14 September 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत वैश्विक दक्षिण की आवाज को सशक्त बनाने वाले BRICS नई दिल्ली घोषणापत्र (2026), स्टील स्लैग रोड टेक्नोलॉजी (लागत में 40% कमी और 4 गुना अधिक मजबूती), जलवायु परिवर्तन व एल नीनो के प्रभावों का मुकाबला करने वाली मोंठ बीन की नई जलवायु-सहिष्णु प्रजातियां, उत्तराखंड की देशी पशु नस्लों के संरक्षण हेतु OPU-IVF तकनीक से बद्री गाय के बछड़े का जन्म, शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा व मृदा स्वास्थ्य सुदृढ़ करने हेतु ड्राईलैंड कांग्रेस 2026 और ‘दिल्ली डिक्लेरेशन’, तथा बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधारों पर केंद्रित 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (वैश्विक शासन सुधार और भारत का दृष्टिकोण) का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
BRICS नई दिल्ली घोषणापत्र (2026): मजबूती, नवाचार, सहयोग और सतत विकास
- प्रारंभिक परीक्षा: अंतर्राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएं, अंतर्राष्ट्रीय संगठन (BRICS)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, समूह और भारत के हित से जुड़े वैश्विक मंच।
चर्चा में क्यों?
भारत की अध्यक्षता में 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (XVIII BRICS Summit) में सभी सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ को अपनाया। “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” विषय पर आधारित इस सम्मेलन में वैश्विक शासन और सुरक्षा सुधारों पर गहन चर्चा की गई। इस घोषणापत्र का मुख्य उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में बहुपक्षीय सुधारों को गति देना, एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों का विरोध करना तथा विकासशील देशों (Global South) की प्राथमिकताओं को वैश्विक पटल पर मजबूती से प्रस्तुत करना है।
मुख्य बिंदु: वैश्विक शासन, बहुपक्षवाद और क्षेत्रीय शांति
1. बहुपक्षीय सुधार और वैश्विक शासन
- संयुक्त राष्ट्र (UN) में सुधार: BRICS देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में विकासशील देशों (Global South) का प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर जोर दिया।
- भारत और ब्राजील का समर्थन: स्थायी सदस्य चीन और रूस ने UNSC में भारत और ब्राजील की अधिक महत्वपूर्ण भूमिका और आकांक्षाओं का समर्थन दोहराया।
- अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में बदलाव: ब्रेटन वुड्स संस्थानों (IMF और विश्व बैंक) में कोटा व वोटिंग शेयर में सुधार की मांग की गई ताकि उभरती अर्थव्यवस्थाओं (EMDEs) का सही प्रतिनिधित्व हो सके।
- WTO और नियम-आधारित व्यापार: विश्व व्यापार संगठन (WTO) के दो-स्तरीय विवाद निपटान तंत्र को तुरंत बहाल करने और एकतरफा संरक्षणवादी शुल्कों का विरोध करने का आह्वान किया।
2. अंतर्राष्ट्रीय शांति, सुरक्षा और कूटनीति
- पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) तनाव: गाजा पट्टी में पूर्ण व निर्बाध मानवीय सहायता की मांग की गई। साथ ही, 1967 की सीमाओं के भीतर संप्रभु ‘फिलिस्तीन राज्य’ के लिए टू-स्टेट सॉल्यूशन का समर्थन किया गया।
- लेबनान स्थिति: लेबनान में संघर्ष विराम और UNIFIL (संयुक्त राष्ट्र शांति सेना) के कर्मियों और संपत्तियों की सुरक्षा की अपील की गई।
- एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध: बिना UNSC की मंजूरी के लगाए गए एकतरफा प्रतिबंधों (Unilateral Coercive Measures) की कड़ी निंदा की गई।
3. विकासशील देशों की आवाज
- BRICS Plus / Outreach: सम्मेलन के तहत BRICS+ संवाद का आयोजन किया गया, जो उभरते बाजारों और विकासशील देशों के साथ जुड़ाव को मजबूत करता है।
- 2030 सतत विकास लक्ष्य (SDGs): गरीबी उन्मूलन (SDG 1) और असमानता को कम करने (SDG 10) को वैश्विक एजेंडे में प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| शिखर सम्मेलन | 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (2026) |
| मेजबान शहर | नई दिल्ली, भारत |
| थीम (Theme) | Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability |
| अपनाया गया दस्तावेज | नई दिल्ली घोषणापत्र |
| UNSC समर्थन | चीन व रूस द्वारा भारत और ब्राजील की दावेदारी का समर्थन |
| वित्त/व्यापार सुधार | IMF कोटा समीक्षा (17th GRQ) और WTO विवाद समाधान प्रणाली का पुनरुद्धार |
स्टील स्लैग रोड टेक्नोलॉजी: लागत में 40% कमी और 4 गुना अधिक मजबूती
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएं, पर्यावरण और सतत विकास (Waste to Wealth), अवसंरचना (Infrastructure)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): बुनियादी ढांचा (सड़क व परिवहन), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (स्वदेशी तकनीक), औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन, चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy)।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने CSIR-CRRI और जिंदल स्टील लिमिटेड को “प्रोसेस्ड स्टील स्लैग एग्रीगेट्स से निर्मित दुनिया की सबसे लंबी सड़क” के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड से सम्मानित किए जाने के कार्यक्रम को संबोधित किया। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में बनी यह 1.85 किमी लंबी सड़क स्वदेशी ‘स्टील स्लैग रोड टेक्नोलॉजी’ का एक सफल उदाहरण है।
मुख्य बिंदु: तकनीक के लाभ, राष्ट्रीय विस्तार और भावी योजनाएं
1. स्टील स्लैग रोड तकनीक के प्रमुख लाभ
- लागत में भारी कमी: पारंपरिक सड़कों की तुलना में निर्माण लागत में लगभग 40% की कमी आती है।
- चार गुना अधिक मजबूती: यह सड़क पारंपरिक सड़कों से 4 गुना अधिक मजबूत है।
- लंबा रखरखाव चक्र: उपयुक्त परिस्थितियों में इस तकनीक से बनी सड़कों को लगभग 15 वर्षों तक किसी बड़े रखरखाव (Maintenance) की आवश्यकता नहीं होती।
- जलवायु-अनुकूल: यह तकनीक अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों और भारी मालवाहक वाहनों वाले औद्योगिक गलियारों के लिए बेहद टिकाऊ सिद्ध हुई है।
2. वेस्ट टू वेल्थ और चक्रीय अर्थव्यवस्था
- संसाधन संरक्षण: यह तकनीक प्राकृतिक पत्थरों/गिट्टी (Aggregates) के लिए की जाने वाली माइनिंग और उत्खनन को रोकती है, जिससे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होता है।
- अपशिष्ट का पुनः उपयोग: इस्पात निर्माण के उप-उत्पाद (By-product) यानी ‘प्रोसेस्ड स्टील स्लैग’ को अवसंरचना में बदलकर ‘कचरे से कंचन’ (Waste to Wealth) के दृष्टिकोण को बढ़ावा मिलता है।
3. परियोजना का विस्तार और मील के पत्थर
- 1.85 किमी से 40 किमी का लक्ष्य: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में 1.85 किमी की सड़क के रिकॉर्ड के बाद अब ओडिशा के अनुगुल में 40 किमी लंबी सड़क का निर्माण किया जा रहा है।
- तकनीक का पूर्व उपयोग:
- हजीरा, गुजरात: 6-लेन औद्योगिक सड़क और पोर्ट अवसंरचना।
- NH-66 मुंबई-गोवा राजमार्ग: 4-लेन राजमार्ग निर्माण में 80,000 टन स्लैग का उपयोग।
- अरुणाचल प्रदेश: कठिन सीमावर्ती क्षेत्रों में भारी क्षमता वाली सड़कों का निर्माण।
- ब्रांड लॉन्च: कार्यक्रम के दौरान ‘Steel Grit’ ब्रांड नाम और वैज्ञानिक डॉक्यूमेन्ट्री भी लॉन्च की गई।

4. अंतर-मंत्रालयी और बहु-राज्यीय अपनाव का आह्वान
- मंत्री ने इस तकनीक को केवल MoRTH (सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय) तक सीमित न रखकर भारतीय रेलवे, रक्षा, राज्य सरकारों और निजी बिल्डरों तक बड़े पैमाने पर विस्तारित करने का आग्रह किया।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| गिनीज रिकॉर्ड सड़क | 1.85 किमी (रायगढ़, छत्तीसगढ़) |
| प्रस्तावित अगली परियोजना | 40 किमी (अनुगुल, ओडिशा) |
| विकसित करने वाली संस्थाएं | CSIR-CRRI और जिंदल स्टील लिमिटेड (JSL) |
| निर्माणाधीन लागत बचत | लगभग 40% तक कमी |
मोंठ बीन की नई प्रजातियां: एल नीनो और सूखे के खिलाफ कृषि-सहिष्णुता
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएं, कृषि पारिस्थितिकी, जलवायु परिवर्तन-अनुकूलन।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): मुख्य फसलें एवं उनकी शस्य प्रणाली, जलवायु परिवर्तन का कृषि पर प्रभाव, ‘क्रॉप ब्रीडिंग’ (फसल प्रजनन), जल अवसंरचना एवं संरक्षण, खाद्य सुरक्षा।
चर्चा में क्यों?
ICAR-केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (CAZRI), जोधपुर द्वारा विकसित मोंठ बीन की चार नई किस्मों—CAZRI Moth-4, 5, 6, और 7—ने पश्चिमी राजस्थान में एल नीनो वर्ष के दौरान खरीफ 2026 में 35 दिनों के लंबे सूखे (Dry Spell) के बावजूद बेहतरीन पैदावार और सहनशीलता का प्रदर्शन किया है।
प्रमुख बिंदु: तकनीकी विशेषताएं, कृषि प्रबंधन और राष्ट्रीय महत्व
1. फसल की विशेषताएं और शुष्क क्षेत्र में चुनौतियां
- भौगोलिक विस्तार: पश्चिमी राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों में लगभग 10 लाख हेक्टेयर भूमि पर मोंठ की खेती की जाती है।
- कम उत्पादकता का कारण: 150–250 मिमी जैसी अनियमित वार्षिक वर्षा, सीमित मृदा नमी तथा 20–30 दिनों के लंबे सूखे के कारण इसकी औसत उत्पादकता मात्र 350 किग्रा प्रति हेक्टेयर तक सिमट कर रह जाती है।
2. काजरी की नई किस्मों की प्रमुख तकनीकी खूबियां
- विकासात्मक नमनीयता (Developmental Plasticity): ये किस्में बुवाई के केवल 30 दिनों के भीतर ही पुष्पन (Flowering) शुरू कर देती हैं। यदि वातावरण में नमी कम हो जाए, तो पौधे अपनी परिपक्वता अवधि को खुद-ब-खुद समायोजित कर लेते हैं।
- मजबूत जड़ प्रणाली: जब ऊपरी सतह (0–10 सेमी) की नमी 15% से घटकर 5–6% रह गई, तब भी इन पौधों ने निचली परत (10–40 सेमी) की 16% नमी का प्रभावी उपयोग करके विकास जारी रखा।
- हरी-भरी अवस्था: बुवाई के 55 दिनों बाद, जब फलियां और फूल बन रहे थे, तब भी बिना बारिश के पौधों का तना हरा-भरा रहा और फलियां भरपूर मात्रा में बनीं।
3. सर्वोत्तम कृषि-प्रबंध प्रणाली
- बुवाई का समय और रिक्ति: जुलाई में मानसून की शुरुआत के साथ 45 × 10 सेमी के इष्टतम ज्यामितीय अंतर पर बुवाई की गई।
- नमी संरक्षण: बुवाई के 20 दिनों बाद यांत्रिक अंतर-कृषि (Interculture) और खरपतवार नियंत्रण किया गया, जिससे मृदा की नमी वाष्पित होने से बची।
- कम उपजाऊ मिट्टी में भी प्रदर्शन: इन फसलों का विकास अत्यंत कम कार्बनिक कार्बन (0.13–0.18%) और उच्च pH (7.9–8.1) वाली खराब मिट्टी में भी सुचारू रूप से हुआ।
4. बीज गुणन और आर्थिक प्रभाव
- बीज का स्केलिंग-अप: CAZRI फार्म में 7 हेक्टेयर भूमि पर बीज तैयार किया जा रहा है ताकि साथी पोर्टल पर पंजीकृत 23.32 क्विंटल बीज की मांग को पूरा किया जा सके।
- व्यापक पहुंच: 1 क्विंटल प्रजनक बीज (Breeder Seed) से लगभग 1,000–1,400 क्विंटल प्रमाणित बीज बनते हैं, जो 10,000 हेक्टेयर में बुवाई के लिए पर्याप्त हैं। यदि इस क्षमता का आधा भी उपयोग हो, तो राजस्थान के 25% मोंठ क्षेत्र को कवर किया जा सकता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| नई मोंठ किस्में | CAZRI Moth-4, CAZRI Moth-5, CAZRI Moth-6, CAZRI Moth-7 |
| विकसित करने वाला संस्थान | ICAR-केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (CAZRI), जोधपुर |
| सूखा सहनशीलता क्षमता | खरीफ 2026 में 35 दिनों की लंबी शुष्क अवधि (Dry Spell) झेली |
| अनुकूलन गुण | विकासात्मक नमनीयता (Developmental Plasticity) – नमी के अनुसार वृद्धि चक्र बदलना |
| डिजिटल बीज ट्रैकिंग | साथी पोर्टल के माध्यम से बीजों की आपूर्ति व आवंटन |
ओवम पिक-अप और इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (OPU-IVF) तकनीक से बद्री गाय के बछड़े का जन्म: उत्तराखंड की देशी नस्ल के संरक्षण में मील का पत्थर
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएं, जैव विविधता और जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): पशुपालन का अर्थशास्त्र, जैव प्रौद्योगिकी और उसके अनुप्रयोग (Applications of Biotechnology), देशी प्रजातियों का संरक्षण और आनुवंशिक सुधार (Genetic Improvement)।
चर्चा में क्यों?
अकादमिक डेयरी फार्म में ओवम पिक-अप और इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (OPU-IVF) तकनीक के माध्यम से एक स्वस्थ ‘बद्री’ मादा बछड़े का जन्म हुआ। यह उपलब्धि ICAR-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (ICAR-NDRI), करनाल और गोविंद वल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर के संयुक्त सहयोग से हासिल की गई है। इस प्रयोग में बद्री गाय के भ्रूण को एक साहीवाल सरोगेट गाय में स्थानांतरित किया गया था।
मुख्य बिंदु: तकनीक, देशी नस्ल का महत्व और भविष्य की योजनाएं
1. बद्री गाय का महत्व
- पहचान: बद्री गाय उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों की प्रमुख देशी नस्ल है। इसे उत्तराखंड का राज्य पशु भी घोषित किया गया है।
- विशेषताएं: यह नस्ल हिमालयी जलवायु के अनुकूल है, बीमारियों के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी है और इसके दूध का पोषण मूल्य बहुत अधिक होता है।
2. OPU-IVF तकनीक की प्रक्रिया
- ओवम पिक-अप (OPU): अल्ट्रासाउंड की मदद से उच्च आनुवंशिक गुणवत्ता वाली दाता बद्री गाय से अंडाणु (Oocytes) एकत्र किए जाते हैं।
- इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF): प्रयोगशाला में एकत्र किए गए अंडाणुओं को उत्तराखंड पशुधन विकास बोर्ड के बेहतर बद्री सांड के शुक्राणुओं के साथ निषेचित (Fertilize) किया जाता है।
- भ्रूण स्थानांतरण (ET): प्रयोगशाला में विकसित भ्रूण को प्राप्तकर्ता (Recipient) सरोगेट गाय (इस मामले में साहीवाल गाय) में रोपित किया जाता है।
3. इस उपलब्धि का लाभ और दूरगामी प्रभाव
- तीव्र आनुवंशिक सुधार: पारंपरिक तरीकों की तुलना में OPU-IVF तकनीक से उच्च नस्ल वाले पशुओं का तेजी से गुणन (Rapid Multiplication) संभव है।
- क्लोनिंग की दिशा में कदम: वैज्ञानिक अब बद्री गायों की क्लोनिंग पर भी काम कर रहे हैं। आने वाले समय में OPU-IVF और क्लोनिंग से तैयार भ्रूणों को साहीवाल, क्रॉसब्रेड और बद्री गायों में स्थानांतरित किया जाएगा।
- पहाड़ी अर्थव्यवस्था को बल: यह तकनीक हिमालयी क्षेत्रों में सतत पशुपालन और आनुवंशिक संसाधन संरक्षण को नई दिशा प्रदान करेगी।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| तकनीक का नाम | OPU-IVF (Ovum Pick-Up & In Vitro Fertilization) |
| मुख्य देशी नस्ल | बद्री गाय (उत्तराखंड का राज्य पशु) |
| प्राप्तकर्ता (सरोगेट) गाय | साहीवाल (Sahiwal) |
| सहयोगी संस्थान | ICAR-NDRI (करनाल) और G.B. पंत विश्वविद्यालय (पंतनगर) |
| वित्तपोषण एजेंसी | उत्तराखंड बायोटेक्नोलॉजी काउंसिल, हल्दी |
ड्राईलैंड कांग्रेस 2026 और ‘दिल्ली डिक्लेरेशन’: शुष्क कृषि का कायाकल्प
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएं, पर्यावरण व सतत विकास, कृषि पारिस्थितिकी (Agri-Ecology)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): देश के विभिन्न भागों में मुख्य फसलें और फसल पैटर्न, जलवायु परिवर्तन का कृषि पर प्रभाव, तकनीकी नवाचार, दक्षिण-दक्षिण सहयोग।
चर्चा में क्यों?
नई दिल्ली में तीन दिवसीय ड्राईलैंड कांग्रेस 2026 संपन्न हुई। इस सम्मेलन के समापन के अवसर पर ‘दिल्ली डिक्लेरेशन ऑन ड्राईलैंड्स (3D)’ को अपनाया गया। इसका मुख्य उद्देश्य दक्षिण-दक्षिण और त्रिकोणीय सहयोग के माध्यम से वैश्विक स्तर पर शुष्क क्षेत्रों में कृषि का कायाकल्प करना है।
मुख्य बिंदु: रणनीतिक घोषणाएं, भागीदार और वैश्विक पुरस्कार
1. दिल्ली डिक्लेरेशन ऑन ड्राईलैंड्स
- साझा एजेंडा: ग्लोबल साउथ (विकासशील और अल्पविकसित देशों) के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान, तकनीकी नवाचार और संस्थागत साझेदारी के जरिए शुष्क कृषि-खाद्य प्रणालियों (Agri-Food Systems) को टिकाऊ बनाना।
- पूर्वानुमान और डेटा प्रबंधन: ICAR-राष्ट्रीय कृषि अर्थशास्त्र और नीति अनुसंधान संस्थान (ICAR-NIAP) को शुष्क कृषि पर पूर्वानुमान अध्ययन का नेतृत्व सौंपने का प्रस्ताव रखा गया।
- लिविंग लैब: अनुसंधान को सीधे नीति और धरातलीय कृषि से जोड़ने के लिए वैज्ञानिक प्रयोग प्रयोगशालाओं (Innovation Grounds) के विस्तार पर बल दिया गया।
2. नई साझेदारियां और समझौते (MoUs)
- वैश्विक और स्थानीय सहयोग: ‘ग्लोबल क्रॉप डायवर्सिटी ट्रस्ट’ के साथ नई साझेदारियों की घोषणा की गई।
- ICRISAT का क्षेत्रीय विस्तार: ICRISAT ने एवियोर लाइफ साइंसेज, NIFTEM, विप्रो लिमिटेड तथा ओडिशा के अंगुल व रायगढ़ जिला प्रशासनों के साथ समझौतों का आदान-प्रदान किया।
3. ISSCA ग्लोबल अवॉर्ड्स 2026 (प्रमुख कृषि नवाचार)
दक्षिण-दक्षिण कृषि एकजुटता (ISSCA) के तहत 34 देशों के 170 नामांकनों में से प्रमुख श्रेणियों में पुरस्कार दिए गए:
- ट्रांसफॉर्मेटिव एक्सीलेंस (मेगा अवॉर्ड):
- ICARDA (लेबनान): ताप-सहनशील गेहूं की किस्मों (TAAT Wheat Compact) के लिए।
- CIMMYT (मैक्सिको): e-Agrology 360 डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए।
- ओडिशा आजीविका मिशन: महिलाओं के नेतृत्व वाली टिकाऊ कृषि और पोषण पहल के लिए।
- प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन व जलवायु लचीलापन: कर्नाटका कृषि विभाग की ‘कृषि भाग्य’ योजना और बिहार सरकार की पारंपरिक ‘आहर-पाइन’ प्रणाली के पुनरुद्धार को पुरस्कृत किया गया।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| आयोजन का नाम | ड्राईलैंड कांग्रेस 2026 (नई दिल्ली) |
| मुख्य घोषणा पत्र | दिल्ली डिक्लेरेशन ऑन ड्राईलैंड्स (3D) |
| केंद्रीय विषय (Theme) | दक्षिण-दक्षिण सहयोग से शुष्क कृषि का रूपांतरण |
| पुरस्कृत भारतीय पारंपरिक जल प्रणाली | आहर-पाइन (बिहार) |
| कर्नाटक की पुरस्कृत कृषि योजना | कृषि भाग्य |
| ICRISAT का मुख्यालय | पटानचेरू, हैदराबाद (तेलंगाना) |
18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: वैश्विक शासन सुधार और भारत का दृष्टिकोण
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएं, द्विपक्षीय और क्षेत्रीय समूह।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, एजेंसियां और मंच (उनकी संरचना, जनादेश), भारत के हित एवं वैश्विक शासन प्रणाली में सुधार।
चर्चा में क्यों?
भारत की अध्यक्षता में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन का विषय “समावेशी वैश्विक शासन और सुदृढ़ीकरण” (Inclusive Global Governance and Strengthening) था। इस अवसर पर भारतीय प्रधानमंत्री ने वैश्विक संस्थाओं में सुधार और ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज को मजबूत करने के लिए 10 प्रमुख प्रस्तावों का ढांचा प्रस्तुत किया।
मुख्य बिंदु: ब्रिक्स @20 और भारत की प्राथमिकताएं
┌────────────────────────────────────────────────────────┐
│ भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के आधार स्तंभ │
├───────────────┬───────────────┬───────────────┬────────┤
│ Resilience │ Innovation │ Cooperation │Sustai- │
│ (लचीलापन) │ (नवाचार) │ (सहयोग) │nability│
│ │ │ │(सततता) │
└───────────────┴───────────────┴───────────────┴────────┘
1. ब्रिक्स संस्थागत निरंतरता तंत्र
- निरंतरता की चुनौती: वार्षिक रूप से बदलने वाली अध्यक्षता के कारण नीतियों की गति धीमी न हो, इसके लिए ट्रोइका आधारित निरन्तरता तंत्र का प्रस्ताव रखा गया।
- डिजिटल रिपॉजिटरी: सभी निर्णयों, समय-सीमाओं (Timelines) और क्रियान्वयन स्थिति के ट्रैकिंग के लिए एक सुरक्षित डिजिटल रिपॉजिटरी की स्थापना का सुझाव दिया गया।
2. ‘विशेषाधिकार के पिरामिड’ से ‘साझेदारी के मंच’ की ओर
- वर्तमान वैश्विक शासन को “विशेषाधिकार का पिरामिड” बताते हुए इसे “साझेदारी के मंच” (Platform of Partnership) में बदलने का आह्वान किया गया।
- इसका उद्देश्य ग्लोबल साउथ को केवल निर्णय मानने वाले (Rule-takers) के स्थान पर नियम बनाने वाले (Rule-shapers) के रूप में स्थापित करना है।
3. वैश्विक शासन सुधार के 3 ‘R’ सिद्धांत
- प्रतिनिधित्व (Representation):
- UNSC सुधार: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार के लिए समयबद्ध और पाठ-आधारित वार्ता (Text-based negotiations) जरूरी है।
- वित्तीय संस्थान: IMF और विश्व बैंक जैसे संगठनों में वोटिंग अधिकार और नेतृत्व वर्तमान आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप होना चाहिए।
- उत्तरदायित्व (Responsiveness):
- वैश्विक समस्याओं पर त्वरित और अंतिम छोर तक प्रभावी (Last-mile impact) समाधान देने पर जोर।
- नाविक आपातकालीन सहायता नेटवर्क (Seafarers Emergency Support Network): वैश्विक व्यापार में लगे नाविकों को संकट के समय चिकित्सा, निकासी और संचार सहायता प्रदान करने हेतु नेटवर्क बनाने का प्रस्ताव।
- नियम-निर्माण (Rule-making):
- AI, साइबर स्पेस, अंतरिक्ष, जैव-प्रौद्योगिकी और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों के नियम-निर्माण में विकासशील देशों की समान भागीदारी।
- विकासशील देशों के युवा राजनयिकों और नीति निर्माताओं के लिए वार्ता कौशल और विधिक प्रशिक्षण कार्यक्रम।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| सम्मेलन | 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (2026) |
| अध्यक्षता देश | भारत (20वीं वर्षगांठ के अवसर पर) |
| थीम/विषय | समावेशी वैश्विक शासन और सुदृढ़ीकरण |
| नई पहल का प्रस्ताव | नाविक आपातकालीन सहायता नेटवर्क |
| संस्थागत सुधार | ट्रोइका आधारित ब्रिक्स निरंतरता तंत्र और सुरक्षित डिजिटल रिपॉजिटरी |
| विशेष संयोग | सम्मेलन का दिन ‘संयुक्त राष्ट्र दक्षिण-दक्षिण सहयोग दिवस’ (12 सितंबर) के साथ मेल खाता है |