10 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत भारत-ऑस्ट्रेलिया PACTS साझेदारी, तीसरे भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन 2026 की बड़ी उपलब्धियां, और कपड़ा क्षेत्र में MSMEs के विकास के लिए ITADCs व ATUFS योजना की विस्तृत। आंतरिक आर्थिक सुधारों के मोर्चे पर, यह बुलेटिन केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय द्वारा ग्रामीण और लघु उद्योगों के विकास के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत करता है, जिसके अंतर्गत पुराने पावरलूम सेंटर्स को अत्याधुनिक ‘एकीकृत कपड़ा और परिधान विकास केंद्रों’ (ITADCs) के रूप में बदलने और आधुनिकीकरण को बढ़ावा देने वाली ATUFS योजना के स्वतंत्र प्रभाव आकलन के शानदार आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है,
SC-NBWL की 91वीं बैठक: विकास और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL), वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972, प्रोजेक्ट राइनो (Rhino DNA Indexing), ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB), पिग्मी हॉग (Pygmy Hog)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA), विकास और पर्यावरण के बीच द्वंद्व।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में तमिलनाडु के कोयंबटूर में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति (SC-NBWL) की 91वीं बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में जहां एक ओर 100 से अधिक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचागत विकास परियोजनाओं की समीक्षा की गई, वहीं दूसरी ओर देश की सबसे संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण के लिए कई बड़े नीतिगत निर्णय लिए गए।
बैठक के प्रमुख नीतिगत निर्णय और रणनीतिक स्तंभ
1. समाधान-आधारित नीतिगत हस्तक्षेप
बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि वन्यजीव संरक्षण केवल कानूनी दायरा नहीं बल्कि वैज्ञानिक नियोजन का हिस्सा होना चाहिए। इसके लिए उन्होंने तीन प्रमुख स्तंभों को एकीकृत करने की बात कही:
- तकनीकी और समाजशास्त्रीय अध्ययन: वन्यजीवों और मानव बस्तियों के बीच के अंतर्संबंधों को समझने के लिए आधुनिक तकनीकों (जैसे AI और ड्रोन) और सामाजिक व्यवहार का अध्ययन करना।

- पारंपरिक ज्ञान का उपयोग: भारत के आदिवासी और स्थानीय समुदायों के पास मौजूद वन्यजीव संरक्षण के पारंपरिक ज्ञान को मुख्यधारा की नीतियों में शामिल करना।
2. 100 से अधिक विकास परियोजनाओं की समीक्षा
वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के तहत समिति ने देश भर के 100 से अधिक विकास प्रस्तावों का मूल्यांकन किया।
- परियोजनाओं की प्रकृति: इनमें रणनीतिक रक्षा बुनियादी ढांचा, राष्ट्रीय राजमार्ग, पेयजल आपूर्ति योजनाएं, संचार टॉवर, बिजली पारेषण लाइनें, ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क, पाइपलाइन और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं शामिल थीं।
- मूल्यांकन का आधार: इन परियोजनाओं को उनके पारिस्थितिक प्रभाव, सार्वजनिक कल्याण के लिए महत्व और वन्यजीवों के आवासों को नुकसान से बचाने वाले न्यूनीकरण उपायों (Mitigation Measures) की पर्याप्तता के आधार पर ही मंजूरी के लिए विचारित किया गया।
3. संकटग्रस्त प्रजातियों के लिए दीर्घकालिक रणनीतियाँ
बैठक के दौरान भारत की तीन सबसे महत्वपूर्ण और खतरे में पड़ी प्रजातियों के संरक्षण के लिए विशिष्ट रोडमैप पर चर्चा की गई और वैज्ञानिक प्रकाशन जारी किए गए:
- एक सींग वाला गैंडा (Greater One-horned Rhinoceros): गैंडों के अवैध शिकार को रोकने और उनकी आनुवंशिक विविधता की रक्षा के लिए ‘राइनो डीएनए इंडेक्सिंग सिस्टम’ (RhinoDGIS) पर आधारित दीर्घकालिक संरक्षण रणनीति की समीक्षा की गई।
- ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB): गंभीर रूप से संकटग्रस्त इस पक्षी को बिजली की लाइनों और आवास विखंडन से बचाने के लिए भविष्य की नई संरक्षण रणनीति पर विचार किया गया।
- पिग्मी हॉग: दुनिया के सबसे छोटे और दुर्लभ जंगली सुअर ‘पिग्मी हॉग’ को औपचारिक रूप से सरकार के प्रजाति सुधार कार्यक्रम के तहत शामिल करने पर सहमति बनी।
- अन्य प्रकाशन: बैठक के दौरान राइनो, सुस्त भालू और ग्रेट इंडियन बस्टर्ड से संबंधित महत्वपूर्ण वैज्ञानिक शोध दस्तावेज जारी किए गए।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| विशिष्ट संस्था / प्रजाति / प्रणाली | महत्वपूर्ण तथ्य |
| राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL) | यह वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत एक सांविधिक निकाय (Statutory Body) है। भारत के प्रधानमंत्री इसके अध्यक्ष होते हैं। |
| NBWL की स्थायी समिति (SC-NBWL) | इसकी अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री करते हैं। यही समिति व्यावहारिक रूप से वन्यजीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों के आसपास विकास परियोजनाओं को मंजूरी देती है। |
| राइनो डीएनए इंडेक्सिंग (RhinoDGIS) | यह गैंडों के डीएनए का एक राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करने की तकनीक है, जिससे शिकार किए गए सींगों की फोरेंसिक जांच कर अपराधियों को पकड़ने में मदद मिलती है। |
| पिग्मी हॉग | वैज्ञानिक नाम: Porcula salvania। यह दुनिया का सबसे छोटा जंगली सुअर है जो मुख्य रूप से असम के मानस राष्ट्रीय उद्यान के ऊंचे घास के मैदानों (Terai Grasslands) में पाया जाता है। IUCN स्थिति: Critically Endangered। |
| ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) | यह राजस्थान का राज्य पक्षी है और मुख्य रूप से डेजर्ट नेशनल पार्क में पाया जाता है। IUCN स्थिति: Critically Endangered। यह भारतीय उपमहाद्वीप के सबसे भारी उड़ने वाले पक्षियों में से एक है। |
| प्रजाति सुधार कार्यक्रम (Species Recovery Programme) | यह एकीकृत वन्यजीव आवास विकास (IDWH) योजना के तहत एक केंद्रीय घटक है, जिसके तहत अत्यधिक संकटग्रस्त प्रजातियों को बचाने के लिए विशेष वित्तीय सहायता दी जाती है। |
भारत PACTS साझेदारी: साइबर, क्रिटिकल टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन
- प्रारंभिक परीक्षा: PACTS साझेदारी, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), क्वाड, क्रिटिकल मिनरल्स।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): भारत और इसके द्विपक्षीय संबंध, महत्वपूर्ण तकनीकी और साइबर सुरक्षा, सप्लाई चेन लचीलापन, रक्षा अनुसंधान और सहयोग।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
9 जुलाई 2026 को भारत और ऑस्ट्रेलिया ने अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) को आगे बढ़ाते हुए ‘ऑस्ट्रेलिया-भारत साइबर, क्रिटिकल टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन साझेदारी’ (PACTS) की घोषणा की है। यह नया समझौता वर्ष 2020 के पुराने फ्रेमवर्क व्यवस्था का स्थान लेगा और हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में दोनों देशों की तकनीकी प्राथमिकताओं को एक नया रणनीतिक आयाम देगा।
PACTS के तहत सहयोग के 5 प्रमुख स्तंभ
यह साझेदारी सरकार, निजी क्षेत्र, विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए निम्नलिखित पांच स्तंभों पर केंद्रित है:
1. आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन और विविधीकरण
- लक्ष्य: तकनीकी उद्योगों के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद सप्लाई चेन सुनिश्चित करना।
- प्रमुख कदम:
- ‘भरोसेमंद वेंडर फ्रेमवर्क’ पर द्विपक्षीय तंत्र बनाना।
- क्वाड (Quad) के सहयोग से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षित अंडरसी केबल कनेक्टिविटी को मजबूत करना और तोड़फोड़ (Sabotage) के खतरों को रोकना।
- सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन की सुरक्षा के लिए दोनों देशों के शोध संस्थानों के बीच सहयोग।
- क्रिटिकल मिनरल्स (जैसे लिथियम, कोबाल्ट) की सुरक्षित सप्लाई चेन के लिए संयुक्त निवेश और रीसाइक्लिंग पर काम करना।
2. क्रिटिकल टेक्नोलॉजी
- लक्ष्य: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), अंतरिक्ष, टेलीकॉम, बायोटेक्नोलॉजी और एडवांस्ड मैटेरियल्स के क्षेत्र में सुरक्षा और नवाचार को बढ़ावा देना।
- प्रमुख कदम:
- लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित सुरक्षित और विश्वसनीय AI के लिए वैश्विक मानक और बेंचमार्क विकसित करना।
- बड़े भाषा मॉडल (LLMs), AI इंफ्रास्ट्रक्चर और कंप्यूटिंग क्षमता तक सुरक्षित पहुंच के तरीकों को साझा करना।
- तेजी से बढ़ते अंतरिक्ष क्षेत्र (Space Sector) में वाणिज्यिक और सरकारी स्तर पर संयुक्त पहल तलाशना।
3. साइबर सुरक्षा
- लक्ष्य: साइबर अपराधों का मुकाबला करना, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे (Critical National Infrastructure) की रक्षा करना और दुर्भावनापूर्ण साइबर गतिविधियों को रोकना।
- प्रमुख कदम:
- विभिन्न वर्किंग चैनलों में दोहराव को रोकने के लिए साइबर और ICT क्षेत्रों में एक एकीकृत द्विपक्षीय तंत्र की स्थापना।
- संयुक्त राष्ट्र (UN) के साइबर संबंधित मंचों पर सहयोग मजबूत करना और डेटा गवर्नेंस आर्किटेक्चर पर संवाद बढ़ाना।
- साइबर और तकनीकी उद्यमों में द्विपक्षीय निवेश के लिए व्यावहारिक कार्यशालाएं आयोजित करना।
- साइबर तकनीकी कौशल को बढ़ाने के लिए एक कौशल इनक्यूबेटर हब बनाना।
4. डिजिटल लचीलापन
- लक्ष्य: हिंद-प्रशांत क्षेत्र के डिजिटल हो रहे देशों को भरोसेमंद और किफायती तकनीकी समाधान प्रदान करना।
- प्रमुख कदम:
- भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) सिद्धांतों (जैसे UPI, आधार आदि की तर्ज पर) को हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देशों के साथ साझा करना।
- स्वच्छ ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और डिजिटल परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में किफायती DPI समाधानों का विस्तार करना।
5. रक्षा अनुसंधान सहयोग
- लक्ष्य: रक्षा विज्ञान और तकनीकी प्राथमिकताओं पर दोनों देशों की क्षमताओं का लाभ उठाना।
- प्रमुख कदम:
- ऑस्ट्रेलिया के ‘डिफ़ेंस साइंस एंड टेक्नोलॉजी ग्रुप’ और भारत के DRDO के बीच संस्थागत संबंधों को मजबूत करना।
- दोनों देशों के रक्षा नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम (जैसे भारत का iDEX) को आपस में जोड़ना।
- रक्षा अनुप्रयोगों के लिए अभिनव समुद्री विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षमताओं (जैसे समुद्री निगरानी – Maritime Surveillance) पर ध्यान केंद्रित करना।
गवर्नेंस और प्रशासनिक ढांचा
इस साझेदारी की प्रभावी निगरानी के लिए एक मजबूत द्विपक्षीय संरचना तैयार की गई है:
- सह-अध्यक्षता: इस साझेदारी की अध्यक्षता वरिष्ठ स्तर पर ऑस्ट्रेलिया के उप सचिव (अंतर्राष्ट्रीय और सुरक्षा समूह, प्रधानमंत्री और कैबिनेट विभाग) तथा भारत के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (Deputy NSA) द्वारा संयुक्त रूप से की जाएगी।
- वार्षिक बैठक: जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारी हर साल बैठक करेंगे, प्रगति की समीक्षा करेंगे और उभरते साइबर खतरों का आकलन करेंगे।
विभागीय नेतृत्व:
| स्तंभ | भारतीय नेतृत्व | ऑस्ट्रेलियाई नेतृत्व |
| 1. सप्लाई चेन लचीलापन | राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) | साइबर मामलों और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी के राजदूत का कार्यालय |
| 2. क्रिटिकल टेक्नोलॉजी | राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) | साइबर मामलों और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी के राजदूत का कार्यालय |
| 3. साइबर सुरक्षा | साइबर कूटनीति प्रभाग, विदेश मंत्रालय (MEA) | साइबर मामलों और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी के राजदूत का कार्यालय |
| 4. डिजिटल लचीलापन | ओशिनिया प्रभाग, विदेश मंत्रालय (MEA) | साइबर मामलों और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी के राजदूत का कार्यालय |
| 5. रक्षा अनुसंधान | रक्षा मंत्रालय (MoD) | रक्षा विभाग (Department of Defence) |
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष प्रमुख तथ्य
| महत्वपूर्ण शब्दावली | प्रमुख तथ्य |
| PACTS | इसका पूरा नाम Australia-India Partnership on Cyber, Critical Technologies and Supply Chains है, जिसने 2020 के पुराने फ्रेमवर्क का स्थान लिया है। |
| DPI (डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर) | यह डिजिटल पहचान, भुगतान प्रणाली और डेटा विनिमय के खुले, इंटरऑपरेबल नेटवर्क को संदर्भित करता है। भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में इसके विस्तार के लिए अग्रणी भूमिका निभा रहा है। |
| अंडरसी केबल्स | महासागरों के तल पर बिछाई गई फाइबर-ऑप्टिक केबल जो दुनिया का 95% से अधिक इंटरनेट डेटा ट्रांसफर करती हैं। रणनीतिक रूप से यह बेहद संवेदनशील बुनियादी ढांचा है। |
| क्रिटिकल मिनरल्स | ऐसे खनिज (जैसे कोबाल्ट, लिथियम, रेयर अर्थ एलिमेंट्स) जो आधुनिक तकनीक, ग्रीन एनर्जी और रक्षा उपकरणों के लिए अनिवार्य हैं, और जिनकी सप्लाई चेन पर चीन का दबदबा है। |
तीसरा भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन: रणनीतिक संबंधों को मिली नई ऊंचाई
- प्रारंभिक परीक्षा: भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी, व्यापक आर्थिक सहयोग समझौता (CECA), लौटाए जा रहे सांस्कृतिक पुरावशेष (Cultural Artefacts)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से जुड़े और/या भारत के हितों को प्रभावित करने वाले समझौते; हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में अपने ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष एंथनी अल्बनीज द्वारा आयोजित तीसरे भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लिया। यह बैठक दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) के सफल 6 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित की गई थी, जिसमें दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा की और सुरक्षा से लेकर संस्कृति तक कई ऐतिहासिक समझौतों पर मुहर लगाई।
शिखर सम्मेलन के प्रमुख बिंदु और द्विपक्षीय कूटनीति
1. आर्थिक और व्यापारिक साझेदारी (CECA की दिशा में कदम)
- CECA प्रतिबद्धता: दोनों प्रधानमंत्रियों ने एक महत्वाकांक्षी, संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
- CEOs फोरम और बिजनेस रोडमैप: बैठक में इसी दिन आयोजित ‘भारत-ऑस्ट्रेलिया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEOs) फोरम’ के नीतिगत निष्कर्षों का स्वागत किया गया और दोनों देशों के व्यापारिक घरानों को क्रिटिकल मिनरल्स तथा क्लीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया गया।
2. रणनीतिक एवं बहुपक्षीय सहयोग
- स्वतंत्र हिंद-प्रशांत (Free & Open Indo-Pacific): दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान करते हुए एक स्वतंत्र, खुले, समावेशी और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता को दोहराया, जो रणनीतिक रूप से चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए आवश्यक है।
3. सांस्कृतिक पुरावशेषों की वापसी
ऑस्ट्रेलियाई संस्थानों द्वारा भारत की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े तीन अमूल्य पुरावशेषों (Artefacts) को स्वेच्छा से वापस सौंपने का निर्णय लिया गया है। ये सभी कलाकृतियाँ तमिलनाडु मूल की हैं:
- पवित्र नंदी (Sacred Nandi): पत्थर से निर्मित एक प्राचीन मूर्ति।
- धातु का त्रिशूल (Metal Trident): इस त्रिशूल पर देवी भद्रकाली की छवि अंकित है।
- छह सिर वाले कार्तिकेय: पत्थर से बनी भगवान कार्तिकेय की छह मुखों वाली एक दुर्लभ प्रतिमा।
4. हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (MoUs) और द्विपक्षीय दस्तावेज
शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों देशों ने रणनीतिक और तकनीकी सहयोग बढ़ाने के लिए निम्नलिखित क्षेत्रों में MoUs और द्विपक्षीय समझौतों को अंतिम रूप दिया:
- सुरक्षा एवं रक्षा: समुद्री सुरक्षा (Maritime Security) और रक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए नए नीतिगत दस्तावेज।
- ऊर्जा और प्रौद्योगिकी: असैन्य परमाणु ऊर्जा (Civil Nuclear Energy), सौर ऊर्जा और उभरती प्रौद्योगिकियों (Emerging Technologies) के क्षेत्र में अनुसंधान।
- शिक्षा और कौशल विकास: भारतीय युवाओं के कौशल विकास, पारंपरिक ज्ञान (Traditional Knowledge) के संरक्षण और भारत में ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों की उपस्थिति का विस्तार करने पर समझौता।
- सांस्कृतिक क्षेत्र: फिल्मों के सह-निर्माण (Film making) को बढ़ावा देने के लिए भी एक विशेष समझौता किया गया।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| विशिष्ट समझौता / शब्दावली | महत्वपूर्ण तथ्य |
| तीसरा वार्षिक शिखर सम्मेलन | 9 जुलाई 2026 को ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में आयोजित किया गया। |
| व्यापक रणनीतिक साझेदारी | भारत और ऑस्ट्रेलिया ने इस विशेष रणनीतिक दर्जे को वर्ष 2020 में अपनाया था, जिसके अब 6 वर्ष पूरे हो चुके हैं। |
| CECA (व्यापक आर्थिक सहयोग समझौता) | यह दोनों देशों के बीच प्रस्तावित एक पूर्ण मुक्त व्यापार समझौता (FTA) है, जो वर्तमान में लागू अंतरिम समझौते (ECTA) का उन्नत रूप होगा। |
| लौटाए जा रहे पुरावशेष | तमिलनाडु मूल के तीन पुरावशेष: पत्थर के नंदी, भद्रकाली की छवि वाला धातु का त्रिशूल और छह सिर वाले कार्तिकेय की पाषाण मूर्ति। |
ITADCs और ATUFS समीक्षा: एमएसएमई तथा कपड़ा क्षेत्र का कायाकल्प
- प्रारंभिक परीक्षा: संशोधित प्रौद्योगिकी उन्नयन कोष योजना (ATUFS), एकीकृत कपड़ा और परिधान विकास केंद्र (ITADCs), कपड़ा क्षेत्र के डिजिटल पोर्टल।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोजगार से संबंधित विषय; औद्योगिक नीति और विकास; एमएसएमई (MSMEs) की भूमिका।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हाल ही में केंद्रीय कपड़ा मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने भारत के कपड़ा पारिस्थितिकी तंत्र (Textile Ecosystem) को मजबूत करने, तकनीकी उन्नयन को गति देने और संस्थागत सुधारों की प्रगति का मूल्यांकन करने के लिए एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में पूर्ववर्ती ‘पावरलूम सर्विस सेंटर्स’ को एकीकृत कपड़ा और परिधान विकास केंद्रों (ITADCs) के रूप में पुनर्गठित करने और ATUFS योजना के तीसरे पक्ष के प्रभाव मूल्यांकन (Third-Party Impact Assessment) के शानदार नतीजों को साझा किया गया।
बैठक के प्रमुख नीतिगत निर्णय और महत्वपूर्ण तथ्य
कपड़ा क्षेत्र को वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर बनाने के लिए निम्नलिखित पहलों की प्रगति की समीक्षा की गई:
1. ITADCs: कपड़ा उद्यमियों के लिए वन-स्टॉप ग्रोथ हब
- पुनर्गठन: सरकार ने पुराने पावरलूम सर्विस सेंटर्स का कायाकल्प करके उन्हें एकीकृत कपड़ा और परिधान विकास केंद्रों (ITADCs) के रूप में बदल दिया है।
- भूमिका: ये केंद्र अब कपड़ा उद्यमियों और MSMEs के लिए ‘वन-स्टॉप सुविधा केंद्र’ के रूप में काम करेंगे, जो कौशल विकास, परीक्षण, डिजाइन सहायता, प्रौद्योगिकी अपनाने, ऋण सुविधा, निर्यात प्रोत्साहन और बाजार लिंकेज प्रदान करेंगे।
- नए युग के फाइबर: वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में इन केंद्रों ने बांस, भांग (Hemp), फ्लैक्स, केला और अनानास (Pineapple) के फाइबर जैसे पर्यावरण-अनुकूल और नए जमाने के फाइबर के व्यावसायीकरण को बढ़ावा दिया है।
2. संशोधित प्रौद्योगिकी उन्नयन कोष योजना (ATUFS) के प्रभाव
- इकाइयों को समर्थन: योजना के तहत अब तक 10,061 कपड़ा इकाइयों को सहायता प्रदान की गई है।
- वित्तीय लाभ और निवेश: सरकार द्वारा ₹2,776 करोड़ की सब्सिडी सहायता दी गई, जिसने बाजार से ₹53,121 करोड़ से अधिक के निजी निवेश को आकर्षित करने (Leverage) में सफलता पाई।
- मल्टीप्लायर इफेक्ट: अध्ययन के अनुसार, योजना के तहत दी गई प्रत्येक ₹1 करोड़ की सरकारी सब्सिडी ने लगभग ₹19 करोड़ का निजी निवेश जुटाया और लगभग 130 प्रत्यक्ष रोजगार पैदा किए।
- मशीनीकरण और रोजगार: इसके माध्यम से लगभग 6.7 लाख अत्याधुनिक कपड़ा मशीनें स्थापित की गईं और कपड़ा क्षेत्र में 3.6 लाख प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हुए। कुल सब्सिडी का सबसे बड़ा हिस्सा (46%) बुनाई (Weaving) क्षेत्र द्वारा प्राप्त किया गया।
3. डिजिटल सुशासन: नए पोर्टल्स की शुरुआत
प्रशासनिक पारदर्शिता और रीयल-टाइम मॉनिटरिंग को बढ़ावा देने के लिए दो प्रमुख डिजिटल पहलों का उद्घाटन किया गया:
- KPI पोर्टल (Key Performance Indicator Portal): यह पोर्टल देश भर के सभी ITADCs के प्रदर्शन की वास्तविक समय में निगरानी करेगा। इसके माध्यम से डिजिटल डैशबोर्ड और फील्ड-स्तरीय डेटा कैप्चरिंग की जाएगी ताकि सुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
- टेक्सटाइल कमिश्नर की नई वेबसाइट: कपड़ा आयुक्त कार्यालय की वेबसाइट का पुनर्गठन किया गया है, जिसमें ITADCs और पावरलूम क्लस्टर्स के इंटरैक्टिव मानचित्र शामिल किए गए हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| विशिष्ट योजना / पोर्टल / केंद्र | महत्वपूर्ण तथ्य |
| ATUFS योजना | Amended Technology Upgradation Fund Scheme—यह कपड़ा मंत्रालय की एक केंद्रीय योजना है जिसका मुख्य उद्देश्य कपड़ा उद्योग में अत्याधुनिक तकनीक और आधुनिकीकरण को बढ़ावा देना है। |
| ITADCs | Integrated Textile and Apparel Development Centres—पुराने पावरलूम सर्विस सेंटर्स का नया एकीकृत रूप, जो MSMEs को इनक्यूबेशन से लेकर मार्केट लिंकेज तक की सुविधाएं देता है। |
| KPI पोर्टल | कपड़ा क्षेत्र के क्षेत्रीय कार्यालयों और विकास केंद्रों के प्रदर्शन मापन (Performance Benchmarking) के लिए लॉन्च किया गया रीयल-टाइम डिजिटल प्लेटफॉर्म। |
| नॉन-कॉटन/नए फाइबर | कपड़ा क्षेत्र में विविधीकरण के लिए बांस, केला, अनानास और भांग के फाइबर (Hemp & Flax) का उपयोग तकनीकी वस्त्रों (Technical Textiles) में बढ़ रहा है। |