NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 10: The Constitution of India-An Introduction के अंतर्गत संविधान सभा (Constituent Assembly) के गठन, देश के महान नेताओं के दूरदर्शी दृष्टिकोण और संविधान की प्रस्तावना (Preamble) में निहित मुख्य आदर्शों—जैसे न्याय, स्वतंत्रता, समता, बंधुता, धर्मनिरपेक्षता और संप्रभुता—की व्याख्या प्रस्तुत करता है। यह नागरिकों को प्राप्त मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights), उनके मौलिक कर्तव्यों (Fundamental Duties) और सत्ता के दुरुपयोग को रोकने के लिए शक्तियों के पृथक्करण (Separation of Powers) तथा कानून के शासन की अनिवार्यता को बेहद सरल माध्यम से स्पष्ट करता है।
संविधान क्या है? (What Is a Constitution?)
- मूल परिभाषा: संविधान एक ऐसा दस्तावेज है जो किसी देश के बुनियादी सिद्धांतों और कानूनों को तय करता है।
- चार मुख्य आधार:
- तीन अंगों का ढांचा: कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका की भूमिकाएँ व उत्तरदायित्व तय करना।
- नियंत्रण एवं संतुलन (Checks and Balances): निष्पक्षता और जवाबदेही के लिए तीनों अंगों पर नियंत्रण रखना।
- अधिकार व कर्तव्य: नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों को सूचीबद्ध करना।
- राष्ट्रीय लक्ष्य: देश के दीर्घकालिक लक्ष्यों और महत्वाकांक्षाओं की रूपरेखा प्रस्तुत करना।
संविधान की आवश्यकता क्यों है?
- देश की रूलबुक: जिस तरह खेल बिना नियमों (Rulebook) के निष्पक्ष रूप से नहीं खेला जा सकता, उसी तरह देश को सुचारू रूप से चलाने के लिए संविधान आवश्यक है।
- विवादों का समाधान: यह सरकार और नागरिकों के बीच किसी भी नियम-संबंधी विवाद को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने का आधार बनता है।
- शासन व्यवस्था का निर्धारण: यह तय करता है कि सरकार कैसी होगी, उसका गठन कैसे होगा और वह कैसे काम करेगी।
- मूल्यों व आदर्शों की स्थापना: यह समानता, न्याय, बंधुता, बहुलवाद और स्वतंत्रता जैसे मूलभूत आदर्शों को कानून का रूप देता है।
भारतीय संविधान के मुख्य आँकड़े
- दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान: भारत का संविधान विश्व का सबसे विस्तृत और बड़ा लिखित संविधान है।
- मूल संविधान (1950): इसमें 22 भाग (Parts) और 8 अनुसूचियाँ (Schedules) थीं।
- वर्तमान स्थिति: इसमें 25 भाग और 12 अनुसूचियाँ हैं।
- बदलाव का कारण: बदलती सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक ज़रूरतों के अनुसार संविधान में संशोधन किए गए।
संविधान के मुख्य घटक
| संविधान के घटक | मुख्य उद्देश्य व कार्य |
| राजनीतिक प्रणाली व संरचना | सरकार के स्वरूप और गठन के तरीके का निर्धारण करना |
| अंगों के कार्य | विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की शक्तियों का बँटवारा |
| अधिकार एवं कर्तव्य | नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा और कर्तव्यों का स्पष्टीकरण |
| समाज के मूल्य व आदर्श | न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुता जैसे सिद्धांतों को लागू करना |
भारतीय संविधान का निर्माण (Writing the Constitution of India)
- पृष्ठभूमि: स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ही भारत की भावी शासन प्रणाली, मतदान अधिकार और विवाद निवारण तंत्र के लिए योजना बनाना आवश्यक हो गया था।
- संविधान सभा का गठन: विविधता, सामाजिक समूहों और पेशों का प्रतिनिधित्व करने के लिए 1946 में संविधान सभा (Constituent Assembly) गठित की गई।
- सदस्य संख्या:
- प्रारंभिक सदस्य: 389
- विभाजन के बाद सदस्य: 299
- महिला सदस्य: 15
डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा का वक्तव्य
- प्रारंभिक अध्यक्ष का संदेश: संविधान सभा के कार्य के प्रारंभ में डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा ने बुद्धिमत्ता, सहनशीलता, न्याय, निष्पक्षता और राष्ट्र को उसका प्राचीन गौरव वापस दिलाने की कामना की थी।
हमारा संविधान कैसे तैयार हुआ? (How was our Constitution developed?)
- गठन तिथि: 9 दिसंबर 1946
- सदस्यों का चयन: प्रांतीय विधान सभाओं (Provincial Legislative Assemblies) के सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से चुने गए।
- अध्यक्ष (Chairman): डॉ. राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के स्थाई अध्यक्ष बने।
- समयावधि: संविधान को तैयार करने में लगभग तीन वर्ष (2 वर्ष, 11 महीने, 18 दिन) का समय लगा।
- स्वीकृति तिथि (Adopted): 26 नवंबर 1949 को संविधान अंगीकृत किया गया (इसी दिन ‘संविधान दिवस’ मनाया जाता है)।
- लागू होने की तिथि: 26 जनवरी 1950 को पूर्ण रूप से लागू हुआ, जिसे हम गणतंत्र दिवस (Republic Day) के रूप में मनाते हैं।
मसौदा समिति (Drafting Committee)
- प्रारंभिक पाठ का निर्माण: संविधान का प्रारंभिक मसौदा ‘प्रारूप समिति’ द्वारा तैयार किया गया।
- अध्यक्ष: डॉ. बी.आर. आंबेडकर (महान समाज सुधारक और स्वतंत्र भारत के प्रथम कानून व न्याय मंत्री)।
संविधान सभा के महत्वपूर्ण तथ्य
| पहलू | ऐतिहासिक तथ्य / आँकड़े |
| गठन वर्ष | 1946 (प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा चयनित) |
| सदस्य संख्या (कुल / विभाजन बाद) | 389 से घटकर 299 |
| महिला सदस्यों की संख्या | 15 |
| संविधान सभा के अध्यक्ष | डॉ. राजेंद्र प्रसाद |
| प्रारूप समिति के अध्यक्ष | डॉ. बी.आर. आंबेडकर |
| अंगीकृत व लागू होने की तिथियाँ | 26 नवंबर 1949 (अंगीकृत) / 26 जनवरी 1950 (लागू) |
भारतीय संविधान को आकार देने और प्रभावित करने वाले कारक
- तीन मुख्य कारक:
- स्वतंत्रता संग्राम के अनुभव और आदर्श।
- भारत की सभ्यतागत विरासत और संस्कृति।
- दुनिया के अन्य लोकतांत्रिक संविधानों से सीख।
- संविधान सभा की भूमिका: स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने संघर्ष के अनुभवों को सीधे संविधान में ढाला।
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का प्रभाव
- स्वतंत्रता संग्राम के मूल्य: समानता, न्याय, स्वतंत्रता, बंधुता और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण।
- संवैधानिक ढाँचा: संविधान को इन आदर्शों को प्राप्त करने का मुख्य साधन बनाया गया।
- महत्वपूर्ण प्रश्नों का समाधान: स्वतंत्रता संग्राम के अनुभवों ने शासन के ‘कैसे’ और ‘क्या’ का जवाब दिया:
- सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार (Universal Adult Franchise)।
- विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका में शक्तियों का पृथक्करण।
- नागरिकों के मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) की सुरक्षा।
- संविधान संशोधन की प्रक्रिया।
- केंद्र और राज्यों के बीच संबंध।
भारत की सभ्यतागत विरासत और इतिहास
- विविधता में एकता: भारत के एक राष्ट्र होने का विचार संविधान में गहराई से समाहित है।
- सांस्कृतिक मूल्य और दार्शनिक आधार:
- विचारों की स्वीकार्यता: विभिन्न दृष्टिकोणों का सम्मान।
- प्रकृति का संरक्षण: प्रकृति को पवित्र मानना।
- ज्ञान की खोज व महिलाओं का सम्मान: प्राचीन भारतीय परंपरा का हिस्सा।
- वसुधैव कुटुम्बकम: “पूरा विश्व एक परिवार है”।
- सर्वे भवन्तु सुखिनः: सभी जीवों के कल्याण की भावना।
- प्राचीन शासन प्रणालियों का प्रभाव:
- जनपद, संघ, कौटिल्य का सप्तांग सिद्धांत और ‘राजधर्म’।
- शासन में कर्तव्यों (Duties) और जनता की भागीदारी पर ऐतिहासिक बल।
- परिणाम: इन्हीं सभ्यतागत विचारों से संविधान में ‘मौलिक कर्तव्य’ (Fundamental Duties) जोड़े गए।
दुनिया भर से ली गई सीख
- वैदिक दर्शन: “आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः” (हमारे पास सब तरफ से कल्याणकारी विचार आएं)। इसी भावना से विदेशी संविधानों का अध्ययन किया गया।
- अन्य देशों से अपनाए गए प्रमुख प्रावधान:
- फ्रांस: स्वतंत्रता, समानता और बंधुता (Liberty, Equality, Fraternity) के आदर्श (1789 की फ्रांसीसी क्रांति से प्रेरित)।
- आयरलैंड: राज्य के नीति निदेशक तत्व (Directive Principles of State Policy – DPSP)।
- अमेरिका (USA): स्वतंत्र न्यायपालिका (Independent Judiciary) की अवधारणा।
संविधान के प्रेरणा स्रोत
| प्रेरणा का स्रोत | संविधान पर प्रभाव / शामिल किए गए प्रावधान |
| स्वतंत्रता आंदोलन | मौलिक अधिकार, वयस्क मताधिकार, केंद्र-राज्य संबंध, शक्तियों का पृथक्करण |
| भारतीय सभ्यता व संस्कृति | मौलिक कर्तव्य (राजधर्म से), ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ व ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ के मूल्य |
| फ्रांस का संविधान | स्वतंत्रता, समानता और बंधुता के आदर्श |
| आयरलैंड का संविधान | राज्य के नीति निदेशक तत्व (DPSP) |
| अमेरिका का संविधान | स्वतंत्र न्यायपालिका |
भारतीय संविधान की मुख्य विशेषताएँ (Key Features of the Constitution of India)
- त्रिस्तरीय शासन प्रणाली: केंद्र, राज्य और स्थानीय शासन (पंचायती राज व्यवस्था)।
- शक्तियों का बँटवारा: केंद्र और राज्य सरकारों के बीच कार्य और जिम्मेदारियाँ स्पष्ट रूप से विभाजित हैं।
- चुनावी ढाँचा: देश के हर योग्य नागरिक को वोट देने का अधिकार देने के लिए स्पष्ट चुनावी तंत्र।
सरकार के तीन अंग (Organs of Government)
- विधायिका (Legislature): कानूनों का निर्माण करती है।
- कार्यपालिका (Executive): प्रधानमंत्री के नेतृत्व में कानूनों को लागू करती है।
- न्यायपालिका (Judiciary): यह सुनिश्चित करती है कि कानून संविधान के अनुसार हों तथा उल्लंघन पर दंड तय करती है।
- शक्तियों का पृथक्करण (Separation of Powers): तीनों अंगों का एक-दूसरे से स्वतंत्र रहना सुचारू शासन के लिए अनिवार्य है।
मौलिक अधिकार vs. नीति निदेशक तत्व (FRs vs. DPSPs)
- मौलिक अधिकार (Fundamental Rights):
- ये तात्कालिक अधिकार हैं जो नागरिकों को तुरंत दिए गए।
- न्याययोग्य (Enforceable): उल्लंघन होने पर नागरिक सीधे अदालत जा सकते हैं।
- राज्य के नीति निदेशक तत्व (DPSP):
- ये सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भावी लक्ष्य हैं।
- गैर-न्याययोग्य (Non-enforceable): इनके लागू न होने पर अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती; ये केवल दिशानिर्देश हैं।
बेगम ऐज़ाज़ रसूल का वक्तव्य (22 नवंबर 1949)
- महिलाओं की समानता: भारत में महिलाओं की पूर्ण समानता कोई नई अवधारणा नहीं है, बल्कि एक प्राचीन चेरिश किया गया आदर्श है।
- संवैधानिक आश्वासन: संविधान इस प्राचीन आदर्श की पुष्टि करता है और कानून में महिलाओं के अधिकारों का सम्मान करने का आश्वासन देता है।
संविधान के मुख्य भाग
| वर्ग | अनुच्छेद (Article) | विषय / प्रावधान |
| मौलिक अधिकार (FRs) | अनुच्छेद 14 | कानून के समक्ष समानता (Equality before law) |
| अनुच्छेद 21 | प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण (Protection of life and personal liberty) | |
| अनुच्छेद 21-A | शिक्षा का अधिकार (Right to education) | |
| अन्य अधिकार | शोषण के विरुद्ध अधिकार | |
| नीति निदेशक तत्व (DPSPs) | अनुच्छेद 38 | सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक न्याय की स्थापना |
| अनुच्छेद 41 | कल्याणकारी सरकार का निर्माण | |
| अनुच्छेद 44 | समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) | |
| अनुच्छेद 47 | पोषण, जीवन स्तर और सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार | |
| अनुच्छेद 48-A | पर्यावरण, वन और वन्यजीवों का संरक्षण | |
| अनुच्छेद 49 | राष्ट्रीय महत्व के स्मारक, स्थलों और वस्तुओं का संरक्षण |
मौलिक कर्तव्य (Fundamental Duties)
- प्रमुख कर्तव्य:
- संविधान, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का आदर करना।
- देश की रक्षा करना और आह्वान किए जाने पर राष्ट्र सेवा करना।
- हमारी मिली-जुली संस्कृति (Composite Culture) की समृद्ध विरासत का सम्मान व संरक्षण करना।
- वनों, झीलों, नदियों और वन्यजीवों सहित प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा करना।
- व्यक्तिगत व सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का प्रयास करना।
- 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों के माता-पिता/अभिभावक द्वारा उन्हें शिक्षा के अवसर प्रदान करना।
संविधान एक जीवंत प्रलेख है (The Constitution is a Living Document)
- जीवंत दस्तावेज़ का अर्थ: संविधान समय के साथ नई ज़रूरतों और बदलावों को अपनाने में सक्षम है।
- संसदीय प्रक्रिया: संविधान में किसी भी बदलाव (संशोधन) पर संसद में बहस होती है।
- व्यापक सहमति: कई संशोधनों के लिए राज्य विधानसभाओं की सहमति और जनता से राय ली जाती है।
- जन आंदोलनों की भूमिका: कई संवैधानिक बदलावों की शुरुआत जन आंदोलनों और नागरिक याचिकाओं से होती है।
संवैधानिक बदलावों व न्यायिक व्याख्याओं के उदाहरण
- भाग IV-A (मौलिक कर्तव्य): 1976 में 42वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया।
- राष्ट्रध्वज फहराने का अधिकार (2004):
- सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि अपने घर पर तिरंगा फहराना अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Fundamental Right to Freedom of Expression) का हिस्सा है।
- शर्त: राष्ट्रध्वज का कभी अनादर नहीं होना चाहिए।
- पंचायती राज व्यवस्था (1992): 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के माध्यम से त्रिस्तरीय पंचायती राज को मूल संविधान में जोड़ा गया।
- संवैधानिक कला व सुलेखन:
- कैलीग्राफर (सुलेखक): प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा ने संविधान के मूल पाठ को अपने हाथों से लिखा।
- चित्रकारी व सजावट: नंदलाल बोस और उनकी टीम ने मोहनजोदड़ो से लेकर स्वतंत्रता आंदोलन तक के भारतीय इतिहास के दृश्यों से इसके पृष्ठों को अलंकृत किया।
प्रस्तावना: संविधान के मार्गदर्शक मूल्य
- प्रस्तावना का महत्व: यह संविधान के मूल दर्शन, नीतियों और निर्णय लेने के मार्गदर्शक सिद्धांतों का सार प्रस्तुत करती है।
- 42वाँ संविधान संशोधन (1976): इसके द्वारा प्रस्तावना में तीन नए शब्द जोड़े गए — ‘समाजवादी’ (Socialist), ‘धर्मनिरपेक्ष’ (Secular), और ‘अखंडता’ (Integrity)।

प्रस्तावना के मुख्य शब्द व उनके अर्थ
| प्रस्तावना का शब्द | संवैधानिक अर्थ / व्याख्या |
| हम भारत के लोग (We, the People of India) | संविधान का स्रोत भारत की जनता और उसके प्रतिनिधि हैं; इसे किसी बाहरी शक्ति या राजा ने नहीं सौंपा है। |
| संप्रभु (Sovereign) | भारत आंतरिक व बाह्य मामलों में निर्णय लेने के लिए पूर्ण स्वतंत्र है; कोई बाहरी शक्ति निर्देश नहीं दे सकती। |
| समाजवादी (Socialist) | सामाजिक-आर्थिक असमानता घटाने के लिए सरकार भूमि और उद्योगों के स्वामित्व को विनियमित करती है। |
| धर्मनिरपेक्ष (Secular) | कोई आधिकारिक राज्य धर्म नहीं है; सरकार सभी धर्मों और आस्थाओं का समान आदर करती है। |
| लोकतांत्रिक (Democratic) | जनता को समान राजनीतिक अधिकार प्राप्त हैं; लोग अपने शासकों को चुनते हैं और उन्हें जवाबदेह ठहराते हैं। |
| गणराज्य (Republic) | देश का प्रमुख (राष्ट्राध्यक्ष) एक निर्वाचित व्यक्ति होता है, न कि कोई वंशानुगत पद। |
| न्याय (Justice) | जाति, धर्म व लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं; कमजोर वर्गों के कल्याण पर विशेष ध्यान। |
| स्वतंत्रता (Liberty) | विचारों, अभिव्यक्ति और विश्वास पर कोई अनुचित प्रतिबंध नहीं। |
| समानता (Equality) | कानून के समक्ष सभी समान हैं; अवसर की समानता सुनिश्चित करना और असमानता समाप्त करना। |
| बंधुता (Fraternity) | सभी नागरिक एक परिवार के सदस्य की तरह रहें; कोई किसी को नीचा न समझे। |