29 August 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत ऊर्जा सुरक्षा और हरित परिवर्तन को गति देने वाले भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम (अनुप्रयोग, सुरक्षा ढांचा और भविष्य का खाका), केरल के सामाजिक पुनर्जागरण में युगांतरकारी योगदान देने वाले श्री नारायण गुरु और महात्मा अय्यंकाली का दर्शन व कार्य, संक्रामक रोगों पर नियंत्रण हेतु भारत में मलेरिया उन्मूलन लक्ष्य 2030 (समीक्षा और प्रगति रिपोर्ट), देश को एआई के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने वाले स्वदेशी AI स्टैक ‘ज्ञाना अर्थ’ तथा सामाजिक न्याय, शिक्षा के अधिकार और दलित सशक्तीकरण के लिए समर्पित महात्मा अय्यंकाली के ऐतिहासिक योगदान का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम: अनुप्रयोग, सुरक्षा और भविष्य का खाका
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की वैज्ञानिक एवं पर्यावरणीय घटनाएं, परमाणु ऊर्जा योजनाएं (SHANTI एक्ट 2025, विकसित भारत मिशन), रेडियोलॉजिकल सुरक्षा मानक।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – ऊर्जा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक, परमाणु ऊर्जा के गैर-विद्युत अनुप्रयोग (कृषि, स्वास्थ्य, सेमीकंडक्टर), पर्यावरण संरक्षण एवं आपदा प्रबंधन।
चर्चा में क्यों?
विकसित भारत के लिए परमाणु ऊर्जा मिशन’ के तहत वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु क्षमता हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। रिपोर्ट में परमाणु तकनीक के बहु-क्षेत्रीय अनुप्रयोगों जैसे कैंसर उपचार, उन्नत कृषि किस्मों, खाद्य संरक्षण, सेमीकंडक्टर सामग्री और ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन में भारत की प्रगति को प्रमुखता से दर्शाया गया है। देश के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की उपलब्धियों, बहु-क्षेत्रीय अनुप्रयोगों, उन्नत सुरक्षा उपायों और ‘विकसित भारत के लिए परमाणु ऊर्जा मिशन’ के रोडमैप का खाका प्रस्तुत किया गया है।
मुख्य बिंदु: क्षमता विस्तार, अनुप्रयोग और सुरक्षा मानक
1. वर्तमान क्षमता और लक्षित मील के पत्थर (Capacity & Vision)
- वर्तमान स्थिति: भारत 7 स्थलों पर 24 परमाणु रिएक्टर संचालित कर रहा है, जिनकी कुल स्थापित क्षमता 8.78 GW है। 9 रिएक्टर निर्माणाधीन हैं और 10 अन्य इकाइयों की योजना जारी है।
- दीर्घकालिक लक्ष्य: 2047 तक 100 GW परमाणु क्षमता हासिल करने का लक्ष्य है।
- नीतिगत व बजटीय समर्थन:
- SHANTI एक्ट, 2025: परमाणु ऊर्जा के विस्तार को कानूनी व सुरक्षात्मक ढांचा प्रदान करता है।
- बजट 2025-26: स्वदेशी छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMRs) के विकास के लिए ₹20,000 करोड़ आवंटित।
- कार्बन उत्सर्जन में कमी: परमाणु ऊर्जा प्रति 1 GW क्षमता पर सालाना लगभग 5.4 मिलियन टन CO₂ उत्सर्जन रोकती है (जो सौर और पवन ऊर्जा से कहीं अधिक है)। 1969 से अब तक कुल 851 मिलियन टन CO₂ उत्सर्जन टाला गया है।
2. बिजली से इतर परमाणु तकनीक के प्रमुख अनुप्रयोग
- स्वास्थ्य सेवा: BARC, IGCAR और टाटा मेमोरियल सेंटर (TMC) द्वारा कैंसर उपचार व रेडियोफार्मास्युटिकल्स का विकास। मुजफ्फरपुर में 150 बेड वाले ‘होमी भाभा कैंसर अस्पताल’ की शुरुआत और 1.53 करोड़ मेडिकल उपकरणों का रेडिएशन स्टरलाइजेशन।
- कृषि व खाद्य संरक्षण: BARC ने म्यूटेशन ब्रीडिंग से 70 फसल किस्में विकसित की हैं (जैसे TBM-9 केला और RTS-43 ज्वार)। खाद्य पदार्थों की शेल्फ-लाइफ बढ़ाने के लिए 40 गामा रेडिएशन सुविधाएं कार्यरत हैं।

- खनन एवं रेयर अर्थ (REE): भारत ने रेयर अर्थ एलिमेंट्स के लिए अपना पहला सर्टिफाइड रेफरेंस मटीरियल ‘Ferrocarbonatite (FC) – BARC B1401’ जारी किया (वैश्विक स्तर पर ऐसा चौथा मानक)।
- सेमीकंडक्टर निर्माण: ओडिशा के तालचर में भारत की पहली इलेक्ट्रॉनिक्स-ग्रेड (99.8% शुद्धता) बोरॉन-11 संवर्धन सुविधा स्थापित की गई, जो ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ को गति देगी।
- ग्रीन हाइड्रोजन: 2026 में कल्पक्कम में परमाणु प्रक्रिया ऊष्मा (Process Heat) का उपयोग करके दुनिया का पहला हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र शुरू किया गया।
3. सुरक्षा ढांचा और आपदा तैयारी
- डिफेंस इन डेप्थ: दुर्घटनाओं से बचाव के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा दीवारें (सिरेमिक फ्यूल पेलेट्स, जिरकोनियम अलॉय रॉड्स, प्रेशर वेसल्स और प्रबलित कंक्रीट संरचना)।

- रेडियोलॉजिकल सुरक्षा मानक:
- परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) सार्वजनिक सुरक्षा हेतु 1 mSv (मिलिसिवर्ट)/वर्ष की सीमा निर्धारित करता है।
- श्रमिकों के लिए 5 साल में औसतन 20 mSv/वर्ष की सीमा तय है।
- अपशिष्ट प्रबंधन व विट्रिफिकेशन: उच्च-स्तरीय परमाणु कचरे को सुरक्षित ब्लॉक में बदलने के लिए स्वदेशी विट्रिफिकेशन तकनीक का प्रयोग।
- आपातकालीन तैयारी: प्रत्येक संयंत्र में 16 किमी का आपातकालीन योजना क्षेत्र (Emergency Planning Zone) और नियमित मॉक ड्रिल।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| कुल वर्तमान क्षमता | 8.78 GW (24 संचालित रिएक्टर) |
| 2047 का लक्ष्य | 100 GW (विकसित भारत मिशन) |
| 2070 का लक्ष्य | शुद्ध शून्य उत्सर्जन (Net Zero Emission) |
| SMR हेतु बजट (2025-26) | ₹20,000 करोड़ |
| पहला न्यूक्लियर-हाइड्रोजन प्लांट | कल्पक्कम (तमिलनाडु), 2026 |
| बोरॉन-11 संवर्धन केंद्र | तालचर (ओडिशा) – सेमीकंडक्टर हेतु |
श्री नारायण गुरु और महात्मा अय्यंकाली: केरल के महान समाज सुधारक
- प्रारंभिक परीक्षा: भारत का इतिहास और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन – 19वीं-20वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन और प्रमुख व्यक्तित्व।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 1): भारतीय इतिहास – 18वीं शताब्दी के मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास, महत्वपूर्ण व्यक्तित्व तथा उनका योगदान।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने केरल के दो महान समाज सुधारकों—श्री नारायण गुरु और महात्मा अय्यंकाली—को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इन दोनों विचारकों ने शिक्षा, आध्यात्मिकता और सामाजिक न्याय के माध्यम से केरल में दलित एवं पिछड़े वर्गों के उत्थान तथा जातिगत भेदभाव के उन्मूलन में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी।
मुख्य बिंदु: जीवन दर्शन और प्रमुख योगदान
1. श्री नारायण गुरु (1856 – 1928)
- दर्शन एवं विचार: उन्होंने आध्यात्मिक स्वतंत्रता, ज्ञान, दया और समानता का संदेश दिया।
- प्रसिद्ध नारा: “एक जाति, एक धर्म, एक ईश्वर” (Oru Jathi, Oru Matham, Oru Daivam Manushyanu)।
- अरुविप्पुरम आंदोलन (1888): उन्होंने गैर-ब्राह्मण होते हुए भी अरुविप्पुरम में शिव लिंग की स्थापना की, जो तत्कालीन उच्च-जाति एकाधिकार के खिलाफ एक ऐतिहासिक चुनौती थी।
- SNDP योगम (1903): श्री नारायण धर्म परिपालन योगम (SNDP) की स्थापना कर एझवा समुदाय और अन्य पिछड़े वर्गों को संगठित किया।
- वैकोम सत्याग्रह (1924-25): मंदिर प्रवेश आंदोलन का समर्थन किया और मंदिर संरचना के बजाय शैक्षणिक संस्थानों के निर्माण को प्राथमिकता दी।
2. महात्मा अय्यंकाली (1863 – 1941)
- शिक्षा के माध्यम से परिवर्तन: उन्होंने वंचित और दलित वर्गों (विशेषकर पुलाया समुदाय) के बच्चों के लिए शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित करने हेतु लंबा संघर्ष किया।
- विल्लुवंडी आंदोलन (Bullock Cart Race – 1893): जनसामान्य की सड़कों पर दलितों की आवाजाही पर लगे प्रतिबंधों को तोड़ने के लिए सजावटी बैलगाड़ी चलाकर अपना विरोध दर्ज कराया।
- साधु जन परिपालन संगम् (SNDP का समकक्ष – 1907): दलितों के अधिकारों, पारिश्रमिक, भूमि और स्कूली शिक्षा की मांग हेतु संगठन बनाया।
- मजदूर आंदोलन: उन्होंने दलित कृषि श्रमिकों का पहला संगठित हड़ताल आंदोलन चलाया, जिससे जमींदारों को उनकी शर्तें माननी पड़ीं।
- उपाधि: महात्मा गांधी ने सामाजिक सुधारों के उनके अद्वितीय साहस को देखते हुए उन्हें ‘महान पुत्र’ (Great Son of India) कहा था।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | श्री नारायण गुरु | महात्मा अय्यंकाली |
| मुख्य क्षेत्र | केरल (सामाजिक-धार्मिक सुधार) | केरल (दलित उत्थान व शिक्षा) |
| प्रसिद्ध संस्था | SNDP योगम (1903) | साधु जन परिपालन संगम् (1907) |
| ऐतिहासिक घटना | अरुविप्पुरम आंदोलन (1888) | विल्लुवंडी (बैलगाड़ी) आंदोलन (1893) |
| मुख्य दर्शन/आह्वान | “एक जाति, एक धर्म, एक ईश्वर” | दलितों की शिक्षा व श्रम अधिकार |
| संबद्ध सत्याग्रह | वैकोम सत्याग्रह समर्थन | स्कूल प्रवेश आंदोलन |
भारत में मलेरिया उन्मूलन लक्ष्य 2030: समीक्षा और प्रगति रिपोर्ट
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीतियां, संक्रामक रोग, सतत विकास लक्ष्य (SDG 3)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): स्वास्थ्य क्षेत्र का विकास और प्रबंधन, सरकारी नीतियां, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM)।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की मिशन निदेशक की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में 2030 तक भारत से मलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य की प्रगति की समीक्षा की गई। पिछले एक दशक (2015–2025) में भारत में मलेरिया के मामलों और मौतों में लगभग 80% की ऐतिहासिक कमी दर्ज की गई है। समीक्षा में देश के 33 उच्च-भार वाले जिलों में क्षेत्र-विशिष्ट रणनीतियों, ‘टेस्ट, ट्रीट और ट्रैक’ दृष्टिकोण को मजबूत करने तथा पंचायती राज व स्थानीय निकायों के साथ अंतर-विभागीय समन्वय पर विशेष बल दिया गया।
मुख्य बिंदु: 2015-2025 की उपलब्धियां और रणनीतिक कदम
1. 10 वर्षों की प्रमुख उपलब्धियां (2015–2025)
- मामलों और मौतों में कमी: भारत में मलेरिया के मामलों और इससे होने वाली मौतों में लगभग 80% की गिरावट दर्ज की गई है।
- उच्च-भार वाले जिलों में कमी: मलेरिया के अधिक मामलों वाले जिलों की संख्या 155 से घटकर 33 रह गई है।
- मलेरिया-मुक्त जिले: वर्ष 2022 से 2025 के बीच देश के 160 जिलों ने शून्य स्थानीय (indigenous) मलेरिया मामलों की रिपोर्ट दी है।
2. 33 उच्च-भार वाले जिले और राज्य
- 2025 में दर्ज कुल मलेरिया मामलों के 64% मामले और 54% मौतें केवल 33 उच्च-भार वाले जिलों से आईं।
- केंद्रित राज्य: मिजोरम, ओडिशा, त्रिपुरा, असम, आंध्र प्रदेश, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, छत्तीसगढ़, झारखंड तथा महाराष्ट्र।
3. प्रमुख रणनीतिक निर्देश
- ‘टेस्ट, ट्रीट और ट्रैक’ रणनीति: शुरुआती पहचान और तुरंत पूर्ण उपचार पर बल दिया गया है। निदान में देरी ही मौतों का मुख्य कारण है।
- माइक्रो-प्लानिंग: सभी 33 जिलों में ‘जिला कार्य योजना’ और प्रभावित गांवों में ‘ग्राम कार्य योजना’ लागू करना।
- डेटा शुद्धता: एनेस्थेटिक/असिम्प्टोमैटिक मामलों की जांच को अलग दर्ज करना, ताकि वार्षिक परजीवी सूचकांक (API) और ABER का सटीक मूल्यांकन हो सके।
- अंतर-विभागीय समन्वय: मच्छर प्रजनन रोकने के लिए ग्रामीण विकास, शहरी विकास और पंचायती राज संस्थाओं के साथ संयुक्त प्रयास।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| राष्ट्रीय उन्मूलन लक्ष्य | 2030 (सतत विकास लक्ष्य 3.3 के अनुरूप) |
| मामलों व मौतों में कमी (2015-25) | लगभग 80% की गिरावट |
| उच्च-भार वाले जिले | 155 से घटकर 33 (9 राज्यों/UTs में) |
| मलेरिया-मुक्त जिले (2022-25) | 160 जिले (शून्य स्थानीय मामले) |
| मुख्य नोडल संस्था | NCVBDC (नेशनल सेंटर फॉर वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल) |
स्वदेशी AI स्टैक ‘ज्ञाना अर्थ’: भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता का नया अध्याय
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – विकास एवं अनुप्रयोग, स्वदेशी तकनीक का विकास और नई तकनीकें (AI, LLM, इंडियाAI मिशन)।
चर्चा में क्यों?
भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में स्वदेशी AI स्टैक ‘ज्ञाना अर्थ’ का आधिकारिक शुभारंभ किया। GNANI AI द्वारा विकसित इस स्टैक में ‘Evon 3.3’ नामक लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) और एआई को व्यावहारिक कार्यों से जोड़ने वाला ‘Plexus’ प्लेटफॉर्म शामिल है। यह पहल भारत की डिजिटल संप्रभुता को सुदृढ़ करने और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में ‘उपभोक्ता’ के बजाय ‘निर्माता’ बनने के राष्ट्रीय दृष्टिकोण को गति प्रदान करती है।
मुख्य बिंदु: स्वदेशी AI, संप्रभुता और तकनीकी क्षमता
1. ‘ज्ञाना अर्थ’ के दो मुख्य घटक
- Evon 3.3: यह एक स्वदेशी लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) है। यह भारत की भाषाई विविधताओं और स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
- Plexus: यह एक विशेष प्लेटफॉर्म है जो AI की बौद्धिक क्षमता को वास्तविक दुनिया के कार्यों, व्यावसायिक संस्थानों और प्रशासनिक प्रणालियों से सीधे जोड़ता है।
2. संप्रभु AI (Sovereign AI) और आत्मनिर्भरता का महत्त्व
- डिजिटल संप्रभुता: विदेशी AI मॉडल पर निर्भरता कम करने से भारत का डेटा देश के भीतर ही सुरक्षित रहता है। इससे रणनीतिक और तकनीकी स्वायत्तता मजबूत होती है।
- उपभोक्ता से निर्माता: उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत को केवल विदेशी तकनीकों का उपभोक्ता नहीं बनना चाहिए। भारत को खुद ऐसी तकनीकों का निर्माण करना होगा जिसका उपयोग दुनिया करे।
3. प्रशासनिक एवं सार्वजनिक क्षेत्र में AI का उपयोग
- डिजिटल संसद: संसदीय चर्चाओं और दस्तावेजों को कई भारतीय भाषाओं में सुलभ बनाया जा रहा है।

- संसदीय भाषांतरण: संसद के हालिया सत्र में 8 भाषाओं में AI-आधारित रीयल-टाइम अनुवाद शुरू किया गया है। जल्द ही इसे संविधान की सभी 22 अनुसूचित भाषाओं में विस्तारित किया जाएगा।
4. राष्ट्रीय AI पारिस्थितिकी तंत्र
- इंडियाAI मिशन: देश में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, कंप्यूटिंग क्षमता और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने का राष्ट्रीय ढांचा।
- रोजगार सृजन: आईटी क्रांति की तरह AI भी नए प्रकार के कुशल रोजगार पैदा करेगा और आर्थिक वृद्धि को गति देगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| उत्पाद नाम | ‘ज्ञाना अर्थ’ – स्वदेशी AI स्टैक |
| डेवलपर संस्था | GNANI AI (CEO: गणेश गोपालन, CTO: अनंत नागराज) |
| घटक 1: Evon 3.3 | स्वदेशी लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) |
| घटक 2: Plexus | एआई को वास्तविक संस्थागत कार्यों से जोड़ने वाला प्लेटफॉर्म |
| संसद में प्रयोग | 8 भाषाओं में रीयल-टाइम AI अनुवाद (लक्ष्य: सभी 22 भाषाएं) |
महात्मा अय्यंकाली: केरल में सामाजिक न्याय और दलित सशक्तीकरण के अग्रदूत
- प्रारंभिक परीक्षा: भारत का इतिहास और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन – 19वीं और 20वीं शताब्दी के प्रमुख सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन और उनके नेता।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 1): 18वीं शताब्दी के मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास – महत्वपूर्ण व्यक्तित्व और उनका योगदान।
चर्चा में क्यों?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल के महान समाज सुधारक महात्मा अय्यंकाली की जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने सामाजिक न्याय, वंचित वर्गों के लिए शिक्षा की व्यवस्था, और कृषि मजदूरों के कल्याण के लिए उनके द्वारा किए गए ऐतिहासिक संघर्षों को याद किया।
मुख्य बिंदु: समाज सुधार और ऐतिहासिक आंदोलन
1. पृष्ठभूमि और प्रारंभिक जीवन (1863 – 1941)
- जन्म: 28 अगस्त 1863 को त्रावणकोर (वर्तमान केरल) के वेंगनूर में पुलाया (Pulaya) समुदाय में हुआ।
- सामाजिक स्थिति: उस दौर में पुलाया समुदाय को अछूत माना जाता था और उन्हें सार्वजनिक सड़कों पर चलने, साफ कपड़े पहनने और शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार नहीं था।
2. विल्लुवंडी आंदोलन (Bullock Cart Race – 1893)
- प्रतिबंध को चुनौती: उस समय दलितों को सार्वजनिक सड़कों का उपयोग करने की अनुमति नहीं थी।
- विरोध का अनोखा तरीका: अय्यंकाली ने पीतल की घंटियों से सजी एक बैलगाड़ी (विल्लुवंडी) खरीदी और पारंपरिक सवर्ण कपड़ों में सार्वजनिक सड़कों पर यात्रा की। यह घटना त्रावणकोर में नागरिक अधिकारों के लिए पहली बड़ी सीधी चुनौती बनी।
3. साधु जन परिपालन संगम् (SJPS – 1907)
- संगठन की स्थापना: 1907 में उन्होंने ‘साधु जन परिपालन संगम्’ की स्थापना की।
- उद्देश्य: इस संस्था ने दलितों के लिए शिक्षा, बेहतर मजदूरी, भूमि अधिकार और सार्वजनिक स्थानों तक पहुँच की माँग की।
4. कृषि श्रम आंदोलन और पहली संगठित हड़ताल
- ऐतिहासिक हड़ताल: जब दलित बच्चों को स्कूलों में प्रवेश देने से रोका गया, तो उन्होंने कृषि मजदूरों को जमींदारों के खेतों में काम बंद करने के लिए संगठित किया।
- परिणाम: यह भारत में दलित कृषि श्रमिकों की पहली संगठित हड़ताल थी, जिसने जमींदारों को दलित बच्चों के स्कूल प्रवेश से जुड़ी शर्तें मानने पर मजबूर कर दिया।
5. महात्मा गांधी द्वारा प्रशंसा
- ‘महान पुत्र’: 1934 में महात्मा गांधी ने वेंगनूर में अय्यंकाली से मुलाकात की और समाज सुधार में उनके असाधारण साहस को देखते हुए उन्हें ‘भारत का महान पुत्र’ (Great Son of India) कहकर संबोधित किया।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| नाम एवं कार्यक्षेत्र | महात्मा अय्यंकाली (केरल) |
| जन्म एवं समुदाय | 28 अगस्त 1863 (पुलाया समुदाय) |
| प्रमुख संस्था | साधु जन परिपालन संगम् (SJPS, 1907) |
| प्रसिद्ध आंदोलन | विल्लुवंडी आंदोलन (1893) – सार्वजनिक सड़क अधिकार |
| ऐतिहासिक योगदान | भारत की पहली संगठित दलित कृषि श्रम हड़ताल |
| गांधी जी द्वारा उपाधि | ‘भारत का महान पुत्र’ (Great Son of India) |