)।

2. साहित्यिक स्रोत / Literary Sources

  • भारतीय साहित्य (Indian Literature): वेद, इतिहास (Vedas and Itihasas), कविताएँ, नाटक, वैज्ञानिक एवं तकनीकी ग्रंथ, ऐतिहासिक ग्रंथ और कहानियों के संग्रह।

  • विदेशी विवरण (Foreign Accounts): यात्रा वृत्तांत (Travelogues) और ऐतिहासिक वृत्तांत (Historical chronicles)।

3. मौखिक स्रोत / Oral Sources

  • लोककथाएँ (Folklore) और वंशानुगत/वंशावली संबंधी रिकॉर्ड (Genealogical)।

4. कलात्मक स्रोत / Artistic Sources

  • चित्रकला (Paintings), मूर्तियाँ (Sculptures), पैनल (Panels), सिक्के, उपकरण, हथियार, मूर्तियाँ, आभूषण, मिट्टी के बर्तन (Pottery) और खिलौने।

NCERT Notes class 6 Social Science (Geography) Chapter 4: Timeline and Sources of History

इतिहास का पुनर्निर्माण और नए वैज्ञानिक आयाम / Reconstruction of History

  • इतिहासकार (Historian): वह व्यक्ति जो अतीत का अध्ययन करता है और उसके बारे में लिखता है।

  • विरोधाभासी स्रोत: जब अलग-अलग स्रोत एक जैसी जानकारी देते हैं, तो बात पुख्ता होती है। लेकिन विरोधाभास होने पर इतिहासकारों को तय करना होता है कि किस स्रोत पर अधिक भरोसा किया जाए।

  • अंतःविषय दृष्टिकोण (Interdisciplinary Approach): इतिहास को जोड़ने में केवल इतिहासकार नहीं, बल्कि कई विशेषज्ञ शामिल होते हैं:

    • Epigraphists (पुरालेखविद्): जो प्राचीन शिलालेखों/अभिलेखों का अध्ययन करते हैं।

    • Anthropologists (मानवविज्ञानी): जो मानव समाजों और उनकी संस्कृतियों को समझते हैं।

  • आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों का योगदान: पिछले 50 वर्षों में विज्ञान ने इतिहास को समझने में मदद की है:

    • प्राचीन जलवायु का अध्ययन (Ancient climates)।

    • उत्खनित सामग्रियों का रासायनिक अध्ययन (Chemical studies)।

    • जेनेटिक्स (Genetics – आनुवंशिकी): जीव विज्ञान की वह शाखा जो अध्ययन करती है कि लक्षण एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में कैसे जाते हैं। इसके अध्ययन से प्राचीन मानव के प्रवास और नस्ल की नई कड़ियाँ खुली हैं।

  • आधुनिक इतिहास के स्रोत: पिछले दो या तीन सदियों के इतिहास के लिए समाचार पत्र (Newspapers) मुख्य स्रोत हैं, जबकि हाल के दशकों के लिए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया (टीवी, इंटरनेट) भी बड़े स्रोत बन चुके हैं।

मानव इतिहास की शुरुआत / The Beginnings of Human History

LET’S EXPLORE

  • मानव की आयु: आधुनिक मानव यानी होमो सेपियन्स (Homo sapiens) पृथ्वी पर लगभग 3,000,000 (तीन लाख) वर्षों से रह रहे हैं।

  • तुलनात्मक कालखंड: यह तीन लाख वर्ष सुनने में बहुत लंबा समय लगता है, लेकिन यह पूरी पृथ्वी के विशाल इतिहास का एक बेहद छोटा सा हिस्सा (Tiny fraction) मात्र है।

प्रारंभिक मानव जीवन की विशेषताएं और चुनौतियाँ / Early Human Life & Challenges

प्रारंभिक मनुष्यों का जीवन पूरी तरह से प्रकृति पर निर्भर था। वे जीवित रहने के लिए निम्नलिखित तौर-तरीकों को अपनाते थे:

  • सामाजिक ढांचा: शुरुआती इंसान प्रकृति की चुनौतियों का सामना करने के लिए टोलियों या समूहों (Bands or groups) में मिलजुल कर रहते थे।

  • जीवन शैली (Hunters and Gatherers): वे मुख्य रूप से शिकारी और संग्राहक थे। वे भोजन के लिए शिकार करने और खाने योग्य पौधों व फलों को इकट्ठा करने पर निर्भर थे।

  • आवास: भोजन और सुरक्षा की तलाश में वे लगातार घूमते रहते थे और अस्थायी शिविरों (Temporary camps), रॉक शेल्टर (चट्टानी गुफाओं) या प्राकृतिक गुफाओं में शरण लेते थे।

  • संवाद: वे आपस में बातचीत करने के लिए ऐसी भाषाओं का उपयोग करते थे जो समय के साथ पूरी तरह खो चुकी हैं।

  • तकनीकी विकास और आग: उन्होंने आग (Fire) का उपयोग करना शुरू किया और अपने जीवन को आसान बनाने के लिए पत्थरों की कुल्हाड़ियाँ (Stone axes), ब्लेड और तीर के अग्रभाग (Arrowheads) जैसे बेहतर उपकरण बनाए।

  • प्रारंभिक कला और आभूषण: दुनिया भर की सैकड़ों गुफाओं में उनके द्वारा बनाई गई शैल चित्रकला (Rock paintings) मिलती है। इन चित्रों में सरल प्रतीकों से लेकर जानवरों और मनुष्यों के शिकार के विस्तृत दृश्य शामिल हैं। समय के साथ उन्होंने पत्थर या शंख के मनके (Beads) और जानवरों के दांतों से बने पेंडेंट जैसे सरल आभूषण बनाना और दूसरे समूहों के साथ उनका वस्तु-विनिमय (Exchange) करना भी सीखा।

पहली फसलें / The First Crops

  • जलवायु परिवर्तन और हिमयुग (Ice Age): पृथ्वी की जलवायु में लगातार बदलाव होते रहे हैं। जब अत्यधिक ठंड के कारण पृथ्वी का बड़ा हिस्सा बर्फ से ढक गया, तो उसे ‘हिमयुग’ कहा गया।

  • अंतिम हिमयुग का कालखंड: अंतिम हिमयुग लगभग 1,00,000 (एक लाख) वर्ष पहले से शुरू होकर लगभग 12,000 वर्ष पहले समाप्त हुआ था।

  • अनुकूल परिस्थितियाँ: जलवायु गर्म होने से बर्फ पिघली, नदियों में पानी बढ़ा और मनुष्यों के रहने के लिए बेहतर स्थितियाँ बनीं।

  • स्थायी जीवन और पशुपालन: अनुकूल मौसम के बाद इंसानों ने एक जगह बसना, अनाज उगाना और गाय-बैल (Cattle) व बकरी जैसे जानवरों को पालतू (Domesticated) बनाना शुरू किया।

  • नदियों के किनारे बस्तियाँ: भोजन की अधिक उपलब्धता से आबादी बढ़ी। लोग नदियों के पास इसलिए बसे क्योंकि वहाँ पानी आसानी से उपलब्ध था और वहाँ की उपजाऊ मिट्टी के कारण फसल उगाना बहुत आसान था।

(लैंगिक भूमिकाओं का विश्लेषण)

  • श्रम का विभाजन (Gender Roles): प्राचीन दृश्यों में महिला और पुरुषों को जो भूमिकाएं (जैसे पुरुषों को शिकार/खेती और महिलाओं को घर के काम में) दिखाई जाती हैं, वे हमेशा पूरी तरह सटीक नहीं होती हैं।

  • वास्तविकता: पुरातत्व संकेत देते हैं कि गुफाओं में रंग तैयार करने या पेंटिंग करने में महिलाओं ने हाथ बंटाया होगा, और खाना पकाने या बच्चों की देखभाल में पुरुषों ने भी मदद की होगी। इतिहास पढ़ते समय हमें रूढ़िवादी भूमिकाओं से इतर सोचना चाहिए।

सामाजिक जटिलता और तकनीकी विकास / Social Complexity and Technological Progress

  • सामूहिक स्वामित्व (Collective Ownership): जैसे-जैसे समुदाय बढ़े, सामाजिक ढांचा जटिल हुआ। इस शुरुआती दौर में व्यक्तिगत भूमि स्वामित्व की कोई भावना नहीं थी; ज़मीन पर सामूहिक रूप से बुआई और कटाई की जाती थी।

  • नेतृत्व: समाज की भलाई और सुरक्षा की जिम्मेदारी ‘सरदारों’ या नेताओं (Chieftains) की होती थी।

  • गाँवों से कस्बों का सफर: छोटे ठिकाने (Hamlets) धीरे-धीरे बड़े गाँवों में बदले, जिन्होंने आपस में भोजन, कपड़े और औजारों का आदान-प्रदान (Exchange) शुरू किया। संचार नेटवर्क बढ़ने से कुछ गाँव छोटे कस्बों में बदल गए।

  • तकनीकी क्रांति: इस दौर में दो बड़ी प्रौद्योगिकियां सामने आईं:

    1. मृदभांड (Pottery): अनाज रखने और खाना पकाने के लिए मिट्टी के बर्तन बनाना।

    2. धातु का उपयोग: मनुष्यों ने सबसे पहले तांबे (Copper) का उपयोग किया, और उसके काफी बाद लोहे (Iron) का। इससे टिकाऊ औजार, दैनिक वस्तुएं और आभूषण बनाना संभव हुआ।

  • अस्तित्व का संघर्ष: मानवता का यह प्रारंभिक विकास आसान नहीं था। कई बार ऐसे संकट आए जब मानव प्रजाति लुप्त होने की कगार पर थी। आज हमारा अस्तित्व उन शुरुआती इंसानों के साहस और दृढ़ता के कारण ही है।

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