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NCERT Notes Class 6 Social science (Geography) Chapter 8: Unity in Diversity, or ‘Many in the One’

NCERT Notes Class 6 Social science (Geography) Chapter 8: Unity in Diversity, or ‘Many in the One’ के अंतर्गत भारतीय समाज, भूगोल और राजव्यवस्था (Polity) की सबसे बुनियादी और खूबसूरत विशेषता—“विविधता में एकता” को समझने की नींव रखता है। भारत एक ऐसा विशाल उपमहाद्वीप है जहाँ कदम-कदम पर भूगोल, जलवायु, भाषा, खान-पान, वेशभूषा और धार्मिक प्रथाओं में भिन्नता पाई जाती है। इसके बावजूद, एक अदृश्य और मजबूत धागा इन सभी विविधताओं को एक राष्ट्रीय चेतना में पिरोता है। एक समृद्ध विविधता (A Rich Diversity) सभी के लिए भोजन (Food for All) प्रमुख खाद्यान्न वर्गीकरण अनाज का प्रकार उदाहरण (Examples) मुख्य प्रीलिम्स फैक्ट खाद्यान्न / अनाज (Cereals) चावल (जैसे बासमती, सोना मसूदी, पोन्नी, कोल्लम), जौ (Barley), गेहूँ और मक्का। यह अधिकांश भारतीयों का मुख्य आधार भोजन (Staple food) है। मोटे अनाज (Millets / श्रीअन्न) बाजरा (Pearl millet), ज्वार (Sorghum), रागी (Finger millet)। शुष्क और कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण पोषण का स्रोत। दलहन (Pulses / Grams) अरहर, मूंग, मसूर, चना, राजमा, सफेद लोबिया। भारतीय भोजन में प्रोटीन का मुख्य स्रोत। साझा मसाले (Common Spices) हल्दी (Turmeric), जीरा (Cumin), इलायची (Cardamom), अदरक (Ginger)। ये मसाले भौगोलिक सीमाओं से परे पूरे उपमहाद्वीप के व्यंजनों में समान रूप से उपयोग किए जाते हैं। वस्त्र और परिधान (Textiles and Clothing) 1 . साड़ी का ऐतिहासिक संदर्भ 2 . बुनाई, डिज़ाइन और भौगोलिक विविधता साड़ी को अलग-अलग क्षेत्रों में पहनने के तरीके (Draping styles) भिन्न हैं, लेकिन मूल रूप से यह एक ही परिधान है। इसके डिज़ाइनों को कपड़े की बुनाई के दौरान या बुनने के बाद छपाई (Printing) के माध्यम से उभारा जाता है, जिसमें विभिन्न प्रकार के रंजक (Pigments) उपयोग होते हैं। प्रमुख सिल्क साड़ी और उनके क्षेत्र रेशम साड़ी का प्रकार (Silk Sari Type) प्रमुख विशेषता / भौगोलिक क्षेत्र बनारसी (Banarasi) वाराणसी, उत्तर प्रदेश (अपनी भारी जरी और कढ़ाई के लिए प्रसिद्ध)। कांजीवरम (Kanjivaram) तमिलनाडु (कांचीपुरम क्षेत्र की प्रसिद्ध रेशमी साड़ी)। पैठणी (Paithani) महाराष्ट्र (इसके पल्लू पर मोर की आकृति और सोने के धागों का काम होता है)। पाटन पटोला (Patan Patola) पाटन, गुजरात (यह डबल इकत बुनाई – Double Ikkat की एक दुर्लभ कला है)। मूंगा (Muga) असम (मूंगा सिल्क अपनी प्राकृतिक सुनहरी चमक के लिए जाना जाता है)। मैसूर (Mysore) कर्नाटक (शुद्ध रेशम और न्यूनतम सोने के काम के लिए प्रसिद्ध)। त्योहारों की विविधता (Festivals Galore) मकर संक्रांति के विभिन्न क्षेत्रीय नाम त्योहार का नाम (Festival Name) संबद्ध राज्य / क्षेत्र (State / Region) लोहड़ी / माघी (Lohri / Maghi) पंजाब, हरियाणा और उत्तर-पश्चिम भारत उत्तरायण (Uttarayan) गुजरात खिचड़ी पर्व (Khichdi Parv) उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तर भारत माघ बिहू (Magh Bihu) असम और पूर्वोत्तर भारत पौष संक्रांति (Poush Songkranti) पश्चिम बंगाल शिशुर संक्रांत (Shishur Saenkraat) जम्मू और कश्मीर / हिमालयी क्षेत्र मकर संक्रांत (Makar Sankraat) राजस्थान / मध्य भारत पेड्डा पांडुगा (Pedda Panduga) आंध्र प्रदेश और तेलंगाना मकर संकमण (Makara Sankramana) कर्नाटक पोंगल (Pongal) तमिलनाडु मकर विलक्कू (Makara Vilakku) केरल (सबरीमाला मंदिर में विशेष उत्सव) महाकाव्य का विस्तार (An Epic Spread) 1. पंचतंत्र 2. भारत के दो महाकाव्य (India’s Two Epics) जनजातीय जुड़ाव और पुरातात्विक साक्ष्य (Tribal Connections & Field Evidence) साहित्यिक कृतियाँ / साक्ष्य संबद्ध जनजाति / क्षेत्र फैक्ट्स पंचतंत्र वैश्विक (50+ भाषाएँ) 2,200 वर्ष पुराना संस्कृत ग्रंथ, व्यावहारिक जीवन कौशल पर आधारित। इरुला जनजाति नीलगिरि, तमिलनाडु ‘पंच पांडवर’ नामक नक्काशीदार पत्थर के मंदिर का संरक्षण करते हैं। महाभारत के लोक संस्करण तमिलनाडु अकेले एक राज्य में लगभग 100 लोक स्वरूप मौजूद हैं। शास्त्रीय कला और वास्तुकला संपूर्ण भारत इनमें भी विविधता के साथ अंतर्निहित एकता (Underlying Unity) दिखाई देती है। Chapter 7 यहाँ पढ़ें:-

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NCERT Notes Class 6 Social science (Geography) Chapter 7: India’s Cultural Roots

NCERT Notes Class 6 Social science (Geography) Chapter 7: India’s Cultural Roots के अंतर्गत प्राचीन भारत में केवल भौतिक सीमाओं का विस्तार नहीं हुआ, बल्कि ज्ञान, सहिष्णुता, और सार्वभौमिक कल्याण (वसुधैव कुटुंबकम) के सिद्धांतों का जन्म हुआ। इसमें वैदिक काल के विचार मंतव्यों, उपनिषदों के आध्यात्मिक चिंतन, तथा जैन और बौद्ध धर्म के रूप में उभरे सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों का बुनियादी और सटीक विवरण मिलता है। यह अध्याय केवल ऐतिहासिक तथ्यों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह वर्तमान भारतीय समाज के नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों के मूल स्रोतों (Roots) को तलाशने का एक गंभीर प्रयास है। वेद और वैदिक संस्कृति (The Vedas and Vedic Culture) 1. वेद क्या हैं? (What are the Vedas?) 2. वैदिक समाज (Vedic society) 3. वैदिक विचारधाराएं/दर्शन बौद्ध धर्म (Buddhism) 1. सिद्धार्थ गौतम का जीवन और ज्ञानोदय 2. बुद्ध की शिक्षाएँ और संगठन उपनिषदों की कहानियाँ 1. श्वेतकेतु और वास्तविकता का बीज 2. नचिकेता और उसकी खोज 3. गार्गी और याज्ञवल्क्य का शास्त्रार्थ जैन धर्म (Jainism) जैन धर्म के तीन मुख्य स्तंभ/शिक्षाएँ: जातक कथाएँ और जैन कहानियाँ 1. जातक कथाएँ 2. रोहिणेय की जैन कहानी भिक्षु, गुफाएं और अन्य दर्शन लोक और जनजातीय जड़ें (Folk and Tribal Roots) 1. सांस्कृतिक आत्मसात और आदान-प्रदान के उदाहरण (Cultural Exchange Examples) 2. प्रकृति पूजा और चेतना (Nature Worship and Consciousness) 3. जनजातीय समाज में ‘सर्वोच्च ईश्वर’ की अवधारणा (Concept of Supreme Divinity) कई देवी-देवताओं की पूजा के बावजूद, विभिन्न जनजातियों में एक ‘सर्वोच्च सत्ता’ या ‘परमेश्वर’ की स्पष्ट अवधारणा मिलती है: जनजाति / क्षेत्र सर्वोच्च देवता (Supreme Deity) विशेषता अरुणाचल प्रदेश की जनजातियाँ दोन्यी-पोलो सूर्य (Donyi) और चंद्रमा (Polo) का संयुक्त रूप, जिन्हें सर्वोच्च भगवान का दर्जा प्राप्त है। मध्य भारत (Central India) खंडोबा मध्य भारत के कुछ हिस्सों में पूजे जाने वाले प्रमुख देव। पूर्वी भारत (Munda & Santhal) सिंगबोंगा मुंडा और संथाल जनजातियों के सर्वोच्च देवता, जिन्होंने इस पूरे संसार की रचना की। Chapter-3 यहाँ पढ़ें:-

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NCERT Notes Class 6 Social Science (Geography) Chapter 6: The Beginnings of Indian Civilisation in Hindi Pdf

NCERT Notes Class 6 Social Science (Geography) Chapter 6: The Beginnings of Indian Civilisation in Hindi Pdf के अंतर्गत हम भारत की सबसे प्राचीन और गौरवशाली सभ्यता—जिन्हें हम सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilisation) या सिंधु-सरस्वती सभ्यता के नाम से जानते हैं, उसे बहुत ही सरल और आसान भाषा में समझेंगे। इस अध्याय में हम जानेंगे कि कैसे हमारे पूर्वज हजारों साल पहले ग्रिड सिस्टम पर आधारित सुनियोजित शहरों में रहते थे, उनका जल प्रबंधन (Water Management) कैसा था और उनका व्यापार विदेशों तक कैसे फैला हुआ था। एक सभ्यता क्या है? (What Is a Civilisation?) समाज की खोज: भारत और उससे आगे (Exploring Society: India and Beyond) अतीत का ताना-बाना (Tapestry of the Past) एक सभ्यता में कम से कम ये 7 खूबियां होनी चाहिए: दुनिया में सबसे पहले सभ्यता मेसोपोटामिया (लगभग 6000 साल पहले) और फिर मिस्र (Egypt) में शुरू हुई। भारत में इसकी शुरुआत उत्तर-पश्चिम क्षेत्र से हुई। धातुकर्म (Metallurgy) गांव से शहर तक (From Village to City) सहायक नदी (Tributary): अतीत का ताना-बाना (Tapestry of the Past) इस सभ्यता के अलग-अलग नाम और उनके कारण: हड़प्पा कालीन शहर और उनकी आधुनिक स्थिति (Harappan Cities & Modern Regions) हड़प्पा कालीन शहर (Harappan City) आधुनिक राज्य / क्षेत्र (Modern State / Region) हड़प्पा (Harappa) पंजाब (पाकिस्तान) मोहनजो-दड़ो (Mohenjo-daro) सिंध (पाकिस्तान) राखीगढ़ी (Rakhigarhi) हरियाणा (भारत) धोलावीरा (Dholavira) गुजरात (भारत) कालीबंगन (Kalibangan) राजस्थान (भारत) सरस्वती नदी (The Sarasvatī River) नगर-नियोजन (Town-Planning) महत्वपूर्ण शब्दार्थ (Key Terms): नगरों की खोज और इतिहास (Discovery & History of Cities) हड़प्पा की नगर योजना और बनावट (City Structure & Layout) मोहनजो-दड़ो का ‘विशाल स्नानागार’ (The Great Bath) जल प्रबंधन (Water Management) साफ-सफाई और ड्रेनेज सिस्टम (Cleanliness & Drainage) पानी के स्रोत और संचयन (Water Sources & Harvesting) हड़प्पावासी क्या खाते थे? (What Did the Harappans Eat?) महत्वपूर्ण शब्दार्थ (Key Terms): खेती और खान-पान (Agriculture & Diet) सक्रिय व्यापार (A Brisk Trade) निर्यात और शिल्प कला (Exports & Craftsmanship) परिवहन और लोथल का गोदीबाड़ा (Transport & Lothal Dockyard) हड़प्पा कालीन मुहरें (Harappan Seals) अंत या एक नई शुरुआत? (The End or a New Beginning?) NCERT Chapter 3 यहाँ पढ़ें

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NCERT Notes Class 6 Social science (Geography) Chapter 5: India That Is Bharat

NCERT Notes Class 6 Social science (Geography) Chapter 5: India, That Is Bharat अध्याय हमारी अपनी मातृभूमि के भौगोलिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नामकरण की कड़ियों को आपस में जोड़ता है। UPSC प्रीलिम्स और मुख्य परीक्षा (GS-1) के नजरिए से यह समझना बेहद जरूरी है कि जिस भूमि को आज हम आधुनिक सीमाओं में ‘भारत’ के रूप में जानते हैं, उसका अतीत कितना गतिशील और विविधता से भरा रहा है। हम जानेंगे कि कैसे ऋग्वेद के ‘सप्त सिंधु’ से शुरू होकर, पुराणों के ‘भारतवर्ष’ और सम्राट अशोक के ‘जम्बुद्वीप’ से गुजरते हुए, प्राचीन पारसियों, यूनानियों और चीनियों के भाषाई रूपांतरण से ‘हिंदू’, ‘इंडिया’ और ‘यिन्दु’ जैसे वैश्विक नामों की उत्पत्ति हुई। हमारा देश: भारत / Our Country: India THINK ABOUT IT नाम की उत्पत्ति और ऐतिहासिक स्रोत / Names of India इतिहास के अलग-अलग कालखंडों में भारत को यहाँ के निवासियों और विदेशी यात्रियों द्वारा कई नामों से पुकारा गया है। इन नामों की जानकारी हमें निम्नलिखित तीन मुख्य माध्यमों से मिलती है: भारतीयों ने भारत का नाम कैसे रखा / How Indians Named India सप्त सिंधु और ऋग्वैदिक काल महाभारत में वर्णित क्षेत्रीय नाम समय के साथ भारतीय साहित्य में देश के अन्य हिस्सों के नाम सामने आने लगे। महाभारत में पूरे उपमहाद्वीप के विभिन्न क्षेत्रों की सूची मिलती है, जिन्हें आज हम इस तरह पहचानते हैं: प्राचीन नाम (Ancient Name) वर्तमान क्षेत्र (Modern Region) काश्मीर (Kāshmīra) कश्मीर कुरुक्षेत्र (Kurukṣhetra) हरियाणा का हिस्से वंग (Vanga) बंगाल का हिस्से प्राग्ज्योतिष (Prāgjyotiṣha) असम कच्छ (Kaccha) कच्छ (गुजरात) केरल (Kerala) केरल संपूर्ण उपमहाद्वीप के लिए प्रयुक्त नाम प्राचीन भारतीय ग्रंथों की सटीक तिथि तय करना कठिन है, लेकिन विद्वानों के अनुसार ईसा पूर्व कुछ शताब्दियों (Centuries BCE) से लिखे गए ग्रंथों में पूरे उपमहाद्वीप के लिए दो मुख्य शब्दों का प्रयोग मिलता है: 1. भारतवर्ष (Bhāratavarṣha) 2. जम्बुद्वीप (Jambudvīpa) अशोक के अभिलेख का प्रमाण (250 BCE): सम्राट अशोक ने अपने शिलालेखों में पूरे भारत का वर्णन करने के लिए ‘जम्बुद्वीप’ शब्द का उपयोग किया था। उस समय के भारत में आज का बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के हिस्से भी शामिल थे। भौगोलिक परिभाषा और निरंतरता कुछ शताब्दियों बाद ‘भारत’ शब्द पूरे उपमहाद्वीप के लिए सर्वमान्य नाम बन गया। इसकी भौगोलिक सीमा को प्राचीन ग्रंथों में स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया: विदेशियों ने भारत का नाम कैसे रखा / How Foreigners Named India पारसियों (Persians) का योगदान यूनानियों (Greeks) का योगदान चीनियों (Chinese) का योगदान प्राचीन चीन के लोगों ने भी भारत के साथ गहरे संबंध बनाए और अपने ग्रंथों में भारत को अलग-अलग नामों से पुकारा: भारतीय संविधान की कड़ियाँ नामकरण की संक्षिप्त तालिका (Summary Table) विभिन्न भाषाओं में सिंधु (Sindhu) नदी के आधार पर भारत के नाम इस प्रकार बदले: भाषा / विदेशी स्रोत भारत को दिया गया नाम प्राचीन पारसी (Persian) हिन्द (Hind), हिदु (Hidu), हिन्दू (Hindu) प्राचीन ग्रीक (Greek) इन्दोई (Indoi), इन्दिके (Indike) प्राचीन चीनी (Chinese) यिन्तु (Yintu), यिन्दु (Yindu), तिएनझू (Tianzhu) बाद की अरबी व फारसी हिंदुस्तान (Hindustān) अंग्रेजी (English) व लैटिन इंडिया (India) फ्रेंच (French) इंद (Inde) CH -4 यहाँ पढ़ें

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New NCERT Notes class 11 Geography Chapter-2: पृथ्वी की उत्पति और विकास PDF

New NCERT Notes class 11 Geography Chapter-2: The Origin and Evolution of the Earth PDF के अंतर्गत हम ब्रह्मांड की उत्पति से लेकर पृथ्वी की उत्त्पति और जीवन विकास को विस्तृत रूप में समझेंगे। पृथ्वी और ब्रह्मांड की उत्पत्ति (The Origin and Evolution of the Earth) ये सिद्धांत मुख्य रूप से दो श्रेणियों में विभाजित हैं: प्रारंभिक सिद्धांत (पृथ्वी और सौरमंडल पर केंद्रित) तथा आधुनिक सिद्धांत (ब्रह्मांड पर केंद्रित)। 1. प्रारंभिक सिद्धांत (Early Theories): पृथ्वी की उत्पत्ति प्रारंभिक दौर में दार्शनिकों और वैज्ञानिकों ने केवल पृथ्वी और ग्रहों की उत्पत्ति को केंद्र में रखकर अपने सिद्धांत प्रस्तुत किए। क. निहारिका परिकल्पना (Nebular Hypothesis) प्रतिपादक: जर्मन दार्शनिक इमैनुएल कांट (Immanuel Kant) ने इस संबंध में प्रारंभिक तर्क दिए। संशोधन: 1796 में गणितज्ञ लाप्लास (Laplace) द्वारा इसका संशोधन किया गया। मुख्य बिंदु: इस परिकल्पना के अनुसार, ग्रहों का निर्माण एक घूर्णन करते हुए (rotating) धीमे और युवा सूर्य से संबंधित मलबे या पदार्थ के बादलों से हुआ है। ख. संशोधित निहारिका परिकल्पना (1950) संशोधनकर्ता: रूस के ओटो श्मिट (Otto Schmidt) और जर्मनी के कार्ल वीज़ास्कर (Carl Weizascar)। मुख्य बिंदु: इनके अनुसार, सूर्य एक ‘सौर निहारिका’ (Solar Nebula) से घिरा हुआ था, जिसमें मुख्य रूप से हाइड्रोजन, हीलियम और धूलकण शामिल थे। इन कणों के बीच घर्षण और टकराव (Friction and Collision) के कारण एक तश्तरीनुमा (Disk-shaped) बादल का निर्माण हुआ। अंततः, अभिवृद्धि की प्रक्रिया (Process of Accretion) के माध्यम से ग्रहों का निर्माण हुआ। 2. आधुनिक सिद्धांत (Modern Theories): ब्रह्मांड की उत्पत्ति आधुनिक समय में वैज्ञानिकों ने केवल पृथ्वी तक सीमित न रहकर पूरे ब्रह्मांड की उत्पत्ति के प्रश्नों को सुलझाने का प्रयास किया। क. बिग बैंग सिद्धांत (Big Bang Theory) इसे ‘विस्तारित ब्रह्मांड परिकल्पना’ (Expanding Universe Hypothesis) भी कहा जाता है। यह वर्तमान में ब्रह्मांड की उत्पत्ति का सबसे लोकप्रिय और स्वीकृत सिद्धांत है। प्रमाण: 1920 में एडविन हबल (Edwin Hubble) ने प्रमाण दिए कि ब्रह्मांड का निरंतर विस्तार हो रहा है और समय के साथ आकाशगंगाएँ (Galaxies) एक-दूसरे से दूर जा रही हैं। गुब्बारे का उदाहरण (आंशिक सत्य): यदि एक गुब्बारे पर निशान लगाकर उसे फुलाया जाए, तो निशान एक-दूसरे से दूर जाते हैं। ठीक इसी तरह आकाशगंगाओं के बीच की दूरी भी बढ़ रही है। हालाँकि, गुब्बारे के विपरीत, वास्तविक प्रेक्षणों (Observations) के अनुसार स्वयं आकाशगंगाओं का विस्तार नहीं हो रहा है, केवल उनके बीच के अंतरिक्ष (Space) का विस्तार हो रहा है। बिग बैंग की प्रमुख अवस्थाएँ (Stages): प्रारंभिक अवस्था (विलक्षणता/Singularity): शुरुआत में ब्रह्मांड का निर्माण करने वाला संपूर्ण पदार्थ एक ही स्थान पर “एक छोटे गोले” (Singular Atom) के रूप में स्थित था। इसका आयतन अत्यंत सूक्ष्म (Unimaginably small), जबकि तापमान और घनत्व अनंत (Infinite) था। महाविस्फोट और विस्तार: इस छोटे गोले में एक भीषण विस्फोट (Big Bang) हुआ, जिससे अत्यधिक तीव्र गति से विस्तार हुआ। यह घटना वर्तमान से 13.7 बिलियन (अरब) वर्ष पूर्व हुई थी। यह विस्तार आज भी जारी है। पदार्थ का निर्माण: विस्फोट के कुछ सेकंड के भीतर ही अत्यधिक तीव्र विस्तार हुआ, जिसके बाद विस्तार की गति धीमी हो गई। इस प्रक्रिया में कुछ ऊर्जा (Energy) पदार्थ (Matter) में परिवर्तित हो गई। प्रथम परमाणु का निर्माण: बिग बैंग की घटना के पहले 3 मिनट के भीतर पहले परमाणु का निर्माण शुरू हुआ। ब्रह्मांड का पारदर्शी होना: बिग बैंग के 3,00,000 वर्ष के भीतर तापमान गिरकर 4,500 K (केल्विन) तक आ गया और परमाण्विक पदार्थ (Atomic Matter) का उदय हुआ, जिससे ब्रह्मांड पारदर्शी (Transparent) हो गया। ख. स्थिर अवस्था संकल्पना (Steady State Concept) प्रतिपादक: यह हॉयल (Hoyle) द्वारा प्रस्तुत एक वैकल्पिक अवधारणा थी। मुख्य बिंदु: इसके अनुसार ब्रह्मांड समय के किसी भी मोड़ पर (भूत, वर्तमान या भविष्य में) हमेशा एक समान (Roughly the same) ही रहता है। वर्तमान स्थिति: विस्तारित ब्रह्मांड (Expanding Universe) के पक्ष में अधिक वैज्ञानिक साक्ष्य मिलने के कारण, वर्तमान वैज्ञानिक समुदाय स्थिर अवस्था संकल्पना के स्थान पर बिग बैंग सिद्धांत को प्राथमिकता देता है। PIB News Analysis तारों का निर्माण (The Star Formation) आरंभिक कारक (घनत्व में भिन्नता): प्रारंभिक ब्रह्मांड में पदार्थ (Matter) और ऊर्जा (Energy) का वितरण समान नहीं था। घनत्व में मौजूद इस प्रारंभिक अंतर के कारण गुरुत्वाकर्षण बलों (Gravitational forces) में असमानता पैदा हुई। आकाशगंगाओं (Galaxies) का आधार: गुरुत्वाकर्षण में अंतर के कारण पदार्थ एक दूसरे की ओर आकर्षित होकर एकत्रित होने लगा, जिसने आकाशगंगाओं के विकास का आधार तैयार किया। आकाशगंगा (Galaxy) की विशेषताएँ: एक आकाशगंगा में बड़ी संख्या में तारे होते हैं। इनका विस्तार हजारों प्रकाश-वर्ष (Light-years) की विशाल दूरी में होता है। एक व्यक्तिगत आकाशगंगा का व्यास (Diameter) 80,000 से 150,000 प्रकाश-वर्ष के बीच होता है। तारों के निर्माण की प्रक्रिया: निहारिका (Nebula) का निर्माण: आकाशगंगा की शुरुआत हाइड्रोजन गैस के एक बहुत बड़े बादल के संचय (Accumulation) से होती है, जिसे ‘निहारिका’ कहा जाता है। गैस के झुंड (Clumps): समय के साथ इस बढ़ती हुई निहारिका के भीतर गैस के स्थानीयकृत झुंड (Localised clumps) विकसित होने लगते हैं। तारों का जन्म: ये झुंड निरंतर बढ़ते हुए और अधिक घने गैसीय पिंडों में बदल जाते हैं, जिससे अंततः तारों का निर्माण होता है। समय: माना जाता है कि तारों का निर्माण लगभग 5 से 6 बिलियन (अरब) वर्ष पूर्व हुआ था। प्रकाश-वर्ष (Light Year) का वैज्ञानिक मापन परिभाषा: प्रकाश-वर्ष दूरी का माप है, न कि समय का। प्रकाश की गति: प्रकाश की गति 3,00,000 किमी प्रति सेकंड होती है। इस गति से प्रकाश द्वारा एक वर्ष में तय की गई कुल दूरी को एक प्रकाश-वर्ष कहा जाता है। गणितीय मान: 1 प्रकाश-वर्ष = 9.4607 × 1012 किमी। पृथ्वी और सूर्य की दूरी: सूर्य और पृथ्वी के बीच की औसत दूरी 14,95,98,000 किमी है। प्रकाश-समय (Light-time) के संदर्भ में, यह दूरी 8.311 मिनट के बराबर है। ग्रहों का निर्माण (Formation of Planets) ग्रहों के विकास की प्रक्रिया को निम्नलिखित तीन मुख्य अवस्थाओं (Stages) में समझा जा सकता है: 1.प्रथम चरण: कोर और घूर्णन डिस्क का निर्माण: गैसीय कोर विकास: तारे निहारिका के भीतर गैस के स्थानीयकृत झुंड होते हैं। इन झुंडों के भीतर काम करने वाले आंतरिक गुरुत्वाकर्षण बल के कारण गैस के बादल के केंद्र में एक ‘कोर’ (Core) का निर्माण होता है। इसके बाद, इस गैसीय कोर के चारों ओर गैस और धूलकणों की एक विशाल घूर्णन करती हुई डिस्क (Rotating

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New NCERT Notes Class 6 Social Science (Geography) Chapter 2: महासागर और महाद्वीप(Oceans and Continent)। हिंदी नोट्स PDF

New NCERT Notes Class 6 Social Science: भूगोल (Geography) पाठ्यक्रम में पृथ्वी की मौलिक संरचना के अंतर्गत Oceans and Continents को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस लेख में, हम पूरी तरह प्रामाणिक स्रोतों के आधार पर पृथ्वी पर जल और स्थल के वितरण, महाद्वीपों की विभिन्न भौगोलिक गणनाओं, महत्वपूर्ण द्वीप समूहों, अंटार्कटिका में भारत के वैज्ञानिक अभियानों और वर्तमान में समुद्री पर्यावरण के समक्ष खड़े प्रदूषण जैसे गंभीर संकटों का विस्तृत विश्लेषण करेंगे। सामान्य परिचय: नीला ग्रह (The Blue Planet) अंतरिक्ष या चंद्रमा से देखने पर पृथ्वी का रंग मुख्य रूप से नीला दिखाई देता है। इस विशिष्ट रंग के कारण ही प्रारंभिक अंतरिक्ष यात्रियों ने इसे ‘नीला ग्रह’ नाम दिया था। जल के प्रकार और उनका वितरण पृथ्वी के उत्तरी और दक्षिणी गोलार्धों (Northern and Southern Hemispheres) के बीच महासागरों और महाद्वीप का वितरण समान रूप से नहीं है। वैश्विक जल संसाधनों को मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित किया जा सकता है: विश्व के महासागर और समुद्री पारिस्थितिकी (Oceans & Marine Ecology) मानचित्र पर भौगोलिक रूप से पाँच महासागरों को चिह्नित किया गया है, जो प्राकृतिक रूप से एक-दूसरे से पूरी तरह अलग न होकर आपस में जुड़े हुए हैं। इनके बीच की सीमाएं केवल प्रशासनिक या व्यावहारिक परंपराओं पर आधारित हैं। आकार के अनुसार महासागरों का क्रम (घटते क्रम में): समुद्री जैव विविधता: महासागरों का जल निरंतर एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में प्रवाहित होता रहता है, जिससे एक समृद्ध समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण होता है। हिंद महासागर की भौगोलिक स्थिति और भारत: महासागर और प्राकृतिक आपदाएं (Oceans and Disasters) महासागर जहाँ एक ओर पृथ्वी पर जीवन का आधार हैं, वहीं दूसरी ओर ये कई विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं के केंद्र भी हैं। मानसून और चक्रवात: अंतरिक्ष से दिखने वाले बादलों के बड़े समूह महाद्वीपों पर वर्षा लाते हैं। भारत में हर गर्मी में आने वाली मानसूनी बारिश की उत्पत्ति महासागरों से ही होती है, जिसके बिना कृषि और जीवन चक्र का चलना असंभव है। इसके विपरीत, महासागर तीव्र हवाओं और अत्यधिक वर्षा वाले हिंसक चक्रवातों (Cyclones) को भी जन्म देते हैं, जो तटीय क्षेत्रों में भारी तबाही मचाते हैं। सुनामी (Tsunami): यह एक विशाल और अत्यंत शक्तिशाली समुद्री लहर होती है, जो सामान्यतः महासागर की तलहटी में आने वाले शक्तिशाली भूकंप या ज्वालामुखी विस्फोट के कारण उत्पन्न होती है। ये लहरें हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर तटीय क्षेत्रों को जलमग्न कर देती हैं। आपदा प्रबंधन और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (Disaster Management) जान-माल के नुकसान को कम करने के लिए आपदाओं से पहले और उनके बाद किए जाने वाले उपायों को आपदा प्रबंधन (Disaster Management) के तहत संभाला जाता है। महाद्वीप: गणना के विभिन्न दृष्टिकोण (Continents and Their Counts) ग्लोब पर महाद्वीपों की संख्या का निर्धारण इस बात पर निर्भर करता है कि हम भूभागों (Landmasses) को किस प्रकार देखते हैं। भौगोलिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोणों के कारण महाद्वीपों की संख्या 4 से लेकर 7 तक मानी जा सकती है। महाद्वीपों की गणना की तालिका (वर्णानुक्रम में): महाद्वीपों की संख्या महाद्वीपों के नाम चार महाद्वीप अंटार्कटिका, अफ्रीका-यूरेशिया, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया पाँच महाद्वीप अंटार्कटिका, अफ्रीका, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, यूरेशिया छह महाद्वीप अंटार्कटिका, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, उत्तर अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, यूरेशिया सात महाद्वीप अंटार्कटिका, अफ़्रीका, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, उत्तर अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, यूरोप मुख्य तथ्य: व्यावहारिक और सामान्य उपयोग में सात महाद्वीपों वाली प्रणाली को ही वैश्विक स्तर पर सबसे व्यापक रूप से अपनाया और स्वीकार किया गया है। द्वीप (Islands) महाद्वीपों के अतिरिक्त पृथ्वी पर भूमि के ऐसे छोटे हिस्से भी मौजूद हैं जो चारों ओर से पूरी तरह जल से घिरे हुए हैं। इन्हें द्वीप (Islands) कहा जाता है। चूंकि महाद्वीप आकार में बहुत बड़े होते हैं, इसलिए चारों तरफ पानी से घिरे होने के बावजूद उन्हें द्वीप नहीं माना जाता है। अंटार्कटिका और भारतीय वैज्ञानिक अनुसंधान (Indian Antarctica Programme) अंटार्कटिका एक अत्यंत ठंडा महाद्वीप है जो मुख्य रूप से बर्फ की मोटी चादर से ढका हुआ है। यहाँ का पर्यावरण और जलवायु बेहद विषम है। महासागर और जीवन का अंतर्संबंध (Oceans and Life) महासागर पृथ्वी के पर्यावरण का एक अनिवार्य हिस्सा हैं जो अदृश्य रूप से मानव जीवन के लगभग सभी पहलुओं को नियमित और प्रभावित करते हैं। विशेष तथ्य (Don’t Miss Out): विश्व महासागर दिवस संयुक्त राष्ट्र (United Nations) द्वारा प्रत्येक वर्ष 8 जून को ‘विश्व महासागर दिवस’ के रूप में घोषित किया गया है। इसका उद्देश्य हमारे दैनिक जीवन में महासागरों की प्रमुख भूमिका, जैवमंडल (Biosphere) में उनके महत्व और दवा व भोजन के स्रोत के रूप में उनकी उपयोगिता के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाना है। महासागरीय प्रदूषण और संरक्षण की आवश्यकता (Marine Pollution) वैज्ञानिक अध्ययनों से स्पष्ट हुआ है कि मानवीय गतिविधियों के कारण वर्तमान में समुद्री पर्यावरण पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। Quick Revision Points

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