NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 8: How the Land Becomes Sacred
NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 8: How the Land Becomes Sacred के अंतर्गत विभिन्न धार्मिक परंपराओं (जैसे हिंदू, बौद्ध, जैन, सूफी और अन्य लोक पंथों) ने प्रकृति के विशिष्ट घटकों और ऐतिहासिक स्थलों को अपने विश्वासों के साथ जोड़कर ‘सांस्कृतिक परिदृश्य’ का निर्माण किया। इसमें तीर्थाटन की अवधारणा, पवित्र नदियों और पर्वत शिखरों के महत्व, संतों व ऋषियों के निवास स्थलों से जुड़े इतिहास और मंदिरों, स्तूपों, दरगाहों तथा मठों की स्थापना से भूमि के पवित्र बनने के कारणों को गहराई से समझाया गया है।और यह भी रेखांकित करता है कि कैसे ये पवित्र स्थल विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को आपस में जोड़कर राष्ट्रीय और सांस्कृतिक एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ‘पावनता’ क्या है? (What is ‘Sacredness’?) बाहर से आए धर्मों के पवित्र स्थल (Religions of Foreign Origin) भारत में जन्मे धर्मों के पवित्र स्थल (Indigenously Originated Religions) 1. बौद्ध धर्म 2. सिख धर्म पंडित जवाहरलाल नेहरू का कथन (1961) प्रमुख शब्दावली एवं अवधारणाएं शब्द शाब्दिक अर्थ आध्यात्मिक / व्यावहारिक महत्व श्राइन पवित्र स्थल ईश्वर, पवित्र अवशेष या संत से जुड़ा पूजा स्थल अवशेष अस्ति-धातु / अवशेष संत या आध्यात्मिक पुरुष के शरीर/वस्तु के भाग तीर्थ नदी पार करने का स्थान संसार रूपी सागर को पार करने का माध्यम तख्त सिंहासन / सत्ता केंद्र सिख धर्म में आध्यात्मिक शासन व मार्गदर्शन का केंद्र तीर्थयात्राएं (Pilgrimages) जैन परंपरा में तीर्थ प्रमुख क्षेत्रीय एवं पर्वतीय तीर्थ (Regional & Mountain Pilgrimages) अन्य पवित्र स्थल जनजातीय एवं पारिस्थितिक पवित्र स्थल जनजाति / क्षेत्र स्थान धार्मिक व सांस्कृतिक मान्यता डोंगरिया कोंध जनजाति नियम डोंगर पहाड़ी (नियमगिरि श्रेणी, ओडिशा) यह पहाड़ी उनके सर्वोच्च देवता ‘नियम राजा’ का निवास स्थान है। यहाँ पेड़ काटना सख्त मना है। सिक्किम सरकार (2000 का दशक) राज्य की पवित्र चोटियाँ, गुफाएँ, झीलें व गर्म चश्मे इन्हें किसी भी प्रकार के नुकसान से बचाने के लिए ‘पवित्र स्थल’ के रूप में अधिसूचित किया गया। टोडा जनजाति नीलगिरी पहाड़ियाँ (तमिलनाडु) पर्वतीय चोटियों, शोला वनों, आर्द्रभूमियों, विशिष्ट पत्थरों व पौधों को पवित्र मानती है। पावन भू-भाग से अवगत होना (Becoming Aware of Sacred Geography) यात्राओं का उद्देश्य एवं सांस्कृतिक एकीकरण भारत के प्रमुख पवित्र नेटवर्क नेटवर्क कुल संख्या भौगोलिक विस्तार सांस्कृतिक व आध्यात्मिक महत्व चार धाम 4 उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम भारत भारत के चारों कोनों को सांस्कृतिक रूप से जोड़ना ज्योतिर्लिंग 12 संपूर्ण भारत भगवान शिव के विशेष स्वरूपों की पूजा शक्ति पीठ 51 भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान आदि संपूर्ण उपमहाद्वीप की भूमि को देवी स्वरूप मानना पावन पारिस्थितिकी (Sacred Ecology) नदियाँ और संगम प्रयागराज और यूनेस्को विरासत कुंभ मेला नदियों और कुंभ का संक्षिप्त विवरण स्थान संबंधित नदी पौराणिक व सांस्कृतिक महत्व हरिद्वार गंगा अमृत की बूंद गिरने का स्थान, कुंभ स्थल प्रयागराज त्रिवेणी संगम (गंगा, यमुना, सरस्वती) यूनेस्को अमूर्त विरासत, कुंभ मेला नाशिक गोदावरी दक्षिण भारत का प्रमुख कुंभ स्थल उज्जैन शिप्रा कुंभ स्थल, धार्मिक व ज्योतिषीय महत्व पर्वत और वन (Mountains and Forests) वृक्ष, वन और पवित्र उपवन भारत में पवित्र उपवनों के क्षेत्रीय नाम राज्य / भाषा पवित्र उपवन का स्थानीय नाम मलयलम (केरल) कावु तमिलनाडु कोविल काडु कन्नड़ (कर्नाटक) देवरे काडु मराठी (महाराष्ट्र) देवराई खासी (मेघालय) ख्लाव क्यंतंग हिमाचल प्रदेश (हिंदी) देव वन झारखंड सरना छत्तीसगढ़ देवगुड़ी राजस्थान ओरण तंजावुर का पारिस्थितिक उदाहरण तीर्थयात्रा से व्यापार तक भारत से बाहर के पावन भू-भाग (Sacred Geography beyond India) पवित्र स्थलों का पुनरुद्धार और संरक्षण वैश्विक पवित्र भूगोल व कानूनी अधिकार देश / समुदाय स्थान / प्राकृतिक संसाधन सांस्कृतिक मान्यता एवं कानूनी स्थिति न्यूजीलैंड (माओरी) तारानाकी मौंगा पर्वत पर्वत को पूर्वज माना; कानूनन ‘जीवित मनुष्य’ का दर्जा मिला प्राचीन ग्रीस पर्वत व पवित्र उपवन प्राचीन धार्मिक व सांस्कृतिक आस्था के केंद्र नेटिव अमेरिकन संपूर्ण प्रकृति प्रकृति के साथ पवित्र व अटूट आत्मिक संबंध भारत पवित्र नदियाँ (यमुना, कावेरी आदि) धार्मिक महत्व, लेकिन वर्तमान में अत्यधिक प्रदूषण का शिकार NCERT Class 7, Social Science Ch-7