यूपीएससी 2026 की तैयारी रणनीति पूरी करें

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16 june 2026 pib notes for upsc in hindi

UPSC की तैयारी में UPSC की तैयारी में pib notes for upsc एक महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है। इस लेख में हम 16 जून 2026 के PIB के प्रमुख बिंदुओं, परीक्षा-उपयोगी तथ्यों और संभावित UPSC दृष्टिकोण का सरल एवं व्यवस्थित विश्लेषण प्रस्तुत कर रहे हैं।  विकसित भारत युवा संसद 2026 कार्यक्रम   कब और कहाँ? 15-17 जून 2026 को नई दिल्ली के संविधान सदन (सेंट्रल हॉल) में हुआ। किसने कराया? युवा मामले और खेल मंत्रालय ने। मकसद क्या है? युवाओं को देश चलाने, नियम-कानून समझने और संसद के कामकाज का असली अनुभव देना। कौन शामिल हुआ? देश के 757 यूनिवर्सिटीज से चुने गए बेहतरीन युवा। विकसित भारत @ 2047 और देश के युवा बड़ा लक्ष्य: साल 2047 तक भारत को एक अमीर और विकसित देश बनाना है। यह 140 करोड़ भारतीयों का सपना है। युवा आबादी: भारत की 65% आबादी अभी 35 साल से कम उम्र की है। ताकत क्या है? युवाओं की भारी तादाद ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। नई पीढ़ी (Gen Z) का जोश और नए आइडिया ही इस सपने को पूरा करेंगे। सरकार के बड़े कदम और योजनाएं 1 लाख नए लीडर्स: पीएम के विजन के तहत देश के हर कोने (जैसे आदिवासी इलाके, कोस्टल रीजन और नॉर्थ-ईस्ट) से 1 लाख युवा लीडर्स तैयार किए जा रहे हैं। ‘माय भारत’ के अहम प्रोग्राम: युवाओं को देश और समाज से जोड़ने के लिए कुछ खास प्रोग्राम चल रहे हैं: विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम विकसित भारत बजट क्विज़ युवा कनेक्ट (सीखने के प्रैक्टिकल प्रोग्राम मिडिल ईस्ट-इंडिया डीपवाटर पाइपलाइन (MEIDP): GS Paper 2: भारत और उसके पड़ोस-संबंध, द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से जुड़े और/या भारत के हितों को प्रभावित करने वाले समझौते। GS Paper 3: बुनियादी ढांचा: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़कें, हवाई अड्डे, रेलवे आदि। चर्चा में क्यों? हाल ही में, भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) ने उन मीडिया रिपोर्टों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि भारत सरकार मिडिल ईस्ट-इंडिया डीपवाटर पाइपलाइन (MEIDP) परियोजना पर सक्रिय रूप से काम कर रही है। मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि वर्तमान में इस मंत्रालय के पास ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है और न ही ओमान या किसी अन्य खाड़ी देश के साथ इस परियोजना पर किसी भी स्तर पर कोई बातचीत चल रही है। मिडिल ईस्ट-इंडिया डीपवाटर पाइपलाइन (MEIDP) क्या है? MEIDP एक प्रस्तावित 4,310 किलोमीटर लंबी गहरे समुद्र (Undersea) की गैस पाइपलाइन परियोजना है। इसका उद्देश्य मध्य पूर्व (विशेष रूप से ओमान और यूएई) के गैस समृद्ध क्षेत्रों को अरब सागर के रास्ते भारत (गुजरात तट) से जोड़ना है। परिकल्पना: इस परियोजना को दक्षिण एशिया गैस एंटरप्राइज (SAGE) नामक एक वैश्विक कंसोर्टियम द्वारा प्रमोट किया जा रहा था। मार्ग: यह पाइपलाइन ओमान के मस्कट और यूएई के फजैराह को भारत में गुजरात के जामनगर/पोरबंदर से जोड़ने के लिए डिज़ाइन की गई थी। क्षमता: इसके माध्यम से भारत को प्रतिदिन लगभग 31.1 मिलियन मीट्रिक मानक घन मीटर (MMSCMD) प्राकृतिक गैस की आपूर्ति करने की योजना थी। इस परियोजना का रणनीतिक और आर्थिक महत्व (यदि यह लागू होती) ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security): भारत अपनी घरेलू गैस मांग का लगभग 50% आयात (LNG के रूप में) करता है। यह पाइपलाइन भारत को सस्ती और निरंतर प्राकृतिक गैस की आपूर्ति सुनिश्चित कर सकती थी। भू-राजनीतिक लाभ (Geopolitical Advantage): यह पाइपलाइन पाकिस्तान के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) को बाईपास (Bypass) करते हुए सीधे गहरे समुद्र से गुजरती है। इससे सुरक्षा जोखिम और पाकिस्तान पर निर्भरता समाप्त हो जाती है। कम लागत: एलएनजी (LNG) के आयात और उसे पुनः गैसीकृत (Regasification) करने की तुलना में सीधे पाइपलाइन से गैस मंगाना आर्थिक रूप से अधिक किफायती माना जाता है। परियोजना के क्रियान्वयन में मुख्य चुनौतियाँ (Challenges) सरकार द्वारा इसे वर्तमान में आगे न बढ़ाने के पीछे कई तकनीकी, वित्तीय और भू-राजनीतिक कारण हो सकते हैं: अत्यधिक तकनीकी जटिलता: अरब सागर में लगभग 3,400 मीटर की गहराई पर पाइपलाइन बिछाना और उसका रखरखाव करना बेहद कठिन और उच्च तकनीकी विशेषज्ञता की मांग करता है। भारी निवेश (High Capital Cost): इस तरह की मेगा-इंजीनियरिंग परियोजना के लिए अरबों डॉलर के निवेश की आवश्यकता होती है, जिसके लिए दीर्घकालिक वित्तीय व्यवहार्यता (Financial Viability) सुनिश्चित करना जरूरी है। क्षेत्रीय भू-राजनीतिक अस्थिरता: पश्चिम एशिया (West Asia) में हाल के वर्षों में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री व्यापार मार्गों (जैसे हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य) की सुरक्षा से जुड़े जोखिम बड़े बुनियादी ढांचा निवेशों को प्रभावित करते हैं। भारत के वैकल्पिक ऊर्जा मार्ग भले ही सरकार ने MEIDP पर बातचीत से इनकार किया हो, लेकिन भारत अपनी ऊर्जा टोकरी (Energy Basket) में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी को वर्तमान ~6.7% से बढ़ाकर 2030 तक 15% करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए भारत अन्य विकल्पों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है: IMEEC (इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर): भारत बहु-आयामी कनेक्टिविटी और ऊर्जा ग्रिड के लिए इस कॉरिडोर को अधिक व्यावहारिक मान रहा है। तापी पाइपलाइन (TAPI Pipeline): तुर्कमेनिस्तान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान-भारत गैस पाइपलाइन, हालांकि यह सुरक्षा कारणों से लंबे समय से रुकी हुई है। LNG इंफ्रास्ट्रक्चर: भारत अपने पश्चिमी और पूर्वी तटों पर एलएनजी टर्मिनलों की क्षमता बढ़ा रहा है और अमेरिका, कतर तथा यूएई के साथ दीर्घकालिक एलएनजी समझौते कर रहा है। निष्कर्ष पेट्रोलियम मंत्रालय का यह स्पष्टीकरण उन अटकलों पर विराम लगाता है जो भारत की ऊर्जा कूटनीति को लेकर लगाई जा रही थीं। यह दर्शाता है कि भारत वर्तमान में गहरे समुद्र की रणनीतिक परियोजनाओं के बजाय अधिक व्यावहारिक, सुरक्षित और त्वरित एलएनजी टर्मिनलों तथा नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) के स्रोतों पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहा है। UPSC मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न प्रश्न: “गहरे समुद्र के ऊर्जा गलियारे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत कर सकते हैं, लेकिन वे अभूतपूर्व तकनीकी और भू-राजनीतिक चुनौतियों के साथ आते हैं।” मिडिल ईस्ट-इंडिया डीपवाटर पाइपलाइन (MEIDP) पर हालिया घटनाक्रमों के आलोक में इस कथन का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द, 15 अंक) वीबी – जी राम जी (VB – G RAM G): 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू विकसित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण): ग्रामीण परिदृश्य का कायाकल्प GS मुख्य परीक्षा प्रश्नपत्र-II: केंद्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के कमजोर वर्गों के

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15 june 2026 PIB Summary for upsc in hindi

15 june 2026 PIB Summary for upsc in hindi। UPSC Prelims, Mains और Interview के लिए महत्वपूर्ण सरकारी योजनाएं, नीतियां, अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं अंतरराष्ट्रीय संबंधों का संक्षिप्त विश्लेषण।। UPSC Prelims, Mains और Interview के लिए महत्वपूर्ण सरकारी योजनाएं, नीतियां, अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं अंतरराष्ट्रीय संबंधों का संक्षिप्त विश्लेषण। ओरेसुंड’ (Oresund) जहाज का चर्चा में क्यों?  समझौता (MoU): भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की अंडरवाटर आर्कियोलॉजी विंग (UAW) और नेशनल म्यूजियम ऑफ डेनमार्क (Njord – सेंटर फॉर मैरीटाइम एंड अंडरवाटर कल्चरल हेरिटेज) के बीच एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। उद्देश्य: पुडुचेरी के कारैकाल (Karaikal) तट के पास 1619 ईस्वी में डूबे ऐतिहासिक डेनिश (Danish) जहाज ‘ओरेसुंड’ (Oresund) के अवशेषों का पता लगाना और उनका दस्तावेजीकरण (Documentation) करना। ऐतिहासिक मील का पत्थर: यह अंतर्राष्ट्रीय सहयोग ASI की ‘अंडरवाटर आर्कियोलॉजी विंग’ के इतिहास में किसी विदेशी संगठन के साथ पहला अंतरराष्ट्रीय सहयोगात्मक पुरातात्विक प्रोजेक्ट है। ‘ओरेसुंड’ (Oresund) जहाज का ऐतिहासिक महत्व भारत आने वाला पहला डेनिश जहाज: ‘ओरेसुंड’ समुद्री इतिहास में एक विशिष्ट स्थान रखता है क्योंकि यह भारत पहुंचने वाला पहला ज्ञात डेनिश जहाज था। जलसमाधि (Shipwreck): भारतीय जलक्षेत्र में पहुंचने के कुछ ही समय बाद, वर्ष 1619 ईस्वी में यह कारैकाल के पास दुर्घटनाग्रस्त (Wrecked) हो गया था। ऐतिहासिक प्रासंगिकता: यह जहाजावशेष (Shipwreck) 17वीं शताब्दी की शुरुआत में डेनिश-भारतीय समुद्री संपर्कों, हिंद महासागर में शुरुआती यूरोपीय व्यापारिक गतिविधियों और तत्कालीन नौवहन (Seafaring) के इतिहास को समझने के लिए एक अमूल्य पुरातात्विक स्रोत है। परियोजना की कार्यप्रणाली और तकनीक गैर-आक्रामक सर्वेक्षण (Non-Invasive Survey): इस परियोजना के तहत समुद्र के भीतर किसी भी प्रकार की तोड़-फोड़ या नुकसान किए बिना उन्नत तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों का उपयोग करके केवल सर्वेक्षण और मैपिंग की जाएगी। सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण: इसका मुख्य उद्देश्य समुद्री पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना ऐतिहासिक अवशेषों की पहचान करना और उनका अध्ययन करना है। भारत-फ्रांस नवाचार रोडमैप 2030 (India-France Innovation Roadmap 2030) संदर्भ एवं रणनीतिक अभिसरण (Context & Strategic Convergence) द्विपक्षीय संबंधों का उन्नयन: 17 फरवरी 2026 को भारत और फ्रांस ने अपने संबंधों को “विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी” (Special Global Strategic Partnership) के स्तर पर उन्नत किया। नवाचार वर्ष: दोनों देशों ने संयुक्त रूप से “भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026” का उद्घाटन किया। नीतिगत अभिसरण (Policy Convergence): यह रोडमैप भारत के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन और फ्रांस की ‘फ्रांस 2030’ महत्वाकांक्षा के बीच मजबूत नीतिगत तालमेल को दर्शाता है। मूल सिद्धांत: यह रोडमैप आपसी विश्वास, लोकतांत्रिक मूल्यों, रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) और मानव-केंद्रित नवाचार पर आधारित है। रोडमैप 2030 के चार मुख्य स्तंभ (Four Core Pillars of the Roadmap) स्तंभ I: ‘विश्वसनीय एआई’ के लिए साझेदारी (Partnership for ‘Trusted AI’) यह इस नवाचार साझेदारी का केंद्रीय स्तंभ है, जो फरवरी 2025 के ‘AI पर भारत-फ्रांस घोषणापत्र’ पर आधारित है। सुरक्षित और विश्वसनीय AI प्रणाली: लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकारों के अनुरूप सुरक्षित AI का विकास करना, जो गलत सूचनाओं (Misinformation) और भेदभाव को रोके। ऑनलाइन बाल सुरक्षा (Child Safety Online – सर्वोच्च प्राथमिकता): AI-सक्षम सेवाओं से बच्चों को होने वाले खतरों से बचाने के लिए ‘Privacy-Preserving Age Assurance’ (गोपनीयता-सुरक्षित आयु आश्वासन) और ‘Safety-by-Design’ आर्किटेक्चर विकसित करना। डेटा साझाकरण ढांचा (Data Sharing Framework): भारत के DEPA (Data Empowerment and Protection Architecture) और फ्रांस के ‘हेल्थ डेटा प्लेटफॉर्म’ की पूरक शक्तियों का उपयोग करके सुरक्षित, सहमति-आधारित डेटा प्रवाह सुनिश्चित करना। स्तंभ II: शैक्षणिक गतिशीलता के माध्यम से जन-जन का जुड़ाव (Academic Mobility & P2P Ties) छात्रों का लक्ष्य: क्षितिज 2047 (Horizon 2047) ढांचे के तहत फ्रांस का लक्ष्य 2030 तक 30,000 भारतीय छात्रों का स्वागत करना है। योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता (Mutual Recognition of Qualifications – MRQ): फ्रांस 2018 में भारत के साथ MRQ समझौता करने वाला पहला देश बना था। अब इस ऊंचे स्तर के ढांचे का विस्तार उभरते प्रौद्योगिकी क्षेत्रों, विनियमित व्यवसायों और दोहरी-डिग्री (Dual-Degree) कार्यक्रमों में किया जाएगा। स्तंभ III: तकनीकी संप्रभुता और उद्योग-अकादमिक जुड़ाव (Technological Sovereignty & Industry Linkages) रणनीतिक क्षेत्रों में लचीली और विश्वसनीय आपूर्ति शृंखला (Resilient Supply Chains) बनाने के लिए संस्थागत तंत्र: CEFIPRA: ‘इंडो-फ्रेंच सेंटर फॉर द प्रमोशन ऑफ एडवांस्ड रिसर्च’ रणनीतिक प्रौद्योगिकियों के सह-विकास पर ध्यान केंद्रित करेगा। भारत-फ्रांस नवाचार नेटवर्क (IFIN): दोनों देशों के स्टार्टअप और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को जोड़ने के लिए एक संयुक्त संचालन समिति (Joint Steering Committee) द्वारा शासित उपकरण। विशिष्ट भौतिक पहलें: एरोनॉटिक्स ट्रेनिंग और करियर हेतु भारत-फ्रांस कैंपस: कौशल विकास मंत्रालय (MSDE) के साथ साझेदारी में कानपुर में स्थापित किया जाएगा। इंडिया-फ्रांस इनोकॉन्टेक्स्ट ब्रिज (InnoXchange Bridge): प्रयोगशालाओं, निवेशकों और इनक्यूबेटरों तक पारस्परिक पहुंच प्रदान करने के लिए एक समर्पित ‘अनुसंधान और उद्यमिता कॉरिडोर’। अंतरिक्ष सहयोग (Space Ecosystem): पृथ्वी अवलोकन (Earth Observation) और मानव अंतरिक्ष उड़ान (Human Exploration) में सहयोग बढ़ाना। फ्रांस की Zero-G विशेषज्ञता और भारत के भावी अंतरिक्ष स्टेशन (LEO में) के बीच संयुक्त गतिविधियां शामिल होंगी। नोट: सितंबर 2026 में बेंगलुरु स्पेस एक्सपो (BSX) और पेरिस में अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष शिखर सम्मेलन एक ही सप्ताह में आयोजित होंगे। स्तंभ IV: वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए अनुसंधान-आधारित समाधान सहमति-आधारित डेटा संरचना: भारत के ICMR (भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद) और फ्रांस के हेल्थ डेटा हब (HDH) के बीच पायलट प्रोजेक्ट का विस्तार। ग्लोबल साउथ को लाभ: इस सुरक्षित डेटा-साझाकरण मॉडल को अन्य क्षेत्रों में स्केल किया जाएगा और इसे ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) के इच्छुक भागीदार देशों के साथ भी साझा किया जाएगा। 15 june 2026 PIB Summary for upsc in hindi WPI की नई शृंखला और उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) संदर्भ एवं मुख्य घोषणा (Context & Key Announcement) जारीकर्ता: आर्थिक सलाहकार कार्यालय, उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय)। नया आधार वर्ष (Base Year): वर्तमान आधार वर्ष 2011-12 को बदलकर अब 2022-23 कर दिया गया है। नए सूचकांकों की शुरुआत: WPI के साथ-साथ सरकार ने तीन नए सूचकांक जारी किए हैं: आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (OPPI) – उत्पादक मूल्य सूचकांक (आउटपुट) ट्रायल इनपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (IPPI) – केवल विनिर्माण (Manufacturing) क्षेत्र के लिए प्रायोगिक आधार पर। सर्विस प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (Service PPI) – प्रथम चरण में 7 प्रमुख सेवाओं के लिए। WPI से PPI की ओर संक्रमण (Transition from WPI to PPI) वैश्विक सर्वोत्तम अभ्यास: थोक मूल्य सूचकांक (WPI) से उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) की ओर बढ़ना अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की सिफारिशों और उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के मानकों के अनुरूप

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14 June 2026 PIB Summary for UPSC in hindi

Bharat Innovates 2026 Bharat Innovates 2026  क्या है?: 3 दिनों का ग्लोबल इवेंट, जो भारतीय deep-tech स्टार्टअप्स, रिसर्चर्स और इन्वेस्टर्स को ग्लोबल फंड्स से जोड़ता है। उद्घाटन: PM नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने संयुक्त रूप से किया। कहाँ हुआ?: पाले देस एक्सपोजीशन (Palais des Expositions), नीस (Nice), फ्रांस। तारीख: 14 जून 2026 (PIB दिल्ली के अनुसार)। मुख्य आंकड़े (Facts & Figures) स्टार्टअप्स: 120 पाथब्रेकिंग (pathbreaking) डीप-टेक स्टार्टअप्स शामिल। संस्थान: 20 से अधिक उत्कृष्ट संस्थान (Institutes of Excellence) हिस्सा ले रहे हैं। पिलर्स: वैश्विक महत्व के 13 क्रिटिकल टेक्नोलॉजी पिलर्स पर फोकस। इन्वेस्टर्स: दुनिया भर से 350 से ज्यादा टॉप इन्वेस्टर्स और वीसी (Venture Capitalists) मौजूद। भारत-फ्रांस साझेदारी के मुख्य क्षेत्र इनोवेशन: अभी भारत-फ्रांस ‘Year of Innovation’ मना रहे हैं। पुराने प्रोजेक्ट्स: इंटरनेशनल सोलर एलायंस (ISA), AI और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा/स्थिरता पर मिलकर काम जारी। PM मोदी के भाषण की बड़ी बातें फोकस सेक्टर्स: ग्रामीण विकास के लिए AI और सैटेलाइट टेक, सस्टेनेबल लिविंग के लिए एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, और क्लीन डेवलपमेंट के लिए ग्रीन हाइड्रोजन व बैटरी टेक। मूल मंत्र: टेक्नोलॉजी Trusted, Inclusive और Human-centric (मानव-केंद्रित) होनी चाहिए। सफलता का पैमाना: स्टार्टअप्स को सिर्फ उनके मार्केट वैल्यूएशन से नहीं, बल्कि समाज पर उनके इम्पैक्ट (असर) से आंका जाना चाहिए। विजन: ‘विकसित भारत’ के सपने को पूरा करना और भारत को ग्लोबल इनोवेशन हब बनाना। प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड Project GIB (Great Indian Bustard)   बड़ी खबर: कंजर्वेशन ब्रीडिंग प्रोग्राम के तहत पिछले कुछ दिनों में 3 नए चूजे (chicks) शामिल हुए। किसने दी जानकारी: केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री, श्री भूपेंद्र यादव ने (14 जून 2026 को X पर)। नया अपडेट: ये 3 नए चूजे—1 जंगली अंडे (wild egg) और 2 बंदी हालत में दिए गए अंडों (captive-laid eggs) से निकले हैं। मुख्य तथ्य  कुल कैप्टिव स्टॉक: अब बढ़कर 94 पक्षी (birds) हो गया है। चौथा साल (4th Year of Breeding): इस साल अब तक कुल 26 चूजे पैदा हो चुके हैं। ब्रीडिंग का ब्रेकअप (26 चूजों का हिसाब): 18: आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन (कृत्रिम गर्भाधान – Artificial Insemination) से। 04: नेचुरल ब्रीडिंग (प्राकृतिक प्रजनन) से। 04: जंगलों से लाए गए अंडों (wild-collected eggs) से। जम्पस्टार्ट इंटरवेंशन (Jumpstart Intervention) क्या हुआ?: जंगल से लाए गए अंडों के बदले, राजस्थान के जंगलों में ‘जम्पस्टार्ट इंटरवेंशन’ के जरिए 3 चूजे पैदा कराए गए। मकसद: जेनेटिक डाइवर्सिटी (आनुवंशिक विविधता) को बेहतर करना और जंगली जानवरों द्वारा अंडों के शिकार (predation risk) के खतरे को कम करना। DISHA स्कीम और ‘Reforms Utsav’ रीजनल वर्कशॉप DISHA स्कीम और ‘Reforms Utsav’ रीजनल वर्कशॉप  क्या है?: DISHA स्कीम (Designing Innovative Solutions for Holistic Access to Justice) के तहत एक रीजनल वर्कशॉप और पिछले 12 सालों के न्यायिक सुधारों को दिखाने के लिए ‘Reforms Utsav’। आयोजक: न्याय विभाग (Department of Justice), कानून और न्याय मंत्रालय, भारत सरकार। कब और कहाँ?: 15 जून 2026 को दोपहर 1:00 बजे से, सरकारी डिग्री कॉलेज (PG) ऑडिटोरियम, धर्मशाला (कांगड़ा), हिमाचल प्रदेश में। मुख्य अतिथि: हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री और कानून व न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)। बड़ा लॉन्च: “न्याय प्रबोध” (Nyaya Prabodh – Awakening to Justice) वर्कशॉप के दौरान “न्याय प्रबोध” नाम से एक साल लंबा कानूनी जागरूकता अभियान शुरू किया जाएगा। इसके तहत 3 मुख्य गतिविधियां होंगी: Know Your Rights in 90 seconds: नागरिकों को डेढ़ मिनट में उनके कानूनी अधिकारों और उपायों को समझाने की पहल। Nyaya Quiz: युवाओं और छात्रों के लिए संवैधानिक मूल्यों और अधिकारों पर आधारित एक इंटरएक्टिव क्विज। Pro Bono Pledge: वकीलों और लॉ स्टूडेंट्स को गरीब व वंचितों के लिए मुफ्त (Pro Bono) कानूनी सेवा देने की शपथ दिलाना। वर्कशॉप के अन्य मुख्य आकर्षण HPNLU की पहल: हिमाचल प्रदेश नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी द्वारा की गई मुफ्त कानूनी सेवाओं (Pro Bono) के अनुभवों को शेयर करना। टेली-लॉ (Tele-Law) प्रभाव: जमीनी स्तर पर टेक्नोलॉजी से मिली कानूनी मदद पर एक डॉक्यूमेंट्री दिखाई जाएगी। साथ ही टेली-लॉ वकीलों, विलेज लेवल एंटरप्रेन्योर्स (VLEs) और लाभार्थियों से लाइव बातचीत होगी। Reforms Utsav: पिछले 12 वर्षों में अदालतों के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, ज्यूडिशियल इंफ्रास्ट्रक्चर और कानूनी सहायता के क्षेत्र में मिली सफलताओं की प्रदर्शनी। लखपति दीदी योजना लखपति दीदी योजना (DAY-NRLM) रिव्यू मीटिंग   लक्ष्य: 6 करोड़ ग्रामीण महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ (Lakhpati Didis) बनाना। रणनीति: आजीविका (livelihood) बढ़ाने के लिए एंटरप्राइज प्रमोशन, फाइनेंशियल इंक्लूजन (वित्तीय समावेशन), कैपेसिटी बिल्डिंग, ट्रेनिंग और मजबूत मार्केटिंग सिस्टम तैयार करना। अध्यक्षता: श्री रोहित कंसल, सचिव, ग्रामीण विकास विभाग, भारत सरकार। मुख्य आंकड़े और बड़े फैसले   SHE-MARTs: हाई-पोटेंशियल कमर्शियल लोकेशंस पर 700 शी-मार्ट खोले जाएंगे, ताकि SHG (स्वयं सहायता समूह) के प्रोडक्ट्स को बड़ा बाजार मिले। District Fulfilment Centres: सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए 1,000 जिला पूर्ति केंद्र बनाए जाएंगे। अवॉर्ड्स की शुरुआत: बेहतरीन काम करने वाले SHG सदस्यों के लिए ‘लखपति दीदी अवॉर्ड’, बेस्ट वीमेन एंटरप्रेन्योर और बेस्ट परफॉर्मिंग स्टेट जैसे अवॉर्ड्स दिए जाएंगे। मार्केटिंग और डिजिटल बदलाव नया नेशनल ब्रांड: ‘सरस आजीविका’ (Saras Aajeevika) के बिखरे हुए ब्रांड्स को मिलाकर एक प्रीमियम और सिंगल यूनिफाइड नेशनल मार्केटिंग आइडेंटिटी (साझा राष्ट्रीय ब्रांड) बनाई जाएगी। e-Saras पोर्टल का री-डिजाइन: इसे सिंगल-वेंडर वेबसाइट से बदलकर एक मल्टी-वेंडर, ओमनी-चैनल मार्केटप्लेस बनाया जा रहा है, ताकि डिजिटल रीच बढ़े। सरस गैलरी का कायाकल्प: दिल्ली के कनॉट प्लेस (CP) स्थित फ्लैगशिप सरस गैलरी को और बेहतर व आधुनिक बनाया जाएगा। सरस मेला: राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर ‘सरस मेलों’ की संख्या बढ़ाने के लिए नई गाइडलाइंस जारी करने के निर्देश। अन्य महत्वपूर्ण पहल Producer Group App: महिलाओं के उत्पादक समूहों के लिए जल्द ही यह ऐप लॉन्च किया जाएगा। लोन प्रक्रिया: ‘जन समर्थ पोर्टल’ (Jan Samarth Portal) पर रुके हुए लोन आवेदनों की देरी को दूर करने और बैंकों में जागरूकता बढ़ाने के निर्देश। नेशनल हब: प्रोडक्ट इनोवेशन, डिजाइनिंग, पैकेजिंग और क्वालिटी चेक के लिए नेशनल हब और ‘सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस’ बनाए जाएंगे। भारत की स्पेस इकोनॉमी और स्टार्टअप्स   भारत की स्पेस इकोनॉमी और स्टार्टअप्स   बयान/जानकारी: केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने ‘RISE कॉन्क्लेव 2026’ के दौरान मीडिया से यह बातें साझा कीं। कॉन्क्लेव की थीम: “Innovation & Entrepreneurship Driven Growth for Viksit Bharat 2047”। इस इवेंट में 125 से ज्यादा स्टार्टअप्स ने हिस्सा लिया। मुख्य आंकड़े   स्पेस इकोनॉमी में उछाल: भारत की स्पेस इकोनॉमी मौजूदा 8-9 बिलियन USD से बढ़कर अगले

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Quadrilateral Security Dialogue – Quad in hindi for upsc and other exam

विषय: सामान्य अध्ययन (GS) पेपर-2: अंतर्राष्ट्रीय संबंध (IR) — द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से जुड़े और/या भारत के हितों को प्रभावित करने वाले समझौते। Quadrilateral Security Dialogue – क्वाड चार प्रमुख लोकतांत्रिक देशों — भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका (US), जापान और ऑस्ट्रेलिया — का एक अनौपचारिक रणनीतिक मंच है। इसका प्राथमिक घोषित उद्देश्य हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में एक “मुक्त, खुला, समृद्ध और नियम-आधारित आदेश” सुनिश्चित करना है। ऐतिहासिक विकास क्वाड 1.0 (2007): जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने इसकी अवधारणा प्रस्तुत की थी। हालांकि, चीन के कड़े राजनयिक विरोध और ऑस्ट्रेलिया की हिचकिचाहट के कारण यह मंच प्रारंभिक चरण में ही निष्क्रिय हो गया। क्वाड 2.0 (2017): मनीला में आसियान (ASEAN) शिखर सम्मेलन के इतर, चीन के आक्रामक भू-राजनीतिक रुख (जैसे- दक्षिण चीन सागर का सैन्यीकरण और बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव – BRI) के प्रत्युत्तर में इसे पुनर्जीवित किया गया। शिखर सम्मेलन का स्तर (2021-वर्तमान): वर्ष 2021 में इसके पहले राष्ट्राध्यक्षों के स्तर (Summit Level) के सम्मेलन ने इसे भू-राजनीतिक विमर्श के केंद्र में ला दिया। प्रमुख समझौते और रणनीतिक पहल (Key Initiatives) A. क्वाड महत्वपूर्ण खनिज पहल ढांचा (Quad Critical Minerals Initiative): वित्तीय लक्ष्य: सरकारी और निजी क्षेत्र के सहयोग से लगभग 20 बिलियन डॉलर जुटाना। नियम: सहायता केवल उन परियोजनाओं को मिलेगी जो क्वाड देशों में स्थित हैं और जिनका मुख्यालय क्वाड देशों की कंपनियों के पास है। उद्देश्य: नियमों का सामंजस्य (Harmonisation), चीन पर निर्भरता कम करना और ई-कचरे (e-waste) से खनिजों की रीसाइक्लिंग। B. समुद्री सुरक्षा (Maritime Security) IPMSC (भारत-प्रशांत समुद्री निगरानी सहयोग पहल): सूचना साझाकरण (Information Sharing) बढ़ाने के लिए चारों देशों की समुद्री निगरानी क्षमताओं का एकीकरण। IPMDA का विस्तार: इंडो-पैसिफिक पार्टनरशिप फॉर मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस के तहत भागीदार देशों को आपातकालीन संचालन के लिए ‘नियर रियल-टाइम’ (Near real-time) वाणिज्यिक समुद्री डेटा प्रदान करना। Quad at Sea Mission: भारत इसके अगले संस्करण की मेजबानी करेगा, जो चारों देशों के तट रक्षकों (Coast Guards) को एक साझा जहाज पर लाएगा। मालाबार नौसैनिक अभ्यास (Malabar Exercise): चारों देशों के बीच अंतर-संचालनीयता (Interoperability) बढ़ाने के लिए वार्षिक सैन्य अभ्यास। C. ऊर्जा, तकनीकी और विकासात्मक पहल ऊर्जा सुरक्षा: Quad Initiative on Indo-Pacific Energy Security के तहत क्षेत्रीय ऊर्जा लचीलेपन और आपातकालीन प्रतिक्रिया अभ्यासों को मजबूती। बुनियादी ढांचा वित्तपोषण: मई 2022 में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए 50 बिलियन डॉलर के बुनियादी ढांचा निवेश का संकल्प। ऋण प्रबंधन: G20 कॉमन फ्रेमवर्क के तहत ‘क्वाड डेट मैनेजमेंट रिसोर्स पोर्टल’ (Quad Debt Management Resource Portal) की स्थापना (चीनी ऋण-जाल का मुकाबला करने के लिए)। अन्य तकनीकी पहल: क्वाड फैलोशिप: STEM पाठ्यक्रमों में डॉक्टरेट के लिए। क्वाड सीनियर साइबर ग्रुप: साझा साइबर मानकों का क्रियान्वयन। अंतरिक्ष क्षेत्र: उपग्रह डेटा साझाकरण (Climate Working Group के तहत)। क्वाड वैक्सीन एक्सपर्ट्स ग्रुप: वैक्सीन रणनीति में सहयोग। भारत के लिए क्वाड का रणनीतिक महत्व चीन के ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ (String of Pearls) का मुकाबला: क्वाड भारत को हिंद महासागर में चीनी नौसैनिक विस्तारवाद को रोकने के लिए भू-स्थानिक और खुफिया लाभ प्रदान करता है। आर्थिक और बुनियादी ढांचा कल्प (Blue Dot Network): मई 2022 में घोषित 50 बिलियन डॉलर के बुनियादी ढांचा कोष और ‘क्वाड डेट मैनेजमेंट रिसोर्स पोर्टल’ (G20 कॉमन फ्रेमवर्क के तहत) के माध्यम से यह समूह चीनी “ऋण-जाल कूटनीति” (Debt-Trap Diplomacy) का एक विश्वसनीय विकल्प पेश कर रहा है। पोस्ट-कोविड और विनिर्माण कूटनीति: ‘सप्लाई चेन रेजिलिएंस इनिशिएटिव’ (SCRI) के तहत अमेरिकी और जापानी कंपनियां चीन से बाहर निकलकर भारत को एक वैकल्पिक विनिर्माण केंद्र (Alternative Manufacturing Hub) के रूप में देख रही हैं। गैर-पारंपरिक सुरक्षा और तकनीक: स्टेम (STEM) पाठ्यक्रमों के लिए ‘क्वाड फैलोशिप’, ‘क्वाड वैक्सीन एक्सपर्ट्स ग्रुप’, ‘क्वाड सीनियर साइबर ग्रुप’ और अंतरिक्ष डेटा साझाकरण इसके बहुआयामी आयामों को दर्शाते हैं। क्वाड की सीमाएं और चुनौतियां (Group Limitations) संस्थागत ढांचे का अभाव: नाटो (NATO) की तरह क्वाड का कोई स्थायी सचिवालय (Secretariat) या औपचारिक चार्टर नहीं है। यह केवल संयुक्त बयानों और कार्य समूहों पर निर्भर है। वैश्विक प्रतिक्रिया और “एशियाई नाटो” का नैरेटिव: चीन इसे शीतयुद्ध की मानसिकता वाला “इंडो-पैसिफिक नाटो” कहता है। रूस ने भी इसे अमेरिका के नेतृत्व वाली “विभाजनकारी नीति” का हिस्सा माना है, जो भारत-रूस के पारंपरिक रक्षा संबंधों के लिए एक कूटनीतिक चुनौती है। चीन पर आर्थिक निर्भरता: भारत को छोड़कर, क्वाड के अन्य तीन सदस्य (अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया) आर्थिक रूप से चीन के बाजार और आपूर्ति श्रृंखलाओं से गहरे जुड़े हुए हैं, जिससे उनकी रणनीतिक प्रतिक्रियाओं में एकरूपता का अभाव दिखता है। आसयान (ASEAN) की केंद्रीयता की चिंताएं: इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देश चिंतित हैं कि क्वाड क्षेत्र में आसियान की केंद्रीय भूमिका को कमजोर कर सकता है। रणनीतिक प्राथमिकताओं में अंतर: अमेरिका का प्राथमिक ध्यान वर्तमान में यूक्रेन-रूस संकट और मध्य पूर्व (लाल सागर संकट) पर केंद्रित है, जबकि भारत की मुख्य प्राथमिकता हिंद महासागर और उसकी भूमि सीमाओं की रक्षा करना है। आगे की राह (Way Forward) क्वाड की प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जाने चाहिए: सुरक्षा और विकास का संतुलन (Security-Development Balance): क्वाड को केवल “चीन-विरोधी क्लब” के रूप में पेश करने से बचना चाहिए। इसका ध्यान हिंद-प्रशांत क्षेत्र के छोटे द्वीपीय देशों को सार्वजनिक वस्तुएं (जैसे- वैक्सीन, आपदा राहत, स्वच्छ ऊर्जा) प्रदान करने पर अधिक होना चाहिए। आर्थिक मोर्चे को मजबूत करना (Economic Quad): इंडो-पैसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क (IPEF) जैसी पहलों को और अधिक आकर्षक बनाना होगा ताकि क्षेत्र के देश चीनी निवेश (BRI) पर निर्भर न रहें। समुद्री सुरक्षा का विस्तार (Expanding Maritime Scope): IPMDA कूटनीति के तहत केवल सूचना साझा करने से आगे बढ़कर अवैध मादक पदार्थों की तस्करी और समुद्री डकैती के खिलाफ संयुक्त गश्त (Joint Patrols) की ओर बढ़ना चाहिए। संस्थागत स्थिरता: भविष्य की भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं से निपटने के लिए एक लचीला लेकिन औपचारिक चार्टर तैयार करने पर विचार किया जा सकता है। क्वाड प्लस’: वैश्विक चुनौतियों (जैसे महामारी और तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला) से निपटने के लिए ब्राजील, इजरायल, दक्षिण कोरिया, वियतनाम और न्यूजीलैंड जैसे देशों को ‘क्वाड प्लस’ प्रारूप में शामिल किया जाना चाहिए। “क्वाड 21वीं सदी की बहुध्रुवीय व्यवस्था का एक अनिवार्य भू-आर्थिक यथार्थ है। यह चीन को रोकने का एक नकारात्मक गठबंधन मात्र नहीं है, बल्कि हिंद-प्रशांत में अंतरराष्ट्रीय कानून की संप्रभुता और आर्थिक लचीलेपन को बनाए रखने वाला एक सकारात्मक सुरक्षा कवच है।” प्रश्न: “हालाँकि क्वाड (Quad)

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समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) UPSC and state

यहाँ समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) पर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) मुख्य परीक्षा (Mains) के मानदंडों के अनुरूप अत्यधिक शोधित, व्यापक और संरचित नोट्स दिए गए हैं। इसे GS पेपर-2 (राजव्यवस्था, शासन और सामाजिक न्याय) को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जिसमें समसामयिक डेटा, केस लॉ और नीतिगत आयामों का समावेश है। समान नागरिक संहिता (UCC): संवैधानिक, कानूनी और सामाजिक आयाम परिचय और पृष्ठभूमि (Introduction & Background) अवधारणा: UCC का अर्थ है पूरे देश के लिए एक समान कानून होना, जो सभी धार्मिक समुदायों पर उनके व्यक्तिगत मामलों जैसे विवाह, तलाक, विरासत, गोद लेना और रखरखाव (Maintenance) में समान रूप से लागू हो। ऐतिहासिक विकास: लेक्स लोकी रिपोर्ट (1840): ब्रिटिश काल में अपराधों, साक्ष्यों और अनुबंधों के लिए कानूनों के संहिताकरण (Codification) की सिफारिश की गई, लेकिन व्यक्तिगत कानूनों को जानबूझकर छोड़ दिया गया। बी.एन. राव समिति (1941): हिंदू कानून को संहिताबद्ध करने के लिए गठित की गई, जिसने अंततः 1955-56 के ‘हिंदू कोड बिल’ का रूप लिया। संवैधानिक और कानूनी ढांचा (Constitutional & Legal Framework) A. राज्य के नीति निदेशक तत्व (DPSP) – अनुच्छेद 44 संविधान के भाग IV के तहत अनुच्छेद 44 राज्य को यह निर्देश देता है कि वह भारत के पूरे क्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता (UCC) सुरक्षित करने का प्रयास करेगा। सीमा: अनुच्छेद 37 के अनुसार, DPSP न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय (Enforceable) नहीं हैं, लेकिन देश के शासन में मूलभूत हैं। B. विधायी शक्ति और सातवीं अनुसूची समवर्ती सूची (प्रविष्टि 5): विवाह, तलाक, शिशु और नाबालिग, गोद लेना, वसीयत, अमूर्तता और विरासत जैसे विषय समवर्ती सूची (Concurrent List) के अंतर्गत आते हैं। प्रभाव: केंद्र (संसद) और राज्य विधानसभाएं दोनों इस पर कानून बनाने के लिए सक्षम हैं। उदाहरण: केंद्र की अनुपस्थिति में उत्तराखंड द्वारा राज्य स्तरीय कानून बनाना। C. वर्तमान कार्यान्वयन स्थिति (Current Status) गोवा नागरिक संहिता (1867): पुर्तगाली नागरिक संहिता पर आधारित, जो विवाह के पंजीकरण, संपत्ति के समान बंटवारे (Communion of Property) और बहुविवाह पर प्रतिबंध को लागू करती है। उत्तराखंड UCC अधिनियम (2024): स्वतंत्र भारत में राज्य स्तर पर UCC लागू करने वाला पहला राज्य। प्रमुख प्रावधान: लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य पंजीकरण, हलाला/इद्दात पर प्रतिबंध, और लड़कियों की शादी की उम्र (21 वर्ष – प्रस्तावित संरेखण)। अन्य राज्य: गुजरात, असम और मध्य प्रदेश ने इस दिशा में समितियों का गठन किया है। UCC के पक्ष में प्रमुख तर्क (Arguments in Favour of UCC) A. लैंगिक न्याय और महिला सशक्तिकरण (Gender Justice) अधिकांश व्यक्तिगत कानून पितृसत्तात्मक (Patriarchal) संरचनाओं पर आधारित हैं, जो महिलाओं के अधिकारों का हनन करते हैं। UCC लैंगिक समानता सुनिश्चित करेगा। मुस्लिम व्यक्तिगत कानून में बहुविवाह (Polygamy) और विरासत में असमानता (पुत्रों को पुत्रियों की तुलना में दोगुना हिस्सा) जैसी प्रथाएं मौजूद हैं। शायरा बानो बनाम भारत संघ (2017) में सुप्रीम कोर्ट ने माना कि लैंगिक समानता और सम्मान का अधिकार (अनुच्छेद 21) धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) पर हावी होना चाहिए। B. धर्मनिरपेक्षता को सुदृढ़ करना (Strengthening Secularism) वास्तविक धर्मनिरपेक्षता के लिए राज्य और धर्म का अलगाव आवश्यक है। नागरिकों के साथ उनकी धार्मिक पहचान के बजाय एक ‘नागरिक’ के रूप में व्यवहार किया जाना चाहिए। संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 15 केवल धर्म के आधार पर किसी भी भेदभाव को रोकता है। C. राष्ट्रीय एकीकरण (National Integration) अलग-अलग व्यक्तिगत कानून समुदायों के बीच अलगाववाद की भावना को बढ़ावा देते हैं। एक समान नागरिक कानून साझा राष्ट्रीय पहचान और ‘एक राष्ट्र, एक कानून’ की भावना को मजबूत करेगा। D. कानूनी प्रणाली का सरलीकरण (Simplification of Legal System) वर्तमान में भारतीय अदालतें जटिल, अलिखित और प्राचीन धार्मिक ग्रंथों (जैसे शरिया, मिताक्षरा, दायभाग) की व्याख्या करने में उलझी रहती हैं। UCC न्याय वितरण प्रणाली को तेज और सरल बनाएगा। भारतीय अदालतों में 4.5 करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं; पारिवारिक विवादों का सरलीकरण इस बोझ को कम करेगा। चुनौतियाँ और विरोध में तर्क (Key Challenges & Counter-Arguments) A. धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार से टकराव (Conflict with Art. 25-28) विरोधियों का तर्क है कि UCC अनुच्छेद 25 के तहत अंतःकरण की स्वतंत्रता और धर्म को अबाध रूप से मानने व आचरण करने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है। प्रति-तर्क: अनुच्छेद 25(2) राज्य को सामाजिक सुधार और धर्म से जुड़ी धर्मनिरपेक्ष गतिविधियों को विनियमित करने की अनुमति देता है। B. विविधता और सांस्कृतिक बहुलवाद पर संकट भारत एक बहु-सांस्कृतिक देश है। ‘एकरूपता’ (Uniformity) को ‘समानता’ (Equality) मान लेना विविधता को नष्ट कर सकता है। अनुच्छेद 29(1): नागरिकों के किसी भी वर्ग को अपनी विशिष्ट संस्कृति, भाषा या लिपि को बनाए रखने का अधिकार देता है। C. जनजातीय अधिकार और संवैधानिक संरक्षण भारत की जनजातियों के अपने प्रथागत कानून (Customary Laws) हैं। UCC उनके अधिकारों और पहचान को खतरे में डाल सकता है। संवैधानिक सुरक्षा: 5वीं और 6वीं अनुसूची: असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के जनजातीय क्षेत्रों को विशेष स्वायत्तता प्राप्त है। अनुच्छेद 371A (नागालैंड) और 371G (मिजोरम): संसद का कोई भी कानून इनके प्रथागत कानूनों में तब तक हस्तक्षेप नहीं कर सकता जब तक कि वहां की राज्य विधानसभा इसकी अनुमति न दे। D. विधि आयोग (Law Commission) का रुख 21वां विधि आयोग (2018 – जस्टिस बीएस चौहान): स्पष्ट रूप से कहा कि इस चरण में UCC “न तो आवश्यक है और न ही वांछनीय”। आयोग ने कहा कि विविधता का उत्सव मनाना चाहिए, और UCC के बजाय व्यक्तिगत कानूनों के भीतर मौजूद भेदभावपूर्ण प्रथाओं को संशोधित किया जाना चाहिए। 22वां विधि आयोग (वर्तमान): इसने इस मुद्दे की संवेदनशीलता को देखते हुए नए सिरे से जनता और हितधारकों से विचार मांगे हैं। सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय (Landmark Judicial Pronouncements) वाद वर्ष मुख्य महत्व / सार शाह बानो बेगम मामला 1985 SC ने CrPC की धारा 125 के तहत तलाकशुदा मुस्लिम महिला के भरण-पोषण के अधिकार को बरकरार रखा और कहा कि UCC राष्ट्रीय एकीकरण में मदद करेगा। सरला मुद्गल मामला 1995 कोर्ट ने फैसला सुनाया कि पहली शादी को भंग किए बिना केवल दूसरी शादी के लिए इस्लाम अपनाना अवैध है। केंद्र से अनुच्छेद 44 पर काम करने का अनुरोध किया। शायरा बानो मामला 2017 सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) को असंवैधानिक घोषित किया और मनमाने व्यक्तिगत कानूनों पर लैंगिक न्याय को प्राथमिकता दी। ‘एकरूपता’ बनाम ‘समानता’ (Uniformity vs Equality) UCC का वास्तविक उद्देश्य

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22 may 2026 daily current affairs in hindi

लद्दाख की विधायिका और संवैधानिक सुरक्षा उपायों की माँग मुख्य मुद्दा केंद्रीय गृह मंत्रालय का तर्क है कि लद्दाख को निम्नलिखित के बजाय अधिक जिलों की आवश्यकता है: एक विधायिका (विधानमंडल) छठी अनुसूची का संरक्षण सरकार निम्नलिखित कारणों का हवाला देती है: विरल (कम) आबादी रणनीतिक संवेदनशीलता केंद्र पर वित्तीय निर्भरता लेख का मुख्य तर्क प्रशासनिक विकेंद्रीकरण कभी भी राजनीतिक प्रतिनिधित्व का स्थान नहीं ले सकता। जिले प्रशासन के साधन मात्र हैं, जबकि विधायिकाएँ लोकतांत्रिक आवाज़ और नीति निर्माण की शक्ति प्रदान करती हैं। जिलों और विधायिका के बीच अंतर जिला प्रशासन नीतियों को लागू करता है। नौकरशाही (ब्यूरोक्रेसी) के प्रति जवाबदेह होता है। केवल शासन व्यवस्था को सुचारू रूप से पहुँचाने तक सीमित है। विधायिका कानून और नीतियां बनाती है। निम्नलिखित की रक्षा करती है: भूमि अधिकार जनसांख्यिकीय सुरक्षा उपाय पारिस्थितिक (पर्यावरणीय) हित रोजगार की प्राथमिकताएं सांस्कृतिक स्वायत्तता सीधे नागरिकों के प्रति जवाबदेह होती है। छठी अनुसूची की माँग वर्ष 2019 में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने और केंद्र शासित प्रदेश (UT) का दर्जा दिए जाने के बाद, कथित तौर पर निम्नलिखित के लिए राजनीतिक आश्वासन दिए गए थे: संवैधानिक सुरक्षा उपाय छठी अनुसूची का संरक्षण पूर्वोत्तर राज्यों के साथ तुलना लेख का तर्क है कि रणनीतिक संवेदनशीलता और वित्तीय निर्भरता ने देश में अन्य जगहों पर पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने से नहीं रोका: राज्य राज्य का दर्जा मिलने का वर्ष मुख्य बिंदु नागालैंड 1963 कम आबादी के बावजूद राज्य का दर्जा दिया गया। सिक्किम 1975 रणनीतिक रूप से संवेदनशील हिमालयी राज्य। मिजोरम 1987 प्रतिनिधित्व के माध्यम से सीमावर्ती क्षेत्रों का एकीकरण। अरुणाचल प्रदेश 1987 सीमा की संवेदनशीलता को ही सशक्तिकरण का कारण माना गया।   तर्क: भारत ने सीमावर्ती क्षेत्रों को केवल नौकरशाही या सैन्य उपस्थिति के माध्यम से नहीं, बल्कि राजनीतिक समावेश के माध्यम से एकीकृत किया है। वित्तीय निर्भरता का तर्क भारत के कई राज्य केंद्रीय हस्तांतरण (फंड) पर अत्यधिक निर्भर हैं, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं: बिहार असम पूर्वोत्तर के राज्य उत्तर प्रदेश इसलिए, आर्थिक आत्मनिर्भरता कभी भी लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के लिए कोई शर्त नहीं रही है। नवीकरणीय ऊर्जा और संसाधनों से जुड़ी चिंताएं लद्दाख भारत की नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) की महत्वाकांक्षाओं का केंद्र है। चांगथांग के पांग क्षेत्र की परियोजनाएं लगभग 13 गीगावाट (GW) बिजली पैदा कर सकती हैं। मुख्य चिंताएं: भूमि अधिकार चांगपा चरवाहों के चरागाह (चरने के) अधिकार खनन और पर्यटन का विस्तार पारिस्थितिक स्थिरता (पर्यावरणीय संतुलन) स्थानीय रोजगार और रॉयल्टी लेख का तर्क है कि ऐसे मुद्दों के लिए निर्वाचित प्रतिनिधित्व की आवश्यकता है, न कि केवल नौकरशाही प्रशासन की। व्यापक संवैधानिक तर्क भारत का संघवाद छठी अनुसूची जैसी विशिष्ट व्यवस्थाओं के माध्यम से विविधता को समाहित करता है। लेख का तर्क है कि: एक समान शासन हमेशा न्यायसंगत नहीं होता। लद्दाख पूर्ण लोकतांत्रिक समावेश चाहता है, अलगाव नहीं। निष्कर्ष यह बहस मूल रूप से निम्नलिखित के बारे में है: राजनीतिक स्वायत्तता (एजेंसी); लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व सीमावर्ती आबादी पर विश्वास राष्ट्रीय सुरक्षा और संवैधानिक सशक्तिकरण के बीच संतुलन लेख विधायी प्रतिनिधित्व और संवैधानिक सुरक्षा उपायों को लद्दाख के दीर्घकालिक एकीकरण और सम्मान के लिए आवश्यक मानता है। जाति जनगणना और जनगणना 2027 सर्वोच्च न्यायालय का रुख भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने जनगणना 2027 में जातिगत गणना को रोकने की मांग करने वाली एक याचिका को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि सरकारों को यह पता होना चाहिए कि कितने लोग पिछड़े हैं और उन्हें कल्याणकारी सहायता की आवश्यकता है। सरकार की नीति में बदलाव अप्रैल 2025 में, भारत सरकार ने जनगणना 2027 के साथ-साथ जातिगत गणना कराने की घोषणा की। यह वर्ष 1931 के बाद से पहली देशव्यापी जातिगत गणना है। ऐतिहासिक संदर्भ स्वतंत्रता के बाद, सरकारों ने जातिविहीन समाज को बढ़ावा देने के लिए पूर्ण जातिगत गणना से परहेज किया। साथ ही, निम्नलिखित के लिए जातीय पहचान को बनाए रखा गया: आरक्षण राजनीतिक प्रतिनिधित्व कल्याणकारी नीतियां इसने एक लंबे समय से चला आ रहा विरोधाभास पैदा किया: सामाजिक रूप से जाति को समाप्त करने का प्रयास। प्रशासनिक रूप से जाति का निरंतर उपयोग। जनगणना 2027 का महत्व जनगणना मूल रूप से 2021 में होनी थी, लेकिन निम्नलिखित कारणों से इसमें देरी हुई: कोविड-19 (COVID-19) महामारी लॉजिस्टिक (प्रबंधन संबंधी) मुद्दे जातिगत गणना दूसरे चरण में होगी: प्रत्येक व्यक्ति अपनी जातिगत पहचान दर्ज कराएगा। इससे पहले की जनगणनाओं में मुख्य रूप से केवल अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की स्थिति ही दर्ज की जाती थी। पिछले प्रयासों में समस्याएं वर्ष 2011 की सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना (SECC) को बड़े मुद्दों का सामना करना पड़ा था: 46 लाख से अधिक जातियों के नाम दर्ज हो गए। डेटा में लगभग 8 करोड़ त्रुटियां (गलतियाँ) पाई गईं। परिणाम: डेटासेट अविश्वसनीय हो गया। अधिकांश निष्कर्षों को कभी भी पूरी तरह से प्रकाशित नहीं किया गया। वर्तमान चुनौतियाँ सरकार को निम्नलिखित विकसित करना होगा: एक मानकीकृत (स्टैंडर्ड) जाति वर्गीकरण सटीक कार्यप्रणाली (मेथोडोलॉजी) त्रुटिहीन डिजिटल प्रोसेसिंग जाति जनगणना को लेकर बहस पक्ष में तर्क कल्याणकारी योजनाओं का बेहतर लक्षित (टार्गेटेड) कार्यान्वयन। प्रतिनिधित्व में सुधार। अधिक सटीक सामाजिक-आर्थिक योजना। विपक्ष में तर्क यह जातिगत पहचान को और मजबूत कर सकती है और जाति उन्मूलन के लक्ष्य में बाधा बन सकती है। जातिगत आधार पर राजनीतिक लामबंदी (पोलराइजेशन) का जोखिम। व्यापक संवैधानिक प्रश्न यदि सामाजिक-आर्थिक संकेतकों के साथ जोड़ा जाए, तो जाति जनगणना कल्याण और प्रतिनिधित्व के लिए उपयोगी हो सकती है। इसके साथ ही, जाति का उन्मूलन एक दीर्घकालिक संवैधानिक लक्ष्य बना रहना चाहिए। नागरिकों के पास खुद को जातिविहीन (बिना किसी जाति के) घोषित करने का विकल्प भी होना चाहिए। बीसीसीआई और आरटीआई (RTI) बहस भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) एक निजी, व्यावसायिक रूप से संचालित संस्था है जिसे कोई प्रत्यक्ष सरकारी फंडिंग नहीं मिलता है। बीसीसीआई का तर्क है कि सूचना के अधिकार (RTI) के तहत खुलासे से उसकी प्रतिस्पर्धी जानकारी उजागर हो सकती है, प्रशासनिक लचीलापन कम हो सकता है और राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ सकता है। बीसीसीआई के पास पहले से ही भ्रष्टाचार विरोधी तंत्र मौजूद हैं और वह न्यायिक समीक्षा के दायरे में आता है। पारदर्शिता की मांग क्यों बनी हुई है? बीसीसीआई का भारत में क्रिकेट पर प्रभावी रूप से एकाधिकार (मोनोपॉली) है। इसे निम्नलिखित का लाभ मिलता है: राष्ट्रीय प्रतीकवाद (देश का प्रतिनिधित्व) मैचों के दौरान पुलिस की

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SC ने जनगणना में जाति गणना के खिलाफ याचिका खारिज की जनगणना 2027 में जातिगत गणना पर सर्वोच्च न्यायालय  भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि सरकार द्वारा जनगणना 2027 में जातिगत गणना को शामिल किए जाने में कुछ भी गलत नहीं है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि सरकारों को पिछड़े समुदायों और कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों की संख्या का पता होना चाहिए; यह नीतिगत मामला है। न्यायालय ने यह तय करने से इनकार कर दिया कि जातिगत गणना को जनगणना का हिस्सा होना चाहिए या नहीं, और स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह से नीतिगत दायरे (पॉलिसी डोमेन) के अंतर्गत आता है। सुधाकर गुमुला द्वारा दायर याचिका में तर्क दिया गया था कि राजनेताओं और कॉर्पोरेट संस्थाओं द्वारा जातिगत डेटा का दुरुपयोग किया जा सकता है और इसका कोई ठोस औचित्य नहीं है। न्यायालय ने जातिगत गणना के खिलाफ दायर इस याचिका को खारिज कर दिया। जनगणना 2027 राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति ने अप्रैल 2025 में जातिगत गणना को मंजूरी दी थी। इससे पहले, जनगणना 2011 तक, केवल अनुसूचित जातियों (SCs) और अनुसूचित जनजातियों (STs) की ही व्यवस्थित रूप से गणना की जाती थी। जातिगत डेटा जनगणना 2027 के दूसरे चरण के दौरान एकत्र किया जाएगा। जनगणना के दो चरण मकान सूचीकरण प्रक्रिया (HLO): आवास की स्थिति, संपत्ति, सुविधाएं आदि। जनसंख्या गणना: जनसांख्यिकीय (demographic), सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक और जाति से जुड़े विवरण। अन्य बिंदु पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने जातिगत डेटा को “एकीकरण का एक साधन” बताया और इसकी तुलना समाज के एमआरआई (MRI) से की। आखिरी बार देशव्यापी व्यापक जातिगत जनगणना औपनिवेशिक भारत में 1931 में आयोजित की गई थी। भारत और इटली संबंध: ‘विशेष रणनीतिक साझेदारी’ भारत- इटली संबंध भारत-इटली संबंधों को अपग्रेड (उन्नत) करके ‘विशेष रणनीतिक साझेदारी’ (स्पेशल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप) का दर्जा दिया गया है। सहयोग के क्षेत्र निम्नलिखित क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा: व्यापार और प्रौद्योगिकी (ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी) रक्षा (डिफेंस) स्वच्छ ऊर्जा और नवाचार (क्लीन एनर्जी एंड इनोवेशन) सुरक्षित माध्यमों से कुशल और अकुशल श्रमिकों की गतिशीलता (मोबिलिटी) हस्ताक्षर किए गए प्रमुख समझौते डिफेंस इंडस्ट्रियल रोड मैप (रक्षा औद्योगिक रोड मैप) महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) में सहयोग पर समझौता ज्ञापन (MoU) इटली की ‘गार्डिया डी विनान्ज़ा’ और भारत के ‘प्रवर्तन निदेशालय’ (ED) के बीच समझौता दोनों देशों के संस्थानों और मंत्रालयों को जोड़ने वाला कृषि और कृषि अनुसंधान पर समझौता रणनीतिक और वैश्विक मुद्दे दोनों देशों ने ‘यूएनसीएलओएस’ (UNCLOS) के अनुरूप एक स्वतंत्र, खुले, शांतिपूर्ण और समृद्ध हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र का समर्थन किया। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज) से होकर नौवहन की स्वतंत्रता और अबाधित वैश्विक प्रवाह का आह्वान किया। अफ्रीका सहयोग भारत और इटली ‘भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन-4’ से पहले अफ्रीकी भागीदारों के साथ त्रिपक्षीय परियोजनाओं पर सहमत हुए। सहयोग के क्षेत्र: डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) कृषि शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचा नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) इसे इटली की ‘मैट्टेई योजना’ और भारत की ‘अफ्रीका विकास साझेदारी’ से जोड़ा गया है। ऊपरी गंगा क्षेत्र में कोई नई जलविद्युत परियोजना नहीं ऊपरी गंगा बेसिन में जलविद्युत परियोजनाओं पर केंद्र का रुख केंद्र सरकार ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) को बताया कि “उत्तराखंड राज्य में गंगा नदी के ऊपरी हिस्सों में स्थित अलकनंदा और भागीरथी नदी बेसिनों में किसी भी अन्य नए जलविद्युत प्रोजेक्ट को अनुमति देने के पक्ष में नहीं।”। पर्यावरण, जल शक्ति और बिजली (विद्युत) मंत्रालयों ने एक संयुक्त हलफनामा (अफेडेविट) दायर कर इस प्रतिबंधात्मक दृष्टिकोण का समर्थन किया है। केवल वही सात परियोजनाएं जारी रहेंगी जो पहले से ही चालू हैं या काफी हद तक पूरी हो चुकी हैं। इससे पहले, बिजली मंत्रालय ने आठ अतिरिक्त परियोजनाओं (2024) का समर्थन किया था। स्वीकृत परियोजनाएं इन सात परियोजनाओं की कुल क्षमता 2,150 मेगावाट (MW) से अधिक है: 1,000 मेगावाट की टिहरी पंप्ड स्टोरेज परियोजना 520 मेगावाट की तपोवन विष्णुगाड परियोजना 444 मेगावाट की विष्णुगाड पीपलकोटी परियोजना 99 मेगावाट की सिंगोली भटवारी परियोजना 76 मेगावाट की फाटा ब्युंग परियोजना मदमहेश्वर परियोजना कालीगंगा-II परियोजना इनमें से चार परियोजनाएं चालू हो चुकी हैं; तीन परियोजनाएं 74 से 80 प्रतिशत तक पूरी हो चुकी हैं। सरकार ने भारी निवेश, निर्माण कार्य के उन्नत चरण में होने और भागीरथी पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (इको-सेंसिटिव जोन) से बाहर होने के कारण इन्हें जारी रखने को सही ठहराया। नई परियोजनाओं को खारिज करने के कारण एक के बाद एक लगातार बांधों का संचयी प्रभाव (क्युमुलेटिव इम्पैक्ट) हिमालय क्षेत्र की भूकंपीय संवेदनशीलता (सेसमिक फ्रैजिलिटी) बार-बार होने वाली आपदाएं: 2013 की केदारनाथ बाढ़ 2021 की ऋषिगंगा बाढ़ 2025 की धराली आकस्मिक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) सर्वोच्च न्यायालय की समिति 2024 में, न्यायालय ने कैबिनेट सचिव टी. वी. सोमनाथन की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था। इसने 21 प्रस्तावित परियोजनाओं की समीक्षा की और पांच परियोजनाओं को शॉर्टलिस्ट (चयनित) किया था: बोवला नंदप्रयाग देवसारी भ्युंडार गंगा झालाकोटी उरगम-II केंद्र सरकार ने अंततः इन पांच परियोजनाओं को भी खारिज कर दिया। पृष्ठभूमि (बैकग्राउंड) यह मामला 2013 की केदारनाथ आपदा के बाद शुरू हुआ था, जिसमें 5,000 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। रवि चोपड़ा (2014) के नेतृत्व वाली विशेषज्ञ संस्था-I (Expert Body-I) ने 24 में से 23 परियोजनाओं को पर्यावरण के लिए हानिकारक पाया था। विनोद तारे के नेतृत्व वाले एक अन्य पैनल ने भी कई परियोजनाओं का विरोध किया था। बी.पी. दास (2020) के नेतृत्व वाली विशेषज्ञ संस्था-II ने अधिक उदार दृष्टिकोण की सिफारिश की थी और संशोधनों के साथ 26 परियोजनाओं का समर्थन किया था। हालाँकि, केंद्र सरकार ने केवल सात परियोजनाओं को ही स्वीकार किया। यूएपीए (UAPA) के तहत जमानत पर सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) मुख्य मुद्दा गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम [यूएपीए] की धारा 43-D(5) के तहत यदि आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया (prima facie) मामला बनता है, तो जमानत मिलना मुश्किल हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप अक्सर बिना मुकदमे के लंबे समय तक कारावास भुगतना पड़ता है। सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय ‘सैयद इफ्तिखार अंद्राबी बनाम एनआईए, जम्मू’ मामले में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अंद्राबी को 5 साल और 9 महीने से अधिक की प्री-ट्रायल हिरासत (मुकदमे से पहले की जेल) के बाद जमानत दे दी। न्यायालय ने पुन: पुष्टि की: यूएपीए के मामलों में भी जमानत ही नियम होना चाहिए (और

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तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन         पृष्ठभूमि (Background) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भाग लिया। शामिल नॉर्डिक देश: डेनमार्क फिनलैंड आइसलैंड नॉर्वे स्वीडन द्विपक्षीय/क्षेत्रीय साझेदारी का उन्नयन (Upgrade) भारत और नॉर्डिक देशों ने अपने संबंधों को “हरित प्रौद्योगिकी और नवाचार रणनीतिक साझेदारी” (Green Technology and Innovation Strategic Partnership) के रूप में उन्नत करने का निर्णय लिया। सहयोग के क्षेत्र (Areas of Cooperation) सतत ऊर्जा (Sustainable Energy) समुद्री सहयोग (Maritime Cooperation) आर्कटिक / ध्रुवीय अनुसंधान (Arctic / Polar Research) साझा मूल्यों पर बल (Shared Values Highlighted) प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि”लोकतंत्र, कानून के शासन और बहुपक्षवाद के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता हमें स्वाभाविक भागीदार बनाती है। प्राचीन डीएनए (DNA) और मानव विकास हजारों साल पहले रहने और मरने वाले लोग अपनी अस्थियों के अवशेष एक विरासत के रूप में छोड़ गए हैं। हाल के वर्षों में, वैज्ञानिकों ने इन अवशेषों से बड़ी संख्या में डीएनए (DNA) को अलग करके उनकी सीक्वेंसिंग (अनुक्रमण) की है। अमेरिका के हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के वैज्ञानिकों के नेतृत्व में शोधकर्ताओं के एक दल ने पश्चिमी यूरेशिया (जिसमें यूरोप, रूस, मध्य एशिया, मध्य पूर्व और ईरान शामिल हैं) के 15,836 प्राचीन डीएनए अनुक्रमों की तुलना उन्हीं देशों के 6,438 आधुनिक लोगों के अनुक्रमों से की है। मुख्य निष्कर्ष (Key Findings) प्राकृतिक चयन (Natural Selection): तुलना से यह सामने आया कि पिछले 8,000 से 10,000 वर्षों (होलोसीन युग) के दौरान कई जीनों के वेरिएंट (समान रूप) की आवृत्ति (frequency) में निरंतर उतार-चढ़ाव आया है। कंप्यूटर सिमुलेशन और सांख्यिकीय तरीकों से यह सिद्ध हुआ है कि यह बदलाव आनुवंशिक विचलन (genetic drift) या जनसंख्या प्रवासन (migration) के बजाय प्राकृतिक चयन के कारण हुआ है। कार्बन डेटिंग (Carbon Dating): आयु निर्धारण की तकनीक वैज्ञानिक किसी कंकाल की आयु का पता लगाने के लिए उसकी हड्डियों और दांतों में कार्बन-14 (रेडियोधर्मी कार्बन) की सापेक्ष मात्रा मापते हैं। निर्माण: ऊपरी वायुमंडल में जब ब्रह्मांडीय किरणें (cosmic rays) नाइट्रोजन परमाणुओं से टकराती हैं, तो कार्बन-14 का निर्माण होता है। इसके रासायनिक गुण गैर-रेडियोधर्मी आइसोटोप (कार्बन-12 और कार्बन-13) के समान होते हैं। प्रक्रिया: जीवित रहने तक शरीर में कार्बन-14 का अनुपात वायुमंडल और भोजन (पौधों/पशुओं) के समान रहता है। मृत्यु के बाद यह स्तर गिरने लगता है क्योंकि रेडियोधर्मी क्षय (decay) के कारण यह पुनः नाइट्रोजन में बदलने लगता है। अर्ध-आयु (Half-life): कार्बन-14 की अर्ध-आयु 5,730 वर्ष होती है (यानी हर 5,730 वर्ष में इसकी मात्रा आधी हो जाती है)। 50,000 वर्षों के बाद, हड्डियों में इसकी मात्रा मृत्यु के समय की तुलना में केवल 2,000वां हिस्सा रह जाती है। विशिष्ट जीनों और लक्षणों का विश्लेषण रक्त समूह (Blood Types) मानव शरीर में ABO जीन की दो प्रतियां होती हैं, जो तीन वेरिएंट (A, B, और O) में आती हैं। शोध में पाया गया कि पिछले 6,000 वर्षों में पश्चिमी यूरेशियाई लोगों में B वेरिएंट की आवृत्ति बढ़ी है, जबकि A वेरिएंट में कमी आई है। ऐसा संभवतः बदलते रोगजनकों (pathogens) के प्रभाव से निपटने के लिए एक इष्टतम संतुलन बनाए रखने के कारण हुआ है। ग्लूटेन संवेदनशीलता और सीलिएक रोग (Coeliac Disease) HLA-DQB1 जीन का एक वेरिएंट लोगों को सीलिएक रोग के प्रति संवेदनशील बनाता है। इसमें गेहूं, जौ और राई में मौजूद ‘गूल्टेन’ के कारण प्रतिरक्षा प्रणाली छोटी आंत पर हमला कर देती है, जिससे उल्टी और पेट दर्द जैसी समस्याएं होती हैं। पिछले 4,000 वर्षों में इस रोगजनक वेरिएंट की आवृत्ति 0% से बढ़कर 20% हो गई है। हालांकि कृषि की शुरुआत 10,000 वर्ष पहले हुई थी, वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि यह वृद्धि केवल या मुख्य रूप से कृषि के उदय के कारण नहीं थी; इसके वास्तविक कारण अभी भी अज्ञात हैं। त्वचा का रंग और बाल (Skin and Hair Pigmentation) लगभग 8,000 वर्ष पहले, मनुष्यों ने उन जीन वेरिएंट्स का चयन करना शुरू किया जो हल्की त्वचा (lighter skin tones) और रंगीन बाल पैदा करते हैं। यह कम धूप वाले क्षेत्रों में विटामिन डी (Vitamin D) के संश्लेषण को बढ़ाने के लिए एक अनुकूलन (adaptation) था, विशेष रूप से उन किसानों के लिए जिनके आहार में इसकी कमी थी। प्राचीन जीन और आधुनिक लक्षण (Ancient Genes, Modern Traits) एचआईवी (HIV) प्रतिरोधक क्षमता: CCR5 जीन के Delta32 वेरिएंट की दो प्रतियां होने से व्यक्ति HIV-1 संक्रमण के प्रति पूरी तरह प्रतिरोधी हो जाता है। पश्चिमी यूरेशियाई लोगों में इस वेरिएंट की आवृत्ति 6,000 से 2,000 वर्ष पहले 2% से बढ़कर 8% हो गई थी। चूंकि HIV की उत्पत्ति केवल 20वीं सदी की शुरुआत में हुई थी, इसलिए यह स्पष्ट है कि अतीत में किसी अन्य अज्ञात प्राचीन रोगजनक (pathogen) के कारण यह चयन हुआ होगा। धूम्रपान (Smoking): यूरेशिया में धूम्रपान तब तक अज्ञात था जब तक कि क्रिस्टोफर कोलंबस 600 वर्ष से भी कम समय पहले अमेरिका से तंबाकू नहीं लाया था। इसके बावजूद, अध्ययन में पाया गया कि आज धूम्रपान की प्रवृत्ति से जुड़े जीन वेरिएंट्स के खिलाफ उस प्राचीन काल में भी प्राकृतिक चयन (selected against) काम कर रहा था। दक्षिण एशियाई (भारतीय) संदर्भ और भविष्य की आवश्यकता दक्षिण एशियाई आनुवंशिक संरचना: दक्षिण एशियाई (भारतीय) लोगों में मुख्य रूप से निम्नलिखित पूर्वजों का आनुवंशिक योगदान है: ईरानी नवपाषाण काल के किसान (Iranian Neolithic Farmers) और पश्चिमी स्टेप चरवाहे (Western steppe herders)। स्वदेशी पूर्वी यूरेशियाई पूर्वज, जिनमें प्राचीन पूर्वज दक्षिण भारतीय (Ancient Ancestral South Indians) शामिल हैं। पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी एशियाई तथा ऑस्ट्रेलियाई (Australasian) पूर्वज। मंगल ग्रह पर ‘ज्वान-वुल्फ प्रभाव’ (Zwan-Wolf Effect) की खोज ज्वान-वुल्फ प्रभाव (Zwan-Wolf Effect) क्या है? सौर पवन (Solar wind): सौर पवन सूर्य से बाहर की ओर बहने वाले आवेशित कणों (charged particles) की एक धारा है। जब यह सौर पवन किसी ग्रह के चुंबकीय क्षेत्र (magnetic field) के निकट पहुँचती है, तो यह चुंबकीय सीमाओं के पास संकुचित (compressed) हो जाती है। इस संकुचन से एक दबाव प्रवणता पैदा होती है, जो आवेशित कणों को चुंबकीय क्षेत्र के साथ-साथ मुख्य धारा से दूर धकेल देती है। इसके परिणामस्वरूप, मुख्य धारा के निकट एक ऐसा क्षेत्र बनता है जहाँ आवेशित कणों का घनत्व (density) कम हो जाता है। इसी घटना को ‘ज्वान-वुल्फ प्रभाव’ कहा जाता है। अनुसंधान और नवीन खोज शोधकर्ताओं ने नासा (NASA) के मावेन (MAVEN) अंतरिक्ष यान का उपयोग करके मंगल ग्रह पर ‘ज्वान-वुल्फ प्रभाव’

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2 September 2025 Current Affairs

  Topic : भारत का कैंसर मैप: एक विश्लेषण     चर्चा में क्यों :  विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, “वर्तमान में 30% से 50% कैंसर को जोखिम कारकों से बचाव और प्रभावी रोकथाम रणनीतियों के माध्यम से रोका जा सकता है।” भारत में कैंसर की व्यापकता पर आधारित एक हालिया रिपोर्ट से यह सामने आया है कि कैंसर एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है, जिसमें क्षेत्रीय असमानताएं और सामाजिक-आर्थिक कारण प्रमुख भूमिका निभाते हैं। UPSC पाठ्यक्रम: प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएँ। मुख्य परीक्षा: सामान्य अध्ययन II, III: स्वास्थ्य, विज्ञान और प्रौद्योगिकी से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित मुद्दे- विकास और उनके अनुप्रयोग पृष्ठभूमि भारत में कैंसर की निगरानी के लिए ICMR–नेशनल सेंटर फॉर डिज़ीज़ इन्फ़ॉर्मेटिक्स एंड रिसर्च (NCDIR) द्वारा कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम संचालित किया जाता है।  इस कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 1981 में की गई थी और इसका उद्देश्य कैंसर की घटनाओं, मृत्यु दर और उपचार की सफलता का आकलन करना है। संविधान के अनुसार जन स्वास्थ्य राज्य सूची का विषय है, किंतु अनुच्छेद 47 के अंतर्गत राज्य को पोषण और जनस्वास्थ्य सुधार की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है।  अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) के अंतर्गत सुप्रीम कोर्ट ने स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार माना है।  इस प्रकार कैंसर नियंत्रण केंद्र और राज्यों के बीच सहयोगात्मक संघवाद (Cooperative Federalism) का विषय है। 1. भारत में कैंसर का मौजूदा परिदृश्य भारत में कैंसर के मामलों पर आधारित 43 कैंसर रजिस्ट्री के विश्लेषण से यह सामने आया है कि किसी व्यक्ति के जीवनकाल में कैंसर विकसित होने का जोखिम लगभग 11 प्रतिशत है।  वर्ष 2024 में अनुमानित 15.6 लाख नए कैंसर मामलों और लगभग 8.74 लाख मौतों की सूचना दर्ज की गई।  ये रजिस्ट्री देश की 10 से 18 प्रतिशत आबादी को कवर करती हैं और 23 राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों में संचालित होती हैं। 2. 2015–2019 का कैंसर डेटा और रुझान साल 2015 से 2019 के बीच एकत्र किए गए आंकड़ों में लगभग 7.08 लाख कैंसर मामलों और 2.06 लाख मौतों को दर्ज किया गया।  इस अध्ययन को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) दिल्ली, टाटा मेमोरियल और अड्यार कैंसर संस्थान जैसे प्रमुख शोध संस्थानों के विशेषज्ञों ने पूरा किया।  कोविड-19 महामारी के प्रभाव के कारण वर्ष 2020 के आंकड़े इसमें शामिल नहीं किए गए। 3. लिंग आधारित असमानताएँ भारत में महिलाओं में कैंसर के 51.1 प्रतिशत मामले दर्ज किए गए, लेकिन मौतों का प्रतिशत केवल 45 रहा।  इसका कारण यह है कि महिलाओं में पाए जाने वाले प्रमुख कैंसर जैसे स्तन और गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर आसानी से पहचाने और इलाज किए जा सकते हैं।  इसके विपरीत पुरुषों में सामान्य कैंसर जैसे फेफड़े और पेट का कैंसर देर से पकड़ में आते हैं और इनका परिणाम अपेक्षाकृत अधिक घातक होता है। 4. पुरुषों में मुँह का कैंसर पुरुषों में अब मुँह का कैंसर सबसे सामान्य कैंसर बन चुका है।  यह फेफड़ों के कैंसर से भी अधिक पाया जा रहा है। तम्बाकू सेवन में कमी (2009–10 में 34.6% से घटकर 2016–17 में 28.6% तक) आने के बावजूद मुँह के कैंसर में वृद्धि देखी जा रही है।  इसका कारण तम्बाकू के प्रभाव का लंबी अवधि में सामने आना और शराब जैसे अन्य जोखिम कारक हैं। 5. पूर्वोत्तर भारत : कैंसर का हॉटस्पॉट पूर्वोत्तर भारत, विशेषकर मिज़ोरम, देश का कैंसर हॉटस्पॉट है।  यहाँ पुरुषों में जीवनकाल का जोखिम 21.1 प्रतिशत और महिलाओं में 18.9 प्रतिशत तक दर्ज किया गया है।  इसके पीछे उच्च तम्बाकू सेवन, अस्वस्थ आहार (फर्मेंटेड मांस, धूम्रित भोजन, अत्यधिक मसाले और गर्म पेय) तथा मानव पैपिलोमा वायरस (HPV), Helicobacter pylori और हेपेटाइटिस जैसी संक्रामक बीमारियों की अधिकता जिम्मेदार है। 6. कैंसर का भौगोलिक वितरण कैंसर का वितरण भारत के विभिन्न क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न प्रकार से दिखाई देता है। हैदराबाद में स्तन कैंसर की दर सबसे अधिक 54 प्रति 1,00,000 है। ऐज़ॉल में गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर 27.1 प्रति 1,00,000 पर सबसे अधिक है। श्रीनगर में पुरुषों में फेफड़ों का कैंसर 39.5 प्रति 1,00,000 पाया गया जबकि महिलाओं में ऐज़ॉल में इसकी दर 33.7 है। अहमदाबाद में पुरुषों में मुँह का कैंसर सबसे अधिक 33.6 है, जबकि महिलाओं में ईस्ट खासी हिल्स में यह दर 13.6 पाई गई। श्रीनगर में प्रोस्टेट कैंसर की दर 12.7 प्रति 1,00,000 दर्ज की गई। कैंसर क्या है? कैंसर बीमारियों का एक व्यापक समूह है,जो शरीर में कोशिकाओं के अनियंत्रित विकास और विभाजन के कारण होने वाली बीमारी है।  यह तब होता है जब सामान्य कोशिकाओं के DNA में उत्परिवर्तन होता है, जिससे अनियंत्रित कोशिका विभाजन होता है।   कैंसर के 100 से अधिक प्रकार हैं, और वे शरीर के लगभग किसी भी भाग में हो सकते हैं। ट्यूमर: कैंसर कोशिकाओं का एक समूह ट्यूमर बना सकता है, जो सौम्य (गैर-कैंसरयुक्त) या घातक (कैंसरयुक्त) हो सकता है। मेटास्टेसिस: घातक ट्यूमर मूल स्थान से शरीर के अन्य क्षेत्रों में फैल सकता है। कैंसर के प्राथमिक कारण कैंसर के विकास में कई जोखिम कारक योगदान करते हैं, लेकिन सटीक कारण अक्सर अज्ञात रहता है। कुछ प्राथमिक कारणों में शामिल हैं: तम्बाकू का उपयोग: धूम्रपान सबसे महत्वपूर्ण जोखिम कारक है, विशेष रूप से फेफड़े, मुँह, गले और एसोफैजियल कैंसर के लिए। रेडिएशन एक्सपोजर:  एक्स-रे, रेडॉन गैस और पराबैंगनी किरणों के संपर्क में आना शामिल है, जो DNA  को नुकसान पहुंचा सकते हैं। संक्रमण: मानव पेपिलोमावायरस (HPV) और हेपेटाइटिस B और C जैसे वायरस गर्भाशय ग्रीवा और यकृत कैंसर जैसे कैंसर का कारण बन सकते हैं। आनुवंशिकी: विरासत में मिली आनुवंशिक उत्परिवर्तन, जैसे कि BRCA1 और BRCA2 जीन, स्तन और डिम्बग्रंथि के कैंसर के जोखिम को बढ़ाते हैं। पर्यावरणीय कारक: रसायनों (एस्बेस्टस, बेंजीन) और प्रदूषकों के संपर्क में आने से कैंसर हो सकता है। जीवनशैली कारक: खराब आहार, शारीरिक निष्क्रियता, शराब का सेवन और मोटापा कई प्रकार के कैंसर से जुड़े हैं। आयु: मस्तिष्क ट्यूमर वृद्ध वयस्कों में अधिक आम है, लेकिन यह किसी भी उम्र में हो सकता है। कुछ प्रकार, जैसे मेडुलोब्लास्टोमा, बच्चों में अधिक आम हैं। ब्रेन कैंसर के बारे में         ब्रेन कैंसर का मतलब है मस्तिष्क में असामान्य कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि, जिससे ट्यूमर का निर्माण होता है।  ये ट्यूमर या तो प्राथमिक (मस्तिष्क में उत्पन्न होने वाले) या द्वितीयक (मेटास्टेटिक, शरीर के अन्य भागों से फैलने वाले) हो सकते हैं।  प्राथमिक ब्रेन कैंसर मस्तिष्क की

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