NCERT Notes Class 6 Social Science (Geography) Chapter 6: The Beginnings of Indian Civilisation in Hindi Pdf के अंतर्गत हम भारत की सबसे प्राचीन और गौरवशाली सभ्यता—जिन्हें हम सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilisation) या सिंधु-सरस्वती सभ्यता के नाम से जानते हैं, उसे बहुत ही सरल और आसान भाषा में समझेंगे। इस अध्याय में हम जानेंगे कि कैसे हमारे पूर्वज हजारों साल पहले ग्रिड सिस्टम पर आधारित सुनियोजित शहरों में रहते थे, उनका जल प्रबंधन (Water Management) कैसा था और उनका व्यापार विदेशों तक कैसे फैला हुआ था।
एक सभ्यता क्या है? (What Is a Civilisation?)
समाज की खोज: भारत और उससे आगे (Exploring Society: India and Beyond)
अतीत का ताना-बाना (Tapestry of the Past)
- इंसान धीरे-धीरे एक जगह बसे, खेती शुरू की और नई तकनीकें (जैसे निर्माण, ट्रांसपोर्ट) बनाईं।
- जब मानव समाज एक उन्नत या एडवांस स्टेज पर पहुंचता है, तो उसे ‘सभ्यता’ कहते हैं।
एक सभ्यता में कम से कम ये 7 खूबियां होनी चाहिए:
- प्रशासन और सरकार: जटिल समाज की गतिविधियों को संभालने के लिए।
- शहरीकरण: टाउन-प्लानिंग, शहरों का विकास, पानी और ड्रेनेज (निकासी) का मैनेजमेंट।
- तरह-तरह के शिल्प: कच्चे माल से गहने और औजार जैसी तैयार चीजें बनाना।
- व्यापार: समाज के अंदर (आंतरिक) और दूर-दराज के देशों के साथ (बाहरी) व्यापार।
- लेखन कला: रिकॉर्ड रखने और आपस में बातचीत करने के लिए।
- सांस्कृतिक विचार: कला, साहित्य और रीति-रिवाजों के जरिए जीवन को अभिव्यक्त करना।
- उत्पादक कृषि: गांवों के साथ-साथ शहरों का पेट भरने के लिए पर्याप्त अनाज उगाना।
दुनिया में सबसे पहले सभ्यता मेसोपोटामिया (लगभग 6000 साल पहले) और फिर मिस्र (Egypt) में शुरू हुई। भारत में इसकी शुरुआत उत्तर-पश्चिम क्षेत्र से हुई।

धातुकर्म (Metallurgy)
- प्रकृति से कच्चे धातुओं को बाहर निकालना।
- धातुओं को शुद्ध करना या उन्हें आपस में मिलाना।
- धातुओं के गुणों का वैज्ञानिक रूप से अध्ययन करना।
गांव से शहर तक (From Village to City)
सहायक नदी (Tributary):
- वह छोटी नदी जो किसी बड़ी नदी या झील में जाकर मिल जाती है।
- उदाहरण: यमुना नदी, गंगा नदी की एक सहायक नदी है।
अतीत का ताना-बाना (Tapestry of the Past)
- पंजाब और सिंध के विशाल मैदान सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के पानी से उपजाऊ बनते थे।
- उपजाऊ होने के कारण यह पूरा इलाका खेती के लिए बहुत शानदार था।
- इसके कुछ पूर्व में, हजारों साल पहले ‘सरस्वती’ नाम की एक और नदी बहती थी।
- यह सरस्वती नदी हिमालय की तलहटी से निकलकर हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और गुजरात से गुजरती थी।
- इस पूरे इलाके में 3500 ईसा पूर्व (BCE) से गांव धीरे-धीरे कस्बों में बदलने लगे।
- व्यापार और आपसी लेन-देन बढ़ने से यही कस्बे 2600 ईसा पूर्व (BCE) के आसपास बड़े शहरों में बदल गए।
- इस पूरे विकास को भारत का ‘प्रथम शहरीकरण’ (First Urbanisation of India) कहा जाता है।
इस सभ्यता के अलग-अलग नाम और उनके कारण:
- पुरातत्वविदों (Archaeologists) ने इसे कई नाम दिए हैं: सिंधु (Indus), हड़प्पा (Harappan), सिंधु-सरस्वती या सिंधु-घग्गर सभ्यता।
- यहाँ रहने वाले लोगों को ‘हड़प्पावासी’ (Harappans) कहा जाता है।
- कारण: इस सभ्यता का सबसे पहला शहर ‘हड़प्पा’ (आज के पाकिस्तानी पंजाब में) था, जिसकी खुदाई साल 1920-21 में (एक सदी पहले) हुई थी।

हड़प्पा कालीन शहर और उनकी आधुनिक स्थिति (Harappan Cities & Modern Regions)
| हड़प्पा कालीन शहर (Harappan City) | आधुनिक राज्य / क्षेत्र (Modern State / Region) |
| हड़प्पा (Harappa) | पंजाब (पाकिस्तान) |
| मोहनजो-दड़ो (Mohenjo-daro) | सिंध (पाकिस्तान) |
| राखीगढ़ी (Rakhigarhi) | हरियाणा (भारत) |
| धोलावीरा (Dholavira) | गुजरात (भारत) |
| कालीबंगन (Kalibangan) | राजस्थान (भारत) |
सरस्वती नदी (The Sarasvatī River)
- सिंधु और उसकी पांच सहायक नदियों के किनारे मोहनजो-दड़ो और हड़प्पा जैसे मुख्य शहर बसे।
- इसके अलावा, बहुत सारे ऐतिहासिक स्थल सरस्वती नदी के किनारे भी मिले हैं।
- इस सरस्वती नदी को आज भारत में ‘घग्गर’ और पाकिस्तान में ‘हाकड़ा’ (Ghaggar-Hakra) कहा जाता है।
- आज के समय में यह एक मौसमी (seasonal) नदी है, जो सिर्फ बारिश के दिनों में बहती है।
- सरस्वती नदी का सबसे पहला जिक्र ऋग्वेद में मिलता है, जहाँ इसे एक देवी और ‘पहाड़ों से समुद्र तक बहने वाली नदी’ के रूप में पूजा गया है।
- बाद के ग्रंथों में इस नदी के सूखने और धीरे-धीरे गायब होने का वर्णन मिलता है।
नगर-नियोजन (Town-Planning)
महत्वपूर्ण शब्दार्थ (Key Terms):
- किलाबंदी (Fortification): किसी बस्ती या शहर के चारों ओर सुरक्षा के लिए बनाई गई एक विशाल और मजबूत दीवार।
- विशिष्ट वर्ग / अभिजात वर्ग (Elite): समाज की ऊंची परत या रसूखदार लोग, जैसे शासक, अधिकारी, प्रशासक और पुजारी।
नगरों की खोज और इतिहास (Discovery & History of Cities)
- हड़प्पा और मोहनजो-दड़ो: इस सभ्यता के खोजे गए पहले दो शहर हैं, जिनकी पहचान आज से करीब एक सदी पहले 1924 में हुई थी।
- शुरुआती नाम: सिंधु के मैदानों में कई साइट्स मिलने के कारण इसे शुरुआत में ‘सिंधु घाटी सभ्यता’ (Indus Valley civilisation) कहा गया।
- बाद की खोजें: बाद में धोलावीरा (गुजरात), राखीगढ़ी (हरियाणा), गनेरीवाला (चोलिस्तान रेगिस्तान, पाकिस्तान) जैसे बड़े शहर और लोथल (गुजरात) जैसी सैकड़ों छोटी साइट्स खोजी गईं।
- सरस्वती बेसिन की सघनता: सरस्वती नदी के क्षेत्र में साइट्स की संख्या बहुत ज़्यादा (सघन) है। इसमें दो बड़े शहर (राखीगढ़ी, गनेरीवाला), कई छोटे शहर (फरमाना, कालीबंगन) और कुछ कस्बे (भिरराना, बनावली) शामिल हैं।
हड़प्पा की नगर योजना और बनावट (City Structure & Layout)
- सटीक योजना: बड़े हड़प्पा कालीन शहर एकदम तय प्लानिंग के साथ बनाए गए थे।
- सड़कें: शहर की सड़कें चौड़ी थीं, जो अक्सर मुख्य दिशाओं (उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम) के हिसाब से सीधी बनी थीं।
- दो मुख्य भाग: अधिकांश शहर किलाबंदी (fortifications) से घिरे थे और दो अलग-अलग हिस्सों में बंटे थे:
- उच्च नगर (Upper Town): यहाँ संभवतः समाज का रसूखदार या विशिष्ट वर्ग (elite) रहता था।
- निचला नगर (Lower Town): यहाँ आम लोग (common people) रहते थे।
- भवन और घर: कुछ बड़ी इमारतों का इस्तेमाल सामूहिक कामों के लिए होता था, जैसे माल रखने के लिए गोदाम (warehouses)।
- समान गुणवत्ता: सड़कों और गलियों के किनारे अलग-अलग आकार के घर बने थे। खास बात यह है कि छोटे और बड़े, दोनों तरह के घरों के निर्माण की क्वालिटी एक जैसी थी।
- सामग्री: ये सभी इमारतें आमतौर पर पक्की ईंटों से बनाई गई थीं।
मोहनजो-दड़ो का ‘विशाल स्नानागार’ (The Great Bath)
- बनावट: यह मोहनजो-दड़ो में मिला एक छोटा लेकिन बेहद शानदार टैंक (लगभग 12 × 7 मीटर) है।
- वॉटरप्रूफिंग: ईंटों को अच्छे से बिछाकर उसके ऊपर प्राकृतिक बिटुमेन (एक प्रकार का डामर/तार) लगाकर इसे वॉटरप्रूफ बनाया गया था।
- सुविधाएं: इस टैंक के चारों ओर छोटे कमरे बने थे, जिनमें से एक कमरे में कुआं था। टैंक को समय-समय पर खाली करने और ताजा पानी भरने के लिए एक कोने में नाली (drain) भी थी।
- इस्तेमाल को लेकर बहस: इसके वास्तविक उपयोग को लेकर पुरातत्वविदों में आज भी बहस है, जिसके तीन मुख्य अनुमान हैं:
- आम जनता के नहाने की जगह (सार्वजनिक स्नानागार) — इसे अब खारिज कर दिया गया है, क्योंकि शहर के लगभग हर घर में अपना निजी बाथरूम था।
- सिर्फ राजपरिवार या खास लोगों के नहाने की जगह।
- धार्मिक अनुष्ठानों या पूजा-पाठ के समय स्नान करने के लिए इस्तेमाल होने वाला टैंक।
जल प्रबंधन (Water Management)
साफ-सफाई और ड्रेनेज सिस्टम (Cleanliness & Drainage)
- हड़प्पावासी जल प्रबंधन और साफ-सफाई को बहुत ज्यादा महत्व देते थे।
- उनके घरों में नहाने के लिए अलग से जगह (स्नानागार) होती थी।
- ये बाथरूम नालियों के एक बड़े नेटवर्क से जुड़े हुए थे।
- ये नालियां आमतौर पर सड़कों के नीचे से गुजरती थीं और गंदे पानी को शहर से बाहर ले जाती थीं।
पानी के स्रोत और संचयन (Water Sources & Harvesting)
- कुएं: मोहनजो-दड़ो में लोग ईंटों से बने सैकड़ों कुओं से पानी निकालते थे।
- अन्य स्रोत: दूसरे इलाकों में पानी के लिए तालाबों, पास की नदियों या मानव निर्मित जलाशयों (reservoirs) का इस्तेमाल होता था।
- धोलावीरा (कच्छ का रन, गुजरात) का अद्भुत सिस्टम:
- यहाँ पानी जमा करने के लिए पत्थरों से बने या चट्टानों को काटकर कम से कम छह बड़े जलाशय बनाए गए थे।
- इनमें से सबसे बड़ा जलाशय 73 मीटर लंबा था।
- पानी के बेहतर संचयन (harvesting) और सप्लाई के लिए इनमें से अधिकांश जलाशयों को जमीन के नीचे बनी नालियों (underground drains) से आपस में जोड़ा गया था।
हड़प्पावासी क्या खाते थे? (What Did the Harappans Eat?)
महत्वपूर्ण शब्दार्थ (Key Terms):
- दलहन (Pulses): फसलों की एक श्रेणी जिसमें बीन्स, मटर और दालें शामिल होती हैं।
खेती और खान-पान (Agriculture & Diet)
- नदियों के किनारे बस्तियां: हड़प्पावासियों ने अपनी ज़्यादातर बस्तियां छोटी-बड़ी नदियों के किनारे बनाईं। इससे उन्हें आसानी से पानी मिला और नदियों की उपजाऊ मिट्टी के कारण खेती में मदद मिली।
- फसलें: वे जौ (barley), गेहूं, कुछ प्रकार के बाजरे (millets), कभी-कभी चावल, दालें और कई तरह की सब्जियां उगाते थे।
- कपास (Cotton): पूरे यूरेशिया में कपास उगाने वाले वे पहले लोग थे, जिससे वे कपड़े बुनते थे।
- खेती के औजार: वे खेती के लिए हल (plough) का इस्तेमाल करते थे। हरियाणा के बनावली से मिट्टी का एक छोटा हल (खिलौना model) मिला है।
- गांव और शहर का संबंध: सैकड़ों छोटे ग्रामीण इलाकों या गांवों की मदद से यह खेती होती थी। इन्हीं गांवों से रोज अनाज शहरों तक पहुंचता था, जिससे शहर के लोग जीवित रह पाते थे।
- पशुपालन और मांसाहार: खुदाई में बड़ी संख्या में जानवरों और मछलियों की हड्डियां मिली हैं। इससे पता चलता है कि वे मांस के लिए जानवर पालते थे और नदी-समुद्र से मछलियां पकड़ते थे।
- बर्तनों से मिले सबूत: मिट्टी के बर्तनों की वैज्ञानिक जांच से पता चला है कि वे दूध से बनी चीजों (dairy products) के साथ-साथ हल्दी, अदरक और केले का इस्तेमाल भी करते थे। यानी उनका खान-पान काफी विविध (diverse) था।
सक्रिय व्यापार (A Brisk Trade)
निर्यात और शिल्प कला (Exports & Craftsmanship)
- व्यापार का दायरा: हड़प्पावासी अपनी सभ्यता के अंदर (पास और दूर के शहरों में) और भारत के बाहर की अन्य सभ्यताओं के साथ सक्रिय व्यापार करते थे।
- निर्यात होने वाली चीजें: वे गहने, लकड़ी (timber), रोजमर्रा की चीजें, कपास और संभवतः सोना व खाने-पीने का सामान बाहर भेजते थे।
- पसंदीदा गहने: गुजरात में मिलने वाले लाल रंग के कीमती पत्थर कार्नेलियन (carnelian) के मनके (beads) सबसे ज्यादा पसंद किए जाते थे। हड़प्पा के कारीगरों के पास इन मनकों में छेद करने और उन्हें सजाने की खास तकनीक थी।
- शंख की चूड़ियाँ: वे सख्त शंखों (conch shells) को काटकर बेहद खूबसूरत चूड़ियां बनाते थे, जिसके लिए उन्नत तकनीक की जरूरत होती थी।
- आयात: वे बाहर से क्या मंगाते थे, यह पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन इसमें तांबा (copper) शामिल हो सकता है क्योंकि यह उनके इलाके में आसानी से नहीं मिलता था।

परिवहन और लोथल का गोदीबाड़ा (Transport & Lothal Dockyard)
- व्यापार के रास्ते: व्यापार के लिए जमीन के रास्तों, नदियों और दूर जाने के लिए समुद्र का इस्तेमाल होता था। यह भारत में बड़े पैमाने पर समुद्री गतिविधि की शुरुआत थी।
- लोथल का गोदीबाड़ा (Dockyard): गुजरात के लोथल में 217 मीटर लंबा और 36 मीटर चौड़ा एक बहुत बड़ा बेसिन (तलाब जैसा ढांचा) मिला है। इसकी लंबाई लगभग दो फुटबॉल मैदानों से भी ज्यादा है। यह एक गोदीबाड़ा (dockyard) था, जहाँ व्यापारिक नावें आती-जाती थीं।

हड़प्पा कालीन मुहरें (Harappan Seals)
- मुहरों का उद्देश्य: इतने बड़े व्यापार में व्यापारियों और उनके सामान की पहचान के लिए हजारों छोटी मुहरों (seals) का इस्तेमाल होता था।
- बनावट: ये मुहरें आमतौर पर स्टीअटाइट (steatite) नाम के एक मुलायम पत्थर से बनती थीं, जिसे गर्म करके मजबूत किया जाता था।
- दिखावट: ये सिर्फ कुछ सेंटीमीटर की होती थीं। इन पर आमतौर पर जानवरों के चित्र और ऊपर कुछ खास चिन्ह (लेखन कला) बने होते थे।
- रहस्य: इस लेखन प्रणाली (writing system) और जानवरों के चित्रों का सांकेतिक मतलब आज तक समझा नहीं जा सका है, लेकिन यह साफ है कि इनका सीधा संबंध व्यापार से था।

अंत या एक नई शुरुआत? (The End or a New Beginning?)
- सभ्यता का पतन: लगभग 1900 ईसा पूर्व (BCE) के आसपास, अपनी तमाम बड़ी उपलब्धियों के बावजूद, सिंधु-सरस्वती सभ्यता बिखरने लगी।
- शहरों का छूटना: यहाँ के शानदार शहर एक-एक करके खाली और वीरान हो गए।
- बदला हुआ रहन-सहन: जो लोग वहाँ बचे रह गए, उन्होंने बदले हुए पर्यावरण के कारण गांवों जैसा रहन-सहन (rural lifestyle) अपना लिया।
- प्रशासन का अंत: ऐसा लगता है कि इस दौर में पुरानी सरकार या प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह खत्म हो चुकी थी।
- ग्रामीण बस्तियों में बिखराव: समय के साथ हड़प्पा के लोग बिखर गए और उन्होंने सैकड़ों-हजारों छोटी ग्रामीण बस्तियों में रहना शुरू कर दिया।