12 August 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत पारंपरिक चिकित्सा को डिजिटल पहचान देने वाले आयुष ग्रिड, भारतीय शिपिंग उद्योग को मजबूत करने के लिए कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग असिस्टेंस स्कीम (CMAS), तटीय सुरक्षा में मील का पत्थर बने Next Generation Offshore Patrol Vessel ‘श्रुति’ के जलावतरण, देश के 18 प्रमुख महानगरों को जलभराव से बचाने हेतु शहरी बाढ़ जोखिम प्रबंधन कार्यक्रम (UFRMP), समुद्री क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने वाले सागरमाला स्टार्टअप एवं इनोवेशन इनिशिएटिव (S2I2), पूर्वोत्तर भारत के निर्यात को गति देने वाली अगरवुड तेल निर्यात रणनीति, भौगोलिक संकेतक (GI Tag) से समृद्ध ‘काला नमक चावल’ (बुद्ध का प्रसाद), तथा आयुर्वेद क्षेत्र में वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देने के लिए CCRAS की ‘प्रयत्न’ पहल व डिजिटल डैशबोर्ड का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
आयुष ग्रिड: आयुष क्षेत्र का डिजिटल कायाकल्प
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीतियां, ई-गवर्नेंस पहल और आयुष ग्रिड जैसे डिजिटल तकनीक आधारित कार्यक्रम।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): स्वास्थ्य, मानव संसाधन, सार्वजनिक सेवा वितरण में ई-गवर्नेंस का अनुप्रयोग, पारदर्शिता और जवाबदेही।
चर्चा में क्यों?
आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव ने राज्यसभा में आयुष ग्रिड परियोजना की प्रगति और इसके प्रमुख डिजिटल पोर्टलों की अद्यतन स्थिति साझा की। यह परियोजना आयुष क्षेत्र के डिजिटल रूपांतरण के लिए एक व्यापक आईटी बैकबोन के रूप में कार्य कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं, अनुसंधान, शिक्षा, औषधि प्रशासन और औषधीय पौधों के प्रबंधन में पारदर्शिता, दक्षता और सुशासन को बढ़ावा देना है।
मुख्य बिंदु: आयुष ग्रिड का ढाँचा और प्रमुख डिजिटल पहलें
1. आयुष ग्रिड का मूल उद्देश्य और तकनीक
- आईटी बैकबोन: आयुष ग्रिड आयुष क्षेत्र की डिजिटल रीढ़ है। यह स्वास्थ्य सेवा, अनुसंधान और शिक्षा को आपस में जोड़ता है।
- उन्नत तकनीक का उपयोग: इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग (ML) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का एकीकरण किया गया है।
- 24 ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म: योजना के तहत देश भर में 24 अलग-अलग ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म विकसित और चालू किए गए हैं।
2. प्रमुख डिजिटल पोर्टल और सेवाएं
- माई आयुष इंटीग्रेटेड सर्विसेज पोर्टल (MAISP): यह आयुष मंत्रालय का मास्टर पोर्टल है। यह सभी आयुष अनुप्रयोगों और सेवाओं को एक डिजिटल इकोसिस्टम में एकीकृत करता है। इस पर उपयोगकर्ता सहायता के लिए एक AI-संचालित चैटबॉट (बीटा संस्करण) भी तैनात किया गया है।
- आयुष अस्पताल प्रबंधन सूचना प्रणाली (AHMIS): यह प्लेटफ़ॉर्म आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के अनुरूप है। इसका उपयोग आयुष स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रबंधन और डिजिटल स्वास्थ्य सेवा वितरण के लिए किया जा रहा है।
- आयुष अनुदान पोर्टल: यह मंत्रालय की केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं के तहत फंडिंग प्रस्तावों की स्वीकृति और निगरानी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करता है।
- आयुष रिसर्च पोर्टल: यह 43,000 से अधिक आयुष शोध प्रकाशनों का केंद्रीय डिजिटल भंडार है, जो AI तकनीक से लैस है।
- आयुष निवेश सारथी पोर्टल: यह आयुष क्षेत्र में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए एक समर्पित गेटवे के रूप में कार्य करता है।
- ई-चरक पोर्टल: यह औषधीय पौधों के क्षेत्र के लिए एक वर्चुअल मार्केटप्लेस है। यह किसानों, संग्राहकों, खरीदारों और निर्यातकों को जोड़ता है।
3. प्राचीन ग्रंथों और पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण
आयुष ग्रिड और केंद्रीय आयुर्वेद विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS) के माध्यम से प्राचीन चिकित्सा ज्ञान को संरक्षित करने के लिए निम्नलिखित डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किए गए हैं:
- आयुर्वेद ग्रंथ समुच्चय डिजिटल लाइब्रेरी
- आयुष पांडुलिपि उन्नत भंडार (AMAR)
- आयुर्वेदिक ऐतिहासिक छापों का प्रदर्शन (SAHI)
- ई-मेडिकल हेरिटेज एक्सेशन (E-Medha)
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| डिजिटल पोर्टल / पहल | नोडल निकाय / मुख्य कार्य |
| आयुष ग्रिड | आयुष मंत्रालय की आईटी बैकबोन परियोजना। |
| AHMIS | ABDM-अनुपालन युक्त अस्पताल प्रबंधन प्रणाली। |
| MAISP | आयुष सेवाओं का मास्टर एकीकृत पोर्टल (maisp.ayush.gov.in)। |
| e-Charak | औषधीय पौधों का वर्चुअल मार्केटप्लेस (किसान-व्यापारी जुड़ाव)। |
| AMAR / SAHI / E-Medha | CCRAS द्वारा विकसित प्राचीन पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण प्लेटफॉर्म। |
कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग असिस्टेंस स्कीम (CMAS): भारत के समुद्री भविष्य का निर्माण
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय नीतियां, बजट 2026-27 की घोषणाएं, बंदरगाह, नौवहन, लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढांचा।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचा (बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स), ‘मेक इन इंडिया’ और आपूर्ति श्रृंखला में सुधार।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग असिस्टेंस स्कीम (CMAS) के माध्यम से भारत सरकार देश को वैश्विक समुद्री विनिर्माण (Maritime Manufacturing) का एक बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। ₹10,000 करोड़ के कुल बजट वाली यह 5-वर्षीय योजना घरेलू स्तर पर शिपिंग कंटेनरों के विनिर्माण को प्रोत्साहन देगी, जिससे प्रतिवर्ष आयात होने वाले लगभग 20 लाख खाली कंटेनरों पर भारत की निर्भरता समाप्त हो सके। हाल ही में जुलाई 2026 में भारत ने Dadri (उत्तर प्रदेश) में अंतरराष्ट्रीय मानकों (ISO व CSC) के अनुरूप निर्मित पहले स्वदेशी EXIM कंटेनर का अनावरण कर इस क्षेत्र में व्यावसायिक सफलता का प्रमाण दिया है।
मुख्य बिंदु: घरेलू विनिर्माण, आवश्यकता और समुद्री इकोसिस्टम
1. घरेलू कंटेनर निर्माण की आवश्यकता क्यों?
- आयात निर्भरता: भारत हर साल लगभग 20 लाख खाली कंटेनर आयात करता है। इससे भारतीय निर्यात-आयात (EXIM) व्यापार पर वैश्विक आपूर्ति बाधाओं का सीधा असर पड़ता है।
- ग्लोबल लॉजिस्टिक्स: UNCTAD के अनुसार, वैश्विक व्यापार का 80% हिस्सा समुद्री मार्ग से और लगभग दो-तिहाई मूल्यवान व्यापार कंटेनरों के माध्यम से होता है।
- अंतरराष्ट्रीय मानकों का अनुपालन: जुलाई 2026 में भारत ने पहला स्वदेशी EXIM कंटेनर रोल-आउट किया। यह ISO मानकों और ‘सुरक्षित कंटेनरों के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन’ (CSC) का पालन करता है।
2. CMAS योजना की मुख्य विशेषताएं
- कुल बजट व अवधि: 5 वर्षों के लिए ₹10,000 करोड़ का वित्तीय प्रावधान।
- उत्पादन लक्ष्य: वार्षिक विनिर्माण क्षमता को 10 गुना बढ़ाकर 7.5 लाख TEUs (Twenty-foot Equivalent Units) तक पहुंचाना।

- आर्थिक व रोजगार लाभ: योजना से ₹80,000 करोड़ का बाज़ार अवसर पैदा होगा। इसके अलावा, 3,000 प्रत्यक्ष और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे।
- सहायता का दायरा: ग्रीनफील्ड (नये) प्लांट लगाने, ब्राउनफील्ड (पुराने) यूनिटों के विस्तार, टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और स्किलिंग के लिए सीधी मदद।
3. एकीकृत समुद्री सुधार और पूरक पहलें
- भारत कंटेनर शिपिंग लाइन (BCSL): SCI, CONCOR और प्रमुख बंदरगाहों के बीच ₹99,149 करोड़ का समझौता हुआ है। इसके तहत 51 कंटेनर जहाजों का बेड़ा तैयार किया जा रहा है।
- अन्य प्रमुख कानून व नीतियां:
- कानूनी ढांचा: मर्चेंट शिपिंग एक्ट 2025, कोस्टल शिपिंग एक्ट 2025 और इंडियन पोर्ट्स एक्ट 2025 लागू।
- जहाज निर्माण प्रोत्साहन: घरेलू शिपबिल्डिंग के लिए ₹70,000 करोड़ का वित्तीय पैकेज जारी।
- डिजिटल सुधार: ‘वन नेशन वन पोर्ट’, मैरीटाइम सिंगल विंडो और ई-समुद्र।

- प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स: वधावन पोर्ट, गलाथिया बे (ग्रेट निकोबार) अंतर्राष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट पोर्ट और टुना टेकरा टर्मिनल।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| योजना का नाम | कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग असिस्टेंस स्कीम (CMAS)। |
| कुल आवंटन | ₹10,000 करोड़ (5 वर्ष के लिए)। |
| मापन इकाई | TEU (Twenty-foot Equivalent Unit – 20 फीट का मानक कंटेनर)। |
| वार्षिक उत्पादन लक्ष्य | 7.5 लाख TEUs। |
| BCSL बेड़ा | 51 कंटेनर पोत (SCI, CONCOR आदि द्वारा संयुक्त पहल)। |
| शिपबिल्डिंग पैकेज | ₹70,000 करोड़। |
Next Generation Offshore Patrol Vessel: ‘श्रुति’ का जलावतरण
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की रक्षा प्रौद्योगिकी, नौसेना के प्रमुख पोत और ‘मेक इन इंडिया’ पहल।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): आंतरिक सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा (Maritime Security), रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और स्वदेशी प्रौद्योगिकी।
चर्चा में क्यों?
कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (M/s GRSE) में भारतीय नौसेना के Next Generation Offshore Patrol Vessel (NGOPV) श्रृंखला के यार्ड 3037 ‘श्रुति’ का जलावतरण किया गया। यह पोत भारतीय नौसेना के स्वदेशी पोत निर्माण अभियान की एक प्रमुख उपलब्धि है। यह पहल सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ विजन को और मजबूत करती है।
मुख्य बिंदु: पोत की विशेषताएं, उद्देश्य और नामकरण
1. पोत की मुख्य भूमिका और संचालन
- बहु-आयामी मिशन: ‘श्रुति’ को समुद्री निगरानी, खोज व बचाव (Search & Rescue), अपतटीय संपत्तियों की सुरक्षा, आपदा राहत (HADR) और समुद्री डकैती रोधी (Anti-Piracy) अभियानों के लिए तैनात किया जाएगा।
- बेड़े की क्षमता में वृद्धि: यह नया स्वदेशी पोत भारतीय नौसेना के मौजूदा OPV/NOPV बेड़े की क्षमता को कई गुना बढ़ाएगा।
2. स्वदेशी निर्माण और निर्माण केंद्र
- दोहरे शिपयार्ड में निर्माण: NGOPV परियोजना का निर्माण दो प्रमुख शिपयार्ड्स में एक साथ चल रहा है:
- गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL, गोवा)
- गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE, कोलकाता)
- पूर्णतः स्वदेशी डिजाइन: इन जहाजों का डिजाइन और निर्माण पूरी तरह से भारत में ही तैयार किया गया है।
3. सांस्कृतिक जुड़ाव और प्रतीक चिन्ह
- नामकरण का आधार: पोत का नाम ‘श्रुति’ भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से लिया गया है। यह चार वेदों का प्रतीक है।

- क्रेस्ट डिजाइन: पोत के आधिकारिक चिन्ह पर ‘सप्तर्षि तारामंडल’ (Ursa Major) और लाल-सफेद रंग का ‘लाइटहाउस’ दर्शाया गया है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| पोत का नाम व यार्ड | यार्ड 3037 ‘श्रुति’। |
| श्रेणी | Next Generation Offshore Patrol Vessel (NGOPV)। |
| निर्माता संस्था | GRSE, कोलकाता (तथा GSL, गोवा)। |
| सांस्कृतिक संदर्भ | ‘श्रुति’ शब्द चार वेदों को संदर्भित करता है। |
| क्रेस्ट सिंबल | सप्तर्षि तारामंडल (Ursa Major) और लाइटहाउस। |
शहरी बाढ़ जोखिम प्रबंधन कार्यक्रम (UFRMP): 18 प्रमुख शहरों का कायाकल्प
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन नीतियां, शहरी जल भराव, NDMF और सरकारी निकाय (NDMA/MHA)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): आपदा और आपदा प्रबंधन, शहरीकरण की चुनौतियां, जलवायु परिवर्तन और बुनियादी ढांचे की सहनशीलता (Resilience)।
चर्चा में क्यों?
गृह मंत्रालय (MHA) के राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में देश में शहरी बाढ़ जोखिम प्रबंधन कार्यक्रम (UFRMP) के कार्यान्वयन और इसके वित्तीय आवंटन की विस्तृत स्थिति साझा की है। केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय आपदा शमन कोष (NDMF) के तहत इस कार्यक्रम को मंजूरी दी गई है, जिसका उद्देश्य शहरों में जलभराव रोकना और बुनियादी जल निकासी प्रणाली को मजबूत करना है। UFRMP के चरण-I के तहत 7 प्रमुख मेट्रो शहरों के लिए ₹3,075.65 करोड़ तथा चरण-II के अंतर्गत 11 अन्य महत्वपूर्ण शहरों के लिए ₹2,444.42 करोड़ का वित्तीय परिव्यय निर्धारित किया गया है।
मुख्य बिंदु: UFRMP के चरण, कार्यान्वयन और निगरानी
1. योजना का दो-चरणीय ढांचा (Two Phases)
- चरण-I (07 मेट्रो शहर):
- शहर: अहमदाबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई और पुणे।
- कुल स्वीकृत बजट: ₹3,075.65 करोड़।
- चरण-II (11 प्रमुख शहर):
- शहर: भोपाल, भुवनेश्वर, गुवाहाटी, जयपुर, कानपुर, पटना, रायपुर, तिरुवनंतपुरम, विशाखापट्टनम, इंदौर और लखनऊ।
- कुल स्वीकृत बजट: ₹2,444.42 करोड़।
2. कार्यान्वयन और उद्देश्य
- कार्यान्वयनकर्ता: स्वीकृत परियोजनाओं को संबंधित राज्य सरकारें लागू कर रही हैं।
- मुख्य लक्ष्य: स्टॉर्म-वॉटर ड्रेनेज (Stormwater Conveyance) प्रणाली सुधारना। जलजमाव कम करना। सड़कों का संपर्क सुचारू रखना। ड्रेनेज नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना।
3. निगरानी और मूल्यांकन तंत्र (Monitoring & Evaluation)
- समीक्षा बैठकें: गृह मंत्रालय (MHA) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) नियमित अंतराल पर प्रगति की समीक्षा करते हैं।
- निगरानी ढांचा: NDMA ने एक समर्पित Monitoring and Evaluation Framework तैयार किया है। इसे सभी प्रतिभागी शहरों में अपनाने और रिपोर्टिंग के लिए भेजा गया है।
शहरी बाढ़ जोखिम प्रबंधन कार्यक्रम (UFRMP) – वित्तीय आवंटन
| चरण | कुल शहर | मुख्य शहर | कुल वित्तीय परिव्यय | केंद्रीय सहायता (NDMF) |
| चरण-I | 07 | अहमदाबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई, पुणे | ₹3075.65 करोड़ | ₹2432.62 करोड़ |
| चरण-II | 11 | भोपाल, भुवनेश्वर, गुवाहाटी, जयपुर, कानपुर, पटना, रायपुर, तिरुवनंतपुरम, विशाखापट्टनम, इंदौर, लखनऊ | ₹2444.42 करोड़ | ₹2180.00 करोड़ |
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| नोडल मंत्रालय | गृह मंत्रालय (MHA)। |
| तकनीकी निकाय | राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA)। |
| फंडिंग का स्रोत | राष्ट्रीय आपदा शमन कोष (National Disaster Mitigation Fund – NDMF)। |
| कुल आच्छादित शहर | 18 शहर (7 मेट्रो + 11 Tier-2/राज्य राजधानी शहर)। |
सागरमाला स्टार्टअप एवं इनोवेशन इनिशिएटिव (S2I2)
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय नीतियां, बंदरगाह, नौवहन, नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy) और सरकारी योजनाएं।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचा (बंदरगाह व लॉजिस्टिक्स), प्रौद्योगिकी विकास, नवाचार एवं स्टार्टअप्स।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में सागरमाला स्टार्टअप एवं इनोवेशन इनिशिएटिव (S2I2) की अद्यतन प्रगति साझा की। 19 मार्च 2025 को शुरू की गई इस पहल का मुख्य उद्देश्य भारत के समुद्री क्षेत्र (Maritime Sector) में नवाचार और उद्यमिता का एक सशक्त इकोसिस्टम तैयार करना है। इसके तहत देश के 36 स्टार्टअप्स को 40 वास्तविक समुद्री चुनौतियों के समाधान विकसित करने के लिए चुना गया है।
मुख्य बिंदु: कार्यान्वयन, मैरीटाइम हब और हैकाथॉन
1. कार्यान्वयन संस्था (Implementation Agency)
- मैरीटाइम इंडिया फाउंडेशन (MIF): यह तमिलनाडु सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1975 के तहत पंजीकृत संस्था है। यह बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्रालय के तहत कार्य करती है और S2I2 की नोडल कार्यान्वयन एजेंसी है।
2. मैरीटाइम इनोवेशन हब्स (MIHs) की स्थापना
प्रौद्योगिकी विकास, परीक्षण और स्टार्टअप्स को तकनीकी सहायता देने के लिए 4 प्रमुख संस्थानों में मैरीटाइम इनोवेशन हब्स बनाए गए हैं:
- IIT मद्रास
- IIT बॉम्बे
- IIT खड़गपुर
- भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय (IMU), चेन्नई
3. ‘मार-ए-थॉन 2025’ एवं प्रमुख विषय
MIF ने चेन्नई पोर्ट अथॉरिटी और NTCPWC (IIT मद्रास) के सहयोग से भारत के पहले मैरीटाइम हैकाथॉन ‘MAR-a-THON 2025’ का आयोजन किया। इसमें 6 प्रमुख क्षेत्रों की 51 समस्याओं पर समाधान मांगे गए:
- बंदरगाह बुनियादी ढांचा (Port Infrastructure)
- स्मार्ट एवं एकीकृत पोर्ट संचालन
- एकीकृत लॉजिस्टिक्स व मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी
- हरित एवं सतत समुद्री क्षेत्र (Green Maritime)
- उन्नत सुरक्षा और नियामक अनुपालन
- जहाज निर्माण और जीवनचक्र प्रबंधन
4. क्षेत्रीय प्रगति (विशाखापट्टनम पोर्ट का उदाहरण)
- आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम पोर्ट ने 4 विशिष्ट समस्याओं की पहचान की है।
- इन समस्याओं के तकनीकी समाधान के लिए आंध्र प्रदेश के 2 स्टार्टअप्स को ऑन-बोर्ड किया गया है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| पहल का नाम | सागरमाला स्टार्टअप एवं इनोवेशन इनिशिएटिव (S2I2)। |
| नोडल मंत्रालय | बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW)। |
| कार्यान्वयन एजेंसी | मैरीटाइम इंडिया फाउंडेशन (MIF)। |
| मैरीटाइम हब्स (MIHs) | IIT मद्रास, IIT बॉम्बे, IIT खड़गपुर और IMU चेन्नई। |
| भारत का पहला मैरीटाइम हैकाथॉन | MAR-a-THON 2025 (IIT मद्रास में आयोजित)। |
काला नमक चावल: बुद्ध का प्रसाद और कृषि का नया सितारा
- प्रारंभिक परीक्षा: कृषि पद्धतियां, प्रमुख फसलें, भौगोलिक संकेत (GI Tag), अनुसंधान संस्थान और APEDA।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता, आपूर्ति श्रृंखला, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, किसानों की आय दोगुनी करना और कृषि निर्यात।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी ने लोकसभा में काला नमक चावल के उत्पादन और निर्यात में हुई उल्लेखनीय प्रगति की जानकारी साझा की है। वर्ष 2018 से 2025 के दौरान उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में इसका उत्पादन 5 गुना से अधिक बढ़ा है, जिससे इसकी खेती करने वाले किसानों की संख्या 2,915 से बढ़कर 23,000 से अधिक हो गई है। बाजार में इसकी बिक्री दर ₹40/किग्रा से बढ़कर ₹150/किग्रा तक पहुँचने से किसानों का मुनाफा साधारण धान की तुलना में तीन गुना से अधिक हो गया है। ICAR द्वारा विकसित पूसा नरेंद्र काला नमक जैसी उच्च उपज वाली किस्मों, ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) योजना तथा APEDA द्वारा इसे “बुद्ध राइस” के रूप में अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग मिलने से इस पारम्परिक जीआई (GI) टैग युक्त उत्पाद को वैश्विक पहचान मिली है।
मुख्य बिंदु: उत्पादन, तकनीक और सरकारी प्रोत्साहन
1. उत्पादन और आर्थिक लाभ
- किसानों की संख्या में वृद्धि: इस धान की खेती करने वाले किसान 2018 में 2,915 थे। 2024 तक यह आंकड़ा बढ़कर 23,000 हो गया।
- आय में बढ़ोतरी: सामान्य चावल के मुकाबले किसानों की लाभप्रदता तीन गुना से अधिक हो गई है।
2. उन्नत किस्में और ICAR की भूमिका
- नवोन्मेषी किस्में: ICAR ने 6 सुधारी हुई किस्में जारी की हैं – KN3, बौना काला नमक 101, बौना काला नमक 102, काला नमक किरण, पूसा नरेंद्र काला नमक 1 और पूसा CRD काला नमक 2।
- उत्पादकता में उछाल: बौनी किस्मों (Dwarf Varieties) की औसत उपज 4.5 टन/हेक्टेयर है। पारंपरिक किस्मों की उपज केवल 2.5 टन/हेक्टेयर थी।
- पादप किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण (PPVFRA): इसके तहत 1,700 से अधिक स्थानीय किस्मों का पंजीकरण किया गया है।
3. प्रसंस्करण और विपणन सहायता
- ODOP एवं PMFME योजना: सिद्धार्थनगर में ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) के तहत कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) स्थापित हुआ है। प्रसंस्करण/मिलिंग यूनिट्स के लिए 35% तक सब्सिडी (अधिकतम ₹10 लाख) मिलती है।
- काला नमक महोत्सव: इस चावल की ब्रांडिंग और प्रचार के लिए विशेष महोत्सवों का आयोजन किया जाता है।
4. अंतर्राष्ट्रीय निर्यात और “बुद्ध राइस” ब्रांडिंग
- APEDA का सहयोग: कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) FPOs को सीधे सिंगापुर और नेपाल जैसे विदेशी खरीदारों से जोड़ता है।
- बुद्ध राइस ब्रांडिंग: इसे “बुद्ध राइस” के रूप में ब्रांड किया जा रहा है। इसका उद्देश्य बौद्ध देशों (जापान, थाईलैंड, वियतनाम, सिंगापुर, म्यांमार) के उच्च मूल्य वाले बाजारों को लक्षित करना है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| मापदंड / घटक | महत्वपूर्ण तथ्य |
| भौगोलिक संकेत (GI Tag) | उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र (सिद्धार्थनगर एवं आसपास के जिले)। |
| सांस्कृतिक नाम | बुद्ध राइस। |
| नई बौनी किस्में | पूसा नरेंद्र काला नमक 1, पूसा CRD काला नमक 2 (उपज: 4.5 टन/हेक्टेयर)। |
| नोडल निर्यात एजेंसी | APEDA (वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय)। |
| संबंधित योजनाएं | ODOP, PMFME, Breeder Seed Program। |
अगरवुड तेल निर्यात: पूर्वोत्तर भारत से वैश्विक ब्रांडिंग की रणनीति
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की आर्थिक एवं सामाजिक नीतियां, पूर्वोत्तर भारत के प्राकृतिक संसाधन, CITES और निर्यात प्रोत्साहन।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था, समावेशी विकास, पूर्वोत्तर का विकास (PM-DevINE), कृषि-वानिकी (Agro-Forestry) और निर्यात संवर्धन।
चर्चा में क्यों?
उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDoNER) और CHEMEXCIL ने नई दिल्ली में ‘अगरवुड तेल के निर्यात’ पर एक राष्ट्रीय उद्योग शिखर सम्मेलन आयोजित किया। सम्मेलन में ‘पूर्वोत्तर क्षेत्र से अगरवुड निर्यात संवर्धन रोडमैप’ जारी किया गया। भारत में कुल अगरवुड संसाधनों का 96% से अधिक हिस्सा पूर्वोत्तर राज्यों में मौजूद है। सरकार का उद्देश्य पूर्वोत्तर को केवल कच्चे माल का आपूर्तिकर्ता बनाने के बजाय ‘भारतीय ओउद’ को वैश्विक ब्रांड के रूप में स्थापित करना है।
मुख्य बिंदु: संसाधन क्षमता, रणनीतिक ढांचा और प्रमुख पहलें
1. भारत में अगरवुड की स्थिति और क्षमता
- संसाधन का आधार: भारत में कुल अनुमानित 13.98 करोड़ अगरवुड के वृक्ष हैं। इनमें से 96.6% पूर्वोत्तर भारत में हैं।
- राज्यवार वितरण: अकेले असम में 11.43 करोड़ और त्रिपुरा में 1.51 करोड़ पेड़ हैं। मणिपुर, नागालैंड और मेघालय में भी इसका बड़ा आधार है।
- वैश्विक मांग: खाड़ी देश (Gulf Markets), यूरोप, अमेरिका और पूर्व एशिया में उच्च गुणवत्ता वाले इत्र (Perfume) और धूप के लिए भारी मांग है।
2. ‘अगरवुड निर्यात संवर्धन रोडमैप’ की 5-सूत्रीय रणनीति
- बाजार जुड़ाव: FPOs और क्लस्टर संगठनों के साथ दीर्घकालिक संबंध बनाना।
- स्थानीय मूल्य संवर्धन: पूर्वोत्तर में ही प्रसंस्करण (Processing) और आसवन (Distillation) इकाइयां स्थापित करना।
- तकनीकी भागीदारी: निष्कर्षण (Extraction) और वैज्ञानिक खेती के लिए आधुनिक तकनीक अपनाना।
- ब्रांडिंग और मानक: जीआई टैग, उत्पत्ति प्रमाणीकरण और गुणवत्ता मानकों के जरिए पहचान देना।
- ‘इंडियन ओउद’ की ब्रांडिंग: वैश्विक लग्जरी बाजार में ‘भारतीय ओउद’ की विरासत और कहानी का प्रचार करना।
3. संस्थागत ढांचा और क्रियान्वयन के उपाय
- अंतर-मंत्रालयी टास्क फोर्स: MDoNER द्वारा नवंबर 2023 में गठित टास्क फोर्स की सिफारिशों पर यह रोडमैप तैयार हुआ।
- अगरवुड स्टीयरिंग ग्रुप (फरवरी 2025): नियामक प्रक्रियाओं को सुगम बनाने के लिए स्थायी तंत्र।

- अगरवुड एक्सपोर्ट प्रमोशन सेल (मई 2026): वाणिज्य मंत्रालय, CHEMEXCIL और SHEFEXIL के समन्वय से निर्यात बढ़ाने का कार्य।
- प्रमुख प्रोजेक्ट्स: PM-DevINE के तहत असम और त्रिपुरा में ‘अगरवुड क्लस्टर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट’ तथा अगरतला में ‘अगरवुड इंटरनेशनल ट्रेड एंड रिसर्च सेंटर’ की स्थापना।
अगरवुड (Aquilaria)
| मापदंड / पहलू | विवरण / तथ्य |
| वैज्ञानिक नाम | एक्विलारिया (Aquilaria Species)। |
| उत्पाद | अगरवुड चिप्स और अगर ऑयल (Oud Oil)। |
| असम की हिस्सेदारी | देश के कुल वृक्षों का लगभग 81.7%। |
| डिजिटल पहल | उत्पत्ति प्रमाणपत्र (Certificate of Origin) का डिजिटलीकरण। |
| बजटीय संदर्भ | केंद्रीय बजट 2026-27 और 73वीं NEC प्लैनरी बैठक में प्रोत्साहन। |
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / संस्था | मुख्य कार्य व नोडल निकाय |
| CHEMEXCIL | रसायन और सम्बद्ध उत्पाद निर्यात संवर्धन परिषद (वाणिज्य मंत्रालय)। |
| SHEFEXIL | शेलैक एवं वन उत्पाद निर्यात संवर्धन परिषद। |
| PM-DevINE | पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए प्रधानमंत्री विकास पहल (100% केंद्रीय वित्त पोषित)। |
| तकनीकी भागीदार | ICFRE-RFRI, FFDC, NIPER और NESAC। |
आयुर्वेद में अनुसंधान क्षमता निर्माण: CCRAS की ‘प्रयत्न’ पहल व डिजिटल डैशबोर्ड
- प्रारंभिक परीक्षा: सरकारी योजनाएं, स्वास्थ्य नीतियां, आयुष क्षेत्र और संस्थागत ढांचा।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 व 3): स्वास्थ्य क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास (R&D), ई-गवर्नेंस, डिजिटल पहल और पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों का सुदृढ़ीकरण।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव ने राज्यसभा में आयुर्वेद क्षेत्र में शोध क्षमता बढ़ाने के लिए केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान परिषद (CCRAS) द्वारा शुरू किए गए नए उपायों की जानकारी दी। CCRAS ने पोस्ट ग्रेजुएट (PG) और पीएचडी शोधार्थियों के लिए ‘प्रयत्न’ योजना शुरू की है। इसके साथ ही, शोध परिणामों की आसान पहुंच के लिए CCRAS डिजिटल इनिशिएटिव्स डैशबोर्ड (dashboard.ccras.org.in) लॉन्च किया गया है। परिषद ने ‘आयुर्वेद प्रबोधिनी ग्रंथमाला’ श्रृंखला के तहत एक नई रिसर्च मेथडोलॉजी पाठ्यपुस्तक भी प्रकाशित की है।
मुख्य बिंदु: CCRAS की प्रमुख पहलें और संस्थागत प्रगति
1. ‘प्रयत्न’ योजना
- उद्देश्य: आयुर्वेद के PG और Ph.D शोधार्थियों में वैज्ञानिक लेखन (Scientific Writing) कौशल को बढ़ाना।
- मुख्य लक्ष्य: शोध पत्रों की गुणवत्ता सुधारना और उच्च-प्रभाव वाले अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशन को बढ़ावा देना।
- कार्यान्वयन मॉडल:
- संस्थानों से रुचि की अभिव्यक्ति (EoI) आमंत्रित करना।
- वैज्ञानिक लेखन पर दो ऑनलाइन ओरिएंटेशन सत्र आयोजित करना।
- शोधार्थियों को व्यक्तिगत पांडुलिपि (Manuscript) सहायता देना।
- 3-दिवसीय ऑन-साइट व्यावहारिक कार्यशाला के माध्यम से प्रकाशन-योग्य ड्राफ्ट तैयार करना।
2. CCRAS डिजिटल इनिशिएटिव्स डैशबोर्ड
- वेबसाइट:
dashboard.ccras.org.in - विशेषता: यह एक सिंगल-विंडो एकीकृत प्लेटफॉर्म है।
- शामिल संसाधन: इस पर कार्यालय सुइट, internal ऐप्स, रिसर्च पोर्टल्स, नॉलेज एंड लिटरेचर डेटाबेस, मोबाइल ऐप्स, जर्नल्स और सोशल मीडिया पेजों को एक जगह संकलित किया गया है।
3. अनुसंधान पद्धति पाठ्यपुस्तक
- श्रृंखला: यह पुस्तक ‘आयुर्वेद प्रबोधिनी ग्रंथमाला’ के तहत तैयार की गई है।
- पाठ्यक्रम संरेखण: NCISM (नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन) के MD/MS आयुर्वेद के परिणाम-आधारित (Outcome-based) पाठ्यक्रम के अनुरूप है।
- सामग्री स्ट्रक्चर: इसमें 21 अध्याय और 6 मॉड्यूल शामिल हैं, जो साहित्य खोज, शोध प्रश्न निर्माण, परिकल्पना (Hypothesis), डेटा विश्लेषण और नैतिक दिशानिर्देशों को कवर करते हैं।
- योगदानकर्ता: आयुष और आधुनिक विज्ञान स्ट्रीम के 34 वैज्ञानिकों व 16 संकाय सदस्यों का संयुक्त प्रयास।
4. गुणवत्ता मानकों का प्रमाणन (NABH व NABL एक्रिडिटेशन)
CCRAS के तहत देश भर में मौजूद शोध संस्थानों और प्रयोगशालाओं की गुणवत्ता में लगातार सुधार हो रहा है:
A. NABH मान्यता प्राप्त मुख्य संस्थान (अस्पताल एवं स्वास्थ्य देखभाल)
- पूर्ण मान्यता: नई दिल्ली, भुवनेश्वर, जयपुर, ग्वालियर, कोलकाता, नागपुर, जम्मू, विजयवाड़ा, चेरुथुरुथी (पंचकर्म), गुवाहाटी, मुंबई और लखनऊ।
- प्रारंभिक स्तर (Entry Level): बेंगलुरु, रानीखेत, अहमदाबाद, गंगटोक, मंडी, गोवा और ईटानगर।
B. NABL मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाएं (मेडिकल लैब्स & टेस्टिंग्स)
- मेडिकल लैब्स (ISO 15189): चेरुथुरुथी, कोलकाता, बेंगलुरु, नई दिल्ली, नागपुर, गुवाहाटी, ग्वालियर, पटियाला, जयपुर, तिरुवनंतपुरम, जम्मू, विजयवाड़ा, अहमदाबाद, पटना, लखनऊ, मुंबई, मंडी और भुवनेश्वर।
- परीक्षण एवं अंशांकन लैब्स (ISO/IEC 17025:2017): चेन्नई (2017 से), झांसी, ग्वालियर, पुणे और चेरुथुरुथी।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| CCRAS | आयुष मंत्रालय के तहत आयुर्वेद अनुसंधान की शीर्ष संस्था। |
| PRAYATNA | PG/Ph.D आयुर्वेद छात्रों के लिए वैज्ञानिक लेखन संवर्धन योजना। |
| डिजिटल डैशबोर्ड | dashboard.ccras.org.in (शोध डेटा तक सीधी पहुंच)। |
| NCISM | भारतीय चिकित्सा प्रणाली के लिए राष्ट्रीय आयोग (नियामक संस्था)। |
| NABH & NABL | स्वास्थ्य संस्थानों और गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं को मान्यता देने वाली संस्थाएं। |