NCERT Notes Class 7 Science Chapter 4: The World of Metals and Non-metals के अंतर्गत धातुओं और अधातुओं के भौतिक गुणधर्मों—जैसे आघातवर्धनीयता (Malleability), तन्यता (Ductility), विद्युत और ऊष्मा की चालकता (Conductivity), दुकान/ध्वानिकता (Sonorousness) और कठोरता—के बीच के अंतर को स्पष्ट करता है। तथा यह वायु (ऑक्सीजन), जल, और अम्लों के साथ धातुओं व अधातुओं की रासायनिक अभिक्रियाओं (Chemical Reactions) के नियमों को समझाता है। और लोहे में जंग लगने (Corrosion/Rusting) की प्रक्रिया और उससे बचाव के उपायों (जैसे यशदलेपन) के साथ-साथ मानव शरीर, कृषि और उद्योगों में अधातुओं की अपरिहार्य भूमिका पर भी गहराई से प्रकाश डाला गया है।
सामग्रियों के गुणधर्म (Properties of Materials)
आघातवर्धनीयता (Malleability)
- परिभाषा: पदार्थों का वह गुण जिससे उन्हें पीटकर पतली चादरों (Sheets) में बदला जा सकता है।
- धातुओं का व्यवहार: अधिकांश धातुएँ आघातवर्धनीय होती हैं।
- उदाहरण: कॉपर, एल्युमिनियम, लोहा।
- सर्वश्रेष्ठ धातुएँ: सोना (Gold) और चांदी (Silver) सबसे अधिक आघातवर्धनीय हैं (जैसे भोजन की एल्युमिनियम फॉयल, मिठाइयों पर चांदी का वर्क)।
- अधातुओं का व्यवहार: कोयला और सल्फर पीटने पर टुकड़ों में टूट जाते हैं। इन्हें भंगुर (Brittle) कहते हैं।
- लकड़ी (Wood): यह न तो आघातवर्धनीय है और न ही भंगुर।
अपवाद (Exceptions in Metals)
- मृदु धातुएँ (Soft Metals): सोडियम (Na) और पोटैशियम (K) इतने मुलायम हैं कि चाकू से काटे जा सकते हैं।
- द्रव धातु (Liquid Metal): मरकरी/पारा (Hg) कमरे के तापमान पर द्रव अवस्था में पाया जाता है।
सभ्यता के विकास पर लोहे का प्रभाव
- हड़प्पा सभ्यता: कॉपर (तांबा) और गोल्ड (सोना) का उपयोग बर्तन व आभूषण बनाने में करते थे, लेकिन लोहे (Iron) से अनभिज्ञ थे।
- उत्तर-वैदिक काल एवं उत्तर भारत: लोहे की खोज और उपयोग से कृषि औजारों (जैसे लोहे के फाल वाला हल) की दक्षता बढ़ी। इससे अधिशेष उत्पादन हुआ और महाजनपदों का उदय संभव हो सका।
- कॉपर बनाम आयरन: कॉपर प्रकृति में स्वतंत्र रूप से और कम तापमान पर सुलभ था, इसलिए इसकी खोज लोहे से पहले हुई।
तन्यता (Ductility)
- परिभाषा: पदार्थों का वह गुण जिससे खींचकर पतले तार (Wires) बनाए जा सकते हैं।
- मुख्य धातुएँ: कॉपर, एल्युमिनियम और सोना।
- अद्भुत तथ्य: मात्र 1 ग्राम सोने से 2 किलोमीटर लंबा तार खींचा जा सकता है।
- उपयोग: बिजली की वायरिंग, आभूषण, वाद्ययंत्र (वीणा, सितार, गिटार के तार), और चाय की छननी।
- स्टील की डोरियाँ (Steel Ropes): लोहे (धातु) और कार्बन (अधातु) के मिश्रण (मिश्रधातु) से बनी स्टील की रस्सियों में उच्च तन्यता और शक्ति होती है, जिनका उपयोग सस्पेंशन ब्रिज और क्रेन में भारी भार उठाने के लिए होता है।
- अधातुएँ: कोयला और सल्फर में तन्यता नहीं होती।
ध्वानिकता (Sonority)
- परिभाषा: धातुओं द्वारा फर्श पर गिरने या टकराने पर गूंजने वाली ध्वनि (Ringing sound) उत्पन्न करने का गुण।
- सोनोरस: धातुएँ ध्वन्यात्मक होती हैं।
- उदाहरण: मंदिर या स्कूल की घंटी, घुंघरू, सिक्के व चम्मच की आवाज।
- अधातुएँ: लकड़ी और कोयला टकराने पर मंदी या बेसुरी (Dull) ध्वनि देते हैं।
ऊष्मा का चालन (Conduction of heat)
- परिभाषा: किसी पदार्थ में एक सिरे से दूसरे सिरे तक ऊष्मा का स्थानांतरण चालन (Conduction) कहलाता है।
- ऊष्मा के सुचालक: धातुएँ ऊष्मा की अच्छी संवाहक होती हैं। इसीलिए खाना पकाने के बर्तन धातु (एल्युमिनियम, कॉपर, स्टील) के बनाए जाते हैं।

- ऊष्मा के कुचालक: लकड़ी और प्लास्टिक ऊष्मा के कुचालक हैं, इसीलिए बर्तनों के हत्थे इनसे बनाए जाते हैं।
विद्युत का चालन (Conduction of electricity)
- विद्युत के सुचालक (Good Conductors): एल्युमिनियम, लोहा, कॉपर विद्युत को आसानी से प्रवाहित होने देते हैं।
- विद्युत के कुचालक (Poor Conductors): सल्फर, कोयला, लकड़ी, पत्थर, रबर और नायलन।
- सुरक्षा उपाय: पेचकश के प्लास्टिक हैंडल और इलेक्ट्रिशियन के रबर दस्ताने विद्युत के कुचालक होने के कारण झटके से बचाते हैं।
धातुओं और अधातुओं के भौतिक गुणों की तुलना
| गुणधर्म (Property) | धातुएँ (Metals) | अधातुक / अधातुएँ (Non-metals) |
| चमक (Lustre) | धात्विक चमक होती है | चमकहीन (Dull) होती हैं |
| कठोरता (Hardness) | सामान्यतः कठोर (अपवाद: Na, K) | कोमल या भंगुर |
| आघातवर्धनीयता (Malleability) | पाई जाती है (चादरें बनती हैं) | नहीं (भंगुर – टुकड़ों में टूटते हैं) |
| तन्यता (Ductility) | पाई जाती है (तार बनते हैं) | नहीं पाई जाती |
| ध्वन्यात्मकता (Sonority) | गूंजने वाली ध्वनि बनाती हैं | मंदी/धीमी ध्वनि |
| चालकता (Conduction) | ऊष्मा व विद्युत की सुचालक | ऊष्मा व विद्युत की कुचालक |
धातुओं पर वायु और जल का प्रभाव: लोहा (Effect of Air and Water on Metals: Iron)
लोहे पर जंग लगने के लिए वायु और नमी का एक साथ होना अनिवार्य है।
प्रयोग और निष्कर्ष
प्रयोग में तीन अलग-अलग परिस्थितियों का परीक्षण किया गया:
- बोतल A (केवल शुष्क वायु):
- सिलिका जेल नमी सोख लेता है।
- परिणाम: लोहे की कील पर जंग नहीं लगता।

- बोतल B (केवल जल, वायु नहीं):
- उबले पानी से घुली गैसें निकल जाती हैं।
- सतह पर तेल की परत वायु को मिलने से रोकती है।
- परिणाम: जंग नहीं लगता।

- बोतल C (वायु + जल दोनों):
- कील आंशिक रूप से पानी में डूबी और खुली रहती है।
- परिणाम: कील पर भूरे रंग की परत जम जाती है।

निष्कर्ष: लोहे में जंग (Rusting) लगने के लिए आर्द्र वायु (Moist Air) यानी जल और वायु दोनों की उपस्थिति आवश्यक है।
संक्षारण और इसके बचाव (Corrosion and Prevention)
- संक्षारण (Corrosion): वायु, नमी या रसायनों के संपर्क में आने से धातु की सतह का धीरे-धीरे नष्ट होना।
- तांबा (Copper): वायु में रहने पर हरे रंग की परत जमती है।
- चांदी (Silver): वायु के संपर्क से काले रंग की परत बनती है।
- लोहा (Iron): भूरे रंग की परत यानी जंग (Fe₂O₃·xH₂O) बनती है।
- जंग से बचाव के उपाय:
- पेंटिंग (Painting)
- तेल या ग्रीस लगाना (Oiling/Greasing)
- गैल्वनीकरण: लोहे पर जस्ते (Zinc) की सुरक्षात्मक परत चढ़ाना।
प्रयोग का त्वरित अवलोकन
| बोतल | जल की उपस्थिति | वायु की उपस्थिति | अवलोकन (Observation) |
| A | नहीं | हाँ (शुष्क) | जंग नहीं लगा |
| B | हाँ | नहीं | जंग नहीं लगा |
| C | हाँ | हाँ | भूरे रंग का जंग लगा |
अन्य धातुओं पर वायु और जल का प्रभाव (Effect of Air and Water on Other Metals)
धातुएँ वायु में मौजूद ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके धात्विक ऑक्साइड बनाती हैं।
मैग्नीशियम फीते का दहन
- दहन की प्रक्रिया: मैग्नीशियम फीता (Ribbon) वायु में चमकदार सफेद ज्वाला (Dazzling white flame) के साथ जलता है।
- उत्पाद: जलने पर मैग्नीशियम ऑक्साइड (Magnesium Oxide – MgO) का सफेद चूर्ण बनता है।
- रासायनिक प्रकृति की जाँच:
- जब सफेद चूर्ण (MgO) को पानी में मिलाकर घोला जाता है, तो यह घोल लाल लिटमस पेपर को नीला कर देता है।
- निष्कर्ष: धात्विक ऑक्साइड (Metal Oxides) सामान्यतः क्षारीय (Basic) प्रकृति के होते हैं।
सोडियम धातु की क्रियाशीलता (Reactivity of Sodium)
- अत्यधिक क्रियाशील: सोडियम धातु ऑक्सीजन और पानी के साथ तेजी से अभिक्रिया करती है।
- ऊष्मा का उत्सर्जन: इस अभिक्रिया में अत्यधिक मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न होती है।

- केरोसिन में भंडारण: नमी और हवा से संपर्क रोकने के लिए सोडियम को मिट्टी के तेल (Kerosene) में डुबोकर रखा जाता है।
- ऑक्साइड की प्रकृति: सोडियम का ऑक्साइड (Na_2O) भी क्षारीय प्रकृति का होता है।
धातुओं की वायु से अभिक्रिया
| धातु (Metal) | अभिक्रिया का प्रकार | बना उत्पाद (Product) | ऑक्साइड की प्रकृति |
| मैग्नीशियम (Mg) | वायु में जलकर सफेद ज्वाला देना | मैग्नीशियम ऑक्साइड (MgO) | क्षारीय (Basic) |
| सोडियम (Na) | हवा व पानी से तीव्र विस्फोट/ऊष्मा | सोडियम ऑक्साइड (Na_2O) | क्षारीय (Basic) |
धातुओं से भिन्न व्यवहार करने वाले पदार्थ
अधातुएँ वायु और जल के साथ धातुओं से बिल्कुल अलग प्रतिक्रिया दर्शाती हैं।
प्रयोग और अवलोकन
- सल्फर का दहन: सल्फर को वायु (ऑक्सीजन) में जलाने पर सल्फर डाइऑक्साइड (SO_2) गैस बनती है।
- जल में घोलना: सल्फर डाइऑक्साइड गैस को पानी में घोलने पर सल्फ्यूरस अम्ल (H_2SO_3) बनता है।
- अम्लीय परीक्षण: यह घोल नीले लिटमस पेपर को लाल कर देता है।
- सल्फर की जल से क्रिया: सल्फर पाउडर को सीधे पानी में मिलाने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं होती।
अधातुओं के भौतिक व रासायनिक गुणधर्म
- अधातुओं के गुण: ये कोमल, चमकहीन (Dull), अभंगुर/भंगुर, अतन्य (Non-ductile), और अध्वन्यात्मक (Non-sonorous) होते हैं।
- चालकता: ये ऊष्मा और विद्युत के कुचालक होते हैं।
- ऑक्साइड की प्रकृति: अधातुओं के ऑक्साइड अम्लीय (Acidic) प्रकृति के होते हैं।
- फॉस्फोरस का जल में भंडारण: फॉस्फोरस वायुमंडलीय हवा में आते ही आग पकड़ लेता है। इसलिए इसे पानी के अंदर डुबोकर सुरक्षित रखा जाता है।
- प्रमुख उदाहरण: सल्फर, फॉस्फोरस, ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन, कार्बन।
- महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण: प्लास्टिक, कांच, लकड़ी, रबर और कागज को धातु या अधातु में वर्गीकृत नहीं किया जाता, क्योंकि ये तत्व (Elements) नहीं हैं।
धातुओं और अधातुओं के व्यवहार की तुलना
| विशेषता | धातुएँ (Metals) | अधातुएँ (Non-metals) |
| ऑक्साइड की प्रकृति | क्षारीय (Basic) | अम्लीय (Acidic) |
| हवा से सुरक्षा हेतु भंडारण | सोडियम को केरोसिन में रखते हैं | फॉस्फोरस को पानी में रखते हैं |
| भौतिक बनावट | कठोर, चमकदार, तन्य, आघातवर्धनीय | कोमल, चमकहीन, अतन्य, भंगुर |
क्या अधातुएँ देनिक जीवन में महत्वपूर्ण हैं? (Are Non-metals Essential in Everyday Life?)
धातुओं की चमक और मजबूती के बावजूद, जीवन के अस्तित्व और दैनिक गतिविधियों के लिए अधातुएँ (Non-metals) अत्यंत आवश्यक हैं।
1. प्रमुख अधातुएँ और उनके व्यावहारिक उपयोग
- ऑक्सीजन (O_2):
- श्वसन (Respiration) के लिए अनिवार्य।
- बिना ऑक्सीजन जीवन संभव नहीं।
- कार्बन (C):
- सभी जीव रूपों का मूलभूत आधार (Building Block)।
- कार्बोहाइड्रेट, वसा (Fats) और प्रोटीन का मुख्य घटक, जो ऊर्जा व वृद्धि प्रदान करते हैं।
- नाइट्रोजन (N_2):
- उर्वरकों (Fertilisers) और रसायनों के निर्माण में प्रयुक्त।
- पादप वृद्धि (Plant Growth) के लिए अति-आवश्यक पोषक तत्व।
- क्लोरीन (Cl_2):
- जल शोधन (Water Purification) में विसंक्रामक (Disinfectant) के रूप में प्रयोग।
- आयोडीन (I_2):
- आयोडीन का घोल (Tincture Iodine) घावों पर एंटीसेप्टिक (Antiseptic) के रूप में काम आता है।
आधुनिक तकनीक और सतत विकास में धातुओं का योगदान
- मिश्रधातुएँ (Alloys): दो या अधिक धातुओं, अथवा धातु व अधातु का मिश्रण। घरेलू बर्तनों, औजारों और उद्योगों के लिए अनिवार्य।
- रणनीतिक धातुएँ (Strategic Metals):
- ज़िरकोनियम: परमाणु ऊर्जा (Atomic Energy) क्षेत्र में उपयोगी।
- टाइटेनियम: एयरोस्पेस (अंतरिक्ष) उद्योग में प्रयुक्त।
- पुनर्चक्रण एवं सततता (Recycling & Sustainability): भारत में कचरा कम करने और सततता को बढ़ावा देने के लिए मुख्य रूप से लोहे (Iron) और एल्युमिनियम का पुनर्चक्रण (Recycling) किया जाता है।
प्रमुख अधातुएँ
| अधातु (Non-metal) | मुख्य कार्य / अनुप्रयोग | क्षेत्र / उपयोगिता |
| ऑक्सीजन | श्वसन क्रिया और दहन | जीवन रक्षा |
| कार्बन | जैविक अणुओं (Carbs, Fats) का निर्माण | जीवन का आधार |
| नाइट्रोजन | उर्वरक निर्माण | कृषि व पादप वृद्धि |
| क्लोरीन | जल का कीटाणुशोधन | पेयजल स्वच्छता |
| आयोडीन | एंटीसेप्टिक घोल | चिकित्सा |