यदि आप NCERT Notes Class 6 Social Science (Geography) Chapter 1: ‘पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति निर्धारण’ की तलाश कर रहे हैं, तो यह अध्याय आपके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। NCERT भूगोल का पहला अध्याय पृथ्वी पर किसी स्थान की स्थिति ज्ञात करने के मूल सिद्धांतों को समझाता है।
इस अध्याय में ग्लोब, मानचित्र, अक्षांश (Latitudes) और देशांतर (Longitudes) जैसी अवधारणाओं का परिचय दिया गया है। ये विषय केवल विद्यालयी परीक्षाओं के लिए ही नहीं, बल्कि UPSC Foundation और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी उपयोगी हैं।
मानचित्र (Map) और ग्लोब (Globe) भूगोल के बुनियादी उपकरण हैं जो हमें पृथ्वी की सतह पर किसी भी स्थान की सटीक स्थिति, दूरी और दिशा को समझने में मदद करते हैं।
1. मानचित्र और उसके प्रमुख घटक (Map and Its Components)
मानचित्र पृथ्वी की सतह या उसके किसी भाग का ऊपर से देखा गया एक योजनाबद्ध प्रतिनिधित्व या चित्र होता है, जो छोटे क्षेत्र (जैसे गाँव या शहर) से लेकर बहुत बड़े क्षेत्र (जैसे देश या संपूर्ण विश्व) को कागज पर प्रदर्शित करता है।
- एटलस (Atlas): यह विभिन्न प्रकार के मानचित्रों का एक संगठित संग्रह या पुस्तक होती है।
1.1 मानचित्रों के प्रकार
- भौतिक मानचित्र (Physical Maps): ये मुख्य रूप से पृथ्वी की प्राकृतिक विशेषताओं जैसे पर्वतों, पठारों, मैदानों, महासागरों और नदियों को दर्शाते हैं।
- राजनीतिक मानचित्र (Political Maps): ये विभिन्न देशों, राज्यों, उनकी सीमाओं, शहरों, नगरों और राजधानियों को प्रदर्शित करते हैं।
- थीमैटिक मानचित्र (Thematic Maps): ये किसी विशिष्ट जानकारी पर केंद्रित होते हैं, जैसे सड़क नेटवर्क, वर्षा का वितरण, या वनों और उद्योगों का मानचित्रण।
1.2 मानचित्र के तीन मुख्य घटक
- दूरी (Distance) और पैमाना (Scale): वास्तविक धरातल की बड़ी दूरी को कागज पर छोटे रूप में दिखाने के लिए पैमाने का उपयोग किया जाता है। पैमाना ज़मीन पर वास्तविक दूरी और मानचित्र पर दिखाई गई दूरी का अनुपात होता है (जैसे:1 cm} = 500 m या 2.5 cm = 500 km।
- दिशा (Direction): मानचित्रों में आमतौर पर ऊपर दाहिने कोने में एक तीर का निशान होता है जो उत्तर दिशा (N) को दर्शाता है।
- प्रधान दिगबिंदु (Cardinal Directions): उत्तर (North), दक्षिण (South), पूर्व (East), और पश्चिम (West)।
- मध्यवर्ती दिशाएं (Intermediate Directions): उत्तर-पूर्व (NE), दक्षिण-पूर्व (SE), दक्षिण-पश्चिम (SW), और उत्तर-पश्चिम (NW)।
- प्रतीक (Symbols): सीमित स्थान में वास्तविक भवनों, सड़कों, रेलवे लाइनों, नदियों और जंगलों को दिखाने के लिए विशिष्ट आकृतियों, रंगों और चित्रों का उपयोग किया जाता है। भारत में मानचित्र बनाने वाली सरकारी संस्था भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) ने इसके लिए मानक प्रतीक निर्धारित किए हैं।
2. ग्लोब और ग्रिड प्रणाली (Globe and Grid System)
चूंकि पृथ्वी पूरी तरह से गोल नहीं है (यह ध्रुवों पर थोड़ी चपटी है और एक गोले के समान है), इसलिए इसे बिना किसी विकृति या कटे-फटे रूप के एक फ्लैट कागज पर दिखाना असंभव है। इस समस्या के समाधान के लिए ग्लोब का उपयोग किया जाता है, जो पृथ्वी का एक सटीक त्रिविमीय (3D) प्रतिरूप होता है।
2.1 निर्देशांक प्रणाली (Coordinate System)
पृथ्वी पर किसी भी स्थान की सटीक स्थिति का पता लगाने के लिए अक्षांश और देशांतर रेखाओं का उपयोग किया जाता है, जो आपस में मिलकर एक नेटवर्क बनाती हैं जिसे ग्रिड (Grid) कहा जाता है।
2.2 अक्षांश रेखाएं (Latitudes)
- परिभाषा: भूमध्य रेखा से उत्तर या दक्षिण की ओर किसी भी स्थान की कोणीय दूरी को अक्षांश कहते हैं। ये रेखाएं पूर्व से पश्चिम की ओर भूमध्य रेखा के समानांतर खींची जाती हैं, जिन्हें अक्षांश के समानांतर वृत्त (Parallels of Latitude) कहा जाता है।
- विशेषता: भूमध्य रेखा सबसे बड़ा वृत्त होती है (0°), और जैसे-जैसे हम ध्रुवों की ओर बढ़ते हैं, इन वृत्तों का आकार छोटा होता जाता है। उत्तरी ध्रुव को 90°N और दक्षिणी ध्रुव को 90° से दर्शाया जाता है।
- जलवायु से संबंध:
- उष्णकटिबंधीय (Torrid Zone): भूमध्य रेखा के आस-पास का क्षेत्र जहाँ जलवायु गर्म होती है।
- शीतोष्णकटिबंधीय (Temperate Zone): भूमध्य रेखा से दूर बढ़ने पर मिलने वाली मध्यम जलवायु।
- शीतकटिबंधीय (Frigid Zone): ध्रुवों के निकट का अत्यंत ठंडा क्षेत्र।

2.3 देशांतर रेखाएं (Longitudes)
- परिभाषा: उत्तरी ध्रुव को दक्षिणी ध्रुव से मिलाने वाली अर्धवृत्ताकार रेखाओं को देशांतर या मध्याह्न रेखाएं (Meridians of Longitude) कहा जाता है।
- प्रमुख याम्योत्तर (Prime Meridian): लंदन के ग्रीनविच (Greenwich) से गुजरने वाली 0° देशांतर रेखा को अंतर्राष्ट्रीय मानक माना गया है। यह पृथ्वी को पूर्वी गोलार्ध और पश्चिमी गोलार्ध में विभाजित करती है।
- विस्तार: देशांतर का मान 0° से शुरू होकर पूर्व और पश्चिम दोनों दिशाओं में 180° तक बढ़ता है। 180°E और 180°W दोनों एक ही रेखा हैं, जिसे बिना किसी अक्षर के केवल 180° लिखा जाता है।
भारत का प्राचीन इतिहास और मध्य रेखा (Madhya Rekhā):
यूरोप के ग्रीनविच को मानक मानने से कई सदियों पहले, प्राचीन भारतीय खगोलविदों के पास अपनी एक मुख्य देशांतर रेखा थी जिसे ‘मध्य रेखा’ कहा जाता था। यह रेखा उज्जयिनी (आधुनिक उज्जैन) शहर से होकर गुजरती थी, जो प्राचीन भारत में खगोल विज्ञान का एक प्रमुख केंद्र था। प्रसिद्ध खगोलशास्त्री वराहमिहिर ने लगभग 1,500 वर्ष पहले यहीं कार्य किया था, और सभी प्राचीन भारतीय खगोलीय ग्रंथों में गणनाओं के लिए उज्जयिनी मध्याह्न रेखा को ही संदर्भ माना गया था।

3. समय क्षेत्र और अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा (Time Zones and IDL)
पृथ्वी अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है और 24 घंटे में एक चक्कर (360°) पूरा करती है। इस गति के आधार पर पृथ्वी प्रति घंटे 15° घूमती है (15°× 24 = 360°))।
- स्थानीय समय (Local Time): जैसे-जैसे हम ग्रीनविच रेखा से पूर्व की ओर बढ़ते हैं, प्रत्येक 15° देशांतर पर स्थानीय समय में 1 घंटा जुड़ जाता है, और पश्चिम की ओर जाने पर 1 घंटा घट जाता है।
- मानक समय (Standard Time): एक ही देश के भीतर कई स्थानीय समय के कारण होने वाले भ्रम से बचने के लिए देश के मध्य से गुजरने वाली किसी एक देशांतर रेखा के समय को पूरे देश का मानक समय मान लिया जाता है।
- भारतीय मानक समय (IST): भारत का मानक समय ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) से 5 घंटे 30 मिनट आगे है। भारत का भौगोलिक विस्तार 8°N से 37°N अक्षांश और 68°E से 97°E देशांतर के बीच है, जिसके कारण पोरबंदर (गुजरात) और तिनसुकिया (असम) के स्थानीय समय में लगभग 2 घंटे का अंतर आ जाता है।

3.1 वैश्विक समय क्षेत्र (World Time Zones)
पूरी दुनिया को व्यापक रूप से 15° के देशांतरीय आधार पर अलग-अलग समय क्षेत्रों में विभाजित किया गया है। इन क्षेत्रों की सीमाएं पूरी तरह सीधी नहीं हैं क्योंकि इन्हें संबंधित देशों की प्रशासनिक और अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं के अनुसार घुमाया गया है।
- बड़े आकार वाले देशों में एक से अधिक समय क्षेत्र होते हैं। उदाहरण के लिए, संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) में 6 समय क्षेत्र और रूस (Russia) में 11 समय क्षेत्र हैं।
3.2 अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा (International Date Line – IDL)
- यह रेखा ग्रीनविच के ठीक विपरीत दिशा में लगभग 180° देशांतर पर स्थित है।
- इस रेखा को पार करने पर कैलेंडर की तारीख बदल जाती है। यदि कोई पूर्व की ओर यात्रा करते हुए इसे पार करता है, तो उसे अपने समय से एक दिन घटाना पड़ता है (जैसे सोमवार से रविवार), और पश्चिम की ओर यात्रा करने पर एक दिन जोड़ना पड़ता है (जैसे रविवार से सोमवार)।
- यह रेखा पूरी तरह सीधी नहीं है; इसे कुछ स्थानों पर मोड़ा गया है ताकि एक ही देश या द्वीप समूह के विभिन्न हिस्सों में दो अलग-अलग तारीखें न हों।
