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NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 11: From Barter to Money

NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 11: From Barter to Money के अंतर्गत प्राचीन काल की वस्तु विनिमय प्रणाली (Barter System) की मूलभूत सीमाओं—जैसे ‘आवश्यकताओं का दोहरा संयोग’ (Double Coincidence of Wants)—को स्पष्ट करता है और किस प्रकार धातु के सिक्कों, कागजी नोटों और आधुनिक चेक प्रणाली के आगमन ने व्यापार को सुगम बनाया। तथा आधुनिक बैंकिंग व्यवस्था की कार्यप्रणाली, ऋण (Credit) की भूमिका, वर्तमान समय में यूपीआई (UPI), क्रेडिट/डेबिट कार्ड और डिजिटल करेंसी के बढ़ते प्रभाव के पीछे छिपे आर्थिक सिद्धांतों को सरल उदाहरणों के माध्यम से समजाता है। हमें मुद्रा की आवश्यकता क्यों है? (Why Do we Need Money?) वस्तु विनिमय प्रणाली की प्रमुख समस्याएँ वस्तु विनिमय की सीमाएँ vs. मुद्रा का समाधान वस्तु विनिमय की समस्या मुद्रा (Money) द्वारा समाधान आवश्यकताओं का दोहरा संयोग मुद्रा विनिमय का सर्वस्वीकार्य माध्यम (Medium of Exchange) है। मूल्य के मानक का अभाव मुद्रा मूल्य की एक समान इकाई (Unit of Account) प्रदान करती है। विभाज्यता की कमी मुद्रा को छोटी इकाइयों (रुपये, पैसे) में विभाजित किया जा सकता है। वहनीयता की समस्या कागज़ी नोट या डिजिटल मनी को कहीं भी ले जाना बेहद आसान है। टिकाऊपन की कमी मुद्रा का लंबे समय तक मूल्य ह्रास के बिना संचय (Store of Value) संभव है। आधुनिक समय में वस्तु विनिमय के उदाहरण मुद्रा के मूलभूत कार्य (Basic Functions of Money) ज़रूरत आविष्कार की जननी है। व्यापार बढ़ा। दूरियां भी बढ़ीं। ऐसे में वस्तु विनिमय प्रणाली फेल हो गई। इसी ज़रूरत ने ‘मुद्रा’ (Money) को जन्म दिया। मुद्रा के चार प्रमुख कार्य हैं: मुद्रा के कार्य मुद्रा का कार्य (Function) व्यावहारिक अर्थ (Practical Meaning) विनिमय का माध्यम खरीदने-बेचने का सर्वमान्य और आसान तरीका। मूल्य का संचय भविष्य की ज़रूरतों के लिए धन की बचत। मूल्य का मापक वस्तुओं और सेवाओं की कीमत तय करना। स्थगित भुगतान का मान कर्ज लेने और भविष्य में उसे चुकाने का आधार। मुद्रा की यात्रा (The Journey of Money) मुद्रा का विकास मानव सभ्यता और व्यापार की प्रगति को दर्शाता है। प्राचीन भारतीय सिक्कों की शब्दावली व विशेषताएँ भाषाई व पुरातात्विक साक्ष्य रुपया प्रतीक (Rupee Symbol) सिक्का निर्माण: प्राचीन vs. आधुनिक पैमाना प्राचीन काल के सिक्के आधुनिक सिक्के धातु (Material) सोना, चाँदी, ताँबा व प्राकृतिक मिश्रधातु लोहे की मिश्रधातु (लोहा, क्रोमियम, कार्बन) निर्माण तकनीक आहत (Punch-marked) / ठप्पा आधुनिक टंकण मशीनें (Modern Mints) अंकित प्रतीक राजा-रानी, प्रकृति (पहाड़, वृक्ष), देवी-देवता राष्ट्र चिन्ह, मूल्य (मूल्यवर्ग), द्विभाषी पाठ (हिंदी/अंग्रेजी), स्मारक प्रतीक जारीकर्ता प्राचीन राजा/साम्राज्य भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) / भारत सरकार कागज़ी मुद्रा (Paper Money) सिक्कों के अत्यधिक उपयोग से उन्हें एक जगह से दूसरी जगह ले जाना (Carrying) और संभालकर रखना (Storing) मुश्किल हो गया। इस समस्या के समाधान के रूप में कागज़ी मुद्रा की शुरुआत हुई। शब्दावली सांस्कृतिक व तकनीकी विशेषताएँ मुद्रा निर्गमन प्राधिकरण मुद्रा के नए रूप प्रौद्योगिकी और बैंकिंग सुधारों के विकास के साथ मुद्रा के भौतिक स्वरूप के अलावा अमूर्त (Intangible) रूप सामने आए हैं। मुद्रा के रूपों की तुलना आधार भौतिक मुद्रा डिजिटल मुद्रा (Intangible Money) स्वरूप सिक्के और कागज़ी नोट इलेक्ट्रॉनिक अंक / डिजिटल डेटा हस्तांतरण विधि हाथों-हाथ (Physical exchange) यूपीआई, कार्ड, नेट बैंकिंग, क्यूआर कोड सुविधा बड़े लेन-देन में भारी और असुरक्षित त्वरित, सुरक्षित और प्रत्यक्ष खाता अंतरण NCERT Class 7, Social Science Ch-10 यहाँ पढ़ें:-

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NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 10: The Constitution of India-An Introduction

NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 10: The Constitution of India-An Introduction के अंतर्गत संविधान सभा (Constituent Assembly) के गठन, देश के महान नेताओं के दूरदर्शी दृष्टिकोण और संविधान की प्रस्तावना (Preamble) में निहित मुख्य आदर्शों—जैसे न्याय, स्वतंत्रता, समता, बंधुता, धर्मनिरपेक्षता और संप्रभुता—की व्याख्या प्रस्तुत करता है। यह नागरिकों को प्राप्त मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights), उनके मौलिक कर्तव्यों (Fundamental Duties) और सत्ता के दुरुपयोग को रोकने के लिए शक्तियों के पृथक्करण (Separation of Powers) तथा कानून के शासन की अनिवार्यता को बेहद सरल माध्यम से स्पष्ट करता है। संविधान क्या है? (What Is a Constitution?) संविधान की आवश्यकता क्यों है? भारतीय संविधान के मुख्य आँकड़े संविधान के मुख्य घटक संविधान के घटक मुख्य उद्देश्य व कार्य राजनीतिक प्रणाली व संरचना सरकार के स्वरूप और गठन के तरीके का निर्धारण करना अंगों के कार्य विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की शक्तियों का बँटवारा अधिकार एवं कर्तव्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा और कर्तव्यों का स्पष्टीकरण समाज के मूल्य व आदर्श न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुता जैसे सिद्धांतों को लागू करना भारतीय संविधान का निर्माण (Writing the Constitution of India) डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा का वक्तव्य हमारा संविधान कैसे तैयार हुआ? (How was our Constitution developed?) मसौदा समिति (Drafting Committee) संविधान सभा के महत्वपूर्ण तथ्य पहलू ऐतिहासिक तथ्य / आँकड़े गठन वर्ष 1946 (प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा चयनित) सदस्य संख्या (कुल / विभाजन बाद) 389 से घटकर 299 महिला सदस्यों की संख्या 15 संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. बी.आर. आंबेडकर अंगीकृत व लागू होने की तिथियाँ 26 नवंबर 1949 (अंगीकृत) / 26 जनवरी 1950 (लागू) भारतीय संविधान को आकार देने और प्रभावित करने वाले कारक भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का प्रभाव भारत की सभ्यतागत विरासत और इतिहास दुनिया भर से ली गई सीख संविधान के प्रेरणा स्रोत प्रेरणा का स्रोत संविधान पर प्रभाव / शामिल किए गए प्रावधान स्वतंत्रता आंदोलन मौलिक अधिकार, वयस्क मताधिकार, केंद्र-राज्य संबंध, शक्तियों का पृथक्करण भारतीय सभ्यता व संस्कृति मौलिक कर्तव्य (राजधर्म से), ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ व ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ के मूल्य फ्रांस का संविधान स्वतंत्रता, समानता और बंधुता के आदर्श आयरलैंड का संविधान राज्य के नीति निदेशक तत्व (DPSP) अमेरिका का संविधान स्वतंत्र न्यायपालिका भारतीय संविधान की मुख्य विशेषताएँ (Key Features of the Constitution of India) सरकार के तीन अंग (Organs of Government) मौलिक अधिकार vs. नीति निदेशक तत्व (FRs vs. DPSPs) बेगम ऐज़ाज़ रसूल का वक्तव्य (22 नवंबर 1949) संविधान के मुख्य भाग वर्ग अनुच्छेद (Article) विषय / प्रावधान मौलिक अधिकार (FRs) अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता (Equality before law) अनुच्छेद 21 प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण (Protection of life and personal liberty) अनुच्छेद 21-A शिक्षा का अधिकार (Right to education) अन्य अधिकार शोषण के विरुद्ध अधिकार नीति निदेशक तत्व (DPSPs) अनुच्छेद 38 सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक न्याय की स्थापना अनुच्छेद 41 कल्याणकारी सरकार का निर्माण अनुच्छेद 44 समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) अनुच्छेद 47 पोषण, जीवन स्तर और सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार अनुच्छेद 48-A पर्यावरण, वन और वन्यजीवों का संरक्षण अनुच्छेद 49 राष्ट्रीय महत्व के स्मारक, स्थलों और वस्तुओं का संरक्षण मौलिक कर्तव्य (Fundamental Duties) संविधान एक जीवंत प्रलेख है (The Constitution is a Living Document) संवैधानिक बदलावों व न्यायिक व्याख्याओं के उदाहरण प्रस्तावना: संविधान के मार्गदर्शक मूल्य प्रस्तावना के मुख्य शब्द व उनके अर्थ प्रस्तावना का शब्द संवैधानिक अर्थ / व्याख्या हम भारत के लोग (We, the People of India) संविधान का स्रोत भारत की जनता और उसके प्रतिनिधि हैं; इसे किसी बाहरी शक्ति या राजा ने नहीं सौंपा है। संप्रभु (Sovereign) भारत आंतरिक व बाह्य मामलों में निर्णय लेने के लिए पूर्ण स्वतंत्र है; कोई बाहरी शक्ति निर्देश नहीं दे सकती। समाजवादी (Socialist) सामाजिक-आर्थिक असमानता घटाने के लिए सरकार भूमि और उद्योगों के स्वामित्व को विनियमित करती है। धर्मनिरपेक्ष (Secular) कोई आधिकारिक राज्य धर्म नहीं है; सरकार सभी धर्मों और आस्थाओं का समान आदर करती है। लोकतांत्रिक (Democratic) जनता को समान राजनीतिक अधिकार प्राप्त हैं; लोग अपने शासकों को चुनते हैं और उन्हें जवाबदेह ठहराते हैं। गणराज्य (Republic) देश का प्रमुख (राष्ट्राध्यक्ष) एक निर्वाचित व्यक्ति होता है, न कि कोई वंशानुगत पद। न्याय (Justice) जाति, धर्म व लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं; कमजोर वर्गों के कल्याण पर विशेष ध्यान। स्वतंत्रता (Liberty) विचारों, अभिव्यक्ति और विश्वास पर कोई अनुचित प्रतिबंध नहीं। समानता (Equality) कानून के समक्ष सभी समान हैं; अवसर की समानता सुनिश्चित करना और असमानता समाप्त करना। बंधुता (Fraternity) सभी नागरिक एक परिवार के सदस्य की तरह रहें; कोई किसी को नीचा न समझे। NCERT Class 7, Social Science Ch-8 यहाँ पढ़ें:-

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NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 9: From the Rulers to the Ruled: Types of Goverments

NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 9: From the Rulers to the Ruled: Types of Goverments के अंतर्गत सरकार के विभिन्न रूपों—जैसे राजतंत्र (Monarchy), तानाशाही (Dictatorship), अल्पतंत्र (Oligarchy) और लोकतंत्र (Democracy)—की मूलभूत विशेषताओं, उनकी कार्यप्रणाली और उनके बीच के अंतर को स्पष्ट करता है। इसके साथ ही, यह लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था के आधारभूत स्तंभों, जैसे प्रतिनिधि चुनने का अधिकार (सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार), कानून का शासन (Rule of Law), उत्तरदायित्व, और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा में संविधान की भूमिका पर गहराई से प्रकाश डालता है। सरकार क्या है? इसके कार्य क्या हैं? सरकार के प्रमुख कार्य शासन के स्वरूप सरकार के कार्यों का त्वरित अवलोकन कार्य का क्षेत्र मुख्य उद्देश्य व्यावहारिक उदाहरण सुरक्षा व रक्षा बाह्य व आंतरिक खतरों से सुरक्षा सेना, पुलिस, सीमा सुरक्षा सामाजिक-आर्थिक विकास बुनियादी सुविधाओं का निर्माण स्कूल, अस्पताल, सड़कें, आर्थिक नीतियां अंतर्राष्ट्रीय संबंध वैश्वीकरण और कूटनीति द्विपक्षीय संधियाँ, विदेश नीति लोकतंत्र क्या है? (What is Democracy?) स्कूल का उदाहरण (प्रतिनिधित्व की समझ) समिति गठन के 3 विकल्प स्कूल प्रतिनिधि बनाम विधायक/सांसद विशेषता स्कूल छात्र प्रतिनिधि सांसद (MP) / विधायक (MLA) निर्वाचन क्षेत्र एक कक्षा या वर्ग विशाल भौगोलिक क्षेत्र (संसदीय/विधानसभा क्षेत्र) संवैधानिक शक्तियाँ सीमित (स्कूल गतिविधियों तक) व्यापक (कानून निर्माण, बजट और कार्यपालिका पर नियंत्रण) जवाबदेही सहपाठियों और प्रधानाध्यापक के प्रति संपूर्ण जनता और संविधान के प्रति सरकार के कार्य (Functions of Government) सरकार के तीन प्राथमिक कार्य लोकतंत्रीय प्रतिनिधित्व (Democratic Representation) अब्राहम लिंकन की परिभाषा सरकार के अंगों का संक्षिप्त विवरण सरकार का अंग मुख्य दायित्व संविधान विधायिका (Legislature) कानून बनाना संसद एवं राज्य विधानमंडल कार्यपालिका (Executive) कानून लागू करना राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद व नौकरशाही न्यायपालिका (Judiciary) कानून की व्याख्या व न्याय सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय व अधीनस्थ अदालतें सरकारें किस प्रकार एक-दुसरे से भिन्न होती है? (What Makes Governments Different?) सरकारों के बीच मुख्य अंतर शासन प्रणालियों का तुलनात्मक ढांचा अंतर का आधार लोकतंत्र (Democracy) धर्मतंत्र (Theocracy) राजतंत्र (Monarchy) सत्ता का स्रोत देश की जनता धार्मिक ग्रंथ व धर्मगुरु वंशानुगत अधिकार गठन का तरीका निष्पक्ष चुनाव धार्मिक नेतृत्व का चयन उत्तराधिकार नियमों का आधार लिखित संविधान धार्मिक नियम राजा/रानी के आदेश मुख्य उद्देश्य जन-कल्याण व समानता धार्मिक नियमों का पालन राजवंश या विशिष्ट वर्ग का हित विश्व में लोकतांत्रिक सरकारें (Democratic Governments around the World) लोकतंत्र के मौलिक सिद्धांत लोकतांत्रिक सरकारों के विभिन्न रूप 1. प्रत्यक्ष लोकतंत्र (Direct democracy) 2. प्रतिनिधि लोकतंत्र (Representative democracy) लोकतंत्र का विकासक्रम लोकतंत्र स्थापना वर्ष प्रतिनिधि लोकतंत्र के दो मुख्य रूप a. संसदात्मक लोकतंत्र (Parliamentary democracy) b. अध्यक्षात्मक लोकतंत्र (Presidential democracy) विभिन्‍न लोकतांत्रिक देशों की तुलना देश कार्यपालिका (Executive) विधायिका (Legislature) न्यायपालिका (Judiciary) भारत प्रधानमंत्री व मंत्रिपरिषद निचला सदन (लोकसभा) निचले सदन से अधिक शक्तिशाली स्वतंत्र (शक्तियों का पृथक्करण) USA राष्ट्रपति दोनों सदनों (सिनेट व प्रतिनिधि सभा) को समान शक्ति स्वतंत्र (शक्तियों का पृथक्करण) दक्षिण कोरिया राष्ट्रपति एकसदनीय (नेशनल असेंबली) स्वतंत्र (शक्तियों का पृथक्करण) ऑस्ट्रेलिया प्रधानमंत्री व मंत्रिपरिषद दोनों सदनों (सिनेट व प्रतिनिधि सभा) को समान शक्ति स्वतंत्र (शक्तियों का पृथक्करण) इतिहास की एक झलक (A Peek into History) प्राचीन गणराज्य (Early republics) शासन के अन्य रूप (Other Forms of Government) 1. राजतंत्र (Monarchy) 2. वर्तमान राजतंत्र 3. धर्मतंत्र (Theocracy) 4. तानाशाही (Dictatorship) 5. अल्पतंत्र (Oligarchy) शासन प्रणालियों का तुलनात्मक ढांचा शासन प्रणाली शक्ति का केंद्र निर्णय लेने का आधार प्रमुख उदाहरण गणतंत्र (Republic) निर्वाचित प्रतिनिधि संविधान व जनप्रतिनिधि भारत, प्राचीन वज्जि निरंकुश राजतंत्र राजा/सम्राट राजा का आदेश/धार्मिक नियम सऊदी अरब संवैधानिक राजतंत्र निर्वाचित संसद (नाममात्र का राजा) लिखित संविधान यूनाइटेड किंगडम (UK) धर्मतंत्र (Theocracy) धार्मिक नेता / सर्वोच्च धार्मिक पद धार्मिक ग्रंथ व नियम ईरान, वेटिकन सिटी तानाशाही (Dictatorship) एक व्यक्ति या सैन्य समूह शासक की स्वेच्छाचारिता हिटलर (जर्मनी), उत्तर कोरिया अल्पतंत्र (Oligarchy) धनी व प्रभावशाली समूह विशिष्ट समूह का हित प्राचीन ग्रीस के कुछ क्षे लोकतंत्र क्यों महत्वपूर्ण है? (Why Democracy Matters) विभिन्‍न शासन प्रणालियों की तुलना विशेषताएँ (Characteristics) लोकतंत्र (Democracy) तानाशाही (Dictatorship) निरंकुश राजतंत्र (Absolute Monarchy) अल्पतंत्र (Oligarchy) सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार हाँ (Yes) नहीं (No) नहीं (No) नहीं (No) नागरिकों में समानता हाँ (Yes) नहीं (No) नहीं (No) नहीं (No) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हाँ (Yes) नहीं (No) नहीं (No) नहीं (No) शक्तियों का पृथक्करण हाँ (Yes) नहीं (No) नहीं (No) नहीं (No) सभी नागरिकों का कल्याण व समृद्धि हाँ (Yes) नहीं (No) नहीं (No) नहीं (No) NCERT Class 7, Social Science Ch-8 यहाँ पढ़ें:-

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NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 8: How the Land Becomes Sacred

NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 8: How the Land Becomes Sacred के अंतर्गत विभिन्न धार्मिक परंपराओं (जैसे हिंदू, बौद्ध, जैन, सूफी और अन्य लोक पंथों) ने प्रकृति के विशिष्ट घटकों और ऐतिहासिक स्थलों को अपने विश्वासों के साथ जोड़कर ‘सांस्कृतिक परिदृश्य’ का निर्माण किया। इसमें तीर्थाटन की अवधारणा, पवित्र नदियों और पर्वत शिखरों के महत्व, संतों व ऋषियों के निवास स्थलों से जुड़े इतिहास और मंदिरों, स्तूपों, दरगाहों तथा मठों की स्थापना से भूमि के पवित्र बनने के कारणों को गहराई से समझाया गया है।और यह भी रेखांकित करता है कि कैसे ये पवित्र स्थल विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को आपस में जोड़कर राष्ट्रीय और सांस्कृतिक एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ‘पावनता’ क्या है? (What is ‘Sacredness’?) बाहर से आए धर्मों के पवित्र स्थल (Religions of Foreign Origin) भारत में जन्मे धर्मों के पवित्र स्थल (Indigenously Originated Religions) 1. बौद्ध धर्म 2. सिख धर्म पंडित जवाहरलाल नेहरू का कथन (1961) प्रमुख शब्दावली एवं अवधारणाएं शब्द शाब्दिक अर्थ आध्यात्मिक / व्यावहारिक महत्व श्राइन पवित्र स्थल ईश्वर, पवित्र अवशेष या संत से जुड़ा पूजा स्थल अवशेष अस्ति-धातु / अवशेष संत या आध्यात्मिक पुरुष के शरीर/वस्तु के भाग तीर्थ नदी पार करने का स्थान संसार रूपी सागर को पार करने का माध्यम तख्त सिंहासन / सत्ता केंद्र सिख धर्म में आध्यात्मिक शासन व मार्गदर्शन का केंद्र तीर्थयात्राएं (Pilgrimages) जैन परंपरा में तीर्थ प्रमुख क्षेत्रीय एवं पर्वतीय तीर्थ (Regional & Mountain Pilgrimages) अन्य पवित्र स्थल जनजातीय एवं पारिस्थितिक पवित्र स्थल जनजाति / क्षेत्र स्थान धार्मिक व सांस्कृतिक मान्यता डोंगरिया कोंध जनजाति नियम डोंगर पहाड़ी (नियमगिरि श्रेणी, ओडिशा) यह पहाड़ी उनके सर्वोच्च देवता ‘नियम राजा’ का निवास स्थान है। यहाँ पेड़ काटना सख्त मना है। सिक्किम सरकार (2000 का दशक) राज्य की पवित्र चोटियाँ, गुफाएँ, झीलें व गर्म चश्मे इन्हें किसी भी प्रकार के नुकसान से बचाने के लिए ‘पवित्र स्थल’ के रूप में अधिसूचित किया गया। टोडा जनजाति नीलगिरी पहाड़ियाँ (तमिलनाडु) पर्वतीय चोटियों, शोला वनों, आर्द्रभूमियों, विशिष्ट पत्थरों व पौधों को पवित्र मानती है। पावन भू-भाग से अवगत होना (Becoming Aware of Sacred Geography) यात्राओं का उद्देश्य एवं सांस्कृतिक एकीकरण भारत के प्रमुख पवित्र नेटवर्क नेटवर्क कुल संख्या भौगोलिक विस्तार सांस्कृतिक व आध्यात्मिक महत्व चार धाम 4 उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम भारत भारत के चारों कोनों को सांस्कृतिक रूप से जोड़ना ज्योतिर्लिंग 12 संपूर्ण भारत भगवान शिव के विशेष स्वरूपों की पूजा शक्ति पीठ 51 भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान आदि संपूर्ण उपमहाद्वीप की भूमि को देवी स्वरूप मानना पावन पारिस्थितिकी (Sacred Ecology) नदियाँ और संगम प्रयागराज और यूनेस्को विरासत कुंभ मेला नदियों और कुंभ का संक्षिप्त विवरण स्थान संबंधित नदी पौराणिक व सांस्कृतिक महत्व हरिद्वार गंगा अमृत की बूंद गिरने का स्थान, कुंभ स्थल प्रयागराज त्रिवेणी संगम (गंगा, यमुना, सरस्वती) यूनेस्को अमूर्त विरासत, कुंभ मेला नाशिक गोदावरी दक्षिण भारत का प्रमुख कुंभ स्थल उज्जैन शिप्रा कुंभ स्थल, धार्मिक व ज्योतिषीय महत्व पर्वत और वन (Mountains and Forests) वृक्ष, वन और पवित्र उपवन भारत में पवित्र उपवनों के क्षेत्रीय नाम राज्य / भाषा पवित्र उपवन का स्थानीय नाम मलयलम (केरल) कावु तमिलनाडु कोविल काडु कन्नड़ (कर्नाटक) देवरे काडु मराठी (महाराष्ट्र) देवराई खासी (मेघालय) ख्लाव क्यंतंग हिमाचल प्रदेश (हिंदी) देव वन झारखंड सरना छत्तीसगढ़ देवगुड़ी राजस्थान ओरण तंजावुर का पारिस्थितिक उदाहरण तीर्थयात्रा से व्यापार तक भारत से बाहर के पावन भू-भाग (Sacred Geography beyond India) पवित्र स्थलों का पुनरुद्धार और संरक्षण वैश्विक पवित्र भूगोल व कानूनी अधिकार देश / समुदाय स्थान / प्राकृतिक संसाधन सांस्कृतिक मान्यता एवं कानूनी स्थिति न्यूजीलैंड (माओरी) तारानाकी मौंगा पर्वत पर्वत को पूर्वज माना; कानूनन ‘जीवित मनुष्य’ का दर्जा मिला प्राचीन ग्रीस पर्वत व पवित्र उपवन प्राचीन धार्मिक व सांस्कृतिक आस्था के केंद्र नेटिव अमेरिकन संपूर्ण प्रकृति प्रकृति के साथ पवित्र व अटूट आत्मिक संबंध भारत पवित्र नदियाँ (यमुना, कावेरी आदि) धार्मिक महत्व, लेकिन वर्तमान में अत्यधिक प्रदूषण का शिकार NCERT Class 7, Social Science Ch-7

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NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 7: The Gupta Era: An Age of Tireless Creativity

NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 7: The Gupta Era: An Age of Tireless Creativity के अंतर्गत गुप्त काल के दौरान पनपी सांस्कृतिक और बौद्धिक क्रांति को विस्तार से समजाता है।तथा कालिदास जैसे महान साहित्यकारों की संस्कृत कृतियों, आर्यभट्ट और वराहमिहिर जैसे विद्वानों के गणित व खगोलशास्त्र में क्रांतिकारी योगदान, तथा अजंता की गुफा चित्रकारी व देवगढ़ के दशावतार मंदिर जैसी स्थापत्य कला की उत्कृष्ट कृतियों का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। और धातु विज्ञान (जैसे मेहरौली का लौह स्तंभ), चिकित्सा विज्ञान (चरक और सुश्रुत की परंपरा) और नालंदा जैसे महान अंतरराष्ट्रीय शिक्षण संस्थानों के विकास के पीछे छिपे वैज्ञानिक दृष्टिकोण और राजकीय संरक्षण के महत्व को भी स्पष्ट करता है। गुप्त काल: अथक सृजनशीलता का युग समकालीन राज्य और साम्राज्य (3rd to 6th Century CE) मेहरौली का लौह स्तंभ (Delhi) प्राचीन भारतीय धातु विज्ञान एक नई शक्ति का उदय (A New Power Emerges) चंद्रगुप्त प्रथम एवं गुप्त साम्राज्य की नींव योद्धा शासक (समुद्रगुप्त) अश्वमेध यज्ञ और साहित्यिक साक्ष्य मुख्य गुप्त शासक एवं उनके साक्ष्य शासक प्रमुख उपलब्धि / उपाधि मुख्य ऐतिहासिक स्रोत चंद्रगुप्त प्रथम गुप्त साम्राज्य की नींव, वैवाहिक नीतियां कुमारदेवी प्रकार के स्वर्ण सिक्के (लक्ष्मी अंकन) समुद्रगुप्त ‘धरणिवंध’ (पृथ्वी विजेता), कला प्रेमी प्रयाग प्रशस्ति (हरिषेण), वीणा वादक सिक्के, अश्वमेध सिक्के चंद्रगुप्त द्वितीय ‘विक्रमादित्य’, कला व विज्ञान का स्वर्णकाल दिल्ली का मेहरौली लौह स्तंभ, गरुड़ अभिलेख गुप्तकालीन भारतीय समाज: एक यात्री का विवरण फ़ाहियान के अनुसार गुप्तकालीन समाज एवं शासन चंडालों की स्थिति और सामाजिक विषमता फ़ाहियान का यात्रा वृत्तांत: विषय फ़ाहियान द्वारा दर्ज मुख्य तथ्य भ्रमण काल 399–414 CE (चंद्रगुप्त द्वितीय का काल) प्रशासनिक कर केवल राजकीय भूमि की उपज पर हिस्सा सामाजिक कल्याण वैश्यों द्वारा मुफ्त अस्पताल, अनाथालय व भोजन वितरण सामाजिक अंधकार चंडालों का नगर से बाहर निष्कासन व कठोर सामाजिक स्थिति गुप्त साम्राज्य की झलकियाँ (Glimpses of the Gupta Empire) शासन एवं प्रशासन (Governance and administration) नए राजा … नई उपाधियाँ समृद्ध व्यापार गुप्त प्रशासन व व्यापार: क्षेत्र मुख्य विवरण / साक्ष्य प्रशासनिक दस्तावेज़ ताम्रपत्र पर दर्ज भूमि अनुदान कूटनीतिक संबंध प्रभावती गुप्त का वाकाटक राजवंश में विवाह शाही उपाधियाँ महाराजाधिराज, सम्राट, चक्रवर्ती अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक केंद्र सोकोत्रा द्वीप (अरब सागर) – ब्राह्मी अभिलेख व बौद्ध साक्ष्य नवीन विचारों और उपलब्धियों का युग (New Ideas and Wonders: The Classical Age) आर्यभट्ट वराहमिहिर कालिदास आयुर्वेद का संकलन गुप्तकालीन महान विभूतियाँ: विद्वान क्षेत्र प्रमुख ग्रंथ / उपलब्धि आर्यभट्ट गणित व खगोलशास्त्र आर्यभटीय, पृथ्वी का घूर्णन, ग्रहण का वैज्ञानिक कारण वराहमिहिर खगोलशास्त्र व ज्ञान-विज्ञान बृहत्संहिता (मौसम, कृषि, वास्तुकला) कालिदास संस्कृत साहित्य मेघदूतम् (काव्य सौंदर्य व भौगोलिक विवरण) चरक/सुश्रुत आयुर्वेद व शल्य चिकित्सा चरक संहिता एवं सुश्रुत संहिता का अंतिम संकलन सौंदर्य की खोज (The Quest for Beauty) गुप्त साम्राज्य का पतन (The Decline of the Guptas) इसी बीच दक्षिण और उत्तर-पूर्व में 1. दक्षिण भारत: पल्लव राजवंश 2. उत्तर-पूर्व भारत: कामरूप राज्य समुद्रगुप्त की दक्षिण व उत्तर-पूर्व नीति प्रमुख गुप्तकालीन कला केंद्र एवं साक्ष्य स्थान राज्य प्रमुख कला / ऐतिहासिक साक्ष्य सारनाथ उत्तर प्रदेश बुद्ध की धातु व पत्थर की मूर्तियाँ अजंता महाराष्ट्र बोधिसत्व पद्मपाणि का चित्र, गुप्त-वाकाटक कला अहिच्छत्र उत्तर प्रदेश गंगा (मकर) और यमुना (कछुआ) की टेराकोटा मूर्तियाँ देवगढ़ उत्तर प्रदेश दशावतार मंदिर (शेषनाग पर विष्णु) कांचीपुरम तमिलनाडु पल्लवों की राजधानी, घटिका (शिक्षा केंद्र) NCERT Class 7, Social Science Ch-6 यहाँ पढ़ें:-

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NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 6: The Age of Reorganisation

NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 6: The Age of Reorganisation के अंतर्गत उत्तर-गुप्त काल से लेकर शुरुआती मध्यकालीन भारत में उत्तर, मध्य और दक्षिण भारत के प्रमुख राजवंशों के उत्थान को विस्तार से स्पष्ट करता है। तथा दक्षिण भारत के महान चोल साम्राज्य की अद्वितीय नौसेना, उनकी सुदृढ़ स्थानीय स्वशासन प्रणाली (ग्राम सभाएं), तथा पल्लव और चालुक्य राजवंशों के दौरान कला एवं द्रविड़ स्थापत्य कला (मंदिर निर्माण) के क्षेत्र में हुए अभूतपूर्व विकास का विश्लेषण और सामंतवाद (Feudalism) के विस्तार, भूमि अनुदान प्रथा और व्यापारिक श्रेणियों (Guilds) के पुनर्गठन से समाज और अर्थव्यवस्था पर पड़े प्रभावों पर भी प्रकाश डालता है। शुंगों का उत्कर्ष (Surge of the Shungas) अश्वमेध यज्ञ शुंगकालीन कला एवं वास्तुकला में योगदान शुंगकालीन योगदान क्षेत्र प्रमुख तथ्य धर्म व अनुष्ठान वैदिक पुनरुद्धार और अश्वमेध यज्ञ साहित्य व भाषा संस्कृत का प्रयोग और पतंजलि का ‘योगसूत्र’ स्थापत्य कला भरहुत स्तूप का पाषाण विस्तार (Railings) हस्तशिल्प हाथीदांत नक्काशी, टेराकोटा कला व स्वर्ण-लेपित कांस्य आभूषण सातवाहन राजवंश (The Satavahanas) व्यापार, अर्थव्यवस्था एवं नौकायन प्रौद्योगिकी सातवाहन काल में जीवन व समाज सातवाहन साम्राज्य का पतन सातवाहन राजवंश: एक नजर में पहलू मुख्य विवरण प्रमुख राजधानियाँ अमरावती और प्रतिष्ठान (पैठन) प्रसिद्ध शासक गौतमीपुत्र सातकर्णी प्रमुख अभिलेख नासिक अभिलेख (गौतमी बालश्री), नानेघाट अभिलेख (विधवा रानी) प्रमुख गुफा स्थापत्य कार्ला गुफाएं (बौद्ध), नानेघाट (व्यापारिक कर/विश्राम), पीतलखोरा (यक्ष प्रतिमा) विशेषता सिक्कों पर जहाजों के चित्र, मातृ-नाम परंपरा, कर-मुक्त भूमि दान की शुरुआत चेदियों का आगमन (Coming of the Chedis) उदयगिरि-खंडगिरि गुफाएं हाथीगुम्फा अभिलेख चेदि राजवंश व खारवेल: मुख्य बिंदु क्षेत्र मुख्य विवरण राजवंश व क्षेत्र चेदि राजवंश, कलिंग (ओडिशा) प्रसिद्ध शासक खारवेल (उपाधि: भिक्षु-राज) प्रमुख अभिलेख हाथीगुम्फा अभिलेख (ब्राह्मी लिपि) स्थापत्य उदयगिरि-खंडगिरि की शैलकृत गुफाएं (जैन धर्म) मूल विचार सर्वधर्म समभाव और सर्व-संप्रदाय संरक्षण दक्षिण में साम्राज्य और जन-जीवन (Kingdoms and Life in the South) संगम साहित्य (Sangam literature) चोल राजवंश (The Cholas) सिलप्पदिकारम: पायस की कथा कल्लणै बांध चेर राजवंश (The Cheras) पांड्य राजवंश (The Pandyas) सुदूर दक्षिण के तीन राजवंश: राजवंश राजधानी प्रमुख क्षेत्र प्रमुख पहचान / योगदान चोल पुहार / उरैयूर कावेरी डेल्टा (तमिलनाडु) राजा करिकाल, कल्लणै बांध (Grand Anicut) चेर वंजी (करूर) केरल व पश्चिमी तमिलनाडु रोमन व्यापार, मसाले व लकड़ी का निर्यात पांड्य मदुरै सुदूर दक्षिण (तमिलनाडु) मोती व्यापार, नौसेना, सिलप्पदिकारम इंडो-ग्रीक आक्रमण (Invasions of the Indo-Greeks) हेलियोडोरस स्तंभ शक वंश और शक संवत इंडो-ग्रीक और शक: मुख्य बिंदु पहलू इंडो-ग्रीक शक (Indo-Scythians) मूल स्रोत सिकंदर के यूनानी क्षत्रप मध्य एशियाई जनजाति मुख्य साक्ष्य द्विभाषी सिक्के (वासुदेव व लक्ष्मी चित्र), हेलियोडोरस स्तंभ शक संवत, शिलालेख सांस्कृतिक योगदान यूनानी-भारतीय कला व सिक्के भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर (78 CE) कुषाणों का उदय (The Emergence of the Kushanas) राजा कनिष्क कला की शैलियाँ: गांधार एवं मथुरा (Gandhara & Mathura Schools of Art) 1. गांधार कला शैली 2. मथुरा कला शैली सांस्कृतिक एवं साहित्यिक पुनर्जागरण गांधार और मथुरा कला: आधार गांधार कला मथुरा कला क्षेत्र उत्तर-पश्चिम भारत (पंजाब/अफगानिस्तान) मथुरा (उत्तर प्रदेश) मुख्य पत्थर स्लेटी शिस्ट लाल बलुआ पत्थर (Red Sandstone) शिल्प प्रभाव यूनानी-रोमन (Greco-Roman) पूर्णतः स्वदेशी (Indian) मुख्य विषय बुद्ध व बोधिसत्व की यथार्थवादी मूर्तियां बुद्ध, हिंदू देवी-देवता, यक्ष-यक्षिणी NCERT Class 7, Social Science Ch-5 यहाँ पढ़ें:-

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NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 5: The Rise of Empires

NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 5: The Rise of Empires के अंतर्गत मौर्य साम्राज्य और उसके बाद के गुप्त साम्राज्य जैसे महान राजवंशों के उत्थान और उनकी प्रशासनिक प्रणालियों पर ध्यान केंद्रित करता है। और चंद्रगुप्त मौर्य के नेतृत्व में विशाल साम्राज्य की स्थापना, कौटिल्य (चाणक्य) के ‘अर्थशास्त्र’ पर आधारित सुदृढ़ प्रशासनिक व गुप्तचर ढाँचे, और महान सम्राट अशोक की युद्ध नीति से ‘धम्म’ नीति की ओर परिवर्तन की ऐतिहासिक घटनाओं को विस्तार से समझाया गया है। तथा गुप्त काल के दौरान हुए कला, साहित्य, विज्ञान, खगोलशास्त्र और स्थापत्य कला के अभूतपूर्व विकास के कारणों को उजागर करते हुए यह स्पष्ट करता है कि क्यों इस युग को प्राचीन भारत का ‘स्वर्ण काल’ माना जाता है। साम्राज्य क्या होता है? (What is an Empire?) जागीरदार राज्य साम्राज्य की मुख्य विशेषताएँ (Features of an Empire) साम्राज्य बनाम राज्य आधार राज्य / राज्यक्षेत्र साम्राज्य (Empire) भौगोलिक आकार सीमित व स्थानीय क्षेत्र विशाल भूभाग (जिसमें कई छोटे राज्य शामिल हों) शासन प्रणाली एक राजा का सीधा नियंत्रण सम्राट के अधीन कई करद या अधीनस्थ राजा संसाधन आवश्यकता सीमित सैन्य व प्रशासनिक बल विशाल स्थायी सेना व जटिल नौकरशाही सांस्कृतिक विविधता मुख्यतः एकरूप संस्कृति विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों का समावेश व्यापार, व्यापार मार्ग और श्रेणियाँ (Trade, trade routes and guilds) श्रेणी (Guilds) प्रमुख व्यापारिक शहर और मार्ग (500 BCE के बाद) प्राचीन व्यापारिक मार्गों (उत्तरापथ और दक्षिणापथ) पर स्थित प्रमुख नगर: क्षेत्र प्रमुख शहर / व्यापारिक केंद्र उत्तर व उत्तर-पश्चिम तक्षशिला, शिबिपुर, हस्तिनापुर मध्य व मध्य-पूर्व मथुरा, श्रावस्ती, वैशाली, काशी, पाटलिपुत्र, कौशाम्बी, राजगृह, चंपा पूर्वी तट ताम्रलिप्ति, कलिंगनगर, प्राग्ज्योतिषपुर पश्चिमी तट व मध्य भारत भरुकच्छ, सोपारा, उज्जैनी, द्वारका, प्रतिष्ठान दक्षिण भारत सुवर्णगिरि, मुचिरि, कांचीपुरम, कावेरीपट्टिनम, मदुरै मगध का उदय (The Rise of Magadha) धार्मिक एवं साहित्यिक समकालीन मगध के उत्कर्ष के भौगोलिक व तकनीकी कारक नंद वंश (Nanda Dynasty) यूनानियों का आगमन (The Arrival of the Greeks) यूनानी आक्रमण का कालक्रम वर्ष ऐतिहासिक घटना 334–331 BCE सिकंदर का फारस अभियान: मैसेडोनिया के सिकंदर ने फारसी साम्राज्य को जीता। यूनानी संस्कृति का प्रसार तीन महाद्वीपों में हुआ। 327–325 BCE भारत अभियान: सिकंदर ने पंजाब में पोरस को हराया (झेलम/हाइडैस्पीज का युद्ध)। स्थानीय जनजातियों के उग्र प्रतिरोध का सामना किया। यूनानी अभिलेखों के अनुसार ‘महिलाओं ने पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर युद्ध लड़ा’। सिकंदर घायल हुआ। 325 BCE वापसी: व्यास नदी पर थक चुकी सेना के इनकार के बाद सिकंदर ने दक्षिण के तटीय मार्ग और ईरान के मरुस्थल से वापसी की। प्यास, भूख और बीमारी से सेना को भारी क्षति हुई। 324–323 BCE सिकंदर की मृत्यु: बेबीलोन में 32 वर्ष की आयु में मृत्यु। साम्राज्य उसके जनरलों और क्षत्रपों में विभाजित हो गया। शक्तिशाली मौर्य साम्राज्य (The Mighty Mauryas) कौटिल्य की कहानी (The story of Kauṭilya) चंद्रगुप्त मौर्य का उदय (The rise of Chandragupta Maurya) कौटिल्य की राज्य सम्बन्धित अवधारणा (Kauṭilya’s concept of a kingdom) कौटिल्य का सप्तांग सिद्धांत (Kauṭilya’s Saptanga) राज्य के 7 अनिवार्य अंग: नंद साम्राज्य बनाम मौर्य साम्राज्य आधार नंद साम्राज्य (Nanda Empire) मौर्य साम्राज्य (Maurya Empire) संस्थापक महापद्म नंद चंद्रगुप्त मौर्य (कौटिल्य के सहयोग से) भौगोलिक विस्तार मुख्यतः पूर्वी व उत्तरी भारत उत्तर-पश्चिम (तक्षशिला/कंधार) से दक्कन तक प्रशासनिक आधार दमनकारी कर व जनता में असंतोष कौटिल्य का अर्थशास्त्र व कल्याणकारी राज्य अवधारणा विदेश संबंध सीमित (यूनानी स्रोतों में सेना का उल्लेख) यूनानियों के साथ प्रत्यक्ष कूटनीति (मेगस्थनीज) सम्राट अशोक: शांति का मार्ग अशोक के अभिलेख जन-कल्याण, पर्यावरण संरक्षण एवं सहिष्णुता धम्म की अवधारणा) मौर्य साम्राज्य का पतन मुख्य अशोककालीन स्थल स्थल वर्तमान स्थिति पुरातात्विक महत्व गिरनार गुजरात प्रसिद्ध शिलालेख टोपरा दिल्ली (फिरोजशाह कोटला में स्थापित) स्तंभ लेख धौली ओडिशा कलिंग युद्ध से संबंधित शिलालेख कंधार अफगानिस्तान उत्तर-पश्चिम का सीमावर्ती अभिलेख मास्की कर्नाटक अशोक के नाम का प्रत्यक्ष उल्लेख मौर्य काल में जीवन (Life in the Mauryan period) सोहगौरा ताम्रपत्र अभिलेख मौर्यों के प्रमुख योगदान कला और वास्तुकला (Art and Architecture) साम्राज्यों की भंगुरता साम्राज्य एक तरफ राजनीतिक एकता और समृद्धि लाते हैं, तो दूसरी तरफ युद्ध और सैन्य बल पर टिके होने के कारण आंतरिक रूप से कमजोर भी होते हैं। पतन के मुख्य कारण: मौर्यकालीन समय-रेखा समय काल ऐतिहासिक घटना / शासक 600–500 BCE महाजनपदों का उदय और अजातशत्रु द्वारा मगध का सुदृढ़ीकरण। 400 BCE महापद्म नंद द्वारा नंद वंश की स्थापना और साम्राज्य विस्तार। 321 BCE चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा मौर्य साम्राज्य की स्थापना। 268–232 BCE सम्राट अशोक का शासनकाल (धम्म और अभिलेखों का युग)। 185 BCE मौर्य साम्राज्य का अंतिम रूप से पतन। NCERT Class 7, Social Science Ch-3 यहाँ पढ़ें:-

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NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 4: New Beginnings Cities and States

NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 4: New Beginnings Cities and States के अंतर्गत भारतीय इतिहास में गंगा घाटी के उपजाऊ मैदानों में ‘द्वितीय नगरीकरण’ का सूत्रपात हुआ। और किस प्रकार छोटे-छोटे ‘जनपद’ आपस में संगठित होकर शक्तिशाली ‘महाजनपद’ बने और कैसे मगध व वज्जि जैसे विशाल राज्यों का उदय हुआ। प्रारंभिक नगरों के स्वरूप, उनकी सुरक्षात्मक किलाबंदी, राजाओं द्वारा स्थाई सेनाओं के रख-रखाव, कर-संग्रह की नियमित व्यवस्था और आहत सिक्कों के प्रयोग से व्यापार में आई तेजी के कारणों को समजाया गया है। साथ ही, यह राजतंत्रात्मक राज्यों और वज्जि जैसे गणराज्यों की प्रशासनिक प्रणालियों के बीच के अंतर को भी विस्तार से समझाता है। प्रथम शहरीकरण का पतन और द्वितीय शहरीकरण की शुरुआत जनपद और महाजनपद खाई (सुरक्षात्मक संरचना) प्रारंभिक लोकतांत्रिक परंपराएँ राजतंत्र बनाम गणतंत्र महाजनपदों ने जनपदों के राजनीतिक सिद्धांतों को और आगे बढ़ाया, जो मुख्य रूप से दो शासन प्रणालियों में बंटे थे: लक्षण/विशेषता राजतंत्रात्मक महाजनपद गण / संघ सर्वोच्च सत्ता राजा ही अंतिम निर्णयकर्ता था। सभा/समिति के पास वास्तविक सत्ता थी। पद का प्रकार वंशानुगत (Hereditary – राजा का पुत्र ही राजा)। चुनाव आधारित (Selected by assembly members)। निर्णय प्रक्रिया राजा मंत्रियों व बुजुर्गों की सलाह से निर्णय लेता था। सामूहिक चर्चा और आवश्यकता पड़ने पर मतदान (Voting)। प्रमुख कार्य कर संग्रह, कानून व्यवस्था, सेना व किलेबंदी। सामूहिक रक्षा, शासन और शासक का चुनाव। उदाहरण मगध (बिहार), कोसल (यूपी), अवंती (एमपी)। वज्जि और मल्ल। विश्व के प्राचीनतम गणतंत्र कुछ अन्य नवीन प्रयोग लोहे की धातुकर्म तकनीक भारत में आहत सिक्के वर्ण-जाति व्यवस्था जाति और वर्ण की द्वैत संरचना भारतीय समाज दो-स्तरीय संरचना पर आधारित था: ‘Caste’ शब्द की उत्पत्ति गतिशीलता, कठोरता और औपनिवेशिक प्रभाव वर्ण बनाम जाति पहलू वर्ण जाति उत्पत्ति वैदिक शास्त्रीय अवधारणा सामाजिक-आर्थिक और व्यावसायिक विकास संख्या केवल 4 स्थिर श्रेणियां हजारों स्थानीय जातियां व उप-जातियां मुख्य आधार कार्य/गुण पर आधारित विभाजन व्यावसायिक कौशल, स्थानीय रीति-रिवाज व विवाह लचीलापन प्राचीन काल में परिवर्तनशील समय के साथ अत्यंत कठोर और वंशानुगत भारत के अन्य भागों में विकास प्रमुख व्यापारिक मार्ग शिशुपालगढ़ सुदूर दक्षिण के राज्य व पुरातात्विक केंद्र संसाधन, समुद्री व्यापार व वैश्विक जुड़ाव मुख्य पुरातात्विक स्थल व व्यापारिक मार्ग स्थल / मार्ग भौगोलिक स्थिति मुख्य पहचान व विशेषताएं प्रासंगिकता उत्तरापथ उत्तर-पश्चिम से पूर्वी भारत गंगा घाटी को जोड़ने वाला मुख्य व्यापारिक मार्ग प्राचीन व्यापार मार्ग दक्षिणापथ कौशाम्बी से दक्षिण भारत विंध्याचल पार कर दक्षिण जाने वाला मुख्य मार्ग प्राचीन व्यापार मार्ग शिशुपालगढ़ भुवनेश्वर, ओडिशा कलिंग की राजधानी, वर्गाकार लेआउट व किलेबंदी प्राचीन नगर नियोजन NCERT Class 6, Social Science Ch-9 यहाँ पढ़ें:-

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NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 3: Climates of India

NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 3: Climates of India के अंतर्गत भारतीय जलवायु की मुख्य पहचान यानी मानसून के उद्भव, उसके आगमन और लौटने (Retreating Monsoon) की वैज्ञानिक प्रक्रियाओं तथा भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले मुख्य कारकों—जैसे अक्षांशीय स्थिति, हिमालय पर्वत की उपस्थिति, समुद्र से दूरी, उच्चावच और मानसूनी पवनों की दिशा—के बीच के गहरे अंतर्संबंधों को समझाता है। इसमें भारत के चार प्रमुख ऋतु चक्रों (शीत, ग्रीष्म, दक्षिण-पश्चिम मानसून और लौटता मानसून) की विशेषताओं का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। मौसम, ऋतुएँ और जलवायु (Weather, Seasons and the Climate) मौसम, ऋतु और जलवायु का तुलनात्मक संबंध घटक समय अवधि मुख्य विशेषता मौसम (Weather) दैनिक या घंंटे के आधार पर अल्पकालिक व परिवर्तनशील। ऋतु (Season) कुछ महीनों का आवर्त चक्र पृथ्वी की परिक्रमा से नियमित दोहराव। जलवायु (Climate) कई दशक (Decades) दीर्घकालिक व स्थिर पैटर्न। पारंपरिक भारतीय ऋतु चक्र विश्व में आमतौर पर चार मुख्य ऋतुएँ होती हैं, लेकिन भारत में मानसून के साथ पारंपरिक रूप से छह ऋतुएँ मानी गई हैं: प्रकृति और मानव जीवन पर प्रभाव भारत में जलवायु के प्रकार जलवायु को निर्धारित करने वाले कारक किसी भी स्थान की जलवायु मुख्य रूप से पाँच प्रमुख कारकों के सामूहिक प्रभाव से तय होती है। a) अक्षांश (Latitude) b) ऊँचाई (Altitude) c) समुद्र से दूरी (Proximity to the Sea) d) पवनें (Winds) e) स्थलाकृति (Topography) सूक्ष्म जलवायु एवं शहरी ऊष्मा द्वीप (Microclimate & Urban Heat Islands) मानसून (The Monsoons) मानसून का वैज्ञानिक तंत्र दक्षिण-पश्चिम बनाम उत्तर-पूर्वी मानसून लक्षण दक्षिण-पश्चिम मानसून (Southwest Monsoon) उत्तर-पूर्वी मानसून (Northeast Monsoon) ऋतु ग्रीष्मकालीन मानसून (Summer Monsoon) शीतकालीन मानसून (Winter Monsoon) समय अवधि जून के प्रारंभ से मध्य जुलाई तक पूरे भारत में प्रसार शीतकाल (Winter Phase) पवन की दिशा समुद्र से स्थल की ओर (दक्षिण-पश्चिम से) स्थल से समुद्र की ओर (उत्तर-पूर्व से) प्रकृति व वर्षा अत्यधिक नमीयुक्त, देश की अधिकांश वर्षा हेतु उत्तरदायी अधिकांशतः शुष्क; बंगाल की खाड़ी से नमी लेकर तमिलनाडु/दक्षिण भारत में वर्षा स्थलाकृतिक प्रभाव पश्चिमी घाट के पश्चिमी ढलान पर भारी वर्षा; दक्कन का पठार वृष्टि-छाया (Rain-shadow) में पूर्वी तटीय मैदानी भागों में वर्षा विशेष तथ्य व सांस्कृतिक जुड़ाव पारंपरिक मौसमी ज्ञान जलवायु और हमारा जीवन (Climate and our Lives) कृषि, त्यौहार और सांस्कृतिक संबंध भारत में कृषि चक्र और ऋतुओं के आगमन से जुड़े अनेक प्रमुख त्यौहार मनाए जाते हैं: अर्थशास्त्र पर प्रभाव (Socioeconomic Impact) मानसून विफलता का सामाजिक-आर्थिक प्रभाव प्रभावित क्षेत्र मुख्य परिणाम प्रासंगिकता कृषि क्षेत्र उत्पादन में कमी, फसल बर्बादी कृषि संकट व खाद्य सुरक्षा अर्थव्यवस्था खाद्य मुद्रास्फीति (Food Inflation) में वृद्धि मैक्रो-इकोनॉमिक्स व नीति निर्माण सामाजिक जीवन पलायन, जल संकट, लैंगिक असमानता भारतीय समाज व शहरीकरण संकट जलवायु और आपदाएँ (Climates and Disasters) a) चक्रवात (Cyclones) NDRF (राष्ट्रीय आपदा मोचन बल) b) बाढ़ (Floods) c) भूस्खलन (Landslides) d) दावानल (जंगल की आग) / Forest fires प्रमुख आपदाएँ और उनके मुख्य कारण आपदा प्राथमिक प्राकृतिक कारण मुख्य मानवजनित कारण सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र चक्रवात समुद्र में तीव्र निम्न दाब प्रणाली ग्लोबल वार्मिंग (समुद्री तापमान में वृद्धि) पूर्वी तटीय राज्य बाढ़ / GLOF मूसलाधार बारिश, ग्लेशियर का पिघलना नदियों पर अतिक्रमण, खराब जल निकासी मैदानी राज्य, हिमालयी क्षेत्र व शहर भूस्खलन मूसलाधार बारिश, भूकंप अवैज्ञानिक कटाई, वनों का विनाश पश्चिमी घाट, पूर्वोत्तर व मध्य हिमालय जंगल की आग शुष्क जलवायु, सूखा, तेज़ पवन मानवीय लापरवाही, अवैध कटाई मध्य भारत और पर्वतीय वन क्षेत्र जलवायु परिवर्तन (Climate Change) जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) ग्रीनहाउस प्रभाव और ग्लोबल वार्मिंग (Greenhouse Effect & Global Warming) प्रमुख शब्दावलियाँ व शमन उपाय वैश्विक व भारतीय स्तर पर जलवायु चुनौतियों से निपटने के लिए निम्नलिखित तीन अवधारणाएँ महत्वपूर्ण हैं: शब्दावली अर्थ (Concept Definition) प्रमुख रणनीतियाँ / उपाय लचीलापन (Resilience) आपदाओं व विपरीत परिस्थितियों से तेज़ी से उबरने की क्षमता। समुदाय-आधारित अनुकूलन प्रणाली का निर्माण। शमन (Mitigation) ग्लोबल वार्मिंग को धीमा करने और जलवायु परिवर्तन के कारणों को घटाने के कदम। • ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती।• सघन वृक्षारोपण (Aforestation)।• नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) को बढ़ावा।• ऊर्जा दक्षता (Energy Efficiency) में सुधार। सतत (Sustainable) ऐसी प्रक्रिया जिसे दीर्घकालिक रूप से बिना पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए जारी रखा जा सके। पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली (LiFE – Lifestyle for Environment) को अपनाना। NCERT Class 6, Social Science Ch-8

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NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 2: Understanding the Weather

NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 2: Understanding the Weather के अंतर्गत मौसम को आकार देने वाले प्रमुख घटकों—जैसे तापमान (Temperature), वायुदाब (Atmospheric Pressure), पवनों की दिशा और गति (Winds), आर्द्रता (Humidity) और वर्षा (Rainfall)—के बीच के गहरे अंतर्संबंधों को स्पष्ट करता है। तथा तापमान में अंतर से वायुदाब में बदलाव आता है और इसी अंतर के कारण हवाएं उच्च दाब से निम्न दाब वाले क्षेत्रों की ओर चलती हैं। इसके साथ ही, यह कृषि नियोजन, आपदा प्रबंधन (जैसे चक्रवात और बाढ़ की पूर्व चेतावनी), उड़ानों के संचालन और मौसम पूर्वानुमान तकनीकों के रणनीतिक महत्व और जलवाष्प के संघनन से बनने वाले बादलों और वर्षा के विभिन्न रूपों के वैज्ञानिक कारणों को भी स्पष्ट करता है। मौसम और इसके तत्व (Weather and its Elements) क्षोभमंडल (Troposphere): वायुमंडल की प्राथमिक परत मौसम के 5 मुख्य तत्व (Elements of Weather) मौसम का तत्व वैज्ञानिक परिभाषा माप / विशेष रूप तापमान (Temperature) वायुमंडल के ठंडा या गर्म होने की स्थिति। सार्वभौमिक मानकों द्वारा मापा जाता है। वर्षण (Precipitation) आकाश से जल का किसी भी रूप में नीचे गिरना। वर्षा (Rain), हिमपात (Snow), स्लीट, ओले (Hail)। वायुमंडलीय दबाव (Atmospheric Pressure) पृथ्वी की सतह पर हवा के भार द्वारा डाला गया दबाव। पवन की दिशा और गति तय करता है। पवन (Wind) हवा की गतिशीलता, उसकी चाल और दिशा। उच्च दाब से निम्न दाब की ओर प्रवाह। आर्द्रता (Humidity) हवा में मौजूद जलवाष्प (Water Vapour) की मात्रा। गैसीय अवस्था में जल। वर्षण के प्रकार (Types of Precipitation) प्राकृतिक संकेतों द्वारा मौसम का पूर्वानुमान (Observing Nature’s clues) मौसम मापन के उपकरण (Weather Instruments) a) तापमान (Temperature) IMD एवं प्राचीन संदर्भ b) वर्षण (Precipitation) c) वायुमंडलीय दबाव (Atmospheric pressure) d) पवन (Wind) e) आर्द्रता (Humidity) प्रमुख मौसम उपकरण और उनका कार्य घटक (Element) मापक उपकरण (Instrument) मापन इकाई (Unit) व्यावहारिक अनुप्रयोग तापमान थर्मामीटर C / F दैनिक तापमान परास व जलवायु आंकड़े एकत्र करना। वर्षण रेन गेज मिलीमीटर (mm) कृषि योजना और जल संसाधन प्रबंधन। वायुदाब बैरोमीटर मिलीबार (mb) चक्रवात, तूफान और मौसम प्रणाली का पूर्वानुमान। पवन दिशा विंड वेन / विंड सॉक दिशा (N, S, E, W) नेविगेशन, एविएशन (विमानन) और नौकायन। पवन गति एनीमोमीटर किमी/घंटा (km/h) तूफान चेतावनी और पवन ऊर्जा आकलन। आर्द्रता हाइग्रोमीटर प्रतिशत (%) खाद्य उद्योग, संग्रहालय एवं वस्त्र सुखाई प्रक्रि मौसम केंद्र (Weather Stations) स्वचालित मौसम केंद्र (Automated Weather Station (AWS) मौसम का पूर्वानुमान (Predicting the Weather) मौसमी चेतावनियाँ (IMD Weather Warning Alert System) कलर कोड चेतावनी का स्तर प्रशासनिक व सार्वजनिक कार्रवाई Green (नो वॉर्निंग) कोई चेतावनी नहीं स्थिति सामान्य, किसी कार्रवाई की आवश्यकता नहीं। Yellow (वॉच) निगरानी रखें (Be Updated) मौसम खराब हो सकता है; स्थिति पर नजर रखें। Orange (अलर्ट) तैयार रहें (Be Prepared) गंभीर मौसम की संभावना; बचाव की तैयारी रखें। Red (वॉर्निंग) कार्रवाई करें (Take Action) अत्यधिक खतरनाक मौसम; तत्काल सुरक्षात्मक कदम उठाएं। NCERT Class 6, Science Ch-5 यहाँ पढ़ें:-

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