NCERT Notes Class 6 science Chapter 2: Diversity in the Living World के अंतर्गत वैश्विक जैव-विविधता के केंद्र में स्थित हमारा जीव जगत प्राचीन काल की सूक्ष्म कोशिकीय संरचनाओं से लेकर विशालकाय जंतुओं और वनस्पतियों तक के क्रमिक और प्राकृतिक विकास का एक अनूठा उदाहरण है। एकसमान दिखने वाले निर्जीव वातावरण से मुक्त होकर, अनुकूलन (Adaptation) की अद्भुत क्षमताओं और जीवन के अनगिनत रूपों के संकल्प के साथ, इस प्रकृति ने अपनी जैविक अखंडता को प्राप्त किया। जीवों के वर्गीकरण, उनके विशिष्ट आवासों (Habitats) और परस्पर अंतर्निर्भरता के माध्यम से क्रमिक रूप से विकसित होता यह विषय, मरुस्थल की कँटीली झाड़ियों से लेकर घने वर्षावनों के विशाल वृक्षों तक एक सुदृढ़ पारिस्थितिक ताने-बाने में बंधा है।
हमारे आस-पास के पौधों और जानवरों में विविधता
- प्रकृति की सुंदरता: हमारे आस-पास के वातावरण में पौधों और जानवरों की अनगिनत किस्में पाई जाती हैं, जिन्हें बिना नुकसान पहुँचाए देखना और समझना ही वैज्ञानिक दृष्टिकोण की शुरुआत है।
- अवलोकन के मुख्य आयाम (Parameters of Observation):
- घ्राण शक्ति (Smell): पार्क या जंगलों में अलग-अलग पौधों की अपनी विशिष्ट गंध होती है।
- ध्वनि (Sounds): प्रत्येक पक्षी की अपनी एक अनूठी चहचहाहट (Unique chirp) होती है, जो प्राकृतिक विविधता का एक मुख्य उदाहरण है।
- नैतिक कर्तव्य: प्रकृति में घूमते समय पौधों और जानवरों को परेशान न करना, पत्तियां या फूल न तोड़ना और जैव विविधता का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का मौलिक कर्तव्य है।
1. जीव जगत में विविधता / Diversity in the Living World
- विविधता का नियम: हमारे आस-पास घास, झाड़ियाँ (Bushes) और विशाल पेड़ जैसे विविध पौधे और उनके साथ बंदर, तितलियाँ और कई तरह के पक्षी सह-अस्तित्व में रहते हैं।
पौधों की प्रमुख विशेषताएं
प्रकृति में पौधों का वर्गीकरण उनके निम्नलिखित भौतिक लक्षणों के आधार पर होता है:
- तना (Stem): तना छोटा/लंबा या सख्त/मुलायम (जैसे- घास का मुलायम और नीम का सख्त) हो सकता है।
- पत्तियां (Leaves): पत्तियों का आकार (Shape) और तने पर उनकी व्यवस्था (Arrangement) अलग-अलग होती है (जैसे- तुलसी में आमने-सामने और गुड़हल में एकांतर व्यवस्था)।
- फूल (Flowers): फूलों का रंग, आकार और उनकी सुगंध (Scent) एक-दूसरे से काफी भिन्न होती है।
पौधों की विविधता सारणी

| पौधे का नाम (Local Name) | तने की प्रकृति (Stem) | पत्तियों की बनावट/व्यवस्था (Leaves) | फूलों का रंग (Flowers) |
| घास (Common Grass) | मुलायम और पतला | हरी पत्तियां | – |
| तुलसी | सख्त और पतला | पत्तियां जोड़े में आमने-सामने (Opposite direction) | – |
| गुड़हल (Hibiscus) | सख्त | तने पर एक-एक करके एकांतर (Alternate) व्यवस्था | गुलाबी-बैंगनी (Pinkish purple) |
| नीम | सख्त और मोटा | सतह चिकनी (Smooth surface) | – |
जानवरों की विविधता और आवास (Animal Diversity & Habitats)
जानवरों में विविधता उनके रहने के स्थान, भोजन और चलने के तरीके के आधार पर देखी जाती है:
- आवास (Habitat): कुछ जीव जमीन पर रहते हैं (जैसे- गाय), कुछ पेड़ों पर (जैसे- पक्षी, बंदर), कुछ पानी में (जैसे- मछली) और कुछ जमीन और पानी दोनों में (जैसे- मेंढक)।
- भोजन (Food): जीव कीड़े-मकोड़े, घास, पत्तियां और बीज जैसी विविध चीजें खाते हैं।
- गतिशीलता (Movement): जीवों के चलने का तरीका अलग होता है (जैसे- उड़ना, चलना, रेंगना या कूदना)।
जानवरों की विविधता सारणी
| जीव का नाम (Animal) | आवास (Habitat) | मुख्य भोजन (Food) | चलने का तरीका (Movement) | अन्य विशेषता (Features) |
| कौआ (Crow) | पेड़ (Tree) | कीड़े-मकोड़े (Insects) | उड़ना और चलना | चोंच में तिनके दबाना |
| चींटी (Ant) | मिट्टी/बिल (Soil/Burrow) | पत्तियां, बीज, कीड़े | चलना | छह पैर होना |
| गाय (Cow) | भूमि (Land) | घास और पत्तियां | चलना |
पौधों और जानवरों का समूहन कैसे करें?
- वर्गीकरण का आधार: जीवों को उनकी समानताओं (Similarities) और असमानताओं (Differences) के आधार पर समूहों में विभाजित किया जाता है।
- समूहन का महत्व: वर्गीकरण से जैव विविधता को व्यवस्थित तरीके से समझना और उनका वैज्ञानिक अध्ययन करना आसान हो जाता है।
- वर्गीकरण के विविध मानदंड:
- पौधे: ऊंचाई, तने की कठोरता, फूलों की उपस्थिति/अनुपस्थिति, पत्तियों की बनावट और जड़ों के प्रकार।
- जंतु: भोजन की आदतें (Eating habits), प्राकृतिक आवास (Habitat), शारीरिक रंग और गति के प्रकार (Movement)।
पौधों का समूहन कैसे करें?
शारीरिक बनावट, ऊंचाई और तने की प्रकृति के आधार पर पौधों को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में विभाजित किया जाता है:
पौधों के मुख्य प्रकार (Types of Plants)
| श्रेणी (Category) | मुख्य विशेषताएँ (Key | उदाहरण (Examples) |
| जड़ी-बूटी (Herbs) | छोटे पौधे; तना कोमल, पतला और हरा (Tender & Green) होता है। | टमाटर (Tomato) |
| झाड़ी (Shrubs) | मध्यम ऊंचाई; तने सख्त लेकिन बहुत मोटे नहीं होते; शाखाएं जमीन के ठीक पास से निकलती हैं। | गुलाब (Rose) |
| पेड़ (Trees) | अत्यधिक लंबे; तना कठोर, मोटा, भूरा और लकड़ीदार (Woody) होता है; शाखाएं जमीन से बहुत ऊपर लगती हैं। | आम (Mango) |
- अन्य प्रकार: कमजोर तने वाले पौधे जो सीधे खड़े नहीं हो सकते, उन्हें दो भागों में बांटा जाता है:
- आरोही (Climbers): जो किसी अन्य ढांचे या पेड़ का सहारा लेकर ऊपर चढ़ते हैं।
- सर्पी (Creepers): जो जमीन पर ही रेंगते या फैलते हैं।
पत्तियों में शिरा-विन्यास (Leaf Venation)
पत्तियों पर दिखने वाली पतली रेखाओं को शिरा (Veins) कहते हैं, और इनके प्रतिरूप (Pattern) को शिरा-विन्यास (Venation) कहा जाता है। यह दो प्रकार का होता है:
- जालिकारूपी शिरा-विन्यास (Reticulate Venation): इसमें मुख्य मध्य शिरा के दोनों ओर एक जाल जैसी (Net-like) संरचना होती है। उदाहरण: गुड़हल (Hibiscus), चना (Chickpea), सदाबहार (Periwinkle)।
- समांतर शिरा-विन्यास (Parallel Venation): इसमें सभी शिराएं एक-दूसरे के समानांतर दौड़ती हैं। उदाहरण: केला (Banana), घास (Grass), लेमनग्रास (Lemongrass), गेहूं (Wheat)।
जड़ों के प्रकार (Types of Roots)
- मूसला जड़ (Taproot System): इसमें एक मुख्य मोटी जड़ होती है, जिससे छोटी-छोटी पार्श्व जड़ें (Side roots) निकलती हैं। उदाहरण: सरसों (Mustard), गुड़हल, चना।
- झकड़ा/रेशेदार जड़ (Fibrous Root System): इसमें कोई मुख्य जड़ नहीं होती, बल्कि तने के आधार से समान आकार की पतली जड़ों का गुच्छा निकलता है। उदाहरण: आम घास, गेहूं, लेमनग्रास।
सह-संबंध सूत्र (Dicot vs Monocot)
- द्विबीजपत्री (Dicotyledon / Dicot): जिन पौधों के बीजों को दो बराबर भागों (Cotyledons / बीजपत्र) में तोड़ा जा सकता है।
- नियम: द्विबीजपत्री बीज = जालिकारूपी शिरा-विन्यास (Reticulate Venation) = मूसला जड़ (Taproot)। [उदाहरण: चना]

- एकबीजपत्री (Monocotyledon / Monocot): जिन बीजों में केवल एक ही बीजपत्र होता है।
- नियम: एकबीजपत्री बीज = समांतर शिरा-विन्यास (Parallel Venation) = रेशेदार जड़ (Fibrous Root)। [उदाहरण: मक्का, गेहूं, घास]
जंतुओं का समूहन कैसे करें?
- गतिशीलता के आधार पर: जंतुओं का वर्गीकरण उनके गमन के प्रकार (उड़ना, दौड़ना, रेंगना, तैरना, कूदना) और उसमें प्रयुक्त होने वाले अंगों के आधार पर होता है।
जंतु गमन सारणी
| जंतु का नाम (Animal) | गमन का प्रकार (Movement) | प्रयुक्त अंग (Body Parts Used) |
| चींटी (Ant) | चलना और कूदना | पैर (Legs) |
| बकरी (Goat) | चलना और दौड़ना | पैर (Legs) |
| कबूतर / घरेलू मक्खी | चलना और उड़ना | पैर और पंख (Legs & Wings) |
| मछली (Fish) | तैरना | फिन/पंख (Fins |
विभिन्न परिवेशों में पौधे और जीव
- विविधता का कारण: अलग-अलग क्षेत्रों की जलवायु और परिस्थितियां भिन्न होती हैं, इसलिए एक क्षेत्र के जीव-जंतु और वनस्पतियां दूसरे क्षेत्र से पूरी तरह अलग होते हैं।
- मछली: पानी में रहने के लिए शरीर सुव्यवस्थित (Streamlined body) होता है और तैरने के लिए फिन्स होते हैं।
- बकरी: घास वाले मैदानी इलाकों में रहती है और चलने के लिए पैरों का उपयोग करती है।
विभिन्न क्षेत्रों के विशिष्ट पादप अनुकूलन (Plant Adaptations)
| क्षेत्र / पौधा | शारीरिक विशेषता | अनुकूलन का कारण |
| रेगिस्तान / कैक्टस | तने मोटे और गूदेदार (Thick & Fleshy) होते हैं। | पानी को स्टोर करने और अत्यधिक गर्मी को सहन करने के लिए। |
| पहाड़ / देवदार | शंकुधारी आकार (Conical) और ढलान वाली लचीली शाखाएं। | बर्फबारी के दौरान बर्फ को आसानी से नीचे फिसलने देने के लिए। |
| नीलगिरि (शोला वन) / रोडोडेंड्रोन | ऊंचाई कम और पत्तियां छोटी होती हैं। | पहाड़ों की चोटियों पर चलने वाली तेज हवाओं से बचने के लिए। |
| सिक्किम के पहाड़ / रोडोडेंड्रोन | अपेक्षाकृत अधिक लंबे पेड़। | स्थानीय पर्वतीय परिस्थितियों में जीवित रहने के लिए। |
ऊँटों में अनुकूलन: गर्म रेगिस्तान बनाम शीत मरुस्थल (Camel Adaptations)
| लक्षण (Features) | गर्म रेगिस्तान का ऊँट (e.g., राजस्थान) | शीत मरुस्थल का ऊँट (e.g., लद्दाख) |
| पैर और खुर (Legs & Hooves) | पैर लंबे और खुर चौड़े होते हैं ताकि रेतीली जमीन में धंसे बिना चल सकें। | पैर छोटे होते हैं जो पहाड़ी और पथरीले क्षेत्रों में चलने में मदद करते हैं। |
| कूबड़ (Hump) | एक कूबड़ होता है, जिसमें भोजन/वसा जमा रहती है। | दो कूबड़ होते हैं, जो सर्दियों के अंत में भोजन की कमी के कारण सिकुड़ जाते हैं। |
| शरीर के बाल | सामान्य बाल। | सिर से गर्दन तक लंबे बाल होते हैं, जो अत्यधिक ठंड से बचाते हैं। |
| जल संरक्षण | कम मूत्र विसर्जन, सूखा गोबर, और पसीना न आना (Survive for many days)। | शीत मरुस्थल के अनुसार अनुकूलित। |
आवास और अनुकूलन की बुनियादी परिभाषाएं
- आवास (Habitat): वह स्थान जहाँ पौधे और जीव रहते हैं और जो उन्हें भोजन, पानी, हवा, आश्रय तथा अन्य बुनियादी ज़रूरतें प्रदान करता है।
- अनुकूलन (Adaptation): वे विशिष्ट शारीरिक विशेषताएं या आदतें जो किसी पौधे या जीव को उसके विशेष परिवेश में जीवित रहने के योग्य बनाती हैं।
- स्थलीय आवास (Terrestrial Habitats): जमीन पर पाए जाने वाले आवास। उदाहरण: वन, रेगिस्तान, घास के मैदान और पहाड़।
- जलीय आवास (Aquatic Habitats): पानी में पाए जाने वाले आवास। उदाहरण: तालाब, झीलें, नदियाँ और महासागर।
- उभयचर (Amphibians): ऐसे जीव जो पानी और जमीन दोनों पर रह सकते हैं। उदाहरण: मेंढक।