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NCERT Notes class 6 Social Science (Geography) Chapter 3: Landforms and Life

NCERT Notes class 6 Social Science (Geography) Chapter 3: Landforms and Life “हमारी पृथ्वी की सतह हर जगह एक जैसी नहीं है; कहीं ऊंचे बर्फ से ढके पहाड़ हैं, कहीं खनिजों से भरे पठार, तो कहीं फसलों से लहलहाते विशाल मैदान। नए NCERT पैटर्न के तहत कक्षा 6 सामाजिक विज्ञान (भूगोल) का अध्याय 3: भू-आकृतियाँ और जीवन (Landforms and Life) हमें इसी भौगोलिक और मानवीय विविधता के सफर पर ले जाता है। यह अध्याय केवल स्कूली बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि UPSC (IAS/IPS) प्रारंभिक परीक्षा के बुनियादी भूगोल (Basics of Geography) को मजबूत करने के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।

भू-आकृतियाँ: सामान्य परिचय (Landforms: An Introduction)

  • परिभाषा: भू-आकृति (Landform) हमारे ग्रह पृथ्वी की सतह पर मौजूद एक भौतिक विशेषता (Physical feature) है।
  • निर्माण अवधि: भू-आकृतियों का आकार/निर्माण लाखों वर्षों (Millions of years) की लंबी अवधि में तय होता है।
  • पर्यावरण और जीवन से संबंध: इन भौतिक आकृतियों का पर्यावरण (Environment) और पृथ्वी पर मौजूद जीवन के साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण व गहरा संबंध होता है।

भू-आकृतियों का वर्गीकरण (Classification of Landforms)

पृथ्वी की सतह पर पाई जाने वाली भू-आकृतियों को व्यापक रूप से तीन प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है:

  1. पर्वत (Mountains)
  2. पठार (Plateaus)
  3. मैदान (Plains)

पारिस्थितिक एवं मानवीय विशेषताएँ: इन तीनों भू-आकृतियों में अलग-अलग प्रकार की जलवायु (Climate) पाई जाती है, जिसके कारण ये विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों (Flora) और जीवों (Fauna) के आवास स्थान हैं। यद्यपि मनुष्यों ने इन सभी भू-आकृतियों के अनुकूल खुद को ढाल (Adapt) लिया है, फिर भी दुनिया भर में विभिन्न भू-आकृतियों पर रहने वाले लोगों की संख्या (जनसंख्या घनत्व) में काफी भिन्नता पाई जाती है।

भारत के संदर्भ में भू-आकृतिक विविधता (उदाहरण)

यदि कोई व्यक्ति भारत के विभिन्न राज्यों के बीच सड़क मार्ग से यात्रा करता है, तो उसे परिदृश्य (Landscape) में अत्यधिक बदलाव देखने को मिलता है। गद्यांश में दिए गए यात्रा मार्ग के अनुसार तीन प्रमुख भू-आकृतिक परिवर्तन इस प्रकार देखे जा सकते हैं:

  • छोटा नागपुर (झारखंड): यात्रा का प्रारंभिक बिंदु, जो अपनी विशिष्ट भू-आकृति (पठारी क्षेत्र) को प्रदर्शित करता है।
  • प्रयागराज (उत्तर प्रदेश): यात्रा का मध्यवर्ती बिंदु, जो मैदानी भू-आकृति को दर्शाता है।
  • अल्मोड़ा (उत्तराखंड): यात्रा का अंतिम बिंदु, जो पर्वतीय भू-आकृति का प्रतिनिधित्व करता है।

पारिभाषिक शब्दावली: तुंगता/ऊंचाई (Altitude)

  • अर्थ: समुद्र तल (Sea level) के ऊपर किसी भी वस्तु या भौगोलिक पिंड की ऊर्ध्वाधर ऊंचाई को ‘अल्टीट्यूड’ (Altitude) कहा जाता है।
  • प्रमुख उदाहरण:
    • किसी पर्वत (Mountain) की समुद्र तल से ऊंचाई।
    • उड़ान के दौरान किसी पक्षी या हवाई जहाज (Plane) की ऊंचाई।
    • अंतरिक्ष में चक्कर लगा रहे किसी उपग्रह (Satellite) की समुद्र तल से ऊंचाई।

पर्वत (Mountains)

भौतिक विशेषताएँ

  • पर्वत (Mountains): ये ऐसी भू-आकृतियाँ हैं जो अपने आस-पास के परिदृश्य (Landscape) से काफी ऊंची होती हैं। इन्हें इनके विस्तृत आधार (Broad base), तीव्र ढाल (Steep slopes) और संकीर्ण शिखर (Narrow summit) द्वारा पहचाना जाता है।

  • पहाड़ियाँ (Hills): पर्वतों की तुलना में कम ऊंचाई, कम तीव्र ढाल (Less steep slopes) और गोलाकार शीर्ष (Rounded tops) वाले उच्च अंचलों को पहाड़ियाँ कहा जाता है।

पर्वतों पर बर्फ और नदियों का संबंध

  • कम ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्र: यहाँ गर्मियों में बर्फ पिघलकर पानी में बदल जाती है, जो नदियों को जल प्रदान करती है (Feeds rivers)।

  • अधिक ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्र: अत्यधिक ऊंचाई (High altitudes) पर बर्फ कभी नहीं पिघलती, जिससे पर्वत स्थायी रूप से बर्फ से ढके (Permanently snow-capped) रहते हैं।

पर्वतों की आयु और भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ

  • युवा पर्वत (Young Mountains): ऊंचे और तीखे/नुकीले शिखर वाले पर्वत (जैसे हिमालय) अपेक्षाकृत ‘युवा’ हैं। इसका अर्थ यह है कि इनका निर्माण पृथ्वी के इतिहास में हाल ही में (लाखों वर्ष पूर्व) हुआ है। हिमालय जैसे पर्वतों में उत्थान (Upliftment) और अपरदन (Erosion) की प्रक्रिया आज भी जारी है, जिसके कारण इनकी ऊंचाई अभी भी बढ़ रही है।

  • प्राचीन पर्वत (Older Mountains): कम ऊंचे और अधिक गोलाकार पर्वत या पहाड़ियाँ (जैसे अरावली पर्वतमाला) बहुत पुरानी हैं। समय के साथ अपरदन (Erosion) की निरंतर प्रक्रिया ने इन्हें गोलाकार आकार दे दिया है।

विश्व की प्रमुख पर्वत श्रृंखलाएँ और चोटियाँ

संसार के अधिकांश पर्वत समूहों या श्रृंखलाओं (Mountain ranges) में व्यवस्थित हैं, जो हजारों किलोमीटर तक फैली हुई हैं। प्रमुख श्रृंखलाएं और चोटियां निम्नलिखित हैं:

पर्वत चोटी (Mountain Peak)पर्वत श्रृंखला (Range)भौगोलिक अवस्थिति / मुख्य विशेषता
माउंट एवरेस्ट (Mount Everest)हिमालय (Himalayas) – एशियातिब्बत (चीन) और नेपाल के बीच; विश्व की सर्वोच्च चोटियों में से एक।
कांचनजंगा (Kanchenjunga)हिमालय (Himalayas) – एशियानेपाल और भारत के सिक्किम राज्य के बीच स्थित।
माउंट अकोंकागुआ (Mount Aconcagua)एंडीज (Andes) – दक्षिण अमेरिकाएंडीज पर्वतमाला की सबसे ऊंची चोटी।
मोंट ब्लांक (Mont Blanc)आल्प्स (Alps) – पश्चिमी यूरोपआल्प्स पर्वतमाला का सबसे ऊंचा पर्वत।
माउंट किलिमंजारो (Mount Kilimanjaro)— (कोई श्रृंखला नहीं)पूर्वी अफ्रीका में स्थित एक एकाकी पर्वत (Isolated mountain) जो किसी श्रृंखला का हिस्सा नहीं है।
अनामुडी (Anamudi / Anai Peak)दक्षिण भारत का सबसे ऊंचा पर्वत (केरल में स्थित)।

पारिभाषिक शब्दावली (पर्वतीय पारिस्थितिकी)

  • पर्वतीय वन (Montane forest): एक विशेष प्रकार के वन जो केवल पर्वतीय क्षेत्रों में उगते हैं।

  • मॉस (Moss): बिना फूल या वास्तविक जड़ों (True roots) वाला एक छोटा हरा पौधा, जो अक्सर गद्देदार आवरण (Cushion-like cover) के रूप में फैलता है।

  • लाइकेन (Lichen): पौधे जैसा दिखने वाला एक जीव (Plant-like organism) जो सामान्यतः चट्टानों, दीवारों या पेड़ों से चिपका रहता है।

वर्षण (Precipitation) और बर्फ (Snow)

  • वर्षण (Precipitation) की परिभाषा: वायुमंडल से किसी भी रूप में पानी का पृथ्वी की सतह तक पहुँचना वर्षण कहलाता है। वर्षा (Rain), बर्फ (Snow) और ओले (Hail) वर्षण के सबसे सामान्य रूप हैं।

  • बर्फ और ओले: ये दोनों पानी के ठोस रूप (Solid state) में होने वाले वर्षण हैं। भारत के अधिकांश हिस्सों में वर्षण मुख्य रूप से बारिश और ओलों के रूप में होता है, लेकिन अत्यधिक ऊंचाई वाले ठंडे क्षेत्रों (जैसे हिमालयी क्षेत्र: कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश) में यह बर्फबारी (Snowfall) के रूप में होता है।

पर्वतीय पर्यावरण (Mountain Environment)

  • पर्वतीय वन (Montane Forest): पर्वतीय ढालों पर एक विशेष प्रकार के वन पाए जाते हैं जिन्हें ‘मोंटेन वन’ या पर्वतीय वन कहा जाता है।

  • शंकुधारी वृक्ष (Conifer Trees): इन वनों में मुख्य रूप से शंकुधारी वृक्ष पाए जाते हैं।

    • प्रमुख उदाहरण: चीड़ (Pine), फर (Fir), स्प्रूस (Spruce) और देवदार (Deodar)।

    • विशेषताएँ: ये वृक्ष लंबे और शंकु के आकार (Cone-shaped) के होते हैं, तथा इनकी पत्तियाँ पतली व नुकीली होती हैं।

  • उच्च अक्षांश/ऊंचाई पर वनस्पति: जैसे-जैसे ऊंचाई (Altitude) बढ़ती है, इन वृक्षों के स्थान पर घास, मॉस (Moss) और लाइकेन (Lichen) उगते हैं।

पर्वतीय जीव-जंतु (Fauna of Mountains)

पर्वतों में स्थित गहरे वन, बहती नदियाँ, झीलें, घास के मैदान और गुफाएँ विविध प्रकार के जीवों को आवास प्रदान करते हैं। गद्यांश के अनुसार प्रमुख पर्वतीय जीव निम्नलिखित हैं:

  • पक्षी: गोल्डन ईगल (Golden eagle), पेरेग्रिन फाल्कन (Peregrine falcon)।

  • स्तनधारी व अन्य जीव: हिमालयन ताहर (Himalayan tahr), माउंटेन हेयर/पर्वतीय खरगोश (Mountain hare), याक (Yak), आईबेक्स (Ibex), कनाडाई लिंक्स (Canadian lynx), ग्रे फॉक्स/धूसर लोमड़ी (Grey fox), तेंदुआ/हिम तेंदुआ (Leopard/Snow leopard), और ब्लैक बियर/काला भालू (Black bear)।

गंगा नदी प्रणाली (Ganga River System)

गद्यांश के ‘डोंट मिस आउट’ (Don’t Miss Out) खंड के अनुसार गंगा नदी की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • परिचय: यह हिमालय से निकलने वाली भारत की सबसे बड़ी नदी है। अंग्रेजी में इसे ‘Ganges’ भी कहा जाता है।

  • लंबाई: इसकी कुल लंबाई लगभग 2,500 किलोमीटर है।

  • सहायक नदियाँ (Tributaries): गंगा नदी की अनेक सहायक नदियाँ हैं, जिन्हें उनकी उत्पत्ति के आधार पर दो भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है:

सहायक नदीउत्पत्ति का स्रोत/क्षेत्र
यमुना (Yamuna)हिमालय पर्वतमाला (Himalayas)
घाघरा (Ghagara) 
सोन या सोने (Son/Sone)गंगा के मैदानी भाग के दक्षिण में स्थित विंध्य श्रेणी (Vindhya Range)

सांस्कृतिक व ऐतिहासिक संदर्भ: कालिदास की रचना

  • कवि परिचय: प्राचीन भारत के महानतम कवि कालिदास (जो कम से कम 1,500 वर्ष पूर्व रहते थे) ने अपने महाकाव्य ‘कुमारसंभवम्’ (Kumārasambhava) की शुरुआत हिमालय की स्तुति से की है।

  • काव्य में हिमालय का वर्णन:

    • हिमालय को ‘पर्वतों का राजा’ (Lord of mountains) और एक जीवित देवता के समान माना गया है, जो पृथ्वी को मापता हुआ पश्चिमी समुद्र से लेकर पूर्वी समुद्र तक फैला हुआ है।

    • हिमालय से नीचे आने वाली हवाएं बहती हुई गंगा नदी की फुहारों (Spray) को अपने साथ लाती हैं, देवदार के वृक्षों को झकझोरती हैं, मोरों के पंखों को खोलती हैं और शिकार के बाद पर्वतीय लोगों को शीतलता प्रदान करती हैं।

पर्वतीय क्षेत्र में जीवन (Life in the Mountains)

आर्थिक गतिविधियाँ एवं आजीविका (Economic Activities)

  • कृषि की चुनौतियाँ: पर्वतीय भूभाग आमतौर पर विषम/उबड़-खाबड़ (Rugged/rough) होते हैं और इनकी ढाल तीव्र (Steep slopes) होती है। इसके कारण सामान्य कृषि केवल कुछ घाटियों (Valleys) में ही संभव हो पाती है।

  • सोपान कृषि / सीढ़ीदार खेती (Terrace Farming): ढालों पर सीढ़ियों के आकार के खेत काटकर कृषि की जाती है, जिसे सोपान या सीढ़ीदार कृषि कहा जाता है।

  • पशुपालन (Herding): विश्व के कई पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि की तुलना में पशुपालन को अधिक प्राथमिकता या पसंदीदा व्यवसाय माना जाता है।

  • पर्यटन (Tourism): पर्वतों में रहने वाले लोगों की आय का यह एक मुख्य स्रोत है। पर्वतों की शुद्ध हवा (Crisp air) और प्राकृतिक सुंदरता पर्यटकों को आकर्षित करती है।

    • साहसिक खेल (Sports): स्कीइंग (Skiing), हाइकिंग (Hiking), पर्वतारोहण (Mountaineering) और पैराग्लाइडिंग (Paragliding)।

    • धार्मिक पर्यटन: सदियों से लोग इन उच्च प्रदेशों में स्थित पवित्र स्थलों की तीर्थयात्रा (Pilgrimages) के लिए आते रहे हैं।

पर्यावरणीय चिंता: आगंतुकों या पर्यटकों के अत्यधिक आगमन (Excessive inflow/uncontrolled tourism) के कारण पर्वतों का संवेदनशील पर्यावरण (Fragile mountain environment) भारी दबाव में आ जाता है। पर्यटन और पर्यावरण के बीच सही संतुलन बनाना अक्सर एक कठिन चुनौती होती है।

पर्वतीय क्षेत्र की प्राकृतिक व मानव-निर्मित चुनौतियाँ

पर्वतों में रहने वाले लोगों को कई गंभीर प्राकृतिक आपदाओं और प्रतिकूलताओं का सामना करना पड़ता है। मुख्य चुनौतियाँ इस प्रकार हैं:

  • भूस्खलन (Landslide): किसी पर्वत के ढाल से मिट्टी या चट्टानों के एक बहुत बड़े हिस्से का अचानक ढह जाना।

  • मूसलाधार वर्षा / बादल फटना (Cloudburst): अचानक होने वाली अत्यधिक तीव्र और हिंसक वर्षा (Rainstorm)।

  • आकस्मिक बाढ़ (Flash Flood): अचानक आने वाली स्थानीय बाढ़, जो अक्सर बादल फटने (Cloudburst) के कारण होती है।

  • हिमस्खलन (Avalanche): पर्वतीय ढाल से बर्फ, हिम या चट्टानों का अचानक नीचे गिरना। यह अक्सर तब होता है जब बर्फ पिघलना शुरू होती है।

  • अन्य चुनौतियाँ: भारी बर्फबारी (Heavy snowfall), अत्यधिक ठंडा मौसम (Cold weather) और अनियंत्रित पर्यटन (Uncontrolled tourism)।

सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्व (Sacred Mountains)

विश्व भर के कई पारंपरिक समुदाय पर्वतों को पवित्र स्थान मानते हैं और उनकी पूजा करते हैं।

  • माउंट एवरेस्ट (ऊंचाई: 8,848 मीटर): विश्व के इस सर्वोच्च पर्वत के विभिन्न नाम और धार्मिक महत्व हैं:

    • तिब्बती नाम: इसे ‘चोमोलुंगमा’ (Chomolungma) कहा जाता है, जिसका अर्थ है “विश्व की देवी माँ” (Mother Goddess of the World)। तिब्बती लोग इसी रूप में इसकी पूजा करते हैं।

    • नेपाली नाम: इसे ‘सगरमाथा’ (Sagarmatha) कहा जाता है, जिसका अर्थ है “आकाश की देवी” (Goddess of the Sky)।

  • माउंट कैलाश (तिब्बत): इस पर्वत को चार प्रमुख धर्मों के अनुयायियों द्वारा अत्यंत पवित्र माना जाता है:

    1. हिंदू धर्म (Hinduism)

    2. बौद्ध धर्म (Buddhism)

    3. जैन धर्म (Jainism)

    4. बोन धर्म (Bon – एक प्राचीन तिब्बती धर्म)

  • पर्वत शिखरों के प्रति ऐसी ही श्रद्धा और सम्मान भारत के अन्य हिस्सों तथा पूरे विश्व में पाया जाता है।

प्रमुख भारतीय पर्वतारोही: विशेष उपलब्धियाँ 

क. बछेंद्री पाल (Bachendri Pal)

  • महत्वपूर्ण तथ्य: इन्होंने कम उम्र से ही पर्वतारोहण शुरू किया और कई महिला पर्वतारोहण अभियानों का नेतृत्व किया।

  • रिकॉर्ड: वर्ष 1984 में माउंट एवरेस्ट पर फतह करने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।

  • पुरस्कार: इन्हें 1984 में पद्म श्री और वर्ष 2019 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।

ख. अरुणिमा सिन्हा (Arunima Sinha)

  • महत्वपूर्ण तथ्य: 22 वर्ष की आयु में एक दुर्घटना में इन्होंने अपना एक पैर खो दिया था। बछेंद्री पाल के प्रोत्साहन और प्रशिक्षण से इन्होंने वर्ष 2013 में माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई की।

  • रिकॉर्ड: इसके बाद इन्होंने अंटार्कटिका के माउंट विंसन (Mount Vinson) सहित दुनिया के प्रत्येक महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी पर सफलतापूर्वक चढ़ाई पूरी की।

  • पुरस्कार: इन्हें वर्ष 2015 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया।

पारिभाषिक शब्दावली

  • घाटी (Valley): पहाड़ियों या पर्वतों के बीच का निचला क्षेत्र, जिससे होकर अक्सर कोई नदी या जलधारा बहती है।

पठार (Plateaus)

 भौतिक विशेषताएँ एवं वर्गीकरण

  • परिभाषा: पठार वह भू-आकृति है जो अपने आस-पास की भूमि से ऊपर उठी होती है और जिसका ऊपरी भाग न्यूनाधिक (कम या अधिक) समतल (Flat surface) होता है। इसके कुछ किनारे अक्सर तीव्र ढाल (Steep slopes) वाले होते हैं।

  • वर्गीकरण: पृथ्वी के इतिहास के संदर्भ में पर्वतों की तरह पठार भी युवा (Young) या प्राचीन (Old) हो सकते हैं।

  • ऊंचाई की विविधता: पठारों की ऊंचाई कुछ सौ मीटर से लेकर कई हजार मीटर तक भिन्न हो सकती है।

विश्व एवं भारत के प्रमुख पठार

क. तिब्बत का पठार (Tibetan Plateau)

  • विशेषता: यह विश्व का सबसे बड़ा और सबसे ऊंचा पठार है।

  • औसत ऊंचाई: इसकी औसत ऊंचाई 4,500 मीटर है, जिसके कारण इसे ‘विश्व की छत’ (Roof of the World) का उपनाम दिया गया है।

  • विस्तार: पूर्व से पश्चिम तक इसकी लंबाई लगभग 2,500 किलोमीटर है (यह दूरी भारत में चंडीगढ़ से कन्याकुमारी के बीच की दूरी के बराबर है)।

ख. दक्कन का पठार (Deccan Plateau)

  • विशेषता: यह मध्य और दक्षिण भारत में स्थित विश्व के सबसे पुराने पठारों में से एक है।

  • निर्माण: इसका निर्माण लाखों वर्ष पूर्व ज्वालामुखी क्रिया (Volcanic activity) के माध्यम से हुआ था।

आर्थिक महत्व: खनिजों के भंडार (Storehouses of Minerals)

  • खनिज संपदा: पठारों में समृद्ध खनिज निक्षेप (Mineral deposits) पाए जाते हैं, इसी कारण इन्हें ‘खनिजों का भंडारगृह’ (Storehouses of minerals) कहा जाता है।

  • खनन कार्य: प्रचुर खनिजों की उपलब्धता के कारण खनन (Mining) पठारी क्षेत्रों की एक प्रमुख आर्थिक गतिविधि है। विश्व की कई सबसे बड़ी खदानें पठारों पर ही स्थित हैं।

  • वैश्विक एवं भारतीय उदाहरण:

    • पूर्वी अफ्रीकी पठार (East African Plateau): यह पठार सोने (Gold) और हीरे (Diamond) के खनन के लिए विश्व प्रसिद्ध है।

    • छोटा नागपुर पठार (भारत): यहाँ लोहा (Iron), कोयला (Coal) और मैंगनीज (Manganese) के विशाल भंडार पाए जाते हैं।

पठारी पर्यावरण एवं कृषि (Plateau Environment & Farming)

  • विविधता व उर्वरता: वैश्विक स्तर पर पठारी पर्यावरण अत्यधिक विविध है। अधिकांश पठारों की मिट्टी चट्टानी (Rocky soil) होती है, जो इन्हें मैदानों की तुलना में कम उपजाऊ बनाती है। इसलिए ये क्षेत्र कृषि के लिए कम अनुकूल होते हैं।

  • अपवाद (लावा पठार): इसका अपवाद लावा पठार (Lava plateaus) हैं, जिनका निर्माण ज्वालामुखी क्रिया से होता है। इन पठारों पर समृद्ध काली मिट्टी (Rich black soil) पाई जाती है जो कृषि के लिए उपजाऊ होती है।

प्रमुख जलप्रपात (Spectacular Waterfalls)

पठारी क्षेत्रों की तीव्र ढाल के कारण यहाँ कई शानदार जलप्रपात स्थित हैं। 

जलप्रपात (Waterfall)नदी (River)पठार / भौगोलिक अवस्थिति
विक्टोरिया प्रपात (Victoria Falls)जाम्बेजी नदी (Zambezi River)दक्षिणी अफ्रीका (Southern Africa)
हुंडरू प्रपात (Hundru Falls)सुवर्णरेखा नदी (Subarnarekha River)छोटा नागपुर पठार (Chhota Nagpur Plateau) – भारत
जोग प्रपात (Jog Falls)शरावती नदी (Sharavati River)पश्चिमी घाट (Western Ghats) – भारत
नोहकलिकाई प्रपात (Nohkalikai Falls)चेरापूंजी पठार (मेघालय) – भारत; इसकी ऊंचाई 340 मीटर है।

मैदान (Plains)

भौतिक विशेषताएँ

  • परिभाषा: मैदान वे भू-आकृतियाँ हैं जिनकी सतह व्यापक रूप से समतल या मंद तरंगित (Gently undulating) होती है।

  • भौगोलिक बनावट: मैदानी भागों में कोई बड़ी पहाड़ियाँ या गहरी घाटियाँ नहीं पाई जाती हैं।

  • ऊंचाई: ये सामान्यतः समुद्र तल (Sea level) से 300 मीटर से अधिक ऊंचे नहीं होते हैं।

  • समुद्र तल (Sea Level): महासागरों की सतह के औसत स्तर को समुद्र तल या ‘माध्य समुद्र तल’ (Mean sea level) कहा जाता है।

बाढ़ के मैदान (Floodplains) और उनकी उर्वरता

  • निर्माण प्रक्रिया: पर्वतीय श्रृंखलाओं से निकलने वाली नदियाँ अपने साथ चट्टानों के कण, रेत और गाद (Silt) एकत्र करती हैं, जिन्हें ‘अवसाद’ (Sediments) कहा जाता है। नदियाँ इन अवसादों को मैदानी भागों में लाकर जमा (Deposit) कर देती हैं, जिससे ‘बाढ़ के मैदानों’ का निर्माण होता है।

  • कृषिगत महत्व: अवसादों के जमाव से यहाँ की मिट्टी अत्यधिक उपजाऊ (Very fertile) हो जाती है, जो हर प्रकार की फसलों को उगाने के लिए आदर्श है। अतः कृषि इस भू-आकृति का एक मुख्य आर्थिक व्यवसाय है। यहाँ विविध प्रकार के वनस्पति और जीव-जंतु भी पाए जाते हैं।

मैदानों में जीवन और आजीविका: गंगा का मैदान

  • ऐतिहासिक संदर्भ: हजारों वर्ष पूर्व विश्व की प्रथम सभ्यताओं का विकास उपजाऊ मैदानों में नदियों के किनारे ही हुआ था। वर्तमान में भी विश्व की जनसंख्या का एक बड़ा भाग मैदानों में निवास करता है।

  • जनसंख्या का दबाव: भारत की कुल जनसंख्या का एक-चौथाई से अधिक हिस्सा, यानी लगभग 40 करोड़ लोग, भारत के गंगा के मैदान (Gangetic plain) में रहते हैं।

प्रमुख आर्थिक गतिविधियाँ और फसलें:

  • व्यवसाय: इस क्षेत्र के लोगों के मुख्य व्यवसायों में नदी मत्स्य पालन (River fishing) और कृषि शामिल हैं।

  • खाद्यान्न फसलें (Food Crops): धान (Rice), गेहूं, मक्का, जौ और बाजरा/मोटे अनाज (Millets)।

  • रेशेदार फसलें (Fibre Crops): कपास (Cotton), जूट और पटसन (Hemp)।

कृषि पद्धतियाँ और उभरती चुनौतियाँ :

  • पारंपरिक कृषि: पारंपरिक रूप से यहाँ की कृषि मुख्य रूप से वर्षा-आधारित (Rainfed) रही है।

  • सिंचाई की ओर झुकाव: हाल के दशकों में कृषि सिंचाई (Irrigation) पर निर्भर हो गई है, जहाँ नहरों के तंत्र या भूजल (Groundwater) को पंप करके खेतों तक पानी पहुँचाया जाता है।

  • पर्यावरणीय एवं सामाजिक समस्याएँ:

    1. भूजल का दोहन: सिंचाई ने कृषि उत्पादन तो बढ़ाया है, लेकिन इसके कारण भूजल के स्तर में भारी कमी (Depletion) आई है, जो भविष्य की कृषि के लिए एक बड़ी चुनौती है।

    2. उच्च जनसंख्या का दबाव।

    3. प्रदूषण (Pollution) की गंभीर समस्या।

नदियों का सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व

  • सांस्कृतिक मूल्य: वैश्विक स्तर पर नदियाँ अगाध सांस्कृतिक मूल्य रखती हैं। विभिन्न समुदाय नदी के उद्गम स्थल (Source) और दो या दो से अधिक नदियों के संगम स्थल (Confluence) को अत्यंत पवित्र मानते हैं। भारत में ऐसे स्थानों पर अनेक त्योहार, समारोह और अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं।

  • आर्थिक व परिवहन महत्व: मैदानों का ढाल मंद होने के कारण नदी नौवहन (River navigation) आसान होता है, जो आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देता है। प्राचीन काल में यात्रा के लिए नदियों का व्यापक उपयोग होता था, और आज भी गंगा के कई हिस्सों में लोग आवागमन के लिए नावों का उपयोग करना पसंद करते हैं।

  •  

मरुस्थल (Deserts): एक विशिष्ट भू-आकृति

पृथ्वी की सतह अत्यंत जटिल है, जिसके कारण विशेषज्ञ कुछ अन्य भू-आकृतियों को भी परिभाषित करते हैं, जिनमें से एक ‘मरुस्थल’ है।

  • परिभाषा: मरुस्थल बहुत बड़े और शुष्क क्षेत्र होते हैं जहाँ वर्षण (Precipitation) अत्यंत नाममात्र का होता है। यहाँ की वनस्पति और जीव-जंतु भी अद्वितीय होते हैं।

NCERT Notes class 6 Social Science (Geography) Chapter 3: Landforms and Life
  • वर्गीकरण एवं वैश्विक उदाहरण:
मरुस्थल का प्रकारप्रमुख उदाहरणभौगोलिक अवस्थिति
गर्म मरुस्थल (Hot Deserts)सहारा मरुस्थल थार मरुस्थलअफ्रीका भारतीय उपमहाद्वीप का उत्तर-पश्चिम भाग
ठंडे मरुस्थल (Cold Deserts)गोबी मरुस्थल (नोट: कुछ विशेषज्ञ अंटार्कटिका महाद्वीप को भी मरुस्थल मानते हैं)एशिया
  • मानवीय अनुकूलन और सुदृढ़ता (Resilience): कठिन जीवन स्थितियों के बावजूद मनुष्यों ने अधिकांश मरुस्थलों के अनुकूल खुद को ढाला है। भारत में थार मरुस्थल में रहने वाले या वहां से प्रवास करने वाले समुदायों के पास मरुस्थल से जुड़ी लोक गीतों और लोक कथाओं जैसी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराएं हैं।

  • निष्कर्ष: विभिन्न भू-आकृतियों को मनुष्यों द्वारा अपना आवास बनाना हमारी अनुकूलनशीलता और सुदृढ़ता/लचीलेपन (Adaptability and resilience) का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

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