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23 September 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf

23 September 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत जल संसाधनों के सतत उपयोग हेतु 9वें भारत अंतर्राष्ट्रीय जल सप्ताह (IIWW) 2026, जलवायु परिवर्तन के दौर में जल सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले जलवायु-सहनशील जल प्रबंधन, भारत को वैश्विक फिल्म निर्माण हब बनाने हेतु लांच किए गए इंडिया सिने हब (एकीकृत डिजिटल मंच), भारतीय सिनेमा में उत्कृष्ट योगदान को सम्मानित करने वाले 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और दादासाहेबा फाल्के सम्मान, एक-सींग वाले गैंडों के संरक्षण के लिए विश्व गैंडा दिवस और प्रोजेक्ट राइनो की शुरुआत, तथा भारत और जापान के बीच सामरिक व वायु रक्षा सहयोग को सुदृढ़ करने वाले एक्सरसाइज वीर गार्जियन 2026 (भारत-जापान संयुक्त वायु सेना अभ्यास) का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। 9वें भारत अंतर्राष्ट्रीय जल सप्ताह (IIWW) 2026: जलवायु-सहनशील जल प्रबंधन चर्चा में क्यों? भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने भारत मंडपम, नई दिल्ली में 9वें भारत अंतर्राष्ट्रीय जल सप्ताह (IIWW) 2026 का उद्घाटन किया। जल शक्ति मंत्रालय द्वारा 22 से 26 सितंबर 2026 तक आयोजित इस 5 दिवसीय सम्मेलन का मुख्य विषय (Theme) “जलवायु-सहनशील जल प्रबंधन” (Climate Resilient Water Management) रखा गया है। मुख्य बिंदु: रणनीतिक ढांचा और प्रमुख पहलें 1. नई तकनीकी पहलें 2. भारत में जल संसाधन की स्थिति और चुनौतियां 3. अंतर-राज्यीय सहयोग और जन भागीदारी प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य घटक / बिंदु महत्वपूर्ण तथ्य आयोजन तिथि व स्थान 22-26 सितंबर 2026, भारत मंडपम (नई दिल्ली) आयोजक मंत्रालय जल शक्ति मंत्रालय (9वां संस्करण) मुख्य थीम (Theme) Climate Resilient Water Management लॉन्च की गई पहलें SURM (Sustainable Urban River Management) और AI/ML Integrated Reservoir Sediment Management प्रमुख परियोजना मॉडल किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना (6 राज्यों के बीच अंतर-राज्यीय समझौता) जल सुरक्षा और जलवायु-सहनशील जल प्रबंधन (Climate-Resilient Water Management) चर्चा में क्यों? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल द्वारा लिखित एक लेख को सोशल मीडिया (X) पर साझा किया। इस लेख में भारत द्वारा जल सुरक्षा (Water Security) और जलवायु-सहनशील जल प्रबंधन हासिल करने के लिए चलाए जा रहे राष्ट्रीय अभियानों और रणनीतियों का विस्तृत खाका पेश किया गया है। मुख्य बिंदु: रणनीतिक स्तंभ और प्रमुख पहलें 1. जल सुरक्षा का मूल मंत्र 2. प्रमुख राष्ट्रीय जल मिशन प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य घटक / बिंदु महत्वपूर्ण तथ्य मूल अवधारणा Climate-Resilient Water Management (जलवायु-सहनशील जल प्रबंधन) मुख्य स्तंभ मजबूत तंत्र + वैज्ञानिक समाधान + जन भागीदारी (Jan Bhagidari) संबंधित प्रमुख मिशन जल जीवन मिशन (JJM) और नमामि गंगे कार्यक्रम प्रशासनिक नोडल निकाय जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार कार्यान्वयन स्तर केंद्र, राज्य और स्थानीय समुदायों का एकीकृत प्रयास इंडिया सिने हब: भारत में फिल्म निर्माण का एकीकृत डिजिटल मंच चर्चा में क्यों? सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने ‘इंडिया सिने हब’ (ICH) की प्रगति रिपोर्ट जारी की, जो देश-विदेश के निर्माताओं को शूटिंग की तमाम मंजूरियां एक ही जगह मुहैया कराता है। यह डिजिटल पोर्टल मल्टी-एजेंसियों के चक्कर काटने की मजबूरी खत्म कर कागजी प्रक्रियाओं, पुलिस क्लीयरेंस और फिल्म वीजा को बेहद सुलभ बना रहा है। हाल ही में इसके तहत ‘लाइव इवेंट्स डेवलपमेंट सेल’ (LEDC) को शामिल कर लाइव शो और कंसर्ट की अनुमतियों को भी सिंगल-विंडो सिस्टम से जोड़ दिया गया है। सरकार की इस पहल से भारत में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के साथ-साथ फिल्म पर्यटन और स्थानीय रोजगार को भारी बढ़ावा मिल रहा है। मुख्य बिंदु: नीतिगत ढांचा और मीडिया अर्थव्यवस्था 1. इंडिया सिने हब (ICH) की प्रमुख विशेषताएं 2. NFDC: एकीकृत नोडल संस्था 3. भारतीय फिल्म उद्योग और अर्थव्यवस्था 4. भारत के प्रमुख फिल्म सिटीज फिल्म सिटी स्थान क्षेत्रफल व विशेषताएं दादासाहेब फाल्के चित्रनगरी गोरेगांव, मुंबई (1977) 520 एकड़, 42 आउटडोर लोकेशन रामोजी फिल्म सिटी हैदराबाद (1996) 2,000 एकड़ (गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दुनिया का सबसे बड़ा स्टूडियो) नोएडा फिल्म सिटी नोएडा, उत्तर प्रदेश 100 एकड़, 16 स्टूडियो, 350 टीवी चैनल प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य घटक / बिंदु महत्वपूर्ण तथ्य पोर्टल नाम इंडिया सिने हब (ICH) नोडल एजेंसी राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (NFDC) NFDC स्थापना 1975 (सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत) विश्व की सबसे बड़ी फिल्म सिटी रामोजी फिल्म सिटी, हैदराबाद (2,000 एकड़) इंटरनेट उपभोक्ता (2026) 109.2 करोड़+ (डेटा दर: ₹7.51/GB) पुरस्कार विजेता राज्य मध्य प्रदेश (68वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट) 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और दादासाहेबा फाल्के सम्मान चर्चा में क्यों? भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने गुजरात के केवडिया (एकता नगर) में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी परिसर में 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान किए। इस भव्य समारोह में दिग्गज अभिनेता श्री अनंत नाग को वर्ष 2024 के प्रतिष्ठित दादासाहेबा फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मुख्य बिंदु: पुरस्कार, सामाजिक संदेश और प्रमुख सिफारिशें 1. दादासाहेबा फाल्के पुरस्कार 2024 2. प्रमुख पुरस्कृत फिल्में और उनका सामाजिक संदेश 3. राष्ट्रपति द्वारा दिए गए मुख्य संदेश व सिफारिशें प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य घटक / बिंदु महत्वपूर्ण तथ्य पुरस्कार संस्करण 72वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (सितंबर 2026) आयोजन स्थल एकता नगर (केवडिया), गुजरात – स्टैच्यू ऑफ यूनिटी दादासाहेबा फाल्के पुरस्कार 2024 अनंत नाग (भारतीय सिनेमा में योगदान) राष्ट्रीय एकता पर फिल्म आर्टिकल 370 जनजातीय सिनेमा ‘अंगेन’ (संथाली भाषा की सम्मानित फिल्म) नॉन-फीचर फिल्म भंगार विश्व गैंडा दिवस (World Rhino Day) और प्रोजेक्ट राइनो की शुरुआत चर्चा में क्यों? विश्व गैंडा दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक सींग वाले गैंडों के संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए ‘प्रोजेक्ट राइनो’ की औपचारिक शुरुआत की घोषणा की। यह नया राष्ट्रीय प्रोजेक्ट गैंडा-प्रभावित राज्यों को वित्तीय और तकनीकी सहायता देकर उनके प्राकृतिक आवास प्रबंधन, आनुवंशिक सुधार और आबादी के वैज्ञानिक अध्ययन को मजबूत बनाएगा। भारत में दुनिया की लगभग 80% गैंडा आबादी अकेले असम में निवास करती है, जहाँ काजीरंगा में शिकार पर रोक और यूपी के दुधवा में गैंडों का सफल पुनरावलोकन ऐतिहासिक सफलता साबित हुआ है। मुख्य बिंदु: रणनीतिक ढांचा और राज्यवार संरक्षण स्थिति 1. प्रोजेक्ट राइनो की मुख्य विशेषताएं 2. प्रमुख राज्यों में गैंडा संरक्षण की स्थिति प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य घटक / बिंदु महत्वपूर्ण तथ्य दिवस विश्व गैंडा दिवस (22 सितंबर) प्रजाति ग्रेटर वन-हॉर्न्ड राइनो IUCN रेड लिस्ट स्थिति भेदद्य (Vulnerable) वैश्विक आबादी का 80% असम (मुख्यतः काजीरंगा नेशनल पार्क) प्रमुख रेंज राज्य असम, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और बिहार एक्सरसाइज वीर गार्जियन 2026: भारत-जापान संयुक्त

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5 September 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf

5 September 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को मजबूत करने वाले ISRO द्वारा GSLV-F17 से EOS-05 उपग्रह का सफल प्रक्षेपण, स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए ‘डिस्ट्रिक्ट्स एज एक्सपोर्ट हब्स’ (DEH) पहल, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों में सुशासन और कानूनी अनुपालन सुगम बनाने वाले ‘कॉर्पोरेट मित्र’ पाठ्यक्रम, राजमार्गों के पर्यावरण-अनुकूल विकास हेतु NHAI का ‘ग्रीन हाईवे एक्सीलेंस अवार्ड्स 2026’, वेस्ट हीट रिकवरी में क्रांतिकारी खोज स्कैंडियम नाइट्राइड (ScN) में रिकॉर्ड थर्मोइलेक्ट्रिक प्रभाव, स्मार्ट ड्रग डिलीवरी व मेमोरी तकनीक में जाम्ड सिस्टम और माइक्रोगेल कण, जनजातीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तीकरण के लिए ‘पीएम-जनमन’ और ‘DA-JGUA’ पहलों की प्रगति समीक्षा, तथा बायोमेडिकल डिवाइसेस हेतु पेप्टाइड आधारित पीजोइलेक्ट्रिक बायोमटेरियल्स का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। ISRO की बड़ी उपलब्धि: GSLV-F17 द्वारा EOS-05 उपग्रह का सफल प्रक्षेपण चर्चा में क्यों? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ISRO के GSLV-F17/EOS-05 मिशन के सफल प्रक्षेपण की सराहना करते हुए इसे देश के लिए एक गर्व का क्षण बताया। यह प्रक्षेपण सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC-SHAR), श्रीहरिकोटा के द्वितीय लॉन्च पैड से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। मुख्य बिंदु: EOS-05 मिशन और अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र का विस्तार 1. जिओसिंक्रोनस कक्षा से पहला इमेजिंग सैटेलाइट 2. ISRO और भारतीय उद्योग की बढ़ती भागीदारी उपग्रह एवं प्रक्षेपण यान: घटक विवरण प्रक्षेपण यान (Launch Vehicle) GSLV-F17 (GSLV Mk-II की 19वीं उड़ान) पेलोड / उपग्रह EOS-05 (भार: लगभग 2,367 किग्रा) कक्षा (Orbit) सब-जिओसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (Sub-GTO) प्राथमिक उद्देश्य आपदा प्रबंधन, कृषि विश्लेषण और भू-भाग की निरंतर उच्च-गुणवत्ता इमेजिंग ‘डिस्ट्रिक्ट्स एज एक्सपोर्ट हब्स’ (DEH) पहल: भारत के हर जिले को निर्यात का केंद्र बनाने की रणनीति चर्चा में क्यों? वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (PIB दिल्ली) ने ‘Districts as Export Hubs (DEH)’ पहल की प्रगति और इसके कार्यान्वयन की रूपरेखा पर एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की। इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य देश के प्रत्येक जिले की अनूठी उत्पादन और सेवा क्षमताओं को पहचानकर उन्हें सीधे अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से जोड़ना है। यह पहल भारत के पारंपरिक निर्यात मॉडल को, जो केवल कुछ बड़े शहरों और बंदरगाहों तक सीमित था, बदलकर विकेंद्रीकृत और समावेशी विकास को बढ़ावा दे रही है। इसके तहत छोटे व्यापारियों, एमएसएमई (MSMEs), स्टार्टअप्स और महिला उद्यमियों को सीधे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ा जा रहा है। मुख्य बिंदु: जिला-स्तरीय निर्यात मॉडल और इसका क्रियान्वयन 1. ODOP से DEH तक का सफर 2. तीन-स्तरीय संस्थागत संरचना 3. डिजिटलीकरण, अवसंरचना और क्षमता निर्माण प्रमुख जिला उत्पाद मैपिंग (DEH Product Mapping) जिला राज्य संभावित निर्यात उत्पाद साबरकांठा गुजरात सिरामिक एवं टाइल्स, आलू अरावली गुजरात खनिज, कृषि प्रसंस्करण, कांच एवं टाइल्स जलगाँव महाराष्ट्र जलगाँव केला, जलगाँव भरीत बैंगन आगर मालवा मध्य प्रदेश संतरा बस्तर छत्तीसगढ़ बस्तर आयरन क्राफ्ट, चावल, ज्वार, मक्का जामताड़ा झारखंड बांस शिल्प, काजू कॉर्पोरेट मित्र पाठ्यक्रम: MSME अनुपालन और क्षमता निर्माण के लिए नई पहल चर्चा में क्यों? कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय (Ministry of Corporate Affairs – MCA) के मार्गदर्शन में ICAI, ICSI और ICoAI द्वारा ‘कॉर्पोरेट मित्र पाठ्यक्रम’ के पहले बैच की औपचारिक शुरुआत की गई। इस योजना के तहत कॉर्पोरेट मित्र लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (LMS) भी लॉन्च किया गया है, जिसके पहले बैच में कुल 2,879 शिक्षार्थियों (Learners) ने अपना पंजीकरण कराया है। इसका प्राथमिक उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए व्यावसायिक और नियामक अनुपालन को आसान और सुलभ बनाना है। मुख्य बिंदु: कॉर्पोरेट मित्र पहल की रूपरेखा और उद्देश्य 1. पृष्ठभूमि और बजटीय घोषणा 2. बहु-संस्थानीय सहयोग और तकनीकी साझेदारी 3. पाठ्यक्रम की संरचना और प्रशिक्षण मॉडल प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य घटक / बिंदु महत्वपूर्ण तथ्य पहल का नाम कॉर्पोरेट मित्र पाठ्यक्रम प्रथम बैच पंजीकरण 2,879 शिक्षार्थी (Learners) प्रशासनिक मंत्रालय कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय (Ministry of Corporate Affairs) बजटीय संदर्भ केंद्रीय बजट 2026-27 प्रशिक्षण अवधि 12 महीने (6 महीने अकादमिक + 6 महीने ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग) मुख्य लक्ष्य MSMEs के लिए अनुपालन (Compliance) को आसान बनाना और पैरा-प्रोफेसनल्स तैयार करना NHAI का ‘ग्रीन हाईवे एक्सीलेंस अवार्ड्स 2026’: राष्ट्रीय राजमार्गों पर पर्यावरण अनुकूल प्रथाओं को बढ़ावा चर्चा में क्यों? भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने ‘ग्रीन हाईवे एक्सीलेंस अवार्ड्स 2026’ के विजेताओं की घोषणा की। इस पुरस्कार का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर वृक्षारोपण और सौंदर्यकरण की सर्वोत्तम प्रथाओं को बढ़ावा देना है। यह पहल राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय स्थिरता को जोड़ने की NHAI की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इसके माध्यम से पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ राजमार्गों के निर्माण के लिए क्षेत्रीय कार्यालयों, ठेकेदारों, एनजीओ और निजी एजेंसियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। मुख्य बिंदु: पुरस्कार की श्रेणियां और मूल्यांकन ढांचा 1. पुरस्कार की प्रमुख श्रेणियां और विजेता NHAI द्वारा यह पुरस्कार तीन अलग-अलग श्रेणियों में प्रदान किए गए हैं: 2. नामांकन और मूल्यांकन प्रक्रिया प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य घटक / बिंदु महत्वपूर्ण तथ्य पुरस्कार का नाम ग्रीन हाईवे एक्सीलेंस अवार्ड्स 2026 आयोजक संस्था भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) स्थापना वर्ष वर्ष 2025 (हरित राजमार्ग नीति, 2015 के तहत) मूल्यांकन का मुख्य आधार पौधों की जीवित रहने की दर (Survival-rate Data) विशेष तकनीक/पार्क नागपुर में ऑक्सीजन बर्ड पार्क एवं लखनऊ में मियावाकी तकनीक पुरस्कार श्रेणियां एवेन्यू प्लांटेशन, मीडियन प्लांटेशन और लैंड पार्सल स्कैंडियम नाइट्राइड (ScN) में रिकॉर्ड थर्मोइलेक्ट्रिक प्रभाव: ताप से बिजली बनाने की सदी पुरानी सीमा टूटी चर्चा में क्यों? जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च (JNCASR), सिडनी विश्वविद्यालय और भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) बैंगलोर के वैज्ञानिकों की एक संयुक्त टीम ने एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की। उन्होंने एक विशेष क्रिस्टलीय सेमीकंडक्टर विकसित किया है जो तापमान के अंतर को सामान्य से लगभग 1,000 गुना अधिक विद्युत वोल्टेज में बदल देता है। यह खोज ठोस पदार्थों में तापीय ऊर्जा से बिजली बनाने (Seebeck Effect) की सदी पुरानी भौतिक सीमा को तोड़ती है। मुख्य बिंदु: खोज का विवरण, सीबेक प्रभाव और व्यावहारिक अनुप्रयोग 1. सीबेक प्रभाव और ऐतिहासिक सीमा का टूटना 2. सामग्री और निर्माण तकनीक (HDHC ScN) 3. प्रोटोटाइप सेंसर और भविष्य के अनुप्रयोग जाम्ड सिस्टम और माइक्रोगेल कण: तापीय आघात से मेमोरी इरेज़र और ड्रग डिलीवरी में नया मोड़ चर्चा में क्यों? रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (RRI), बैंगलोर के वैज्ञानिकों ने जाम्ड सिस्टम्स में संरचनात्मक पुनर्प्राप्ति पर एक महत्वपूर्ण अध्ययन प्रकाशित किया। उन्होंने साबित किया है कि ग्लास जैसे ठोस पदार्थों को अचानक तापीय आघात देकर उनके अंदर

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31 July 2026 The Hindu Notes In Hindi Pdf

’31 July 2026 The Hindu Notes In Hindi PDF’ के इस अंक में PM CARES Fund की पारदर्शिता, पर्यावरण संरक्षण से जुड़े बायोफार्मास्यूटिकल वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट सिस्टम, मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) अधिनियम 2023 के प्रावधानों, आर्कटिक काउंसिल की भू-राजनीति, भारत की ‘SHANTI’ पहल के तहत बंगाल की खाड़ी के रणनीतिक महत्व, तथा जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती बादल फटने (Cloudburst) की घटनाओं का विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। PM CARES Fund परिचय एवं पृष्ठभूमि   संरचना एवं नेतृत्व (Structure & Governance) वित्तीय डेटा और आँकड़े (Financial Data & Statistics – FY 2022-23) आरंभिक और अंतिम ऑडिट रिपोर्ट (जो PM CARES वेबसाइट पर उपलब्ध अंतिम डेटा है) के अनुसार: कर लाभ एवं छूट (Tax Benefits & Exemptions) उपयोग (Utilization) प्रमुख चिंताएं, मुद्दे और चुनौतियाँ (Key Concerns & Transparency Issues) शोधकर्ताओं ने बायोफार्मास्युटिकल वेस्टवॉटर के ट्रीटमेंट के लिए कम ऊर्जा वाला सिस्टम विकसित किया संदर्भ   अपशिष्ट जल की चुनौतियाँ (Challenges in Biopharmaceutical Wastewater) बायोफार्मास्युटिकल किण्वन अपशिष्ट जल (Biopharmaceutical fermentation wastewater) को उपचारित करना सबसे कठिन औद्योगिक अपशिष्टों में माना जाता है: एकीकृत 3-चरणीय उपचार प्रणाली (Integrated Three-Stage Treatment System) चुनौतियों से निपटने के लिए विकसित की गई प्रणाली: CEC नियुक्ति अधिनियम और सुप्रीम कोर्ट सुनवाई G.S. Paper-2: राजव्यवस्था परिचय एवं संदर्भ   कानूनी और वैधानिक पृष्ठभूमि (Legal & Constitutional Background) दोनों पक्षों के मुख्य तर्क (Key Arguments) संसदीय समिति द्वारा पोलर और आर्कटिक मामलों के लिए एक समर्पित अधिकारी नियुक्त करने की मांग परिचय एवं संदर्भ (Introduction & Context) समिति की प्रमुख सिफारिशें एवं सुझाव (Key Recommendations & Suggestions) 1. समर्पित पोलर/आर्कटिक मामलों का राजदूत और डेस्क (Dedicated Ambassador & Desk) 2. आर्कटिक काउंसिल में सदस्यता का दर्जा बढ़ाना (Upgradation of Status) भारत के लिए आर्कटिक और ध्रुवीय नीति का महत्व (Importance for India)                                                        आर्कटिक काउंसिल (Arctic Council) संरचना एवं सदस्य देश मुख्य कार्य एवं उद्देश्य भारत के लिए ‘SHANTI’ पहल के आधार के तौर पर बंगाल की खाड़ी परिचय (Introduction) बंगाल की खाड़ी का सामरिक महत्व (Centrality of the Bay of Bengal) भारत की समुद्री सुरक्षा का क्रमिक विकास : तीन चरण- पहल (Initiative) वर्ष उद्देश्य एवं प्रकृति SAGAR (Security and Growth for All in the Region) 2015 यह विकास में समानता का दृष्टिकोण प्रदान करने वाला इरादे का बयान (Statement of Intent) था। MAHASAGAR 2025 इसने व्यापक इंडो-पैसिफिक और ग्लोबल साउथ में सुरक्षा की परस्पर निर्भरता को पहचानते हुए सुरक्षा दायरे का विस्तार किया । SHANTI 2026 यह सहयोग के लिए नियमों और मानकों को तय करता है, जो सुरक्षा को प्रतिस्पर्धा से मांग-संचालित सहयोग में बदलता है। बंगाल की खाड़ी में सहयोग की आवश्यकता और चुनौतियाँ सिद्धांत से व्यवहार तक (Principles to Practice) निष्कर्ष (Conclusion) बादल फटना (Cloudburst) बादल फटना क्या है? (What is a Cloudburst?) बादल फटना कैसे बनता है? (Formation Mechanism) भारत में इसकी स्थिति और बारंबारता (Frequency in India) क्या ‘क्लाउडबर्स्ट’ लेबल जवाबदेही को धुंधला करता है? (Accountability Issue) पूर्वानुमान में कठिनाइयाँ (Forecasting Challenges) निष्कर्ष (Conclusion)

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India: Origin of Indian Territory for UPSC in Hindi

भारत – भारतीय क्षेत्र का उद्गम प्राचीन काल की सांस्कृतिक चेतना से लेकर आधुनिक संप्रभु राष्ट्र बनने तक के ऐतिहासिक और भू-राजनीतिक विकास का एक अनूठा उदाहरण है। औपनिवेशिक काल के खंडित राजनीतिक मानचित्र से मुक्त होकर, स्वतंत्रता के समय मौजूद 560 से अधिक रियासतों के भारत संघ में ऐतिहासिक विलय और मजबूत लौह संकल्प के साथ, इस महान देश ने अपनी भौगोलिक अखंडता को पुनः प्राप्त किया। भारतीय संविधान के भाग-1 और ऐतिहासिक राज्यों के पुनर्गठन अधिनियमों के माध्यम से क्रमिक रूप से विकसित होता यह क्षेत्र, उत्तर में जम्मू-कश्मीर व लद्दाख से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी और सुदूर द्वीपों तक एक सुदृढ़ प्रशासनिक ताने-बाने में बंधा है। भारतीय भू-भाग की उत्पत्ति (Origin of Indian Territory) महाद्वीपीय विस्थापन और विभाजन (Continental Drift) क्रैटॉन और प्राचीन वलित-संरचनाएँ पश्चिमी घाट और दक्कन ट्रैप का निर्माण यूरेशियाई प्लेट से टक्कर और हिमालय की उत्पत्ति हिमालय की विभिन्न श्रेणियों की उत्पत्ति का कालक्रम निम्नवत है: विशाल मैदानों का निर्माण NCERT Class 6, Chapter-2 यहाँ पढ़ें;-

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India: Geological Structure for UPSC in Hindi

दक्षिण एशिया के केंद्र में स्थित भारत – भूवैज्ञानिक संरचना (India: Geological Structure) भारतवर्ष प्राचीन काल की भूवैज्ञानिक उथल-पुथल से लेकर आधुनिक स्थलाकृतियों के निर्माण तक के क्रमिक और जटिल विवर्तनिक (Tectonic) विकास का एक अनूठा उदाहरण है। प्रागैतिहासिक काल के पैंजिया के विखंडन और गोंदवानालैंड के उत्तरमुखी प्रवाह के साथ, इस महान भूभाग ने प्राचीनतम स्थिर प्रायद्वीपीय पठार, नवीन वलित हिमालय पर्वत श्रेणियों और विशाल सिंधु-गंगा-ब्रह्मपुत्र के मैदानी भागों के रूप में अपनी भौगोलिक अखंडता को प्राप्त किया। भारतीय भू-गर्भिक संरचना (India: Geological Structure) पृथ्वी के भू-गर्भिक इतिहास को 5 प्रमुख कल्पों (ERA) में विभाजित किया गया है। ये कल्प पुनः क्रमिक रूप से युगों (EPOCH) में व्यवस्थित किये गये हैं। प्रत्येक युग पुनः कई उपविभागों में, जिन्हें शक (Period) कहा जाता है, में बंटा है। प्रत्येक शक की कालअवधि निर्धारित की गयी है तथा जीवों और वनस्पतियों के विकास पर भी प्रकाश डाला गया है। भूगर्भिक काल एवं घटनाएँ महाकल्प कल्प (Period) युग (Epoch) आयु/आधुनिक वर्ष पहले (Age/Years before Present) जीवन/मुख्य घटनाएँ (Life/Major events) नवीनतम नवजीवन (Cenozoic) आज से 6.5 करोड़ वर्ष पहले चतुर्थ (Quaternary) अभिनवअत्यंत नूतन 0 से 10,00010,000 से 20 लाख वर्ष आधुनिक मानवआदिमानव (Homo Sapiens)आरंभिक मनुष्य के पूर्वज तृतीयक (Tertiary) अतिनूतनअल्पनूतनअधिनूतनआदिनूतनपुरानूतन 20 लाख से 50 लाख50 लाख से 2.4 करोड़2.4 करोड़ से 3.7 करोड़3.7 करोड़ से 5.8 करोड़5.8 करोड़ से 6.5 करोड़ वनमानुष, फूल वाले पौधे और वृक्षमनुष्य से मिलता-जुलता वनमानुष जंतुस्तनपायीखरगोश (Rabbit)छोटे-स्तनपायी-चूहे आदि। मध्यजीवी (Mesozoic) 6.5 करोड़ से 24.5 करोड़ वर्ष पहले क्रिटेशियसजुरेसिकट्रियासिक 6.5 करोड़ से 14.4 करोड़14.4 करोड़ से 20.8 करोड़20.8 करोड़ से 24.5 करोड़ वर्ष डायनासोर का विलुप्त होना।डायनासोर का युगमेंढ़क व समुद्री कछुआ पुराजीव (24.5 करोड़ वर्ष से 57.0 करोड़ वर्ष पहले) पर्मियन कार्बोनिफेरस डेवोनियनप्रवालविद/सिलुरियन ऑडोविशियन कैम्ब्रियन 24.5 करोड़ से 28.6 करोड़ वर्ष 28.6 करोड़ से 36.0 करोड़ 36.0 करोड़ से 40.8 करोड़ वर्ष40.8 करोड़ से 43.8 करोड़ 43.8 से 50.5 करोड़ वर्ष 50.5 करोड़ से 57.0 करोड़ वर्ष रेंगने वाले जीवों की अधिकता, जलस्थलचरपहले रेंगने वाले जंतु, रीढ़ की हड्डी वाले पहले जीव।स्थल व जल पर रहने वाले जीवस्थल पर जीवन के प्रथम चिह्न-पौधेपहली मछलीस्थल पर कोई जीवन नहीं, जल में बिना रीढ़ की हड्डी वाले जीव प्राचीनतम प्री-कैम्ब्रियन (57 करोड़ से 4 अरब 80 करोड़ वर्ष पहले) 57 करोड़ से 2.50 अरब वर्ष2.5 अरब से 3.8 अरब वर्ष 3.8 अरब से 4.8 अरब वर्ष पहले 5 अरब वर्ष पहले5 अरब से 13.7 अरब वर्ष पहले12 अरब वर्ष पहले13.8 अरब वर्ष पहले भारतीय चट्टानों का वर्गीकरण भारत में सभी भू-वैज्ञानिक कालों में निर्मित चट्टानें पाई जाती हैं, इसलिए भारत की भू-गर्भीय संरचना विविधता पूर्ण है, इसी विविधता के फलस्वरूप प्राकृतिक संसाधनों (खनिज पदार्थ, वनस्पतियाँ इत्यादि) में भी विविधता पायी जाती है। भू-वैज्ञानिक इतिहास के आधार पर भारतीय भू-भाग की चट्टानों को उनके निर्माण क्रम (प्राचीन से नवीन) के अनुसार क्रमशः वर्गीकृत किया गया है: 1. आर्कियन क्रम की चट्टानें 2. धारवाड़ क्रम की चट्टानें 3. कुडप्पा क्रम की चट्टानें 4. विंध्यन क्रम की चट्टानें 5. गोंडवाना क्रम की चट्टानें 6. दक्कन ट्रैप 7. टर्शियरी क्रम की चट्टानें 8. क्वार्टनरी (नवजीव) क्रम की चट्टानें भारत में हिमयुग भारत में घटित ज्वालामुखी क्रियाएँ एवं क्षेत्र भारत में सर्वप्रथम ज्वालामुखी क्रिया धारवाड़ युग में हुई। उसके बाद कुडप्पा, विंध्यन, पैल्योजोइक, कार्बोनीफेरस, मेसोजोइक के अन्त तथा टर्शियरी के प्रारम्भ में हुई। भारत के छः क्षेत्रों में ज्वालामुखी क्रिया हुई— NCERT Class 6, Ch-4 यहाँ पढ़ें:-

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Drainage System of India Notes in Hindi Pdf

भारत का अपवाह तंत्र (Drainage System of India) देश की भौगोलिक संरचना, कृषि और अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा है। भारतीय नदी प्रणाली को मुख्य रूप से दो भागों में वर्गीकृत किया गया है—पहला, हिमालयी अपवाह तंत्र, जिसमें वर्षभर बहने वाली गंगा, सिंधु और ब्रह्मपुत्र जैसी विशाल नदियाँ शामिल हैं; और दूसरा, प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र, जिसमें गोदावरी, कृष्णा, नर्मदा और तापी जैसी मौसमी नदियाँ आती हैं। यह समृद्ध जल तंत्र न केवल सिंचाई और जल-विद्युत का मुख्य स्रोत है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान का भी आधार है। भारत का अपवाह तंत्र (Drainage System) मुख्य अवधारणाएँ एवं परिभाषाएँ नदियों का महत्त्व भारत जैसे उष्ण और मौसमी वर्षा वाले देश के लिए इन नदियों का विशेष महत्त्व है: अपवाह तंत्र को प्रभावित करने वाले कारक किसी भी क्षेत्र का अपवाह तंत्र व प्रतिरूप (Pattern) निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करता है: नदी द्रोणियों का वर्गीकरण भारत में 4000 से अधिक छोटी एवं बड़ी नदियाँ मिलती हैं। इनके क्षेत्र के आधार पर अंतर निम्न प्रकार है: आकार की दृष्टि से भारतीय नदियों की श्रेणियाँ श्रेणी अपवाह क्षेत्र (प्रति नदी बेसिन) नदी बेसिनों की संख्या देश के कुल जल में हिस्सेदारी बड़ी नदियाँ 20,000 वर्ग कि.मी. से अधिक 14 संयुक्त रूप से बड़ी और मध्यम नदियाँ मिलकर कुल जल मात्रा का 90% भाग संजोए रखती हैं। मध्यम नदियाँ 2,000 से 20,000 वर्ग कि.मी. 44 छोटी नदियाँ 2,000 वर्ग कि.मी. से कम अत्यधिक शेष हिस्सा उत्पत्ति के आधार पर भारतीय अपवाह तंत्र उत्पत्ति के आधार पर भारत के अपवाह तंत्र को दो मुख्य भागों में विभाजित किया जा सकता है: क. हिमालयी अपवाह तंत्र हिमालय क्षेत्र की नदियाँ बारहमासी होती हैं और इनका मुख्य स्रोत ग्लेशियर और मानसून दोनों हैं। मुख्य अपवाह प्रतिरूप (Patterns): हिमालयी नदियों की मुख्य विशेषताएँ: ख. प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र प्रायद्वीपीय भारत की नदियाँ मुख्य रूप से वर्षा पर निर्भर करती हैं और तुलनात्मक रूप से अधिक पुरानी हैं। मुख्य अपवाह प्रतिरूप (Patterns): प्रायद्वीपीय नदियों की मुख्य विशेषताएँ: भारत की विस्तृत जल-विभाजक प्रणाली संपूर्ण भारत की अपवाह प्रणाली को मुख्य रूप से अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और आंतरिक अपवाह क्षेत्रों में बाँटा गया है। आंतरिक अपवाह क्षेत्र: जब नदियाँ किसी सागर में न मिलकर आंतरिक भागों (मरूस्थल या झील) में ही विलुप्त हो जाती हैं। यह क्षेत्र मुख्य रूप से उत्तरी कश्मीर, दक्षिणी-पूर्वी असम और पश्चिमी राजस्थान तक सीमित है, जिसका कुल क्षेत्रफल लगभग 1.6 लाख वर्ग कि.मी. है। उदाहरण: लूनी, घग्गर, रूपनगढ़, मेढ़ा आदि। मुख्य जल-विभाजक रेखा (The Great Indian Watershed) भारत के कुल अपवाह का लगभग 3/4 भाग (75%) बंगाल की खाड़ी में गिरता है और शेष अरब सागर तथा आंतरिक तंत्र का हिस्सा है। इन दोनों बड़े अपवाह तंत्रों के बीच की विभाजक रेखा निम्नलिखित मार्ग का अनुसरण करती है: हिमालयी अपवाह तंत्र हिमालयी अपवाह तंत्र का अध्ययन, सुविधा की दृष्टि से तीन मुख्य नदी तंत्रों के माध्यम से किया जा सकता है। 1. सिन्धु नदी तंत्र – इसे विस्तार से पढने के लिए यहाँ Click करें 11. गंगा नदी तंत्र – इसे विस्तार से पढने के लिए यहाँ Click करें III. ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र – इसे विस्तार से पढने के लिए यहाँ Click करें प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र (Peninsular Drainage System) मुख्य विशेषताएँ एवं सामान्य परिचय प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र: विस्तार से पढने के लिए यहाँ click करें महत्वपूर्ण भौगोलिक परिभाषाएँ डेल्टा (Delta): नदी जब सागर या झील में गिरती है तो वेग में अत्यधिक कमी के कारण उसके मुहाने पर मलबा का निक्षेप होने लगता है, जिससे वहाँ विशेष प्रकार के स्थलरूप का निर्माण होता है, जिसे ‘डेल्टा’ कहते हैं। ज्यादातर बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियाँ ‘डेल्टा’ का निर्माण करती हैं। एश्चुअरी / ज्वार नदमुख (Estuary): नदी के जल में तीव्र प्रवाह के कारण जब उसके मुहाने पर साथ लाये गए मलबे का निक्षेप नहीं होता है, तथा नदी जल के साथ मलबा भी समुद्र में गिर जाता है, तो नदी का मुहाना उथला होने के बजाय गहरा हो जाता है। ऐसे गहरे मुहाने को ही ज्वारनदमुख कहा जाता है। ज्यादातर अरब सागर में गिरने वाली नदियाँ एश्चुअरी का निर्माण करती हैं।

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Peninsular Drainage System Notes in Hindi Pdf

प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र (Peninsular Drainage System) भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे प्राचीन और सुव्यवस्थित नदी तंत्र है, जो हिमालयी नदी प्रणाली से भी पुराना माना जाता है। इस तंत्र में मुख्य जल-विभाजक की भूमिका ‘पश्चिमी घाट’ निभाता है। यहाँ की नदियाँ मुख्य रूप से दो दिशाओं में बहती हैं—महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी जैसी बड़ी नदियाँ पूर्व की ओर बहकर बंगाल की खाड़ी में डेल्टा बनाती हैं, जबकि नर्मदा और तापी जैसी नदियाँ अपवादस्वरूप पश्चिम की ओर भ्रंश घाटी में बहती हुई अरब सागर में एश्चुअरी (ज्वारनदमुख) का निर्माण करती हैं। प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र (Peninsular Drainage System) मुख्य विशेषताएँ एवं सामान्य परिचय निकासी के आधार पर नदियों का वर्गीकरण प्रायद्वीपीय नदियों को हम सुविधा के लिए इनकी निकासी के आधार पर निम्नलिखित भागों में बाँटकर अध्ययन कर सकते हैं: बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली प्रमुख नदियाँ क. गोदावरी (दक्षिण की गंगा / वृद्ध गंगा) ख. महानदी ग. कृष्णा घ. पेन्नार ङ. कावेरी (दक्षिणी गंगा) अरब सागर, खम्भात की खाड़ी व कच्छ के रण में गिरने वाली नदियाँ क. नर्मदा ख. तापी (ताप्ती) ग. माही घ. साबरमती ङ. लूनी प्रायद्वीपीय भारत की अन्य छोटी नदियाँ प्रायद्वीपीय भारत में कई अन्य छोटी नदियाँ हैं। इनमें से कई नदियाँ तीव्र ढाल एवं जलप्रपात के कारण जल-विद्युत उत्पादन की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हैं (खासकर पश्चिमी तट पर बहने वाली नदियाँ)। पूर्वी तट की छोटी नदियाँ सिंचाई व नौवहन की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। अरब सागर / खम्भात की खाड़ी / कच्छ के रण में गिरने वाली लघु नदियाँ: बंगाल की खाड़ी / मन्नार की खाड़ी में गिरने वाली लघु नदियाँ:

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Brahmaputra River System Notes in Hindi Pdf

ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र (Brahmaputra River System) एशिया की सबसे बड़ी और गतिशील नदी प्रणालियों में से एक है, जो तिब्बत, भारत और बांग्लादेश के विशाल भू-भाग को कवर करता है। कैलाश पर्वत के निकट से ‘सांग्पो’ के रूप में निकलने वाली यह नदी भारत के अरुणाचल प्रदेश और असम से होकर बहती है, जहाँ इसे ‘ब्रह्मपुत्र’ नाम मिलता है। यह नदी तंत्र न केवल अपनी विशाल जल क्षमता और ‘माजुली’ जैसे विश्व के सबसे बड़े नदी द्वीप के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि पूर्वोत्तर भारत की कृषि, जैव विविधता और राष्ट्रीय जलमार्ग के लिए रीढ़ की हड्डी माना जाता है। ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र (Brahmaputra River System) ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र का विस्तार 5,80,000 वर्ग कि.मी. क्षेत्र पर है, जिसमें 2,58,008 वर्ग कि.मी. क्षेत्र भारत में स्थित है। ब्रह्मपुत्र (Brahmaputra) ब्रह्मपुत्र विश्व की बड़ी नदियों में से एक है। प्रवाह मार्ग एवं नाम परिवर्तन तट के आधार पर सहायक नदियाँ असम घाटी की 725 कि.मी. की यात्रा में इसमें निम्नलिखित सहायक नदियाँ आकर मिलती हैं: मुख्य विशेषताएँ एवं तटीय नगर

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Ganga River System Notes In Hindi Pdf

गंगा नदी तंत्र (Ganga River System) भारत का सबसे बड़ा और सांस्कृतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण अपवाह तंत्र है, जो देश के लगभग एक-चौथाई क्षेत्र को कवर करता है। उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में भागीरथी और अलकनंदा के मिलन से उत्पन्न होने वाली गंगा नदी, अपने सफर में यमुना, घाघरा, गंडक और कोसी जैसी विशाल सहायक नदियों को समेटती है। यह नदी तंत्र न केवल उत्तर भारत के विशाल मैदानों को ‘भारत का अन्न भंडार’ बनाता है, बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका, कृषि, जलविद्युत और धार्मिक आस्था का मुख्य आधार भी है। गंगा नदी तंत्र (Ganga River System) गंगा नदी तंत्र के अन्तर्गत हिमालय से निकलने वाली नदियाँ जैसे यमुना, रामगंगा, गोमती, घाघरा, गंडक, कोसी इत्यादि तथा प्रायद्वीपीय उच्च भूमि से निकलने वाली चंबल, केन, बेतवा, सिंध (यमुना में मिलती है) तथा सोन (दक्षिण से निकलने वाली गंगा की एकमात्र ‘उत्तरमुखी’ सहायक नदी) आदि नदियाँ आती हैं। मुख्य विशेषताएँ एवं विस्तार गंगा नदी का उद्गम और पंचप्रयाग की संरचना गंगा नदी वास्तव में ‘भागीरथी’ और ‘अलकनंदा’ नदियों का ही सम्मिलित रूप है। इसकी उद्गम कड़ियाँ इस प्रकार हैं: गंगा का प्रवाह मार्ग एवं डेल्टा तट के आधार पर सहायक नदियाँ बायें तट पर मिलने वाली नदियाँ (Left Bank Tributaries) दायें तट पर मिलने वाली नदियाँ (Right Bank Tributaries) रामगंगा, महानंदा, गोमती, घाघरा, गंडक, बागमती और कोसी यमुना, सोन, पुनपुन, दामोदर और रूप नारायण हिमालय से निकलने वाली मुख्य सहायक नदियाँ क. यमुना नदी ख. रामगंगा ग. काली नदी (काली गंगा / गारवाया चौका / शारदा) घ. घाघरा (करनाली या कोणिपाली) ङ. गण्डक च. कोसी या कौशिकी (बिहार का शोक) पठार से निकलने वाली गंगा की सहायक नदियाँ यद्यपि, गंगा में जल मुख्यतः उन सहायक नदियों से आता है जिनका उद्‌गम स्थान हिमालय में है, किन्तु कुछ जल पठारी नदियों से भी प्राप्त होता है। ये चम्बल, बेतवा, काली सिंध, केन और सोन हैं। क. चम्बल (पौराणिक नाम – चर्मावती/चर्मण्वती) ख. बेतवा या वेत्रवती ग. सोन या स्वर्ण नदी

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Indus River System Notes in Hindi Pdf

सिन्धु नदी तंत्र (Indus River System) विश्व के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण नदी बेसिन्स में से एक है, जो मुख्य रूप से पश्चिमी हिमालय क्षेत्र के जल को अरब सागर तक ले जाता है। इस तंत्र की मुख्य नदी सिन्धु है, जो तिब्बत में मानसरोवर झील के निकट से निकलती है। झेलम, चिनाब, रावी, व्यास और सतलज जैसी इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ (पंचनद) उत्तर-पश्चिम भारत की भूमि को उपजाऊ बनाती हैं। यह नदी तंत्र न केवल भूगोल बल्कि कृषि, व्यापार और भारत-पाकिस्तान जल समझौते की दृष्टि से भी अत्यधिक महत्वपूर्ण है। सिन्धु नदी तंत्र (Indus River System) इस क्रम की नदियाँ पश्चिमी हिमालय प्रदेश का जल अरब सागर में गिराती हैं। यह संसार की कुछ सबसे बड़ी नदी द्रोणियों में से एक है। इस तंत्र में सिन्धु सबसे बड़ी नदी है तथा झेलम, चिनाब, रावी, व्यास, सतलज व अन्य इसकी सहायक नदियाँ हैं। सिन्धु नदी (Indus River) सिन्धु जल समझौता (Indus Water Treaty) मुख्य सहायक नदियाँ (पंचनद) क. झेलम नदी ख. चिनाब नदी ग. रावी नदी घ. व्यास नदी ङ. सतलज नदी

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