NCERT Notes Class 6 science Chapter 8: A Journey through States of Water के अंतर्गत जल पृथ्वी पर प्राकृतिक रूप से तीनों अवस्थाओं: ठोस (बर्फ), द्रव (पानी) और गैस (जलवाष्प) में एक साथ मौजूद रहने वाला पदार्थ है। जब बर्फ (ठोस) ऊष्मा पाकर पिघलती है, तो वह द्रव जल में परिवर्तित होती है, और गर्म करने पर यही जल वाष्पीकरण (Evaporation) के जरिए अदृश्य गैस यानी जलवाष्प में बदल जाता है। इसके विपरीत, वायुमंडल में ऊपर जाकर जब यह जलवाष्प ठंडी होती है, तो संघनन (Condensation) की प्रक्रिया द्वारा पुनः पानी की छोटी-छोटी बूंदों में बदलकर बादलों का निर्माण करती है, जो अंततः वर्षा या बर्फबारी के रूप में वापस हमारी धरती पर लौट आते हैं।
जल के गायब होने की प्रक्रिया की जांच
- घटना: वर्षा के बाद खेल के मैदान में बने गड्ढों (Puddles) का पानी कुछ समय बाद गायब हो जाता है, साथ ही धुले हुए बर्तनों की सतह पर बचा हुआ पानी भी अपने आप सूख जाता है।
- गड्डों के पानी के गायब होने के दो मुख्य कारण:
- अंतःस्यंदन (Seeping/Infiltration): पानी का एक हिस्सा मिट्टी द्वारा सोख लिया जाता है और सतह से नीचे रिसकर भूजल में मिल जाता है।
- वाष्पीकरण (Evaporation): पानी का दूसरा हिस्सा तरल अवस्था से गैस (वाष्प) अवस्था में बदलकर वायुमंडल में चला जाता है।
- नोट: बर्तनों की स्टील की सतह अपारदर्शी और अभेद्य (Impermeable) होती है, इसलिए बर्तनों पर से पानी रिसता नहीं है, बल्कि वहाँ पानी के गायब होने का एकमात्र कारण केवल वाष्पीकरण होता है।
वाष्पीकरण का सिद्धांत (Evaporation)
- वैज्ञानिक परिभाषा: जल (तरल अवस्था) के अपने वाष्प (गैस अवस्था) में परिवर्तित होने की प्राकृतिक प्रक्रिया को वाष्पीकरण (Evaporation) कहते हैं।
- निरंतरता: वाष्पीकरण की यह प्रक्रिया सामान्य कमरे के तापमान पर भी हर समय निरंतर (Continuously) चलती रहती है।
वाष्पीकरण के व्यावहारिक उदाहरण एवं वैज्ञानिक अनुप्रयोग
| दैनिक जीवन के उदाहरण | वैज्ञानिक परिघटना | महत्वपूर्ण प्रभाव |
| गीले कपड़ों का सूखना | कपड़ों में मौजूद जल सूर्य की गर्मी और हवा के कारण वाष्पीकृत होकर उड़ जाता है। | यह वायुमंडलीय आर्द्रता को प्रभावित करता है। |
| गर्म तवे पर पानी की बूंदें | गर्म सतह के संपर्क में आते ही पानी तुरंत भाप (Steam/Water vapour) में बदल जाता है। | उच्च तापमान पर वाष्पीकरण की दर तीव्र हो जाती है। |
| शरीर से पसीना सूखना | त्वचा से पसीने का वाष्पीकरण शरीर की गुप्त ऊष्मा को सोखकर होता है। | यह मानव शरीर के तापमान नियमन और शीतलन प्रभाव (Cooling effect) के लिए अनिवार्य है। |
| हैंड सैनिटाइज़र का गायब होना | सैनिटाइज़र में अल्कोहल होता है, जो हथेली की गर्मी से अत्यधिक तीव्रता से वाष्पीकृत होता है। | इसे वाष्पशील द्रव कहा जाता है, जिसका क्वथनांक जल से बहुत कम होता है। |
एक और रहस्य (Another Mystery)
- परिघटना: जब एक कांच के गिलास या धातु के बर्तन में बर्फ और ठंडा पानी डाला जाता है, तो कुछ मिनटों के बाद उसकी बाहरी सतह पर पानी की छोटी-छोटी बूंदें (Water droplets) जमा हो जाती हैं, जो धीरे-धीरे आपस में मिलकर बड़ी बूंदों का रूप ले लेती हैं।

- भ्रम और उसका वैज्ञानिक खंडन: शुरुआती विचार यह आ सकता है कि पानी गिलास के अंदर से रिसकर (Seep out) बाहर आया है, या बर्फ बाहर निकलकर पिघल गई है।
- प्रयोग द्वारा खंडन: गिलास में पानी के स्तर को स्थायी मार्कर से चिह्नित करने पर जल स्तर में कोई कमी नहीं पाई जाती। इससे यह सिद्ध होता है कि पानी गिलास के भीतर से बाहर नहीं आ रहा है।
जल की अवस्थाओं की यात्रा
- संघनन की परिभाषा: वायु में मौजूद जल वाष्प (गैस अवस्था) के किसी ठंडी सतह के संपर्क में आने पर वापस तरल (द्रव अवस्था) में बदलने की इस वैज्ञानिक प्रक्रिया को संघनन (Condensation) कहते हैं।
- गिलास पर बूंदें आने का वास्तविक कारण: ठंडे पानी और बर्फ के कारण गिलास की बाहरी सतह बहुत ठंडी हो जाती है। जब वायुमंडल में अदृश्य रूप से मौजूद जल वाष्प इस ठंडी सतह से टकराती है, तो वह ठंडी होकर पानी की बूंदों के रूप में सतह पर जमा हो जाती है।
संघनन के व्यावहारिक उदाहरण एवं मापन प्रयोग
| दैनिक जीवन के उदाहरण | वैज्ञानिक परिघटना | व्यावहारिक/प्रायोगिक महत्व |
| पौधों पर ओस की बूंदें | सुबह के समय वायुमंडलीय तापमान कम होने से हवा की जल वाष्प पौधों की पत्तियों पर संघनित हो जाती है। | यह रात में होने वाले विकिरण शीतलन के कारण सुबह अधिक दिखाई देती है। |
| उबलते बर्तन की प्लेट के नीचे बूंदें | बर्तन के अंदर उबलते पानी से बनी भाप ऊपर रखी ठंडी स्टील की प्लेट की आंतरिक सतह से टकराकर संघनित होती है। | बंद प्रणाली में वाष्पीकरण और संघनन की प्रक्रियाएं एक साथ देखी जा सकती हैं। |
| डिजिटल बैलेंस प्रयोग | बर्फ वाले बंद गिलास को डिजिटल तराजू पर रखने पर समय के साथ उसका कुल द्रव्यमान (Mass) बढ़ जाता है। | बढ़ा हुआ द्रव्यमान यह प्रमाणित करता है कि वायुमंडल से अतिरिक्त जल वाष्प संघनित होकर गिलास की बाहरी सतह पर जुड़ गई है। |
वायुमंडलीय आर्द्रता (Humidity)
- परिभाषा: हवा में मौजूद जल वाष्प की कुल मात्रा को आर्द्रता कहा जाता है।
- मौसम विज्ञान में महत्व: समाचार पत्रों और मौसम रिपोर्टों में दैनिक आर्द्रता के आंकड़े दिए जाते हैं। वायु में आर्द्रता का स्तर जितना अधिक होगा, ठंडी सतहों पर संघनन (जैसे ओस या कोहरा बनना) उतनी ही तेजी से होगा।
जल की विभिन्न अवस्थाएँ
- प्राकृतिक विशिष्टता: जल हमारे दैनिक जीवन में पदार्थ की तीन अलग-अलग भौतिक अवस्थाओं (ठोस, द्रव और गैस) में देखा जाने वाला एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
- अवस्थाओं का अवलोकन:
- ठोस अवस्था (Solid State): बर्फ के रूप में।
- द्रव अवस्था (Liquid State): सामान्य जल के रूप में।
- गैस अवस्था (Gaseous State): जल वाष्प के रूप में, जो सामान्य कमरे के तापमान पर भी हवा में अदृश्य रूप से मौजूद रहती है।
पदार्थ की तीनों अवस्थाओं का तुलनात्मक विश्लेषण
| गुण | बर्फ / ठोस (Solid) | जल / द्रव (Liquid) | जल वाष्प / गैस (Gas) |
| आकार (Shape) | निश्चित: बर्तन बदलने पर भी इसका आकार नहीं बदलता। | अनिश्चित: यह उसी बर्तन का आकार ले लेता है जिसमें इसे रखा जाता है। | अनिश्चित: इसका कोई निश्चित आकार नहीं होता। |
| आयतन (Volume) | निश्चित: स्थान घेरने की क्षमता स्थिर रहती है। | निश्चित: आकार बदलने पर भी जल का कुल आयतन स्थिर रहता है। | अनिश्चित: यह उपलब्ध पूरे स्थान (Entire space) में फैल जाती है। |
| प्रवाह क्षमता (Flow) | नहीं: ठोस प्रवाहित नहीं हो सकते। | हाँ: द्रव ऊंचे तल से नीचे की ओर बहते हैं। | हाँ: गैस के अणु सभी दिशाओं में तेजी से प्रवाहित होते हैं। |
| फैलने की क्षमता (Spread) | नहीं: यह सतह पर फैलता नहीं है। | हाँ: निश्चित आयतन बनाए रखते हुए सतह पर फैल सकता है। | अत्यधिक: संपूर्ण उपलब्ध क्षेत्र में स्वतः विस्तृत (Diffuse) हो जाती है। |
दैनिक जीवन के अन्य उदाहरण
- अवस्था परिवर्तन प्रदर्शित करने वाले अन्य पदार्थ: मोम (Wax), घी, नारियल का तेल (जो सर्दियों में ठोस में बदल जाता है) और खाद्य तेल।
- गैसों का विसरण (Diffusion of Gases): रसोई में बन रहे भोजन की गंध का बिना प्रवेश किए हमारे तक पहुँच जाना गैसों के हवा में तेजी से फैलने (विवरण) के गुण को दर्शाता है।
- प्रमुख गैसें: ऑक्सीजन (O_2) और कार्बन डाइऑक्साइड (CO_2) इसके अन्य गैसीय उदाहरण हैं।
हम जल की अवस्थाओं को कैसे बदल सकते हैं?
- मूल सिद्धांत: किसी भी पदार्थ की भौतिक अवस्था को ऊष्मा देकर (Heating) या ऊष्मा लेकर/ठंडा करके (Cooling) बदला जा सकता है।
अवस्था परिवर्तन की प्रक्रियाएं
- गलनांक / पिघलना (Melting): वह तापीय प्रक्रिया जिसके द्वारा कोई पदार्थ ठोस अवस्था से द्रव अवस्था में परिवर्तित होता है (जैसे: बर्फ का पिघलकर पानी बनना)। इसके लिए ऊष्मा की आपूर्ति आवश्यक है।
- हिमीकरण / जमना (Freezing): वह तापीय प्रक्रिया जिसमें कोई द्रव पदार्थ ठंडे वातावरण में रखने पर अपनी ऊष्मा खोकर ठोस अवस्था में बदल जाता है (जैसे: पानी का जमकर बर्फ बनना)।
जल का वाष्पीकरण तीव्र या धीमा कैसे हो सकता है?
- मूल सिद्धांत: वाष्पीकरण (Evaporation) की दर एक समान नहीं होती है; यह पूरी तरह से आसपास की मौसमी परिस्थितियों, तापमान और सतह की प्रकृति पर निर्भर करती है।
- नियंत्रित चर (Controlled Variables): वैज्ञानिक प्रयोगों में शुद्ध परिणाम प्राप्त करने के लिए द्रव की मात्रा और उसके प्रकार को समान रखा जाता है, जबकि बाहरी परिस्थितियों को बदला जाता है।
वाष्पीकरण की दर को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक
| कारक | वाष्पीकरण की दर पर प्रभाव | व्यावहारिक उदाहरण |
| सतह का क्षेत्रफल | अधिक क्षेत्रफल = तीव्र वाष्पीकरण | बोतल के ढक्कन की तुलना में प्लेट में फैला पानी जल्दी सूखता है क्योंकि वायु के संपर्क में आने वाले अणुओं की संख्या बढ़ जाती है। |
| तापमान | उच्च तापमान = तीव्र वाष्पीकरण | छाया (की तुलना में सीधे सूर्य के प्रकाश में रखा पानी तेजी से उड़ता है; इसी कारण गर्म दिनों में कपड़े जल्दी सूखते हैं। |
| वायु की गति | तेज हवा = तीव्र वाष्पीकरण | हवादार दिनों में जल वाष्प के कण हवा के साथ तेजी से हट जाते हैं, जिससे पंखे के नीचे गीले कपड़े जल्दी सूख जाते हैं। |
| आर्द्रता | अधिक आर्द्रता = धीमा वाष्पीकरण | वर्षा के दिनों में हवा में पहले से ही जल वाष्प की मात्रा अधिक होती है, जिससे वायु की नमी सोखने की क्षमता कम हो जाती है और कपड़े बहुत धीरे सूखते हैं |
शीतलन प्रभाव (Cooling Effect)
- पॉट-इन-पॉट कूलर (ग्रामीण तकनीक):
- संरचना: एक बड़े मिट्टी के घड़े के अंदर छोटा मिट्टी का घड़ा रखा जाता है और दोनों के बीच के खाली स्थान को रेत (Sand) से भरकर उसमें पानी डाला जाता है। शीर्ष को गीली जूट की बोरी (Wet jute sack) या ढक्कन से ढका जाता है।
- कार्यप्रणाली: रेत का पानी घड़े की दीवारों के सूक्ष्म छिद्रों से रिसकर बाहर आता है और वाष्पीकृत होता है। यह वाष्पीकरण अंदर वाले छोटे घड़े से ऊष्मा सोख लेता है, जिससे भीतर रखा सामान ठंडा रहता है।
- अनुप्रयोग: यह बिजली-मुक्त मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों में सब्जियों और फलों को एक सप्ताह तक ताजा रखने के लिए एक अल्प-लागत ‘रेफ्रिजरेटर’ की तरह काम करता है। बेहतर शीतलन के लिए रेत के स्थान पर अन्य अत्यधिक छिद्रयुक्त (Porous) सामग्री का भी उपयोग किया जा सकता है।

- सुराही: यह लंबी गर्दन वाला मिट्टी का एक विशिष्ट पात्र है, जो अपनी पतली बनावट और उच्च वाष्पीकरण दर के कारण गर्मियों में पानी को अत्यधिक ठंडा करने के लिए उपयोग किया जाता है।
बादल हमें वर्षा कैसे देते हैं?
- जल वाष्प का ऊपर उठना (Ascent of Water Vapour): जल वाष्प (गैस) सामान्य वायु की तुलना में हल्की (Lighter) होती है। यही कारण है कि यह गर्म होने पर हवा के साथ वायुमंडल में ऊपर की ओर उठती है।
- ठंडी होने की प्रक्रिया: जैसे-जैसे हवा पृथ्वी की सतह से ऊपर उठती है, वायुमंडलीय दबाव कम होने के कारण यह फैलती है और लगातार ठंडी (Cooler) होती जाती है।
बादलों का निर्माण और संघनन नाभिक
बादल बनने के लिए केवल नमी का होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि वायुमंडल में सूक्ष्म कणों की उपस्थिति अनिवार्य है:
| घटक / कारक | वैज्ञानिक भूमिका | प्रयोगात्मक प्रमाण (Activity 8.10) |
| धूल के कण / एरोसोल | ये ‘संघनन नाभिक’ के रूप में कार्य करते हैं, जिसके चारों ओर जल वाष्प चिपक कर बूंदों में बदलती है। | खाली बोतल में पानी हिलाने पर बादल नहीं बनता, लेकिन जले हुए अखबार का धुआँ डालते ही बोतल में धुंध (haziness/बादल) बन जाती है। |
| बादल | जब हवा अत्यधिक ठंडी हो जाती है, तो जल वाष्प इन धूल के कणों के चारों ओर संघनित होकर तैरती हुई छोटी बूंदें बनाती है, जो सामूहिक रूप से बादल कहलाते हैं। | धुआं/धूल के कण वाष्प को संघनित होने के लिए आवश्यक प्राथमिक सतह (Aerosol surface) प्रदान करते हैं। |
| वर्षण | जब लाखों छोटी बूंदें आपस में जुड़कर बड़ी और भारी हो जाती हैं, तो गुरुत्वाकर्षण के कारण वे तैर नहीं पातीं और नीचे गिरने लगती हैं। | यह सतह पर वर्षा के रूप में गिरती है। विशेष परिस्थितियों में यह ओले (Hail) या बर्फबारी के रूप में भी गिर सकती है। |
जल चक्र
- परिभाषा: महासागरों और पृथ्वी की सतह से जल का वाष्पीकरण (Evaporation) होकर वायुमंडल में जाना, वहाँ संघनित (Condensation) होकर बादल बनना और फिर वर्षा, ओले या बर्फ के रूप में वापस धरातल पर आकर अंततः नदियों के माध्यम से महासागरों में मिल जाना जल चक्र (Water Cycle) कहलाता है।
- जल की उपलब्धता और संकट:
- पृथ्वी पर उपलब्ध जल का केवल एक बहुत छोटा भाग (Small portion) ही पौधों, पशुओं और मानव उपयोग (पेयजल) के लिए उपयुक्त (मीठा पानी) है।
- अधिकांश जल महासागरों में है जो अत्यधिक खारा होने के कारण सीधे उपयोग नहीं किया जा सकता।
- बढ़ती जनसंख्या और प्रदूषण: तेजी से बढ़ती जनसंख्या के कारण पानी की मांग बढ़ रही है, जिससे वैश्विक स्तर पर जल संकट (Water shortage) उत्पन्न हो रहा है। जल निकायों को प्रदूषण से बचाना और जल का विवेकपूर्ण उपयोग (Wise usage) वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।