NCERT Notes Class 6 Social science (Geography) Chapter 12: Grassroots Democracy – Part 3 Local Government in Urban Areas भारतीय शहरों और कस्बों के प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करता है। बड़े शहरों में नगर निगम (Municipal Corporation) और छोटे शहरों में नगरपालिका (Municipality) जैसे संस्थान कैसे काम करते हैं, इसका विस्तृत और सरल विवरण यहाँ मिलता है। शहरी क्षेत्रों को ‘वार्डों’ में कैसे विभाजित किया जाता है, निर्वाचित वार्ड पार्षदों की क्या भूमिका होती है, और प्रशासनिक कार्यों को लागू करने के लिए सरकार द्वारा नियुक्त मुख्यायुक्त / कमिश्नर (Municipal Commissioner) और प्रशासनिक कर्मचारी कैसे काम करते हैं।
प्रस्तावना (Introduction)
- सुशासन का मूल उद्देश्य: लोकतंत्र में सुशासन (Good Governance) का मुख्य लक्ष्य नागरिकों को सशक्त बनाना है, ताकि वे देश की कार्यप्रणाली में सक्रिय रूप से भाग ले सकें। यह सहभागिता ग्रामीण, क्षेत्रीय, शहरी, राज्य या राष्ट्रीय किसी भी स्तर पर हो सकती है।
- सहभागी लोकतंत्र (Participatory Democracy): नागरिकों की इसी सक्रिय और सीधी भागीदारी की व्यापक अवधारणा को सहभागी लोकतंत्र कहा जाता है।
- शहरी शासन की जटिलता: ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी परिदृश्य (Urban Scenario) सामान्यतः अधिक जटिल और अत्यधिक विविधतापूर्ण होता है, यही कारण है कि शहरी शासन प्रणाली का ढांचा अधिक जटिल और विस्तृत बनाया गया है।
शासन का पिरामिड ढांचा (The Pyramid Structure of Indian Governance)
भारतीय शासन प्रणाली को एक पिरामिड के रूप में समझा जा सकता है, जिसमें सत्ता का प्रवाह नीचे से ऊपर की ओर होता है:
- पिरामिड का आधार (Base): स्थानीय सरकार (Local Government) इसका आधार है, जो सीधे आम जनता के सबसे करीब होती है।
- पिरामिड का शीर्ष (Top): राष्ट्रीय स्तर पर केंद्र सरकार (Union Government) इसका शीर्ष नेतृत्व करती है।
ग्रामीण बनाम शहरी प्रशासनिक तुलनात्मक (Rural vs Urban Local Bodies)

भारतीय शासन व्यवस्था को तीन मुख्य स्तरों और दो समानांतर विंग्स (ग्रामीण और शहरी) में विभाजित किया गया है:
| शासन का स्तर (Levels of Government) | ग्रामीण विंग (Panchayati Raj Institutions) | शहरी विंग (Urban Local Bodies) |
| 1. राष्ट्रीय स्तर (National Level) | संघ सरकार / केंद्र सरकार (Union Government) | संघ सरकार / केंद्र सरकार (Union Government) |
| 2. प्रांतीय स्तर (State Level) | राज्य सरकार (State Government) | राज्य सरकार (State Government) |
| 3. स्थानीय स्तर (Local Level) | ग्रामीण स्थानीय निकाय: | शहरी स्थानीय निकाय: |
| शीर्ष स्थानीय स्तर (T | जिला पंचायत | नगर निगम (Municipal Corporation) |
| मध्यवर्ती स्थानीय स्तर ( | पंचायत समिति | नगरपालिका परिषद (Municipal Council) |
| जमीनी स्थानीय स्तर ( | ग्राम पंचायत | नगर पंचायत / शहर परिषद (City Council) |
| मूल मतदाता समूह | ग्राम सभा | वार्ड समिति (Ward Committee) / वार्ड के लोग |
शहरी स्थानीय निकाय (Urban Local Bodies)
- मूल प्रकृति: शहरी क्षेत्रों में स्थानीय शासन के ढांचे को ‘शहरी स्थानीय निकाय’ कहा जाता है। यह विकेंद्रीकृत (Decentralised) व्यवस्था है, जिसका अर्थ है कि यह शीर्ष पर बैठी किसी केंद्रीय सत्ता के अधीन काम करने के बजाय स्थानीय समुदायों को अपने क्षेत्र के प्रबंधन और समस्याओं पर सीधे निर्णय लेने का अधिकार देती है।
- वार्ड और वार्ड समितियाँ:
- प्रशासनिक सुगमता के लिए शहरों और कस्बों को छोटी इकाइयों में विभाजित किया जाता है, जिन्हें ‘वार्ड’ कहते हैं।
- वार्ड समितियाँ स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन, एकल-उपयोग प्लास्टिक (Single-use plastics) के खिलाफ अभियान जैसे जमीनी कार्यों का संचालन करती हैं।
- इसके अलावा, ये समितियाँ बुनियादी ढाँचे की समस्याओं जैसे—पानी का रिसाव (Water leak), बंद नाली या क्षतिग्रस्त सड़कों पर नज़र रखती हैं और अधिकारियों को रिपोर्ट करती हैं। इनका सटीक कामकाज अलग-अलग राज्यों के नियमों के अनुसार भिन्न होता है।
शहरी निकायों के मुख्य कार्य
यह व्यवस्था एक सहभागी लोकतंत्र (Participatory Democracy) है, जहाँ कुशल कामकाज के लिए नागरिकों को भी अपने कर्तव्यों का पालन करना होता है (जैसे कचरा अलग-अलग करना या पानी के रिसाव की तुरंत सूचना देना)। इनके प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:
- बुनियादी ढाँचा (Infrastructure): स्थानीय बुनियादी ढाँचे का विकास और रखरखाव।
- स्वच्छता प्रबंधन: कचरा संग्रहण (Garbage collection) और उसका सुरक्षित निपटान।
- कर एवं राजस्व: स्थानीय करों (Local taxes) और जुर्मानों (Fines) की वसूली करना।
- कल्याणकारी कार्य: कब्रिस्तान/शमशान भूमि का रखरखाव और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी।
- नियोजन: क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए योजनाएँ बनाना।
शहरी निकायों का जनसंख्या-आधारित वर्गीकरण (Population-Based Classification)
- नगर निगम (Municipal Corporation / महानगर निगम): केवल 10 लाख से अधिक की आबादी वाले बड़े शहरों में सर्वोच्च निकाय के रूप में गठित किया जाता है (जैसे: चेन्नई, इंदौर)।
- नगरपालिका परिषद (Municipal Council / नगरपालिका): 1 लाख से 10 लाख के बीच की आबादी वाले मध्यम शहरों का सर्वोच्च प्रशासनिक निकाय।
- नगर पंचायत (शहर परिषद): छोटी आबादी वाले कस्बों या संक्रमणकालीन क्षेत्रों (Transitional areas) में गठित।
इंदौर मॉडल
- संदर्भ: मध्य प्रदेश का इंदौर शहर सरकारी योजना ‘स्वच्छ सर्वेक्षण’ के तहत लगातार सात वर्षों से भारत का सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया गया है।
- यूपीएससी सीख: इंदौर की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि शहरी निकायों के कुशल प्रबंधन के साथ-साथ जब आम नागरिक कचरा पृथक्करण (Waste segregation) जैसी नागरिक प्राथमिकताओं में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं, तभी सहभागी लोकतंत्र अपने उच्चतम परिणाम प्राप्त करता है।
त्वरित प्रीलिम्स रिवीजन
| शहरी निकाय का प्रकार | जनसंख्या मानदंड (Population Criteria) | प्रशासनिक पदानुक्रम (Hierarchy Level) |
| नगर निगम | 10 लाख से अधिक (> 10 Lakhs) | महानगर/बड़े शहरों का शीर्ष निकाय। |
| नगरपालिका परिषद | 1 लाख से 10 लाख (1 – 10 Lakhs) | मध्यम शहरों का प्रशासनिक निकाय। |
| नगर पंचायत | छोटी आबादी/कस्बा (< 1 Lakh) | ग्रामीण से शहरी क्षेत्र में परिवर्तित हो रहे छोटे क्षेत्र। |
| वार्ड समिति | वार्ड स्तर पर निर्वाचित/नामित निकाय | जमीनी स्तर पर नागरिकों की भागीदारी और त्वरित शिकायत निवारण। |