NCERT Notes Class 6 science Chapter 12: Beyond Earth के अंतर्गत सूर्य के गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव में परिक्रमा करने वाले विभिन्न ग्रहों, उपग्रहों और क्षुद्रग्रहों के बुनियादी भौतिक गुणों को समझाया गया है। यह पृथ्वी के एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह चंद्रमा की बदलती कलाओं (Phases of the Moon), रात के आकाश में दिखने वाले विभिन्न तारा-मंडलों (Constellations) की पहचान और आकाशगंगा की विशालता के वैज्ञानिक नियमों को स्पष्ट करता है। यह आधुनिक उपग्रह संचार, मौसम पूर्वानुमान और सुदूर संवेदन (Remote Sensing) जैसी उन्नत तकनीकों को समझने का एक अनिवार्य वैज्ञानिक आधार स्तंभ है।
तारे और तारा-मंडल (Stars and Constellations)
- तारों की विशेषता: रात्रि के आकाश में दिखने वाले तारे विभिन्न तीव्रता (चमकदार और धुंधले) के होते हैं, जो अपने स्वयं के प्रकाश (Own light) से चमकते हैं।
- दिशा ज्ञान (Navigation) में ऐतिहासिक महत्व: आधुनिक तकनीक और चुंबकीय कम्पास (Magnetic compass) के आविष्कार से पहले, नाविकों और यात्रियों द्वारा समुद्र व भूमि पर दिशा खोजने के लिए इन काल्पनिक आकृतियों का उपयोग किया जाता था; आपातकालीन स्थितियों में आज भी इसका उपयोग बैकअप के रूप में किया जाता है।
तारामंडल की आधुनिक परिभाषा और वैश्विक वर्गीकरण
प्राचीन काल में तारों के पैटर्न को तारामंडल कहा जाता था, लेकिन आधुनिक खगोल विज्ञान में इसकी परिभाषा बदल चुकी है:
- आधुनिक परिभाषा: वर्तमान में यह आकाश के निश्चित/परिभाषित क्षेत्रों (Defined regions) को संदर्भित करता है, जिसमें तारों के पैटर्न शामिल होते हैं।

- IAU का मानक: विभिन्न संस्कृतियों द्वारा तय सीमाओं के भ्रम को दूर करने के लिए, 20वीं सदी की शुरुआत में इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल यूनियन (IAU) ने आधिकारिक तौर पर पूरे आकाश को 88 तारामंडलों (Regions) में विभाजित किया।
प्रमुख तारामंडल और उनसे जुड़े खगोलीय तथ्य:
| तारामंडल का नाम | सांस्कृतिक/काल्पनिक रूप | प्रमुख तारे व विशेषताएं |
| ओरियन | एक शिकारी (Hunter) के रूप में | इसके मध्य में तीन तारे शिकारी की बेल्ट को दर्शाते हैं। इसमें बैटलग्यूस नामक मुख्य तारा स्थित है। |
| कैनिस मेजर | शिकारी के कुत्ते के रूप में | इसमें सीरियस तारा शामिल है, जो रात्रि के आकाश का सबसे चमकीला तारा है। |
| टॉरस | एक बैल (Bull) के रूप में | इसमें प्लीएड्स तारों का समूह और एल्डेबरन तारा स्थित हैं। |
भारतीय खगोल विज्ञान और जनजातीय लोककथाएँ
भारतीय संस्कृति और खगोल विज्ञान में तारों को विशिष्ट नाम दिए गए हैं:
- नक्षत्र: भारतीय खगोल विज्ञान में किसी विशिष्ट तारे या तारों के समूह को नक्षत्र कहा जाता है।
- आर्द्रा: ओरियन तारामंडल में स्थित ‘बैटलग्यूस’ तारा।
- कृत्तिका: टॉरस तारामंडल में स्थित ‘प्लीएड्स’ तारों का समूह।
- रोहिणी: टॉरस तारामंडल में स्थित ‘एल्डेबरन’ तारा।
- जनजातीय लोककथाएँ:
- मध्य भारत की जनजातियाँ: बिग डिपर के आयताकार चार तारों को “बूढ़ी दादी की खाट” और शेष तीन तारों को उसे चुराने वाले “तीन चोर” मानती हैं।
- कोंकण तट के मछुआरे: इन चार तारों को एक “नाव” और अंतिम तीन तारों को “नाव की गर्दन” के रूप में देखते हैं।
रात्रि-आकाश का अवलोकन (Night Sky Watching)
- दृश्यता में बाधाएँ: बड़े शहरों में अत्यधिक कृत्रिम प्रकाश, धुएँ और धूल के कारण रात में आकाश स्पष्ट नहीं दिखाई देता, जिसके कारण बहुत कम तारे दिखाई देते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इसके विपरीत स्थिति होती है।
- प्रकाश प्रदूषण (Light Pollution): रात के समय पर्यावरण में अत्यधिक और अवांछित कृत्रिम प्रकाश की उपस्थिति को प्रकाश प्रदूषण कहा जाता है। यह वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ रहा है।
- खगोलीय प्रभाव: प्रकाश प्रदूषण हमारी रात के आकाश का अध्ययन करने और आकाशीय पिंडों को देखने की क्षमता को गंभीर रूप से सीमित कर देता है।
डार्क स्काई रिजर्व और खगोलीय अवलोकन की तकनीक
| खगोलीय अवधारणा / उपकरण | मुख्य कार्यप्रणाली और विशेषताएँ | महत्वपूर्ण तथ्य |
| डार्क स्काई रिजर्व | ऐसे पार्क/क्षेत्र जहाँ प्रकाश प्रदूषण को कृत्रिम रूप से कड़ा नियंत्रित किया जाता है। | रात के आकाश को प्राकृतिक रूप से संरक्षित रखकर वैज्ञानिक अनुसंधान और खगोल-पर्यटन को बढ़ावा देना। |
| खगोलीय विजिबिलिटी | स्थान और समय के आधार पर तारों की दृश्यता का बदलना। | ध्रुव तारा पृथ्वी के दक्षिणी गोलार्ध (Southern Hemisphere) से कभी दिखाई नहीं देता। |
| डिजिटल मैपिंग टूल्स | आकाश के मानचित्रण और पिंडों की सटीक पहचान करने वाले सॉफ्टवेयर। | Sky Map और Stellarium प्रमुख मोबाइल/कंप्यूटर ऐप्स हैं जो दिशा, तारे और ग्रहों की सटीक पहचान कराते हैं। |
रात्रि आकाश दर्शन की तैयारी
आकाश दर्शन को वैज्ञानिक रूप से सफल बनाने के लिए निम्नलिखित चरणबद्ध प्रक्रिया अपनाई जाती है:
- स्थान का चयन: रोशनी, ऊंची इमारतों और पेड़ों से दूर एक खुले और अंधेरे क्षेत्र का चुनाव करना।
- समय और मौसमी दशाएँ: ध्रुव तारे जैसे धुंधले तारों को देखने के लिए बादलों और चंद्रमा से मुक्त (अमावस्या के करीब) रात का चयन करना।

- सहायक उपकरण: दिशा सूचक हेतु चुंबकीय कम्पास, प्रेक्षण नोट करने के लिए नोटबुक और स्काई मैप ऐप्स।
- डार्क एडाप्टेशन: चुने गए अंधेरे स्थान पर पहुँचने के बाद लगभग आधा घंटा (30 मिनट) इंतजार करना, ताकि मानव आँखें अंधेरे के अनुकूल समायोजित हो सकें और धुंधले तारे भी स्पष्ट दिखें।
प्रमुख आकाशीय पिंडों को खोजना
- ध्रुव तारा (Pole Star): गर्मियों में रात लगभग 9 बजे उत्तर दिशा में बिग डिपर (सप्तर्षि) को खोजें। बिग डिपर के कप के अंत में स्थित दो तारों को जोड़ने वाली एक काल्पनिक सीधी रेखा की कल्पना उत्तर की ओर करें। इन दो तारों के बीच की दूरी से पांच गुना आगे बढ़ने पर यह रेखा ध्रुव तारे तक पहुँचती है, जो बहुत चमकदार नहीं होता।
- ओरियन और सीरियस: भारत में ओरियन तारामंडल को दिसंबर से अप्रैल के महीनों में सूर्यास्त के बाद सबसे अच्छी तरह देखा जा सकता है।
- शिकारी की बेल्ट के रूप में स्थित तीन सीधे तारों को सबसे पहले पहचाना जाता है।
- इन तीन मध्य तारों से गुजरती हुई एक काल्पनिक रेखा की कल्पना यदि पूर्व दिशा (East) की ओर की जाए, तो यह रात के सबसे चमकीले तारे सीरियस तक ले जाती है।
हमारा सौर परिवार (Our Solar System)
- सौर मंडल का संघटन: सूर्य (तारा), 8 ग्रह, उनके उपग्रह, क्षुद्रग्रह (Asteroids) और धूमकेतु (Comets) मिलकर सौर मंडल का निर्माण करते हैं।
- परिक्रमण (Revolution): सौर मंडल के अधिकांश खगोलीय पिंड सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हैं, जिसे परिक्रमण कहा जाता है।
- ऊर्जा का स्रोत: सूर्य सौर मंडल का सबसे बड़ा और भारी पिंड है जो इसकी लगभग पूरी ऊर्जा का उत्पादन करता है। अन्य सभी पिंड सूर्य के प्रकाश को परावर्तित (Reflect) करके चमकते हैं।
सूर्य (The Sun)
- भौतिक विशेषता: यह पृथ्वी का सबसे निकटतम तारा है, जो गैसों का एक अत्यंत गर्म गोलाकार पिंड है। इसका व्यास (Diameter) पृथ्वी से लगभग 100 गुना बड़ा है।
- दूरी और मात्रक: पृथ्वी से सूर्य की दूरी लगभग 150 मिलियन (15 करोड़) किमी है। सौर मंडल में दूरियों को मापने के लिए ‘खगोलीय इकाई’ (Astronomical Unit – au) का उपयोग किया जाता है, जो सूर्य और पृथ्वी के बीच की औसत दूरी के बराबर है।
- निकटतम तारा: सूर्य के बाद पृथ्वी का दूसरा सबसे नजदीकी तारा प्रॉक्सिमा सेंचुरी है, जो लगभग 2,69,000 au की दूरी पर स्थित है।
- पारिस्थितिक महत्व: सूर्य पृथ्वी पर जलवायु, मौसम, ऋतु चक्र, जल चक्र और पवनों के संचालन के लिए उत्तरदायी है।
ग्रह (Planets)
- परिभाषा व गति: यह सूर्य के चारों ओर परिक्रमण करने वाले बड़े, लगभग गोलाकार पिंड हैं। पृथ्वी को एक परिक्रमण पूरा करने में 1 वर्ष का समय लगता है। परिक्रमण के साथ-साथ ग्रह अपनी धुरी पर घूर्णन (Rotation) भी करते हैं (पृथ्वी का घूर्णन काल = 24 घंटे)।
- ग्रह बनाम तारे: तारों के विपरीत, ग्रह टिमटिमाते (Twinkle) नहीं हैं।

- दृश्यता: शुक्र (Venus) आकाश में सूर्य और चंद्रमा के बाद सबसे चमकीला पिंड है। इसे भोर या शाम को पूर्व/पश्चिम दिशा में नग्न आंखों से आसानी से देखा जा सकता है, इसलिए इसे ‘भोर का तारा’ या ‘सांझ का तारा’ (Morning/Evening Star) कहते हैं। इसके अलावा बुध, मंगल, बृहस्पति और शनि को भी नग्न आंखों से देखा जा सकता है।
सौर मंडल के 8 ग्रहों का वर्गीकरण (दूरी के बढ़ते क्रम में):
| श्रेणी | ग्रहों के नाम | मुख्य भौतिक विशेषताएं | पारंपरिक भारतीय नाम |
| आंतरिक ग्रह (Inner Planets) | बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल | आकार में छोटे, चट्टानी और ठोस सतह वाले होते हैं। | बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल |
| बाह्य ग्रह (Outer Planets) | बृहस्पति, शनि, अरुण (Uranus), वरुण (Neptune) | आकार में बहुत बड़े (गैस और बर्फ से निर्मित)। इनके चारों ओर धूल और चट्टानों के वलय (Rings) होते हैं। | बृहस्पति (गुरु), शनि |
ग्रहों से जुड़े विशेष खगोलीय तथ्य:
- मंगल (Mars): इसे ‘लाल ग्रह’ कहा जाता है क्योंकि इसकी मिट्टी का रंग लाल है।
- पृथ्वी (Earth): अंतरिक्ष से नीली दिखाई देने के कारण इसे ‘नीला ग्रह’ (Blue Planet) कहते हैं।
- तापमान अपवाद: सामान्यतः सूर्य से दूरी बढ़ने पर ग्रह ठंडे होते हैं, लेकिन शुक्र (Venus) वायुमंडल के कारण ऊष्मा को फंसा लेता है (Greenhouse Effect), जिससे यह बुध (Mercury) की तुलना में अधिक गर्म है।
- प्लूटो और बौने ग्रह (Dwarf Planets): वर्ष 2006 में इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल यूनियन (IAU) ने ग्रह की परिभाषा को संशोधित किया। इसके बाद प्लूटो को ग्रह की श्रेणी से हटाकर ‘बौना ग्रह’ वर्गीकृत किया गया।
प्राकृतिक उपग्रह और चंद्रमा
- उपग्रह (Satellites): ग्रहों के चारों ओर चक्कर लगाने वाले अपेक्षाकृत छोटे पिंड। मंगल के पास 2 चंद्रमा हैं, जबकि बृहस्पति और शनि के पास बहुत बड़ी संख्या में चंद्रमा हैं।
- चंद्रमा की भौतिक स्थिति: यह पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह है जो पृथ्वी से लगभग 3,84,000 किमी दूर है। यह पृथ्वी के व्यास का एक चौथाई (1/4) है और पृथ्वी का एक चक्कर 27 दिनों में पूरा करता है।
- क्रेटर: चंद्रमा की सतह पर वायुमंडल, जल और जीवन नहीं है। इसकी सतह पर क्षुद्रग्रहों के टकराने से बने कटोरे जैसे गड्ढे (Craters) बिना किसी क्षरण के लाखों सालों तक वैसे ही बने रहते हैं।
भारत के चंद्र मिशन:
- चंद्रयान-1 (2008) और चंद्रयान-2 (2019): चंद्रमा के अध्ययन के लिए भारत के शुरुआती मिशन।
- चंद्रयान-3 (जुलाई 2023): इसके ‘विक्रम’ लैंडर और ‘प्रज्ञान’ रोवर ने 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव (South Pole) के पास सफलतापूर्वक सॉफ्ट-लैंडिंग की। भारत दुनिया का पहला ऐसा देश बना। इस ऐतिहासिक सफलता की याद में भारत सरकार ने 23 अगस्त को ‘राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस’ (National Space Day) घोषित किया है।
- चंद्रयान-4 (भावी मिशन): इसका मुख्य उद्देश्य चंद्रमा से मिट्टी और चट्टानों के नमूने (Samples) वापस पृथ्वी पर लाना है।
क्षुद्रग्रह और धूमकेतु
- क्षुद्रग्रह (Asteroids): ये चट्टानी और अनियमित आकार के छोटे पिंड होते हैं जिनका आकार 10 मीटर से 500 किमी तक होता है। ये मुख्य रूप से मंगल और बृहस्पति की कक्षाओं के बीच एक विस्तृत पट्टी में सूर्य के चक्कर लगाते हैं, जिसे क्षुद्रग्रह बेल्ट (Asteroid Belt) कहा जाता है।
- धूमकेतु (Comets): सौर मंडल के बाहरी क्षेत्रों से आने वाले ये पिंड धूल, गैस, चट्टान और बर्फ से बने होते हैं।
- जब ये सूर्य के करीब आते हैं, तो जमी हुई गैसें वाष्पीकृत होकर एक लंबी पूंछ (Tail) बनाती हैं। सूर्य से दूर जाने पर ये धुंधले हो जाते हैं।

- हैली का धूमकेतु (Halley’s Comet): यह एक प्रसिद्ध आवर्ती धूमकेतु है जो हर 76 वर्ष में दिखाई देता है (पिछली बार 1986 में देखा गया था)।
- सांस्कृतिक नाम: संस्कृत में इसे ‘धूमकेतु’ कहा जाता है। भारत की विभिन्न जनजातियाँ इसे ‘पुच्छ्या तारा’ (पूंछ वाला तारा) या ‘झेंड्या तारा’ (ध्वज जैसा तारा) भी कहती हैं।
मंदाकिनी आकाश गंगा (The Milky Way Galaxy)
- आकाशीय दृश्यता: किसी चंद्रमा रहित (अमावस्या) रात में जब शहरों के कृत्रिम प्रकाश और प्रदूषण से दूर किसी अत्यंत अंधेरे स्थान से आसमान को देखा जाता है, तो उत्तर से दक्षिण दिशा की ओर फैली हुई प्रकाश की एक धुंधली चौड़ी पट्टी दिखाई देती है।
- गैलेक्सी की संरचना: इस विशाल प्रकाश पट्टी को हमारी गृह आकाशगंगा कहा जाता है जिसे भारतीय संस्कृति में ‘आकाशगंगा’ या वैज्ञानिक भाषा में ‘मिल्की वे गैलेक्सी’ नाम दिया गया है, और एक सामान्य आकाशगंगा के भीतर मिलियन से लेकर बिलियन (करोड़ों से अरबों) की संख्या में तारे स्थित होते हैं।
- सौर मंडल की स्थिति: हमारा पूरा सौर मंडल (सूर्य, आठ ग्रह और अन्य सभी खगोलीय पिंड) इसी विशाल मिल्की वे गैलेक्सी का एक अत्यंत छोटा और अभिन्न हिस्सा है।
ब्रह्मांड (The Universe)
- बाह्य खगोलीय विस्तार: हमारी आकाशगंगा यानी मिल्की वे गैलेक्सी के पार सुदूर अंतरिक्ष में अनगिनत अन्य आकाशगंगाएँ मौजूद हैं, जिनका अध्ययन आधुनिक वैज्ञानिक तारों, आकाशगंगाओं की जटिल प्रणालियों और संपूर्ण ब्रह्मांड (Universe) की उत्पत्ति को समझने के लिए निरंतर कर रहे हैं।
- एक्सोप्लेनेट्स और जीवन की खोज: ब्रह्मांड में पृथ्वी के अतिरिक्त अन्य स्थानों पर जीवन की संभावनाओं को खोजने के लिए वैज्ञानिकों का ध्यान मुख्य रूप से एक्सोप्लेनेट्स पर केंद्रित है। ये हमारे सौर मंडल से बाहर हमारी ही आकाशगंगा के अन्य तारों की परिक्रमा करने वाले विशेष ग्रह हैं।
खगोलीय संकल्पनाओं का वर्गीकरण
| खगोलीय इकाई / शब्दावली | मूल वैज्ञानिक परिभाषा | मुख्य वैज्ञानिक महत्व |
| आकाशगंगा | अरबों तारों, गैस और धूल के कणों का एक विशाल गुरुत्वाकर्षण-बद्ध तंत्र। | हमारा सौर मंडल इसके शिकारी बाहु (Orion Arm) के एक हिस्से में स्थित है। |
| एक्सोप्लेनेट्स | हमारे सूर्य के अलावा किसी अन्य तारे के चारों ओर परिक्रमण करने वाले बाहरी सौर-मंडलीय ग्रह। | ब्रह्मांड में पृथ्वी से इतर जीवन की उपस्थिति और ‘रहने योग्य क्षेत्र’ (Habitable Zone) की खोज का प्राथमिक आधार। |
| ब्रह्मांड | संपूर्ण अंतरिक्ष, समय और उसमें उपस्थित समस्त पदार्थ (गैलेक्सी, तारे, परमाणु) का कुल योग। | वर्तमान तकनीकी स्तर पर वैज्ञानिकों को अभी तक पृथ्वी के बाहर जीवन का कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं मिला है। |