4 August 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत जम्मू-कश्मीर में सिंचाई व जल सुरक्षा को सुदृढ़ करने वाली उझ बहुउद्देश्यीय परियोजना, देश के स्वच्छ ऊर्जा परिदृश्य को नई दिशा देने वाली प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY), GI & Beyond 2.0 समिट, पर्यावरण संरक्षण के तहत ग्लो लेक के रूप में अरुणाचल प्रदेश को मिले पहले रामसर स्थल, जलवायु अनुकूल शहरों और शहरी लू से निपटने के नीतिगत ढाँचे, ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारतीय महिला एथलीटों के ऐतिहासिक प्रदर्शन, सड़क सुरक्षा को आधुनिक बनाने वाली वाहन-से-वाहन (V2V) संचार प्रणाली व केंद्रीय मोटर वाहन नियमों, तथा देश के सुदूर क्षेत्रों तक सार्वभौमिक बैंकिंग कवरेज और वित्तीय समावेशन के विस्तार का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
उझ बहुउद्देश्यीय परियोजना
- प्रारंभिक परीक्षा: भारत का भूगोल (नदियां व बहुउद्देश्यीय परियोजनाएं), सिंधु जल संधि, और राष्ट्रीय महत्व की जल संसाधन पहलें।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 1 & 3): भारत का भौतिक भूगोल (जल संसाधन); बुनियादी ढांचा (ऊर्जा व सिंचाई); सीमा प्रबंधन और आंतरिक सुरक्षा।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में स्थित उझ बहुउद्देश्यीय परियोजना की समीक्षा की। उन्होंने जल शक्ति मंत्रालय के उपक्रम WAPCOS लिमिटेड के अधिकारियों के साथ परियोजना की चरणबद्ध कार्यान्वयन रणनीति पर चर्चा की। दशकों से लंबित इस राष्ट्रीय परियोजना को तेजी से पूरा करने के लिए भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्य एक साथ चलाए जाएंगे। शाहपुरकंडी परियोजना के बाद उझ परियोजना का पुनरुद्धार रावी नदी के जल का भारत के हित में पूर्ण उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
मुख्य बिंदु: परियोजना का दायरा, सुरक्षा पहलू और जल संसाधन उपयोग
1. परियोजना का स्थान और बिजली उत्पादन
- यह परियोजना उझ नदी पर बनाई जा रही है, जो रावी नदी की एक प्रमुख सहायक नदी है।
- इसकी स्थापित क्षमता 186 मेगावाट से 212 मेगावाट बिजली उत्पादन की होगी।
2. सिंचाई और पेयजल लाभ
- सिंचाई क्षमता: यह परियोजना लगभग 90,000 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई जल प्रदान करेगी।
- लाभान्वित क्षेत्र: जम्मू-कश्मीर के कठुआ व सांबा जिले और पंजाब के पठानकोट व गुरदासपुर जिले।
- पेयजल व उद्योग: कठुआ जिले को पीने के पानी की आपूर्ति होगी और स्थानीय उद्योगों को जल उपलब्ध कराया जाएगा।
3. रावी नदी जल का पूर्ण दोहन
- सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) के तहत रावी, सतलुज और ब्यास नदियों का पानी भारत के अधिकार क्षेत्र में आता है।
- उझ और शाहपुरकंडी परियोजनाओं के चालू होने से रावी और उसकी सहायक नदियों का व्यर्थ बहकर पाकिस्तान जाने वाला पानी रुकेगा।
4. सीमा सुरक्षा और घुसपैठ पर रोक
- इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण सीमा प्रबंधन (Border Management) आयाम भी है।
- गृह मंत्रालय इस परियोजना का समर्थन कर रहा है। इससे नदी के पेटे (riverbed) के माध्यम से होने वाली सीमा पार घुसपैठ की संवेदनशील राहों को बंद किया जा सकेगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| परियोजना का नाम | उझ बहुउद्देश्यीय परियोजना। |
| संबंधित नदी | उझ नदी (रावी नदी की प्रमुख सहायक नदी)। |
| मुख्य स्थान | कठुआ जिला, जम्मू-कश्मीर। |
| बिजली उत्पादन क्षमता | 186 MW से 212 MW। |
| सिंचाई क्षमता | ~90,000 हेक्टेयर (J&K के कठुआ, सांबा + पंजाब के पठानकोट, गुरदासपुर)। |
| कार्यान्वयन एजेंसी | WAPCOS लिमिटेड (जल शक्ति मंत्रालय का सार्वजनिक उपक्रम)। |
प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY) एवं भारत का सौर ऊर्जा परिदृश्य
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएं, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी, सरकारी योजनाएं।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप, बुनियादी ढांचा (ऊर्जा), नवीकरणीय ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन और ‘पंचामृत’ लक्ष्य।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 31 जुलाई 2026 को ₹5,070 करोड़ के कुल बजटीय आवंटन के साथ ‘प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना’ (PM-SSY) को मंजूरी दे दी है। वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू की जाने वाली यह योजना देश में 5,000 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर क्षमता विकसित करने पर केंद्रित है। इसमें न्यूनतम 2 घंटे की बैकअप क्षमता वाले ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (ESS) को जोड़ा जाएगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य भूमि संसाधनों पर दबाव डाले बिना जलाशयों का उपयोग करना और राष्ट्रीय ग्रिड की स्थिरता को मजबूत करना है।
मुख्य बिंदु: रणनीतिक स्तंभ, नीतिगत ढांचा और वैश्विक प्रभाव
1. प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY) के प्रमुख घटक
- फ्लोटिंग सोलर क्षमता: जलाशयों व औद्योगिक तालाबों का उपयोग कर 5,000 MW क्षमता जोड़ना। इससे दुर्लभ भूमि अधिग्रहण की समस्या हल होगी।
- ऊर्जा भंडारण (ESS): 10,000 MWh (2 घंटे भंडारण) क्षमता से पीक डिमांड प्रबंधन और ग्रिड स्थिरता सुधरेगी।

- पर्यावरणीय व आर्थिक लाभ: प्रतिवर्ष लगभग 1 करोड़ टन CO₂ उत्सर्जन में कमी आएगी तथा 16,000–17,000 नौकरियों का सृजन होगा।
- संभावना: नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी (NISE) के अनुसार भारत में 102.18 GWp फ्लोटिंग सोलर की क्षमता उपलब्ध है।
2. भारत का सौर ऊर्जा विस्तार (अद्यतन आंकड़े)
- कुल स्थापित क्षमता: जून 2026 तक 162.15 GW (वर्ष 2014 के 3 GW की तुलना में 50 गुना से अधिक वृद्धि)।
- वार्षिक रिकॉर्ड: FY 2025-26 में रिकॉर्ड 44.61 GW सौर क्षमता जोड़ी गई। वर्ष 2025 में 37 GW नई क्षमता जोड़कर भारत अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए विश्व का दूसरा सबसे बड़ा सौर विकास बाजार बना।
- मॉड्यूल विनिर्माण: सौर मॉड्यूल निर्माण क्षमता बढ़कर 172 GW (मार्च 2026 तक) हो गई।
3. प्रमुख सरकारी योजनाएं एवं नीतियां
- PM सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना: ₹75,021 करोड़ के आवंटन से 43 लाख से अधिक घरों को जून 2026 तक सोलर ग्रिड से जोड़ा गया।
- PM-KUSUM: कृषि क्षेत्र का सौरनीकरण। इसके तहत 11.49 लाख ऑफ-ग्रिड सोलर पंप लगाए गए हैं।
- विनिर्माण व गुणवत्ता: विनिर्माण हेतु PLI योजना (₹24,000 करोड़) और गुणवत्ता नियंत्रण हेतु ALMM (Approved List of Models and Manufacturers) ढांचा लागू।

- सोलर पार्क व ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर: 54 स्वीकृत सोलर पार्कों की क्षमता 39,188 MW (जैसे भादला सोलर पार्क, राजस्थान: 2,245 MW)। Green Energy Corridor (GEC) के ज़रिए 44 GW हरित ऊर्जा ग्रिड में निकासी योग्य बनेगी।
4. वैश्विक नेतृत्व एवं सहयोग
- अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA): भारत और फ्रांस द्वारा COP21 में स्थापित मंच।

- वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड (OSOWOG): वैश्विक ग्रिड कनेक्टिविटी बढ़ाने की भारत की पहल।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| योजना का नाम | प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY)। |
| लक्ष्य व बजट | 5,000 MW फ्लोटिंग सोलर + 10,000 MWh ESS (बजट: ₹5,070 करोड़)। |
| CFA (वित्तीय सहायता) | ₹1 करोड़ प्रति MW (सफल कमीशनिंग पर) + ₹50 लाख तक सम्भाव्यता अध्ययन हेतु। |
| कुल गैर-जीवाश्म क्षमता | 283.46 GW (जून 2026 तक)। |
| RPO लक्ष्य (2026-27) | 35.95% (नवीकरणीय खरीद बाध्यता)। |
| विश्व का सबसे बड़ा सोलर कॉम्प्लेक्स | भादला सोलर पार्क, राजस्थान (2,245 MW)। |
GI & Beyond 2.0 समिट: भारतीय हथकरघा और हस्तशिल्प को वैश्विक पहचान
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएं, बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR), भौगोलिक संकेत (GI Tag), और सरकारी पहलें।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): सरकारी नीतियां व हस्तक्षेप; समावेशी विकास; भारतीय अर्थव्यवस्था, व्यापार एवं निर्यात वृद्धि; बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) और कुटीर उद्योग (हथकरघा व हस्तशिल्प)।
चर्चा में क्यों?
कपड़ा मंत्रालय का विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय और ‘हथकरघा निर्यात संवर्धन परिषद’ (HEPC) मिलकर 5 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में “GI & Beyond 2.0 Summit” का आयोजन कर रहे हैं। इस शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारत के भौगोलिक संकेत (GI) प्राप्त हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों को घरेलू व अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ावा देना तथा हितधारकों के बीच सहयोग को मजबूत करना है।
मुख्य बिंदु: डिजिटल एटलस, तकनीक और वैश्विक बाजार रणनीति
1. सम्मेलन के मुख्य आकर्षण और लॉन्च
- डिजिटल हैंडलूम एटलस: “वन प्लेटफॉर्म, एंडलेस मार्केट्स” थीम पर आधारित एक डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया जाएगा। यह भारतीय हथकरघा और GI उत्पादों को सीधे वैश्विक खरीदारों से जोड़ेगा।
- HEPC का डायमंड जुबली लोगो: हथकरघा निर्यात संवर्धन परिषद (HEPC) के 60 वर्ष पूरे होने पर इसके विशेष लोगो का अनावरण होगा।
- GI प्रमाण पत्र वितरण: नए पंजीकृत स्वामियों (Registered Proprietors) और अधिकृत उपयोगकर्ताओं (Authorised Users) को आधिकारिक GI प्रमाण पत्र सौंपे जाएंगे।
2. 100+ GI उत्पादों की प्रदर्शनी और लाइव प्रदर्शन
- देश भर के 100 से अधिक GI-टैग प्राप्त हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों को प्रदर्शित किया जाएगा।
- भारत की विविध बुनाई परंपराओं के सजीव प्रदर्शन (Live Demonstrations) होंगे।
- इसमें 10 से अधिक देशों के विदेशी खरीदार, प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, रिटेल ब्रांड्स और बहुराष्ट्रीय कंपनियां (MNCs) भाग ले रही हैं।
3. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और तकनीकी सत्र
- IIT मद्रास का योगदान: जीआई (GI) पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के अनुप्रयोग पर आईआईटी मद्रास के विशेषज्ञ एक विशेष प्रस्तुति देंगे।
- तकनीकी सत्र: सम्मेलन में आईपीआर (IPR) संरक्षण, घरेलू बाजार संवर्धन और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जीआई उत्पादों के निर्यात की रणनीतियों पर गहन विचार-विमर्श होगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| कार्यक्रम का नाम | GI & Beyond 2.0 Summit (5 अगस्त 2026, नई दिल्ली)। |
| आयोजक संस्थाएं | विकास आयुक्त (हथकरघा), कपड़ा मंत्रालय + HEPC (हथकरघा निर्यात संवर्धन परिषद)। |
| मुख्य डिजिटल पहल | डिजिटल हैंडलूम एटलस (“One Platform. Endless Markets”)। |
| तकनीकी भागीदार | IIT मद्रास (GI इकोसिस्टम में AI का उपयोग)। |
| GI के नियामक अधिकारी | एकस्व, अभिकल्प और व्यापार चिन्ह महानियंत्रक (CGPDTM)। |
| HEPC की उपलब्धि | 60 वर्ष पूरे (डायमंड जुबली लोगो का अनावरण)। |
ग्लो लेक: अरुणाचल प्रदेश को मिला पहला रामसर स्थल
- प्रारंभिक परीक्षा: पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी, जैव विविधता संरक्षण, रामसर कन्वेंशन और आर्द्रभूमि (Wetlands)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता का ह्रास एवं संरक्षण, और जलवायु परिवर्तन प्रभाव।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने अरुणाचल प्रदेश की ग्लो लेक को भारत का 101वां रामसर स्थल घोषित किया है। यह उपलब्धि राज्य के जैव विविधता संरक्षण प्रयासों में एक नया मील का पत्थर साबित होगी, क्योंकि ग्लो लेक अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि का दर्जा प्राप्त करने वाला अरुणाचल प्रदेश का पहला रामसर स्थल बन गया है। इसके साथ ही भारत में रामसर स्थलों की कुल संख्या बढ़कर 101 हो गई है, जो 2014 के 26 स्थलों की तुलना में देश की सतत जल सुरक्षा और आर्द्रभूमि संरक्षण के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
मुख्य बिंदु: भौगोलिक स्थिति, जैव विविधता और पारिस्थितिक महत्व
1. भौगोलिक स्थिति और अवस्थिति
- कमलांग टाइगर रिजर्व: ग्लो लेक पूर्वी हिमालय के जैव विविधता हॉटस्पॉट में स्थित कमलांग टाइगर रिजर्व और वन्यजीव अभ्यारण्य के भीतर स्थित है।
- ताजे पानी का स्रोत: यह एक प्राचीन और प्राकृतिक ताजे पानी की झील है, जो बारहमासी पहाड़ी झरनों से पानी प्राप्त करती है।
2. समृद्ध वनस्पति और जैव विविधता
- वृक्ष व आर्किड प्रजातियां: इस झील और इसके जलग्रहण (catchment) क्षेत्र में 150 से अधिक पेड़ की प्रजातियां पाई जाती हैं। इसके अलावा 49 आर्किड प्रजातियां भी यहां दर्ज की गई हैं।
- पारिस्थितिक तंत्र: यह क्षेत्र सघन वनस्पतियों से घिरा हुआ है, जो स्थानीय वन्यजीवों और पक्षियों के लिए एक आदर्श प्राकृतिक आवास प्रदान करता है।
3. भारत का रामसर नेटवर्क: 2014 से 2026 तक की यात्रा
- नेटवर्क का विस्तार: वर्ष 2014 में भारत में केवल 26 रामसर स्थल थे। अब यह संख्या बढ़कर 101 हो गई है।
- पारिस्थितिक सुरक्षा: यह विस्तार भारत की जल सुरक्षा, जलवायु लचीलेपन (climate security) और स्थानीय समुदायों की सतत आजीविका के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| नया रामसर स्थल | ग्लो लेक (Glaw Lake)। |
| राज्य | अरुणाचल प्रदेश (राज्य का पहला रामसर स्थल)। |
| संबंधित संरक्षित क्षेत्र | कमलांग टाइगर रिजर्व एवं वन्यजीव अभ्यारण्य। |
| भारत में कुल रामसर स्थल | 101 (अगस्त 2026 तक)। |
| प्रकृति | ताजे पानी की पहाड़ी झील (Freshwater Lake)। |
| प्रमुख वनस्पति | 150+ वृक्ष प्रजातियां, 49 आर्किड प्रजातियां। |
जलवायु अनुकूल शहर एवं शहरी लू
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएं, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी, आपदा प्रबंधन।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 1, 2 & 3): शहरीकरण की समस्याएं और समाधान; आपदा प्रबंधन (हीटवेव); पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन लचीलापन (Climate Resilience)।
चर्चा में क्यों?
आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने राज्य सभा में जलवायु-अनुकूल शहरों के निर्माण और शहरी हीटवेव से निपटने की रणनीतियों पर विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि भारतीय संविधान की 12वीं अनुसूची के तहत शहरी नियोजन राज्य सरकारों और शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) के अधिकार क्षेत्र में आता है। केंद्र सरकार दिशा-निर्देशों, तकनीकी सलाह और वित्तीय सहायता के माध्यम से राज्यों के प्रयासों को सुदृढ़ कर रही है। बढ़ते शहरी तापमान और हीटवेव के प्रभावों को कम करने के लिए NDMA, MoHUA और MoEFCC मिलकर बहु-स्तरीय नीतियां लागू कर रहे हैं।
मुख्य बिंदु: नीतिगत ढांचा, सरकारी पहलें और प्रमुख नीतियां
1. NDMA के दिशा-निर्देश एवं हीट एक्शन प्लान (HAPs)
- 2019 के मार्गदर्शक सिद्धांत: राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने हीटवेव रोकथाम और प्रबंधन के लिए दिशानिर्देश तैयार किए हैं।
- व्यापक पहुंच: देश के 23 राज्यों, 195 जिलों और 64 शहरों में हीट एक्शन प्लान (HAPs) लागू किए जा चुके हैं।
- असंगठित श्रमिकों के लिए एडवाइजरी: स्ट्रीट वेंडर्स और आउटडोर श्रमिकों की सुरक्षा के लिए छायादार वेंडिंग ज़ोन, हाइड्रेशन सुविधाएं, कूलिंग सेंटर और काम के लचीले घंटों की सिफारिश की गई है।
2. MoHUA की नीतियां एवं शहरी हरित अवसंरचना
- URDPFI दिशानिर्देश 2014: ‘Urban and Regional Development Plans Formulation and Implementation’ दिशानिर्देश हरित भवन डिज़ाइन, ऊर्जा-कुशल तकनीकों और जल निकायों के संरक्षण को बढ़ावा देते हैं।
- अर्बन ग्रीन दिशानिर्देश 2014: शहरों में कंक्रीट के प्रभाव को कम करने के लिए अर्बन फॉरेस्ट, ग्रीन कवर्ड एरिया और शेडेड पब्लिक स्पेस बनाने पर जोर देता है।
- PMAY-U (तकनीकी सब-मिशन): ‘प्रिंसिपल ऑफ़ ग्रीन बिल्डिंग्स’ को अपनाते हुए ‘टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन सब-मिशन’ (TISM) के तहत आपदा-रोधी और पर्यावरण-अनुकूल आवासों का निर्माण किया जा रहा है।
3. इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान (ICAP) – MoEFCC की भूमिका
- सतत शीतलन लक्ष्य: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का ICAP परिवहन और सार्वजनिक अवसंरचना में टिकाऊ कूलिंग सुनिश्चित करता है।
- परिवहन क्षेत्र में सुधार: रेलवे स्टेशनों, हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर एनर्जी कंजर्वेशन बिल्डिंग कोड (ECBC) लागू करना।
- तकनीकी उन्नयन: मोबाइल एयर-कंडीशनिंग (MAC) क्षेत्र में कम ग्लोबल वार्मिंग पोटेंशियल (GWP) वाले रेफ्रिजरेंट्स और तकनीशियनों के अपस्किलिंग पर ध्यान देना।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| संविधान की 12वीं अनुसूची | शहरी नियोजन (Urban Planning) राज्य सूची का विषय है। |
| NDMA HAPs कवरेज | 23 राज्य, 195 जिले और 64 शहर। |
| PMAY-U TISM मिशन | टिकाऊ आवास हेतु ग्रीन बिल्डिंग मानकों को बढ़ावा देना। |
| ICAP ढांचा | MoEFCC द्वारा जारी (सार्वजनिक अवसंरचना में ECBC कोड लागू)। |
| अर्बन हीट आइलैंड (UHI) | कंक्रीट संरचनाओं के कारण आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहर का अधिक गर्म होना। |
ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026: भारतीय महिला एथलीटों का प्रदर्शन
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएं, खेल परिदृश्य।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): महिला सशक्तिकरण, सामाजिक क्षेत्र/योजनाएं, खेल नीति और मानव संसाधन विकास।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026 (CWG 2026) में भारतीय महिला एथलीटों के प्रदर्शन की सराहना की है। भारत ने प्रतियोगिता में कुल 13 स्वर्ण पदक जीते। इनमें से 8 स्वर्ण पदक अकेले महिला खिलाड़ियों ने हासिल किए। महिला मुक्केबाजों ने मुक्केबाजी स्पर्धाओं में 5 स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है।
मुख्य बिंदु: खेल क्षेत्र में नारी शक्ति और उपलब्धियां
1. खेल-वार स्वर्ण पदक का वितरण
- प्रमुख खेल: भारत ने मुक्केबाजी, भारोत्तोलन (Weightlifting), जूडो और पैरा एथलेटिक्स में कुल 8 स्वर्ण पदक जीते।
- मुक्केबाजी का दबदबा: अकेले महिला मुक्केबाजों ने 5 स्वर्ण पदक जीते। यह भारत की इस खेल में बढ़ती गहराई और दबदबा दिखाता है।
2. सामाजिक-आर्थिक महत्व और महिला सशक्तिकरण
- प्रेरणास्रोत: यह सफलता युवा लड़कियों को खेलों में आगे आने के लिए प्रेरित करेगी।
- सशक्तिकरण: वैश्विक मंचों पर भारतीय महिलाओं का यह प्रदर्शन भारत के खेल तंत्र में बदलाव का संकेत देता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| आयोजन का नाम | ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026। |
| आयोजन स्थल | ग्लासगो (स्कॉटलैंड)। |
| भारत के कुल स्वर्ण पदक | 13 स्वर्ण पदक। |
| महिला एथलीटों के स्वर्ण | 8 स्वर्ण पदक (कुल स्वर्ण का 60% से अधिक)। |
| महिला बॉक्सिंग में स्वर्ण | 5 स्वर्ण पदक। |
| प्रमुख खेल स्पर्धाएं | मुक्केबाजी, भारोत्तोलन, जूडो, पैरा एथलेटिक्स। |
वाहन-से-वाहन (V2V) संचार प्रणाली और केंद्रीय मोटर वाहन नियम
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएं, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, परिवहन और संचार अवसंरचना।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): बुनियादी ढांचा (सड़क परिवहन), प्रौद्योगिकी का अनुप्रयोग, सड़क सुरक्षा और स्मार्ट परिवहन प्रणालियाँ (ITS)।
चर्चा में क्यों?
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoHRA) ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन के लिए एक मसौदा अधिसूचना (Draft Notification) जारी की है। इसका उद्देश्य देश में वाहन-से-वाहन (V2V) संचार प्रणालियों को चरणबद्ध तरीके से लागू करना है। यह तकनीक वाहनों को वास्तविक समय में एक-दूसरे के साथ डेटा साझा करने में सक्षम बनाती है, जिससे सड़क सुरक्षा में सुधार होगा और दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी।
मुख्य बिंदु: तकनीक, मानक (AIS-230) और कार्यान्वयन समयरेखा
1. V2V संचार प्रणाली क्या है और इसके लाभ?
- वास्तविक समय डेटा विनिमय: यह तकनीक आसपास के वाहनों को उनकी गति, स्थिति, दिशा और त्वरण (acceleration) जैसी जानकारी का आदान-प्रदान करने की अनुमति देती है।
- लाइन-ऑफ-सॉइट से परे सुरक्षा: पारंपरिक सेंसरों के विपरीत, यह तकनीक दृष्टि रेखा (Line-of-sight) से परे भी चेतावनी देती है।
- प्रमुख सुरक्षा मामले: यह अचानक ब्रेक लगाने की चेतावनी (Emergency Brake Alert), फॉरवर्ड कोलिजन वार्निंग, गलत दिशा में ड्राइविंग (Wrong-way Driving), और एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन गाड़ियों की निकटता की सूचना देती है।
2. आवृत्ति बैंड (Frequency Band) और लाइसेंस छूट
- 5.875 GHz से 5.925 GHz: V2V और अन्य इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम (ITS) के लिए इस आवृत्ति बैंड को चुना गया है।
- लाइसेंस मुक्त: दूरसंचार विभाग (DoT) ने 10 जून 2026 की अधिसूचना (G.S.R. 466(E)) के माध्यम से इस आवृत्ति बैंड को लाइसेंसिंग आवश्यकताओं से छूट दे दी है।
3. AIS-230 मानक और तकनीकी आवश्यकताएं
- मानक: AIS-230 भारतीय सड़कों पर चलने वाले वाहनों के लिए न्यूनतम तकनीकी, कार्यात्मक, पर्यावरण और सुरक्षा आवश्यकताओं को निर्दिष्ट करता है।
- तकनीक: यह C-V2X (Cellular Vehicle-to-Everything) तकनीक का उपयोग करने वाले ऑन-बोर्ड यूनिट्स को कवर करता है।
- प्रमुख पैरामीटर: रेडियो प्रदर्शन, GNSS स्थिति निर्धारण, विद्युत अनुकूलता (EMC) और साइबर सुरक्षा इसके मुख्य प्रावधान हैं।
4. चरणबद्ध कार्यान्वयन समयरेखा (Phased Timeline)
- 1 अक्टूबर 2027 से: L, M और N श्रेणी के वे वाहन, जिनमें पहले से V2V प्रणाली फिट होगी, उन्हें AIS-230 का पालन करना होगा।
- 1 अक्टूबर 2028 से: L, M और N श्रेणी के सभी नए वाहनों में AIS-230 के अनुरूप V2V संचार प्रणाली लगाना अनिवार्य होगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| संबंधित मंत्रालय | सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH)। |
| आवृत्ति स्पेक्ट्रम | 5.875 GHz से 5.925 GHz (दूरसंचार विभाग द्वारा लाइसेंस मुक्त)। |
| नया तकनीकी मानक | AIS-230 (C-V2X तकनीक पर आधारित)। |
| अनिवार्य तारीख (चरण 2) | 1 अक्टूबर 2028 से सभी नए वाहनों (L, M, N श्रेणी) के लिए अनिवार्य। |
| मुख्य सुरक्षा अनुप्रयोग | आपातकालीन ब्रेक अलर्ट, फॉरवर्ड कोलिजन वार्निंग, आपातकालीन वाहन चेतावनी। |
सार्वभौमिक बैंकिंग कवरेज एवं वित्तीय समावेशन
- प्रारंभिक परीक्षा: भारतीय अर्थव्यवस्था, वित्तीय समावेशन, सरकारी पहलें और डिजिटल भुगतान सुरक्षा।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था और संसाधन जुटाने से संबंधित मुद्दे, समावेशी विकास, कृषि ऋण, बैंकिंग अवसंरचना तथा साइबर सुरक्षा।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा मे जानकारी दी कि भारत ने सार्वभौमिक बैंकिंग कवरेज (Near-Universal Banking Coverage) हासिल कर लिया है। ‘जन धन दर्शक’ (JDD) ऐप के डेटा के अनुसार, देश के 99.92% बसे हुए गांवों (6,01,328 में से 6,00,868 गांव) के 5 किलोमीटर के दायरे में अब कम से कम एक बैंकिंग आउटलेट मौजूद है। सरकार और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के सम्मिलित प्रयासों से यह उपलब्धि हासिल हुई है। इसके साथ ही डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी से निपटने के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा उपाय भी लागू किए गए हैं।
मुख्य बिंदु: अवसंरचना, कृषि ऋण और साइबर सुरक्षा पहलें
1. बैंकिंग अवसंरचना और नीतिगत ढांचा
- व्यापक नेटवर्क: देश में 1.81 लाख से अधिक बैंक शाखाएं, 17.36 लाख बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट्स (BCs) और 1.65 लाख इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक (IPPB) केंद्र कार्यरत हैं।
- 25% ग्रामीण अनिवार्यता: RBI ने बैंकों को बिना पूर्व अनुमति के शाखाएं खोलने की छूट दी है, बशर्ते नई शाखाओं का 25% अनबैंक्ड ग्रामीण क्षेत्रों में हो।
- PMJDY की स्थिति: 17 जुलाई 2026 तक देश में 58.77 करोड़ प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) खाते खोले जा चुके हैं, जिनमें कुल जमा राशि ₹3,12,414 करोड़ है।
2. कृषि ऋण का डिजिटलीकरण और पारदर्शिता
- जन समर्थ पोर्टल: सरकारी योजनाओं के तहत ऋण और सब्सिडी जोड़ने के लिए वन-स्टॉप डिजिटल प्लेटफॉर्म।
- किसान ऋण पोर्टल (KRP): सितंबर 2023 में शुरू किया गया यह पोर्टल [Aadhaar Redacted]-आधारित लाभार्थी सत्यापन सुनिश्चित करता है। यह संशोधित ब्याज छूट योजना (MISS) के तहत त्वरित दावा निपटान सक्षम बनाता है।
- नाबार्ड और कृषि विभाग की पहल: नाबार्ड द्वारा e-KYC और कृषि विभाग द्वारा KRISHIKA ऐप के माध्यम से कृषि ऋण प्रक्रिया को आसान बनाया गया है।
3. डिजिटल सुरक्षा और साइबर धोखाधड़ी रोकथाम
- IDPIC की स्थापना: सरकार और RBI ने एआई (AI), एमएल (ML) और बिग डेटा का उपयोग करके वास्तविक समय में धोखाधड़ी की जानकारी साझा करने हेतु ‘इंडिया डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस कॉर्पोरेशन’ (IDPIC) का गठन किया है।
- म्यूलहंटर: मनी म्यूल (अवैध खातों) की पहचान के लिए RBI द्वारा विकसित AI-आधारित टूल।
- I4C और हेल्पलाइन 1930: गृह मंत्रालय का भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) अवैध लोन ऐप्स पर नज़र रखता है। नागरिक 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
- e-BAAT कार्यक्रम: वित्तीय साक्षरता और जोखिम न्यूनीकरण के लिए RBI द्वारा आयोजित इलेक्ट्रॉनिक-बैंकिंग जागरूकता कार्यक्रम।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| बैंकिंग कवरेज | 99.92% गांव (5 किमी के दायरे में बैंकिंग सुविधा उपलब्ध)। |
| जन धन दर्शक (JDD) ऐप | बैंकिंग आउटलेट्स की मैपिंग हेतु वित्त मंत्रालय का ऐप। |
| PMJDY खाते व राशि | 58.77 करोड़ खाते (कुल जमा: ₹3,12,414 करोड़)। |
| ग्रामीण शाखा नियम | नई शाखाओं का न्यूनतम 25% अनबैंक्ड ग्रामीण क्षेत्रों में होना अनिवार्य। |
| IDPIC | डिजिटल भुगतान में रियल-टाइम फ्रॉड इंटेलिजेंस साझा करने वाला तंत्र। |
| MuleHunter | मनी म्यूल खातों को पकड़ने वाला RBI का AI टूल। |
| हेल्पलाइन नंबर | 1930 (राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन)। |