यूपीएससी 2026 की तैयारी रणनीति पूरी करें

23 June 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf

23 June 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के इस अंक में भारत की बहुआयामी उपलब्धियों का सार है। इसमें UNCTAD 2025 के अनुसार भारत का वैश्विक जहाज पुनर्चक्रण (HKC) में शीर्ष स्थान, न्याय तक पहुँच के लिए ‘दिशा 2.0’ व अनुच्छेद 39A का विश्लेषण, राखीगढ़ी के मानव कंकालों पर AnSI का शोध और भारत के उभरते प्रौद्योगिकी (AI, सेमीकंडक्टर, क्वांटम) इकोसिस्टम के नवीनतम डेटा को शामिल किया गया है।

चर्चा में क्यों है?

संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (UNCTAD) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत वर्ष 2025 में दुनिया का शीर्ष जहाज पुनर्चक्रण (Ship Recycling) देश बन गया है। भारत ने अपने ‘मैरिटाइम इंडिया विज़न (MIV) 2030’ के लक्ष्य को तय समय से 5 साल पहले ही हासिल कर लिया है।

मुख्य आंकड़े

पैरामीटर वर्ष 2024 वर्ष 2025 विकास / प्रभाव
वैश्विक हिस्सेदारी 30.1% 35.4% दुनिया में सबसे ज्यादा
रीसाइक्लिंग वॉल्यूम 1.86 मिलियन GT 2.99 मिलियन GT लगभग 60% की भारी वृद्धि
भविष्य की संभावना (BIMCO) अगले दशक में भारत हर साल 500-600 जहाजों को रीसायकल करेगा।

सरकार की 5 प्रमुख पहलें

भारत को इस मुकाम तक पहुँचाने में सरकार की इन रणनीतिक पहलों का सबसे बड़ा हाथ रहा है:

  • हांगकांग कन्वेंशन (HKC) का अनुपालन: भारत ने जहाज पुनर्चक्रण अधिनियम, 2019 पास किया था। सरकार ने ₹53.5 करोड़ की मदद देकर देश के 115 रीसाइक्लिंग यार्ड्स को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों (HKC-compliant) के अनुकूल बनाया है।
  • शिप-ब्रेकिंग क्रेडिट नोट योजना: इसके तहत जहाज मालिकों को स्क्रैप वैल्यू का 40% क्रेडिट नोट मिलता है। इस क्रेडिट का इस्तेमाल वे भारतीय शिपयार्ड में नया जहाज बनाने के लिए (5% तक की छूट के रूप में) कर सकते हैं। इससे रीसाइक्लिंग और डोमेस्टिक शिपबिल्डिंग दोनों को फायदा हो रहा है।
  • अलंग (Alang) शिप रीसाइक्लिंग यार्ड का विस्तार: गुजरात के अलंग यार्ड की क्षमता को बढ़ाकर 9 मिलियन लाइट डिस्प्लेसमेंट टन (LDT) करने के लिए एक मास्टर प्लान तैयार किया गया है, जिससे भारत की क्षमता दोगुनी हो जाएगी।
  • यूरोपीय संघ (EU) मानकों के लिए प्रयास: भारत लगातार कोशिश कर रहा है कि उसके यार्ड्स को European Union Ship Recycling Regulations (EUSRR) की मंजूरी मिल जाए, ताकि यूरोप के बड़े जहाज भी रीसाइक्लिंग के लिए भारत आ सकें।

हांगकांग कन्वेंशन (HKC)

हांगकांग कन्वेंशन (Hong Kong Convention – HKC) जहाजों को रीसायकल (यानी पुराने जहाजों को तोड़ने और उनके पार्ट्स का दोबारा इस्तेमाल करने) से जुड़ा एक अंतरराष्ट्रीय समझौता (Global Treaty) है।

इसे 2009 में इंटरनेशनल मैरिटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) द्वारा अपनाया गया था, और यह 26 जून 2025 से पूरी दुनिया में कानूनी रूप से लागू हो चुका है।

मुख्य उद्देश्य

जहाजों को तोड़ना दुनिया के सबसे खतरनाक कामों में से एक है। पुराने जहाजों में एस्बेस्टस, भारी धातुएं (Heavy Metals) और कई तरह के जहरीले रसायन होते हैं। इसका उद्देश्य दो चीजों को सुरक्षित करना है:

  1. मानव स्वास्थ्य: यार्ड में काम करने वाले श्रमिकों को हादसों और जहरीले रसायनों से बचाना।
  2. पर्यावरण: जहाजों के कचरे से समुद्र और तटीय इलाकों को प्रदूषित होने से रोकना।

भारत दुनिया का सबसे बड़ा शिप रीसाइक्लिंग हब है (गुजरात का अलंग-सोसैया यार्ड दुनिया का सबसे बड़ा जहाज तोड़ने वाला यार्ड है)। भारत ने 2019 में इस कन्वेंशन की पुष्टि (Ratify) की थी।

सर्कुलर इकोनॉमी (Circular Economy) और ब्लू इकोनॉमी:

जहाजों को तोड़कर जो स्टील और अन्य कीमती धातुएं निकलती हैं, उन्हें रीसायकल करके दोबारा इस्तेमाल किया जाता है। इससे नए खनन (Mining) की जरूरत कम होती है, पर्यावरण बचता है, और तटीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होता है।

आगे की राह (Way Forward)

नंबर-1 बनने के बाद अब भारत के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं जिन पर काम करना होगा:

  1. श्रमिक सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण: जहाजों में मौजूद खतरनाक कचरे (जैसे एस्बेस्टस और टॉक्सिक केमिकल) का सुरक्षित निपटान सुनिश्चित करना।
  2. प्रतिस्पर्धा: बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों से आगे रहने के लिए लगातार अपनी तकनीकों को अपग्रेड करते रहना।

चर्चा में क्यों? (Why in News?)

हाल ही में केंद्रीय कानून और न्याय मंत्रालय ने केंद्रीय क्षेत्र की योजना ‘डिजाइनिंग इनोवेटिव सॉल्यूशंस फॉर होलिस्टिक एक्सेस टू जस्टिस (DISHA)’ के पुनर्गठित और अपग्रेड संस्करण ‘DISHA 2.0’ को अगले 5 वर्षों के लिए मंजूरी दे दी है।

योजना के मुख्य तथ्य

23 June 2026 PIB Summary for UPSC

  • प्रकार: यह एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना (Central Sector Scheme) है, यानी इसका 100% खर्च केंद्र सरकार उठाती है।
  • अवधि: 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक (16वें वित्त आयोग के चक्र के साथ समाप्त होगी)।
  • वित्तीय परिव्यय (Budget): कुल ₹255 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है।
  • लक्ष्य (Target): इसके तहत सभी चार घटकों के माध्यम से कुल 3 करोड़ लाभार्थियों तक न्याय की पहुँच बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

DISHA 2.0 के 4 प्रमुख घटक (Four Core Components)

पहले इस योजना में 3 घटक थे, लेकिन DISHA 2.0 में एक नया तकनीकी घटक जोड़ा गया है।

घटक (Component) मुख्य कार्य और लक्ष्य तकनीक/पहुँच
1. टेली-लॉ (Tele-Law) मुकदमों से पहले मुफ्त कानूनी सलाह देना। देश के 36 राज्यों/UTs के 784 जिलों में 2,50,000 कॉमन सर्विस सेंटर्स (CSCs) का नेटवर्क। आकांक्षी ब्लॉकों में ‘न्याय सहायक’ घर-घर जाकर मदद करेंगे।
2. न्याय बंधु (Nyaya Bandhu) वकीलों और लॉ स्टूडेंट्स में मुफ्त कानूनी सहायता (Pro-Bono) की संस्कृति को बढ़ावा देना। कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 12 के तहत पात्र लोगों को मुफ्त अदालती प्रतिनिधित्व देना और लॉ कॉलेजों में ‘प्रो-बोनो क्लब’ बनाना।
3. कानूनी साक्षरता और जागरूकता (LLLAP) मंत्रालयों, गैर-सरकारी संगठनों (CSOs) और लॉ यूनिवर्सिटीज के साथ मिलकर आम जनता में कानूनी जागरूकता फैलाना। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से देशव्यापी अभियान चलाना।
4. विधि-संजीवनी (VIDHI-Sanjeevani)
(नया घटक)
पूरे कार्यक्रम की निगरानी और डेटा-संचालित निर्णय लेने के लिए एक सेंट्रलाइज्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म। ‘भाषिणी’ (BHASHINI) के सहयोग से विकसित एआई-संचालित बहुभाषी ‘न्याय सेतु’ (Nyaya Setu) चैटबॉट को शामिल किया गया है, जो कानूनी सवालों के तुरंत जवाब देगा।

संवैधानिक और वैश्विक जुड़ाव

यह योजना केवल एक डिजिटल पोर्टल नहीं है, बल्कि यह हमारे देश के बड़े विज़न्स को पूरा करती है:

1. संवैधानिक जनादेश (Constitutional Mandate): यह भारतीय संविधान की प्रस्तावना (सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक न्याय), अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता), अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) और विशेष रूप से अनुच्छेद 39A (सभी के लिए समान न्याय और मुफ्त कानूनी सहायता) को जमीन पर उतारती है।

2. ईज ऑफ जस्टिस (Ease of Justice): प्रधानमंत्री के विज़न के अनुसार, ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘ईज ऑफ लिविंग’ तब तक अधूरे हैं जब तक देश के गरीब से गरीब नागरिक को ‘ईज ऑफ जस्टिस’ (आसानी से न्याय) न मिले।

3. वैश्विक लक्ष्य (SDG-16): यह संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य-16 (SDG-16: शांति, न्याय और मजबूत संस्थाएं) और भारत के ‘विकसित भारत @ 2047’ के संकल्प को सीधा समर्थन देती है।

पुराना ट्रैक रिकॉर्ड (DISHA 1.0: 2021-26)

  • 31 मई 2026 तक, इस योजना ने 2.37 करोड़ से अधिक लाभार्थियों तक पहुँच बनाई।
  • टेली-लॉ के तहत 1.13 करोड़ से अधिक प्री-लिटिगेशन (मुकदमे से पहले) कानूनी सलाह दी गईं।

यह अनुच्छेद राज्य के नीति निदेशक तत्वों (DPSP) का हिस्सा है। इसे 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में जोड़ा गया था।

  • संवैधानिक जनादेश: यह राज्य (State) को निर्देश देता है कि वह यह सुनिश्चित करे कि देश का कानूनी ढांचा इस तरह काम करे जिससे सभी को समान अवसर के आधार पर न्याय मिल सके।
  • आर्थिक बाधाओं को दूर करना: यह स्पष्ट रूप से कहता है कि किसी भी नागरिक को आर्थिक तंगी, गरीबी या किसी अन्य अक्षमता के कारण न्याय पाने से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
  • अनिवार्य दायित्व: इसके तहत राज्य का यह कर्तव्य है कि वह उपयुक्त कानून या योजनाओं के माध्यम से गरीबों और कमजोर वर्गों के लिए मुफ्त कानूनी सहायता (Free Legal Aid) की व्यवस्था करे।

नालसा (NALSA) की संगठनात्मक संरचना

अनुच्छेद 39A के उद्देश्यों को कानूनी रूप देने के लिए संसद ने कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 (Legal Services Authorities Act, 1987) पास किया। इसी एक्ट के तहत 1995 में NALSA (National Legal Services Authority – राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण) का गठन हुआ।

इसकी संगठनात्मक संरचना शीर्ष से लेकर जमीनी स्तर तक एक पिरामिड की तरह काम करती है:

[राष्ट्रीय स्तर] NALSA (सुप्रीम कोर्ट)
       |
[राज्य स्तर] SALSA (हाई कोर्ट)
       |
[जिला स्तर] DLSA (जिला न्यायालय)
       |
[तालुका स्तर] TLSC (मजिस्ट्रेट कोर्ट)

प्रमुख पद (Composition):

  • पेट्रन-इन-चीफ (Patron-in-Chief): भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) इसके संरक्षक-प्रमुख होते हैं।
  • कार्यकारी अध्यक्ष (Executive Chairman): सुप्रीम कोर्ट के दूसरे सबसे वरिष्ठ (Second Senior-most) न्यायाधीश इसके कार्यकारी अध्यक्ष होते हैं।

NALSA के मुख्य कार्य (Core Functions)

23 June 2026 PIB Summary for UPSC

  • मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करना: पात्र व्यक्तियों को वकीलों की फीस, अदालती खर्च (Court Fees), और केस से जुड़े दस्तावेजों को तैयार करने का पूरा खर्च NALSA उठाता है।
  • लोक अदालतों (Lok Adalats) का आयोजन: अदालतों से बाहर आपसी समझौते के जरिए मामलों को निपटाने के लिए लोक अदालतों का संचालन करना, जिससे मुख्य न्यायपालिका पर मुकदमों का बोझ कम हो सके।
  • कानूनी साक्षरता (Legal Literacy): ग्रामीण इलाकों और झुग्गी-झोपड़ियों में कानूनी जागरूकता शिविर लगाना ताकि समाज के हाशिए पर मौजूद लोगों को उनके अधिकारों का पता चल सके।
  • पीड़ित मुआवजा योजनाएं: अपराध से पीड़ित व्यक्तियों (जैसे एसिड अटैक पीड़ित, मानव तस्करी के शिकार) को मुआवजा और पुनर्वास दिलाने में मदद करना।

मुफ्त कानूनी सहायता के लिए कौन पात्र है? (Section 12 of the Act)

हर कोई NALSA के तहत मुफ्त वकील का दावा नहीं कर सकता। अधिनियम की धारा 12 के तहत निम्नलिखित लोग इसके पात्र हैं:

  1. महिलाएं और बच्चे
  2. अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के सदस्य
  3. औद्योगिक श्रमिक (Industrial Workmen)
  4. सामूहिक आपदा, हिंसा, बाढ़ या भूकंप के शिकार लोग
  5. दिव्यांग व्यक्ति (Persons with Disabilities)
  6. हिरासत (Custody) में लिए गए लोग (जैसे जेल में बंद विचाराधीन कैदी)
  7. कम आय वाले नागरिक: ऐसे व्यक्ति जिनकी वार्षिक आय राज्य सरकार द्वारा निर्धारित सीमा (आमतौर पर ₹3 लाख से कम) से कम हो।

चर्चा में क्यों? (Why in News?)

हाल ही में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने हरियाणा के राखीगढ़ी पुरास्थलीय उत्खनन (2025-26 सीजन) से मिले मानव कंकालों को विस्तृत वैज्ञानिक जांच के लिए भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण (AnSI) को सौंप दिया है। यह कदम दोनों संस्थाओं के बीच हुए एक समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत उठाया गया है।

राखीगढ़ी: एक नजर में

  • स्थिति: यह हरियाणा के हिसार जिले में स्थित है।
  • महत्व: लगभग 550 हेक्टेयर में फैला राखीगढ़ी, सिंधु-सरस्वती सभ्यता का सबसे बड़ा ज्ञात स्थल (Largest Harappan Site) है। (इसने मोहनजोदड़ो को पीछे छोड़ दिया है)।
  • कालक्रम: यहाँ प्रारंभिक हड़प्पा (Early Harappan) से लेकर परिपक्व हड़प्पा (Mature Harappan) काल तक निरंतर निवास के प्रमाण मिले हैं।
  • ताजा खोज: खुदाई के दौरान टीला नंबर 7 (Mound No. 7) से, जो कि एक कब्रिस्तान (Burial Ground) है, तीन संपूर्ण मानव कंकाल और अन्य अस्थि अवशेष मिले हैं।

उन्नत वैज्ञानिक तकनीकें और उनका महत्व

इन कंकालों की जांच कोलकाता स्थित AnSI की प्रयोगशाला में की जाएगी। इस शोध में निम्नलिखित आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है:

  • प्राचीन डीएनए (aDNA) विश्लेषण: यह तकनीक बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) और CCMB हैदराबाद के सहयोग से की जा रही है। इससे हड़प्पा के लोगों के आनुवंशिक इतिहास (Genetic History), उनके पूर्वजों और प्राकृतिक चयन (Natural Selection) को समझने में मदद मिलेगी।
  • स्थिर आइसोटोप अध्ययन (Stable Isotope Studies): इससे उस काल के लोगों के खान-पान (Diet) और उनके प्रवास (Migration Patterns) यानी वे कहाँ से आए और कहाँ गए, इसका पता चलेगा।
  • पैलियोपैथोलॉजिकल जांच (Palaeopathological Investigations): इसके जरिए प्राचीन काल में फैली बीमारियों (Diseases), महामारियों और स्वास्थ्य के स्तर का अध्ययन किया जाएगा।
  • शहरीकरण का जैविक प्रभाव: प्रोफेसर सुभाष वालिंबे के अनुसार, यह शोध समझने में मदद करेगा कि अचानक हुए शहरीकरण (Urbanization) ने मानव शरीर, स्वास्थ्य और बीमारियों के प्रति उनकी प्रतिरोधक क्षमता को कैसे प्रभावित किया।

सहयोगी संस्थान (Key Collaborators)

यह शोध भारत में बहु-विषयक (Multidisciplinary) अनुसंधान का एक बेहतरीन उदाहरण है, जिसमें AnSI के साथ निम्नलिखित संस्थान जुड़ रहे हैं:

  1. बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (BSIP), लखनऊ (जलवायु और पर्यावरण पुनर्निर्माण के लिए)।
  2. यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (UCL) और सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB), हैदराबाद

इतिहास और विज्ञान का अनूठा संगम: यह खोज और शोध इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हड़प्पा सभ्यता की उत्पत्ति (Origins of Harappan Civilization) और उनके आर्यों या अन्य समकालीन सभ्यताओं के साथ संबंधों से जुड़े दशकों पुराने विवादों और बहसों को सुलझाने के लिए ठोस वैज्ञानिक और आनुवंशिक प्रमाण (Empirical Evidence) प्रदान करेगा।

चर्चा में क्यों? (Why in News?)

हाल ही में जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत केवल एक बड़ा डिजिटल बाजार (Consumer Base) होने की छवि से बाहर निकलकर अब ग्लोबल टेक्नोलॉजी पावरहाउस के रूप में उभर रहा है। भारत ने एआई, सेमीकंडक्टर, क्वांटम और सुपरकंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में मिशन-मोड पहलों के जरिए विकसित भारत 2047 की नींव मजबूत की है।

डिजिटल इंडिया:

पैरामीटर वर्ष 2014/2019 वर्ष 2025/2026 प्रगति / प्रभाव
ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क 19.35 लाख किमी (2019) 42.36 लाख किमी (2025) ग्रामीण और शहरी कनेक्टिविटी में भारी सुधार।
इंटरनेट कनेक्शन 25.15 करोड़ (2014) 102.86 करोड़ (2026) देश की एक बड़ी आबादी डिजिटल अर्थव्यवस्था से जुड़ी।
डेटा खपत (प्रति माह) 61.66 MB (2014) 24.01 GB (2025) टेलीमेडिसिन, ई-लर्निंग और डिजिटल पेमेंट में उछाल।
डेटा की कीमत ₹269 / GB (2014) ₹8-10 / GB (2025) दुनिया में सबसे सस्ती डेटा दरों में से एक।

भविष्य की तैयारी: 6 प्रमुख स्तंभ (6 Pillars of Future Tech)

भारत सरकार ने देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 6 क्षेत्रों में मिशन-मोड कार्यक्रम शुरू किए हैं:

1. सुपरकंप्यूटिंग (National Supercomputing Mission – 2015)

  • बजट: ₹4,500 करोड़।
  • उपलब्धि: देश में 38 सुपरकंप्यूटर तैनात किए जा चुके हैं (कुल क्षमता: 47 पेटाफ्लॉप्स)।
  • स्वदेशी विकास: भारत ने अपनी स्वदेशी हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर सीरीज ‘परम रुद्र’ (PARAM Rudra) विकसित की है।

2. सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम (Semicon India & ISM 2.0)

  • सेमिसन इंडिया प्रोग्राम (2021): ₹76,000 करोड़ के बजट के साथ शुरू। इसके तहत जून 2026 तक ₹1.64 लाख करोड़ की 12 परियोजनाएं मंजूर (1 फैब, 2 कंपाउंड फैब, 9 पैकेजिंग यूनिट)।
  • ISM 2.0 (बजट 2026-27): इसके तहत घरेलू चिप डिजाइन को बढ़ावा देने के लिए DLI (डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव) योजना चलाई जा रही है। मार्च 2026 तक 24 कंपनियों को वित्तीय सहायता दी गई और 12nm जैसे एडवांस चिप डिजाइन किए गए।

3. नेशनल क्वांटम मिशन (NQM – अप्रैल 2023)

  • बजट: ₹6,003.65 करोड़ (4 क्षेत्रों पर फोकस: कंप्यूटिंग, कम्युनिकेशन, सेंसिंग और मटीरियल)।
  • उपलब्धि: भारत ने तय समय से 6 साल पहले ही 1,000 किमी का सुरक्षित क्वांटम कम्युनिकेशन नेटवर्क प्रदर्शित कर दिया है। फरवरी 2026 में अमरावती में भारत की पहली ‘क्वांटम वैली’ की आधारशिला रखी गई।

4. इंडिया-एआई मिशन (IndiaAI Mission – 2024)

  • बजट: ₹10,300 करोड़ से अधिक।
  • स्थिति (2026): भारत में लगभग 1.8 लाख स्टार्टअप हैं, जिनमें से 89% एआई सॉल्यूशंस का उपयोग कर रहे हैं। बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 38,000 से अधिक GPUs वाली कंप्यूटिंग फैसिलिटी और ‘AI कोष’ प्लेटफॉर्म (12,115 से अधिक डेटासेट) बनाया गया है।

5. ब्लॉकचेन और क्लाउड कंप्यूटिंग (MeghRaj 2.0 & NBF)

  • मेघराज 2.0 (MeghRaj): सरकारी क्लाउड प्लेटफॉर्म, जिससे जून 2026 तक 2,323 सरकारी विभाग (जैसे डिजिलॉकर, MyGov) जुड़ चुके हैं। बजट 2026-27 में क्लाउड और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 2047 तक टैक्स हॉलिडे की घोषणा की गई है।
  • नेशनल ब्लॉकचेन फ्रेमवर्क (NBF): अक्टूबर 2025 तक 3 करोड़ से अधिक संपत्ति के दस्तावेजों का ब्लॉकचेन के जरिए सत्यापन किया गया है, जिससे जमीन के विवाद कम हुए हैं। आरबीआई का ‘डिजिटल रुपया (e₹)’ भी इसी दिशा में एक कदम है।

6. बायो-प्रौद्योगिकी (Biotechnology – BioE3 Policy)

  • प्रगति: भारत का बायोटेक क्षेत्र जून 2026 तक 190 अरब डॉलर (USD 190 Billion) तक पहुँच गया है। DBT-BIRAC ने स्टार्टअप्स की मदद के लिए 25 राज्यों/UTs में 94 बायो-इंक्यूबेटर्स स्थापित किए हैं।

मानव पूंजी और कौशल विकास (Human Capital & Skilling)

तकनीक को चलाने के लिए कुशल कार्यबल (Workforce) तैयार करने हेतु उठाए गए कदम:

  • ANRF और RDI योजना: अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए 2024 में ‘अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन’ (ANRF) चालू किया गया। जुलाई 2025 में निजी क्षेत्र के रिसर्च के लिए ₹1 लाख करोड़ के कॉर्पस के साथ RDI (अनुसंधान विकास और नवाचार) योजना शुरू हुई।
  • इमर्जिंग स्किल्स: FutureSkills PRIME प्लेटफॉर्म पर 27.53 लाख से अधिक उम्मीदवार पंजीकृत हैं (80% टियर-2 और टियर-3 शहरों से)। इसके अलावा स्कूल स्तर (कक्षा 6-12) पर एआई साक्षरता के लिए SOAR कार्यक्रम (जुलाई 2025) चलाया जा रहा है।
  • सेमीकंडक्टर टैलेंट: चिप्स टू स्टार्टअप (C2S) कार्यक्रम के तहत 85,000 उद्योग-तैयार पेशेवर तैयार किए जा रहे हैं।

भारत की वैश्विक विश्वसनीयता (Global Credibility)

  • ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (GII): भारत 2015 के 81वें स्थान से लंबी छलांग लगाकर 2025 में 38वें स्थान पर पहुँच गया है।
  • ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC): भारत में अब 2,100 से अधिक GCC हैं (3,728 यूनिट्स), जो दुनिया की बड़ी कंपनियों के लिए ‘इन्वेंशन नर्व सेंटर’ बन चुके हैं। 2021 के बाद बने लगभग आधे GCC पूरी तरह AI-फोकस्ड हैं।
  • भारत 6G एलायंस (B6GA): 2023 में गठित यह संगठन देश में स्वदेशी 6G अनुसंधान और विकास (R&D) को दिशा दे रहा है।

भारत का यह तकनीकी परिवर्तन केवल आर्थिक विकास के लिए नहीं है, बल्कि यह “डिजिटल समावेशन” (Digital Inclusion) का एक वैश्विक मॉडल है। भारत ने दुनिया को दिखाया है कि कैसे जनसंख्या के पैमाने (Population Scale) पर सस्ती, सुलभ और सुरक्षित तकनीक लागू की जा सकती है, जो इसे वैश्विक स्तर पर एक ‘विश्वसनीय भागीदार’ (Trusted Partner) बनाती है।

चर्चा में क्यों? (Why in News?)

हाल ही में केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत की अध्यक्षता में नई दिल्ली में पर्यटन और आतिथ्य (Hospitality) क्षेत्र के दिग्गजों (जैसे- FAITH, ASSOCHAM, FICCI, CII, आदि) के साथ एक उच्च स्तरीय संवाद का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य पर्यटन क्षेत्र में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देना और नियामकीय बाधाओं को दूर करना था।

23 June 2026 PIB Summary for UPSC

पर्यटन क्षेत्र में सुधार के लिए प्रमुख सरकारी प्रस्ताव (Key Policy Proposals)

सरकार इस सेक्टर को इंस्पेक्टर राज से मुक्त कर डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए निम्नलिखित कदम उठा रही है:

  • वर्गीकरण प्रणाली का सरलीकरण (Self-Declaration Model): होटलों के वर्गीकरण (Classification) के लिए अब ‘निरीक्षण-आधारित’ (Inspection-based) व्यवस्था को खत्म करके ‘स्व-घोषणा आधारित मूल्यांकन’ (Self-Declaration-based Assessment) लागू किया जाएगा। इससे भ्रष्टाचार और देरी कम होगी।
  • लाइसेंस और वर्गीकरण को अलग करना: पर्यटन मंत्रालय ने आतिथ्य इकाइयों (Hospitality Units) के वर्गीकरण को अनिवार्य लाइसेंसिंग से अलग (Delink) कर दिया है, जिससे बिजनेस शुरू करना आसान होगा।
  • चेकलिस्ट और प्रमाणपत्रों में कटौती: होटल और टूर ऑपरेटर्स के लिए अनिवार्य प्रमाणपत्रों की संख्या को कम किया जाएगा और समय सीमा (Timelines) तय की जाएगी।
  • एंटिटी लॉकर (Entity Locker): पर्यटन क्षेत्र के लिए एक डिजिटल ‘एंटिटी लॉकर’ की अवधारणा पर चर्चा हुई, जहां व्यवसाय अपने दस्तावेज सुरक्षित रख सकेंगे। इससे बार-बार पेपरवर्क जमा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
  • सेंट्रलाइज्ड डेटाबेस: नीति निर्माण को मजबूत करने के लिए मंत्रालय होटलों, होमस्टे, टूर ऑपरेटरों और गाइडों का एक रियल-टाइम डेटाबेस तैयार करेगा।

उद्योग जगत की मांगें और चिंताएं (Industry Recommendations)

पर्यटन क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए उद्योग जगत ने निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:

क्षेत्र (Sector) प्रमुख सुझाव / मांगें अपेक्षित प्रभाव
टैक्स और वीज़ा वीज़ा प्रक्रियाओं को और सरल बनाना तथा टैक्स ढांचे (Taxation Framework) को तर्कसंगत बनाना। विदेशी पर्यटकों (FTAs) की संख्या में वृद्धि होगी।
सिंगल विंडो क्लीयरेंस राज्यों और संबंधित मंत्रालयों को जोड़कर स्वीकृतियों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम बनाना। नए होटलों और रिसॉर्ट्स में निवेश आसान होगा।
डेस्टिनेशन मार्केटिंग प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत के पर्यटन स्थलों की ब्रांडिंग और आक्रामक प्रचार (Promotion) करना। वैश्विक पर्यटन सूचकांक में भारत की रैंकिंग सुधरेगी।

नए उभरते हुए पर्यटन क्षेत्र (Emerging Growth Segments)

बैठक में पारंपरिक पर्यटन से हटकर कुछ नए क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई, जो रोजगार सृजन में गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं:

  1. लाइव इवेंट्स और मनोरंजक पार्क (Live Events & Amusement Parks)
  2. अनुभवात्मक पर्यटन (Experiential Tourism)
  3. होमस्टे (Homestays) को एक वैध उप-क्षेत्र बनाना: ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए होमस्टे के लिए आसान नियम बनाना।

आर्थिक इंजन के रूप में पर्यटन:

पर्यटन क्षेत्र भारत में सबसे बड़े रोजगार प्रदाताओं (Employment Generators) में से एक है, जो कुशल और अकुशल दोनों तरह के श्रमिकों को काम देता है। ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ में सुधार करने से न केवल विदेशी मुद्रा (Foreign Exchange) भंडार बढ़ेगा, बल्कि यह ‘विकसित भारत @ 2047’ के तहत ग्रामीण और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को मुख्यधारा से जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम बनेगा।

चर्चा में क्यों? (Why in News?)

हाल ही में केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के तहत कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने नई दिल्ली (कर्तव्य भवन) में आईएएस ई-सिविल लिस्ट 2026′ लॉन्च की है। यह सिविल लिस्ट का 71वां संस्करण है और पीडीएफ (e-book) फॉर्मेट में जारी होने वाला छठा संस्करण है।

आईएएस कैडर की वर्तमान स्थिति

पैरामीटर सरकारी आंकड़े (As on 01 Jan 2026)
कुल स्वीकृत कैडर क्षमता (Authorized Strength) 7,026
वर्तमान में कार्यरत आईएएस अधिकारी (In Position) 5,755
कुल कैडर की संख्या 25 कैडर
ऐतिहासिक डेटा वर्ष 1969 से अब तक सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से नियुक्त सभी IAS अधिकारियों की जानकारी।

ई-सिविल लिस्ट 2026 की मुख्य विशेषताएं और तकनीक

यह केवल अधिकारियों की डायरेक्टरी (Directory) नहीं है, बल्कि एक आधुनिक प्रशासनिक टूल है:

  • एडवांस सर्च और हाइपरलिंकिंग: इसके जरिए सरकारें किसी भी अधिकारी को उसके बैच, कैडर, वर्तमान पोस्टिंग, शैक्षणिक योग्यता, वेतन स्तर और सेवानिवृत्ति (Superannuation) की तारीख के आधार पर तुरंत खोज सकती हैं।
  • टैलेंट मैपिंग (Talent Mapping): यह तकनीक-आधारित व्यवस्था अधिकारियों की विशिष्ट विशेषज्ञता (Domain Expertise) और अनुभव को ट्रैक करती है, जिससे सही काम के लिए सही अधिकारी का चुनाव आसान होता है।
  • भविष्य की प्रशासनिक योजना: इसमें अगले 5 वर्षों में सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों का पूरा डेटा है, जिससे केंद्र और राज्यों को अपनी जनशक्ति (Manpower) की जरूरतों को पहले से प्लान करने में मदद मिलती है।

प्रशासनिक महत्व

1. डेटा-संचालित शासन (Data-Driven Governance):

यह कदम ‘मिशन कर्मयोगी’ के विज़न को मजबूत करता है। सही डेटा होने से अधिकारियों के ट्रांसफर, पोस्टिंग और कैडर प्रबंधन में राजनीतिक हस्तक्षेप कम होता है और योग्यता (Merit) को बढ़ावा मिलता है।

2. भौगोलिक विविधता और स्थानीय समाधान:

भारत के पहाड़ी, दूरदराज और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों की प्रशासनिक जरूरतें अलग होती हैं। इस डिजिटल डेटाबेस की मदद से उन क्षेत्रों के लिए उपयुक्त अनुभव और विशेषज्ञता वाले अधिकारियों की पहचान तुरंत की जा सकती है।

3. पर्यावरण और वित्तीय बचत:

भारी-भरकम किताबों की छपाई बंद होने से सरकारी संसाधनों (कागज और पैसे) की बचत हुई है, जो ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘सस्टेनेबल गवर्नेंस’ के लक्ष्यों के अनुकूल है।

आगे की राह (Way Forward)

ई-सिविल लिस्ट के बाद अब अगला कदम यह होना चाहिए कि:

  1. इसे एआई (AI) और प्रेडिक्टिव एनालिसिस से जोड़ा जाए ताकि भविष्य में होने वाली प्रशासनिक रिक्तियों को ऑटोमैटिकली ट्रैक किया जा सके।
  2. इस मॉडल को राज्य लोक सेवाओं (State Civil Services) में भी पूरी तरह अनिवार्य किया जाए ताकि जमीनी स्तर पर गवर्नेंस सुधर सके।

सितंबर 2020 में शुरू किया गया मिशन कर्मयोगी, भारतीय लोक सेवकों (Civil Servants) की क्षमता निर्माण के लिए अब तक का सबसे बड़ा बुनियादी सुधार है। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय नौकरशाही को अधिक सृजनात्मक, कल्पनाशील, सक्रिय, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम बनाना है ताकि वे ‘विकसित भारत’ की आकांक्षाओं को पूरा कर सकें।

मिशन कर्मयोगी के 6 मुख्य स्तंभ (6 Core Pillars)

  1. नीतिगत ढांचा (Policy Framework): निरंतर सीखने और क्षमता निर्माण के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय करना।
  2. संस्थागत ढांचा (Institutional Framework): इसमें प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली ‘मानव संसाधन परिषद’, क्षमता निर्माण आयोग (CBC) और एक विशेष प्रयोजन वाहन (SPV – Karmayogi Bharat) शामिल हैं।
  3. योग्यता ढांचा (Competency Framework): प्रत्येक प्रशासनिक पद के लिए आवश्यक कौशल (Skills) और व्यवहार को परिभाषित करना।
  4. डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म (iGOT-Karmayogi): ऑनलाइन प्रशिक्षण के लिए तैयार किया गया एक विश्वस्तरीय प्लेटफॉर्म।
  5. इलेक्ट्रॉनिक मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (e-HRMS): इसके जरिए अधिकारियों के करियर की प्रगति, ट्रांसफर और कौशल का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाता है।
  6. निगरानी और मूल्यांकन ढांचा (Monitoring & Evaluation): प्रशिक्षण के प्रभावों और प्रदर्शन का निरंतर मूल्यांकन करना।

मुख्य विशेषताएं (Key Features)

  • ‘रूल-बेस्ड’ से ‘रोल-बेस्ड’ में परिवर्तन: अब अधिकारियों को केवल नियमों के रट्टे लगाने के बजाय उनकी विशिष्ट भूमिका (Role) और जिम्मेदारी के अनुसार प्रशिक्षित किया जा रहा है।
  • व्यवहारिक और डोमेन प्रशिक्षण: यह तीन स्तरों पर कौशल विकास करता है:
    • व्यवहारिक (Behavioral): नागरिकों के प्रति विनम्रता और सेवा भाव।
    • कार्यात्मक (Functional): प्रशासनिक और तकनीकी कार्यकुशलता।
    • डोमेन (Domain): विशिष्ट क्षेत्रों (जैसे- वित्त, कृषि, रक्षा) की गहरी समझ।
  • आजीवन और निरंतर सीखना (Continuous Learning): यह केवल सेवा में आने से पहले की ट्रेनिंग नहीं है, बल्कि अधिकारी पूरी सर्विस के दौरान अपनी जरूरत के अनुसार iGOT प्लेटफॉर्म से नए कोर्स सीख सकते हैं।
  • 360-डिग्री फीडबैक: मूल्यांकन में केवल वरिष्ठ अधिकारियों की रिपोर्ट नहीं, बल्कि सहकर्मियों और आम जनता के फीडबैक को भी महत्व देना।


22 June का current affairs पढ़ें

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top