यूपीएससी 2026 की तैयारी रणनीति पूरी करें

15 June 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi

15 june 2026 PIB Summary for upsc in hindi। UPSC Prelims, Mains और Interview के लिए महत्वपूर्ण सरकारी योजनाएं, नीतियां, अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं अंतरराष्ट्रीय संबंधों का संक्षिप्त विश्लेषण।। UPSC Prelims, Mains और Interview के लिए महत्वपूर्ण सरकारी योजनाएं, नीतियां, अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं अंतरराष्ट्रीय संबंधों का संक्षिप्त विश्लेषण।

ओरेसुंड' (Oresund) जहाज

चर्चा में क्यों? 

  • समझौता (MoU): भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की अंडरवाटर आर्कियोलॉजी विंग (UAW) और नेशनल म्यूजियम ऑफ डेनमार्क (Njord – सेंटर फॉर मैरीटाइम एंड अंडरवाटर कल्चरल हेरिटेज) के बीच एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

  • उद्देश्य: पुडुचेरी के कारैकाल (Karaikal) तट के पास 1619 ईस्वी में डूबे ऐतिहासिक डेनिश (Danish) जहाज ‘ओरेसुंड’ (Oresund) के अवशेषों का पता लगाना और उनका दस्तावेजीकरण (Documentation) करना।

  • ऐतिहासिक मील का पत्थर: यह अंतर्राष्ट्रीय सहयोग ASI की ‘अंडरवाटर आर्कियोलॉजी विंग’ के इतिहास में किसी विदेशी संगठन के साथ पहला अंतरराष्ट्रीय सहयोगात्मक पुरातात्विक प्रोजेक्ट है।

‘ओरेसुंड’ (Oresund) जहाज का ऐतिहासिक महत्व

  • भारत आने वाला पहला डेनिश जहाज: ‘ओरेसुंड’ समुद्री इतिहास में एक विशिष्ट स्थान रखता है क्योंकि यह भारत पहुंचने वाला पहला ज्ञात डेनिश जहाज था।

  • जलसमाधि (Shipwreck): भारतीय जलक्षेत्र में पहुंचने के कुछ ही समय बाद, वर्ष 1619 ईस्वी में यह कारैकाल के पास दुर्घटनाग्रस्त (Wrecked) हो गया था।

  • ऐतिहासिक प्रासंगिकता: यह जहाजावशेष (Shipwreck) 17वीं शताब्दी की शुरुआत में डेनिश-भारतीय समुद्री संपर्कों, हिंद महासागर में शुरुआती यूरोपीय व्यापारिक गतिविधियों और तत्कालीन नौवहन (Seafaring) के इतिहास को समझने के लिए एक अमूल्य पुरातात्विक स्रोत है।

परियोजना की कार्यप्रणाली और तकनीक

  • गैर-आक्रामक सर्वेक्षण (Non-Invasive Survey): इस परियोजना के तहत समुद्र के भीतर किसी भी प्रकार की तोड़-फोड़ या नुकसान किए बिना उन्नत तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों का उपयोग करके केवल सर्वेक्षण और मैपिंग की जाएगी।

  • सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण: इसका मुख्य उद्देश्य समुद्री पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना ऐतिहासिक अवशेषों की पहचान करना और उनका अध्ययन करना है।

भारत-फ्रांस नवाचार रोडमैप 2030 (India-France Innovation Roadmap 2030)

संदर्भ एवं रणनीतिक अभिसरण (Context & Strategic Convergence)

  • द्विपक्षीय संबंधों का उन्नयन: 17 फरवरी 2026 को भारत और फ्रांस ने अपने संबंधों को “विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी” (Special Global Strategic Partnership) के स्तर पर उन्नत किया।

  • नवाचार वर्ष: दोनों देशों ने संयुक्त रूप से “भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026” का उद्घाटन किया।

  • नीतिगत अभिसरण (Policy Convergence): यह रोडमैप भारत के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन और फ्रांस की ‘फ्रांस 2030’ महत्वाकांक्षा के बीच मजबूत नीतिगत तालमेल को दर्शाता है।

  • मूल सिद्धांत: यह रोडमैप आपसी विश्वास, लोकतांत्रिक मूल्यों, रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) और मानव-केंद्रित नवाचार पर आधारित है।

रोडमैप 2030 के चार मुख्य स्तंभ (Four Core Pillars of the Roadmap)

स्तंभ I: ‘विश्वसनीय एआई’ के लिए साझेदारी (Partnership for ‘Trusted AI’)

यह इस नवाचार साझेदारी का केंद्रीय स्तंभ है, जो फरवरी 2025 के ‘AI पर भारत-फ्रांस घोषणापत्र’ पर आधारित है।

  • सुरक्षित और विश्वसनीय AI प्रणाली: लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकारों के अनुरूप सुरक्षित AI का विकास करना, जो गलत सूचनाओं (Misinformation) और भेदभाव को रोके।

  • ऑनलाइन बाल सुरक्षा (Child Safety Online – सर्वोच्च प्राथमिकता): AI-सक्षम सेवाओं से बच्चों को होने वाले खतरों से बचाने के लिए ‘Privacy-Preserving Age Assurance’ (गोपनीयता-सुरक्षित आयु आश्वासन) और ‘Safety-by-Design’ आर्किटेक्चर विकसित करना।

  • डेटा साझाकरण ढांचा (Data Sharing Framework): भारत के DEPA (Data Empowerment and Protection Architecture) और फ्रांस के ‘हेल्थ डेटा प्लेटफॉर्म’ की पूरक शक्तियों का उपयोग करके सुरक्षित, सहमति-आधारित डेटा प्रवाह सुनिश्चित करना।

स्तंभ II: शैक्षणिक गतिशीलता के माध्यम से जन-जन का जुड़ाव (Academic Mobility & P2P Ties)

  • छात्रों का लक्ष्य: क्षितिज 2047 (Horizon 2047) ढांचे के तहत फ्रांस का लक्ष्य 2030 तक 30,000 भारतीय छात्रों का स्वागत करना है।

  • योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता (Mutual Recognition of Qualifications – MRQ):

    • फ्रांस 2018 में भारत के साथ MRQ समझौता करने वाला पहला देश बना था।

    • अब इस ऊंचे स्तर के ढांचे का विस्तार उभरते प्रौद्योगिकी क्षेत्रों, विनियमित व्यवसायों और दोहरी-डिग्री (Dual-Degree) कार्यक्रमों में किया जाएगा।

स्तंभ III: तकनीकी संप्रभुता और उद्योग-अकादमिक जुड़ाव (Technological Sovereignty & Industry Linkages)

रणनीतिक क्षेत्रों में लचीली और विश्वसनीय आपूर्ति शृंखला (Resilient Supply Chains) बनाने के लिए संस्थागत तंत्र:

  • CEFIPRA: ‘इंडो-फ्रेंच सेंटर फॉर द प्रमोशन ऑफ एडवांस्ड रिसर्च’ रणनीतिक प्रौद्योगिकियों के सह-विकास पर ध्यान केंद्रित करेगा।

  • भारत-फ्रांस नवाचार नेटवर्क (IFIN): दोनों देशों के स्टार्टअप और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को जोड़ने के लिए एक संयुक्त संचालन समिति (Joint Steering Committee) द्वारा शासित उपकरण।

  • विशिष्ट भौतिक पहलें:

    • एरोनॉटिक्स ट्रेनिंग और करियर हेतु भारत-फ्रांस कैंपस: कौशल विकास मंत्रालय (MSDE) के साथ साझेदारी में कानपुर में स्थापित किया जाएगा।

    • इंडिया-फ्रांस इनोकॉन्टेक्स्ट ब्रिज (InnoXchange Bridge): प्रयोगशालाओं, निवेशकों और इनक्यूबेटरों तक पारस्परिक पहुंच प्रदान करने के लिए एक समर्पित ‘अनुसंधान और उद्यमिता कॉरिडोर’।

  • अंतरिक्ष सहयोग (Space Ecosystem): पृथ्वी अवलोकन (Earth Observation) और मानव अंतरिक्ष उड़ान (Human Exploration) में सहयोग बढ़ाना। फ्रांस की Zero-G विशेषज्ञता और भारत के भावी अंतरिक्ष स्टेशन (LEO में) के बीच संयुक्त गतिविधियां शामिल होंगी।

    • नोट: सितंबर 2026 में बेंगलुरु स्पेस एक्सपो (BSX) और पेरिस में अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष शिखर सम्मेलन एक ही सप्ताह में आयोजित होंगे।

स्तंभ IV: वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए अनुसंधान-आधारित समाधान

  • सहमति-आधारित डेटा संरचना: भारत के ICMR (भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद) और फ्रांस के हेल्थ डेटा हब (HDH) के बीच पायलट प्रोजेक्ट का विस्तार।

  • ग्लोबल साउथ को लाभ: इस सुरक्षित डेटा-साझाकरण मॉडल को अन्य क्षेत्रों में स्केल किया जाएगा और इसे ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) के इच्छुक भागीदार देशों के साथ भी साझा किया जाएगा।

15 june 2026 PIB Summary for upsc in hindi

WPI की नई शृंखला और उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI)

संदर्भ एवं मुख्य घोषणा (Context & Key Announcement)

  • जारीकर्ता: आर्थिक सलाहकार कार्यालय, उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय)।

  • नया आधार वर्ष (Base Year): वर्तमान आधार वर्ष 2011-12 को बदलकर अब 2022-23 कर दिया गया है।

  • नए सूचकांकों की शुरुआत: WPI के साथ-साथ सरकार ने तीन नए सूचकांक जारी किए हैं:

    1. आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (OPPI) – उत्पादक मूल्य सूचकांक (आउटपुट)

    2. ट्रायल इनपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (IPPI) – केवल विनिर्माण (Manufacturing) क्षेत्र के लिए प्रायोगिक आधार पर।

    3. सर्विस प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (Service PPI) – प्रथम चरण में 7 प्रमुख सेवाओं के लिए।

WPI से PPI की ओर संक्रमण (Transition from WPI to PPI)

  • वैश्विक सर्वोत्तम अभ्यास: थोक मूल्य सूचकांक (WPI) से उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) की ओर बढ़ना अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की सिफारिशों और उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के मानकों के अनुरूप है।

  • समय-सीमा: चूंकि WPI का उपयोग व्यावसायिक अनुबंधों (Price Escalation Clauses) में व्यापक रूप से होता है, इसलिए WPI को अगले 5 वर्षों तक PPI के साथ जारी रखा जाएगा और उसके बाद पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा ताकि उपयोगकर्ता सुगमता से PPI पर स्विच कर सकें।

  • महत्व: इनपुट और आउटपुट दोनों PPI की उपलब्धता से यह समझने में आसानी होगी कि उत्पादकों को इनपुट (कच्चे माल) पर मिलने वाली मुद्रास्फीति का कितना हिस्सा अंतिम आउटपुट (उत्पाद) पर स्थानांतरित (Pass on) किया जा रहा है।

प्रथम चरण में शामिल 7 सेवाएं (Service PPI)

सेवा क्षेत्र की मुद्रास्फीति को ट्रैक करने के लिए त्रैमासिक (Quarterly) आधार पर 7 सेवाओं के लिए PPI जारी किया गया है:

  1. बैंकिंग (Banking)

  2. प्रतिभूति लेनदेन (Securities Transaction)

  3. बीमा (Insurance)

  4. पेंशन फंड का प्रबंधन (Management of Pension Funds)

  5. रेलवे (Railways)

  6. हवाई यात्रा – यात्री (Air – Passenger)

  7. दूरसंचार (Telecom)

 नई WPI शृंखला (आधार वर्ष 2022-23) की मुख्य विशेषताएं

विशेषता / मानकपुरानी शृंखला (2011-12)नई शृंखला (2022-23)आर्थिक महत्व / प्रभाव
वस्तुओं की संख्या (Basket Size)697 वस्तुएं957 वस्तुएंअर्थव्यवस्था के व्यापक और आधुनिक स्वरूप का प्रतिनिधित्व।
ऊर्जा का नया स्रोतशामिल नहींसौर, पवन और परमाणु बिजली शामिलहरित ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) को प्राथमिकता।
ऊर्जा बास्केट का पुनर्गठन‘क्रूड पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस’ प्राथमिक वस्तुओं में था।इसे ‘ईंधन और बिजली’ (Fuel & Power) समूह में स्थानांतरित किया गया।ऊर्जा की कीमतों को ट्रैक करने के लिए एक सुसंगत और एकीकृत संरचना।
भारांश निर्धारण (Weights) की विधिनेट ट्रेडेड वैल्यू (GVO + आयात – निर्यात)सकल उत्पादन मूल्य (Gross Value of Output – GVO)यह व्यापार प्रवाह के बजाय घरेलू उत्पादन को सटीक रूप से दर्शाता है।
लापता डेटा का भराव (Missing Price Imputation)कैरी फॉरवर्ड विधि (Carry Forward Method)लक्षित माध्य आरोपण (Targeted Mean Imputation)डेटा की गुणवत्ता और सांख्यिकीय सटीकता में सुधार।
गणना पद्धतिदीर्घकालिक सूत्रीकरण (Long-term formulation)अल्पकालिक सूत्रीकरण विधि (Short-term formulation)प्राथमिक स्तर के सूचकांकों की गणना अधिक सटीक होगी।

लिंकिंग फैक्टर (Linking Factor): पुरानी और नई शृंखला को जोड़ने के लिए वित्तीय वर्ष 2024-25 के बारह महीनों के सूचकांकों के ज्यामितीय माध्य (Geometric Mean) के अनुपात का उपयोग किया गया है।

Value Addition

  • WPI बनाम PPI: WPI में व्यापार मार्जिन और कर (टैक्स) शामिल हो सकते हैं क्योंकि यह थोक स्तर पर होता है, जबकि PPI केवल उत्पादक के स्तर पर (फैक्ट्री गेट पर) वस्तुओं और सेवाओं की कीमत में बदलाव को मापता है। यह वास्तविक उत्पादन लागत को दर्शाता है।

  • नीति निर्माण में सहायक: सेवा क्षेत्र (जो भारत की जीडीपी में 50% से अधिक योगदान देता है) के लिए PPI की शुरुआत से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को मौद्रिक नीति (Monetary Policy) तैयार करने में अधिक सटीक डेटा मिलेगा।

लंबी दूरी की मारक क्षमता वाली क्रूज मिसाइल (LRLACM)

संदर्भ एवं परीक्षण विवरण (Context & Test Details)

  • क्या है?: लंबी दूरी की भूमि पर हमला करने वाली क्रूज मिसाइल (Long Range Land Attack Cruise Missile – LRLACM)।

  • परीक्षण तिथि: 15 जून 2026।

  • परीक्षण स्थल: डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप (ओडिशा तट के पास)।

  • डेटा ट्रैकिंग: एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR), चांदीपुर द्वारा तैनात विभिन्न ट्रैकिंग उपकरणों के माध्यम से सभी परिचालन उद्देश्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त किया गया।

विकास एवं तकनीकी विशेषताएँ (Development & Key Features)

  • पूर्णतः स्वदेशी: मिसाइल और इसके सभी उप-प्रणालियाँ (Sub-systems) विभिन्न डीआरडीओ (DRDO) प्रयोगशालाओं और भारतीय औद्योगिक भागीदारों द्वारा घरेलू स्तर पर विकसित की गई हैं।

  • नोडल प्रयोगशाला: वैमानिकी विकास प्रतिष्ठान (Aeronautical Development Establishment – ADE), बेंगलुरु इस परियोजना की नोडल लैब है।

  • उपयोगकर्ता (Users): यह मिसाइल भारतीय नौसेना (Indian Navy) और भारतीय वायु सेना (Indian Air Force) दोनों की परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करेगी (परीक्षण के दौरान दोनों सेनाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे)।

युवा संगम चरण VI (Yuva Sangam Phase VI)

संदर्भ एवं हालिया घटनाक्रम (Context & Recent Event)

  • चर्चा में क्यों?: युवा संगम चरण VI के तहत कर्नाटक के एक प्रतिनिधिमंडल ने राजस्थान की शैक्षणिक और सांस्कृतिक यात्रा की।

  • मेजबान एवं नोडल संस्थान:

    • कर्नाटक (भेजने वाला संस्थान): भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) धारवाड़

    • राजस्थान (मेजबान संस्थान): मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MNIT) जयपुर

  • मुख्य बातचीत: प्रतिनिधिमंडल ने राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ किसानराव बागड़े से मुलाकात की, जिन्होंने युवाओं को राष्ट्रीय एकता के राजदूत के रूप में कार्य करने के लिए प्रेरित किया।

‘युवा संगम’ पहल क्या है? (What is Yuva Sangam?)

  • नोडल मंत्रालय: उच्च शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education), भारत सरकार।

  • मूल कार्यक्रम: यह ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ (Ek Bharat Shreshtha Bharat) कार्यक्रम के तहत एक अनूठी पहल है।

  • मुख्य उद्देश्य: देश के युवाओं के बीच राष्ट्रीय एकीकरण (National Integration) को बढ़ावा देना और विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लोगों के बीच आपसी संपर्क (People-to-People Connections) को मजबूत करना।

  • दायरा: इसमें भारत के 22 युग्मित (Paired) राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के युवा भाग ले रहे हैं।

युवा संगम के बहुआयामी स्तंभ (Multi-Dimensional Pillars)

यह कार्यक्रम केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके व्यापक आयाम हैं:

  • सांस्कृतिक आदान-प्रदान (Paryatan & Sanskriti): लोक कलाओं, पारंपरिक शिल्पों और स्थानीय कलाकारों के माध्यम से देश की ऐतिहासिक विरासत से रूबरू होना।

  • शैक्षणिक और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र (Vikas & Gyan): मेजबान राज्यों के शीर्ष तकनीकी संस्थानों (जैसे MNIT जयपुर) की प्रयोगशालाओं, अनुसंधान सुविधाओं और स्टार्टअप/उद्यमिता गतिविधियों का दौरा करना।

  • अनुभवात्मक शिक्षा (Experiential Learning): बुनियादी ढांचे (Infrastructural Landmarks), सतत विकास प्रथाओं (Sustainable Practices), शहरी विकास और सार्वजनिक प्रशासन के क्षेत्र में राज्यों की उपलब्धियों को समझना।

पंचायत सुधारों और नवाचार के 12 साल

क्षमता निर्माण और अवसंरचना (Capacity Building & Infrastructure)

  • राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA): 2018-19 में शुरू, 2022-23 से संशोधित (Revamped)।

  • प्रशिक्षण: 2.70 लाख से अधिक त्रि-स्तरीय PRIs के 4.10 करोड़ जनप्रतिनिधियों/कर्मचारियों का संचयी (Cumulative) प्रशिक्षण।

  • महिला सशक्तिकरण: FY 2022-23 से FY 2025-26 के बीच 33.55 लाख से अधिक निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों (EWRs) को प्रशिक्षण।

  • अवसंरचना विकास: RGSA के तहत 25,100 से अधिक ग्राम पंचायत भवनों और 61,000 से अधिक कंप्यूटरों की आपूर्ति।

  • ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP): 2.55 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों में सहभागी ग्रामीण नियोजन (Participatory Planning) संस्थागत।

डिजिटल गवर्नेंस और वित्तीय सुधार (Digital Governance & Fiscal Reforms)

  • स्वामित्व (SVAMITVA) योजना (शुरुआत: 2020): ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों का ड्रोन-आधारित सर्वेक्षण। 10 जून 2026 तक 1.92 लाख गांवों में 3.18 करोड़ संपत्ति कार्ड (Property Cards) जारी।

    • लाभ: संपत्ति विवादों में कमी, संस्थागत ऋण (Institutional Credit) तक पहुंच और पंचायतों की राजस्व क्षमता में वृद्धि।

  • e-GramSwaraj प्लेटफ़ॉर्म: योजना, बजट, लेखांकन और वित्तीय प्रबंधन का डिजिटलीकरण। Public Financial Management System (PFMS) के साथ एकीकरण से ₹3.16 लाख करोड़ से अधिक के ऑनलाइन लेनदेन।

  • मेरी पंचायत ऐप (Meri Panchayat App): पंचायत कार्यों और बैठकों की जानकारी के लिए नागरिक-केंद्रित ऐप (1 करोड़ से अधिक डाउनलोड)।

  • वित्तीय हस्तांतरण (Fiscal Devolution):

    • 15वां वित्त आयोग (2020-26): ₹2.82 लाख करोड़ जारी (कुल आवंटन का 94.98% – किसी भी वित्त आयोग का उच्चतम प्रतिशत)।

    • 16वां वित्त आयोग (2026-27 से 2030-31): ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए ₹4,35,236 करोड़ की सिफारिश (~84% की भारी वृद्धि)।

  • राजस्व संग्रहण: पंचायतों के स्वयं के राजस्व (Own Source Revenue – OSR) को मजबूत करने के लिए समर्थ (SAMARTH) पंचायत पोर्टल और आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम की शुरुआत।

एआई (AI) और आधुनिक तकनीक का अनुप्रयोग

  • पंचायत उन्नति सूचकांक (Panchayat Advancement Index – PAI): अप्रैल 2025 में लागू। 9 Localised SDGs (LSDGs) थीम के आधार पर 2.59 लाख पंचायतों की रैंकिंग।

    • पुरस्कार: National Awards for e-Governance (NAeG) 2026 में गोल्ड मेडल

  • सभासार (SabhaSaar) प्लेटफ़ॉर्म (अगस्त 2025): ग्राम सभा की कार्यवाही के मिनट्स (Minutes of Meetings) 23 भारतीय भाषाओं में स्वचालित रूप से तैयार करने वाला AI-सक्षम प्लेटफ़ॉर्म। 1.35 लाख से अधिक पंचायतों द्वारा उपयोग।

  • मौसम पूर्वानुमान (Weather Forecasting): अक्टूबर 2024 में IMD और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सहयोग से पहली बार ग्राम पंचायत स्तर पर प्रति घंटा मौसम पूर्वानुमान की शुरुआत।

समावेशी विकास: जनजातीय, महिला एवं युवा सशक्तिकरण

  • PESA (Panchayats Extension to Scheduled Areas Act, 1996) सुदृढ़ीकरण: जनजातीय भाषाओं में 7 प्रशिक्षण नियमावली (Manuals), PESA-GPDP पोर्टल, Centre of Excellence, और देश का पहला PESA रैंकिंग ढांचा (Ranking Framework) लॉन्च।

  • सशक्त पंचायत-नेत्री अभियान (2025): निर्वाचित महिलाओं के नेतृत्व क्षमता का विकास। राज्यों/UTs में 744 ‘मॉडल महिला अनुकूल ग्राम पंचायतें’ (Model Women Friendly GPs) चिन्हित।

  • निर्भय रहो अभियान: स्थानीय शासन में महिलाओं की सुरक्षा, नेतृत्व और भागीदारी बढ़ाने हेतु लक्षित अभियान।

  • मॉडल यूथ ग्राम सभा (MYGS) (अक्टूबर 2025): नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप स्कूलों में कृत्रिम (Simulated) ग्राम सभा का आयोजन। 2025 में 819 आवासीय विद्यालयों (JNVs, EMRS) के 29,000 से अधिक छात्र शामिल।

निष्कर्ष: यह सुधार 3D दृष्टिकोण को प्रदर्शित करते हैं — Decentralization (विकेंद्रीकरण), Digitalization (डिजिटलीकरण), और Democratization (लोकतांत्रीकरण), जो ‘विकसित भारत’ के जमीनी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अनिवार्य हैं।

भारत का विज्ञान और प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र

जैव-अर्थव्यवस्था (Bioeconomy) और स्वास्थ्य

  • बाजार का आकार: 2014 में $10 बिलियन से बढ़कर वर्तमान में $190 बिलियन से अधिक हो गया है।

  • लक्ष्य: वर्ष 2030 तक $300 बिलियन तक पहुँचने का लक्ष्य।

  • नीतिगत ढांचा: BioE3 (Biotechnology for Economy, Employment and Environment) फ्रेमवर्क द्वारा समर्थित।

  • प्रमुख प्रगति: स्वदेशी जीनोमिक्स, डायग्नोस्टिक्स, नेक्स्ट-जेन एंटीबायोटिक्स और किफायती CAR-T सेल थेरेपी का विकास।

  • वैज्ञानिक अनुसंधान: Anusandhan National Research Foundation (ANRF) और अनुसंधान विकास एवं नवाचार (RDI) फंड की स्थापना।

अंतरिक्ष क्षेत्र (Space Sector)

  • स्टार्टअप्स की संख्या: सिंगल डिजिट (2014 से पहले) से बढ़कर 400 से अधिक स्पेस स्टार्टअप्स

  • अर्थव्यवस्था का आकार: $8 बिलियन की स्पेस इकोनॉमी के $45 बिलियन तक पहुँचने का अनुमान।

  • ऐतिहासिक उपलब्धि: चंद्रयान-3 के माध्यम से चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव (Lunar South Pole) के पास उतरने वाला दुनिया का पहला देश बना।

  • भविष्य के लक्ष्य:

    • 2035: भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Bharatiya Antariksh Station) की स्थापना।

    • 2040: चंद्रमा पर मानव (भारतीय) लैंडिंग का लक्ष्य।

मौसम विज्ञान और जलवायु सेवाएं (Ministry of Earth Sciences)

  • वेदर रडार नेटवर्क: 2014 में केवल 17 रडार थे, जो अब बढ़कर ~50 ऑपरेशनल रडार हो गए हैं।

  • मिशन मौसम (Mission Mausam): इसके तहत अगले चरण में 50 अतिरिक्त रडार लगाने की योजना है।

  • पूर्वानुमान का विस्तार: मौसम पूर्वानुमान कवरेज 300 शहरों से बढ़कर 1,700 स्थानों तक पहुँचा।

  • तनाव न्यूनीकरण: Nowcast सेवा के माध्यम से अत्यधिक स्थानीयकृत (Highly Localised) अल्पकालिक पूर्वानुमान।

  • डीप ओशन मिशन (Deep Ocean Mission): गहरे समुद्र की स्वदेशी तकनीकों जैसे Matsya 6000 (मानवयुक्त पनडुब्बी) और Varaha (माइनिंग सिस्टम) का विकास।

CSIR और औद्योगिक नवाचार

  • अरोमा मिशन (Aroma Mission): विशेष रूप से हिमालयी क्षेत्रों में उच्च मूल्य वाली कृषि और लेवेंडर की खेती के माध्यम से किसानों की आजीविका में सुधार।

  • स्टील स्लैग रोड टेक्नोलॉजी: औद्योगिक कचरे (Steel Slag) को टिकाऊ और कम लागत वाली सड़कों में बदलना। (सर्कुलर इकोनॉमी का उदाहरण)

रणनीतिक और अन्य राष्ट्रीय मिशन

  • परमाणु ऊर्जा (Nuclear Energy): निवेश और नवाचार को गति देने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी (Private Participation) की अनुमति दी गई।

  • राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (National Quantum Mission): क्वांटम कंप्यूटिंग और संचार में स्वदेशी क्षमता विकास।

  • राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) और राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति (National Geospatial Policy): डेटा-संचालित शासन और अनुसंधान को बढ़ावा देना।

निष्कर्ष: भारत का विज्ञान और प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र अब ‘प्रयोगशालाओं से आम नागरिकों के जीवन’ (Laboratories to Lives) की ओर स्थानांतरित हो चुका है, जो विकसित भारत 2047 के विजन को प्राप्त करने के लिए एक मुख्य स्तंभ है।

आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (Periodic Labour Force Survey - PLFS) मई, 2026

सर्वेक्षण पृष्ठभूमि एवं कार्यप्रणाली (Methodology)

  • जारीकर्ता निकाय: राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO), सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI)।

  • बदलाव (जनवरी 2025 से): अब देश में श्रम बल संकेतकों के मासिक (Monthly) और त्रैमासिक (Quarterly) अनुमान प्रदान करने के लिए कार्यप्रणाली में संशोधन किया गया है। (मई 2026 का बुलेटिन इस श्रृंखला का 14वां बुलेटिन है)।

  • दृष्टिकोण (Approach): यह डेटा वर्तमान साप्ताहिक स्थिति (Current Weekly Status – CWS) पर आधारित है, जिसमें सर्वेक्षण की तारीख से ठीक पिछले 7 दिनों की संदर्भ अवधि (Reference Period) को आधार माना जाता है।

  • आयु वर्ग: यह डेटा मुख्य रूप से 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए है।

मुख्य श्रम बाजार संकेतक (मई 2026 के प्रमुख आंकड़े)

क. श्रम बल भागीदारी दर (LFPR – Labour Force Participation Rate)

यह दर अर्थव्यवस्था में सक्रिय रूप से काम कर रहे या काम की तलाश कर रहे लोगों की हिस्सेदारी दर्शाती है।

  • कुल (Overall) LFPR: मई 2026 में 54.4% दर्ज की गई (अप्रैल 2026 में 55.0% और मई 2025 में 54.8% थी) — इसमें वार्षिक और मासिक दोनों स्तरों पर गिरावट देखी गई है।

  • क्षेत्रीय वितरण: ग्रामीण क्षेत्रों में LFPR 56.6% और शहरी क्षेत्रों में 49.8% रही।

  • महिला LFPR (Female LFPR):

    • कुल महिला LFPR 32.8% रही (मई 2025 के 33.2% से कम)।

    • शहरी महिला LFPR पिछले महीने के समान ही 24.8% पर स्थिर रही, लेकिन पिछले वर्ष की तुलना में 0.5% की गिरावट दर्ज की गई।

    • ग्रामीण महिला LFPR 36.7% रही।

ख. श्रमिक जनसंख्या अनुपात (WPR – Worker Population Ratio)

यह कुल जनसंख्या में नियोजित (काम कर रहे) व्यक्तियों का प्रतिशत है।

  • कुल (Overall) WPR: मई 2026 में 51.4% रहा (अप्रैल 2026 में 52.2% और मई 2025 में 51.7% था)।

  • क्षेत्रीय अंतर: ग्रामीण WPR 53.8% रहा (अप्रैल में 54.9% से कम), जबकि शहरी WPR 46.6% पर मोटे तौर पर स्थिर रहा (अप्रैल में 46.8% था)।

  • मई 2025 की तुलना में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में 0.3% की मामूली गिरावट आई है।

ग. बेरोजगारी दर (UR – Unemployment Rate)

यह श्रम बल (Labour Force) में शामिल उन लोगों का प्रतिशत है जो काम की तलाश में हैं पर उन्हें काम नहीं मिला।

  • कुल (Overall) UR: मई 2026 में 5.5% अनुमानित।

  • शहरी बेरोजगारी में सुधार: शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर घटकर 6.4% पर आ गई, जो कि एक साल का सबसे निचला स्तर (One-year low) है (अप्रैल 2026 में 6.6% और मई 2025 में 6.9% थी)।

  • शहरी लिंग-वार अंतर: शहरी महिलाओं की UR घटकर 8.2% हो गई, जबकि शहरी पुरुषों की UR 5.9% पर स्थिर बनी रही।

  • ग्रामीण बेरोजगारी में वृद्धि: ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर अप्रैल के 4.6% से बढ़कर 5.1% हो गई है।

राष्ट्रीय खेल बोर्ड का गठन

सर्च-कम-सिलेक्शन कमेटी (खोज-सह-चयन समिति) का गठन

  • संवैधानिक/विधिक आधार: यह समिति राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम, 2025 और इसके तहत बने राष्ट्रीय खेल बोर्ड (खोज-सह-चयन समिति) नियम, 2026 के अंतर्गत गठित की गई है।

  • समिति का मुख्य कार्य: राष्ट्रीय खेल बोर्ड (National Sports Board) के अध्यक्ष (Chairperson) और दो सदस्यों के पदों के लिए योग्य नामों के पैनल की सिफारिश करना।

  • योग्यता मानदंड: समिति लोक प्रशासन, खेल शासन (Sports Governance), खेल कानून (Sports Law) और संबंधित क्षेत्रों का व्यावहारिक अनुभव और सत्यनिष्ठा रखने वाले व्यक्तियों के नामों की सिफारिश करेगी।

समिति की संरचना (5-सदस्यीय निकाय)

यह एक उच्च स्तरीय 5-सदस्यीय समिति है, जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ दिग्गज खेल हस्तियों को शामिल किया गया है:

पद / भूमिकानाम / पदनामविशेषता / संगठन
अध्यक्ष (Chairperson)डॉ. टी.वी. सोमनाथनकैबिनेट सचिव (Cabinet Secretary)
सदस्यश्री हरि रंजन रावसचिव, खेल मंत्रालय (Ministry of Sports)
सदस्यलेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) हरपाल सिंहभारतीय ओलंपिक संघ (IOA) / खेल प्रशासक
सदस्य (खेल पुरस्कार विजेता)श्री गगन नारंगप्रख्यात राष्ट्रीय खेल पुरस्कार विजेता (निशानेबाजी)
सदस्य (खेल पुरस्कार विजेता)सुश्री एन. कुंजारानी देवीप्रख्यात राष्ट्रीय खेल पुरस्कार विजेता (भारोत्तोलन)

राष्ट्रीय खेल बोर्ड (National Sports Board) की भूमिका

समिति द्वारा चुने जाने वाले इस बोर्ड के पास खेल प्रशासन से जुड़ी महत्वपूर्ण शक्तियां होंगी:

  • केंद्रीय प्राधिकरण: यह राष्ट्रीय खेल निकायों (National Sports Bodies) को आधिकारिक बोर्ड मान्यता (Board Recognition) देने के लिए जिम्मेदार शीर्ष केंद्रीय प्राधिकरण होगा।

  • मानकों का प्रवर्तन: देश के खेल संघों में सुशासन (Governance), वित्तीय पारदर्शिता और नैतिक मानकों (Ethical Standards) का अनुपालन सुनिश्चित करना इसकी मुख्य जिम्मेदारी होगी।

भारत की आयुर्वेद ज्ञान विरासत

चर्चा में क्यों? (Context)

  • आयोजन: उडुपी (कर्नाटक) में तिगलारी (Tigalari) और पुरानी कन्नड़ (Old Kannada) लिपियों में लिखी गई आयुर्वेद पांडुलिपियों (Manuscripts) के लिप्यंतरण (Transliteration/दूसरी लिपि में ढालने) के लिए एक 15-दिवसीय क्षमता-निर्माण कार्यशाला का उद्घाटन किया गया है।

  • आयोजक: यह पहल संयुक्त रूप से केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS – आयुष मंत्रालय) और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (CSU – शिक्षा मंत्रालय) द्वारा ‘श्री वादिराज रिसर्च फाउंडेशन’ के सहयोग से संचालित की जा रही है।

  • उद्देश्य: युवा आयुर्वेद और संस्कृत विद्वानों को प्राचीन स्थानीय लिपियों को पढ़ने, समझने और उन्हें आधुनिक प्राप्य लिपियों में लिप्यंतरित करने के लिए प्रशिक्षित करना, ताकि अप्रकाशित दुर्लभ आयुर्वेद ग्रंथों को प्रकाशित किया जा सके।

महत्वपूर्ण लिपियाँ और क्षेत्र  

कार्यशाला का मुख्य फोकस उन लिपियों पर है जो मुख्य रूप से कर्नाटक के तटीय क्षेत्रों में पाई जाती हैं:

  • तिगलारी लिपि (Tigalari Script): यह दक्षिण भारत की एक प्राचीन लिपि है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से तटीय कर्नाटक (तुलु नाडु) और केरल के कुछ हिस्सों में संस्कृत और तुलु (Tulu) भाषा लिखने के लिए किया जाता था। यह ग्रंथ लिपि (Grantha Script) से काफी मिलती-जुलती है।

  • पुरानी कन्नड़ (Old Kannada/Halegannada): यह कन्नड़ भाषा का प्राचीन रूप है। इसमें लिखे गए आयुर्वेद के कई चिकित्सा ग्रंथ आज भी अप्रकाशित और असुरक्षित पड़े हैं।

पूर्व में आयोजित ऐसी अन्य कार्यशालाएं:

यह इस श्रृंखला की तीसरी कार्यशाला है। इससे पहले दो अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रीय लिपियों पर काम किया जा चुका है:

  1. पुरी (ओडिशा): यहाँ करणी (Karani) और देवनागरी लिपियों पर ध्यान केंद्रित किया गया था।

  2. गुरुवायूर (केरल): यहाँ वट्टेझुथु (Vattezhuthu) और मलयालम लिपियों में लिखित दस्तावेजों पर कार्य किया गया था।

सरकारी योजनाएं और संबद्ध संस्थान

  • ज्ञान भारतम मिशन (Gyan Bharatam Mission): महानिदेशक (CCRAS) के अनुसार, यह कार्यशाला भारत सरकार के ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत देश की समृद्ध ज्ञान परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन के प्रयासों का एक हिस्सा है।

  • भारतीय ज्ञान प्रणाली (Indian Knowledge Systems – IKS): शिक्षा मंत्रालय के तहत यह प्रभाग भारत के पारंपरिक ज्ञान (विज्ञान, कला, चिकित्सा) को आधुनिक अनुसंधान से जोड़ने का कार्य कर रहा है।

ज्ञान भारतम मिशन (Gyan Bharatam Mission)

  • नोडल मंत्रालय: संस्कृति मंत्रालय (Ministry of Culture)।

  • मूल उद्देश्य: भारत की प्राचीन हस्तलिखित ज्ञान विरासत (पांडुलिपियों) का सर्वेक्षण, संरक्षण, दस्तावेजीकरण और डिजिटलीकरण करना।

  • लक्ष्य: विश्वविद्यालयों, मठों, संग्रहालयों और निजी संग्रहों में बिखरी 1 करोड़ से अधिक पांडुलिपियों को कवर करना।

  • प्रमुख घटक:

    • इसके तहत एक राष्ट्रीय डिजिटल भंडार (National Digital Repository) का निर्माण किया जा रहा है।

    • इसमें कला, विज्ञान, आयुर्वेद, गणित और साहित्य से जुड़ी प्राचीन लिपियों/ग्रंथों को संग्रहीत किया जाएगा।

  • कार्यान्वयन एजेंसी: इस मिशन को गति देने के लिए राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन (NMM) को सुदृढ़ किया जा रहा है।

  • तकनीक का अनुप्रयोग: पांडुलिपियों के लिप्यंतरण और अनुवाद के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग।

भाषिणी फॉर सेवा/संचालन - एक भाषिणी सहयोगी कार्यक्रम

चर्चा में क्यों? 

  • समझौता (MoU): डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन (DIBD) और गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) ने एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

  • कार्यक्रम का नाम: यह समझौता “भाषिणी फॉर सेवा/संचालन – एक भाषिणी सहयोगी कार्यक्रम” के तहत किया गया है।

  • मुख्य उद्देश्य: भारत के राष्ट्रीय सार्वजनिक खरीद पोर्टल (GeM) पर 22 आधिकारिक भारतीय भाषाओं में एआई-पावर्ड (AI-powered) बहुभाषी पहुंच प्रदान करना।

शामिल प्रमुख निकाय  

निकाय / पोर्टलसंबद्ध मंत्रालयमूल कार्य / प्रकृति
DIBD (भाषिणी)इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)एआई-संचालित बहुभाषी डिजिटल समावेशन और भाषा प्रौद्योगिकी के लिए राष्ट्रीय पहल।
GeM (गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस)वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय (MoI&C)सरकारी विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा की जाने वाली ऑनलाइन सार्वजनिक खरीद का राष्ट्रीय पोर्टल।

तकनीकी एकीकरण और घटक

इस सहयोग के तहत GeM पोर्टल पर भाषिणी के निम्नलिखित एआई-संचालित टूल्स और पहलों को लागू किया जाएगा:

  • वॉयस-फर्स्ट तकनीक (Voice-First Technology): बिना टाइप किए, केवल बोलकर पोर्टल का उपयोग करने की सुविधा (विशेषकर ग्रामीण उद्यमियों के लिए)।

  • प्रमुख भाषिणी पहल: पोर्टल के सुचारू संचालन के लिए भाषिणी उद्यत (Udyat), मित्र (Mitra), ऐपमित्र (Appmitra), सहयोगी (Sahyogi), और प्रवक्ता (Pravakta) का एकीकरण किया जाएगा।

  • डेटा संकलन (Bhashadaan): ‘भाषादान’ पहल के माध्यम से सार्वजनिक खरीद से संबंधित भाषाई डेटासेट और शब्दावली का संकलन किया जाएगा ताकि एआई मॉडल को अधिक सटीक बनाया जा सके।

इस पहल के लाभ और रणनीतिक महत्व

  • व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business – EoDB): इसके माध्यम से देश के दूर-दराज के क्षेत्रों में काम करने वाले MSMEs, स्टार्टअप्स और महिला उद्यमियों के लिए अपनी स्थानीय भाषा में सरकारी निविदाओं (Tenders) में भाग लेना आसान होगा।

  • भाषाई बाधा का अंत: अब तक अंग्रेजी या हिंदी की समझ न होने के कारण कई स्थानीय व्यवसाय सरकारी खरीद प्रक्रिया से बाहर रह जाते थे, यह पहल उस अंतर को पाटेगी।

  • पारदर्शिता और समावेशन: डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) को अधिक न्यायसंगत और समावेशी बनाकर देश की ‘स्वदेशी’ अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

अनुसूचित जाति (SC) छात्रों के लिए 'टॉप क्लास एजुकेशन स्कीम'

  • नोडल मंत्रालय: सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (Ministry of Social Justice and Empowerment), भारत सरकार।

  • मूल उद्देश्य: मेधावी अनुसूचित जाति (SC) के छात्रों को देश के प्रतिष्ठित और राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना।

  • पात्रता मानदंड (Income Ceiling): इस योजना का लाभ उठाने के लिए छात्र के परिवार की कुल वार्षिक आय 8 लाख रुपये तक या उससे कम होनी चाहिए।

  • कवरेज/सहायता का स्वरूप: यह एक पूर्णतः वित्त पोषित (Fully Funded) योजना है, जिसके तहत निम्नलिखित खर्च कवर किए जाते हैं:

    • ट्यूशन फीस (Tuition Fees)

    • रहने का खर्च (Living Expenses)

    • किताबें और कंप्यूटर/लैपटॉप (Books & Digital Equipments)

    • अन्य शैक्षणिक आवश्यकताएं।

योजना का बढ़ता प्रभाव और प्रगति (Statistical Progress)

यह योजना वर्ष 2007-08 में अपनी स्थापना के बाद से अनुसूचित जाति के छात्रों के बीच एक मजबूत “आकांक्षा और उपलब्धि की संस्कृति” विकसित करने में सफल रही है:

  • लाभार्थियों की संख्या में वृद्धि: वर्ष 2007-08 में समर्थित छात्रों की संख्या मात्र 195 थी, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 4,742 हो गई है।

  • वित्तीय आवंटन में वृद्धि: इसी अवधि (2007-08 से 2025-26) के दौरान योजना पर वार्षिक व्यय ₹2.17 करोड़ से बढ़कर ₹117.19 करोड़ हो गया है।

  • शामिल प्रमुख संस्थान: IITs, NITs, IIITs, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (NLUs), राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (NID), और IIMs जैसे देश के शीर्ष संस्थान।

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