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8 August 2026 The Hindu Notes In Hindi Pdf

The Hindu Notes in Hindi PDF के इस अंक में मक्का संयुक्त रक्षा समझौता, डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) अधिनियम 2023, आरटीआई अधिनियम, कैप्टिव-ब्रेड स्लेंडर-बिल्ड गिद्धों की जंगल में पहली उड़ान, सीमावर्ती क्षेत्रों में नवीकरणीय ऊर्जा दिशानिर्देश, केरल में AI-संचालित शासन, भारत-अमेरिका संबंध और विदेशी मुद्रा भंडार जैसे प्रमुख समसामयिक विषयों को शामिल किया गया है। मानक स्रोतों पर आधारित यह संकलन आपकी मुख्य परीक्षा (Mains) और प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) की तैयारी को सुदृढ़ बनाने में पूरी तरह सहायक है।

परिचय और समझौते की मुख्य बातें

  • हस्ताक्षरकर्ता देश: पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये (Turkiye)।
  • मुख्य प्रतिबद्धता:
    • “सामूहिक रक्षा” (Collective Defence) और “सामूहिक प्रतिरोध” (Collective Deterrence)।
    • घोषणा: इनमें से किसी भी एक देश पर हुआ सशस्त्र हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।

भू-राजनीतिक पृष्ठभूमि और कारण

  • क्षेत्रीय सुरक्षा संकट: यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया (West Asia) कई सुरक्षा संकटों से जूझ रहा है:
    • ईरान संघर्ष: अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ शुरू किया गया युद्ध अभी भी अनसुलझा है। पिछले 5 महीनों के दौरान सभी अरब खाड़ी देश ईरान के लगातार हमलों की चपेट में आए हैं।
    • हूथी और यमन संकट: पिछले महीने यमन के एक हवाई अड्डे पर हमले के बाद, ईरान समर्थित हूतियों (अंसार अल्लाह) ने सऊदी तेल सुविधाओं पर हमले किए और देश के लाल सागर (Red Sea) बंदरगाहों पर समुद्री नाकाबंदी लगा दी।
    • अन्य संघर्ष: सऊदी अरब को यमन के हूतियों से खतरा है, जबकि पाकिस्तान का पिछले कुछ समय से तालिबान शासित अफगानिस्तान के साथ कई बार संघर्ष हुआ है।

देशों की विशिष्ट पहचान और भूमिका

  • सऊदी अरब: तेल से समृद्ध फारस की खाड़ी का एक साम्राज्य (Oil-rich Persian Gulf kingdom)।
  • पाकिस्तान: दक्षिण एशियाई परमाणु शक्ति संपन्न देश (South Asian nuclear power), जो क्षेत्र में एक सुरक्षा साझीदार और मध्यस्थ (ईरान और अमेरिका के बीच) के रूप में बड़ी भूमिका निभाना चाहता है।
  • तुर्की: नाटो (NATO) का एक सदस्य देश, जो व्यापक पश्चिम एशिया में अधिक प्रमुख सुरक्षा भूमिका की तलाश में है।
  • तुर्की का आधिकारिक रुख: तुर्किये के सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह समझौता “रक्षा-उन्मुख साझेदारी” है जो किसी भी देश को लक्षित नहीं करती है, बल्कि बोझ साझा करने (burden-sharing) और सामूहिक सुरक्षा के माध्यम से क्षेत्रीय और वैश्विक शांति को बढ़ावा देती है।

पूर्व समझौते और व्यावहारिक दायरा (Practical Scope)

  • सितंबर 2025 का समझौता: इस त्रिपक्षीय समझौते से पहले, सितंबर 2025 में (इजराइल द्वारा कतर पर हमला किए जाने के कुछ हफ़्ते बाद) सऊदी अरब और पाकिस्तान ने एक रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें दोनों देशों ने एक-दूसरे के खिलाफ किसी भी आक्रामकता को दोनों पर हमला मानने की प्रतिबद्धता जताई थी।
  • व्यावहारिक सीमा पर सवाल: सितंबर 2025 के समझौते के बाद से पाकिस्तान और सऊदी अरब दोनों पर हमले हुए (पाकिस्तान का अफगानिस्तान संघर्ष और सऊदी अरब पर ईरान/हूतियों के हमले), लेकिन किसी भी देश ने एक-दूसरे की ओर से सैन्य हस्तक्षेप नहीं किया, जिससे ऐसे पारस्परिक रक्षा समझौतों के व्यावहारिक दायरे पर सवाल उठते हैं।
  • नया दायरा: त्रिपक्षीय मक्का समझौते में “तीनों राज्यों के बीच रक्षा सहयोग के सभी पहलुओं को बढ़ाने” का प्रावधान है, जो घनिष्ठ सैन्य समन्वय और व्यापक सुरक्षा सहयोग का संकेत देता है।

संदर्भ और न्यायालय का रुख

  • मामला: सुप्रीम कोर्ट ने इस बात की जांच करने पर सहमति जताई है कि क्या डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) अधिनियम, 2023 का उपयोग सभी डेटा को “व्यक्तिगत” (Personal) के रूप में वर्गीकृत करके सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम को कमजोर करने और खोजी पत्रकारों की आवाज़ दबाने के लिए किया जा सकता है।
  • न्यायालय की टिप्पणी:
    • “पहला कानून (RTI अधिनियम, 2005) शर्तों के साथ कुछ पहुंच प्रदान करता था। यहाँ (2023 अधिनियम) एक en bloc (समग्र) प्रतिबंध है। क्या यह बाद का कानून पहले कानून के प्रतिकूल (Repugnant) है? इसे अत्यधिक सावधानी से देखा जाना चाहिए। आखिरकार, दोनों केंद्रीय कानून हैं। इन दोनों में तालमेल बिठाने की जरूरत है।”
  • डोमेन का अंतर: अदालत ने कहा कि RTI कानून DPDP अधिनियम की तुलना में “बहुत बड़े डोमेन” पर काम करता है। RTI सभी प्रकार के डेटा को कवर करता है, जबकि DPDP कानून केवल डिजिटल रूप में मौजूद डेटा से संबंधित है (भले ही आज अधिकांश डेटा डिजिटल फॉर्मेट में है)।

मुख्य विवाद: धारा 44(3) और RTI में संशोधन

  • चुनौती दी गई धारा: DPDP अधिनियम की धारा 44(3), जिसने RTI अधिनियम में संशोधन किया है।
  • प्रावधान का प्रभाव: इसके तहत सार्वजनिक प्राधिकरणों (Public Authorities) को इस आधार पर जानकारी देने से पूरी तरह मना करने की सुविधा मिल गई है कि मांगी गई जानकारी “व्यक्तिगत” प्रकृति की है।
  • याचिकाकर्ताओं के तर्क:
    • यह अधिकार आम नागरिकों को राज्य के दखल से बचाने के लिए था, लेकिन इसका विस्तार राज्य और लोक सेवकों को RTI खुलासे से बचाने के लिए कर दिया गया है।

RTI अधिनियम (धारा 8(1)(j)) में बदलाव

  • मूल स्थिति (RTI अधिनियम, 2005 – धारा 8(1)(j)):
    • यदि मांगी गई जानकारी का किसी सार्वजनिक गतिविधि से कोई संबंध नहीं है या प्रकटीकरण से निजता का उल्लंघन होता है, तो अधिकारियों को व्यक्तिगत जानकारी देने से छूट दी गई थी।
    • अपवाद: इसके बावजूद, यदि सार्वजनिक हित (Public Interest) निजता से अधिक भारी पड़ता था, तो सरकार को जानकारी का खुलासा करना ही होता था।
  • वर्तमान स्थिति (2023 अधिनियम के बाद): DPDP अधिनियम की धारा 44(3) ने इस पुराने संतुलन को प्रभावित किया है।

खोजी पत्रकारिता (Investigative Journalism) पर प्रभाव

  • पत्रकारों के समक्ष संकट:
    • DPDP अधिनियम पत्रकारों को डेटा तक पहुंच के लिए कोई विशेष छूट (Special Exemption) प्रदान नहीं करता है।
    • रिपोर्टिंग करते समय पत्रकारों को ‘डेटा प्रिंसिपल’ (जिसकी जानकारी है) की सहमति लेनी होगी।
    • यदि डेटा प्रिंसिपल अपने डेटा को मिटाना (Erase) चाहता है, तो वह ऐसा कर सकता है, जिसका खोजी पत्रकारिता पर सीधा और नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • न्यायालय का दृष्टिकोण: अदालत ने स्पष्ट किया कि पत्रकारों को डेटा तक अछूती पहुंच (Unreserved Access) वाले “विशेष वर्ग” के रूप में नहीं माना जा सकता है।

घटना और ऐतिहासिक महत्व

  • घटना: बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) के असम स्थित संरक्षण केंद्र में कैप्टिविटी (संरक्षण) में पाले गए पाँच स्लेंडर-बिल्ड गिद्धों (Slender-billed Vultures) को शुक्रवार को खुले जंगल में छोड़ा गया।
  • वैश्विक महत्व: यह दुनिया में अपनी तरह का पहला ऐसा मामला है जब कैप्टिव-ब्रेड स्लेंडर-बिल्ड गिद्धों को खुले में छोड़ा गया है।
  • कुल छोड़े गए पक्षी: कुल 10 गिद्ध छोड़े गए, जिनमें 5 कैप्टिव-ब्रेड स्लेंडर -बिल्ड गिद्ध और 5 कैप्टिव-ब्रेड व्हाइट-रम्पेड गिद्ध (White-rumped vultures) शामिल हैं।

स्थान और केंद्र से संबंधित तथ्य

  • प्रजनन केंद्र (Breeding Centre): इन पक्षियों को गुवाहाटी के पास रानी स्थित गिद्ध संरक्षण प्रजनन केंद्र से लाया गया था।
  • विमोचन स्थल (Release Site): इन्हें काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और बाघ अभयारण्य के बिस्वनाथ डिवीजन में स्थित जटायु सॉफ्ट रिलीज सेंटर पर छोड़ा गया।

भारत में गिद्ध

भारत में गिद्धों की कुल 9 प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें से 6 स्थानीय (Resident) और 3 विदेशी या प्रवासी (Migratory) हैं। इनकी संख्या में 1990 के दशक से ‘डाइक्लोफेनाक’ दवा के कारण 90% से अधिक की भारी गिरावट आई है। इन्हें प्रकृति का सफाईकर्मी कहा जाता है।  

स्थानीय (स्थाई निवासी / Resident) गिद्ध प्रजातियाँ

  • व्हाइट-रम्प्ड वल्चर: गंभीर रूप से संकटग्रस्त (Critically Endangered)।  
  • इंडियन वल्चर / लॉन्ग-बिल्ड वल्चर: गंभीर रूप से संकटग्रस्त (Critically Endangered)।  
  • स्लेंडर-बिल्ड वल्चर: गंभीर रूप से संकटग्रस्त (Critically Endangered)।  
  • रेड-हेडेड वल्चर / किंग वल्चर: गंभीर रूप से संकटग्रस्त (Critically Endangered)।  
  • इजिप्शियन वल्चर (Egyptian Vulture): संकटग्रस्त (Endangered)।  
  • बियर्डेड वल्चर / लैमर्जियर: संकट के करीब (Near Threatened)।  

विदेशी (प्रवासी / Migratory) और शीतकालीन आगंतुक प्रजातियाँ

ये प्रजातियाँ ठंडे क्षेत्रों से सर्दियों में भारत आती हैं:  

  • सिनेरियस वल्चर / ब्लैक वल्चर: संकट के करीब (Near Threatened) – दुनिया का सबसे भारी ओल्ड वर्ल्ड गिद्ध।  
  • यूरेशियन ग्रिफॉन वल्चर: कम चिंताजनक (Least Concern)।  
  • हिमालयन ग्रिफॉन वल्चर: संकट के करीब (Near Threatened) – यह उच्च ऊंचाई वाला स्थानीय पक्षी भी है और मैदानी इलाकों में सर्दियों में प्रवासी के रूप में भी देखा जाता है।  

 महत्वपूर्ण अन्य बिंदु

  • संरक्षण स्थिति (Conservation Status): अधिकांश प्रमुख गिद्ध प्रजातियाँ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I (Schedule I) में और CITES के परिशिष्ट-II (Appendix II) में शामिल हैं।
  • संरक्षण पहल: हरियाणा के पिंजौर में देश का पहला गिद्ध संरक्षण और प्रजनन केंद्र (VCBC) स्थापित किया गया था, जिसका संचालन बॉम्बे नेचुरल History Society (BNHS) द्वारा किया जाता है।

कारण

  • सीमावर्ती क्षेत्रों में सोलर, विंड और हाइब्रिड नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) परियोजनाओं के लिए नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) को प्राप्त आवेदनों में भारी वृद्धि और इसके राष्ट्रीय सुरक्षा पर संभावित प्रभावों के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है।

नए दिशानिर्देशों के मुख्य प्रावधान (क्षेत्रवार प्रतिबंध)

दिशानिर्देशों के तहत अंतरराष्ट्रीय सीमा, नियंत्रण रेखा (LoC) और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास के क्षेत्रों को निम्नलिखित श्रेणियों में बांटा गया है:

  • 0 से 1 किलोमीटर (प्रतिबंधित क्षेत्र – Restricted Area):
    • अंतरराष्ट्रीय सीमा के 1 किमी के भीतर इन परियोजनाओं पर पूर्ण प्रतिबंध (Blanket Ban) लगा दिया गया है।
    • इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की परियोजना गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी।
  • 1 से 20 किलोमीटर:
    • इस क्षेत्र में प्रस्तावित परियोजनाओं के लिए रक्षा मंत्रालय (MoD) से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना अनिवार्य होगा।
  • 50 किलोमीटर का दायरा:
    • LoC, LAC और अंतरराष्ट्रीय सीमा से 50 किमी के भीतर प्रस्तावित सभी सोलर, विंड और हाइब्रिड ऊर्जा परियोजनाओं के लिए गृह मंत्रालय (MHA) से सुरक्षा clearance लेना अनिवार्य होगा।
    • 1 किमी से 50 किमी के बीच के सभी प्रस्तावों का मूल्यांकन मामले-दर-मामले (Case-by-case basis) के आधार पर किया जाएगा।

विदेशी भागीदारी और श्रम संबंधी प्रतिबंध

  • कर्मचारी और श्रम प्रतिबंध:
    • आवेदकों को गृह मंत्रालय (MHA) की पूर्व अनुमति के बिना पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन के इंजीनियरों, स्टाफ, कर्मचारियों या मजदूरों को नियुक्त करने की अनुमति नहीं होगी।
  • भूमि हस्तांतरण (Land Transfer):
    • केंद्रीय सरकार की पूर्व अनुमति और MHA से सुरक्षा मंजूरी के बिना परियोजना डेवलपर्स को विदेशी कंपनियों को भूमि हस्तांतरित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

घटनाक्रम और सेंसरशिप

  • प्रभावित प्लेटफॉर्म: मेटा (Meta) का इंस्टाग्राम और फेसबुक।
  • घटना: राजनीतिक नेताओं, राजनीतिक दलों, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के सदस्यों और आम प्रदर्शनकारियों की पोस्ट इंस्टाग्राम से तेजी से गायब होने लगी हैं।
  • कारण: केंद्र सरकार और कंपनी के नेतृत्व के बीच हुई बैठकों के बाद, सरकार ने पिछले महीने हुए युवा प्रदर्शनों (जिसके अंत में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ था) के बाद एंटी-एस्टेब्लिशमेंट (व्यवस्था विरोधी) सोशल मीडिया सामग्री के प्रसार (amplification) पर नकेल कसना शुरू किया है।

कानूनी और तकनीकी तंत्र (Legal & Technical Mechanism)

  • सेंसरशिप का आधार: भारत में ब्लॉक की गई पोस्ट के स्क्रीनशॉट में आईटी नियम, 2021 (IT Rules, 2021) का हवाला दिया गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि यह सामग्री टेकडाउन तंत्र (takedown mechanism) के जरिए हटाई जा रही है।
  • धारा 79(3)(b) बनाम धारा 69A:
    • X (पूर्व में ट्विटर): धारा 79(3)(b) के तहत प्राप्त होने वाले कई नोटिसों को नहीं हटाता है, क्योंकि इन नोटिसों में (धारा 69A के विपरीत) कोई आपराधिक दायित्व (criminal liability) शामिल नहीं होता है।
    • मेटा (Instagram/Facebook): ऐसे अनुरोधों का स्वतः पालन करता है, जिससे सरकार को त्वरित सेंसरशिप की व्यापक शक्तियां मिल जाती हैं।
  • सहयोग पोर्टल (Sahyog Portal): गृह मंत्रालय (Home Ministry) के इस पोर्टल के माध्यम से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर कई धारा 79(3)(b) अनुरोध दाखिल किए जाते हैं।

सामान्य अध्ययन पेपर-II: शासन, संविधान, राजव्यवस्था और सामाजिक न्याय

केरल की प्रशासनिक स्थिति और वर्तमान चुनौतियाँ       

  • ऐतिहासिक ताकतें: उच्च शिक्षित नागरिक, मजबूत सार्वजनिक संस्थान और सार्वजनिक चर्चा की एक प्रबुद्ध परंपरा।
  • संरचनात्मक कमजोरियां (Structural Vulnerabilities):
    • प्रशासनिक मशीनरी का खंडित सूचना प्रवाह, देरी से रिपोर्टिंग और कठोर, विभाग-केंद्रित साइलो पर निर्भर रहना।
    • वार्षिक रिपोर्ट और पूर्वव्यापी समीक्षाओं (retrospective reviews) पर निर्भर रहना आज एक संरचनात्मक खतरा (structural hazard) बन गया है।
  • पारंपरिक प्रणालियों की सीमाएं: स्वास्थ्य, ऊर्जा, स्थानीय स्वशासन, समाज कल्याण, वित्त, कृषि और शिक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्र असंगत रिपोर्टिंग फॉर्मेट और डिस्कनेक्टेड समीक्षा चक्रों के साथ काम करते हैं। अधिकांश कार्यक्रमों में वास्तविक समय की निगरानी (real-time monitoring) का अभाव है।

नीतिगत अंतर्संबंध (Interconnected Public Policy)

  • आधुनिक लोक नीति अलग-थलग होकर काम नहीं करती; यह कारण और प्रभाव का एक अत्यधिक परस्पर जुड़ा हुआ वेब है।
  • उदाहरण: ग्रामीण आवास योजना सीधे तौर पर बिजली की मांग को बदलती है; ऊर्जा मूल्य निर्धारण घरेलू अर्थशास्त्र को नया आकार देता है। ये आर्थिक बदलाव पोषण और स्वास्थ्य परिणामों को प्रभावित करते हैं, जो अंततः कार्यबल उत्पादकता और दीर्घकालिक राजकोषीय क्षमता तय करते हैं। व्यक्तिगत विभागों के अपने संकीर्ण दायरे में अनुकूलन करने से राज्य इन द्वितीयक प्रभावों (second-order effects) को प्रबंधित करने की क्षमता खो देता है।

समाधान: एक ‘रियल-टाइम डिजिटल नर्वस सिस्टम’ (AI-संचालित गवर्नेंस डैशबोर्ड)

  • जीवित संस्थागत तंत्र: सभी विभागों, सार्वजनिक उपयोगिताओं और स्थानीय निकायों से लाइव डेटा स्ट्रीम को एकीकृत करके यह सार्वजनिक कार्यक्रमों को शुरू से अंत तक (बजट आवंटन से लेकर धरातल पर क्रियान्वयन और लाभार्थी परिणामों तक) ट्रैक कर सकता है।
  • मशीन-लर्निंग की भूमिका: विसंगतियों, देरी, लागत वृद्धि और क्रियान्वयन अंतराल का स्वचालित रूप से पता लगाना और भविष्य के पूर्वानुमान वाले अलर्ट (predictive alerts) देना।

विभिन्न क्षेत्रों में अनुप्रयोग (Sectoral Application)

  • सार्वजनिक स्वास्थ्य: अस्पताल की क्षमता, दवा की सूची, एम्बुलेंस प्रतिक्रिया समय और रोग निगरानी की वास्तविक समय पर निगरानी।
  • ऊर्जा क्षेत्र: बिजली उत्पादन, वितरण घाटे, सब्सिडी प्रवाह और रूफटॉप सोलर को एक मंच पर लाना।
  • विकेंद्रीकृत शासन: स्थानीय स्वशासन संस्थाओं द्वारा परियोजना के क्रियान्वयन, निधि उपयोग और नागरिक शिकायत समाधान समय सीमा को ट्रैक करना।
  • समाज कल्याण: डेटा सामंजस्य (database reconciliation) के माध्यम से दोहराव या अवांछित बहिष्कारों (unwarranted exclusions) को रोकना।
  • सार्वजनिक वित्त: ट्रेजरी नकदी प्रवाह और प्रतिबद्ध देनदारियों की लाइव दृश्यता के माध्यम से राजकोषीय अनुशासन को मजबूत करना।

संस्थागत और कानूनी सुरक्षा उपाय (Guardrails)

  • राज्य का स्वामित्व: सुधार एक ठोस, राज्य के स्वामित्व वाले डिजिटल ढांचे पर आधारित होना चाहिए, जहाँ डेटा केरल की संप्रभु संपत्ति बना रहे।
  • ऑडिटेबिलिटी (Auditable AI): हर AI-उत्पादित अलर्ट या नीतिगत सिफारिश पूरी तरह से ऑडिटेबल होनी चाहिए, जिससे वैधानिक निरीक्षण, सतर्कता समीक्षा और विधायी जांच के लिए निर्णय लॉग सुरक्षित रहें।
  • कानूनी ढांचा: पहचान, पात्रता और लेनदेन डेटा को सख्त कानूनी oversight के तहत लाना ताकि वित्तीय हेराफेरी (fiscal pilferage) को रोका जा सके।

 भ्यास प्रश्न (Mains Practice Question)

“आधुनिक लोक प्रशासन में पूर्वव्यापी समीक्षाएं प्रशासनिक अक्षमता से अधिक एक संरचनात्मक जोखिम बन चुकी हैं।” चर्चा कीजिए कि AI-संचालित वास्तविक समय निगरानी (Real-Time Monitoring) किस प्रकार लोकतांत्रिक जवाबदेही और राजकोषीय अनुशासन को सुदृढ़ कर सकती है? (250 शब्द / 15 अंक)

सामान्य अध्ययन पेपर-II: अंतर्राष्ट्रीय संबंध

अमेरिकी स्टेटक्राफ्ट में बदलाव: ‘लचीला यथार्थवाद’ (Flexible Realism)

  • टैरिफ से आगे की सोच: भारत और अन्य व्यापारिक साझेदारों पर लगाए गए अमेरिकी टैरिफ को केवल एक व्यापारिक विवाद मानना ​​बड़ी तस्वीर को मिस करना है। यह अमेरिकी विदेश नीति में एक व्यापक बदलाव का प्रतीक है।
  • लचीला यथार्थवाद (Flexible Realism):
    • यह दृष्टिकोण शीत युद्ध के बाद की उदार अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के विपरीत राष्ट्रीय हित को अमेरिकी विदेश नीति के केंद्र में रखता है।
    • यह व्यापार, प्रौद्योगिकी, औद्योगिक नीति और सुरक्षा को राज्य शिल्प (statecraft) के एकीकृत उपकरणों के रूप में देखता है।
    • साझेदारियों को साझा मूल्यों या ऐतिहासिक सद्भावना की तुलना में उनके द्वारा प्रदान किए जाने वाले ठोस रणनीतिक और आर्थिक मूल्य के आधार पर आंका जाता है।

भारत-अमेरिका साझेदारी का विकास: ‘रणनीतिक अभिसरण’ से ‘रणनीतिक पूरकता’ तक

  • पहला चरण (चीन का उदय और रणनीतिक अभिसरण):
    • पिछले एक दशक में अमेरिका का मुख्य रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी चीन रहा, जिसके चलते भारत का रणनीतिक महत्व बढ़ा। रक्षा सहयोग, क्वाड (Quad), तकनीक और आपूर्ति श्रृंखला लचीलेपन को बढ़ावा मिला।
  • अगला चरण (रणनीतिक पूरकता – Strategic Complementarity):
    • यह रिश्ता अब केवल ‘चीन के उदय’ जैसे साझा खतरे से तय नहीं होगा, बल्कि पारस्परिक रणनीतिक मूल्य (mutual strategic value) पर टिकेगा।
    • रक्षा सहयोग, महत्वपूर्ण तकनीक, लचीली आपूर्ति श्रृंखला और उन्नत विनिर्माण इसलिए मायने रखेंगे क्योंकि वे दोनों अर्थव्यवस्थाओं की प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करते हैं।

भारत के लिए मुख्य प्रभाव और रणनीतिक सबक

  • चीन के कारक पर अति-निर्भरता का अंत: भारत अब यह मानकर नहीं चल सकता कि अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा अपने आप भारत के रणनीतिक महत्व को बढ़ाती रहेगी। साझेदारी इस बात पर टिकनी चाहिए कि भारत मेज पर क्या लेकर आता है (उसकी अपनी क्षमताएँ)।
  • रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) की सुदृढ़ता:
    • रणनीतिक स्वायत्तता का अर्थ प्रतिस्पर्धी शक्तियों से समान दूरी बनाए रखना नहीं है, बल्कि भारत के अपने हितों के आधार पर स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता को सुरक्षित रखना है।
    • भारत का चीन के प्रति दृष्टिकोण अमेरिकी-चीनी संबंधों के बजाय उसकी अपनी दीर्घकालिक रणनीतिक गणनाओं पर आधारित होना चाहिए।
  • बहु-संरेखण (Multi-alignment):
    • अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना।
    • चीन के साथ प्रतिस्पर्धा और सहयोग को अपनी शर्तों पर प्रबंधित करना।
    • यूरोपीय संघ, जापान और ग्लोबल साउथ के साथ रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी साझेदारी को गहरा करना।

निष्कर्ष और आगे की राह

  • अमेरिका की नई नीति के तहत, स्थायी साझेदारियाँ क्षमता, पारस्परिकता (reciprocity) और रणनीतिक मूल्य पर आधारित होंगी।
  • भारत के लिए चुनौती केवल वाशिंगटन के रणनीतिक कैलकुलेशन में प्रासंगिक बने रहना नहीं है, बल्कि ऐसी क्षमताएं (आर्थिक गतिशीलता, तकनीकी क्षमता, रक्षा तैयारी और कूटनीतिक प्रभाव) विकसित करना है जो उसे एक अनिवार्य साझेदार बनाएं।

तथ्य और आंकड़े

  • पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी: अमेरिका “आज” भारत का सबसे बड़ा तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) आपूर्तिकर्ता बन गया है, जो भारत के कुल LPG आयात का 67% हिस्सा है।

ऊर्जा विविधीकरण (Energy Diversification) की दिशा में कदम

  • शुरुआत: ऊर्जा आपूर्ति में विविधता लाने के एक व्यापक प्रयास के तहत भारत ने शुरू में अपनी एलपीजी आवश्यकताओं का लगभग 10% अमेरिका से प्राप्त करने का निर्णय लिया था।
  • रणनीतिक बदलाव: शुरुआत में यह सवाल उठाया गया था कि क्या पास के (खाड़ी देशों) आपूर्तिकर्ताओं के होते हुए अमेरिका से 10% एलपीजी की आवश्यकता है या नहीं। लेकिन अब अमेरिका भारत का प्रमुख एलपीजी स्रोत बन गया है, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा और विविधीकरण रणनीति को दर्शाता है।

आंकड़े (जुलाई 31, 2026 को समाप्त सप्ताह)

  • कुल विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि: $10.512 बिलियन की भारी वृद्धि के साथ कुल भंडार $692.866 बिलियन पर पहुँच गया।
  • सर्वोच्च स्तर (All-time High): इस वर्ष 27 फरवरी को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार अपने सर्वकालिक उच्च स्तर $728.494 बिलियन पर पहुँच गया था।

उतार-चढ़ाव के कारण और पृष्ठभूमि

  • गिरावट का कारण: फरवरी के बाद पश्चिम एशिया संघर्ष (West Asia conflict) शुरू होने के कारण कई हफ्तों तक विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट आई।
  • RBI का हस्तक्षेप: इस संघर्ष के चलते रुपया दबाव में आ गया था, जिसके कारण भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर बेचकर (dollar sales) हस्तक्षेप करना पड़ा था।
  • पुनरुद्धार के उपाय: पिछले महीने केंद्रीय बैंक और सरकार द्वारा देश में विदेशी मुद्रा प्रवाह को आकर्षित करने के लिए कई उपाय शुरू किए गए थे, जिनमें FCNR(B) (फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट बैंक) खाते से जुड़े उपाय भी शामिल हैं।

विदेशी मुद्रा भंडार के घटक (Components)

  • विदेशी मुद्रा संपत्तियाँ (Foreign Currency Assets – FCA):
    • यह भंडार का सबसे बड़ा घटक है।
    • $8.75 बिलियन की वृद्धि के साथ यह बढ़कर $564.68 बिलियन हो गई।
    • डॉलर के संदर्भ में व्यक्त, FCA में यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं की सराहना या मूल्यह्रास का प्रभाव भी शामिल होता है जो विदेशी मुद्रा भंडार में रखी जाती हैं।

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