19 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों (2024) की आधिकारिक घोषणा और देश के निजी अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र (Private Space Sector) स्काईरूट एयरोस्पेस के ‘विक्रम-1’ (Vikram-1) रॉकेट के ‘मिशन आगमन’ और भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 के तहत किए गए बड़े संरचनात्मक व एफडीआई (FDI) सुधारों को प्रस्तुत किया गया है। श्वेत क्रांति 2.0 और ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन को गति देते हुए कोलकाता (हावड़ा फूड पार्क) में स्थापित होने वाले विश्व के सबसे बड़े दही उत्पादन संयंत्र (अमुल बंगाल डेयरी परियोजना) के भूमि पूजन तथा e-RCS पोर्टल के लॉन्च का विश्लेषण है। सामाजिक न्याय के दृष्टिकोण से राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (NCSK) द्वारा ‘जीरो मैनुअल स्कैवेंजिंग’ और सीवर सफाई के पूर्ण यंत्रीकरण के प्रशासनिक निर्देशों की समीक्षा की गई है।
विक्रम-1 का सफल प्रक्षेपण: भारतीय निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में ऐतिहासिक क्रांति
- प्रारंभिक परीक्षा: सरकारी नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप; शासन व्यवस्था – निजी भागीदारी को बढ़ावा देने वाली नीतियां।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science and Technology) – अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी (Space Technology) में विकास; औद्योगिक विकास और स्वदेशीकरण।
चर्चा में क्यों?
भारत की निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की अग्रणी स्टार्टअप कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने अपने बहुप्रतीक्षित रॉकेट विक्रम-1 का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया है। इस ऐतिहासिक तकनीकी मील के पत्थर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्काईरूट की पूरी टीम को बधाई देते हुए इसे भारतीय अंतरिक्ष यात्रा का एक ‘परिवर्तनकारी और निर्णायक क्षण’ (Defining Moment) करार दिया है, जो देश के अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र में निजी क्षेत्र की बढ़ती और मजबूत होती भूमिका को रेखांकित करता है।
विक्रम-1 का महत्व और निजी अंतरिक्ष क्षेत्र का भविष्य
1. विक्रम-1 रॉकेट क्या है?
- स्वदेशी तकनीकी विकास: विक्रम-1 स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा विकसित एक बहु-चरणीय (Multi-stage) प्रक्षेपण यान है, जिसे विशेष रूप से छोटे उपग्रहों को पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit – LEO) में स्थापित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- निजी क्षेत्र की बड़ी छलांग: यह प्रक्षेपण भारत के अंतरिक्ष सुधारों (Space Reforms) का एक सीधा परिणाम है, जिसने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के साथ-साथ निजी कंपनियों के लिए भी वाणिज्यिक अंतरिक्ष बाजार के रास्ते खोल दिए हैं।
2. इस प्रक्षेपण का रणनीतिक और व्यावहारिक महत्व
- निजी क्षेत्र में नवाचार को गति: प्रधानमंत्री के अनुसार, अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी नए मोर्चे खोल रही है और अत्याधुनिक तकनीकी नवाचारों (Innovation) की गति को तेज़ कर रही है।
- युवाओं और स्टार्टअप्स के लिए प्रेरणा: यह सफल मिशन देश के लाखों युवाओं और उभरते हुए उद्यमियों को बड़े सपने देखने और बिना किसी डर के नए वैज्ञानिक अनुसंधान करने के लिए एक मजबूत प्रोत्साहन प्रदान करेगा।
- वैश्विक वाणिज्यिक बाजार में भारत की पैठ: किफायती और त्वरित प्रक्षेपण सेवाएं प्रदान करके भारत अब वैश्विक स्तर पर छोटे उपग्रहों के प्रक्षेपण का एक बड़ा हब बनने की दिशा में अग्रसर है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | प्रारंभिक परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य |
| प्रक्षेपण यान का नाम | विक्रम-1, जिसका नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है। |
| विकासकर्ता कंपनी | स्काईरूट एयरोस्पेस – हैदराबाद स्थित एक भारतीय निजी अंतरिक्ष स्टार्टअप। |
| रॉकेट की श्रेणी | यह एक लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (Small Satellite Launch Vehicle) है जो पेलोड को अंतरिक्ष में ले जाने में सक्षम है। |
| सहयोगी नियामक संस्था | इन-स्पेस – भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र, जो निजी कंपनियों को अंतरिक्ष गतिविधियों की अनुमति देता है। |
| ऐतिहासिक संदर्भ | इससे पहले स्काईरूट ने नवंबर 2022 में भारत का पहला निजी रॉकेट ‘विक्रम-एस’ उप-कक्षीय (Sub-orbital) मिशन के तहत लॉन्च किया था। |
कोलकाता में विश्व के सबसे बड़े दही उत्पादन संयंत्र का भूमि पूजन: ‘सहकार से समृद्धि’ की ओर कदम
- प्रारंभिक परीक्षा: सरकारी नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप; शासन व्यवस्था – ई-गवर्नेंस (e-RCS पोर्टल); वैधानिक और अर्ध-न्यायिक निकाय।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था तथा नियोजन, संसाधन जुटाना; मुख्य फसलें – देश के विभिन्न भागों में कृषि प्रतिरूप; पशुपालन का अर्थशास्त्र और डेयरी क्षेत्र; खाद्य प्रसंस्करण और संबंधित उद्योग।
चर्चा में क्यों?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सहकार से समृद्धि” के दृष्टिकोण और श्वेत क्रांति 2.0 के उद्देश्यों को आगे बढ़ाते हुए, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह कोलकाता में ‘अमुल बंगाल डेयरी परियोजना’ के तहत विश्व के सबसे बड़े दही उत्पादन संयंत्र का भूमि पूजन करेंगे। यह कदम पश्चिम बंगाल के डेयरी क्षेत्र, ग्रामीण बुनियादी ढांचे और डिजिटल सहकारी प्रशासन को मजबूत करने के लिए एक बड़े अभियान का हिस्सा है।
मुख्य बिंदु: अमुल बंगाल डेयरी परियोजना और सहकारिता पहल
1. अमुल बंगाल डेयरी परियोजना
- बड़ा निवेश और क्षमता: अमुल द्वारा पश्चिम बंगाल के हावड़ा फूड पार्क में लगभग ₹700 करोड़ के निवेश से यह परियोजना स्थापित की जा रही है।
- दूध प्रसंस्करण क्षमता: संयंत्र में प्रतिदिन लगभग 30 लाख लीटर दूध को संसाधित (Process) करने की क्षमता होगी।
- दही उत्पादन का रिकॉर्ड: यह संयंत्र प्रतिदिन लगभग 1,000 मीट्रिक टन (10 लाख किलोग्राम) दही और अन्य संवर्धित डेयरी उत्पादों (Cultured Dairy Products) का उत्पादन करेगा, जो इसे दुनिया का सबसे बड़ा दही संयंत्र बनाता है।
- विविध डेयरी उत्पाद: दैनिक उत्पादन में 10 लाख लीटर पैक्ड दूध, 2 लाख लीटर यूएचटी दूध, 1 लाख लीटर आइसक्रीम, 20 मीट्रिक टन पनीर, 10 मीट्रिक टन घी, 10 मीट्रिक टन मिठाई और 2.5 लाख फ्लेवर्ड दूध के पैकेट शामिल हैं।
2. सामाजिक-आर्थिक प्रभाव और किसानों को लाभ
- किसानों की भागीदारी: वर्तमान में पश्चिम बंगाल के 1.25 लाख से अधिक दुग्ध उत्पादक किसान अमुल के सहकारी नेटवर्क से जुड़े हैं, जिनसे प्रतिदिन 9 लाख लीटर दूध खरीदा जाता है।
- महिला सशक्तिकरण: इस नेटवर्क में 30,000 से अधिक महिला दुग्ध उत्पादक शामिल हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी को दर्शाता है।
- श्वेत क्रांति 2.0: यह परियोजना राज्य में आधुनिक प्रसंस्करण और विपणन सुविधाएं प्रदान कर किसानों को एक स्थायी बाजार देगी, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी और बंगाल में श्वेत क्रांति के एक नए अध्याय की शुरुआत होगी।
3. डिजिटल गवर्नेंस और अन्य महत्वपूर्ण पहल
- e-RCS पोर्टल की शुरुआत: सहकारिता मंत्री पश्चिम बंगाल में सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार (RCS) कार्यालय के कम्प्यूटरीकरण के तहत विकसित e-RCS पोर्टल लॉन्च करेंगे। यह पोर्टल पंजीकरण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को डिजिटल, पारदर्शी और सुलभ बनाएगा।
- अनाज भंडारण बुनियादी ढांचा: ‘विश्व के सबसे बड़े अनाज भंडारण कार्यक्रम’ के तहत 10 जिलों में ₹5.98 करोड़ की लागत से बनने वाले 14 गोदामों (कुल क्षमता 1,400 मीट्रिक टन) का शिलान्यास किया जाएगा और दक्षिण 24 परगना तथा कूचबिहार में दो नए गोदामों का उद्घाटन होगा।
- गतिशीलता (Mobility) सेवा का विस्तार: राज्य में परिवहन सेवाओं के विस्तार के लिए ‘भारत टैक्सी’ और पश्चिम बंगाल सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग (DoIT&E) के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| विश्व का सबसे बड़ा दही संयंत्र | हावड़ा फूड पार्क, पश्चिम बंगाल में अमुल द्वारा स्थापित (दैनिक क्षमता: 10 लाख किलोग्राम दही)। |
| श्वेत क्रांति 2.0 | इसका उद्देश्य देश में दुग्ध सहकारी समितियों को मजबूत करना, दूध उत्पादन बढ़ाना और ग्रामीण आय को दोगुना करना है। |
| e-RCS पोर्टल | सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार कार्यालय के डिजिटल संचालन और पारदर्शिता के लिए लॉन्च किया गया एक ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म। |
| सहकार से समृद्धि विजन | भारत सरकार द्वारा देश में सहकारिता आंदोलन को बढ़ावा देने और इसके लिए एक अलग सहकारिता मंत्रालय (Ministry of Cooperation) के गठन का मूल मंत्र। |
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (NCSK) द्वारा स्वच्छता और कल्याण सुविधाओं की समीक्षा
- प्रारंभिक परीक्षा: वैधानिक, नियामक और विभिन्न अर्ध-न्यायिक निकाय; सरकार की नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप; समाज के कमजोर/वंचित वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएं और उनका तंत्र।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था तथा नियोजन, रोजगार और श्रम कल्याण; समावेशी विकास (Inclusive Growth)।
चर्चा में क्यों?
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (NCSK) ने सफाई कर्मचारियों की कार्य स्थितियों, सुरक्षा और समग्र कल्याण को मजबूत करने के लिए नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की है। NCSK के सदस्य श्री करम सिंह कर्मा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में ‘जीरो मैनुअल स्कैवेंजिंग’ (शून्य हाथ से मैला उठाना) के लक्ष्य को प्राप्त करने और सफाई कर्मियों के लिए सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करने हेतु पूर्ण यंत्रीकरण अपनाने पर विशेष बल दिया गया।
समीक्षा बैठक के प्रमुख निष्कर्ष और प्रशासनिक निर्देश
1. मुख्य प्राथमिकताएं: सुरक्षा और पूर्ण यंत्रीकरण
- शून्य हाथ से मैला उठाना (Zero Manual Scavenging): आयोग ने स्पष्ट किया कि मानव स्वास्थ्य के लिए किसी भी खतरे को खत्म करने के लिए सीवर और गहरे नालों की सफाई को पूरी तरह से मशीनीकृत किया जाएगा (Complete transition to mechanised operations)।
- सुरक्षित कार्य वातावरण: सफाई कर्मियों को शहरों का ‘सच्चा संरक्षक’ बताते हुए उनकी गरिमा, कल्याण और सुरक्षा को बनाए रखने को हर नागरिक निकाय की सामूहिक जिम्मेदारी घोषित किया गया।
2. महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्देश और समय-सीमा
- भर्ती प्रक्रिया: नई दिल्ली नगर निगम के लोक स्वास्थ्य विभाग के तहत अस्थायी मस्टर रोल (TMR) सफाई कर्मचारी भर्ती प्रक्रिया को तुरंत शुरू करने के निर्देश दिए गए।
- सेवाओं का नियमितीकरण: मलेरिया विभाग के 28 लंबित कर्मचारियों की सेवाओं को एक महीने की सख्त समय-सीमा के भीतर नियमित करने का आदेश दिया गया।
- ठेकेदारों पर नकेल: बाहरी एजेंसियों और ठेकेदारों को सभी रोजगार समझौते, कर्मचारी राज्य बीमा (ESI), और कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) अनुपालन रिकॉर्ड अनिवार्य रूप से जमा करने का आदेश दिया गया ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आउटसोर्स किए गए श्रमिकों को वैधानिक सामाजिक सुरक्षा लाभ समय पर मिले।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| NCSK (राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग) | यह 1993 में एक अधिनियम के तहत गठित एक वैधानिक निकाय के रूप में शुरू हुआ था, लेकिन वर्तमान में यह सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत एक गैर-वैधानिक निकाय (Non-Statutory Body) के रूप में कार्य कर रहा है (जिसका कार्यकाल समय-समय पर बढ़ाया जाता है)। |
| बैठक का मुख्य फोकस | सीवर और नालों की सफाई का पूर्ण मशीनीकरण करना ताकि इंसानों को जानलेवा जोखिमों से बचाया जा सके। |
| संबद्ध स्थानीय निकाय | NDMC (नई दिल्ली नगरपालिका परिषद) – जिसने राजधानी को स्वच्छ रखने के साथ-साथ कार्यबल की सुरक्षा के लिए उच्च-स्तरीय तकनीकी निगरानी प्रणालियों को अपनाने की प्रतिबद्धता जताई है। |
| संबंधित वैधानिक अधिकार | सफाई कर्मचारियों को EPF (कर्मचारी भविष्य निधि) और ESI (कर्मचारी राज्य बीमा) जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाएं प्रदान करना कानूनन अनिवार्य है। |
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (2024)
- प्रारंभिक परीक्षा: भारतीय संस्कृति – प्राचीन काल से आधुनिक काल तक कला रूपों, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू; भारतीय सिनेमा का सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): सरकारी नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप (सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की पहल)।
चर्चा में क्यों?
वर्ष 2024 के लिए 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के विजेताओं की घोषणा की गई है। यह पुरस्कार भारतीय सिनेमा में फीचर फिल्मों, गैर-फीचर फिल्मों और सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ लेखन की श्रेणियों में उत्कृष्ट कलात्मक प्रदर्शन को मान्यता देने के लिए दिए जाते हैं।
मुख्य विजेता एवं पुरस्कार श्रेणियां
भारतीय सिनेमा के इस सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार के अंतर्गत विभिन्न भाषाओं और शैलियों की फिल्मों को सम्मानित किया गया है।
1. फीचर फिल्म खंड
- सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म: ‘आर्टिकल 370’ (हिंदी) – निर्देशक: आदित्य सुहास जंभाले। (पुरस्कार: स्वर्ण कमल)
- सर्वश्रेष्ठ अभिनेता: यह पुरस्कार संयुक्त रूप से ममूटी को मलयालम फिल्म ‘भ्रमयुगम’ के लिए और कार्तिक आर्यन को हिंदी फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ के लिए दिया गया है।
- सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री: यामी गौतम को हिंदी फिल्म ‘आर्टिकल 370’ के लिए।
- निर्देशक की सर्वश्रेष्ठ पहली फिल्म: रणदीप हुड्डा को फिल्म ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ के लिए। (पुरस्कार: स्वर्ण कमल)

- सर्वश्रेष्ठ निर्देशन: राजकुमार पेरियासामी को तमिल फिल्म ‘अमरण’ के लिए।
- मनोरंजन प्रदान करने वाली सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म: ‘कल्कि 2898 एडी’ (तेलुगु)।
2. गैर-फीचर और वृत्तचित्र खंड
- सर्वश्रेष्ठ गैर-फीचर फिल्म: ‘भंगार’ (मराठी और अंग्रेजी) – निर्माता व निर्देशक: सुमीरा रॉय।
- सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र: ‘राम-नामी’ (हिंदी) – निर्देशक: भारतबाला गणपति।
- सामाजिक और पर्यावरणीय मूल्यों को बढ़ावा देने वाली सर्वश्रेष्ठ गैर-फीचर फिल्म: ‘पीपलांत्री: ए टेल ऑफ इको फेमिनिज्म’।
- सर्वश्रेष्ठ एनीमेशन फिल्म: ‘टच्ड एज़ वॉटर’ (मूक फिल्म)।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| श्रेणी / पुरस्कार घटक | महत्वपूर्ण तथ्य |
| सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म | ‘श्रीकांत’ – निर्देशक: तुषार हीराचंदानी। |
| संविधान की 8वीं अनुसूची से बाहर की फिल्में | गढ़वाली भाषा: फिल्म ‘धोली’ और तुलु भाषा: फिल्म ‘इम्बू‘ को सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार मिला। |
| सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ पुस्तक | ‘नानिरुवुदे निमगागी नादिरुवुदे ननगागी: कन्नड़ सिनेमादा थथवा मथु राजकीया’ (कन्नड़) – लेखक: केंचनूरु प्रदीप कुमार शेट्टी। |
| सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक | संजीव श्रीवास्तव (हिंदी भाषा के लिए स्वर्ण कमल)। |
| फीचर फिल्म जूरी के अध्यक्ष | श्री जयराज (इन्होंने केंद्रीय जूरी पैनल की अध्यक्षता की)। |
| गैर-फीचर फिल्म जूरी के अध्यक्ष | श्री असीम सिन्हा। |
| राष्ट्रीय सामाजिक और पर्यावरणीय मूल्य फिल्म | तमिल फिल्म ‘कैप्टन मिलर’ को फीचर फिल्म श्रेणी में यह सम्मान मिला। |
विक्रम-1 और भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधार: ‘सहकार से स्वावलंबन’ की नई उड़ान
- प्रारंभिक परीक्षा: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – विकास और उनके अनुप्रयोग; अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारतीयों की उपलब्धियां; प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण और नई प्रौद्योगिकी का विकास।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): सरकारी नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप।
चर्चा में क्यों?
स्काईरूट एयरोस्पेस अपने ऐतिहासिक ‘मिशन आगमन’ के तहत भारत के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ के प्रक्षेपण की तैयारी कर रहा है। यह प्रक्षेपण 12 जुलाई से 4 अगस्त 2026 के बीच निर्धारित है, जो भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 के तहत देश के निजी अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र की बढ़ती क्षमताओं और सरकार के अंतरिक्ष सुधारों की सफलता को प्रदर्शित करता है।
भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रगति और प्रमुख सुधार
1. मिशन आगमन: विक्रम-1
- निजी क्षेत्र का पहला ऑर्बिटल रॉकेट: यह भारत का पहला निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल है, जिसे स्काईरूट एयरोस्पेस ने बनाया है।
- क्षमता: यह 350 किलोग्राम तक के पेलोड को 450 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में स्थापित करने में सक्षम है।
- तकनीक: यह पूरी तरह से कार्बन कंपोजिट संरचना से निर्मित है, जिसमें ठोस-ईंधन बूस्टर और 3D-प्रिंटेड लिक्विड इंजन का उपयोग किया गया है।
- मुख्य पेलोड: यह अपने साथ स्काईरूट का SCOPE उपग्रह, DCUBED का प्रौद्योगिकी प्रदर्शन पेलोड, Grahaa Space का SOLARAS S3 और अंतरिक्ष मलबे (Orbital Debris) को पकड़ने वाला रोबोटिक आर्म Embrace (Cosmoserve Space) लेकर जाएगा।
- सांस्कृतिक प्रतीक: इस उड़ान में ‘कॉस्मिक ब्लूम’ नामक कलाकृति और एक 18-कैरेट सोने का माइक्रो-रॉकेट भी शामिल है, जिसमें सी.वी. रमन, विक्रम साराभाई और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की सूक्ष्म आकृतियां उकेरी गई हैं।
2. अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का बढ़ता आकार
- स्टार्टअप्स में उछाल: वर्ष 2014 में देश में सिर्फ 1 अंतरिक्ष स्टार्टअप था, जो जून 2026 तक बढ़कर 400 से अधिक हो गया है।
- बाजार मूल्य और लक्ष्य: वर्तमान में भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था लगभग 8.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर की है। इसके 2030 तक 40–45 बिलियन डॉलर और 2040 तक 100 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
3. प्रमुख सक्षमकारी सरकारी सुधार
- भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023: इसने गैर-सरकारी संस्थाओं (NGEs) के लिए संपूर्ण अंतरिक्ष मूल्य श्रृंखला को खोल दिया है।
- इन-स्पेस (सिंगल विंडो रेगुलेटर): यह एक स्वायत्त एजेंसी है जो निजी और सरकारी अंतरिक्ष गतिविधियों को मंजूरी देती है। जून 2026 तक इसने 4,500 से अधिक संगठनों को पंजीकृत किया है।
- न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL): यह इसरो की वाणिज्यिक शाखा है। जुलाई 2026 तक इसने कुल 141 उपग्रहों (138 अंतर्राष्ट्रीय और 3 भारतीय) का सफल प्रक्षेपण किया है।
- उदार एफडीआई (FDI) नीति: अंतरिक्ष क्षेत्र में विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए सरकार ने स्वचालित मार्ग (Automatic Route) के तहत उदार सीमाओं को मंजूरी दी है, जिसे नीचे तालिका में समझा जा सकता है।
वित्तीय प्रोत्साहन और तकनीकी
1. अंतरिक्ष स्टार्टअप्स के लिए विशेष फंड
- IN-SPACe सीड फंड स्कीम: शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स को अंतरिक्ष आधारित कृषि, आपदा प्रबंधन और शहरी विकास तकनीकों के लिए ₹1 करोड़ तक का अनुदान।
- ₹1,000 करोड़ का वेंचर कैपिटल (VC) फंड: वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2029-30 (5 वर्ष) के लिए स्वीकृत, जिसका वार्षिक निवेश ₹100 करोड़ से ₹250 करोड़ के बीच होगा।
- ₹500 करोड़ का टेक्नोलॉजी एडॉप्शन फंड (TAF): स्वदेशी तकनीकों के व्यावसायीकरण के लिए स्टार्टअप/MSMEs को परियोजना लागत का 60% तक (अधिकतम ₹25 करोड़) की वित्तीय सहायता।
2. हालिया ऐतिहासिक उपलब्धियां
- नवंबर 2022: ‘विक्रम-एस’ का प्रक्षेपण (मिशन प्रारंभ), जो भारत का पहला निजी तौर पर विकसित रॉकेट बना।
- मई 2024: अग्रिकुल कॉस्मॉस (Agnikul Cosmos) ने श्रीहरिकोटा में भारत के पहले निजी लॉन्च पैड ‘धनुष’ से रॉकेट लॉन्च किया और दुनिया के पहले सिंगल-पीस 3D-प्रिंटेड सेमी-क्रायोजेनिक रॉकेट इंजन का प्रदर्शन किया।
- फरवरी 2026: IN-SPACe ने ₹511 करोड़ की लागत से 10 वर्षों के लिए SSLV (Small Satellite Launch Vehicle) तकनीक को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को हस्तांतरित करने की मंजूरी दी।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI)
| अंतरिक्ष गतिविधि / क्षेत्र | अनुमत सीमा | प्रवेश मार्ग |
| उपग्रह निर्माण और संचालन (Satellites-Manufacturing & Operation) | 100% | 74% तक स्वचालित (Automatic); 74% से अधिक सरकारी मार्ग |
| लॉन्च व्हीकल और स्पेसपोर्ट का निर्माण (Launch Vehicles & Spaceports) | 100% | 49% तक स्वचालित (Automatic); 49% से अधिक सरकारी मार्ग |
| उपग्रह घटकों और उप-प्रणालियों का निर्माण (Components & Subsystems) | 100% | 100% स्वचालित मार्ग (Fully Automatic) |