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NCERT Notes Class 6 Social science (Geography) Chapter 5: India That Is Bharat

NCERT Notes Class 6 Social science (Geography) Chapter 5: India, That Is Bharat अध्याय हमारी अपनी मातृभूमि के भौगोलिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नामकरण की कड़ियों को आपस में जोड़ता है। UPSC प्रीलिम्स और मुख्य परीक्षा (GS-1) के नजरिए से यह समझना बेहद जरूरी है कि जिस भूमि को आज हम आधुनिक सीमाओं में ‘भारत’ के रूप में जानते हैं, उसका अतीत कितना गतिशील और विविधता से भरा रहा है। हम जानेंगे कि कैसे ऋग्वेद के ‘सप्त सिंधु’ से शुरू होकर, पुराणों के ‘भारतवर्ष’ और सम्राट अशोक के ‘जम्बुद्वीप’ से गुजरते हुए, प्राचीन पारसियों, यूनानियों और चीनियों के भाषाई रूपांतरण से ‘हिंदू’, ‘इंडिया’ और ‘यिन्दु’ जैसे वैश्विक नामों की उत्पत्ति हुई।

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नाम की उत्पत्ति और ऐतिहासिक स्रोत / Names of India


सप्त सिंधु और ऋग्वैदिक काल

  • ऋग्वेद (Ṛig Veda): यह भारत का सबसे प्राचीन ग्रंथ है जो कई हजार वर्ष पुराना है।
  • सप्त सिंधव (Sapta Sindhava): ऋग्वेद में उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र को ‘सप्त सिंधव’ कहा गया है, जिसका अर्थ है ‘सात नदियों की भूमि’
  • सिंधु (Sindhu): ‘सिंधव’ शब्द ‘सिंधु’ से आया है, जो मुख्य रूप से सिंधु नदी (Indus River) या सामान्य रूप से किसी नदी के लिए इस्तेमाल होता था।
NCERT Notes Class 6 Social science (Geography) Chapter 5: India That Is Bharat

महाभारत में वर्णित क्षेत्रीय नाम

संपूर्ण उपमहाद्वीप के लिए प्रयुक्त नाम

1. भारतवर्ष (Bhāratavarṣha)

2. जम्बुद्वीप (Jambudvīpa)

भौगोलिक परिभाषा और निरंतरता

कुछ शताब्दियों बाद ‘भारत’ शब्द पूरे उपमहाद्वीप के लिए सर्वमान्य नाम बन गया। इसकी भौगोलिक सीमा को प्राचीन ग्रंथों में स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया:

पारसियों (Persians) का योगदान

यूनानियों (Greeks) का योगदान

चीनियों (Chinese) का योगदान

भारतीय संविधान की कड़ियाँ

नामकरण की संक्षिप्त तालिका (Summary Table)

CH -4 यहाँ पढ़ें

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