2 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत राष्ट्रीय फार्मेसी आयोग (NPC) विधेयक, 2026 का नया संशोधित मसौदा पेश किया गया है, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी से ‘गगन’ (GAGAN) प्रणाली, पूर्वोत्तर भारत के कृषि विकास से ‘अरोमा मिशन और नागालैंड’, तथा देश की आंतरिक सुरक्षा व जनसांख्यिकी से ‘जनसांख्यिकीय परिवर्तनों पर उच्च स्तरीय समिति’ को शामिल किया गया है। यह लेख पूरी तरह से आपकी प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के प्रासंगिक सिलेबस के अनुरूप, बिना किसी अतिरिक्त जटिलता के, सीधे मेंटर-प्रारूप में तैयार किया गया है
राष्ट्रीय फार्मेसी आयोग विधेयक, 2026 (संशोधित मसौदा)
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय फार्मेसी आयोग विधेयक, 2026, सरकारी नीतियां और नियामक संस्थाएं।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय; महत्वपूर्ण वैधानिक, नियामक और विभिन्न अर्ध-न्यायिक निकाय।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
1 जुलाई 2026 को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सार्वजनिक परामर्श प्रक्रिया के दौरान प्राप्त सुझावों की गहन समीक्षा करने के बाद ‘राष्ट्रीय फार्मेसी आयोग (NPC) विधेयक, 2026′ का एक नया संशोधित मसौदा आधिकारिक तौर पर जारी किया है। सरकार ने इस प्रस्तावित कानून को अधिक समावेशी और समृद्ध बनाने के उद्देश्य से 31 जुलाई 2026 तक देश के आम नागरिकों और सभी संबंधित हितधारकों (Stakeholders) से ईमेल या पोस्ट के माध्यम से उनके अंतिम विचार और टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।
विधेयक के मुख्य उद्देश्य और संरचनात्मक सुधार
- फार्मेसी अधिनियम, 1948 का निरसन: यह नया कानून दशकों पुराने और पारंपरिक फार्मेसी अधिनियम, 1948 को पूरी तरह से निरस्त (Repeal) कर देगा, जिससे पुरानी नियामक बाधाएं दूर होंगी।
- भारतीय फार्मेसी परिषद (PCI) का प्रतिस्थापन: वर्तमान नियामक संस्था ‘फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया’ (PCI) को समाप्त कर दिया जाएगा और इसकी जगह एक नई, अत्याधुनिक और पारदर्शी संस्था ‘राष्ट्रीय फार्मेसी आयोग’ (National Pharmacy Commission – NPC) की स्थापना की जाएगी।
- वैश्विक मानकों के अनुरूप शिक्षा: इस आयोग के गठन का मूल उद्देश्य भारत में फार्मेसी शिक्षा के स्तर को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अपग्रेड करना है ताकि भारतीय फार्मासिस्ट वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकें।
- जवाबदेही और पारदर्शिता: नई व्यवस्था के तहत फार्मेसी संस्थानों के मूल्यांकन, पेशेवरों के पंजीकरण और नैतिक मानकों को बनाए रखने के लिए अधिक कड़े और तकनीक-आधारित नियम लागू किए जाएंगे।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| घटक / बिंदु | तथ्य |
| विधेयक का नाम | राष्ट्रीय फार्मेसी आयोग (NPC) विधेयक, 2026 (संशोधित मसौदा) |
| प्रस्तावक मंत्रालय | स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार। |
| किस कानून को बदलेगा? | यह फार्मेसी अधिनियम, 1948 को पूरी तरह निरस्त कर देगा। |
| नई नियामक संस्था | भारतीय फार्मेसी परिषद (PCI) के स्थान पर राष्ट्रीय फार्मेसी आयोग (NPC) बनेगा। |
| सुझाव भेजने की अंतिम तिथि | आम जनता और हितधारक 31 जुलाई 2026 तक अपनी टिप्पणियां भेज सकते हैं। |
विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) [VB-G RAM G] अधिनियम
- प्रारंभिक परीक्षा: सामाजिक-आर्थिक विकास, ग्रामीण विकास योजनाएं और सरकारी नीतियां।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): केंद्र द्वारा आबादी के कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएं; रोजगार क्षमता; समावेशी विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
1 जुलाई 2026 से पूरे देश में ऐतिहासिक ‘विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी VB-G RAM G अधिनियम, 2025 आधिकारिक रूप से लागू हो गया है। इस ऐतिहासिक मील के पत्थर को चिह्नित करने के लिए 2 जुलाई 2026 को आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले के मुक्कावारीपल्ले गांव (ओबुलावारिपल्ले मंडल) में एक राष्ट्रीय शुभारंभ कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडू और उप-मुख्यमंत्री श्री कोनिडेला पवन कल्याण शामिल होंगे।
अधिनियम के प्रमुख प्रावधान और नई मजदूरी दरें
- 125 दिनों के रोजगार का वैधानिक अधिकार: इस अधिनियम के प्रभावी होने के बाद अब पात्र ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिनों के गारंटीकृत वैधानिक रोजगार का कानूनी अधिकार मिलेगा (जो पहले पारंपरिक व्यवस्था में 100 दिन था)।
- न्यूनतम मजदूरी ₹300 तय: सरकार ने इस अधिनियम के तहत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए संशोधित मजदूरी दरें अधिसूचित की हैं। अब देश में कहीं भी अधिसूचित दैनिक मजदूरी ₹300 से कम नहीं होगी।
- राष्ट्रीय औसत मजदूरी में 10% से अधिक की वृद्धि: देश की औसत अधिसूचित मजदूरी ₹298.8 प्रति दिन से बढ़कर ₹327.4 प्रति दिन हो गई है, जो कि 10% से अधिक की बढ़ोतरी को दर्शाती है।
- राज्यों में विशेष वृद्धि: उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम, अरुणाचल प्रदेश और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में मजदूरी में 15 से 25 प्रतिशत तक की भारी वृद्धि देखी गई है।

- वित्तीय सुदृढ़ता: पहले दिन से ही समय पर भुगतान और काम का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों को ₹95,692.31 करोड़ का अंतरिम बजट जारी कर दिया है।
राष्ट्रीय शुभारंभ कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण (2 जुलाई 2026)
- स्थान: मुक्कावारीपल्ले गांव, तिरुपति जिला, आंध्र प्रदेश।
- गतिविधियां: इस अवसर पर लाभार्थियों को नए ‘ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड’ बांटे जाएंगे, VB-G RAM G सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म को लॉन्च किया जाएगा और योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए महत्वपूर्ण दिशानिर्देश व प्रकाशन जारी किए जाएंगे।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| घटक / बिंदु | वैधानिक और व्यावहारिक तथ्य |
| अधिनियम का नाम | विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) [VB-G RAM G] अधिनियम, 2025 |
| लागू होने की तिथि | 1 जुलाई 2026 से देशव्यापी रोलआउट |
| रोजगार की कानूनी सीमा | प्रति पात्र ग्रामीण परिवार 125 दिन का वैधानिक रोजगार |
| राष्ट्रीय औसत मजदूरी | ₹327.4 प्रति दिन (पहले ₹298.8 थी) |
| देश में न्यूनतम बेस रेट | किसी भी अधिसूचित क्षेत्र में दैनिक मजदूरी ₹300 से कम नहीं होगी |
| राष्ट्रीय लॉन्च स्थल | मुक्कावारीपल्ले गांव, तिरुपति जिला, आंध्र प्रदेश (2 जुलाई 2026) |
‘स्वर प्रेरणा वीथिका’ और भारत की संगीत विरासत
- प्रारंभिक परीक्षा: भारतीय कला और संस्कृति (Indian Art and Culture) – संगीत, घराने, वाद्ययंत्र और शास्त्रीय विधाएं।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 1): भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
1 जुलाई 2026 को आकाशवाणी ने अपनी स्थापना के 90 वर्ष पूरे होने और 2027 में भारत में रेडियो प्रसारण के शताब्दी वर्ष (100 साल) के उपलक्ष्य में नई दिल्ली में एक विशेष फोटो गैलरी ‘स्वर प्रेरणा वीथिका’ का उद्घाटन किया है। इस दीर्घा का उद्घाटन प्रसिद्ध बांसुरी वादक पद्म विभूषण पं. हरिप्रसाद चौरसिया द्वारा आकाशवाणी रंग भवन ऑडिटोरियम में किया गया। इसका उद्देश्य आकाशवाणी से जुड़े रहे देश के महान संगीतकारों के अमूल्य योगदान को सम्मानित करना और उसे संजोना है।
‘स्वर प्रेरणा वीथिका’ के मुख्य बिंदु और सांस्कृतिक महत्व
1. आकाशवाणी की सांस्कृतिक विरासत
- पिछले नौ दशकों से आकाशवाणी ने भारत की समृद्ध संगीत परंपरा को संजोने और इसे जन-जन तक पहुँचाने में एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाई है।
- इस पहल के पहले चरण में भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों (भारत रत्न, पद्म विभूषण, पद्म भूषण) से सम्मानित 20 महान संगीत विभूतियों के चित्रों (Portraits) का अनावरण किया गया है।
2. गैलरी में शामिल प्रमुख संगीतज्ञ और उनकी विधा
- भारत रत्न विजेता:
- विदुषी एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी (कर्नाटक गायन)
- पं. रवि शंकर (सितार)
- विदुषी लता मंगेशकर (पार्श्व गायन)
- उस्ताद बिस्मिल्लाह खान (शहनाई)
- पं. भीमसेन जोशी (हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन)
- डॉ. भूपेन हजारिका (लोक संगीत)
- पद्म विभूषण/भूषण विजेता:
- पं. हरिप्रसाद चौरसिया (बांसुरी)
- उस्ताद अमजाद अली खान और उस्ताद अलाउद्दीन खान (सरोद)
- पं. बिरजु महाराज (कथक नृत्य)
- उस्ताद अहमद जान थिरकवा (तवला)
- उस्ताद असद अली खान (रुद्र वीणा)
- उस्ताद साबरी खान (सारंगी)
3. मैहर घराना चर्चा में क्यों?
इस उद्घाटन समारोह के दौरान पं. हरिप्रसाद चौरसिया के शिष्य पंडित रूपक कुलकर्णी ने बांसुरी वादन की प्रस्तुति दी। पं. कुलकर्णी मैहर घराने के एक अग्रणी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित प्रतिपादक (Exponent) हैं, जो परीक्षा के दृष्टिकोण से इस घराने को प्रासंगिक बनाता है।
4. आकाशवाणी के समर्पित डिजिटल चैनल
प्रसार भारती के सीईओ गौरव द्विवेदी के अनुसार, पारंपरिक संगीत को बढ़ावा देने के लिए आकाशवाणी के दो समर्पित डिजिटल चैनल 24 घंटे उपलब्ध हैं:
- रागम: हिंदुस्तानी और कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के लिए।
- आराधना: भक्ति संगीत के लिए।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| घटक / बिंदु | तथ्य |
| पहल का नाम | स्वर प्रेरणा वीथिका |
| आयोजक संस्था | आकाशवाणी (प्रसार भारती), भारत का लोक सेवा प्रसारक। |
| अवसर | आकाशवाणी के 90 वर्ष पूरे होने और 2027 में रेडियो प्रसारण के 100 वर्ष के उपलक्ष्य में। |
| पहले चरण में शामिल | भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से नवाजे गए 20 महान संगीतकार। |
| चर्चा में रहा घराना | मैहर घराना — पंडित रूपक कुलकर्णी (बांसुरी वादक) इसी घराने से संबद्ध हैं। |
| डिजिटल चैनल | ‘रागम’ (शास्त्रीय संगीत) और ‘आराधना’ (भक्ति संगीत)। |
12वीं भारत-मलेशिया सैन्य सहयोग उप-समिति बैठक
- प्रारंभिक परीक्षा: भारत और उसके पड़ोसी/क्षेत्रीय देशों के साथ संबंध, द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास और रक्षा समझौते।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): भारत के हितों पर विकसित और विकासशील देशों की नीतियों और राजनीति का प्रभाव; महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, मंच और उनकी संरचना।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
1 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में भारत और मलेशिया के बीच सैन्य सहयोग पर 12वीं उप-समिति की बैठक (SCMC) आयोजित की गई। इस बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के रक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री अमिताभ प्रसाद और मलेशियाई सशस्त्र बलों के रक्षा संचालन और प्रशिक्षण के सहायक मुख्य कर्मचारी मेजर जनरल आमेर महमूद बिन अब्दुल रहमान ने की।
बैठक के मुख्य निष्कर्ष और रणनीतिक क्षेत्र
यह उप-समिति दोनों देशों के बीच सैन्य-से-सैन्य परामर्श का मुख्य तंत्र है, जो आगामी ‘रक्षा सचिव’ स्तर की भारत-मलेशिया रक्षा सहयोग बैठक का आधार तैयार करती है। बैठक के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
- द्विपक्षीय रक्षा संबंधों की समीक्षा: दोनों पक्षों ने सैन्य-से-सैन्य आदान-प्रदान, द्विपक्षीय अभ्यासों, प्रशिक्षण, स्टाफ वार्ताओं और क्षमता निर्माण सहित द्विपक्षीय सैन्य सहयोग के संपूर्ण स्पेक्ट्रम की व्यापक समीक्षा की।
- सहयोग के नए उभरते क्षेत्र: दोनों देशों ने रक्षा उद्योग, रक्षा प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा और मानवीय सहायता तथा आपदा राहत (HADR) के क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करने पर विशेष चर्चा की।
- इंडो-पैसिफिक विजन पर सहमति: दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता, सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) बनाए रखने की अपनी साझा प्रतिबद्धता को दोहराया।
- बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग: बैठक में ADMM-Plus (आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस) ढांचे के तहत एक-दूसरे की सक्रिय भागीदारी की सराहना की गई और आतंकवाद विरोधी विशेषज्ञों के कार्य समूह के तहत सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
- राष्ट्रीय समर स्मारक का दौरा: वार्ता से पूर्व मलेशियाई प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय समर स्मारक (National War Memorial) पर माल्यार्पण कर भारत के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| घटक / बिंदु | तथ्य |
| बैठक का नाम | 12वीं भारत-मलेशिया सैन्य सहयोग उप-समिति बैठक (SCMC) |
| आयोजन स्थल और तिथि | नई दिल्ली, 1 जुलाई 2026 |
| मुख्य विजन | इंडो-पैसिफिक में नौवहन की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना |
| साझेदारी का स्तर | यह भारत-मलेशिया ‘उन्नत रणनीतिक साझेदारी’ (Enhanced Strategic Partnership) का एक प्रमुख स्तंभ है। |
| बहुपक्षीय ढांचा | ADMM-Plus (आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस) के तहत सहयोग को सुदृढ़ करना। |
गगन प्रणाली: भारतीय आकाश में सटीक नौवहन
- प्रारंभिक परीक्षा: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science & Technology) – अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, उपग्रह प्रणालियां, नौवहन तकनीक।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियां; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास; अंतरिक्ष का शांतिपूर्ण उपयोग।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
1 जुलाई 2026 को जारी प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की स्वदेशी उपग्रह आधारित संवर्द्धन प्रणाली ‘गगन’ देश के विमानन और गैर-विमानन क्षेत्रों में सटीक नौवहन (Navigation) सुनिश्चित करने में मील का पत्थर साबित हो रही है। हाल ही में जून 2026 में, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने गगन प्रणाली का उपयोग करके एक वाणिज्यिक जेट विमान पर भारत का पहला उपग्रह-आधारित लैंडिंग सिस्टम दृष्टिकोण सफलतापूर्वक संचालित किया है, जिसने भारत को वैश्विक विमानन सुरक्षा में एक अग्रणी स्थान पर ला खड़ा किया है।
GAGAN क्या है और इसकी आवश्यकता क्यों पड़ी?
जब विमान हवा में होते हैं या लैंड कर रहे होते हैं, तब ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) के सिग्नलों में वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मामूली त्रुटियां (Errors) आ जाती हैं, जो विमानन सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक हो सकती हैं। इसी कमी को दूर करने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और भारतीय विमानन प्राधिकरण (AAI) ने संयुक्त रूप से GAGAN (GPS Aided GEO Augmented Navigation) का विकास किया है।

- उपग्रह आधारित संवर्द्धन प्रणाली (SBAS): यह एक ऐसी तकनीक है जो पारंपरिक GPS सिग्नलों को रियल-टाइम में संशोधित (Correct) करके उनकी सटीकता को कई गुना बढ़ा देती है।
- सत्यनिष्ठा सूचना (Integrity Information): गगन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यदि किसी कारणवश GPS सिग्नल नौवहन के लिए अनुपयुक्त या त्रुटिपूर्ण होता है, तो यह तुरंत पायलटों को सचेत (Alert) कर देता है।
- वैश्विक क्लब में शामिल: वर्ष 2015 से पूर्णतः चालू यह प्रणाली भारत को अमेरिका (WAAS), यूरोप (EGNOS) और जापान (MSAS) के बाद दुनिया की चौथी ऐसी परिचालन प्रणाली संपन्न शक्ति बनाती है। यह भूमध्यरेखीय (Equatorial) क्षेत्र के लिए प्रमाणित होने वाली दुनिया की पहली SBAS प्रणाली है।
गगन प्रणाली की वास्तुकला
गगन प्रणाली जमीनी स्टेशनों, संचार नेटवर्क और अंतरिक्ष में स्थापित भूस्थैतिक (Geostationary) उपग्रहों के एक एकीकृत तंत्र के माध्यम से काम करती है:
गगन के प्रमुख घटक
| क्रम संख्या | घटक का नाम | तैनात संख्या | मुख्य प्रशासनिक/तकनीकी भूमिका |
| 1. | भारतीय संदर्भ स्टेशन (INRES) | 15 | देश भर में निरंतर GPS सिग्नलों की निगरानी करना और त्रुटियों का पता लगाना। |
| 2. | भारतीय मुख्य नियंत्रण केंद्र (INMCC) | 2 | संदर्भ स्टेशनों से डेटा प्राप्त करना, सुधारों की गणना करना और अलर्ट जनरेट करना। |
| 3. | भारतीय भूमि अपलिंक स्टेशन (INLUS) | 3 | गणना किए गए सुधारे गए सिग्नलों और अलर्ट को सीधे गगन उपग्रहों पर भेजना। |
| 4. | संचार नेटवर्क | 4 | सभी गगन स्टेशनों को आपस में जोड़कर सुरक्षित, रियल-टाइम डेटा ट्रांसफर सक्षम करना। |
| 5. | भूस्थैतिक उपग्रह (GAGAN Payloads) | 3 | सेवा क्षेत्र में मौजूद विमानों को सुधारे गए नौवहन सिग्नल प्रसारित करना। |
अंतरिक्ष में भारत के तीन विशेष भूस्थैतिक उपग्रह — GSAT-8, GSAT-10, और GSAT-15 अपने साथ विशेष ‘गगन पेलोड’ ले जाते हैं, जो पृथ्वी की घूर्णन गति के साथ तालमेल बनाकर भारतीय हवाई क्षेत्र को कवर करते हैं।
विमानन क्षेत्र से परे: गगन के बहु-क्षेत्रीय अनुप्रयोग
यद्यपि गगन को मुख्य रूप से नागरिक उड्डयन के लिए बनाया गया था, लेकिन इसकी उच्च सटीकता के कारण यह अन्य गैर-विमानन क्षेत्रों में भी क्रांति ला रहा है:
- समुद्री नौवहन: तटीय और अपतटीय जलमार्गों में जहाजों की सटीक ट्रैकिंग और सुरक्षित आवाजाही।
- सड़क और रेल परिवहन: बुद्धिमान परिवहन प्रणालियों (ITS), बेड़े प्रबंधन (Fleet Management) और ट्रेनों की वास्तविक लोकेशन की निगरानी।
- आपदा प्रबंधन: चक्रवात या भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान आपातकालीन टीमों को सटीक स्थान की जानकारी देना।
- भू-स्थानिक मानचित्रण: सटीक भूमि सर्वेक्षण, मानचित्र निर्माण और कृषि भूमि के सीमांकन में सहायता।
नागालैंड में ‘बैंगनी क्रांति’ (Purple Revolution) और कृषि-उद्यमशीलता का विस्तार
- प्रारंभिक परीक्षा: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science & Technology) – अरोमा मिशन (Aroma Mission), सीएसआईआर (CSIR) तकनीक; भारत का उत्तर-पूर्व क्षेत्र।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास; मुख्य फसलें- देश के विभिन्न भागों में फसलों का पैटर्न; उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव; कृषि-उद्यमशीलता (Agri-entrepreneurship) और मूल्य संवर्धित ग्रामीण अर्थव्यवस्था।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
1 जुलाई 2026 को नागालैंड के पर्यटन और उच्च शिक्षा मंत्री श्री तेमजेन इम्ना अलोंग तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सलाहकार श्री कुझोलुज़ो (अज़ो) नीनू ने केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह से नई दिल्ली में मुलाकात की। इस उच्च स्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य नागालैंड में लैवेंडर की खेती और कृषि-उद्यमशीलता (Agri-entrepreneurship) का विस्तार करने के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार करना था।
अरोमा मिशन और नागालैंड में बैंगनी क्रांति (Purple Revolution)
अरोमा मिशन के तहत ‘बैंगनी क्रांति’ ने जम्मू-कश्मीर के भद्रवाह से निकलकर अब उत्तर-पूर्व भारत में अपनी जगह बना ली है। इससे जुड़े मुख्य रणनीतिक बिंदु निम्नलिखित हैं:
- शुरुआत और पृष्ठभूमि: नागालैंड ने वर्ष 2022 में ही अरोमा मिशन के तहत बैंगनी क्रांति के इस सफल मॉडल को अपना लिया था। राज्य के ज़ुन्हेबोटो क्षेत्र में एक स्टार्टअप समूह द्वारा लैवेंडर की खेती की पायलट शुरुआत की गई थी।
- अध्ययन दौरा (Exposure Visit): केंद्रीय मंत्री ने सुझाव दिया है कि नागालैंड के वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और प्रगतिशील किसानों की एक टीम जम्मू-कश्मीर का दौरा करेगी ताकि वहां लैवेंडर की खेती के सफल क्रियान्वयन, सर्वोत्तम प्रथाओं (Best Practices) और वैज्ञानिक संस्थानों के कामकाज का जमीनी स्तर पर अध्ययन किया जा सके।
- क्षेत्र-विशिष्ट वैज्ञानिक मूल्यांकन: सीएसआईआर (CSIR) और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के सहयोग से नागालैंड की कृषि-जलवायु परिस्थितियों (Agro-climatic conditions) के अनुसार नए उपयुक्त स्थानों का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जाएगा ताकि इस मॉडल को अन्य जिलों में भी फैलाया (Scale-up) जा सके।
- आवश्यक सहायता तंत्र: इस मिशन को बड़े पैमाने पर सफल बनाने के लिए किसानों और ग्रामीण युवाओं को उच्च गुणवत्ता वाली रोपण सामग्री (Planting material), तकनीकी सहायता, कौशल विकास और सीधे बाजार लिंकेज (Market Linkages) प्रदान किए जाएंगे।
शैक्षणिक और नवाचार इकोसिस्टम का सुदृढ़ीकरण
बैठक में न केवल कृषि, बल्कि नागालैंड के शैक्षणिक और तकनीकी ढांचे को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया:
- संस्थानों को सहायता: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय (DST) की प्रमुख योजनाओं के माध्यम से नागालैंड के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों (विशेष रूप से केंद्रीय विश्वविद्यालय) को मेंटरशिप, वित्तीय सहायता और अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सहयोग दिया जाएगा।
- नवाचार इकोसिस्टम (Innovation Ecosystem): युवा वैज्ञानिकों, स्टार्टअप्स और उद्यमियों के बीच क्षमता निर्माण (Capacity Building) के लिए नागालैंड सरकार और देश के अग्रणी वैज्ञानिक संस्थानों (CSIR & DST) के बीच तकनीकी हस्तांतरण (Technology Transfer) को तेज किया जाएगा।
- उभरते क्षेत्र: जैव-प्रौद्योगिकी (Biotechnology), कृषि-प्रौद्योगिकी (Agri-tech) और जैव-संसाधन उपयोग (Bio-resource utilisation) जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग के अवसरों को तलाशा जाएगा, जहां नागालैंड को समृद्ध जैव विविधता के कारण प्राकृतिक लाभ प्राप्त है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| घटक / बिंदु | तथ्य |
| बैंगनी क्रांति (Purple Revolution) | लैवेंडर जैसी उच्च मूल्य वाली सुगंधित फसलों की खेती से संबंधित। |
| नोडल मिशन | अरोमा मिशन, जिसे मुख्य रूप से CSIR द्वारा संचालित किया जाता है। |
| उत्पत्ति स्थल | यह क्रांति मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के भद्रवाह से शुरू हुई थी। |
| नागालैंड का अग्रणी जिला | नागालैंड में लैवेंडर की खेती की शुरुआत वर्ष 2022 में ज़ुन्हेबोटो क्षेत्र से हुई थी। |
| सहयोगी केंद्रीय निकाय | सीएसआईआर (CSIR) और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST)। |
जनसांख्यिकीय परिवर्तनों पर उच्च स्तरीय समिति
- प्रारंभिक परीक्षा: भारत की जनसांख्यिकी (Demography), आंतरिक सुरक्षा, सरकारी समितियां और नीतियां।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): सरकारी नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप; आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौतियां; सीमावर्ती क्षेत्रों का प्रबंधन और अवैध प्रवासन।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
1 जुलाई 2026 को जनसांख्यिकीय परिवर्तनों पर गठित उच्च स्तरीय समिति (High Level Committee on Demographic Changes) ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह से शिष्टाचार मुलाकात की। समिति ने गृह मंत्री को राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के आगामी दौरों, विस्तृत प्रश्नावली तैयार करने और केंद्रीय मंत्रालयों से फीडबैक लेने की अपनी रणनीति से अवगत कराया। गृह मंत्री ने समिति की कार्ययोजना की सराहना करते हुए गृह सचिव को हर संभव सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया और समिति से जल्द से जल्द अपनी सिफारिशें सौंपने का सुझाव दिया।
समिति की पृष्ठभूमि, संरचना और कार्यदेश
1. पृष्ठभूमि और स्थापना
- प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2025 को लाल किले से “उच्च शक्ति प्राप्त जनसांख्यिकी मिशन” (High-powered Demography Mission) की घोषणा की थी।
- इसी घोषणा के अनुसरण में भारत सरकार ने अवैध प्रवासन (Illegal Immigration) और अन्य असामान्य कारणों से होने वाले जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का अध्ययन करने के लिए इस उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है।
2. समिति की संरचना
- अध्यक्ष: न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नवलेकर (सेवानिवृत्त)।
- सदस्य:
- भारत के जनगणना आयुक्त (Census Commissioner)।
- श्री दुर्गा शंकर मिश्रा (सेवानिवृत्त IAS)।
- श्री बालाजी श्रीवास्तव (सेवानिवृत्त IPS)।
- डॉ. शमिका रवि (प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद – PMEAC की सदस्य)।
3. मुख्य कार्यदेश और रणनीति
- वैज्ञानिक मूल्यांकन: देश के विभिन्न हिस्सों में अवैध प्रवासन और अन्य असामान्य कारणों से हो रहे जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का वैज्ञानिक रूप से आकलन और विश्लेषण करना।
- त्रिस्तरीय रणनीति:
- राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का जमीनी दौरा कर प्रत्यक्ष जानकारी जुटाना।
- संबंधित राज्य सरकारों/प्रशासनों को पहले से एक विस्तृत प्रश्नावली भेजकर अग्रिम जानकारी प्राप्त करना।
- केंद्रीय मंत्रालयों के साथ समन्वय कर उनका फीडबैक लेना।
- सिफारिशें: इस समस्या से निपटने के लिए उचित नीतिगत (Policy), विधायी (Legislative) और प्रशासनिक (Administrative) उपायों की सिफारिश करना।