11 August 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत जैव विविधता और वनों की सुरक्षा हेतु आरक्षित वनों में आक्रामक विदेशी प्रजातियों के उन्मूलन, देश में जल सुरक्षा की चुनौतियों पर केंद्रित भारत में भूजल की खपत, स्थिति और गुणवत्ता रिपोर्ट (2025-26), युवाओं पर दबाव कम करने हेतु छात्रों की आत्महत्या का मुद्दा और राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य पहलों, विश्व शेर दिवस 2026 पर एशियाई शेरों की आबादी में ऐतिहासिक वृद्धि, वनावरण बढ़ाने हेतु ग्रीन इंडिया मिशन व नगर वन योजना, आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) त्रैमासिक बुलेटिन (अप्रैल-जून 2026), तथा भारत के सॉफ्ट पावर को बढ़ाने हेतु जारी सांस्कृतिक कूटनीति के लिए राष्ट्रीय ढाँचा का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
आरक्षित वनों में आक्रामक विदेशी प्रजातियों (Invasive Foreign Species) का उन्मूलन
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की नीतियां, पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और आक्रामक विदेशी प्रजातियां (IAPS)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): पर्यावरण, पारिस्थितिकी, जैव विविधता ह्रास, सतत वन प्रबंधन और पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली।
चर्चा में क्यों?
वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा संसद (लोकसभा) में देश के आरक्षित वनों में आक्रामक विदेशी वनस्पति प्रजातियों (IAPS) के प्रसार पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) और भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (BSI) जैसी संस्थाएं इन हानिकारक पौधों की पहचान और निगरानी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कार्य कर रही हैं। वनों से इन आक्रामक पौधों को हटाने और स्वदेशी प्रजातियों के संरक्षण का दायित्व राज्य सरकारों को सौंपा गया है। इसके अतिरिक्त, ‘नेशनल वर्किंग प्लान कोड, 2023’ के माध्यम से वनों की पुनर्बहाली और पारिस्थितिक संतुलन को मजबूत करने पर विशेष बल दिया जा रहा है।
मुख्य बिंदु: निगरानी प्रणाली, राज्यवार प्रबंधन और कानूनी ढांचा
1. आक्रामक प्रजातियों की पहचान और निगरानी प्रणाली
- FSI का विशेष एल्बम: भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) ने 45 प्रमुख आक्रामक प्रजातियों की पहचान कर एक समर्पित एल्बम तैयार किया है। FSI के अनुसार, आरक्षित वनों में इन पौधों की उपस्थिति ‘बहुत घनी’ से लेकर ‘मध्यम-घनी’ और ‘कम’ पाई गई है।
- BSI की राज्यवार सूची: भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (BSI) ने राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) को वन और गैर-वन क्षेत्रों में फैल रही आक्रामक प्रजातियों की राज्यवार विस्तृत सूची सौंपी है।
- राष्ट्रीय प्रबंधन योजना: यह सूची आक्रामक प्रजातियों के लिए एकीकृत ‘राष्ट्रीय प्रबंधन योजना’ (National Management Plan) तैयार करने में मदद करेगी।
2. उन्मूलन और स्थानीय प्रबंधन की जिम्मेदारी
- राज्य सरकारों की भूमिका: आरक्षित और संरक्षित वनों से आक्रामक प्रजातियों को हटाने तथा स्वदेशी (Native) पौधों को लगाने का कार्य संबंधित राज्य सरकारों व केंद्र शासित प्रदेशों के वन विभागों द्वारा स्वीकृत वन एवं वन्यजीव प्रबंधन योजनाओं के तहत किया जाता है।
3. स्वदेशी प्रजातियों के संरक्षण हेतु नीतिगत ढांचा
- राष्ट्रीय वन नीति, 1988: यह नीति देशी प्रजातियों के वनीकरण और पुनरुत्पादन के माध्यम से पारिस्थितिक संतुलन और पर्यावरण स्थिरता बनाए रखने पर जोर देती है।
- नेशनल वर्किंग प्लान कोड, 2023: यह कोड पारिस्थितिकी-आधारित वन प्रबंधन को बढ़ावा देता है, जिसमें आक्रामक प्रजातियों का प्रबंधन, निम्नीकृत वनों का जीर्णोद्धार, मृदा व नमी संरक्षण और स्थानीय देशी प्रजातियों को प्राथमिकता देना शामिल है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| नोडल मंत्रालय | पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC)। |
| FSI द्वारा चिन्हित प्रजातियां | 45 प्रमुख आक्रामक आक्रामक विदेशी वनस्पति प्रजातियां (IAPS)। |
| बीएसआई का सहयोग | BSI ने राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) को राज्यवार सूची सौंपी। |
| मुख्य नीतिगत कोड | नेशनल वर्किंग प्लान कोड, 2023 (इकोसिस्टम-आधारित वन प्रबंधन हेतु)। |
भारत में भूजल की खपत, स्थिति और गुणवत्ता: रिपोर्ट 2025-26
- प्रारंभिक परीक्षा: भारत में जल संसाधन, भूजल बोर्ड (CGWB), जल जीवन मिशन और सरकारी योजनाएं।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): जल संरक्षण, भूजल निष्कर्षण, कृषि में जल-उपयोग दक्षता और सतत विकास।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर के तहत ‘डायनेमिक ग्राउंड वाटर रिसोर्सेज असेसमेंट 2025’ और ‘एनुअल ग्राउंड वाटर क्वालिटी रिपोर्ट 2025’ के आंकड़े साझा किए। रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत में कुल 449 अरब घन मीटर (BCM) वार्षिक भूजल पुनर्भरण में से 247 BCM का निष्कर्षण किया जा रहा है। देश में भूजल दोहन का राष्ट्रीय औसत 60.63% तक पहुंच चुका है।
मुख्य बिंदु: भूजल दोहन, गुणवत्ता और प्रमुख पहल
1. भूजल खपत और निष्कर्षण की स्थिति
- वार्षिक आंकड़े: कुल वार्षिक पुनर्भरण 449 BCM और निष्कर्षण योग्य संसाधन 408 BCM है। इसमें से 247 BCM भूजल निकाला जाता है।
- उपयोग का पैटर्न:
- कृषि (सिंचाई): 87% (215 BCM)।
- घरेलू उपयोग (पेयजल): 11% (28 BCM)।
- उद्योग: 2% (4 BCM)।
- राष्ट्रीय औसत से अधिक दोहन: पंजाब, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, पुडुचेरी, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, चंडीगढ़ और कर्नाटक में भूजल दोहन राष्ट्रीय औसत (60.63%) से अधिक है। देश के 281 जिलों में अत्यधिक दोहन देखा गया है।
- प्रति व्यक्ति उपलब्धता: सीडब्ल्यूसी (CWC) के अनुसार, वर्ष 2021 में प्रति व्यक्ति औसत वार्षिक जल उपलब्धता 1,573.19 घन मीटर थी।
2. भूजल की गुणवत्ता और संदूषण
- सामान्य स्थिति: देश का भूजल आमतौर पर पीने योग्य है और लगभग 99% निगरानी स्टेशनों का पानी सिंचाई के लिए उपयुक्त पाया गया।
- क्षेत्रीय संदूषण (बिहार का उदाहरण): बिहार में 584 नमूनों में से सीमित स्थानों पर विद्युत चालकता (5 नमूने), फ्लोराइड (39 नमूने) और नाइट्रेट (78 नमूने) की सांद्रता अनुमेय सीमा से अधिक पाई गई।
- सीमेंट-सीलिंग तकनीक: सीजीडब्ल्यूबी ने आर्सेनिक-प्रभावित क्षेत्रों में गहरे सुरक्षित जलभृतों को टैप करने के लिए सीमेंट-सीलिंग तकनीक विकसित की है।
3. जल संरक्षण और पुनर्भरण हेतु प्रमुख सरकारी पहल
- NAQUIM 1.0 व 2.0: राष्ट्रीय जलभृत मानचित्रण (NAQUIM 1.0) के तहत 25 लाख वर्ग किमी क्षेत्र का मानचित्रण पूरा हुआ। NAQUIM 2.0 के तहत प्राथमिकता वाले और संकटग्रस्त क्षेत्रों का उच्च-रिज़ॉल्यूशन मानचित्रण किया जा रहा है।
- जल जीवन मिशन (JJM): देश के 82% (15.90 करोड़) ग्रामीण परिवारों को नल से जल उपलब्ध कराया गया है।
- जल शक्ति अभियान व JSJB: ‘जल संचय जन भागीदारी’ (JSJB) और ‘कैच द रेन’ अभियानों के तहत 1.55 करोड़ से अधिक कृत्रिम पुनर्भरण संरचनाएं बनाई गईं।
- मिशन अमृत सरोवर: देश के प्रत्येक जिले में 75 जल निकायों का पुनरुद्धार; अब तक लगभग 69,000 अमृत सरोवर विकसित।
- PMKSY (सूक्ष्म सिंचाई): ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ (PDMC) के माध्यम से कृषि क्षेत्र में जल-उपयोग दक्षता बढ़ाना।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| मूल्यांकन संस्था | केंद्रीय भूमि जल बोर्ड (CGWB) एवं राज्य प्रशासन। |
| कुल भूजल पुनर्भरण | 449 BCM (निष्कर्षण योग्य: 408 BCM)। |
| भूजल दोहन दर | 60.63% (कृषि क्षेत्र का हिस्सा सबसे अधिक – 87%)। |
| शीर्ष अत्यधिक दोहन वाले राज्य | पंजाब, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, तमिलनाडु, यूपी, कर्नाटक। |
| आर्सेनिक बचाव तकनीक | CGWB की ‘सीमेंट-सीलिंग तकनीक’। |
भारत में छात्रों की आत्महत्या का मुद्दा और मानसिक स्वास्थ्य पहल
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय महत्व की सामाजिक-सांस्कृतिक घटनाएं, प्रमुख आयोग, नीतियां और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संस्थाएं।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधन, विकास प्रक्रियाएं, शासन व्यवस्था और सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास व प्रबंधन से संबंधित विषय।
चर्चा में क्यों?
शिक्षा मंत्रालय देश भर के शिक्षण संस्थानों में छात्रों की आत्महत्याओं को रोकने और उनके मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने के लिए बहुस्तरीय प्रयास किए जा रहे हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि अकादमिक दबाव, करियर की चिंता, अकेलापन और पारिवारिक मुद्दे इसके प्रमुख कारण हैं। इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने ‘मनोदर्पण’ पहल, 24×7 ‘टेली-मानस’ हेल्पलाइन और परामर्शदाताओं की नियुक्ति जैसे कई बड़े कदम उठाए हैं।
मुख्य बिंदु: मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए प्रमुख सरकारी प्रयास
1. स्कूलों और उच्च शिक्षण संस्थानों में ढांचागत सुधार
- मनोदर्पण: शिक्षा मंत्रालय का यह प्लेटफॉर्म टोल-फ्री हेल्पलाइन, ‘सहयोग’ (लाइव सेशन) और ‘परिचर्चा’ (वेबिनार) के जरिए छात्रों और अभिभावकों की मदद करता है।
- परामर्शदाताओं (Counsellors) की नियुक्ति:
- सीबीएसई ने सभी संबद्ध स्कूलों में वेलनेस टीचर अनिवार्य कर दिए हैं।
- जवाहर नवोदय विद्यालयों (JNVs) में 830 कॉन्ट्रैक्ट काउंसलर तैनात हैं।
- केंद्रीय विद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को भी काउंसलर नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
2. यूजीसी और कोचिंग सेंटरों के लिए दिशा-निर्देश
- एंटी-रैगिंग अभियान: यूजीसी ने 21 भाषाओं में अभियान चलाया है। 24×7 हेल्पलाइन और सख्त नियमों से रैगिंग पर रोक लगाई जा रही है।
- कोचिंग गाइडलाइंस (जनवरी 2024): कोचिंग सेंटरों में मानसिक दबाव कम करने के लिए काउंसलिंग, बैच विभाजन पर रोक और पारदर्शी फीस प्रणाली तय की गई है।
- IITs में विशेष पहल: IIT खड़गपुर ने ‘SETU’ मॉडल अपनाया है। वहीं IIT मद्रास और बॉम्बे जैसी संस्थाएं मेंटल हेल्थ वर्कशॉप करा रही हैं।
3. स्वास्थ्य मंत्रालय की राष्ट्रीय योजनाएं
- टेली-मानस: वर्ष 2022 में शुरू इस प्रोग्राम के तहत 36 राज्यों/यूटी में 53 सेल स्थापित हैं। अगस्त 2026 तक इस पर 43 लाख से अधिक कॉल handled की जा चुकी हैं। अब इसका ऐप और वीडियो कंसल्टेशन भी शुरू हो गया है।
- आयुष्मान आरोग्य मंदिर: 1.81 लाख से अधिक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को अपग्रेड कर वहां मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं जोड़ी गई हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| पहल / संस्था | नोडल एजेंसी | मुख्य उद्देश्य |
| मनोदर्पण | शिक्षा मंत्रालय | छात्रों और परिवारों को मनो-सामाजिक सहायता। |
| Tele-MANAS | स्वास्थ्य मंत्रालय | 24×7 मुफ्त टेली-मानसिक स्वास्थ्य सेवा। |
| SETU फ्रेमवर्क | IIT खड़गपुर | छात्रों को 24 घंटे मानसिक सहयोग प्रदान करना। |
| मालवीय मिशन | शिक्षा मंत्रालय | शिक्षकों को मेंटल हेल्थ ट्रेनिंग देना। |
विश्व शेर दिवस 2026: एशियाई शेरों की आबादी में ऐतिहासिक वृद्धि
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय महत्व की पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी घटनाएं, एशियाई शेर, प्रोजेक्ट लायन और जैव विविधता संरक्षण।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता ह्रास, वन्यजीव संरक्षण नीतियां, प्रोजेक्ट लायन और मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व।
चर्चा में क्यों?
विश्व शेर दिवस 2026 (10 अगस्त) के अवसर पर केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने एशियाई शेरों की आबादी में हुई शानदार वृद्धि के आंकड़े साझा किए। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2015 में एशियाई शेरों की जनसंख्या 523 थी, जो वर्ष 2025 तक बढ़कर 891 हो गई है। यह ऐतिहासिक वृद्धि वन अधिकारियों, संरक्षणवादियों और स्थानीय समुदायों के समर्पित प्रयासों का परिणाम है। इसके अलावा, ‘प्रोजेक्ट लायन’ के तहत शेरों का विचरण क्षेत्र भी 30,000 वर्ग किमी से बढ़कर 35,000 वर्ग किमी हो गया है।
मुख्य बिंदु: एशियाई शेरों का संरक्षण और ‘प्रोजेक्ट लायन’
1. शेरों की आबादी और क्षेत्र का विस्तार
- जनसंख्या में वृद्धि: 2015 से 2025 के बीच एशियाई शेरों की संख्या 523 से बढ़कर 891 पहुंच गई।
- भौगोलिक विस्तार: शेरों का विचरण क्षेत्र (Lion Range) वर्ष 2020 के लगभग 30,000 वर्ग किमी से बढ़कर लगभग 35,000 वर्ग किमी हो गया है।
2. ‘प्रोजेक्ट लायन’
- शुरुआत: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2020 को एशियाई शेरों के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए ‘प्रोजेक्ट लायन’ की घोषणा की थी।
- होलिस्टिक दृष्टिकोण: यह प्रोजेक्ट ‘लैंडस्केप-लेवल’ पर काम करता है। इसमें केवल शेरों का संरक्षण ही नहीं, बल्कि उनके पूरे आवास का सुधार शामिल है।
- प्रमुख घटक:
- तकनीकी व वैज्ञानिक ट्रैकिंग: शेरों की सेहत और आवाजाही पर वैज्ञानिक निगरानी।
- रोग निगरानी व पशु चिकित्सा: संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए विशेष पशु चिकित्सा ढांचा।
- समुदाय की भागीदारी: स्थानीय लोगों के साथ लाभ साझा करना और सहअस्तित्व (Coexistence) को बढ़ावा देना।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| प्रजाति | एशियाई शेर (Panthera leo persica)। |
| जनसंख्या (2025) | 891 (2015 में 523 थी)। |
| प्राकृतिक आवास | गिर राष्ट्रीय उद्यान और सौराष्ट्र क्षेत्र (गुजरात)। |
| प्रोजेक्ट लायन की शुरुआत | 15 अगस्त 2020। |
| विश्व शेर दिवस | 10 अगस्त। |
क्षरित वन भूमि का पुनर्उद्धार: ग्रीन इंडिया मिशन और नगर वन योजना
- प्रारंभिक परीक्षा: पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी, राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC), सतत विकास और हरित पहल।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): वनों के क्षरण को रोकने, कार्बन सिंक के निर्माण, पारिस्थितिक संतुलन और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में ‘सामुदायिक सहभागिता’ की भूमिका का विश्लेषण करने के लिए अत्यंत प्रासंगिक है।
चर्चा में क्यों?
वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने लोकसभा में राष्ट्रीय हरित भारत मिशन (GIM) और नगर वन योजना (NVY) की अद्यतन प्रगति साझा की है। वर्ष 2015-16 से अब तक GIM के तहत 17 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश में 1,84,467 हेक्टेयर क्षरित वन और गैर-वन भूमि का सफलतापूर्वक पुनरुद्धार किया गया है। UPSC प्रिलिम्स दृष्टिकोण से: जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC) के 8 प्राथमिक मिशनों में शामिल ‘ग्रीन इंडिया मिशन’ का मुख्य उद्देश्य वन आवरण में वृद्धि और कार्बन सिंक को बढ़ावा देना है।
मुख्य बिंदु: वन पुनरुद्धार और शहरी वनीकरण के प्रयास
1. ग्रीन इंडिया मिशन (GIM) का प्रदर्शन
- उद्देश्य: एकीकृत लैंडस्केप दृष्टिकोण से क्षरित वन व गैर-वन क्षेत्रों का पुनरुद्धार करना।
- भौतिक प्रगति: 2015-16 से अब तक कुल 1,84,467 हेक्टेयर भूमि पर वृक्षारोपण/इको-रिस्टोरेशन कार्य हुआ।
- शीर्ष प्रदर्शनकर्ता राज्य:
- मध्य प्रदेश: 32,831 हेक्टेयर (सर्वाधिक)
- छत्तीसगढ़: 22,601 हेक्टेयर
- ओडिशा: 20,711 हेक्टेयर
- वित्तीय आवंटन: वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 7 राज्यों (छत्तीसगढ़, हरियाणा, केरल, एमपी, मणिपुर, सिक्किम, यूपी) को ₹57.08 करोड़ आवंटित किए गए।
2. नगर वन योजना (NVY)
- समयावधि: 2020-21 से 2026-27।
- लक्ष्य: शहरी क्षेत्रों में हरित आवरण बढ़ाने के लिए 600 नगर वन और 400 नगर वाटिकाएं विकसित करना।
- फंडिंग: इस योजना के लिए CAMPA (राष्ट्रीय प्राधिकरण) से फंड जारी किया जाता है।
3. सामुदायिक भागीदारी
- योजना का क्रियान्वयन स्थानीय स्तर पर संयुक्त वन प्रबंधन समितियों (JFMCs), ग्राम वन समितियों (VFCs) और स्व-सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से होता है।
- ये संस्थाएं नर्सरी निर्माण, पौधारोपण के रखरखाव और आजीविका गतिविधियों में सीधी भूमिका निभाती हैं।
4. बहुस्तरीय निगरानी प्रणाली (Monitoring System)
- तकनीकी उपकरण: जियो-टैगिंग, GIS-आधारित मैपिंग, Geo-tagged तस्वीरें, .kml फाइलें और ड्रोन तकनीक।
- सत्यापन: राज्य वन विभागों द्वारा थर्ड-पार्टी मॉनिटरिंग और फील्ड निरीक्षण।
- FSI की भूमिका: भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) रिमोट सेंसिंग और ग्राउंड ट्रूथिंग के ज़रिए द्विवार्षिक आधार पर ISFR (इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट) प्रकाशित करता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| योजना / पहलू | नोडल निकाय / तथ्य | मुख्य विशेषता / उद्देश्य |
| ग्रीन इंडिया मिशन (GIM) | NAPCC के 9 मिशनों में से एक | 2015-16 से लागू; लैंडस्केप-बेस्ड इको-रिस्टोरेशन। |
| नगर वन योजना | पर्यावरण मंत्रालय (CAMPA फंडेड) | 2020-27 के बीच 600 नगर वन और 400 नगर वाटिकाएं। |
| कार्यान्वयन संस्थाएं | JFMC, VFC और SHG | जनभागीदारी से वनीकरण और आजीविका सुरक्षा। |
| निगरानी तकनीक | FSI, GIS, Drone & Remote Sensing | पारदर्शी और डेटा-संचालित मूल्यांकन। |
आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) त्रैमासिक बुलेटिन: अप्रैल-जून 2026
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की आर्थिक एवं सामाजिक विकास से जुड़ी नीतियां, सांख्यिकी, रोजगार और श्रम बल संकेतक।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था, समावेशी विकास, रोजगार सृजन, श्रम बाजार सुधार और MoSPI का सांख्यिकीय ढांचा।
चर्चा में क्यों?
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) और सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने अप्रैल-जून 2026 तिमाही का आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) बुलेटिन जारी किया है। देश में कुल नियोजित व्यक्तियों की संख्या 56.6 करोड़ (40.2 करोड़ पुरुष और 16.4 करोड़ महिला) तक पहुंच गई है। शहरी बेरोजगारी दर 6.7% पर स्थिर बनी हुई है, जबकि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में नियमित वेतनभोगी कर्मचारियों की हिस्सेदारी में सुधार देखा गया है।
मुख्य बिंदु: रोजगार के प्रमुख आंकड़े और क्षेत्रीय रुझान
1. प्रमुख श्रम बल संकेतक (CWS के तहत, 15 वर्ष व उससे अधिक)
- श्रम बल भागीदारी दर (LFPR):
- समग्र LFPR: 54.6% (पिछली तिमाही में 55.5% थी)।
- शहरी LFPR: 50.2% पर स्थिर (शहरी पुरुषों का LFPR बढ़कर 75.3% हुआ)।
- महिला LFPR: 33.2%।
- श्रमिक जनसंख्या अनुपात (WPR):
- समग्र WPR: 51.7%।
- शहरी WPR: 46.8% पर स्थिर (पुरुष WPR: 70.7%, महिला WPR: 22.8%)।
- बेरोजगारी दर (UR):
- शहरी बेरोजगारी दर: 6.7% पर स्थिर।
- ग्रामीण बेरोजगारी दर: 4.8% (पिछली तिमाही में 4.3% थी)।
- शहरी महिला बेरोजगारी दर: घटकर 8.7% रही (पिछली तिमाही में 9.1% थी)।
2. रोजगार की प्रकृति: नियमित वेतनभोगी वर्ग में वृद्धि
- ग्रामीण क्षेत्र: नियमित वेतनभोगी कर्मचारियों का हिस्सा बढ़कर 16.1% हो गया (पिछली तिमाही में 15.5%)।
- शहरी क्षेत्र: नियमित वेतनभोगी वर्ग बढ़कर 49.3% तक पहुंच गया (पिछली तिमाही में 48.9%)।
3. क्षेत्रवार (Sector-wise) रोजगार का बदलाव
- द्वितीयक क्षेत्र (माइनिंग व मैन्युफैक्चरिंग):
- ग्रामीण क्षेत्रों में विनिर्माण/द्वितीयक क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़कर 24.4% हुई।
- शहरी क्षेत्रों में यह बढ़कर 31.9% हो गई।
- तृतीयक क्षेत्र (सेवाएं): ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा क्षेत्र का योगदान बढ़कर 22.7% हुआ।
- कृषि क्षेत्र: ग्रामीण आबादी का कृषि पर निर्भरता अनुपात घटकर 52.9% (पिछली तिमाही के 55.8% से) पर आ गया है।
4. PLFS की संशोधित कार्यप्रणाली (जनवरी 2025 से लागू)
- व्यापक कवरेज: अब PLFS के तहत ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए मासिक और त्रैमासिक आंकड़े ‘वर्तमान साप्ताहिक स्थिति’ (CWS) ढाँचे पर जारी किए जा रहे हैं।
- निरंतरता: अप्रैल-जून 2026 का यह बुलेटिन ग्रामीण और शहरी दोनों डेटा को एक साथ शामिल करने वाली इस नई श्रृंखला का 5वां संस्करण है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| संकेतक / मापदंड | जारी आंकड़े / तथ्य (अप्रैल-जून 2026) |
| नोडल एजेंसी | NSO, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI)। |
| कुल कार्यबल | 56.6 करोड़ (पुरुष: 40.2 करोड़, महिला: 16.4 करोड़)। |
| शहरी बेरोजगारी दर | 6.7% (महिला शहरी बेरोजगारी दर: 8.7%)। |
| शहरी पुरुष LFPR | 75.3%। |
| मूल्यांकन ढांचा | वर्तमान साप्ताहिक स्थिति (Current Weekly Status – CWS)। |
सांस्कृतिक कूटनीति के लिए राष्ट्रीय ढाँचा (National Framework for Cultural Diplomacy)
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय महत्व की सांस्कृतिक घटनाक्रम, भारतीय कला, संस्कृति एवं वैश्विक धरोहर पहल।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): भारत के हित और विदेश नीति पर विकसित व विकासशील देशों की नीतियों का प्रभाव, सांस्कृतिक कूटनीति (Cultural Diplomacy) एवं सॉफ्ट पावर।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में भारत की ‘सांस्कृतिक कूटनीति’ (Cultural Diplomacy) को मजबूत करने वाली रणनीतियों और ग्लोबल एंगेजमेंट स्कीम (GES) की प्रगति रिपोर्ट साझा की। सरकार भारतीय सभ्यता की विरासत, विविधता और समकालीन रचनात्मक परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने के लिए संस्थागत तंत्र को लगातार मजबूत कर रही है।
मुख्य बिंदु: वैश्विक सांस्कृतिक जुड़ाव का ढाँचा
1. ग्लोबल एंगेजमेंट स्कीम (GES)
संस्कृति मंत्रालय की यह एक प्रमुख अम्ब्रेला योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग के माध्यम से भारत की सॉफ्ट पावर का विस्तार करना है।
योजना के 4 प्रमुख घटक:
- अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक विनिमय कार्यक्रम (ICEP): इसके तहत विदेशों में ‘फेस्टिवल्स ऑफ इंडिया’, कलाकारों का आदान-प्रदान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है।
- प्रोजेक्ट मौसम: हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के साथ प्राचीन समुद्री सांस्कृतिक व व्यापारिक संबंधों का पुनरुद्धार।
- बृहत्तर भारत: दक्षिण-पूर्व और मध्य एशिया में भारतीय सांस्कृतिक प्रभावों तथा ऐतिहासिक संबंधों का दस्तावेजीकरण और संरक्षण।
- भारत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत संरक्षण योजना: यूनेस्को (UNESCO) सिद्धांतों के अनुरूप स्थानीय और पारंपरिक सांस्कृतिक प्रथाओं को वैश्विक पहचान देना।
2. द्विपक्षीय व बहुपक्षीय सांस्कृतिक सहयोग
- सांस्कृतिक विनिमय कार्यक्रम (CEPs): भारत के वर्तमान में 98 देशों के साथ वैध सांस्कृतिक विनिमय समझौते हैं। ये समझौते संग्रहालयों, धरोहरों और प्रदर्शन कलाओं (Performing Arts) के क्षेत्र में काम करते हैं।

- बहुपक्षीय मंच: भारत BRICS, G20, SCO (शंघाई सहयोग संगठन) और BIMSTEC जैसे मंचों के जरिए सांस्कृतिक जुड़ाव को बढ़ावा दे रहा है।
3. भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) की भूमिका
विदेश मंत्रालय के तहत कार्यरत ICCR (Indian Council for Cultural Relations) इस तंत्र को जमीन पर उतारने का काम करती है:
- सांस्कृतिक केंद्र: विदेशों में स्थित भारतीय सांस्कृतिक केंद्रों के नेटवर्क के जरिए पीपुल-टू-पीपुल संपर्क बढ़ाना।
- प्रमुख आयोजन: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन, विदेश में आर्ट रेजीडेंसी और वैश्विक कलाकारों को भारत में आमंत्रित कर अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक महोत्सवों का संचालन।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / संगठन | मुख्य विवरण व नोडल संस्था |
| ग्लोबल एंगेजमेंट स्कीम | संस्कृति मंत्रालय की अम्ब्रेला योजना। |
| कुल वैध CEPs | विश्व के 98 देशों के साथ सांस्कृतिक समझौते। |
| ICCR | विदेश मंत्रालय के तहत स्वायत्त संस्था (स्थापना: 1950)। |
| बहुपक्षीय भागीदारी | G20, BRICS, SCO और BIMSTEC के सांस्कृतिक मंच। |