28 June 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अन्तर्गत इस व्यापक विश्लेषण में हम मध्यकालीन इतिहास और सतत शहरी नियोजन के प्रतीक नादप्रभु श्री केम्पेगौड़ा की 517वीं जयंती, तकनीकी मोर्चे पर डिजिटल इंडिया के ऐतिहासिक 11 वर्ष (इंडियाएआई और सेमीकंडक्टर मिशन 2.0), तटीय सुरक्षा को अभेद्य बनाने वाले स्वदेशी पोत आईसीजीएस अक्षय, मध्य प्रदेश के आर्थिक गौरव जीआई-टैग प्राप्त रीवा के सुंदरजा आम का पहला कमर्शियल एक्सपोर्ट, स्वास्थ्य क्षेत्र की डिजिटल क्रांति आरोग्य सेतु 2.0 तथा भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस 2026 पर सरकार के नए रोडमैप का संपूर्ण विश्लेषण करेंगे।
अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई (MSME) दिवस 2026: ‘विकसित भारत @2047’ और डिजिटल पहलों का शुभारंभ
- प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) की परिभाषा, सरकारी डिजिटल पहलें और योजनाएं।
- मुख्य परीक्षा (Mains – GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) – औद्योगिक नीति, रोजगार सृजन, समावेशी विकास (Inclusive Growth), एमएसएमई क्षेत्र की चुनौतियां और तकनीकी समावेशन (AI & Technology Adoption)।
चर्चा में क्यों? (Why in News?)
भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने 27 जून 2026 को डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र, नई दिल्ली में आयोजित ‘अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस 2026’ (International MSME Day 2026) समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने देश के आर्थिक विकास में एमएसएमई के योगदान की सराहना करते हुए इस क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए कई बड़ी डिजिटल पहलों (Major Digital Initiatives) का शुभारंभ किया।
मुख्य बिंदु: एमएसएमई का विकास और भविष्य का रोडमैप
1. ‘विकसित भारत @2047’ का मुख्य इंजन
- आर्थिक और सामाजिक आधार: उपराष्ट्रपति के अनुसार, एमएसएमई केवल एक आर्थिक श्रेणी नहीं है, बल्कि यह देश के पहली पीढ़ी के उद्यमियों, युवाओं, महिला उद्यमियों के साहस और लाखों छोटे व्यवसायों की जुझारू क्षमता (Resilience) का प्रतीक है।
- 2047 का विज़न: भारत को वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने के सपने को गति देने में एक जीवंत और गतिशील एमएसएमई क्षेत्र सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
2. दीर्घकालिक सफलता के तीन स्तंभ (Three Pillars of Success)
एमएसएमई के वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने के लिए तीन तत्वों को अनिवार्य बताया गया है:
- गुणवत्ता (Quality): वैश्विक मानकों के अनुरूप उत्पादों का निर्माण।
- नवाचार (Innovation): लगातार नए विचारों और कुशल प्रणालियों को अपनाना।
- प्रौद्योगिकी को अपनाना (Technology Adoption): आधुनिक दौर में प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए डिजिटल उपकरणों का उपयोग।
3. एआई (AI) और आधुनिक तकनीक: खतरे नहीं, अवसर
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence): छोटे उद्योगों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नई तकनीकों से डरने के बजाय इन्हें एक बड़े अवसर के रूप में अपनाना चाहिए ताकि परिचालन लागत (Operating Costs) को कम किया जा सके।
- सरकारी प्रयास: सरकार इस क्षेत्र के औपचारिकरण (Formalisation), बैंक ऋण (Bank Credit) के विस्तार और तकनीकी समावेशन को बढ़ावा देने के लिए लगातार नीतिगत प्रयास कर रही है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Prelims Facts)
एमएसएमई और वैश्विक मंच (Fact Matrix)
- अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस: प्रतिवर्ष 27 जून को मनाया जाता है।
- समारोह स्थल (2026): डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र, नई दिल्ली।
- मुख्य फोकस क्षेत्र: गुणवत्ता नियंत्रण, डिजिटल पहलें, और बैंक क्रेडिट का विस्तार।
- विनियामक संस्था: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (Ministry of MSME)।
आरोग्य सेतु 2.0 और डिजिटल स्वास्थ्य पहलें: भारत के ‘डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर’ का नया विस्तार
- प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM), आरोग्य सेतु 2.0, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA), डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), नेशनल हेल्थ क्लेम्स एक्सचेंज (NHCX)।
- मुख्य परीक्षा (Mains – GS Paper 2 & 3): शासन व्यवस्था (Governance) – ई-गवर्नेंस के अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएं और सीमाएं; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science & Tech) – आईटी और कंप्यूटर के क्षेत्र में विकास; स्वास्थ्य क्षेत्र और सामाजिक सुरक्षा (Social Justice & Health) – सुलभ, वहनीय और समावेशी स्वास्थ्य सेवाएं।
चर्चा में क्यों? (Why in News?)
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा 29 जून 2026 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आरोग्य सेतु 2.0 (Aarogya Setu 2.0) और स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए कई अन्य डिजिटल पहलों को आधिकारिक तौर पर लॉन्च करेंगे। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) और नेशनल रिसोर्स सेंटर फॉर EHR स्टैंडर्ड्स (NRCeS) के तत्वावधान में विकसित ये पहलें देश के डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम को अत्यधिक सुदृढ़, इंटरऑपरेबल (Interoperable – विभिन्न प्रणालियों के बीच डेटा साझा करने की क्षमता) और नागरिक-केंद्रित बनाएंगी।
मुख्य बिंदु: डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम और नई पहलें
1. आरोग्य सेतु 2.0: पर्सनल हेल्थ रिकॉर्ड (PHR) एप्लीकेशन
कोविड-19 महामारी के दौरान बने भरोसे का लाभ उठाते हुए इस ऐप को अब नागरिकों के लिए एक व्यापक व्यक्तिगत स्वास्थ्य रिकॉर्ड प्लेटफॉर्म के रूप में अपग्रेड किया गया है, जो निम्नलिखित सुविधाएं देगा:
- ABHA प्रबंधन: आयुष्मान भारत डिजिटल अकाउंट (ABHA) का निर्माण और डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड का सुरक्षित भंडारण व साझाकरण।
- स्मार्ट हेल्थ टूल्स: एआई (AI) आधारित स्वास्थ्य अंतर्दृष्टि, पहनने योग्य उपकरणों (Wearable Devices) का एकीकरण और स्मार्ट हेल्थ रिपोर्ट्स।
- सुलभ नागरिक सेवाएं: ‘स्कैन एंड रजिस्टर’ के माध्यम से ओपीडी (OPD) पंजीकरण, डिजिटल भुगतान, दवाओं के रिमाइंडर और नजदीकी जन औषधि केंद्रों, एम्बुलेंस सेवाओं व ब्लड बैंकों की वास्तविक समय (Real-time) में खोज।
2. आयुष्मान ऐप (Ayushman App) एवं आयुष्मान सारथी (Ayushman Sarathi)
- आयुष्मान ऐप अपग्रेड: आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) के लाभार्थियों के लिए कार्ड बनाने, पात्रता सत्यापन, उपचार के इतिहास और शिकायत निवारण के लिए वन-स्टॉप डिजिटल प्लेटफॉर्म।
- आयुष्मान सारथी: यह पीएम-जय (PM-JAY) के लाभार्थियों के लिए एक व्हाट्सएप चैटबॉट (WhatsApp Chatbot) है, जो एक सरल संवादात्मक इंटरफ़ेस के माध्यम से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों तक अंतिम मील सेवा वितरण (Last-mile service delivery) सुनिश्चित करेगा।
3. प्रदाता और बीमा-केंद्रित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर
- नेशनल हेल्थ क्लेम्स एक्सचेंज (NHCX): यह सार्वजनिक और निजी बीमा कार्यक्रमों के बीच स्वास्थ्य दावों (Health Claims) के मानकीकृत आदान-प्रदान के लिए एक डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर है, जो प्रशासनिक बोझ को कम करके दावों के त्वरित निपटान को सक्षम बनाएगा।
- FHIR बंडल्स यूटिलिटी: बीमा योजनाओं की जानकारी को अंतर्राष्ट्रीय मानकों (FHIR) के अनुरूप डिजिटल प्रारूप में बदलने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) का एक विशेष टूल, जो दावों में त्रुटियों को समाप्त करेगा।
- यूनिफाइड हेल्थ इंटरफेस (UHI): एक खुला और इंटरऑपरेबल नेटवर्क जो नागरिकों को विभिन्न डिजिटल अनुप्रयोगों के माध्यम से सीधे स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं (Doctors/Hospitals) की खोज और बुकिंग करने की अनुमति देता है।
- ई-सुश्रुत क्लिनिक (e-Sushrut Clinic): डॉक्टरों और क्लीनिकों के लिए एक ‘प्लग-एंड-प्ले’ क्लिनिक प्रबंधन समाधान, जो नैदानिक कार्यों को डिजिटल बनाने और उन्हें सीधे आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) इकोसिस्टम से जोड़ने में मदद करेगा।
4. डिजिटल स्वास्थ्य की साझा भाषा (Standardization Tools)
डेटा की सटीकता और नैदानिक निर्णयों को बेहतर बनाने के लिए तीन महत्वपूर्ण मानक जारी किए गए हैं:
- ड्रग रजिस्ट्री (Drug Registry): पूरे देश में दवाओं की समान कोडिंग सुनिश्चित करने के लिए एक राष्ट्रीय डेटाबेस।
- कॉमन लोइंक कोड्स फॉर इंडिया (CLCI): भारतीय स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार प्रयोगशाला मानकों का एक राष्ट्रीय सेट, जो विभिन्न लैब और अस्पतालों के बीच जांच रिपोर्टों के निर्बाध डिजिटल विनिमय को सक्षम बनाएगा।
- भारत हेल्थ टर्मिनोलॉजी सर्विस (BHTS): चिकित्सा शब्दावलियों और कोड सिस्टम का एक मानकीकृत संग्रह, जो विभिन्न स्वास्थ्य प्रणालियों के बीच डेटा के सटीक अर्थ (Semantic Interoperability) को बनाए रखेगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Prelims Facts)
विनियामक और विधिक अवयव (Regulatory Matrix)
| पहल / निकाय | प्रमुख विनियामक और तकनीकी भूमिका (Core Function) |
| राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) | आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) और PM-JAY के कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेंसी। |
| NRCeS | नेशनल रिसोर्स सेंटर फॉर EHR स्टैंडर्ड्स – भारत में स्वास्थ्य डेटा मानकीकरण (जैसे CLCI और BHTS) विकसित करने वाली संस्था। |
| ABHA | आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (Ayushman Bharat Health Account) – नागरिकों की विशिष्ट डिजिटल स्वास्थ्य पहचान। |
| NHCX | नेशनल हेल्थ क्लेम्स एक्सचेंज – अस्पताल और बीमा कंपनियों के बीच दावों के निपटान का डिजिटल हाईवे। |
| CLCI | कॉमन लोइंक कोड्स फॉर इंडिया – भारत के लिए प्रयोगशाला और नैदानिक जांच रिपोर्टों का मानक। |
रीवा के ‘सुंदरजा आम’ का पहला कमर्शियल एक्सपोर्ट: जीआई टैग और कृषि निर्यात को नई उड़ान
- प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): एपीडा (APEDA), भौगोलिक उपदर्शन (GI Tag), सुंदरजा आम (Sundarja Mango), कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात, सरकारी पहलें।
- मुख्य परीक्षा (Mains – GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) – कृषि क्षेत्र, मुख्य फसलें और उनके विपणन/निर्यात (Agricultural Marketing & Exports), किसानों की आय को दोगुना करना, मूल्य श्रृंखला (Value Chain) का एकीकरण।
चर्चा में क्यों? (Why in News?)
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत कार्यरत अपेक्स बॉडी ‘एपीडा’ (APEDA) ने मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक भौगोलिक उपदर्शन (GI)-टैग प्राप्त ‘रीवा के सुंदरजा आम’ के पहले व्यावसायिक निर्यात (First Commercial Export) को सफलतापूर्वक सुगम बनाया है। 26 जून 2026 को हरी झंडी दिखाकर रवाना की गई एक मीट्रिक टन की यह पहली अंतरराष्ट्रीय खेप संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भेजी गई है, जो भारतीय स्वदेशी कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजारों में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।
मुख्य बिंदु: वैश्विक बाजार में सुंदरजा आम और आर्थिक निहितार्थ
1. वैश्विक पहचान और विशिष्ट विशेषताएं (Unique Traits)
- विशेष गुण: रीवा का सुंदरजा आम अपनी अत्यधिक मिठास, समृद्ध सुगंध, फाइबर रहित पल्प (बिना रेशे का गूदा) और एक बेहद अनोखे स्वाद के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाना जाता है।
- जीआई टैग की भूमिका: इस निर्यात ने साबित किया है कि भौगोलिक उपदर्शन (GI Registration) किसी क्षेत्र-विशेष के कृषि उत्पादों को वैश्विक स्तर पर एक प्रीमियम ब्रांड के रूप में स्थापित करने के लिए कितना आवश्यक है।
2. निर्यात अवसंरचना और संस्थागत समन्वय
इस ऐतिहासिक शिपमेंट को धरातल पर उतारने के लिए एपीडा ने एक जटिल और बहुस्तरीय वैल्यू चेन का समन्वय किया:
- हितधारकों का जुड़ाव: एपीडा ने मध्य प्रदेश के बागवानी विभाग, स्थानीय निर्यातकों, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), पैक हाउस ऑपरेटरों और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को एक मंच पर जोड़ा।
- प्रसंस्करण और पैकेजिंग: आम की कटाई के बाद उत्तर प्रदेश के भदोही में स्थित ‘त्रिसागर फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी’ के एपीडा-सहायता प्राप्त आधुनिक पैक हाउस में इसकी ग्रेडिंग, छँटाई और फाइटोसैनिटरी (Phytosanitary – पादप स्वच्छता) मानकों के अनुरूप पैकेजिंग की गई, जहाँ से इसे वाराणसी हवाई अड्डे के माध्यम से यूएई भेजा गया।
3. किसानों को सीधा आर्थिक लाभ (Premium Pricing)
- बाजार से अधिक मूल्य: स्थानीय मंडियों में सुंदरजा आम की सामान्य कीमत लगभग ₹100 से ₹110 प्रति किलोग्राम होती है, लेकिन निर्यात उन्मुख मूल्य श्रृंखला से जुड़ने के कारण निर्यातक ने इसे सीधे किसानों से ₹150 प्रति किलोग्राम पर खरीदा।
- आय में वृद्धि: यह ₹40 से ₹50 प्रति किलोग्राम का सीधा प्रीमियम किसानों के बैंक खातों में गया है, जो यह साबित करता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक सीधी पहुंच से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कैसे समृद्ध किया जा सकता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Prelims Facts)
विनियामक और भौगोलिक अवयव (Fact Matrix)
- प्रजाति और मूल स्थान: सुंदरजा आम, मुख्य रूप से गोविंदगढ़, रीवा जिला (मध्य प्रदेश) से संबंधित है।
- नोडल निर्यात एजेंसी: एपीडा (APEDA – कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण), जो वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन काम करती है।
- निर्यात गंतव्य: संयुक्त अरब अमीरात (UAE)।
- आपूर्तिकर्ता FPO: स्योंधा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (Seondha Farmer Producer Company Limited)।
- लॉजिस्टिक्स हब: त्रिसागर FPO पैक हाउस (भदोही, उत्तर प्रदेश) और वाराणसी हवाई अड्डा।
डिजिटल इंडिया के 11 वर्ष: एआई, सेमीकंडक्टर और फ्रंटियर टेक्नोलॉजी से ‘विकसित भारत’ की ओर
- प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): डिजिटल इंडिया मिशन, इंडियाएआई (IndiaAI) मिशन, भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM), यूपीआई (UPI), डीपीआई (DPI), डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) नियम।
- मुख्य परीक्षा (Mains – GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science & Tech) – सूचना प्रौद्योगिकी (IT), कंप्यूटर, रोबोटिक्स और एआई के क्षेत्र में विकास; बुनियादी ढांचा (Infrastructure) – डिजिटल नेटवर्क; भारतीय अर्थव्यवस्था – इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण (Electronics Manufacturing) और औद्योगिक नीति।
चर्चा में क्यों? (Why in News?)
1 जुलाई 2015 को लॉन्च हुए ‘डिजिटल इंडिया मिशन’ (Digital India Mission) के सफलतापर्वक 11 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस ऐतिहासिक मील के पत्थर पर जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत अब डिजिटल समावेशन (Digital Inclusion) के बुनियादी चरण से आगे बढ़कर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर निर्माण, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और मजबूत डेटा गवर्नेंस के नए युग में प्रवेश कर चुका है।
मुख्य बिंदु: डिजिटल इंडिया का नया चरण और कोर पिलर्स
1. इंडियाएआई (IndiaAI) मिशन: स्वदेशी एआई इकोसिस्टम
- वित्तीय परिव्यय: ₹10,372 करोड़ से अधिक के बजट के साथ मिशन तीव्र प्रगति पर है।
- सुपरकंप्यूटिंग बैकबोन: एआई अनुसंधान को गति देने के लिए 45,000 से अधिक GPUs (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स) से लैस एक साझा कंप्यूट सुविधा (Compute Facility) स्थापित की गई है।
- डेटा और मॉडल उपलब्धता: ‘एआई कोष’ (AI Kosh) प्लेटफॉर्म पर वर्तमान में 12,519 से अधिक डेटासेट, 307 एआई मॉडल और 20 टूलकिट उपलब्ध हैं। इसके अलावा वाणी, पाठ और विज़न श्रेणियों में 15 लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs) को वित्तीय सहायता दी जा रही है।
- समावेशी शिक्षा: टियर-II और टियर-III शहरों में 27 डेटा और एआई लैब्स स्थापित की गई हैं और ‘युवा एआई’ (YUVA AI) कोर्स के तहत 84 लाख शिक्षार्थियों को प्रशिक्षित किया गया है।
- ग्लोबल लीडरशिप: फरवरी 2026 में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ में 92 देशों ने भारत के ‘विश्वसनीय और विकास-उन्मुख एआई घोषणापत्र’ को अपनाया, जिसने $200 बिलियन से अधिक के निवेश प्रतिबद्धताओं को आकर्षित किया।
2. भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM): नीति से उत्पादन तक
- विशाल निवेश: वर्तमान में ₹1.64 लाख करोड़ के कुल निवेश के साथ 12 सेमीकंडक्टर विनिर्माण परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है (जिसमें 1 सेमिकंडक्टर फैब, 2 कंपाउंड फैब और 9 पैकेजिंग इकाइयां शामिल हैं)।
- आईएसएम 2.0 (ISM 2.0): केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित इस नए चरण का मुख्य फोकस सेमीकंडक्टर उपकरण, कच्चे माल की आपूर्ति और घरेलू बौद्धिक संपदा (Indigenous IP) का विकास करना है।
- डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI): इसके तहत 24 परियोजनाओं को सीधे वित्तीय सहायता दी जा रही है और 105 कंपनियों को उन्नत चिप डिजाइन टूल्स उपलब्ध कराए गए हैं।
3. इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और यूपीआई (UPI) की वैश्विक धाक
- तीसरा सबसे बड़ा निर्यातक: भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण उद्योग अब ₹13 लाख करोड़ का हो चुका है और इलेक्ट्रॉनिक्स देश की तीसरी सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी (Export Category) बन गई है। भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता है।
- यूपीआई के 10 वर्ष: अप्रैल 2026 में यूपीआई ने अपने सफल संचालन के 10 वर्ष पूरे किए। वित्त वर्ष 2025-26 में इसने 24,162 करोड़ के रिकॉर्ड लेनदेन दर्ज किए। यूपीआई अब भारत के 81% डिजिटल भुगतानों को संभालता है और वैश्विक रीयल-टाइम डिजिटल लेनदेन में इसकी हिस्सेदारी लगभग 49% है। भारत ने अपने डीपीआई के लिए 23 देशों के साथ सहयोग समझौते किए हैं।
4. डिजिटल अवसंरचना का विस्तार
- इंटरनेट पैठ: देश में ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या मार्च 2026 तक 106.58 करोड़ पहुंच गई है।
- भारतनेट (BharatNet): ग्रामीण कनेक्टिविटी को मजबूत करते हुए 2.18 लाख ग्राम पंचायतों को हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड से जोड़ा जा चुका है।
- 5G नेटवर्क: देश के 99.9% जिलों को कवर करते हुए 4.74 लाख 5G टावर स्थापित किए जा चुके हैं। पूर्वोत्तर क्षेत्र की डेटा संप्रभुता के लिए फरवरी 2026 में गुवाहाटी में राष्ट्रीय डेटा केंद्र शुरू किया गया।
5. डिजिटल गवर्नेंस और डेटा सुरक्षा का विनियामक ढांचा
- DPDP रूल्स: जनवरी 2025 में जारी ‘डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण’ (DPDP) नियमों के मसौदे के माध्यम से सहमति-आधारित डेटा गवर्नेंस और डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड के गठन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
- ऑनलाइन गेमिंग रेगुलेशन: ऑनलाइन गेमिंग (प्रोत्साहन और विनियमन) अधिनियम 1 मई 2026 से प्रभावी हो गया है, जिसके तहत अप्रैल 2026 में ‘ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ का गठन किया गया है।
6. नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम
- रोजगार सृजन: डीपीआईआईटी (DPIIT) द्वारा मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या बढ़कर 2.23 लाख से अधिक हो गई है, जिन्होंने देश में 23.36 लाख प्रत्यक्ष रोजगार पैदा किए हैं।
- लैंगिक समावेशिता: देश के लगभग 48% स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक या पार्टनर शामिल है।
- ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (GII): भारत की रैंकिंग वर्ष 2015 के 81वें स्थान से सुधरकर वर्ष 2025 में 38वें स्थान पर आ गई है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Prelims Facts)
डिजिटल इंडिया प्रगति मैट्रिक्स (Fact Matrix)
- डिजिटल इंडिया लॉन्च तिथि: 1 जुलाई 2015 (11 वर्ष पूर्ण)।
- डेटा लागत में गिरावट: ₹269 प्रति GB से घटकर वर्तमान में ₹8–10 प्रति GB।
- ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (GII) 2025: भारत का स्थान 38वां (2015 में 81वां था)।
- वैश्विक यूपीआई हिस्सेदारी: दुनिया के कुल रीयल-टाइम डिजिटल लेनदेन का 49% अकेले भारत के यूपीआई द्वारा होता है।
- नवीनतम नियामक निकाय (2026): ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया।
- पूर्वोत्तर अवसंरचना: गुवाहाटी में राष्ट्रीय डेटा केंद्र (फरवरी 2026)।
नादप्रभु श्री केम्पेगौड़ा की 517वीं जयंती: ऐतिहासिक विरासत और सतत शहरी नियोजन
- प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): नादप्रभु श्री केम्पेगौड़ा, विजयनगर साम्राज्य, बेंगलुरु की स्थापना, मध्यकालीन भारतीय इतिहास, संस्कृति और वास्तुकला।
- मुख्य परीक्षा (Mains – GS Paper 1 & 2): भारतीय संस्कृति (Art & Culture) – प्राचीन काल से आधुनिक काल तक कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू; शासन व्यवस्था (Governance) – ऐतिहासिक प्रशासनिक मॉडल और समावेशी शासन।
चर्चा में क्यों? (Why in News?)
27 जून 2026 को बेंगलुरु के संस्थापक नादप्रभु श्री केम्पेगौड़ा की 517वीं जयंती (517th Birth Anniversary) मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित समारोह में उपराष्ट्रपति ने उन्हें एक दूरदर्शी प्रशासक, कुशल नगर निर्माता, पर्यावरणविद् और समाज सुधारक के रूप में याद किया, जिनके ऐतिहासिक आदर्श आज के ‘विकसित भारत’ के संकल्प और आधुनिक सतत शहरी विकास के लिए बेहद प्रासंगिक हैं।
मुख्य बिंदु: केम्पेगौड़ा का ऐतिहासिक व प्रशासनिक योगदान
1. बेंगलुरु की स्थापना और ‘मिनी भारत’ की परिकल्पना
- समावेशी दृष्टिकोण: श्री केम्पेगौड़ा ने आज से लगभग पांच दशक पहले एक ऐसे समावेशी शहर की परिकल्पना की थी जहाँ किसान, व्यापारी, कारीगर, विद्वान और विभिन्न धर्मों के लोग एक साथ मिलकर प्रगति कर सकें। यही कारण है कि समकालीन बेंगलुरु को उनकी इसी दूरदर्शी सोच के कारण ‘मिनी भारत’ (Mini Bharat) कहा जाता है।
- नवाचार की नींव: आज बेंगलुरु जो भारत की प्रौद्योगिकी और नवाचार राजधानी (Technology and Innovation Capital) बना हुआ है, उसकी मजबूत प्रशासनिक और रणनीतिक नींव केम्पेगौड़ा द्वारा ही रखी गई थी।
2. सतत शहरी नियोजन (Sustainable Urban Planning)
- नियोजित बाजार और आवासीय क्षेत्र: केम्पेगौड़ा ने अच्छी तरह से डिजाइन किए गए बाजारों (Petes), आवासीय पड़ोसों, जल प्रणालियों और सार्वजनिक स्थानों के माध्यम से नियोजित शहरी विकास का एक बेहतरीन मॉडल पेश किया था।
- जल प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण: उन्होंने आपस में जुड़े तालाबों, झीलों और जल चैनलों (Interconnected network of lakes) का एक ऐसा ताना-बाना तैयार किया था जो आधुनिक समय में जल संकट और जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर समस्याओं से निपटने के लिए एक बड़ा सबक है। इसके साथ ही उन्होंने बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण को भी बढ़ावा दिया था।
3. सामाजिक सुधार और सांस्कृतिक सद्भाव
- सांस्कृतिक विविधता का सम्मान: कन्नड़ संस्कृति में गहराई से रचे-बसे होने के बावजूद केम्पेगौड़ा ने भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को सहर्ष अपनाया। उनका मानना था कि एक महान शहर वही है जो शिक्षा, संस्कृति और नैतिक मूल्यों को एक साथ पोषित करता है।
4. राष्ट्र निर्माण और उपराष्ट्रपति का संदेश
- युवाओं से आह्वान: उपराष्ट्रपति ने देश के युवाओं को केम्पेगौड़ा के जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आग्रह किया।
- जल संरक्षण और नदी जोड़ो परियोजना: इस ऐतिहासिक मंच से जल संरक्षण के महत्व पर विशेष बल दिया गया और किसानों के कल्याण तथा जल संसाधनों के इष्टतम उपयोग के लिए नदियों को आपस में जोड़ने (Interlinking of Rivers) की वकालत की गई।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Prelims Facts)
| तथ्य/पहलू | विवरण (Quick Facts) |
| व्यक्तित्व | नादप्रभु श्री केम्पेगौड़ा (Nadaprabhu Sri Kempegowda) |
| ऐतिहासिक पहचान | आधुनिक बेंगलुरु (Bengaluru) शहर के संस्थापक। |
| कालखंड/साम्राज्य | वह 16वीं शताब्दी के शासक थे और विजयनगर साम्राज्य (Vijayanagar Empire) के तहत एक सामंत (Chieftain) थे। |
| शहरी नियोजन मॉडल | उनके द्वारा बसाए गए बेंगलुरु में वाणिज्यिक क्षेत्रों को ‘पेटे’ (जैसे- चिकपेट, डोड्डापेट) के रूप में नियोजित किया गया था। |
| पर्यावरणीय योगदान | बेंगलुरु में केंपेगौड़ा द्वारा पेयजल और सिंचाई के लिए सैकड़ों झीलों (जैसे- धर्मबुद्धि झील) का निर्माण कराया गया था। |
| समारोह में उपस्थित गणमान्य | कर्नाटक के राज्यपाल (श्री थावरचंद गहलोत), केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री (श्री एच. डी. कुमारस्वामी) और अन्य प्रमुख नेता। |
आईसीजीएस अक्षय (ICGS Akshay) भारतीय तटरक्षक बल में शामिल: समुद्री सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की नई उड़ान
- प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): आईसीजीएस अक्षय (ICGS Akshay), भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard), फास्ट पेट्रोल वेसल (FPV), गोवा शिपयार्ड लिमिटेड, आत्मनिर्भर भारत।
- मुख्य परीक्षा (Mains – GS Paper 3): आंतरिक सुरक्षा (Internal Security) – तटीय सुरक्षा (Coastal Security) और उसकी चुनौतियां, विभिन्न सुरक्षा बल और संस्थाएं तथा उनके शासनादेश; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – स्वदेशी तकनीक का विकास और रक्षा आधुनिकीकरण।
चर्चा में क्यों? (Why in News?)
27 जून 2026 को भारतीय तटरक्षक बल (Bharatiya Tatrakshak / Indian Coast Guard) ने अपने सैन्य आधुनिकीकरण को मजबूत करते हुए नई पीढ़ी के फास्ट पेट्रोल वेसल (FPV) ‘आईसीजीएस अक्षय’ (ICGS Akshay) को गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) में औपचारिक रूप से बेड़े में शामिल (Commissioned) कर लिया है। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग की अतिरिक्त सचिव (कार्मिक) श्रीमती परमा सेन द्वारा कमीशन किया गया यह जहाज भारत के विशाल समुद्री क्षेत्र की रक्षा करने और स्वदेशी रक्षा विनिर्माण के संकल्प को गति देने में एक बड़ी भूमिका निभाएगा।

मुख्य बिंदु: आईसीजीएस अक्षय की परिचालन क्षमताएं
1. बहुआयामी समुद्री संचालन (Multi-mission Capabilities)
यह उन्नत जहाज भारतीय तटरक्षक बल को केवल एक पारंपरिक गश्ती पोत की क्षमता नहीं देता, बल्कि इसे बहुआयामी अभियानों को कुशलतापूर्वक अंजाम देने के लिए डिज़ाइन किया गया है:
- तटीय सुरक्षा और कानून प्रवर्तन: भारत के अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में अवैध गतिविधियों को रोकने, समुद्री कानूनों को लागू करने और तटीय सुरक्षा ग्रिड को अभेद्य बनाने में सहायक।
- खोज और बचाव (Search and Rescue – SAR): समुद्र में संकट में फंसे नाविकों और मछुआरों को त्वरित सहायता पहुंचाना तथा आपदा के समय राहत कार्यों का संचालन करना।
- समुद्री पर्यावरण संरक्षण: समुद्र में तेल रिसाव (Oil Spill) जैसी पर्यावरणीय आपदाओं से निपटने और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करने में सक्षम।
2. स्वदेशी विनिर्माण और ‘आत्मनिर्भर भारत’ का प्रतीक
- घरेलू डिजाइन और निर्माण: आईसीजीएस अक्षय का पूरी तरह से स्वदेशी डिजाइन और निर्माण गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) द्वारा किया गया है, जो भारत की घरेलू जहाज निर्माण क्षमता (Domestic Shipbuilding Capability) की परिपक्वता को दर्शाता है।
- आर्थिक और रणनीतिक लाभ: इस प्रकार के स्वदेशी जहाजों का निर्माण विदेशी निर्भरता को कम करता है, जिससे देश के भीतर एक मजबूत समुद्री रक्षा इकोसिस्टम का विकास होता है और मूल्यवान विदेशी मुद्रा की बचत होती है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Prelims Facts)
पोत विनिर्देश और विनियामक मैट्रिक्स (Fact Matrix)
- पोत का नाम: आईसीजीएस अक्षय (ICGS Akshay – ‘अक्षय’ का अर्थ है अविनाशी)।
- श्रेणी (Category): नई पीढ़ी का फास्ट पेट्रोल वेसल (FPV – Fast Patrol Vessel)।
- निर्माता संस्था: गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (Goa Shipyard Limited – GSL)।
- कमीशन की तिथि और स्थान: 27 जून 2026, गोवा।
- कमीशनिंग प्राधिकारी: श्रीमती परमा सेन, अतिरिक्त सचिव (कार्मिक), व्यय विभाग, वित्त मंत्रालय।
- उपस्थित सैन्य नेतृत्व: महानिरीक्षक भीष्म शर्मा (कमांडर, तटरक्षक क्षेत्र-पश्चिम) और महानिरीक्षक ज्योतिंद्र सिंह (उप महानिदेशक-HRD)।