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NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 8: How the Land Becomes Sacred

NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 8: How the Land Becomes Sacred के अंतर्गत विभिन्न धार्मिक परंपराओं (जैसे हिंदू, बौद्ध, जैन, सूफी और अन्य लोक पंथों) ने प्रकृति के विशिष्ट घटकों और ऐतिहासिक स्थलों को अपने विश्वासों के साथ जोड़कर ‘सांस्कृतिक परिदृश्य’ का निर्माण किया। इसमें तीर्थाटन की अवधारणा, पवित्र नदियों और पर्वत शिखरों के महत्व, संतों व ऋषियों के निवास स्थलों से जुड़े इतिहास और मंदिरों, स्तूपों, दरगाहों तथा मठों की स्थापना से भूमि के पवित्र बनने के कारणों को गहराई से समझाया गया है।और यह भी रेखांकित करता है कि कैसे ये पवित्र स्थल विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को आपस में जोड़कर राष्ट्रीय और सांस्कृतिक एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ‘पावनता’ क्या है? (What is ‘Sacredness’?) बाहर से आए धर्मों के पवित्र स्थल (Religions of Foreign Origin) भारत में जन्मे धर्मों के पवित्र स्थल (Indigenously Originated Religions) 1. बौद्ध धर्म 2. सिख धर्म पंडित जवाहरलाल नेहरू का कथन (1961) प्रमुख शब्दावली एवं अवधारणाएं शब्द शाब्दिक अर्थ आध्यात्मिक / व्यावहारिक महत्व श्राइन पवित्र स्थल ईश्वर, पवित्र अवशेष या संत से जुड़ा पूजा स्थल अवशेष अस्ति-धातु / अवशेष संत या आध्यात्मिक पुरुष के शरीर/वस्तु के भाग तीर्थ नदी पार करने का स्थान संसार रूपी सागर को पार करने का माध्यम तख्त सिंहासन / सत्ता केंद्र सिख धर्म में आध्यात्मिक शासन व मार्गदर्शन का केंद्र तीर्थयात्राएं (Pilgrimages) जैन परंपरा में तीर्थ प्रमुख क्षेत्रीय एवं पर्वतीय तीर्थ (Regional & Mountain Pilgrimages) अन्य पवित्र स्थल जनजातीय एवं पारिस्थितिक पवित्र स्थल जनजाति / क्षेत्र स्थान धार्मिक व सांस्कृतिक मान्यता डोंगरिया कोंध जनजाति नियम डोंगर पहाड़ी (नियमगिरि श्रेणी, ओडिशा) यह पहाड़ी उनके सर्वोच्च देवता ‘नियम राजा’ का निवास स्थान है। यहाँ पेड़ काटना सख्त मना है। सिक्किम सरकार (2000 का दशक) राज्य की पवित्र चोटियाँ, गुफाएँ, झीलें व गर्म चश्मे इन्हें किसी भी प्रकार के नुकसान से बचाने के लिए ‘पवित्र स्थल’ के रूप में अधिसूचित किया गया। टोडा जनजाति नीलगिरी पहाड़ियाँ (तमिलनाडु) पर्वतीय चोटियों, शोला वनों, आर्द्रभूमियों, विशिष्ट पत्थरों व पौधों को पवित्र मानती है। पावन भू-भाग से अवगत होना (Becoming Aware of Sacred Geography) यात्राओं का उद्देश्य एवं सांस्कृतिक एकीकरण भारत के प्रमुख पवित्र नेटवर्क नेटवर्क कुल संख्या भौगोलिक विस्तार सांस्कृतिक व आध्यात्मिक महत्व चार धाम 4 उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम भारत भारत के चारों कोनों को सांस्कृतिक रूप से जोड़ना ज्योतिर्लिंग 12 संपूर्ण भारत भगवान शिव के विशेष स्वरूपों की पूजा शक्ति पीठ 51 भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान आदि संपूर्ण उपमहाद्वीप की भूमि को देवी स्वरूप मानना पावन पारिस्थितिकी (Sacred Ecology) नदियाँ और संगम प्रयागराज और यूनेस्को विरासत कुंभ मेला नदियों और कुंभ का संक्षिप्त विवरण स्थान संबंधित नदी पौराणिक व सांस्कृतिक महत्व हरिद्वार गंगा अमृत की बूंद गिरने का स्थान, कुंभ स्थल प्रयागराज त्रिवेणी संगम (गंगा, यमुना, सरस्वती) यूनेस्को अमूर्त विरासत, कुंभ मेला नाशिक गोदावरी दक्षिण भारत का प्रमुख कुंभ स्थल उज्जैन शिप्रा कुंभ स्थल, धार्मिक व ज्योतिषीय महत्व पर्वत और वन (Mountains and Forests) वृक्ष, वन और पवित्र उपवन भारत में पवित्र उपवनों के क्षेत्रीय नाम राज्य / भाषा पवित्र उपवन का स्थानीय नाम मलयलम (केरल) कावु तमिलनाडु कोविल काडु कन्नड़ (कर्नाटक) देवरे काडु मराठी (महाराष्ट्र) देवराई खासी (मेघालय) ख्लाव क्यंतंग हिमाचल प्रदेश (हिंदी) देव वन झारखंड सरना छत्तीसगढ़ देवगुड़ी राजस्थान ओरण तंजावुर का पारिस्थितिक उदाहरण तीर्थयात्रा से व्यापार तक भारत से बाहर के पावन भू-भाग (Sacred Geography beyond India) पवित्र स्थलों का पुनरुद्धार और संरक्षण वैश्विक पवित्र भूगोल व कानूनी अधिकार देश / समुदाय स्थान / प्राकृतिक संसाधन सांस्कृतिक मान्यता एवं कानूनी स्थिति न्यूजीलैंड (माओरी) तारानाकी मौंगा पर्वत पर्वत को पूर्वज माना; कानूनन ‘जीवित मनुष्य’ का दर्जा मिला प्राचीन ग्रीस पर्वत व पवित्र उपवन प्राचीन धार्मिक व सांस्कृतिक आस्था के केंद्र नेटिव अमेरिकन संपूर्ण प्रकृति प्रकृति के साथ पवित्र व अटूट आत्मिक संबंध भारत पवित्र नदियाँ (यमुना, कावेरी आदि) धार्मिक महत्व, लेकिन वर्तमान में अत्यधिक प्रदूषण का शिकार NCERT Class 7, Social Science Ch-7

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NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 7: The Gupta Era: An Age of Tireless Creativity

NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 7: The Gupta Era: An Age of Tireless Creativity के अंतर्गत गुप्त काल के दौरान पनपी सांस्कृतिक और बौद्धिक क्रांति को विस्तार से समजाता है।तथा कालिदास जैसे महान साहित्यकारों की संस्कृत कृतियों, आर्यभट्ट और वराहमिहिर जैसे विद्वानों के गणित व खगोलशास्त्र में क्रांतिकारी योगदान, तथा अजंता की गुफा चित्रकारी व देवगढ़ के दशावतार मंदिर जैसी स्थापत्य कला की उत्कृष्ट कृतियों का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। और धातु विज्ञान (जैसे मेहरौली का लौह स्तंभ), चिकित्सा विज्ञान (चरक और सुश्रुत की परंपरा) और नालंदा जैसे महान अंतरराष्ट्रीय शिक्षण संस्थानों के विकास के पीछे छिपे वैज्ञानिक दृष्टिकोण और राजकीय संरक्षण के महत्व को भी स्पष्ट करता है। गुप्त काल: अथक सृजनशीलता का युग समकालीन राज्य और साम्राज्य (3rd to 6th Century CE) मेहरौली का लौह स्तंभ (Delhi) प्राचीन भारतीय धातु विज्ञान एक नई शक्ति का उदय (A New Power Emerges) चंद्रगुप्त प्रथम एवं गुप्त साम्राज्य की नींव योद्धा शासक (समुद्रगुप्त) अश्वमेध यज्ञ और साहित्यिक साक्ष्य मुख्य गुप्त शासक एवं उनके साक्ष्य शासक प्रमुख उपलब्धि / उपाधि मुख्य ऐतिहासिक स्रोत चंद्रगुप्त प्रथम गुप्त साम्राज्य की नींव, वैवाहिक नीतियां कुमारदेवी प्रकार के स्वर्ण सिक्के (लक्ष्मी अंकन) समुद्रगुप्त ‘धरणिवंध’ (पृथ्वी विजेता), कला प्रेमी प्रयाग प्रशस्ति (हरिषेण), वीणा वादक सिक्के, अश्वमेध सिक्के चंद्रगुप्त द्वितीय ‘विक्रमादित्य’, कला व विज्ञान का स्वर्णकाल दिल्ली का मेहरौली लौह स्तंभ, गरुड़ अभिलेख गुप्तकालीन भारतीय समाज: एक यात्री का विवरण फ़ाहियान के अनुसार गुप्तकालीन समाज एवं शासन चंडालों की स्थिति और सामाजिक विषमता फ़ाहियान का यात्रा वृत्तांत: विषय फ़ाहियान द्वारा दर्ज मुख्य तथ्य भ्रमण काल 399–414 CE (चंद्रगुप्त द्वितीय का काल) प्रशासनिक कर केवल राजकीय भूमि की उपज पर हिस्सा सामाजिक कल्याण वैश्यों द्वारा मुफ्त अस्पताल, अनाथालय व भोजन वितरण सामाजिक अंधकार चंडालों का नगर से बाहर निष्कासन व कठोर सामाजिक स्थिति गुप्त साम्राज्य की झलकियाँ (Glimpses of the Gupta Empire) शासन एवं प्रशासन (Governance and administration) नए राजा … नई उपाधियाँ समृद्ध व्यापार गुप्त प्रशासन व व्यापार: क्षेत्र मुख्य विवरण / साक्ष्य प्रशासनिक दस्तावेज़ ताम्रपत्र पर दर्ज भूमि अनुदान कूटनीतिक संबंध प्रभावती गुप्त का वाकाटक राजवंश में विवाह शाही उपाधियाँ महाराजाधिराज, सम्राट, चक्रवर्ती अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक केंद्र सोकोत्रा द्वीप (अरब सागर) – ब्राह्मी अभिलेख व बौद्ध साक्ष्य नवीन विचारों और उपलब्धियों का युग (New Ideas and Wonders: The Classical Age) आर्यभट्ट वराहमिहिर कालिदास आयुर्वेद का संकलन गुप्तकालीन महान विभूतियाँ: विद्वान क्षेत्र प्रमुख ग्रंथ / उपलब्धि आर्यभट्ट गणित व खगोलशास्त्र आर्यभटीय, पृथ्वी का घूर्णन, ग्रहण का वैज्ञानिक कारण वराहमिहिर खगोलशास्त्र व ज्ञान-विज्ञान बृहत्संहिता (मौसम, कृषि, वास्तुकला) कालिदास संस्कृत साहित्य मेघदूतम् (काव्य सौंदर्य व भौगोलिक विवरण) चरक/सुश्रुत आयुर्वेद व शल्य चिकित्सा चरक संहिता एवं सुश्रुत संहिता का अंतिम संकलन सौंदर्य की खोज (The Quest for Beauty) गुप्त साम्राज्य का पतन (The Decline of the Guptas) इसी बीच दक्षिण और उत्तर-पूर्व में 1. दक्षिण भारत: पल्लव राजवंश 2. उत्तर-पूर्व भारत: कामरूप राज्य समुद्रगुप्त की दक्षिण व उत्तर-पूर्व नीति प्रमुख गुप्तकालीन कला केंद्र एवं साक्ष्य स्थान राज्य प्रमुख कला / ऐतिहासिक साक्ष्य सारनाथ उत्तर प्रदेश बुद्ध की धातु व पत्थर की मूर्तियाँ अजंता महाराष्ट्र बोधिसत्व पद्मपाणि का चित्र, गुप्त-वाकाटक कला अहिच्छत्र उत्तर प्रदेश गंगा (मकर) और यमुना (कछुआ) की टेराकोटा मूर्तियाँ देवगढ़ उत्तर प्रदेश दशावतार मंदिर (शेषनाग पर विष्णु) कांचीपुरम तमिलनाडु पल्लवों की राजधानी, घटिका (शिक्षा केंद्र) NCERT Class 7, Social Science Ch-6 यहाँ पढ़ें:-

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NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 6: The Age of Reorganisation

NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 6: The Age of Reorganisation के अंतर्गत उत्तर-गुप्त काल से लेकर शुरुआती मध्यकालीन भारत में उत्तर, मध्य और दक्षिण भारत के प्रमुख राजवंशों के उत्थान को विस्तार से स्पष्ट करता है। तथा दक्षिण भारत के महान चोल साम्राज्य की अद्वितीय नौसेना, उनकी सुदृढ़ स्थानीय स्वशासन प्रणाली (ग्राम सभाएं), तथा पल्लव और चालुक्य राजवंशों के दौरान कला एवं द्रविड़ स्थापत्य कला (मंदिर निर्माण) के क्षेत्र में हुए अभूतपूर्व विकास का विश्लेषण और सामंतवाद (Feudalism) के विस्तार, भूमि अनुदान प्रथा और व्यापारिक श्रेणियों (Guilds) के पुनर्गठन से समाज और अर्थव्यवस्था पर पड़े प्रभावों पर भी प्रकाश डालता है। शुंगों का उत्कर्ष (Surge of the Shungas) अश्वमेध यज्ञ शुंगकालीन कला एवं वास्तुकला में योगदान शुंगकालीन योगदान क्षेत्र प्रमुख तथ्य धर्म व अनुष्ठान वैदिक पुनरुद्धार और अश्वमेध यज्ञ साहित्य व भाषा संस्कृत का प्रयोग और पतंजलि का ‘योगसूत्र’ स्थापत्य कला भरहुत स्तूप का पाषाण विस्तार (Railings) हस्तशिल्प हाथीदांत नक्काशी, टेराकोटा कला व स्वर्ण-लेपित कांस्य आभूषण सातवाहन राजवंश (The Satavahanas) व्यापार, अर्थव्यवस्था एवं नौकायन प्रौद्योगिकी सातवाहन काल में जीवन व समाज सातवाहन साम्राज्य का पतन सातवाहन राजवंश: एक नजर में पहलू मुख्य विवरण प्रमुख राजधानियाँ अमरावती और प्रतिष्ठान (पैठन) प्रसिद्ध शासक गौतमीपुत्र सातकर्णी प्रमुख अभिलेख नासिक अभिलेख (गौतमी बालश्री), नानेघाट अभिलेख (विधवा रानी) प्रमुख गुफा स्थापत्य कार्ला गुफाएं (बौद्ध), नानेघाट (व्यापारिक कर/विश्राम), पीतलखोरा (यक्ष प्रतिमा) विशेषता सिक्कों पर जहाजों के चित्र, मातृ-नाम परंपरा, कर-मुक्त भूमि दान की शुरुआत चेदियों का आगमन (Coming of the Chedis) उदयगिरि-खंडगिरि गुफाएं हाथीगुम्फा अभिलेख चेदि राजवंश व खारवेल: मुख्य बिंदु क्षेत्र मुख्य विवरण राजवंश व क्षेत्र चेदि राजवंश, कलिंग (ओडिशा) प्रसिद्ध शासक खारवेल (उपाधि: भिक्षु-राज) प्रमुख अभिलेख हाथीगुम्फा अभिलेख (ब्राह्मी लिपि) स्थापत्य उदयगिरि-खंडगिरि की शैलकृत गुफाएं (जैन धर्म) मूल विचार सर्वधर्म समभाव और सर्व-संप्रदाय संरक्षण दक्षिण में साम्राज्य और जन-जीवन (Kingdoms and Life in the South) संगम साहित्य (Sangam literature) चोल राजवंश (The Cholas) सिलप्पदिकारम: पायस की कथा कल्लणै बांध चेर राजवंश (The Cheras) पांड्य राजवंश (The Pandyas) सुदूर दक्षिण के तीन राजवंश: राजवंश राजधानी प्रमुख क्षेत्र प्रमुख पहचान / योगदान चोल पुहार / उरैयूर कावेरी डेल्टा (तमिलनाडु) राजा करिकाल, कल्लणै बांध (Grand Anicut) चेर वंजी (करूर) केरल व पश्चिमी तमिलनाडु रोमन व्यापार, मसाले व लकड़ी का निर्यात पांड्य मदुरै सुदूर दक्षिण (तमिलनाडु) मोती व्यापार, नौसेना, सिलप्पदिकारम इंडो-ग्रीक आक्रमण (Invasions of the Indo-Greeks) हेलियोडोरस स्तंभ शक वंश और शक संवत इंडो-ग्रीक और शक: मुख्य बिंदु पहलू इंडो-ग्रीक शक (Indo-Scythians) मूल स्रोत सिकंदर के यूनानी क्षत्रप मध्य एशियाई जनजाति मुख्य साक्ष्य द्विभाषी सिक्के (वासुदेव व लक्ष्मी चित्र), हेलियोडोरस स्तंभ शक संवत, शिलालेख सांस्कृतिक योगदान यूनानी-भारतीय कला व सिक्के भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर (78 CE) कुषाणों का उदय (The Emergence of the Kushanas) राजा कनिष्क कला की शैलियाँ: गांधार एवं मथुरा (Gandhara & Mathura Schools of Art) 1. गांधार कला शैली 2. मथुरा कला शैली सांस्कृतिक एवं साहित्यिक पुनर्जागरण गांधार और मथुरा कला: आधार गांधार कला मथुरा कला क्षेत्र उत्तर-पश्चिम भारत (पंजाब/अफगानिस्तान) मथुरा (उत्तर प्रदेश) मुख्य पत्थर स्लेटी शिस्ट लाल बलुआ पत्थर (Red Sandstone) शिल्प प्रभाव यूनानी-रोमन (Greco-Roman) पूर्णतः स्वदेशी (Indian) मुख्य विषय बुद्ध व बोधिसत्व की यथार्थवादी मूर्तियां बुद्ध, हिंदू देवी-देवता, यक्ष-यक्षिणी NCERT Class 7, Social Science Ch-5 यहाँ पढ़ें:-

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NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 5: The Rise of Empires

NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 5: The Rise of Empires के अंतर्गत मौर्य साम्राज्य और उसके बाद के गुप्त साम्राज्य जैसे महान राजवंशों के उत्थान और उनकी प्रशासनिक प्रणालियों पर ध्यान केंद्रित करता है। और चंद्रगुप्त मौर्य के नेतृत्व में विशाल साम्राज्य की स्थापना, कौटिल्य (चाणक्य) के ‘अर्थशास्त्र’ पर आधारित सुदृढ़ प्रशासनिक व गुप्तचर ढाँचे, और महान सम्राट अशोक की युद्ध नीति से ‘धम्म’ नीति की ओर परिवर्तन की ऐतिहासिक घटनाओं को विस्तार से समझाया गया है। तथा गुप्त काल के दौरान हुए कला, साहित्य, विज्ञान, खगोलशास्त्र और स्थापत्य कला के अभूतपूर्व विकास के कारणों को उजागर करते हुए यह स्पष्ट करता है कि क्यों इस युग को प्राचीन भारत का ‘स्वर्ण काल’ माना जाता है। साम्राज्य क्या होता है? (What is an Empire?) जागीरदार राज्य साम्राज्य की मुख्य विशेषताएँ (Features of an Empire) साम्राज्य बनाम राज्य आधार राज्य / राज्यक्षेत्र साम्राज्य (Empire) भौगोलिक आकार सीमित व स्थानीय क्षेत्र विशाल भूभाग (जिसमें कई छोटे राज्य शामिल हों) शासन प्रणाली एक राजा का सीधा नियंत्रण सम्राट के अधीन कई करद या अधीनस्थ राजा संसाधन आवश्यकता सीमित सैन्य व प्रशासनिक बल विशाल स्थायी सेना व जटिल नौकरशाही सांस्कृतिक विविधता मुख्यतः एकरूप संस्कृति विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों का समावेश व्यापार, व्यापार मार्ग और श्रेणियाँ (Trade, trade routes and guilds) श्रेणी (Guilds) प्रमुख व्यापारिक शहर और मार्ग (500 BCE के बाद) प्राचीन व्यापारिक मार्गों (उत्तरापथ और दक्षिणापथ) पर स्थित प्रमुख नगर: क्षेत्र प्रमुख शहर / व्यापारिक केंद्र उत्तर व उत्तर-पश्चिम तक्षशिला, शिबिपुर, हस्तिनापुर मध्य व मध्य-पूर्व मथुरा, श्रावस्ती, वैशाली, काशी, पाटलिपुत्र, कौशाम्बी, राजगृह, चंपा पूर्वी तट ताम्रलिप्ति, कलिंगनगर, प्राग्ज्योतिषपुर पश्चिमी तट व मध्य भारत भरुकच्छ, सोपारा, उज्जैनी, द्वारका, प्रतिष्ठान दक्षिण भारत सुवर्णगिरि, मुचिरि, कांचीपुरम, कावेरीपट्टिनम, मदुरै मगध का उदय (The Rise of Magadha) धार्मिक एवं साहित्यिक समकालीन मगध के उत्कर्ष के भौगोलिक व तकनीकी कारक नंद वंश (Nanda Dynasty) यूनानियों का आगमन (The Arrival of the Greeks) यूनानी आक्रमण का कालक्रम वर्ष ऐतिहासिक घटना 334–331 BCE सिकंदर का फारस अभियान: मैसेडोनिया के सिकंदर ने फारसी साम्राज्य को जीता। यूनानी संस्कृति का प्रसार तीन महाद्वीपों में हुआ। 327–325 BCE भारत अभियान: सिकंदर ने पंजाब में पोरस को हराया (झेलम/हाइडैस्पीज का युद्ध)। स्थानीय जनजातियों के उग्र प्रतिरोध का सामना किया। यूनानी अभिलेखों के अनुसार ‘महिलाओं ने पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर युद्ध लड़ा’। सिकंदर घायल हुआ। 325 BCE वापसी: व्यास नदी पर थक चुकी सेना के इनकार के बाद सिकंदर ने दक्षिण के तटीय मार्ग और ईरान के मरुस्थल से वापसी की। प्यास, भूख और बीमारी से सेना को भारी क्षति हुई। 324–323 BCE सिकंदर की मृत्यु: बेबीलोन में 32 वर्ष की आयु में मृत्यु। साम्राज्य उसके जनरलों और क्षत्रपों में विभाजित हो गया। शक्तिशाली मौर्य साम्राज्य (The Mighty Mauryas) कौटिल्य की कहानी (The story of Kauṭilya) चंद्रगुप्त मौर्य का उदय (The rise of Chandragupta Maurya) कौटिल्य की राज्य सम्बन्धित अवधारणा (Kauṭilya’s concept of a kingdom) कौटिल्य का सप्तांग सिद्धांत (Kauṭilya’s Saptanga) राज्य के 7 अनिवार्य अंग: नंद साम्राज्य बनाम मौर्य साम्राज्य आधार नंद साम्राज्य (Nanda Empire) मौर्य साम्राज्य (Maurya Empire) संस्थापक महापद्म नंद चंद्रगुप्त मौर्य (कौटिल्य के सहयोग से) भौगोलिक विस्तार मुख्यतः पूर्वी व उत्तरी भारत उत्तर-पश्चिम (तक्षशिला/कंधार) से दक्कन तक प्रशासनिक आधार दमनकारी कर व जनता में असंतोष कौटिल्य का अर्थशास्त्र व कल्याणकारी राज्य अवधारणा विदेश संबंध सीमित (यूनानी स्रोतों में सेना का उल्लेख) यूनानियों के साथ प्रत्यक्ष कूटनीति (मेगस्थनीज) सम्राट अशोक: शांति का मार्ग अशोक के अभिलेख जन-कल्याण, पर्यावरण संरक्षण एवं सहिष्णुता धम्म की अवधारणा) मौर्य साम्राज्य का पतन मुख्य अशोककालीन स्थल स्थल वर्तमान स्थिति पुरातात्विक महत्व गिरनार गुजरात प्रसिद्ध शिलालेख टोपरा दिल्ली (फिरोजशाह कोटला में स्थापित) स्तंभ लेख धौली ओडिशा कलिंग युद्ध से संबंधित शिलालेख कंधार अफगानिस्तान उत्तर-पश्चिम का सीमावर्ती अभिलेख मास्की कर्नाटक अशोक के नाम का प्रत्यक्ष उल्लेख मौर्य काल में जीवन (Life in the Mauryan period) सोहगौरा ताम्रपत्र अभिलेख मौर्यों के प्रमुख योगदान कला और वास्तुकला (Art and Architecture) साम्राज्यों की भंगुरता साम्राज्य एक तरफ राजनीतिक एकता और समृद्धि लाते हैं, तो दूसरी तरफ युद्ध और सैन्य बल पर टिके होने के कारण आंतरिक रूप से कमजोर भी होते हैं। पतन के मुख्य कारण: मौर्यकालीन समय-रेखा समय काल ऐतिहासिक घटना / शासक 600–500 BCE महाजनपदों का उदय और अजातशत्रु द्वारा मगध का सुदृढ़ीकरण। 400 BCE महापद्म नंद द्वारा नंद वंश की स्थापना और साम्राज्य विस्तार। 321 BCE चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा मौर्य साम्राज्य की स्थापना। 268–232 BCE सम्राट अशोक का शासनकाल (धम्म और अभिलेखों का युग)। 185 BCE मौर्य साम्राज्य का अंतिम रूप से पतन। NCERT Class 7, Social Science Ch-3 यहाँ पढ़ें:-

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NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 4: New Beginnings Cities and States

NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 4: New Beginnings Cities and States के अंतर्गत भारतीय इतिहास में गंगा घाटी के उपजाऊ मैदानों में ‘द्वितीय नगरीकरण’ का सूत्रपात हुआ। और किस प्रकार छोटे-छोटे ‘जनपद’ आपस में संगठित होकर शक्तिशाली ‘महाजनपद’ बने और कैसे मगध व वज्जि जैसे विशाल राज्यों का उदय हुआ। प्रारंभिक नगरों के स्वरूप, उनकी सुरक्षात्मक किलाबंदी, राजाओं द्वारा स्थाई सेनाओं के रख-रखाव, कर-संग्रह की नियमित व्यवस्था और आहत सिक्कों के प्रयोग से व्यापार में आई तेजी के कारणों को समजाया गया है। साथ ही, यह राजतंत्रात्मक राज्यों और वज्जि जैसे गणराज्यों की प्रशासनिक प्रणालियों के बीच के अंतर को भी विस्तार से समझाता है। प्रथम शहरीकरण का पतन और द्वितीय शहरीकरण की शुरुआत जनपद और महाजनपद खाई (सुरक्षात्मक संरचना) प्रारंभिक लोकतांत्रिक परंपराएँ राजतंत्र बनाम गणतंत्र महाजनपदों ने जनपदों के राजनीतिक सिद्धांतों को और आगे बढ़ाया, जो मुख्य रूप से दो शासन प्रणालियों में बंटे थे: लक्षण/विशेषता राजतंत्रात्मक महाजनपद गण / संघ सर्वोच्च सत्ता राजा ही अंतिम निर्णयकर्ता था। सभा/समिति के पास वास्तविक सत्ता थी। पद का प्रकार वंशानुगत (Hereditary – राजा का पुत्र ही राजा)। चुनाव आधारित (Selected by assembly members)। निर्णय प्रक्रिया राजा मंत्रियों व बुजुर्गों की सलाह से निर्णय लेता था। सामूहिक चर्चा और आवश्यकता पड़ने पर मतदान (Voting)। प्रमुख कार्य कर संग्रह, कानून व्यवस्था, सेना व किलेबंदी। सामूहिक रक्षा, शासन और शासक का चुनाव। उदाहरण मगध (बिहार), कोसल (यूपी), अवंती (एमपी)। वज्जि और मल्ल। विश्व के प्राचीनतम गणतंत्र कुछ अन्य नवीन प्रयोग लोहे की धातुकर्म तकनीक भारत में आहत सिक्के वर्ण-जाति व्यवस्था जाति और वर्ण की द्वैत संरचना भारतीय समाज दो-स्तरीय संरचना पर आधारित था: ‘Caste’ शब्द की उत्पत्ति गतिशीलता, कठोरता और औपनिवेशिक प्रभाव वर्ण बनाम जाति पहलू वर्ण जाति उत्पत्ति वैदिक शास्त्रीय अवधारणा सामाजिक-आर्थिक और व्यावसायिक विकास संख्या केवल 4 स्थिर श्रेणियां हजारों स्थानीय जातियां व उप-जातियां मुख्य आधार कार्य/गुण पर आधारित विभाजन व्यावसायिक कौशल, स्थानीय रीति-रिवाज व विवाह लचीलापन प्राचीन काल में परिवर्तनशील समय के साथ अत्यंत कठोर और वंशानुगत भारत के अन्य भागों में विकास प्रमुख व्यापारिक मार्ग शिशुपालगढ़ सुदूर दक्षिण के राज्य व पुरातात्विक केंद्र संसाधन, समुद्री व्यापार व वैश्विक जुड़ाव मुख्य पुरातात्विक स्थल व व्यापारिक मार्ग स्थल / मार्ग भौगोलिक स्थिति मुख्य पहचान व विशेषताएं प्रासंगिकता उत्तरापथ उत्तर-पश्चिम से पूर्वी भारत गंगा घाटी को जोड़ने वाला मुख्य व्यापारिक मार्ग प्राचीन व्यापार मार्ग दक्षिणापथ कौशाम्बी से दक्षिण भारत विंध्याचल पार कर दक्षिण जाने वाला मुख्य मार्ग प्राचीन व्यापार मार्ग शिशुपालगढ़ भुवनेश्वर, ओडिशा कलिंग की राजधानी, वर्गाकार लेआउट व किलेबंदी प्राचीन नगर नियोजन NCERT Class 6, Social Science Ch-9 यहाँ पढ़ें:-

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NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 3: Climates of India

NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 3: Climates of India के अंतर्गत भारतीय जलवायु की मुख्य पहचान यानी मानसून के उद्भव, उसके आगमन और लौटने (Retreating Monsoon) की वैज्ञानिक प्रक्रियाओं तथा भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले मुख्य कारकों—जैसे अक्षांशीय स्थिति, हिमालय पर्वत की उपस्थिति, समुद्र से दूरी, उच्चावच और मानसूनी पवनों की दिशा—के बीच के गहरे अंतर्संबंधों को समझाता है। इसमें भारत के चार प्रमुख ऋतु चक्रों (शीत, ग्रीष्म, दक्षिण-पश्चिम मानसून और लौटता मानसून) की विशेषताओं का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। मौसम, ऋतुएँ और जलवायु (Weather, Seasons and the Climate) मौसम, ऋतु और जलवायु का तुलनात्मक संबंध घटक समय अवधि मुख्य विशेषता मौसम (Weather) दैनिक या घंंटे के आधार पर अल्पकालिक व परिवर्तनशील। ऋतु (Season) कुछ महीनों का आवर्त चक्र पृथ्वी की परिक्रमा से नियमित दोहराव। जलवायु (Climate) कई दशक (Decades) दीर्घकालिक व स्थिर पैटर्न। पारंपरिक भारतीय ऋतु चक्र विश्व में आमतौर पर चार मुख्य ऋतुएँ होती हैं, लेकिन भारत में मानसून के साथ पारंपरिक रूप से छह ऋतुएँ मानी गई हैं: प्रकृति और मानव जीवन पर प्रभाव भारत में जलवायु के प्रकार जलवायु को निर्धारित करने वाले कारक किसी भी स्थान की जलवायु मुख्य रूप से पाँच प्रमुख कारकों के सामूहिक प्रभाव से तय होती है। a) अक्षांश (Latitude) b) ऊँचाई (Altitude) c) समुद्र से दूरी (Proximity to the Sea) d) पवनें (Winds) e) स्थलाकृति (Topography) सूक्ष्म जलवायु एवं शहरी ऊष्मा द्वीप (Microclimate & Urban Heat Islands) मानसून (The Monsoons) मानसून का वैज्ञानिक तंत्र दक्षिण-पश्चिम बनाम उत्तर-पूर्वी मानसून लक्षण दक्षिण-पश्चिम मानसून (Southwest Monsoon) उत्तर-पूर्वी मानसून (Northeast Monsoon) ऋतु ग्रीष्मकालीन मानसून (Summer Monsoon) शीतकालीन मानसून (Winter Monsoon) समय अवधि जून के प्रारंभ से मध्य जुलाई तक पूरे भारत में प्रसार शीतकाल (Winter Phase) पवन की दिशा समुद्र से स्थल की ओर (दक्षिण-पश्चिम से) स्थल से समुद्र की ओर (उत्तर-पूर्व से) प्रकृति व वर्षा अत्यधिक नमीयुक्त, देश की अधिकांश वर्षा हेतु उत्तरदायी अधिकांशतः शुष्क; बंगाल की खाड़ी से नमी लेकर तमिलनाडु/दक्षिण भारत में वर्षा स्थलाकृतिक प्रभाव पश्चिमी घाट के पश्चिमी ढलान पर भारी वर्षा; दक्कन का पठार वृष्टि-छाया (Rain-shadow) में पूर्वी तटीय मैदानी भागों में वर्षा विशेष तथ्य व सांस्कृतिक जुड़ाव पारंपरिक मौसमी ज्ञान जलवायु और हमारा जीवन (Climate and our Lives) कृषि, त्यौहार और सांस्कृतिक संबंध भारत में कृषि चक्र और ऋतुओं के आगमन से जुड़े अनेक प्रमुख त्यौहार मनाए जाते हैं: अर्थशास्त्र पर प्रभाव (Socioeconomic Impact) मानसून विफलता का सामाजिक-आर्थिक प्रभाव प्रभावित क्षेत्र मुख्य परिणाम प्रासंगिकता कृषि क्षेत्र उत्पादन में कमी, फसल बर्बादी कृषि संकट व खाद्य सुरक्षा अर्थव्यवस्था खाद्य मुद्रास्फीति (Food Inflation) में वृद्धि मैक्रो-इकोनॉमिक्स व नीति निर्माण सामाजिक जीवन पलायन, जल संकट, लैंगिक असमानता भारतीय समाज व शहरीकरण संकट जलवायु और आपदाएँ (Climates and Disasters) a) चक्रवात (Cyclones) NDRF (राष्ट्रीय आपदा मोचन बल) b) बाढ़ (Floods) c) भूस्खलन (Landslides) d) दावानल (जंगल की आग) / Forest fires प्रमुख आपदाएँ और उनके मुख्य कारण आपदा प्राथमिक प्राकृतिक कारण मुख्य मानवजनित कारण सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र चक्रवात समुद्र में तीव्र निम्न दाब प्रणाली ग्लोबल वार्मिंग (समुद्री तापमान में वृद्धि) पूर्वी तटीय राज्य बाढ़ / GLOF मूसलाधार बारिश, ग्लेशियर का पिघलना नदियों पर अतिक्रमण, खराब जल निकासी मैदानी राज्य, हिमालयी क्षेत्र व शहर भूस्खलन मूसलाधार बारिश, भूकंप अवैज्ञानिक कटाई, वनों का विनाश पश्चिमी घाट, पूर्वोत्तर व मध्य हिमालय जंगल की आग शुष्क जलवायु, सूखा, तेज़ पवन मानवीय लापरवाही, अवैध कटाई मध्य भारत और पर्वतीय वन क्षेत्र जलवायु परिवर्तन (Climate Change) जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) ग्रीनहाउस प्रभाव और ग्लोबल वार्मिंग (Greenhouse Effect & Global Warming) प्रमुख शब्दावलियाँ व शमन उपाय वैश्विक व भारतीय स्तर पर जलवायु चुनौतियों से निपटने के लिए निम्नलिखित तीन अवधारणाएँ महत्वपूर्ण हैं: शब्दावली अर्थ (Concept Definition) प्रमुख रणनीतियाँ / उपाय लचीलापन (Resilience) आपदाओं व विपरीत परिस्थितियों से तेज़ी से उबरने की क्षमता। समुदाय-आधारित अनुकूलन प्रणाली का निर्माण। शमन (Mitigation) ग्लोबल वार्मिंग को धीमा करने और जलवायु परिवर्तन के कारणों को घटाने के कदम। • ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती।• सघन वृक्षारोपण (Aforestation)।• नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) को बढ़ावा।• ऊर्जा दक्षता (Energy Efficiency) में सुधार। सतत (Sustainable) ऐसी प्रक्रिया जिसे दीर्घकालिक रूप से बिना पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए जारी रखा जा सके। पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली (LiFE – Lifestyle for Environment) को अपनाना। NCERT Class 6, Social Science Ch-8

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NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 2: Understanding the Weather

NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 2: Understanding the Weather के अंतर्गत मौसम को आकार देने वाले प्रमुख घटकों—जैसे तापमान (Temperature), वायुदाब (Atmospheric Pressure), पवनों की दिशा और गति (Winds), आर्द्रता (Humidity) और वर्षा (Rainfall)—के बीच के गहरे अंतर्संबंधों को स्पष्ट करता है। तथा तापमान में अंतर से वायुदाब में बदलाव आता है और इसी अंतर के कारण हवाएं उच्च दाब से निम्न दाब वाले क्षेत्रों की ओर चलती हैं। इसके साथ ही, यह कृषि नियोजन, आपदा प्रबंधन (जैसे चक्रवात और बाढ़ की पूर्व चेतावनी), उड़ानों के संचालन और मौसम पूर्वानुमान तकनीकों के रणनीतिक महत्व और जलवाष्प के संघनन से बनने वाले बादलों और वर्षा के विभिन्न रूपों के वैज्ञानिक कारणों को भी स्पष्ट करता है। मौसम और इसके तत्व (Weather and its Elements) क्षोभमंडल (Troposphere): वायुमंडल की प्राथमिक परत मौसम के 5 मुख्य तत्व (Elements of Weather) मौसम का तत्व वैज्ञानिक परिभाषा माप / विशेष रूप तापमान (Temperature) वायुमंडल के ठंडा या गर्म होने की स्थिति। सार्वभौमिक मानकों द्वारा मापा जाता है। वर्षण (Precipitation) आकाश से जल का किसी भी रूप में नीचे गिरना। वर्षा (Rain), हिमपात (Snow), स्लीट, ओले (Hail)। वायुमंडलीय दबाव (Atmospheric Pressure) पृथ्वी की सतह पर हवा के भार द्वारा डाला गया दबाव। पवन की दिशा और गति तय करता है। पवन (Wind) हवा की गतिशीलता, उसकी चाल और दिशा। उच्च दाब से निम्न दाब की ओर प्रवाह। आर्द्रता (Humidity) हवा में मौजूद जलवाष्प (Water Vapour) की मात्रा। गैसीय अवस्था में जल। वर्षण के प्रकार (Types of Precipitation) प्राकृतिक संकेतों द्वारा मौसम का पूर्वानुमान (Observing Nature’s clues) मौसम मापन के उपकरण (Weather Instruments) a) तापमान (Temperature) IMD एवं प्राचीन संदर्भ b) वर्षण (Precipitation) c) वायुमंडलीय दबाव (Atmospheric pressure) d) पवन (Wind) e) आर्द्रता (Humidity) प्रमुख मौसम उपकरण और उनका कार्य घटक (Element) मापक उपकरण (Instrument) मापन इकाई (Unit) व्यावहारिक अनुप्रयोग तापमान थर्मामीटर C / F दैनिक तापमान परास व जलवायु आंकड़े एकत्र करना। वर्षण रेन गेज मिलीमीटर (mm) कृषि योजना और जल संसाधन प्रबंधन। वायुदाब बैरोमीटर मिलीबार (mb) चक्रवात, तूफान और मौसम प्रणाली का पूर्वानुमान। पवन दिशा विंड वेन / विंड सॉक दिशा (N, S, E, W) नेविगेशन, एविएशन (विमानन) और नौकायन। पवन गति एनीमोमीटर किमी/घंटा (km/h) तूफान चेतावनी और पवन ऊर्जा आकलन। आर्द्रता हाइग्रोमीटर प्रतिशत (%) खाद्य उद्योग, संग्रहालय एवं वस्त्र सुखाई प्रक्रि मौसम केंद्र (Weather Stations) स्वचालित मौसम केंद्र (Automated Weather Station (AWS) मौसम का पूर्वानुमान (Predicting the Weather) मौसमी चेतावनियाँ (IMD Weather Warning Alert System) कलर कोड चेतावनी का स्तर प्रशासनिक व सार्वजनिक कार्रवाई Green (नो वॉर्निंग) कोई चेतावनी नहीं स्थिति सामान्य, किसी कार्रवाई की आवश्यकता नहीं। Yellow (वॉच) निगरानी रखें (Be Updated) मौसम खराब हो सकता है; स्थिति पर नजर रखें। Orange (अलर्ट) तैयार रहें (Be Prepared) गंभीर मौसम की संभावना; बचाव की तैयारी रखें। Red (वॉर्निंग) कार्रवाई करें (Take Action) अत्यधिक खतरनाक मौसम; तत्काल सुरक्षात्मक कदम उठाएं। NCERT Class 6, Science Ch-5 यहाँ पढ़ें:-

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NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 1: Geographical Diversity of India

NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 1: Geographical Diversity of India के अंतर्गत भारत के मुख्य भौतिक विभागों—उत्तर के विशाल पर्वतीय क्षेत्र (हिमालय), सिंधु-गंगा-ब्रह्मपुत्र का उपजाऊ मैदान, प्राचीन और खनिज समृद्ध प्रायद्वीपीय पठार, तटीय मैदान तथा अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में स्थित द्वीप समूहों—की भू-वैज्ञानिक विशेषताओं, उत्तर में लहराते उत्तुंग हिमालय के पर्वतीय शिखरों से लेकर दक्षिण के विशाल हिंद महासागर को स्पर्श करते तटीय मैदानों तक, और समृद्ध भौगोलिक विविधता का एक सुव्यवस्थित विश्लेषण प्रस्तुत करता है। हिमालय पर्वत शृंखला (The Himalayas) एशिया का वॉटर टावर और सांस्कृतिक महत्व हिमालय का निर्माण हिमालय की तीन मुख्य श्रेणियाँ (Three Main Ranges) हिमालय को उत्तर से दक्षिण की ओर तीन प्रमुख श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है: श्रेणी का नाम भौगोलिक स्थिति व विशेषताएं प्रमुख चोटियां / स्थान हिमाद्रि (Greater Himalayas) सबसे उत्तरी, उच्चतम और सबसे बीहड़ श्रेणी। वर्षभर बर्फ से ढकी रहती है। माउंट एवरेस्ट, कंचनजंगा। हिमाचल (Lower Himalayas) हिमाद्रि के दक्षिण में स्थित। मध्यम जलवायु, समृद्ध जैव विविधता और मानव बसाव के अनुकूल। शिमला, कुल्लू-मनाली, नैनीताल, मसूरी, दार्जिलिंग। शिवालिक (Outer Himalayas) सबसे बाहरी और सबसे निचली श्रेणी। घने जंगलों और घुमावदार पहाड़ियों से निर्मित। हिमालय और गंगा के मैदानों के बीच का संक्रमण क्षेत्र (Transition Zone)। आपदा प्रबंधन, कला और जैव विविधता भारत का शीत मरुस्थल (The cold desert of India) मूनलैंड और लद्दाख की भूगर्भीय उत्पत्ति (Geological Origin) भूगर्भीय विशेषता / शब्द वैज्ञानिक कारण व प्रक्रिया मुख्य तथ्य मूनलैंड लद्दाख के भूभाग की बनावट चंद्रमा की सतह जैसी दिखती है, इसलिए इसे ‘मूनलैंड’ कहते हैं। यह क्षरण (Erosion) और हवा-पानी के प्रभावों का परिणाम है। टेथिस सागर का अवशेष जब भारतीय प्लेट यूरेशिया से टकराई, तो बीच का समुद्र (टेथिस) वलित होकर उठ गया। यहाँ की चट्टानें मुख्य रूप से बालू (Sand) और मिट्टी (Clay) से बनी हैं। पेंगोंग त्सो आस-पास के पर्वतीय क्षेत्रों से घुले खनिजों के कारण इसका पानी खारा (Salty) है। स्थानीय भाषा में ‘त्सो’ का अर्थ झील होता है। जैव विविधता और सांस्कृतिक जीवन (Wildlife & Culture) गंगा के मैदान (The Gangetic Plains) नदी प्रणाली, मिट्टी और आर्थिक जीवन मुख्य कारक वैज्ञानिक व भौगोलिक विवरण यूपीएससी परीक्षा हेतु आर्थिक महत्व प्रमुख नदी प्रणालियाँ सिंधु (Indus), गंगा, और ब्रह्मपुत्र तंत्र व उनकी सहायक नदियाँ। कृषि, पेयजल और पनबिजली (Hydroelectricity) उत्पादन का मुख्य स्रोत। जलोढ़ मृदा (Alluvial Soil) नदियाँ पहाड़ों से खनिज और उपजाऊ गाद (Silt) लाकर जमा करती हैं। भूमि को अत्यधिक उपजाऊ बनाती हैं, जिससे सघन कृषि संभव होती है। बहु-फसली प्रणाली (Multi-cropping) वर्ष में एक से अधिक फसलें उगाना (उदा. उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के धान के खेत)। खाद्य सुरक्षा (Food Security) और ग्रामीण आजीविका की रीढ़। परिवहन जाल और अवसंरचना विशेष तथ्य विशाल भारतीय मरुस्थल या थार मरुस्थल बालुका स्तूप (Sand Dunes) और जैसलमेर भौगोलिक / सांस्कृतिक घटक निर्माण प्रक्रिया एवं विशेषताएँ यूपीएससी परीक्षा हेतु मुख्य तथ्य बालुका स्तूप (Sand Dunes) पवन (Wind) द्वारा रेत को स्थानांतरित कर पहाड़ी नुमा आकृतियों में ढालना। ये स्तूप अस्थिर होते हैं और इनकी ऊंचाई 150 मीटर तक हो सकती है। जैसलमेर थार मरुस्थल के मध्य में स्थित शहर, जिसे ‘गोल्डन सिटी’ कहा जाता है। जैसलमेर का किला यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। जल संरक्षण और जीवन शैली (Water Conservation & Adaptation) अरावली की पहाड़ियाँ (The Aravalli Hills) अरावली का खनिज और ऐतिहासिक महत्व विषय ऐतिहासिक व वैज्ञानिक साक्ष्य मुख्य तथ्य खनिज संसाधन संगमरमर (Marble), ग्रेनाइट, जस्ता (Zinc) और तांबा (Copper)। प्राचीन काल से निर्माण और खनन का केंद्र रही है। जावर की खानें (Zawar Mines) 800 से अधिक वर्ष पुराने ऐतिहासिक साक्ष्य। भारतीय विश्व में सबसे पहले जस्ता (Zinc) निष्कर्षण प्रक्रिया में पारंगत हुए। सामरिक दुर्ग (Historic Forts) चित्तौड़गढ़, कुंभलगढ़ और रणथंभौर के ऐतिहासिक किले। पहाड़ियों का ढाल शत्रुओं के विरुद्ध प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करता था। प्रायद्वीपीय पठार (The Peninsular Plateau) पश्चिमी घाट बनाम पूर्वी घाट विशेषता पश्चिमी घाट (Western Ghats) पूर्वी घाट (Eastern Ghats) संरचना व ऊंचाई अधिक ऊंचे और पश्चिमी तट के समानांतर दीवार की तरह निरंतर विस्तृत। अपेक्षाकृत कम ऊंचे और नदियों द्वारा कटे-छंटे (Broken) खंडों में स्थित। स्थानीय नाम व दर्जा उत्तरी भाग को ‘सह्याद्रि’ कहते हैं। यह UNESCO विश्व धरोहर स्थल है। पूर्वी तट के साथ बिखरी हुई पहाड़ियों के रूप में फैला है। जलप्रपात व जैव विविधता मानसून में तीव्र ढलानों पर अनेक जलप्रपात बनते हैं; अत्यधिक समृद्ध जैव विविधता। कम ढलान; पूर्व की ओर बहने वाली नदियाँ यहाँ से होकर गुजरती हैं। नदियाँ, जनजातीय संस्कृति और जलप्रपात भारत की अद्वितीय तटरेखा भारत का पश्चिमी तट (The West Coast of India) पूर्वी तट (The East Coast) पश्चिमी तट बनाम पूर्वी तट लक्षण पश्चिमी तट (West Coast) पूर्वी तट (East Coast) भौगोलिक स्थिति अरब सागर और पश्चिमी घाट के बीच बंगाल की खाड़ी और पूर्वी घाट के बीच तटीय चौड़ाई संकीर्ण (Narrow) मैदान चौड़ा और विस्तृत (Wide) मैदान जल आकृतियाँ एस्ट्युरी (Estuary/ज्वारनदमुख), खाड़ियाँ डेल्टा और लैगून झीले प्रमुख नदियाँ नर्मदा, तापी (तिव्र गति से बहने वाली नदियाँ) महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी भारतीय द्वीप समूह (Indian Islands) भारत के पास दो प्रमुख द्वीप समूह हैं — लक्षद्वीप (अरब सागर) और अंडमान एवं निकोबार (बंगाल की खाड़ी)। लक्षद्वीप समूह (Lakshadweep islands) अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (Andaman and Nicobar islands) पश्चिम बंगाल और सुंदरबन में डेल्टा उत्तर-पूर्व की पहाड़ियाँ (The hills of the Northeast) विशेष तथ्य सारणी विषय / स्थल मुख्य विशेषता परीक्षा हेतु महत्व मावलिननॉन्ग गांव ईस्ट खासी हिल्स (मेघालय) में स्थित। ‘एशिया का सबसे स्वच्छ गांव’ (Cleanest Village in Asia) का दर्जा। इको-फ्रेंडली जीवन शैली बांस के कूड़ेदान और उत्कृष्ट स्वच्छता प्रबंधन। सामुदायिक पर्यावरण संरक्षण का वैश्विक मॉडल। लिविंग रूट ब्रिज रबर के पेड़ों की जड़ों को वर्षों तक आपस में बुनकर बनाए गए प्राकृतिक पुल। पारंपरिक जैव-इंजीनियरिंग (Bio-engineering) का सर्वोत्तम उदाहरण। NCERT Class 6, Social Science Ch-1 यहाँ पढ़ें:-

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NCERT Notes Class 6 science Chapter 12: Beyond Earth

NCERT Notes Class 6 science Chapter 12: Beyond Earth के अंतर्गत सूर्य के गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव में परिक्रमा करने वाले विभिन्न ग्रहों, उपग्रहों और क्षुद्रग्रहों के बुनियादी भौतिक गुणों को समझाया गया है। यह पृथ्वी के एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह चंद्रमा की बदलती कलाओं (Phases of the Moon), रात के आकाश में दिखने वाले विभिन्न तारा-मंडलों (Constellations) की पहचान और आकाशगंगा की विशालता के वैज्ञानिक नियमों को स्पष्ट करता है। यह आधुनिक उपग्रह संचार, मौसम पूर्वानुमान और सुदूर संवेदन (Remote Sensing) जैसी उन्नत तकनीकों को समझने का एक अनिवार्य वैज्ञानिक आधार स्तंभ है। तारे और तारा-मंडल (Stars and Constellations) तारामंडल की आधुनिक परिभाषा और वैश्विक वर्गीकरण प्राचीन काल में तारों के पैटर्न को तारामंडल कहा जाता था, लेकिन आधुनिक खगोल विज्ञान में इसकी परिभाषा बदल चुकी है: प्रमुख तारामंडल और उनसे जुड़े खगोलीय तथ्य: तारामंडल का नाम सांस्कृतिक/काल्पनिक रूप प्रमुख तारे व विशेषताएं ओरियन एक शिकारी (Hunter) के रूप में इसके मध्य में तीन तारे शिकारी की बेल्ट को दर्शाते हैं। इसमें बैटलग्यूस नामक मुख्य तारा स्थित है। कैनिस मेजर शिकारी के कुत्ते के रूप में इसमें सीरियस तारा शामिल है, जो रात्रि के आकाश का सबसे चमकीला तारा है। टॉरस एक बैल (Bull) के रूप में इसमें प्लीएड्स तारों का समूह और एल्डेबरन तारा स्थित हैं। भारतीय खगोल विज्ञान और जनजातीय लोककथाएँ भारतीय संस्कृति और खगोल विज्ञान में तारों को विशिष्ट नाम दिए गए हैं: रात्रि-आकाश का अवलोकन (Night Sky Watching) डार्क स्काई रिजर्व और खगोलीय अवलोकन की तकनीक खगोलीय अवधारणा / उपकरण मुख्य कार्यप्रणाली और विशेषताएँ महत्वपूर्ण तथ्य डार्क स्काई रिजर्व ऐसे पार्क/क्षेत्र जहाँ प्रकाश प्रदूषण को कृत्रिम रूप से कड़ा नियंत्रित किया जाता है। रात के आकाश को प्राकृतिक रूप से संरक्षित रखकर वैज्ञानिक अनुसंधान और खगोल-पर्यटन को बढ़ावा देना। खगोलीय विजिबिलिटी स्थान और समय के आधार पर तारों की दृश्यता का बदलना। ध्रुव तारा पृथ्वी के दक्षिणी गोलार्ध (Southern Hemisphere) से कभी दिखाई नहीं देता। डिजिटल मैपिंग टूल्स आकाश के मानचित्रण और पिंडों की सटीक पहचान करने वाले सॉफ्टवेयर। Sky Map और Stellarium प्रमुख मोबाइल/कंप्यूटर ऐप्स हैं जो दिशा, तारे और ग्रहों की सटीक पहचान कराते हैं। रात्रि आकाश दर्शन की तैयारी आकाश दर्शन को वैज्ञानिक रूप से सफल बनाने के लिए निम्नलिखित चरणबद्ध प्रक्रिया अपनाई जाती है: प्रमुख आकाशीय पिंडों को खोजना हमारा सौर परिवार (Our Solar System) सूर्य (The Sun) ग्रह (Planets) सौर मंडल के 8 ग्रहों का वर्गीकरण (दूरी के बढ़ते क्रम में): श्रेणी ग्रहों के नाम मुख्य भौतिक विशेषताएं पारंपरिक भारतीय नाम आंतरिक ग्रह (Inner Planets) बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल आकार में छोटे, चट्टानी और ठोस सतह वाले होते हैं। बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल बाह्य ग्रह (Outer Planets) बृहस्पति, शनि, अरुण (Uranus), वरुण (Neptune) आकार में बहुत बड़े (गैस और बर्फ से निर्मित)। इनके चारों ओर धूल और चट्टानों के वलय (Rings) होते हैं। बृहस्पति (गुरु), शनि ग्रहों से जुड़े विशेष खगोलीय तथ्य: प्राकृतिक उपग्रह और चंद्रमा भारत के चंद्र मिशन: क्षुद्रग्रह और धूमकेतु मंदाकिनी आकाश गंगा (The Milky Way Galaxy) ब्रह्मांड (The Universe) खगोलीय संकल्पनाओं का वर्गीकरण खगोलीय इकाई / शब्दावली मूल वैज्ञानिक परिभाषा मुख्य वैज्ञानिक महत्व आकाशगंगा अरबों तारों, गैस और धूल के कणों का एक विशाल गुरुत्वाकर्षण-बद्ध तंत्र। हमारा सौर मंडल इसके शिकारी बाहु (Orion Arm) के एक हिस्से में स्थित है। एक्सोप्लेनेट्स हमारे सूर्य के अलावा किसी अन्य तारे के चारों ओर परिक्रमण करने वाले बाहरी सौर-मंडलीय ग्रह। ब्रह्मांड में पृथ्वी से इतर जीवन की उपस्थिति और ‘रहने योग्य क्षेत्र’ (Habitable Zone) की खोज का प्राथमिक आधार। ब्रह्मांड संपूर्ण अंतरिक्ष, समय और उसमें उपस्थित समस्त पदार्थ (गैलेक्सी, तारे, परमाणु) का कुल योग। वर्तमान तकनीकी स्तर पर वैज्ञानिकों को अभी तक पृथ्वी के बाहर जीवन का कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं मिला है। NCERT Class 6, Science Ch-9 यहाँ पढ़ें:-

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NCERT Notes Class 6 science Chapter 11: Nature’s Treasures

NCERT Notes Class 6 science Chapter 11: Nature’s Treasures के अंतर्गत हमारी पृथ्वी पर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों की विशाल संपदा और मानव जीवन में उनकी अपरिहार्यता का एक तार्किक और संवेदनशील विश्लेषण प्रस्तुत करता है। हमारे भौतिक परिवेश में बिखरी हवा, पानी, मिट्टी, वन और खनिज केवल उपभोग की वस्तुएं नहीं हैं, बल्कि ये प्रकृति के वे अमूल्य खजाने हैं जो पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व और संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) का आधार हैं। यह वायु और जल जैसी जीवनदायिनी संपदाओं की चक्रण प्रक्रियाओं, मृदा निर्माण के बुनियादी सिद्धांतों तथा नवीकरणीय (Renewable) और अनवीकरणीय (Non-renewable) संसाधनों के बीच के अंतर को बहुत ही व्यावहारिक स्पष्ट करता है। वायु (Air) वायु का संघटन (Composition of air) गैस का नाम (Name of Gas) वायुमंडल में प्रतिशत मात्रा (%) मुख्य तथ्य नाइट्रोजन 78% वायु में सर्वाधिक मात्रा में पाई जाने वाली अक्रिय गैस। ऑक्सीजन 21% सजीवों के जीवित रहने और श्वसन के लिए अनिवार्य गैस। आर्गन, कार्बन डाइऑक्साइड व अन्य 1% आर्गन एक अक्रिय गैस है, जबकि CO_2 ग्रीनहाउस गैस है। पवन ऊर्जा भारत के प्रमुख पवन ऊर्जा फार्म: जल (Water) मीठे पानी (Freshwater) की उपलब्धता और पहुँच मीठे पानी का स्रोत (Source) उपलब्धता का स्वरूप मानवीय पहुँच की स्थिति (Accessibility) हिमनद और बर्फ की चादरें ग्लेशियर और बर्फबारी के रूप में अत्यधिक कठिन (Agri-Domestic उपयोग से दूर) भूजल (Underground Water) भूगर्भीय परतों के नीचे कठिन और सीमित (पंपिंग की आवश्यकता) सतही जल निकाय नदियां, झीलें, तालाब और कुएँ आसानी से सुलभ (कुल जल का एक बहुत छोटा हिस्सा) जल की बर्बादी और संरक्षण के उपाय (Wastage and Solutions) जल प्रदूषण और संकट (Water Pollution and Scarcity) पारंपरिक जल संचयन: भारत की प्राचीन विरासत बावड़ियों की वैज्ञानिक कार्यप्रणाली: सूर्य से ऊर्जा (Energy from the Sun) खाद्य श्रृंखला और सौर ऊर्जा की निर्भरता पारिस्थितिकी (Ecology) के दृष्टिकोण से पृथ्वी पर ऊर्जा का प्रवाह पूरी तरह सौर ऊर्जा पर टिका हुआ है: आधुनिक सौर प्रौद्योगिकी और अनुप्रयोग सूर्य की ऊर्जा को दो रूपों में सीधे प्रयोग में लाया जा सकता है: वन (Forests) भारत में वन संरक्षण के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रयास भारत में प्राचीन काल से ही वनों का आदर, संरक्षण और संवर्धन करने की एक मजबूत समृद्ध परंपरा रही है: संरक्षण का प्रकार / आंदोलन काल और स्थान मुख्य विशेषता पवित्र उपवन प्राचीन काल से संपूर्ण भारत में सांस्कृतिक व धार्मिक आस्था के आधार पर संरक्षित वनों के वे छोटे हिस्से जहाँ इंसानी हस्तक्षेप और कटाई पूरी तरह वर्जित होती है। चिपको आंदोलन वर्ष 1970 के दशक की शुरुआत, उत्तराखंड (तत्कालीन उत्तर प्रदेश) पर्यावरण संरक्षण के लिए आम जनता, विशेषकर स्थानीय महिलाओं का ऐतिहासिक सामूहिक प्रयास, जिसमें वे पेड़ों को कटने से बचाने के लिए उनसे चिपक (hug) जाती थीं। वन महोत्सव प्रतिवर्ष जुलाई महीने के प्रथम सप्ताह में देश भर में मनाया जाने वाला एक सप्ताह लंबा वन उत्सव, जिसका मुख्य उद्देश्य वृक्षारोपण को बढ़ावा देना और हरित आवरण (Green cover) में वृद्धि करना है। वनों में मृदा संरक्षण और प्राकृतिक पुनर्चक्रण जंगल की जमीन पर गिरने वाली सूखी पत्तियों और गीली मिट्टी का एक गहरा वैज्ञानिक चक्र होता है: मृदा, चट्टानें और खनिज (Soil, Rocks and Minerals) चट्टानों (Rocks) के प्रकार और उनके व्यावहारिक अनुप्रयोग चट्टान का नाम मुख्य विशेषता / अनुप्रयोग परीक्षा हेतु महत्व लैटेराइट इसका उपयोग ईंटों (Bricks) की तरह भवन निर्माण में किया जाता है। उच्च तापमान और भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में निर्मित होने वाली अत्यधिक निक्षालित (Leached) मिट्टी/चट्टान। स्लेट छतों के निर्माण (Roofing) में परतदार संरचना के रूप में उपयोगी। यह एक रूपांतरित (Metamorphic) चट्टान है। ग्रेनाइट, बलुआ पत्थर व संगमरमर मकानों, मंदिरों, इमारतों, बांधों, सड़कों और टेबल टॉप के निर्माण में। बलुआ पत्थर (Sandstone) अवसादी है, जबकि संगमरमर (Marble) का खनन रूपांतरित चट्टान के रूप में होता है। प्राचीन पाषाण उपकरण हस्त-कुठार और बाणाग्र बनाने में। मानव इतिहास में हजारों साल पहले (पुरापाषाण/मध्यपाषाण काल) पत्थरों से औजार बनाए जाते थे। खनिज और धातुओं का निष्कर्षण (Minerals) जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के विभिन्न रूप व उनके उपयोग ईंधन का नाम (Fuel) स्रोत / प्राप्ति (Source) मुख्य उपयोग व पर्यावरणीय प्रभाव पेट्रोल और डीजल पेट्रोलियम (क्रूड ऑयल) से प्राप्त वाहनों (यातायात) में सबसे व्यापक रूप से उपयोग होने वाला प्राथमिक ईंधन। केरोसिन (मिट्टी का तेल) पेट्रोलियम से प्राप्त मुख्य रूप से प्रकाश और घरेलू ईंधन के रूप में प्रयुक्त। LPG (तरल पेट्रोलियम गैस) पेट्रोलियम रिफाइनिंग का उत्पाद स्वच्छ घरेलू खाना पकाने के ईंधन के रूप में कोयला, लकड़ी और उपले (Dung cakes) का स्थान ले चुका है। CNG (संपीड़ित प्राकृतिक गैस) प्राकृतिक गैस का संपीड़ित रूप वाहनों में पेट्रोल/डीजल की तुलना में उपयोग होने वाला एक अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन (Cleaner Fuel)। कोयला (Coal) कार्बनिक अवशेषों का ठोस रूप भारत में मुख्य रूप से विद्युत उत्पादन (Thermal Power) में सर्वाधिक प्रयुक्त। पर्यावरणीय चुनौतियाँ और संरक्षण के उपाय प्राकृतिक संसाधन: नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय (Natural Resources: Renewable and Non-renewable) नवीकरणीय बनाम गैर-नवीकरणीय संसाधन: एक तुलनात्मक विश्लेषण संसाधन का प्रकार वैज्ञानिक परिभाषा मुख्य उदाहरण महत्वपूर्ण तथ्य नवीकरणीय संसाधन (Renewable) वे संसाधन जो एक उचित समय सीमा के भीतर प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा स्वतः नवीकृत, पुनर्स्थापित या पुनः भर जाते हैं। वायु (Air), जल (Water), वन (Forest) इनका अत्यधिक दोहन या प्रदूषण इनके चक्र को बाधित कर सकता है, इसलिए विवेकपूर्ण उपयोग अनिवार्य है। गैर-नवीकरणीय संसाधन (Non-renewable) वे संसाधन जो प्रकृति में सीमित मात्रा में हैं और एक बार समाप्त होने के बाद उचित समय में पुनः निर्मित नहीं हो सकते। कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, खनिज (Minerals), मिट्टी (Soil), चट्टानें (Rocks) इनके निर्माण में लाखों वर्ष लगते हैं। एक बार समाप्त होने पर ये हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगे। संसाधन जिनका हम उपयोग करते हैं सतत विकास और गांधीवादी दर्शन “पृथ्वी हर मनुष्य की आवश्यकता (Need) को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन प्रदान करती है, लेकिन किसी भी मनुष्य के लालच (Greed) को पूरा करने के लिए नहीं।” – महात्मा गांधी NCERT Class 6, Science Ch-7 यहाँ पढ़ें:-

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