5 August 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत पशुधन क्षेत्र की सुरक्षा को सुदृढ़ करने वाली स्वदेशी अफ्रीकी स्वाइन फीवर (ASF) वैक्सीन, सतत कृषि को बढ़ावा देने के लिए मृदा क्षरण की रोकथाम एवं टिकाऊ कृषि पहलों, भारतीय समुद्री नाविकों के कल्याण व अधिकारों की रक्षा हेतु ‘सीफेयरर-फर्स्ट’ पहल, वस्त्र एवं कृषि क्षेत्र को गति देने वाले कपास उत्पादकता मिशन (कपास क्रांति), विनिर्माण क्षमता में वृद्धि हेतु भारतीय कैपिटल गुड्स क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मकता संवर्धन योजना (चरण-II), देश भर में उर्वरक वितरण में पारदर्शिता लाने वाली ‘एक राष्ट्र, एक उर्वरक’ (One Nation, One Fertilizer) पहल, तथा ICAR द्वारा अरहर/तूर दाल के T2T (Telomere-to-Telomere) जीनोम सीक्वेंसिंग की ऐतिहासिक वैज्ञानिक सफलता का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
स्वदेशी अफ्रीकी स्वाइन फीवर (ASF) वैक्सीन: भारत की जैव-सुरक्षा को मजबूती
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएं, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, जैव विविधता और पशु स्वास्थ्य।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण, नई तकनीकों का विकास, पशुपालन का अर्थशास्त्र और जैव-सुरक्षा (Biosecurity)।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह की उपस्थिति में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के स्थापना दिवस पर भारत की पहली स्वदेशी अफ्रीकी स्वाइन फीवर (ASF) वैक्सीन राष्ट्र को समर्पित की गई। ICAR-राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान (ICAR-NIHSAD), भोपाल के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित यह वैक्सीन भारत को ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत वैश्विक स्तर पर एक सस्ती ASF वैक्सीन आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करेगी।
मुख्य बिंदु: बीमारी, स्वदेशी तकनीक और आर्थिक प्रभाव
1. अफ्रीकी स्वाइन फीवर (ASF) क्या है?
- रोग का प्रकार: यह एक अत्यधिक संक्रामक और विनाशकारी सीमा पार (trans-boundary) वायरल बीमारी है, जो घरेलू और जंगली सूअरों को प्रभावित करती है।
- लक्षण और मृत्यु दर: इसमें तेज बुखार, रक्तस्राव (haemorrhages) होता है। इसकी मृत्यु दर 100% तक पहुंच सकती है।
- भारत में स्थिति: भारत में पहली बार 2020 में असम में इसका पता चला था, जिससे विशेषकर पूर्वोत्तर भारत के छोटे किसानों की आजीविका को भारी नुकसान पहुंचा।
2. टीकों का विकास और तकनीकी नवाचार
- प्रयुक्त सेल लाइन: यह वैक्सीन MA-104 सेल लाइन आधारित ‘लाइव एटिनेुएटेड’ वैक्सीन है, जो ASFV जीनोटाइप II वायरस में विशिष्ट जीन विलोपन (gene deletions) करके बनाई गई है।

- वैश्विक तुलना: वर्तमान में वियतनाम में व्यावसायिक रूप से लाइसेंस प्राप्त टीके पेटेंटेड सेल लाइनों का उपयोग करते हैं। इसके विपरीत, ICAR का टीका व्यापक रूप से उपलब्ध MA-104 सेल लाइन का उपयोग करता है। यह निर्माण लागत को काफी कम करता है।
- खुराक दिशानिर्देश: यह 8 सप्ताह से अधिक आयु के स्वस्थ सूअरों के लिए अनुशंसित है (1 mL इंट्रामास्कुलर इंजेक्शन, 14 दिनों बाद बूस्टर खुराक)।
3. आर्थिक प्रभाव और क्षति
- असम (2020-21): लगभग ₹276 करोड़ का नुकसान।
- मिजोरम (2025 तक): 11,382 से अधिक परिवार प्रभावित, लगभग ₹982 करोड़ का नुकसान।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| रोगजनक (Pathogen) | अफ्रीकी स्वाइन फीवर वायरस (ASFV – जीनोटाइप II)। |
| विकासकर्ता संस्थान | ICAR-राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान (NIHSAD), भोपाल। |
| प्रयुक्त तकनीक | MA-104 सेल लाइन आधारित ‘लाइव एटिन्यूएटेड’ वैक्सीन। |
| वैक्सीन खुराक | 1 mL (मांसपेशियों में), प्राथमिक खुराक के 14 दिन बाद बूस्टर। |
| भारत में पहला मामला | वर्ष 2020 (असम में)। |
| संबंधित मंत्रालय | कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय + मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय। |
मृदा क्षरण की रोकथाम एवं सतत कृषि पहलें
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएं, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी, कृषि और मृदा स्वास्थ्य।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): देश के विभिन्न भागों में मुख्य फसलें और फसल पैटर्न, प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता, सतत कृषि और पर्यावरण संरक्षण।
चर्चा में क्यों?
कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में मृदा क्षरण को रोकने तथा उर्वरकों, खाद और शाकनाशियों (Herbicides) के विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दी। सरकार ‘मृदा स्वास्थ्य कार्ड’, ‘राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन’, और ‘समेकित कीट प्रबंधन’ (IPM) जैसी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सतत कृषि को प्रोत्साहित कर रही है। इन पहलों का मुख्य उद्देश्य मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना, खेती की लागत घटाना और जैविक व प्राकृतिक तकनीकों के ज़रिए पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा देना है।
मुख्य बिंदु: सरकारी योजनाएं, आंकड़े और रणनीतिक पहलें
1. मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता योजना (Soil Health & Fertility Scheme)
- शुरुआत: यह योजना वर्ष 2014-15 से लागू है।
- उपलब्धि: अब तक किसानों को 26.09 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड (SHC) जारी किए जा चुके हैं।
- उद्देश्य: मिट्टी में पोषक तत्वों की स्थिति के आधार पर फसल-वार उर्वरक सिफारिशें देना, जिससे लागत घटे और पैदावार बढ़े।
2. प्राकृतिक एवं जैविक खेती के लिए प्रमुख मिशन
- राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF): केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 25 नवंबर 2024 को स्वीकृत। इसमें 23.13 लाख किसान पंजीकृत हैं और 11.44 लाख हेक्टेयर क्षेत्र कवर हुआ है।
- परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY): 2015-16 से लागू। इसके तहत 18.93 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती को बढ़ावा मिला है और 33.63 लाख किसान लाभान्वित हुए हैं।
- MOVCDNER: पूर्वोत्तर भारत के लिए 2015-16 से संचालित। इसके तहत 2.36 लाख हेक्टेयर क्षेत्र कवर हुआ है और 2.74 लाख किसानों को लाभ मिला है।
3. समेकित कीट प्रबंधन (IPM) और खरपतवार नियंत्रण (IWM)
- IPM दृष्टिकोण: 1985 से फसल सुरक्षा के मुख्य आधार के रूप में अपनाया गया है। 28 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में स्थित 48 CIPMCs के माध्यम से जैविक, यांत्रिक और आवश्यकता-आधारित रासायनिक नियंत्रण सिखाया जाता है।
- IWM अनुसंधान: ICAR-खरपतवार अनुसंधान निदेशालय (जबलपुर) शाकनाशियों (Herbicides) के सुरक्षित उपयोग और मिट्टी व खाद्य श्रृंखला में उनके अवशेषों के विश्लेषण हेतु सलाह जारी करता है।
4. जैविक खाद और विशेष अभियान
- FOM/LFOM: फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर का उपयोग बढ़ा है। खरीफ सीजन 2026 (1 अप्रैल से 16 जुलाई 2026) के दौरान 11.86 लाख मीट्रिक टन (LMT) खपत दर्ज की गई।
- ‘खेत बचाओ अभियान’: DA&FW और ICAR द्वारा खरीफ सीजन 2026 में संचालित विशेष जागरूकता अभियान, जिसके तहत 2.94 लाख से अधिक कार्यक्रमों में 1.36 करोड़ से अधिक किसानों को कवर किया गया।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| योजना / पहल | शुरुआत / स्वीकृति वर्ष | मुख्य उपलब्धि |
| मृदा स्वास्थ्य कार्ड (SHC) | 2014-15 | 26.09 करोड़ कार्ड जारी |
| राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) | 25 नवंबर 2024 | 11.44 लाख हेक्टेयर कवरेज |
| परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) | 2015-16 | 18.93 लाख हेक्टेयर क्षेत्र |
| MOVCDNER (पूर्वोत्तर क्षेत्र) | 2015-16 | 2.36 लाख हेक्टेयर क्षेत्र |
| CIPMC केंद्र (IPM हेतु) | 1985 से प्रभावी | 48 केंद्र (28 राज्य, 2 UTs) |
| IWM अनुसंधान केंद्र | – | ICAR-खरपतवार अनुसंधान निदेशालय, जबलपुर |
‘सीफेयरर-फर्स्ट’ पहल: भारतीय नाविकों की सुरक्षा का ढांचा
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएं, अंतर्राष्ट्रीय संबंध (मध्य पूर्व/फारस की खाड़ी क्षेत्र)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): प्रवासी भारतीय और वैश्विक कार्यबल, अंतर्राष्ट्रीय जलक्षेत्र में सुरक्षा, बुनियादी ढांचा (समुद्री परिवहन) और आपदा प्रबंधन।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने राज्य सभा में ‘सीफेयरर-फर्स्ट’ पहल की जानकारी दी। ईरान, होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी में सुरक्षा चिंताओं के कारण समुद्री प्रशासन महानिदेशालय (DGMA) ने यह कदम उठाया है। इसका उद्देश्य संवेदनशील जलक्षेत्रों में तैनात भारतीय नाविकों की सुरक्षा और निगरानी सुनिश्चित करना है।
मुख्य बिंदु: सुरक्षा ढांचा, डिजिटल पोर्टल और निकासी उपाय
1. वास्तविक समय निगरानी और ‘eNavik Portal’
- डिजिटल प्लेटफॉर्म: 1 जुलाई 2026 को शुरू हुआ eNavik Portal समुद्री दुर्घटना रिपोर्टिंग, संकट प्रबंधन और नाविकों की शिकायतों के निवारण के लिए 24×7 काम करता है।
- ऑनलाइन रिपोर्टिंग: फारस की खाड़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य, ओमान की खाड़ी, अदन की खाड़ी और लाल सागर से गुजरने वाले सभी जहाजों के लिए विवरण जमा करना अनिवार्य है।
- भारतीय नौसेना के साथ समन्वय: DG संचार केंद्र, भारतीय नौसेना और इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर – इंडियन ओशन रीजन (IFC-IOR) के साथ मिलकर 24 घंटे रियल-टाइम ट्रैकिंग करता है।
2. नाविकों के लिए प्रमुख सलाह और नियमन
- आरपीएसएल (RPSL) एजेंसियों के माध्यम से नियंत्रण: सभी भारतीय नाविकों की तैनाती ‘भर्ती और प्लेसमेंट सेवा लाइसेंस’ (RPSL) पंजीकृत एजेंसियों के ज़रिए होती है। इसके बिना अप्रवासन (Emigration) मंजूरी नहीं मिलती।
- होर्मुज जलडमरूमध्य हेतु प्रतिबंध: DGS सर्कुलर संख्या 36/2026 के तहत जहाजों पर भारतीय नाविकों की तैनाती से बचने की सलाह दी गई है।

- सहमति पत्र (Consent): आपातकालीन स्थिति में क्रू बदलाव केवल नाविक की लिखित सहमति से ही संभव है।
3. सहायता और पुनर्वासन आंकड़े
- स्वदेश वापसी: खाड़ी क्षेत्र से 3,972 भारतीय नाविकों की सुरक्षित स्वदेश वापसी कराई गई है।
- कार्गो आवाजाही: भारत के लिए कार्गो ले जाने वाले 60 जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरे।
- वित्तीय सहायता: मृत्यु के मामलों में नाविक कल्याण कोष सोसाइटी के माध्यम से ₹10 लाख की तत्काल वित्तीय सहायता का प्रावधान है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| संचालक निकाय | समुद्री प्रशासन महानिदेशालय (DGMA), पोत परिवहन मंत्रालय। |
| डिजिटल पोर्टल | eNavik Portal (1 जुलाई 2026 से चालू)। |
| सुरक्षा कोड | ISPS Code (अंतर्राष्ट्रीय पोत और बंदरगाह सुविधा सुरक्षा कोड)। |
| समन्वय संस्थाएं | भारतीय नौसेना, IFC-IOR, UKMTO, MICA सेंटर। |
| हेल्पलाइन समर्थन | 24×7 टोल-फ्री नंबर (1800-889-7768) और ई-नेविग पोर्टल। |
कपास उत्पादकता मिशन (कपास क्रांति)
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएं, कृषि क्षेत्र, प्रमुख फसलें और सरकारी नीतियां।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारत में मुख्य फसलें और फसल पैटर्न, कृषि उत्पादकता, प्रौद्योगिकी का उपयोग तथा वस्त्र एवं कृषि उद्योग।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय वस्त्र राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा ने लोकसभा में ‘कपास उत्पादकता मिशन’ (कपास क्रांति) के बारे में विस्तृत विवरण साझा किया। केंद्र सरकार ने इस मिशन को 5 मई 2026 को मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य देश में कपास उत्पादन, उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार करना है। यह 5 वर्षों की अवधि (2026-27 से 2030-31) के लिए ₹5,659.22 करोड़ के बजट के साथ लागू किया जा रहा है।
मुख्य बिंदु: घटकों का आवंटन, रणनीतियाँ और राज्यवार लक्ष्य
1. वित्तीय आवंटन और चार मुख्य घटक
- कुल बजट: ₹5,659.22 करोड़ (2026-27 से 2030-31 तक 5 वर्षों हेतु)।
- घटक-I(A): ₹555.05 करोड़ (कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग – DARE द्वारा कार्यान्वित)।
- घटक-I(B): ₹3,804.17 करोड़ (कृषि एवं किसान कल्याण विभाग – DA&FW द्वारा कार्यान्वित)।
- घटक-II: ₹1,000 करोड़ (कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया – CCI द्वारा वस्त्र मंत्रालय के तहत)।
- घटक-III: ₹300 करोड़ (राष्ट्रीय जूट बोर्ड द्वारा वस्त्र मंत्रालय के तहत)।
2. जिला कवरेज और कार्यान्वयन रणनीति
- 140 जिले: 14 प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों के 140 संभावित जिलों को शामिल किया गया है।
- लचीलापन: राज्यों को अपनी वार्षिक योजनाओं और प्रदर्शन के आधार पर जिलों की सूची में बदलाव करने की छूट है।
- प्रौद्योगिकी प्रदर्शन: उच्च घनत्व रोपण प्रणाली (HDPS), क्लोजर स्पेसिंग (CS), एक्स्ट्रा लॉन्ग स्टेपल (ELS) और समेकित फसल प्रबंधन (ICM) जैसी तकनीकों का प्रदर्शन।
3. प्रसंस्करण और गुणवत्ता सुधार (PPP मोड)
- 50 परीक्षण प्रयोगशालाएं: PPP मोड में Request for Proposal (RFP) प्रक्रिया के तहत देश भर में 50 कपास परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी।
- कस्तूरी कॉटन भारत: पात्र जिनिंग और प्रोसेसिंग (G&P) कारखानों को ‘कस्तूरी कॉटन भारत’ प्रमाणित कपास गांठों के उत्पादन पर आउटपुट-आधारित प्रोत्साहन।
4. कर्नाटक राज्य के विशेष लक्ष्य (केस स्टडी)
- वर्ष 2030-31 का लक्ष्य: कर्नाटक में कपास उत्पादन को 40 लाख गांठ (bales) और उत्पादकता को 860 किग्रा लिंट/हेक्टेयर तक बढ़ाना।
- रायचूर जिला: 2026-27 में रायचूर के लिए उत्पादकता लक्ष्य 646 किग्रा लिंट/हेक्टेयर और उत्पादन लक्ष्य 6.59 लाख गांठ रखा गया है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| मिशन का नाम | कपास उत्पादकता मिशन (कपास क्रांति)। |
| स्वीकृति तिथि | 5 मई 2026। |
| अवधि और कुल परिव्यय | 5 वर्ष (2026-27 से 2030-31), ₹5,659.22 करोड़। |
| आरंभिक कवरेज | 14 राज्यों के 140 जिले। |
| परीक्षण प्रयोगशालाएं | PPP मोड के तहत 50 कपास परीक्षण प्रयोगशालाएं। |
| गुणवत्ता ब्रांड | कस्तूरी कॉटन भारत। |
| कार्यान्वयन एजेंसियां | DARE, DA&FW, CCI और राष्ट्रीय जूट बोर्ड। |
भारतीय कैपिटल गुड्स क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मकता संवर्धन योजना (चरण-II)
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएं, भारतीय अर्थव्यवस्था, औद्योगिक नीति और प्रौद्योगिकी विकास।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था और आयोजन, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोजगार से संबंधित मुद्दे, औद्योगिक नीति में परिवर्तन और औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव, स्वदेशी तकनीक व उद्योग 4.0।
चर्चा में क्यों?
भारी उद्योग मंत्रालय (Ministry of Heavy Industries – MHI) ने लोकसभा में “भारतीय कैपिटल गुड्स क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मकता के संवर्धन की योजना – चरण II” के तहत स्वीकृत परियोजनाओं के राज्यवार वितरण और वित्तीय प्रगति का विवरण प्रस्तुत किया। इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश में इंडस्ट्री 4.0, डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग, रोबोटिक्स और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देकर भारत के कैपिटल गुड्स (पूंजीगत वस्तु) क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है।
मुख्य बिंदु: समर्थ केंद्र, स्वीकृत परियोजनाएं और वित्तीय आवंटन
1. समर्थ केंद्र और इंडस्ट्री 4.0
- 4 समर्थ केंद्र: मंत्रालय ने उद्योग 4.0 को बढ़ावा देने के लिए 4 स्मार्ट एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग एंड रैपिड ट्रांसफॉर्मेशन हब (SAMARTH) केंद्र स्थापित किए हैं।
- प्रभाव: इन केंद्रों से 2,700 से अधिक उद्योगों को ऑन-साइट प्रदर्शन के ज़रिए लाभ मिला है। साथ ही 300 से अधिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से लगभग 33,000 पेशेवरों को प्रशिक्षित किया गया है।
- अनुभव केंद्र (Experience Centres): C4i4 पुणे के माध्यम से देश भर में 10 क्लस्टर इंडस्ट्री 4.0 अनुभव केंद्र स्थापित करने की मंजूरी दी गई है।
2. योजना के प्रमुख घटक और राज्यवार वितरण (चरण-II)
- उत्कृष्टता केंद्र (Centres of Excellence – CoE): IIT रुड़की (उत्तराखंड), IIT दिल्ली, IISc बेंगलुरु (कर्नाटक), ARAI पुणे (महाराष्ट्र), IIT BHU वाराणसी (यूपी), Si’Tarc कोयंबटूर (तमिलनाडु) और AMTDC IIT मद्रास।
- सामान्य इंजीनियरिंग सुविधा केंद्र (CEFC): IISc बेंगलुरु, C4i4 पुणे, ARAI पुणे, और BHEL त्रिची (तमिलनाडु)।
- परीक्षण एवं प्रमाणन केंद्र (Testing & Certification Centres): ARAI पुणे, CMTI बेंगलुरु, BHEL (एमपी/तेलंगाना), IAHT लुधियाना व IMTT बटाला (पंजाब), और FCRI पलक्कड़ (केरल)।
- इंडस्ट्री एक्सीलेरेटर: ARTPARK व FSID (IISc बेंगलुरु), CMTI बेंगलुरु, ARAI पुणे, IIT मद्रास, शास्त्र यूनिवर्सिटी व PSG कॉलेज (तमिलनाडु), ISB (तेलंगाना) और IIT रुड़की।
- योग्यता पैकेज (Qualification Packages – QPs): ऑटोमोटिव और कैपिटल गुड्स सेक्टर (दिल्ली) के लिए कौशल स्तर 6 और उससे ऊपर के QPs का विकास।
3. वित्तीय विवरण (पिछले तीन वित्तीय वर्ष)
| वित्तीय वर्ष | संशोधित अनुमान | जारी/उपयोग की गई राशि |
| 2023-24 | ₹187.20 करोड़ | ₹83.34 करोड़ |
| 2024-25 | ₹184.00 करोड़ | ₹171.63 करोड़ |
| 2025-26 | ₹120.00 करोड़ | ₹116.09 करोड़ |
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| संबंधित मंत्रालय | भारी उद्योग मंत्रालय (Ministry of Heavy Industries)। |
| प्रमुख पहल | SAMARTH केंद्र (Smart Advanced Manufacturing and Rapid Transformation Hub)। |
| मुख्य तकनीक | इंडस्ट्री 4.0, रोबोटिक्स, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल फैक्ट्री। |
| कार्यान्वयन केंद्र | C4i4 पुणे (10 क्लस्टर अनुभव केंद्रों हेतु जिम्मेदार)। |
| कौशल विकास | ऑटोमोटिव और कैपिटल गुड्स के लिए Qualification Packages (QPs)। |
‘एक राष्ट्र, एक उर्वरक’ पहल: देश भर में उर्वरक उपलब्धता और वितरण सुदृढ़ीकरण
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएं, भारतीय कृषि, उर्वरक सब्सिडी और सरकारी योजनाएं।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता (Agricultural Subsidies), आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन (Supply Chain Management), प्रौद्योगिकी आधारित निगरानी और खाद्य सुरक्षा।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा और राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने राज्य सभा में ‘एक राष्ट्र, एक उर्वरक’ (One Nation, One Fertilizer – ONOF) पहल की प्रगति का विस्तृत ब्योरा साझा किया है। प्रधानमंत्री भारतीय जनउर्वरक परियोजना (PMBJP) के तहत क्रियान्वित इस योजना ने मौजूदा खरीफ 2026 सीजन के दौरान पूरे देश में सभी सब्सिडी वाले उर्वरकों की समयबद्ध और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने में सफलता पाई है। इस पहल के माध्यम से सरकार ने न केवल आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत किया है, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में उर्वरकों की कमी को दूर कर कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने का काम किया है।
मुख्य बिंदु: रणनीतिक ढांचा, डिजिटल निगरानी और आपूर्ति तंत्र
1. ‘भारत’ ब्रांड और ब्रांड एकीकरण
- शुरुआत तिथि: यह पहल 24 अगस्त 2022 से प्रभावी रूप से लागू की गई है।
- एकल ब्रांडिंग: इसके तहत सार्वजनिक, सहकारी और निजी क्षेत्र की सभी कंपनियां सब्सिडी वाले उर्वरकों (यूरिया, DAP, MOP और NPKS) को एक ही ब्रांड नाम “BHARAT” के तहत बेचती हैं।
- मुख्य उद्देश्य: ब्रांडों की बहुलता से किसानों में होने वाले भ्रम को दूर करना, क्रॉस-कंट्री (अनावश्यक) परिवहन/आवाजाही को कम करना और कालाबाजारी पर रोक लगाना।
2. योजनाबद्ध आवंटन और डिजिटल ट्रैकिंग
- मांग का आकलन: कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (DA&FW) राज्यों के परामर्श से मौसम/माहवार आवश्यकता का आकलन करता है।
- iFMS पोर्टल: एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली (iFMS) एक ऑनलाइन वेब-आधारित प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से उर्वरकों की आपूर्ति श्रृंखला को रियल-टाइम ट्रैक किया जाता है।
- आयात व लॉजिस्टिक्स: घरेलू उत्पादन और मांग के अंतर को पूरा करने के लिए अग्रिम आयात किया जाता है। साथ ही रेलवे रैक की उपलब्धता के लिए रेल मंत्रालय के साथ निरंतर समन्वय रखा जाता है।
3. खरीफ 2026 की स्थिति (01.04.2026 से 29.07.2026 तक)
- यूरिया: कुल आवश्यकता 122.84 LMT के मुकाबले उपलब्धता 177.27 LMT रही, जिसमें से 112.53 LMT की बिक्री हुई।
- DAP: आवश्यकता 35.44 LMT के मुकाबले उपलब्धता 43.03 LMT रही।
- पर्याप्त स्टॉक: सभी प्रमुख उर्वरकों (यूरिया, DAP, MOP और NPKS) की उपलब्धता, कुल मांग और बिक्री से अधिक बनी हुई है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| मूल योजना | प्रधानमंत्री भारतीय जनउर्वरक परियोजना (PMBJP)। |
| प्रभावी तिथि | 24 अगस्त 2022। |
| ब्रांड नाम | भारत – जैसे भारत यूरिया, भारत डीएपी। |
| कवर किए गए उर्वरक | यूरिया, DAP, MOP और NPKS कॉम्प्लेक्स। |
| डिजिटल ट्रैकिंग टूल | एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली (iFMS – Integrated Fertilizer Management System)। |
| संबंधित मंत्रालय | रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय (उर्वरक विभाग)। |
अरहर/तूर दाल का T2T जीनोम सीक्वेंस: ICAR की ऐतिहासिक सफलता
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की वैज्ञानिक घटनाएं, कृषि प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) और खाद्य सुरक्षा।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): कृषि उत्पादकता, प्रौद्योगिकी का कृषि में उपयोग, अनुसंधान व विकास (R&D) और दालों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता।
चर्चा में क्यों?
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने अरहर (तूर) दाल का भारत का पहला पूर्ण ‘टेलोमेयर-टू-टेलोमेयर’ (T2T) रेफरेंस जीनोम विकसित किया है। यह उपलब्धि ‘आशा’ किस्म के आधार पर हासिल की गई है। इस सफलता ने भारत में दाल अनुसंधान को नई दिशा दी है। वैश्विक डेटाबेस NCBI में इस जीनोम सीक्वेंस को आधिकारिक स्वीकृति मिल गई है। अब इसे दुनिया भर में अरहर दाल के लिए एक प्रामाणिक ग्लोबल रेफरेंस माना जाएगा। इससे जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने वाली और अधिक उपज देने वाली नई किस्मों को विकसित करने में बड़ी मदद मिलेगी।
मुख्य बिंदु: वैज्ञानिक सफलता, जीनोमिक्स विवरण और आत्मनिर्भर भारत मिशन
1. T2T जीनोम की तकनीकी विशेषताएं
- पूर्ण क्रोमोसोम मैपिंग: इस जीनोम सीक्वेंस (NIPB_CcT2T_4) में अरहर के सभी 11 क्रोमोसोम पूरी तरह से मैप किए गए हैं।
- डीएनए बेस पेयर्स: इसमें 752.65 मिलियन डीएनए बेस पेयर्स शामिल हैं। इन्हें 92 कॉंटिग्स में असेंबल किया गया है।
- जीन पहचान: इसमें कुल 36,557 जीन्स और 48,008 प्रोटीन-कोडिंग सीक्वेंस (mRNAs) की पहचान हुई है।
- सटीकता स्तर: आरएनए मैपिंग में 99.9% से अधिक की सटीकता दर्ज की गई है।
2. अनुसंधान का ऐतिहासिक सफर
- वर्ष 2011: ICAR-NIPB नई दिल्ली ने विश्व में पहली बार किसी दाल फसल (अरहर ‘आशा’ किस्म) का ड्राफ्ट जीनोम प्रकाशित किया था।
- वर्ष 2017: इस ड्राफ्ट जीनोम का एक उन्नत संस्करण जारी किया गया।

- वर्ष 2026 (वर्तमान): अब पूरी तरह से सटीक और त्रुटिरहित T2T जीनोम सीक्वेंस तैयार कर लिया गया है।
3. दाल आत्मनिर्भरता मिशन (2025-26 से 2030-31)
- उत्पादन लक्ष्य: केंद्र सरकार ने वर्ष 2030-31 तक देश में दालों का उत्पादन 35 मिलियन टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
- रणनीतिक उद्देश्य: दालों के आयात पर निर्भरता कम करना, बेहतर बीजों का वितरण बढ़ाना और किसानों की आय में सुधार करना।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| वैज्ञानिक नाम | Cajanus cajan L. Millsp. (अरहर / तूर)। |
| संस्थान | ICAR – नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर प्लांट बायोटेक्नोलॉजी (NIPB), नई दिल्ली। |
| संबद्ध किस्म | ‘आशा’। |
| वैश्विक डेटाबेस | NCBI (Accession No. GCF_000230855.1 – 20 अप्रैल 2026 को जारी)। |
| मुख्य वैज्ञानिक लाभ | जीन-एडिटिंग और मॉलिक्यूलर ब्रीडिंग में आसानी। |