3 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक न्याय को मजबूत करने वाले ‘मानस’ (MANAS) डिजिटल कवच, बुनियादी ढांचे को गति देने वाले कोयला ब्लॉक आवंटन (संशोधन) नियम 2026, सुशासन को ‘ह्यूमन-लेड AI’ से जोड़ने वाले 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन (जयपुर घोषणा पत्र), पर्यावरण संरक्षण को समर्पित 3रे वैश्विक प्लास्टिक रीसाइक्लिंग कॉन्क्लेव (GCPRS), कृषि-जैव विविधता के मील का पत्थर बोरजुली जैव विविधता विरासत स्थल (BHS) और युवा नीति-निर्माण से जुड़ी सांसद लीड फेलोशिप को व्यापक रूप से शामिल किया गया है।
कला संस्कृति विकास योजना (KSVY) — अनुदान वर्ष 2026-27
- प्रारंभिक परीक्षा: सरकारी योजनाएं, कला और संस्कृति का संरक्षण, संस्कृति मंत्रालय की पहल।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 1 & 2): भारतीय संस्कृति के विभिन्न कला रूपों, साहित्य और अमूर्त विरासत का संरक्षण; विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
2 जुलाई 2026 को केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने ‘कला संस्कृति विकास योजना (KSVY)’ के विभिन्न प्रमुख घटकों के तहत अनुदान वर्ष 2026-27 के लिए आधिकारिक तौर पर आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस पहल के तहत देश भर के पात्र सांस्कृतिक संगठनों, गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), कलाकारों, शोधकर्ताओं और प्रतिष्ठित संस्थानों को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने प्रस्ताव जमा करने को कहा गया है ताकि कला के विभिन्न रूपों को वित्तीय प्रोत्साहन दिया जा सके।
योजना के मुख्य उद्देश्य और विभिन्न घटक
1. प्रमुख घटक और उनकी विधाएं (Scheme Components)
- गुरु-शिष्य परंपरा (रेपर्टरी ग्रांट): इसका उद्देश्य पारंपरिक गुरु-शिष्य प्रणाली को जीवित रखना है, जिसके तहत वरिष्ठ उस्तादों और उनके शिष्यों को वित्तीय सहायता दी जाती है।
- सांस्कृतिक कार्य और उत्पादन अनुदान योजना (CFPGS): यह विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों, नाटकों, प्रदर्शनियों और नए कलात्मक प्रोडक्शंस के आयोजन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
- राष्ट्रीय उपस्थिति वाले सांस्कृतिक संगठनों को सहायता: देश के ऐसे बड़े सांस्कृतिक संगठन जिनका प्रभाव राष्ट्रीय स्तर पर है, उन्हें अपने बुनियादी ढांचे और निरंतर गतिविधियों के लिए इसके तहत ग्रांट-इन-एड मिलती है।
- सीनियर/जूनियर फैलोशिप: कला और संस्कृति के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अनुभवी (Senior) और उभरते (Junior) कलाकारों व शोधकर्ताओं को शोध के लिए फैलोशिप दी जाती है।
- युवा कलाकारों को छात्रवृत्ति (Scholarship): सांस्कृतिक क्षेत्रों में सक्रिय युवा प्रतिभाओं को उनके कौशल विकास और प्रशिक्षण को निरंतर बनाए रखने के लिए मासिक या वार्षिक स्कॉलरशिप का प्रावधान है।
- सांस्कृतिक अनुसंधान के लिए टैगोर राष्ट्रीय फैलोशिप (TNFCR): यह सांस्कृतिक अनुसंधान, अभिलेखागारों के अध्ययन और भारतीय कला के इतिहास पर गहन शोध करने वाले विद्वानों को दी जाने वाली एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय फैलोशिप है।
2. आवेदन और कार्यान्वयन की प्रक्रिया
- पात्रता मानदंड: केवल वही आवेदन स्वीकार किए जाएंगे जो संस्कृति मंत्रालय के विशिष्ट दिशानिर्देशों और पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं।
- समय सीमा: विभिन्न घटकों के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 7 जुलाई, 15 जुलाई और 31 जुलाई 2026 के बीच निर्धारित की गई है, और अधूरे पाए गए आवेदनों को स्वतः निरस्त कर दिया जाएगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| घटक / बिंदु | तथ्य |
| योजना का नाम | कला संस्कृति विकास योजना (KSVY) |
| नोडल मंत्रालय | संस्कृति मंत्रालय (Ministry of Culture), भारत सरकार। |
| योजना की प्रकृति | यह एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना (Central Sector Scheme) है जो वित्तीय सहायता/अनुदान पर आधारित है। |
| लक्षित समूह | कलाकार, सांस्कृतिक NGO, शोधकर्ता, और राष्ट्रीय स्तर के सांस्कृतिक संस्थान। |
| प्रमुख विशेष फैलोशिप | टैगोर राष्ट्रीय फैलोशिप (TNFCR) — यह विशेष रूप से सांस्कृतिक अनुसंधान के लिए दी जाती है। |
| कार्यान्वयन वर्ष | वर्तमान आवेदन चक्र अनुदान वर्ष 2026-27 के लिए शुरू किया गया है। |
एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग द्वारा सुपरअलॉय बाई-मेटालिक संरचनाओं में ऐतिहासिक सफलता
- प्रारंभिक परीक्षा: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science & Technology) – एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग (3D प्रिंटिंग), लेजर-आधारित पाउडर बेड फ्यूजन, सुपरअलॉय।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियां; स्वदेशी रूप से प्रौद्योगिकी का विकास; विनिर्माण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत)।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
2 जुलाई 2026 को जारी प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय शोधकर्ताओं ने एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग (3D प्रिंटिंग) तकनीक का उपयोग करके एक दरार-मुक्त (Crack-free) ‘बाई-मेटालिक संरचना’ विकसित करने में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। हैदराबाद स्थित ARCI के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित यह स्वदेशी तकनीक महंगे सुपरअलॉय के समग्र उपयोग को कम करके भारत की आयात निर्भरता को काफी हद तक कम कर सकती है।
क्या है यह तकनीक और क्यों है यह एक ‘ब्रेकथ्रू’?
एयरोस्पेस, परमाणु रिएक्टर और थर्मल पावर प्लांट के कुछ हिस्से (जैसे गैस टर्बाइन) 2000°C जैसे अत्यधिक तापमान का सामना करते हैं, जबकि उनके ठीक बगल वाले हिस्से कम तापमान पर काम करते हैं। ऐसे में एक ही घटक (Component) में दो अलग-अलग धातुओं को जोड़ना तकनीकी रूप से बेहद फायदेमंद होता है—जैसे स्टेनलेस स्टील (जो मजबूत और संक्षारण प्रतिरोधी है) और निकल-आधारित सुपरअलॉय (जो उच्च तापमान और तनाव झेल सकता है)।
पारंपरिक विनिर्माण बनाम नई तकनीक
- पारंपरिक चुनौती: स्टेनलेस स्टील (SS316L) और इनकोनेल सुपरअलॉय (IN718) को पारंपरिक वेल्डिंग से जोड़ना बेहद कठिन होता है क्योंकि इनके पिघलने के तापमान और रासायनिक संरचना में बड़ा अंतर होता है, जिससे जोड़ों पर दरारें (Solidification Cracking) या भंगुरता आ जाती है।
- समाधान (नई तकनीक): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के एक स्वायत्त संस्थान, इंटरनेशनल एडवांस्ड रिसर्च सेंटर फॉर पाउडर मेटलर्जी एंड न्यू मैटेरियल्स (ARCI), हैदराबाद के शोधकर्ताओं ने ‘लेजर-आधारित पाउडर बेड फ्यूजन’ (PBF-LB/M) तकनीक का उपयोग किया।
- इन्होंने सतह पर पिसे हुए IN718 प्लेट पर सीधे SS316L की लेयरिंग करके बिना किसी दरार या सरंध्रता (Porosity) के एक मजबूत बाई-मेटालिक जोड़ तैयार कर दिया।
यांत्रिक गुण और सफलता के प्रमाण
- माइक्रो-हार्डनेस: इस इंटरफेस (जोड़) ने लगभग 310 HV की चरम कठोरता प्रदर्शित की।

- तन्य शक्ति (Tensile Strength): इसका अल्टीमेट टेनसाइल स्ट्रेंथ (UTS) 550 ± 30 MPa दर्ज किया गया।
- मजबूती का प्रमाण: जब इस संरचना का परीक्षण किया गया, तो खिंचाव के कारण ब्रेक या विफलता जोड़ (Junction) से दूर, अपेक्षाकृत नरम SS316L वाले हिस्से की तरफ हुई, जो यह साबित करता है कि दोनों धातुओं के बीच का जोड़ अत्यंत मजबूत है।
- शोध का प्रकाशन: इस खोज को प्रसिद्ध वैज्ञानिक पत्रिका ‘प्रोग्रेस इन एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग’ में प्रकाशित किया गया है (शोधकर्ता टीम: एस. नारायणस्वामी, गुरुराज तेलसंग, नोक्यून पार्क और रवि बाथे)।
महत्वपूर्ण औद्योगिक अनुप्रयोग
- एयरोस्पेस क्षेत्र: हवाई जहाजों या रॉकेटों में स्टील वाले हिस्से को भार वहन (Load-bearing) के लिए और इनकोनेल वाले हिस्से को अत्यधिक गर्मी प्रतिरोध के लिए रणनीतिक रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है।
- ऊर्जा क्षेत्र: परमाणु और अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल (USC) कोयला आधारित बिजली संयंत्रों के लिए बॉयलर ट्यूब और हीट एक्सचेंजर्स का निर्माण।
- तेल और गैस प्रसंस्करण उद्योग: जहां उच्च तापमान शक्ति और संक्षारण (Corrosion) प्रतिरोध दोनों की एक साथ आवश्यकता होती है।
16वां भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन (संयुक्त वक्तव्य)
- प्रारंभिक परीक्षा: भारत और उसके पड़ोसी व वैश्विक देशों के साथ संबंध, अंतर्राष्ट्रीय समझौते, महत्वपूर्ण रक्षा अभ्यास और द्विपक्षीय घोषणाएं।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से जुड़े और/या भारत के हितों को प्रभावित करने वाले समझौते; भारत के हितों पर विकसित देशों की नीतियों का प्रभाव; इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की भू-राजनीति।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
जापान की नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री महामहिम सुश्री ताकाइची सानाए 1-3 जुलाई 2026 तक भारत की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर रहीं। इस दौरान नई दिल्ली में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और जापानी प्रधानमंत्री के बीच 16वां भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया। दोनों नेताओं ने भारत-जापान ‘विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी’ (Special Strategic and Global Partnership) को मजबूत करने के लिए तीन प्राथमिकता वाले क्षेत्रों—रक्षा और सुरक्षा; आर्थिक साझेदारी (आर्थिक सुरक्षा, ऊर्जा लचीलापन, प्रौद्योगिकी); और पीपल-टू-पीपल एक्सचेंज—पर विस्तृत संयुक्त वक्तव्य जारी किया।
शिखर सम्मेलन के मुख्य रणनीतिक और नीतिगत निर्णय
1. रक्षा और सुरक्षा सहयोग (Defence & Security)
- 2+2 Ministerial Meeting: दोनों देशों ने इस वर्ष के अंत तक टोक्यो में चौथी 2+2 मंत्रिस्तरीय बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया।
- सैन्य अभ्यास और नौसैनिक सहयोग: द्विपक्षीय नौसेना अभ्यास ‘JAIMEX 25’ के सफल संचालन की सराहना की गई। इसके अतिरिक्त, विशाखापत्तनम में आयोजित होने वाले ‘इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2026’ में जापान की भागीदारी का स्वागत किया गया।
- यूनीकॉर्न प्रोजेक्ट: दोनों देश यूनिफाइड कॉम्प्लेक्स रेडियो एंटीना (UNICORN) परियोजना के शेष तकनीकी विवरणों पर सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गए हैं।
- रक्षा कूटनीति: पीएम मोदी ने रक्षा उपकरण और प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण पर जापान द्वारा अपने तीन सिद्धांतों की समीक्षा करने के फैसले का स्वागत किया, जो ‘मेक इन इंडिया’ के तहत संयुक्त विनिर्माण को बढ़ावा देगा।
2. आर्थिक सुरक्षा और उच्च तकनीक (Economic Security & High Tech)
- संयुक्त घोषणा पत्र: दोनों देशों ने ‘आर्थिक सुरक्षा सहयोग पर भारत-जापान संयुक्त घोषणा’ को अपनाया, जो सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals), आईसीटी, स्वच्छ ऊर्जा और फार्मा जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है।
- Hiroshima AI Process: हिरोशिमा एआई प्रोसेस और ‘एआई इम्पैक्ट पर नई दिल्ली घोषणा’ की भावना के अनुरूप विश्वसनीय डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए प्रथम भारत-जापान एआई रणनीतिक संवाद आयोजित किया गया।
- 10 ट्रिलियन येन का लक्ष्य: पिछले शिखर सम्मेलन में तय किए गए 10 ट्रिलियन जापानी येन के निवेश लक्ष्य की प्रगति की समीक्षा की गई और ‘भारत-जापान औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता भागीदारी’ (IJICP) के तहत निवेश माहौल को सुधारा जा रहा है।
- CEPA की समीक्षा: दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) पर हस्ताक्षर हुए 15 वर्ष से अधिक हो चुके हैं, इसलिए इसके प्रभावी उपयोग के लिए समीक्षा प्रक्रिया में तेजी लाने पर सहमति बनी।
3. ऊर्जा सुरक्षा और लचीलापन (Energy Security)
- CBG पहल (बायोगास योजना): भारत में 1,000 बायोगैस और जैविक उर्वरक संयंत्र स्थापित करने के लक्ष्य के तहत ‘भारत-जापान सहकारी बायोगैस विकास पहल’ (CBG Initiative) शुरू की गई। इसके लिए जापान के METI और भारत के सहकारिता मंत्रालय व पशुपालन विभाग के बीच MoC पर हस्ताक्षर किए गए।
- रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व: वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता से निपटने के लिए दोनों देश रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserves) और कच्चे तेल के भंडारण के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग बढ़ाएंगे।
- IEA सदस्यता: जापानी प्रधानमंत्री ताकाइची ने अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) में भारत की पूर्ण सदस्यता का पुरजोर समर्थन किया।
- ओडिशा क्लीन अमोनिया प्रोजेक्ट: ओडिशा में चल रहे ऐतिहासिक ‘क्लीन अमोनिया प्रोजेक्ट’ को दोनों सरकारों द्वारा निरंतर सहायता जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
4. कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचा (Connectivity & Infrastructure)
- मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (MAHSR): इस फ्लैगशिप बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत 2027 में प्राथमिकता वाले खंडों पर वाणिज्यिक संचालन शुरू करने के भारत के लक्ष्य को जापान ने पूर्ण सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई। इसमें E10 ट्रेन श्रृंखला शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। भारत के 7,000 किमी के नियोजित हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के भविष्य के कॉरिडोर में जापानी कंपनियों को आमंत्रित किया गया है।
- नया परिवहन समझौता: दोनों देशों ने ‘नेक्स्ट-जेनरेशन मोबिलिटी पार्टनरशिप’ पर सहयोग ज्ञापन (MoC) पर हस्ताक्षर किए।
- नई ओडीए (ODA) परियोजनाएं: जापान द्वारा भारत में 4 प्रमुख विकास परियोजनाओं को वित्तीय सहायता दी जा रही है:
- मुंबई मेट्रो (लाइन 11)
- बेंगलुरु मेट्रो (चरण 3)
- महाराष्ट्र में स्वास्थ्य सेवा वितरण और शिक्षा प्रणाली का सुधार
- पंजाब में सतत बागवानी (Sustainable Horticulture)
- उत्तर-पूर्वी क्षेत्र (NER) का विकास: भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों में सड़क, पुल, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन के विकास को रणनीतिक महत्व दिया गया है। दोनों देश इस क्षेत्र को ‘बिम्सटेक’ (BIMSTEC) के माध्यम से बंगाल की खाड़ी क्षेत्र से जोड़कर एक औद्योगिक मूल्य श्रृंखला (Value Chain) विकसित कर रहे हैं। छठा भारत-जापान बौद्धिक सम्मेलन फरवरी 2026 में शिलांग (मेघालय) में आयोजित किया गया था।
5. अंतरिक्ष और विज्ञान-प्रौद्योगिकी (Space & Sci-Tech)
- LUPEX मिशन: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) के बीच लूनर पोलर एक्सप्लोरेशन (LUPEX) मिशन की प्रगति की सराहना की गई।
- क्वांटम टेक्नोलॉजी: भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) और जापान के कैबिनेट कार्यालय के बीच क्वांटम प्रौद्योगिकियों पर एक ‘आशय पत्र’ (Letter of Intent) पर हस्ताक्षर किए गए।
- एजुकेशनल एक्सचेंज: DST और जापानी एजेंसियों के सहयोग से लोटस (LOTUS) प्रोग्राम, साकुरा साइंस एक्सचेंज प्रोग्राम और भारत-जापान सहकारी विज्ञान कार्यक्रम (IJCSP) को आगे बढ़ाया जा रहा है।
6. क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दे (Regional & Global Issues)
- UNSC सुधार और G4 कूटनीति: दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी और गैर-स्थायी दोनों श्रेणियों के विस्तार के लिए G4 देशों के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई। दोनों ने एक-दूसरे की स्थायी सदस्यता के दावे का समर्थन किया। भारत और जापान के बीच वर्ष 2028-29 और 2033-34 में गैर-स्थायी सीटों के लिए एक-दूसरे की उम्मीदवारी का पारस्परिक समर्थन करने पर सहमति बनी है।
- क्वाड और दक्षिण चीन सागर: दोनों ने क्वाड के चारों स्तंभों के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई और फिलीपींस के साथ पहली त्रिपक्षीय 1.5 ट्रैक नीति वार्ता शुरू करने पर सहमति व्यक्त की। दक्षिण और पूर्वी चीन सागर में यथास्थिति को बलपूर्वक बदलने के किसी भी एकपक्षीय प्रयास और विवादित क्षेत्रों के सैन्यीकरण का कड़ा विरोध किया गया।
- आतंकवाद पर कड़ा रुख: संयुक्त वक्तव्य में पाकिस्तान से संचालित होने वाले सीमा पार आतंकवाद सहित सभी प्रकार के आतंकवाद की कड़े शब्दों में निंदा की गई। इसमें 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले और 10 नवंबर 2025 को दिल्ली की आतंकवादी घटना की स्पष्ट निंदा की गई, साथ ही लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और उनके प्रॉक्सी संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) के खिलाफ ठोस वैश्विक कार्रवाई का आह्वान किया गया।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| घटक / बिंदु | तथ्य |
| बैठक का नाम | 16वां भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन, नई दिल्ली (जुलाई 2026)। |
| जापानी प्रधानमंत्री | सुश्री ताकाइची सानाए (भारत की उनकी पहली आधिकारिक यात्रा)। |
| नया द्विपक्षीय विजन | ‘साझा क्षितिज का भारत-जापान वर्ष’ (India-Japan Year of Shared Horizons) — राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में। |
| लॉन्च की गई प्रमुख पहल | भारत-जापान सहकारी बायोगैस विकास पहल (CBG Initiative)। |
| साझेदारी दस्तावेज | आर्थिक सुरक्षा सहयोग पर भारत-जापान संयुक्त घोषणा। |
| संयुक्त चंद्र मिशन | LUPEX (ISRO और JAXA का संयुक्त चंद्र ध्रुवीय अन्वेषण मिशन)। |
| बुलेट ट्रेन का लक्ष्य | मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल के प्राथमिकता वाले खंड का वाणिज्यिक संचालन 2027 में शुरू होगा (ट्रेन श्रृंखला: E10)। |
| पारस्परिक UNSC समर्थन वर्ष | गैर-स्थायी सीट हेतु वर्ष 2028-29 और 2033-34 के लिए आपसी समर्थन। |
मानस (MANAS) — ड्रग्स के खिलाफ एक डिजिटल सुरक्षा कवच
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय नीतियां, शासन व्यवस्था (Governance), महत्वपूर्ण डिजिटल पहल, आंतरिक सुरक्षा और नशा मुक्त भारत अभियान।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): स्वास्थ्य और सामाजिक क्षेत्र के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय; शासन व्यवस्था में प्रौद्योगिकी का अनुप्रयोग (E-governance); आंतरिक सुरक्षा चुनौतियां और उनका मुकाबला करने में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) की भूमिका।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
2 जुलाई 2026 को जारी प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार की राष्ट्रीय नारकोटिक्स हेल्पलाइन ‘मानस’ नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी से निपटने में देश का एक प्रभावी डिजिटल कवच बनकर उभरी है। यह सुरक्षित, तकनीक-संचालित मंच नागरिकों को ड्रग्स से जुड़ी गतिविधियों की गोपनीय रिपोर्ट करने और पुनर्वास सहायता प्राप्त करने की शक्ति देकर ‘नशा मुक्त भारत’ के संकल्प को जमीनी स्तर पर साकार कर रहा है।
MANAS क्या है और इसका ढांचा कैसा है?
सरल और सीधे शब्दों में कहें तो, भारत सरकार नशीली दवाओं के दुरुपयोग को केवल एक कानूनी समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट मानती है। इसी को ध्यान में रखते हुए नागरिकों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच की दूरी को पाटने के लिए MANAS (Madak Padarth Nishedh Asoochna Kendra) को लॉन्च किया गया था।

- नोडल एजेंसी: इसे गृह मंत्रालय के नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के तत्वावधान में डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन (DIC) के सहयोग से विकसित किया गया है। इसकी शुरुआत 18 जुलाई 2024 को हुई थी।
- एकीकृत डिजिटल माध्यम: यह डिजिटल इंडिया के विजन को ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ से जोड़ता है। नागरिक इसके साथ राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1933, आधिकारिक वेब पोर्टल, ईमेल और UMANG ऐप के माध्यम से जुड़ सकते हैं।
भारत में मादक पदार्थों के दुरुपयोग का पैमाना (Magnitude of the Problem)
भारत की पहली व्यापक रिपोर्ट “मैग्निट्यूड ऑफ सब्सटेंस एब्यूज इन इंडिया (2019)” के अनुसार देश में इस संकट का पैमाना इस प्रकार है:
- अल्कोहल (शराब): लगभग 16 करोड़ लोग सेवन करते हैं, जिनमें से 5.7 करोड़ से अधिक गंभीर रूप से प्रभावित हैं।
- कैनबिस (गांजा) और ओपिओइड्स: 3.1 करोड़ लोग कैनबिस और 2.26 करोड़ लोग ओपिओइड्स (अफीम/हेरोइन आदि) का उपयोग करते हैं।
- निर्भरता: लगभग 2.8 करोड़ लोग पूरी तरह से ओपिओइड्स पर निर्भर हैं, जिनमें से 28 लाख को तत्काल चिकित्सा उपचार की आवश्यकता है।
MANAS की प्रमुख विशेषताएं और कार्यप्रणाली
यह डिजिटल प्लेटफॉर्म मुख्य रूप से तीन स्तंभों—रिपोर्टिंग, परामर्श (Counselling) और जागरूकता—पर काम करता है:
- पूर्ण गोपनीयता के साथ रिपोर्टिंग: कोई भी नागरिक अपनी पहचान उजागर किए बिना ड्रग तस्करी, अवैध बिक्री या मादक पदार्थों की अवैध खेती (Illegal Cultivation) की शिकायत दर्ज करा सकता है।
- त्वरित ट्रांसफर और डिजिटल वर्कफ़्लो: जैसे ही नशे की लत से प्रभावित किसी व्यक्ति की कॉल आती है, उसे तुरंत सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की हेल्पलाइन 14446 पर स्थानांतरित (Transfer) कर दिया जाता है। प्रत्येक रिपोर्ट को डिजिटल टिकट के माध्यम से ट्रैक और हल किया जाता है।
- एजेंसियों से सीधा संपर्क: यह आम जनता को सीधे 30 NCB जोनल यूनिट्स और 36 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTFs) से जोड़ता है।
- भविष्य के तकनीकी अपग्रेड: वर्तमान में यह द्विभाषी है, लेकिन इसे बहुभाषी कॉल सपोर्ट, स्मार्ट IVRS, और चैटबॉट इंटीग्रेशन के साथ और अधिक समावेशी बनाया जा रहा है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| घटक / बिंदु | तथ्य |
| MANAS का पूरा नाम | मादक पदार्थ निषेध आसूचना केंद्र |
| केंद्रीय नोडल मंत्रालय | गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) — नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB)। |
| तकनीकी भागीदार | डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन (DIC)। |
| समर्पित हेल्पलाइन नंबर | 1933 (परामर्श ट्रांसफर हेतु सामाजिक न्याय मंत्रालय का नंबर: 14446)। |
| डिजिटल पहुंच | वेब पोर्टल, ईमेल और UMANG एप्लीकेशन। |
कोयला ब्लॉक आवंटन (संशोधन) नियम, 2026 — इंश्योरेंस श्योरिटी बॉन्ड को मंजूरी
- प्रारंभिक परीक्षा: सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप, आर्थिक विकास – बुनियादी ढांचा (कोयला और खनिज क्षेत्र), वित्तीय साधन (Financial Instruments)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): बुनियादी ढांचा: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, रेलवे आदि; भारत में व्यापार करने में आसानी (Ease of Doing Business); संसाधन जुटाना और विनियामक सुधार।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
2 जुलाई 2026 को जारी प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की अधिसूचना के अनुसार, केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने कोयला क्षेत्र में व्यापार करने में आसानी (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा सुधार किया है। सरकार ने कोयला ब्लॉक आवंटन (संशोधन) नियम, 2026 को अधिसूचित किया है, जिसके तहत खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम (MMDR Act), 1957 के तहत आवंटित कोयला ब्लॉकों के लिए परफॉर्मेंस बैंक गारंटी (PBG) के स्थान पर इंश्योरेंस श्योरिटी बॉन्ड (ISB) को स्वीकार करने की मंजूरी दे दी गई है।
क्या है यह विनियामक सुधार और इसके आर्थिक निहितार्थ?
जब भी किसी कंपनी को कोयला खदान या कोई बड़ा सरकारी प्रोजेक्ट आवंटित किया जाता है, तो उसे सरकार के पास एक सुरक्षा राशि जमा करनी होती है ताकि वह समय पर काम पूरा करे। इसे ‘परफॉर्मेंस बैंक गारंटी’ (PBG) कहते हैं। बैंक गारंटी लेने के लिए कंपनियों की भारी पूंजी बैंक में ब्लॉक हो जाती है। अब सरकार ने इसके विकल्प के रूप में ‘इंश्योरेंस श्योरिटी बॉन्ड’ (ISB) को वैध कर दिया है।
संशोधित ढांचे की मुख्य विशेषताएं
- पूंजीगत लचीलापन: नए नियम (संशोधन नियम, 2026) के तहत कोयला ब्लॉक आवंटित प्राप्तकर्ताओं को यह विकल्प मिलेगा कि वे अपनी परफॉर्मेंस सिक्योरिटी के लिए बैंक गारंटी दें या इंश्योरेंस श्योरिटी बॉन्ड।
- मौजूदा आवंटियों को लाभ: यह छूट केवल नए आवंटनों के लिए नहीं है, बल्कि पुराने या मौजूदा आवंटी भी शर्तों के अनुसार अपनी पुरानी बैंक गारंटी को इंश्योरेंस श्योरिटी बॉन्ड से बदल (Replace) सकते हैं।
- लागू होने का दायरा: शुरुआती चरण में यह सुविधा केवल MMDR अधिनियम, 1957 के तहत आवंटित कोयला ब्लॉकों के लिए शुरू की जा रही है। हालांकि, कोयला मंत्रालय इसे कोयला खान (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015 के तहत आवंटित ब्लॉकों पर भी विस्तारित करने की प्रक्रिया में है।
- आधिकारिक प्रकाशन: इन संशोधित नियमों को भारत के राजपत्र (Gazette of India) में 22 जून 2026 को G.S.R 508(E) के तहत प्रकाशित किया गया था।
इस सुधार के प्रमुख लाभ (Strategic Benefits)
- वित्तीय बोझ में कमी: पारंपरिक बैंक गारंटी के विपरीत श्योरिटी बॉन्ड में कंपनियों को बहुत कम मार्जिन मनी रखनी पड़ती है, जिससे उनकी नकदी (Liquidity) बचती है।
- समय पर परिचालन: आवंटी इस बची हुई मुक्त पूंजी (Capital) का उपयोग खदानों के वास्तविक विकास और परिचालन गतिविधियों में अधिक कुशलता से कर सकेंगे।
- निवेश अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र: यह कदम वाणिज्यिक कोयला खनन (Commercial Coal Mining) में निजी निवेश को आकर्षित करेगा और बोली प्रक्रिया को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा।
29वां राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन — ‘जयपुर घोषणा पत्र’ और ‘ह्यूमन-लेड एआई’
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन, जयपुर घोषणा पत्र, राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026, शासन व्यवस्था में डिजिटल पहल (CPGRAMS, समाधान दीदी, भाषिनी)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): शासन व्यवस्था (Governance); ई-गवर्नेंस: अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएं, सीमाएं और क्षमताएं; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता और जवाबदेही।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का अनुप्रयोग; डेटा-संचालित और सुरक्षित डिजिटल गवर्नेंस; आंतरिक सुरक्षा और डेटा सुरक्षा।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
2 जुलाई 2026 को जयपुर (राजस्थान) में आयोजित 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन (NCeG) का समापन प्रतिष्ठित ‘जयपुर घोषणा पत्र, 2026’ को अपनाने और राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 के वितरण के साथ हुआ। सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ‘ह्यूमन-लेड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (मानव-निर्देशित एआई) मार्गदर्शक सिद्धांत होना चाहिए, जहाँ तकनीक मानव जवाबदेही का स्थान न ले बल्कि नागरिकों को सशक्त बनाए।
सम्मेलन के मुख्य विषय और विज़न
यह राष्ट्रीय सम्मेलन प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG), इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और राजस्थान सरकार द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था।
- मुख्य विषय (Theme): “विकसित भारत 2047: एआई-सक्षम, डेटा-संचालित और सुरक्षित डिजिटल गवर्नेंस” (Viksit Bharat 2047: AI-enabled, Data-driven and Secure Digital Governance)।
- मानव बनाम मशीन: सरकार का दृष्टिकोण स्पष्ट है—तकनीक का उद्देश्य मानव निर्णय लेने की क्षमता को प्रतिस्थापित (Replace) करना नहीं, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और सेवा वितरण में सुधार करना है। डॉ. जितेंद्र सिंह के शब्दों में, “तकनीक शासन को गति दे सकती है, लेकिन केवल मानवीय बुद्धिमत्ता ही इसे दिशा दे सकती है।”
- विकेंद्रीकरण नीति: प्रमुख फ्लैगशिप सम्मेलनों को नई दिल्ली से बाहर (जैसे इस बार जयपुर में) आयोजित करने की रणनीति से राज्यों के बीच ‘होले-ऑफ-गवर्नमेंट’ (Whole-of-Government) दृष्टिकोण और सहकारी संघवाद को बढ़ावा मिला है।
प्रशासनिक सुधार और ई-गवर्नेंस के प्रमुख उपकरण
सम्मेलन के दौरान डिजिटल गवर्नेंस को सुदृढ़ करने वाले निम्नलिखित राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म्स और पहलों की प्रगति को रेखांकित किया गया:
- CPGRAMS (केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली): यह दुनिया के सबसे बड़े तकनीक-सक्षम शिकायत निवारण तंत्रों में से एक बन चुका है, जिसने देश भर में शिकायतों के निपटान के समय को काफी कम कर दिया है।
- समाधान दीदी: यह ‘भाषिनी’ प्लेटफॉर्म के सहयोग से विकसित एक AI-संचालित बहुभाषी वॉयस चैटबॉट है। यह नागरिकों को उनकी स्थानीय भाषा में सुरक्षित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से सरकार से संवाद करने में सक्षम बनाता है।
- NeSDA (राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सेवा वितरण आकलन): राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों में डिजिटल सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता और प्रभावशीलता के मूल्यांकन के लिए एक राष्ट्रीय मानक है।
- मिशन कर्मयोगी: सिविल सेवकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, डिजिटल गवर्नेंस और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण जैसे उभरते क्षेत्रों में निरंतर प्रशिक्षित कर ‘फ्यूचर-रेडी’ (भविष्य के लिए तैयार) बनाने का राष्ट्रीय कार्यक्रम।
- विशेष अभियान 5.0 (Special Campaign 5.0): कार्यस्थल प्रथाओं में सुधार, रिकॉर्ड प्रबंधन, संस्थागत अनुशासन और सार्वजनिक संसाधनों के इष्टतम उपयोग के माध्यम से प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना।
राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 और जयपुर घोषणा पत्र
1. राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 (National e-Governance Awards)
डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली 17 अनुकरणीय पहलों को राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए गए:
- इन पुरस्कारों को केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, जिला प्रशासनों, ग्राम पंचायतों और शैक्षणिक व अनुसंधान संस्थानों की श्रेणी में बांटा गया था।
- कुल पुरस्कारों में 10 स्वर्ण (Gold) पुरस्कार, 6 रजत (Silver) पुरस्कार और 1 जूरी पुरस्कार शामिल थे।
- राज-काज प्लेटफॉर्म: राजस्थान सरकार के इस एकीकृत प्रशासनिक प्लेटफॉर्म की विशेष सराहना की गई, जिसने राज्य के विभागों में पेपरलेस, त्वरित और पारदर्शी शासन को संभव बनाया है।
2. जयपुर घोषणा पत्र, 2026
सम्मेलन के समापन पर सर्वसम्मति से ‘जयपुर घोषणा पत्र’ को अपनाया गया। यह घोषणा पत्र विकसित भारत 2047 के विज़न के अनुरूप एआई-सक्षम, डेटा-संचालित, सुरक्षित और नागरिक-केंद्रित डिजिटल शासन को आगे बढ़ाने के लिए एक साझा रणनीतिक रोडमैप और संकल्प प्रस्तुत करता है।
तीसरा ग्लोबल कॉन्क्लेव ऑन प्लास्टिक रीसाइक्लिंग एंड सस्टेनेबिलिटी (GCPRS)
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन, संयुक्त राष्ट्र वैश्विक प्लास्टिक संधि (UN Global Plastics Treaty), चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण (Environmental Pollution & Degradation); प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन; वैज्ञानिक अनुसंधान और स्वदेशी तकनीक; समावेशी विकास और अनौपचारिक क्षेत्र का कल्याण।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
2 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में “तीसरे ग्लोबल कॉन्क्लेव ऑन प्लास्टिक रीसाइक्लिंग एंड सस्टेनेबिलिटी” (3rd GCPRS) और एक अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी का भव्य शुभारंभ हुआ है। रसायन और उर्वरक मंत्रालय के रसायन एवं पेट्रोरसायन विभाग (DCPC) के सचिव श्री तेजवीर सिंह ने इस चार दिवसीय सम्मलेन का उद्घाटन करते हुए वैश्विक प्लास्टिक संकट से निपटने के लिए एकीकृत तकनीकी समाधानों और चक्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर बल दिया।
कॉन्क्लेव के मुख्य बिंदु और नीतिगत दृष्टिकोण
यह सम्मेलन भारत का एक प्रमुख मंच है जो पूरी तरह से प्लास्टिक रीसाइक्लिंग और पर्यावरण अनुकूल तकनीकी प्रणालियों के विकास को समर्पित है। इसका आयोजन ऑल इंडिया प्लास्टिक मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (AIPMA) और केमिकल्स एंड पेट्रोकेमिकल्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (CPMA) द्वारा सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के सहयोग से किया जा रहा है।
1. वैश्विक रणनीतियों के साथ समन्वय
- एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता: वर्तमान में दुनिया भर में प्लास्टिक कचरे के समाधान अलग-अलग (Fragmented) स्तर पर हो रहे हैं। वक्त की मांग है कि हम ‘संयुक्त राष्ट्र वैश्विक प्लास्टिक संधि’ (UN Global Plastics Treaty) जैसे अंतरराष्ट्रीय नीतिगत ढांचों के साथ तालमेल बिठाएं।
- बाध्यकारी नियम: संयुक्त राष्ट्र की इस आगामी संधि का उद्देश्य दुनिया भर में प्लास्टिक के उत्पादन, उपयोग और अपशिष्ट प्रबंधन के लिए एकीकृत और कानूनी रूप से बाध्यकारी (Binding) नियम बनाना है।
2. आधुनिक तकनीक और सर्कुलर इकोनॉमी
- उच्च मूल्य वाला उद्योग: प्लास्टिक रीसाइक्लिंग को एक पिछड़ा या ‘गंदा उद्योग’ मानने के बजाय आधुनिक, तकनीक-संचालित और उच्च आर्थिक मूल्य वाले उद्योग (High-value industry) के रूप में देखा जाना चाहिए।
- माइक्रो-पैकेजिंग की चुनौती: उद्योग जगत और अनुसंधान एवं विकास (R&D) विंग को विशेष रूप से छोटे पैकेजिंग (जैसे पाउच और छोटे प्लास्टिक कवर) के लिए दीर्घकालिक समाधान खोजने होंगे, क्योंकि इन्हें जमीन से चुनना और रीसायकल करना सबसे कठिन होता है। इसके विकल्प के रूप में बायो-डिग्रेडेबल प्लास्टिक पैकेजिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
3. अनौपचारिक कचरा बीनने वालों (Informal Waste Collectors) का कल्याण
- वर्कफोर्स का औपचारिकीकरण: पर्यावरण को स्वच्छ रखने में अनौपचारिक क्षेत्र के कचरा बीनने वालों (सफाई मित्रों) की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। आर्थिक प्रगति के साथ-साथ इस कार्यबल को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाकर औपचारिक (Formalize) करना सरकार की प्राथमिकता है।
4. बाजार का आकार और भागीदारी
- बाजार में उछाल: भारतीय रीसाइकिल्ड प्लास्टिक बाजार के वर्ष 2032 तक 3.81 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है, जो 10.95% की वार्षिक चक्रवृद्धि दर (CAGR) से बढ़ रहा है। वहीं वैश्विक बाजार 2033 तक 80.5 बिलियन डॉलर का हो जाएगा।
- संस्थागत सहयोग: इस कॉन्क्लेव में 400 से अधिक प्रदर्शक और 50,000 व्यापारिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इसके साथ ही सिपेट (CIPET), CSIR-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (NPL) और सिडबी (SIDBI) जैसे प्रमुख संस्थान भी इसमें तकनीकी सहयोग कर रहे हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| घटक / बिंदु | तथ्य |
| सम्मेलन का नाम | 3rd Global Conclave on Plastic Recycling and Sustainability (GCPRS) |
| आयोजन स्थल | भारत मंडपम, नई दिल्ली (जुलाई 2026)। |
| मुख्य आयोजक | AIPMA और CPMA (रसायन एवं पेट्रोरसायन विभाग [DCPC] के सहयोग से)। |
| सहयोगी मंत्रालय | वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (DPIIT), पर्यावरण मंत्रालय (MoEFCC), आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) तथा MSME मंत्रालय। |
| वैश्विक फ्रेमवर्क | UN Global Plastics Treaty (प्लास्टिक उत्पादन और प्रबंधन हेतु बाध्यकारी वैश्विक संधि)। |
| भारतीय बाजार का लक्ष्य | 2032 तक भारत का रीसाइकिल्ड प्लास्टिक बाजार 3.81 बिलियन USD होने का अनुमान। |
असम का बोरजुली स्थल ‘जैव विविधता विरासत स्थल’ (BHS) घोषित
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय जैव विविधता विरासत स्थल (BHS), राष्ट्रीय वर्षासिंचित क्षेत्र प्राधिकरण (NRAA), जंगली धान (Oryza rufipogon), जैव विविधता अधिनियम, 2002।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण (Biodiversity & Conservation); जलवायु-अनुकूल कृषि (Climate-resilient Agriculture); खाद्य सुरक्षा और आनुवंशिक संसाधन।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
2 जुलाई 2026 को जारी प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय वर्षासिंचित क्षेत्र प्राधिकरण (NRAA) द्वारा वित्तपोषित परियोजना के तहत भारत के जंगली धान के आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण में एक बड़ी ऐतिहासिक सफलता मिली है। असम के शोणितपुर (Sonitpur) जिले में स्थित ‘बोरजुली स्थल’ (Borjuli Site) को राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण द्वारा आधिकारिक तौर पर ‘जैव विविधता विरासत स्थल’ (Biodiversity Heritage Site – BHS) अधिसूचित कर दिया गया है।
परियोजना और आनुवंशिक संरक्षण का महत्व
यह मील का पत्थर “असम के शोणितपुर जिले में जंगली धान (ओरिज़ा रुफ़ीपोगोन) का इन-सीटू (स्व-स्थाने) संरक्षण और प्रबंधन” नामक परियोजना के माध्यम से प्राप्त हुआ है।
- क्रियान्वयन: यह परियोजना वर्ष 2022 से ICAR–राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (ICAR-NBPGR), नई दिल्ली और असम राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा संयुक्त रूप से चलाई जा रही है।
- जंगली धान (Oryza rufipogon) की महत्ता: जंगली धान की प्रजातियां केवल पौधे नहीं हैं, बल्कि ये आधुनिक कृषि के लिए जीन (Genes) का एक अमूल्य खजाना हैं। इनके भीतर सूखे, बाढ़, कीटों और अत्यधिक तापमान को झेलने की प्राकृतिक क्षमता होती है।
- जलवायु-अनुकूल कृषि: इन जंगली प्रजातियों के आनुवंशिक गुणों (Germplasm) का उपयोग करके भविष्य के लिए ऐसी उच्च उपज वाली और पोषण से भरपूर धान की किस्में विकसित की जा सकती हैं जो जलवायु परिवर्तन के खतरों का सामना कर सकें।
जैव विविधता विरासत स्थल (BHS) क्या होते हैं?
जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 37 के तहत राज्य सरकारें स्थानीय निकायों से परामर्श कर अनूठे, पारिस्थितिक रूप से नाजुक और समृद्ध जैव विविधता वाले क्षेत्रों को ‘जैव विविधता विरासत स्थल’ (BHS) के रूप में अधिसूचित कर सकती हैं। इसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय समुदायों के पारंपरिक अधिकारों की रक्षा करना है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| घटक / बिंदु | तथ्य |
| नया अधिसूचित BHS स्थल | बोरजुली, जिला- शोणितपुर, असम। |
| संरक्षित मुख्य प्रजाति | जंगली धान की प्रजाति — Oryza rufipogon। |
| वित्तपोषक संस्था | राष्ट्रीय वर्षासिंचित क्षेत्र प्राधिकरण (NRAA) — कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय। |
| मुख्य तकनीकी भागीदार | ICAR-राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (NBPGR), नई दिल्ली। |
| संरक्षण का प्रकार | In-situ (स्व-स्थाने) संरक्षण — प्राकृतिक आवास के भीतर ही संरक्षण। |
सांसद लीड फेलोशिप (MP LEAD Fellowship) और युवा नेतृत्व
- प्रारंभिक परीक्षा: भारतीय राजव्यवस्था, शासन व्यवस्था (Governance), लोकतांत्रिक संस्थाएं और नागरिक कर्तव्य।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): शासन व्यवस्था, लोक नीति (Public Policy) और विधायी प्रक्रियाएं; लोकतांत्रिक प्रणालियों में युवाओं की भागीदारी; नागरिक समाज की भूमिका।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
2 जुलाई 2026 को भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने उपराष्ट्रपति भवन में ‘सांसद लीड फेलोशिप’ के युवा प्रतिभागियों से बातचीत की। इस संवाद के दौरान उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि सच्चे नेतृत्व का पैमाना अधिकार या सत्ता नहीं, बल्कि समाज के प्रति सेवा भाव, सत्यनिष्ठा और करुणा है। उन्होंने युवाओं से क्षेत्रीय, भाषाई और जातीय बाधाओं से ऊपर उठकर देश को हमेशा सर्वोपरि रखने का आह्वान किया।
MP LEAD फेलोशिप क्या है?
यह देश के युवाओं को नीति-निर्माण और शासन को करीब से देखने का एक व्यावहारिक अवसर प्रदान करता है।
- एक अनूठी पहल: यह राज्यसभा सांसद डॉ. अजीत माधवराव गोपीचड़े द्वारा शुरू किया गया दो महीने का इंटर्नशिप कार्यक्रम है।
- उद्देश्य: इस फेलोशिप का प्राथमिक उद्देश्य युवाओं को कक्षा की चारदीवारी से बाहर निकालकर शासन व्यवस्था, सार्वजनिक नीति (Public Policy) और विधायी प्रक्रियाओं (Legislative Processes) का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है।
- समावेशी भागीदारी: वर्ष 2026 के इस बैच में 5,000 से अधिक आवेदकों में से केवल 40 उत्कृष्ट फेलो का चयन किया गया है। सबसे खास बात यह है कि चुने गए इन प्रतिभागियों में 62 प्रतिशत महिलाएं हैं, जो देश के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करती हैं।
संवाद के मुख्य बिंदु और संवैधानिक मूल्य
उपराष्ट्रपति ने युवाओं के समक्ष भारत के विकास और नागरिक कर्तव्यों से जुड़े कई महत्वपूर्ण नीतिगत विचार साझा किए:
- संवैधानिक और राष्ट्रीय एकता: भारत की सांस्कृतिक और सभ्यतागत एकता पर बल देते हुए उन्होंने संदेश दिया कि “भारत एक था, भारत एक है और भारत हमेशा एक रहेगा।”
- अधिकार और कर्तव्य का संतुलन: उपराष्ट्रपति ने याद दिलाया कि हमारा लोकतंत्र तभी समृद्ध और मजबूत हो सकता है जब देश के नागरिक अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने संवैधानिक कर्तव्यों (Constitutional Duties) के प्रति भी पूरी तरह सजग और प्रतिबद्ध रहें।
- ऐतिहासिक संघर्षों से सीख: उन्होंने युवाओं को याद दिलाया कि कैसे भारत 1960 के दशक के खाद्यान्न संकट (Food Shortages) से उबरकर आज दुनिया का सबसे बड़ा अनाज निर्यातक देश बना है। भावी पीढ़ी को देश की इस विकास यात्रा और पिछली पीढ़ियों के संघर्षों से प्रेरणा लेनी चाहिए।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| घटक / बिंदु | तथ्य |
| फेलोशिप का नाम | सांसद लीड फेलोशिप (MP LEAD Fellowship) |
| पहलकर्ता | राज्यसभा सांसद डॉ. अजीत माधवराव गोपीचड़े। |
| अवधि और प्रकृति | 2 महीने का इंटर्नशिप कार्यक्रम (शासन और लोक नीति पर आधारित)। |
| वर्तमान उपराष्ट्रपति | श्री सी. पी. राधाकृष्णन (वर्ष 2026)। |
| महिला भागीदारी दर | इस वर्ष के चयनित बैच में 62% महिलाएं शामिल हैं। |