31 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत समुद्री जहाजरानी और सुरक्षा को सुदृढ़ करने हेतु भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल (BMIP) व P&I (प्रोटेक्शन एंड इंडेम्निटी) कवर, सौर भौतिकी में वैज्ञानिकों द्वारा खोजी गई सूर्य के ऊपरी वायुमंडल के तेज घूर्णन की क्रियाविधि, नीली अर्थव्यवस्था के तहत एकीकृत एक्वा पार्क के विकास की योजना, भारत की तटीय व जलमग्न पुरातात्विक संपदा को संरक्षित करने हेतु जलमग्न सांस्कृतिक विरासत (Underwater Cultural Heritage), देश के आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण व सतत उपयोग के लिए गठित आनुवंशिक संसाधनों के प्रबंधन पर राष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड (NABMGR), तथा भारतीय अर्थव्यवस्था की दक्षता को दर्शाने वाली ‘भारत का बाज़ार सुधार और प्रतिस्पर्धात्मकता रिपोर्ट 2026’ का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल (BMIP) और P&I कवर
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की आर्थिक घटनाएं, समुद्री सुरक्षा व बीमा तंत्र, आत्मनिर्भर भारत पहल।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाना; बुनियादी ढांचा—पोर्ट्स, शिपिंग व लॉजिस्टिक्स; जोखिम प्रबंधन।
चर्चा में क्यों?
वित्तीय सेवा विभाग (DFS), वित्त मंत्रालय ने भारत का पहला संप्रभु-समर्थित (Sovereign-backed) संरक्षण और क्षतिपूर्ति (P&I) बीमा उत्पाद लॉन्च किया। इसे न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड द्वारा भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल (BMIP) के तहत तैयार किया गया है। पहला P&I पॉलिसी दस्तावेज शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (SCI) को सौंपा गया।
मुख्य बिंदु: BMIP और P&I कवर की विशेषताएं
1. P&I बीमा उत्पाद का दायरा
- तृतीय-पक्ष देयता सुरक्षा: यह बीमा उत्पाद क्रू व कार्गो देयता, प्रदूषण देयता और मलबे को हटाने (Wreck Removal) जैसी तृतीय-पक्ष देनदारियों (Third-party Liabilities) के खिलाफ सुरक्षा देता है।
- क्षतिपूर्ति सीमा: इस पूल की संयुक्त क्षमता के माध्यम से अधिकतम 1.5 अरब अमेरिकी डॉलर (USD 1.5 Billion) तक की क्षतिपूर्ति सीमा (Indemnity Limit) प्रदान की जाएगी।
- नेटवर्क सपोर्ट: इसके तहत 24×7 पोर्ट कॉरेस्पोंडेंट नेटवर्क की सुविधा उपलब्ध होगी।
2. BMIP की प्रभावशीलता और युद्ध जोखिम दरें
- लांच तिथि: BMIP को DFS द्वारा 12 मई 2026 को संप्रभु गारंटी के साथ क्रियान्वित किया गया था।
- प्रीमियम दरों में भारी कमी: BMIP लागू होने से पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान बढ़ी हुई युद्ध जोखिम प्रीमियम दरों (War Risk Premium Rates) में 35-40% की गिरावट आई है।
- जारी नीतियां (29 जुलाई 2026 तक): कार्गो वॉर रिस्क और हल वॉर रिस्क को कवर करने वाली कुल 1608 पॉलिसियां जारी की जा चुकी हैं।
3. रणनीतिक महत्व (Strategic Importance)
- विदेशी निर्भरता में कमी: अब तक भारत वैश्विक P&I क्लबों (जैसे UK/यूरोपीय P&I क्लब) पर निर्भर था। इस स्वदेशी उत्पाद से विदेशी बाजारों पर निर्भरता घटेगी।
- आर्थिक लाभ: भारतीय समुद्री व्यापार से उत्पन्न पूंजी देश की अर्थव्यवस्था के भीतर ही रहेगी।
- लॉजिस्टिक्स सुरक्षा: यह तंत्र कठिन वैश्विक परिस्थितियों और वैश्विक संघर्षों के दौरान भी भारतीय जहाजों को निर्बाध बीमा कवरेज प्रदान करता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| पहलू / मापदंड | महत्वपूर्ण तथ्य |
| नोडल मंत्रालय/विभाग | वित्तीय सेवा विभाग (DFS), वित्त मंत्रालय। |
| डिजाइनर/जारीकर्ता कंपनी | न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (GIC Re व अन्य के सहयोग से)। |
| प्रथम प्राप्तकर्ता संस्था | शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (SCI)। |
| बीमा की अधिकतम सीमा | 1.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक। |
| BMIP का प्रभाव | वॉर रिस्क प्रीमियम में 35-40% की कमी। |
| मुख्य उद्देश्य | विदेशी P&I क्लबों पर निर्भरता घटाना व आत्म-निर्भर भारत को बढ़ावा। |
सूर्य के ऊपरी वायुमंडल का तेज घूर्णन
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय महत्व की वैज्ञानिक खोजें, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, सौर मंडल एवं खगोल विज्ञान।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी—विकास एवं अनुप्रयोग; दैनिक जीवन पर इसका प्रभाव; अंतरिक्ष क्षेत्र में नए शोध व तकनीक।
चर्चा में क्यों?
भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के स्वायत्त संस्थान एरीज़ (ARIES) के नेतृत्व में भारतीय वैज्ञानिकों ने सूर्य के वायुमंडल से जुड़ा एक ऐतिहासिक शोध उजागर किया है। इस अध्ययन में पाया गया कि सूर्य का ऊपरी वायुमंडल उसकी दृश्य सतह की तुलना में काफी तेज गति से घूमता है और सतह से जितनी अधिक ऊंचाई पर जाएं, इसकी घूर्णन गति उतनी ही बढ़ती जाती है। जापान के ‘नोबेयामा रेडियोहेलियोग्राफ़’ के आंकड़ों पर आधारित यह खोज शास्त्रीय भौतिकी (Classical Physics) के कोणीय संवेग संरक्षण नियम को सीधी चुनौती देती है।
मुख्य बिंदु: शोध के निष्कर्ष, कार्यप्रणाली और प्रभाव
1. शास्त्रीय भौतिकी के नियम का उल्लंघन
- कोणीय संवेग संरक्षण (Conservation of Angular Momentum): जैसे स्केटर हाथ समेटने पर तेज और फैलाने पर धीमा घूमता है, नियम के अनुसार सूर्य की सतह से दूर जाने पर वायुमंडल को धीमा होना चाहिए था।
- अनोखा व्यवहार: इस शोध ने साबित किया कि सूर्य का ऊपरी वायुमंडल दूरी बढ़ने के साथ धीमा होने के बजाय और तेज घूमता है।
2. सौर गतिविधियों (Sunspots) का प्रभाव
- ऊंचाई के साथ गति: सतह से जितनी अधिक ऊंचाई पर जाएं, घूर्णन गति (rotation speed) उतनी ही बढ़ती है।
- सनस्पॉट से संबंध: जब सूर्य पर गतिविधियां बढ़ती हैं (यानी सनस्पॉट/सौर कलंक की संख्या बढ़ती है), तब घूर्णन गति में हल्की कमी दर्ज की जाती है।
3. डेटा और मापन तकनीक
- नोबेयामा रेडियोहेलियोग्राफ़ (Japan): इस जापानी वेधशाला के रेडियो अवलोकनों का उपयोग करके सौर आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।

- 2D इमेज-कोरिलेशन मेथड: सूर्य की गैस संरचना के कारण घूर्णन मापने के लिए दो अलग-अलग दिनों की तस्वीरों का मिलान कर शिफ्ट (Shift) निकाला गया। इसी शिफ्ट से घूर्णन गति की गणना की गई।
4. वैज्ञानिक संस्थान और शोधकर्ता
- शामिल संस्थान: एरीज़, उदयपुर सोलर ऑब्जर्वेटरी (USO-PRL), आईआईटी दिल्ली, और अहमदनगर कॉलेज।
- प्रकाशन: यह अध्ययन अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका Astronomy & Astrophysics Letters में प्रकाशित हुआ है।
5. इसका व्यावहारिक महत्व क्या है?
- अंतरिक्ष मौसम (Space Weather): इससे सौर ज्वालाओं (Solar Flares) और कोरोनल मास इजेक्शन (CME) को समझने में मदद मिलेगी।
- तकनीकी सुरक्षा: पृथ्वी पर उपग्रहों, GPS नेविगेशन, संचार प्रणालियों और पावर ग्रिड को सौर तूफानों के खतरों से बचाने के लिए मॉडल अधिक सटीक बनाए जा सकेंगे।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| पहलू / मापदंड | महत्वपूर्ण तथ्य |
| मुख्य शोध संस्थान | ARIES (नैनीताल, DST के तहत स्वायत्त संस्थान)। |
| उपयोग किया गया उपकरण | नोबेयामा रेडियोहेलियोग्राफ़ (जापान)। |
| प्रयुक्त तकनीक | 2D इमेज-कोरिलेशन पद्धति। |
| घूर्णन की प्रवृत्ति | सूर्य की सतह से ऊंचाई बढ़ने पर घूर्णन गति बढ़ती है। |
| सनस्पॉट प्रभाव | अधिक सनस्पॉट = घूर्णन गति में हल्की कमी। |
| भौतिकी नियम अपवाद | कोणीय संवेग के संरक्षण नियम का उल्लंघन। |
एकीकृत एक्वा पार्क का विकास
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की आर्थिक एवं सामाजिक विकास की योजनाएं, नीतियां और मत्स्य पालन क्षेत्र।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था, पशुपालन का अर्थशास्त्र, खाद्य प्रसंस्करण एवं संबंधित उद्योग, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन और कौशल विकास।
चर्चा में क्यों?
मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने राज्यसभा में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत एकीकृत एक्वा पार्क के विकास पर विस्तृत जानकारी साझा की। केंद्र सरकार ने अब तक देश में कुल ₹713.80 करोड़ की लागत से 12 एकीकृत एक्वा पार्कों की स्थापना को मंजूरी दी है, जिनमें आंध्र प्रदेश के लिए स्वीकृत एक बहु-विषयक परियोजना (₹88.08 करोड़) भी शामिल है।
मुख्य बिंदु: ढांचा, फंडिंग और निर्यात प्रोत्साहन पहल
1. एकीकृत एक्वा पार्क की अवधारणा और संरचना
- एकीकृत हब: एक्वा पार्क मत्स्य पालन मूल्य श्रृंखला (Value Chain) के लिए वन-स्टॉप हब के रूप में काम करेंगे। ये स्थानीय जरूरतों के हिसाब से प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और ब्रांडिंग की एकीकृत सुविधाएं देंगे।
- आंध्र प्रदेश परियोजना: ₹88.08 करोड़ की लागत से बनने वाले इस पार्क में सीफूड प्रोसेसिंग, झींगा (Shrimp), समुद्री मछली (Marine Finfish), केकड़ा (Crab), सीवीड और सजावटी मछली (Ornamental Fish) की थीम शामिल हैं।
2. फंडिंग पैटर्न (Fund Sharing Mechanism)
- यह PMMSY के तहत केंद्र प्रायोजित योजना (CSS) का गैर-लाभार्थी घटक है।
- पूर्वोत्तर एवं हिमालयी राज्य: 90% केंद्र और 10% राज्य।
- अन्य राज्य: 60% केंद्र और 40% राज्य।
- केंद्र शासित प्रदेश (UTs): 100% केंद्रीय वित्तपोषण (विधानसभा वाले या बिना विधानसभा वाले दोनों)।
3. प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और निर्यात बढ़ाने के उपाय
- 34 क्लस्टर: 34 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में वैल्यू-एडिशन और प्रोसेसिंग क्लस्टर अधिसूचित किए गए।
- फिशिंग हार्बर व लैंडिंग सेंटर: 11 नए फिशिंग हार्बर का निर्माण, 11 का आधुनिकीकरण और 23 आधुनिक ‘फिश लैंडिंग सेंटर’ स्वीकृत किए गए।
- गहरे समुद्र में मछली पकड़ना: सतत समुद्री मत्स्य पालन और कच्चे माल की आपूर्ति बढ़ाने के लिए 284 गहरे समुद्र के जहाजों (Deep-sea Fishing Vessels) को मंजूरी।
- वैल्यू-एडेड इकाइयां: 121 मूल्य संवर्धित उद्यम इकाइयों को वित्तीय सहायता।
- FIDF पहल: ‘मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड’ (FIDF) के तहत निजी उद्यमियों के लिए 18 आधुनिक प्रोसेसिंग/कोल्ड-चेन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई।
4. कौशल विकास और क्षमता निर्माण
- नोडल एजेंसी: राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) इसका क्रियान्वयन कर रहा है।
- ट्रेनिंग आंकड़े: NFDB ने PMMSY के तहत अब तक 4,041 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए हैं। इनसे देश भर के 1,75,261 मछुआरों और मत्स्य पालकों को सीधा लाभ मिला है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| पहलू / मापदंड | महत्वपूर्ण तथ्य |
| मूल योजना | प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY)। |
| मंजूर एक्वा पार्क | कुल 12 एकीकृत एक्वा पार्क (कुल लागत: ₹713.80 करोड़)। |
| फंडिंग पैटर्न (सामान्य राज्य) | 60:40 (केंद्र : राज्य)। |
| फंडिंग पैटर्न (NE/हिमालयी) | 90:10 (केंद्र : राज्य)। |
| फंडिंग पैटर्न (UTs) | 100% केंद्रीय अंश। |
| कौशल विकास नोडल एजेंसी | राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB)। |
| अन्य प्रमुख कोष | FIDF (Fisheries and Aquaculture Infrastructure Development Fund)। |
भारत में जलमग्न सांस्कृतिक विरासत
- प्रारंभिक परीक्षा: भारत का इतिहास और संस्कृति, प्रमुख पुरातात्विक स्थल तथा जलमग्न पुरातात्विक क्षेत्र।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 1): भारतीय संस्कृति—प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला रूपों, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू; सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने राज्यसभा में देश में चल रही जलमग्न पुरातात्विक खोजों, संस्थागत लाइसेंस और 2030 तक की कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। वर्तमान में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की अंडरवाटर आर्कियोलॉजी विंग (UAW) द्वारा गुजरात के द्वारका व बेट द्वारका, तमिलनाडु के महाबलीपुरम और पुडुचेरी के कराईकल में शोध व अन्वेषण कार्य संचालित किए जा रहे हैं।
मुख्य बिंदु: सर्वेक्षण स्थल, लाइसेंसिंग और बजटीय आवंटन
1. वर्तमान सर्वेक्षण और संस्थागत लाइसेंस
- ASI UAW के वर्तमान स्थल: द्वारका व बेट द्वारका (गुजरात), महाबलीपुरम (तमिलनाडु) और कराईकल (पुडुचेरी)।
- तमिलनाडु राज्य पुरातत्व विभाग: इसे पूमपुहार में जलमग्न उत्खनन हेतु लाइसेंस दिया गया है।
- राष्ट्रीय महासागर विज्ञान संस्थान (NIO) का मरीन आर्कियोलॉजी सेंटर: इसे बेट द्वारका, छारी और गंगाता बेट (गुजरात) में खोज का लाइसेंस मिला है।
2. बजटीय आवंटन और खर्च (वित्तीय वर्ष वार)
- ASI UAW आवंटन:
- वर्ष 2025-26 के लिए ₹75.40 लाख आवंटित किए गए, जिसमें से ₹74.91 लाख खर्च हुए।
- वर्ष 2026-27 के लिए ₹66.50 लाख आवंटित किए गए हैं, जिसमें से अब तक ₹25.64 लाख खर्च हो चुके हैं।
- अन्य संस्थाएं:
- तमिलनाडु राज्य पुरातत्व विभाग ने स्थलीय और जलमग्न उत्खनन के लिए ₹7 करोड़ निर्धारित किए हैं।
- NIO का बजटीय आवंटन ₹20 लाख है।
3. क्षमता निर्माण और मिशन 2030 लक्ष्य
- प्रशिक्षण पहल: ASI UAW ने पुरातत्वविदों को प्रशिक्षित करने और जलमग्न स्थलों के व्यवस्थित सर्वेक्षण के लिए एक विशेष कार्यक्रम शुरू किया है।
- वर्ष 2030 तक चिह्नित 5 प्रमुख जलमग्न स्थल:
- द्वारका और बेट द्वारका (गुजरात)
- विजयदुर्ग (महाराष्ट्र)
- जंजीरा (महाराष्ट्र)
- कराईकल (पुडुचेरी)
- महाबलीपुरम (तमिलनाडु)
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| पहलू / मापदंड | महत्वपूर्ण तथ्य |
| नोडल एजेंसी (केंद्रीय) | अंडरवाटर आर्कियोलॉजी विंग (UAW), भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI)। |
| NIO का मरीन सेंटर | राष्ट्रीय महासागर विज्ञान संस्थान (गोवा)। |
| तमिलनाडु का प्रमुख स्थल | पूमपुहार (प्राचीन चोल बंदरगाह शहर)। |
| महाराष्ट्र के 2030 तक के स्थल | विजयदुर्ग और जंजीरा जलदुर्ग (समुद्री किले)। |
| प्रशिक्षण कार्यक्रम | जलमग्न पुरातात्विक सर्वेक्षणों के लिए विशेष क्षमता निर्माण पहल। |
आनुवंशिक संसाधनों के प्रबंधन पर राष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड (NABMGR)
- प्रारंभिक परीक्षा: पर्यावरण एवं जैव विविधता, कृषि, जैव विविधता संरक्षण से जुड़े राष्ट्रीय संस्थान व नीतियां।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): कृषि पद्धतियां एवं उत्पादकता, जलवायु-अनुकूल कृषि (Climate-Resilient Agriculture), जैव विविधता संरक्षण, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा।
चर्चा में क्यों?
नई दिल्ली स्थित ICAR-NBPGR में पुनर्गठित ‘राष्ट्रीय आनुवंशिक संसाधन प्रबंधन सलाहकार बोर्ड’ (NABMGR) की पहली बैठक आयोजित हुई। डॉ. आर. एस. परोदा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में भारत की एग्रोबायोडायवर्सिटी (कृषि जैव विविधता) के संरक्षण, जलवायु-सहनशील कृषि और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए एकीकृत रोडमैप तैयार किया गया।
मुख्य बिंदु: बोर्ड का पुनर्गठन, मुख्य सिफारिशें और भावी रणनीति
1. NABMGR का गठन और संरचना
- स्थापना: ICAR द्वारा सबसे पहले 2011 में डॉ. आर. एस. परोदा की अध्यक्षता में इसका गठन किया गया था।
- 2026 में पुनर्गठन: ICAR ने 2026 में बोर्ड का फिर से पुनर्गठन किया। अब डॉ. आर. एस. परोदा इसके अध्यक्ष और डॉ. एम. एल. जाट (सचिव DARE एवं महानिदेशक ICAR) इसके सह-अध्यक्ष हैं।
- बहु-हितधारक मंच: इसमें NBA, BSI, MoEF&CC, DBT, NMPB, ICAR के 6 राष्ट्रीय ब्यूरो और किसानों के प्रतिनिधि शामिल हैं।
2. मुख्य सिफारिशें और रणनीतिक सुझाव
- एकीकृत प्रबंधन: पौधे, पशु, मछली, सूक्ष्मजीव (microbial) और कीट आनुवंशिक संसाधनों का एक साथ एकीकृत प्रबंधन करना।
- कानूनी ढांचा (Legal Framework): पौध किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण अधिनियम (PPV&FRA) की तर्ज पर पशु और मत्स्य आनुवंशिक संसाधनों के लिए भी कानून बनाने का सुझाव दिया गया, ताकि पशुपालकों और मछुआरों के अधिकारों की रक्षा हो सके।
- जर्मप्लाज्म का उपयोग: जलवायु-अनुकूल फसलें बनाने के लिए वाइल्ड रिलेटिव्स (Wild Relatives) और संरक्षित जर्मप्लाज्म का ब्रीडिंग कार्यक्रमों में उपयोग बढ़ाना।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: मध्य एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ जर्मप्लाज्म विनिमय (जैसे कॉटन, रामबुतान, एवोकैडो, शीप ब्रीड्स) को बढ़ावा देना।
3. अन्य महत्वपूर्ण पहल और लक्ष्य
- राष्ट्रीय सुरक्षा जीनबैंक (National Safety Genebank – NSG): बोर्ड ने NSG के निर्माण को समय पर पूरा करने पर जोर दिया, ताकि इसे 2028-29 में ICAR के शताब्दी समारोह (Centenary Celebrations) के अवसर पर राष्ट्र को समर्पित किया जा सके।
- पारंपरिक फसलों का मुख्यधारा में लाना: कम उपयोग की जाने वाली पारंपरिक फसलों, स्थानीय पशु नस्लों और सूक्ष्मजीवों को बढ़ावा देने के लिए अंतर-संस्थागत कार्यक्रम चलाना।
- दिल्ली घोषणापत्र की समीक्षा: 2016 के अंतर्राष्ट्रीय एग्रोबायोडायवर्सिटी कांग्रेस में स्वीकृत घोषणापत्र के क्रियान्वयन की समीक्षा करना।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| पहलू / मापदंड | महत्वपूर्ण तथ्य |
| बोर्ड का नाम | राष्ट्रीय आनुवंशिक संसाधन प्रबंधन सलाहकार बोर्ड (NABMGR)। |
| अध्यक्ष (2026) | डॉ. आर. एस. परोदा (पूर्व सचिव, DARE एवं पूर्व DG, ICAR)। |
| सह-अध्यक्ष | डॉ. एम. एल. जाट (सचिव DARE एवं महानिदेशक ICAR)। |
| आयोजन स्थल | ICAR-NBPGR (राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो), नई दिल्ली। |
| ICAR के तहत 6 राष्ट्रीय ब्यूरो | पौधे (NBPGR), पशु (NBAGR), मछली (NBFGR), सूक्ष्मजीव (NBAIM), कीट (NBAIR), मृदा (NBSS&LUP)। |
| लक्ष्य तिथि (NSG) | ICAR का शताब्दी वर्ष: 2028-29। |
| संबंधित अधिनियम | जैव विविधता अधिनियम (2002) एवं PPV&FRA (2001)। |
भारत का बाज़ार सुधार और प्रतिस्पर्धात्मकता रिपोर्ट 2026
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्थिक घटनाएं, आर्थिक सुधार, अंतर्राष्ट्रीय संस्थान और रिपोर्ट।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाना, विकास व वृद्धि; प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कर (GST), दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC), औद्योगिक नीति और प्रतिस्पर्धात्मकता।
चर्चा में क्यों?
कॉम्पिटीयर फाउंडेशन द्वारा जारी नई रिपोर्ट “India’s Next Growth Frontier” में बताया गया कि भारत वैश्विक रैंकिंग में 82वें स्थान से छलांग लगाकर 57वें स्थान पर पहुंच गया है। यह 25 स्थानों का सुधार 2010 से 2023 के दौरान भारत द्वारा किए गए ढांचागत (structural) और बाजार-प्रतिस्पर्धी सुधारों का सीधा परिणाम है। इस रिपोर्ट का विमोचन विदेश व्यापार संस्थान (IIFT), नई दिल्ली के सेंटर फॉर ट्रेड एंड इन्वेस्टम्ंट लॉ (CTIL) और कॉम्पिटीयर फाउंडेशन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एक कार्यक्रम में किया गया।
मुख्य बिंदु: रिपोर्ट के निष्कर्ष, तीन पिलर और सुधार
1. मार्केट डिस्टॉर्शन परफॉर्मेंस इंडेक्स (MDPI)
- मूल्यांकन अवधि: रिपोर्ट 2010 से 2023 के बीच भारत के आर्थिक और बजारी सुधारों का आकलन करती है।
- तीन मुख्य स्तंभ (Pillars):
- संपत्ति अधिकारों की सुरक्षा (Property Rights Protection)
- घरेलू प्रतिस्पर्धा (Domestic Competition)
- अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा (International Competition)
2. सुधारों के मुख्य चालक
- वस्तु एवं सेवा कर (GST): अप्रत्यक्ष कर प्रणाली का सरलीकरण और राष्ट्रीय बाजार का एकीकरण।
- दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC): तनावग्रस्त संपत्तियों का त्वरित समाधान और सुगम व्यापार।

- व्यापार सुगमता (Trade Facilitation): आधुनिक कस्टम्स प्रणाली और विनियामक वातावरण (Regulatory Environment) में सुधार।
3. भविष्य के सुधार और रणनीतिक सिफारिशें
- डिजिटल बाजार और निवेश: डिजिटल मार्केट, निवेश की शर्तों और विदेशी विनियामक बाधाओं की समीक्षा पर जोर।
- उपभोक्ता कल्याण: क्षेत्र-विशिष्ट (sector-specific) निवेश प्रतिबंधों को उपभोक्ता लाभ के आधार पर परखना।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: समान विचारधारा वाले व्यापारिक साझेदारों (like-minded partners) के साथ मिलकर गैर-टैरिफ व विनियामक बाधाओं को दूर करना।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| पहलू / मापदंड | महत्वपूर्ण तथ्य |
| रिपोर्ट का नाम | India’s Next Growth Frontier |
| जारीकर्ता संस्था | कॉम्पिटीयर फाउंडेशन। |
| सहयोगी संस्था (कार्यक्रम) | CTIL (IIFT, नई दिल्ली)। |
| भारत की नई रैंकिंग | 57वीं (पूर्व में 82वीं—25 स्थानों का सुधार)। |
| आकलन की अवधि | 2010 से 2023। |
| सूचकांक के 3 पिलर | Property Rights, Domestic Competition, International Competition। |
| प्रमुख गेम-चेंजर सुधार | GST, IBC, और आधुनिक ट्रेड फैसिलिटेशन सिस्टम। |