4 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत बिहार के मुंगेर में मिला वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित देश का सबसे पुराना 700 वर्ष प्राचीन बरगद वृक्ष; भारतीय सशस्त्र बलों की मारक क्षमता बढ़ाने के लिए रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) द्वारा ₹52,000 करोड़ के अत्याधुनिक प्रस्तावों को मंजूरी; और मिशन कर्मयोगी के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के लिए शुरू किया गया ‘दक्ष’ (DAKSH) नेतृत्व कार्यक्रम। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में लिए गए इस निर्णय के तहत थल सेना के लिए ‘आकाश तरंग’ एंटी-ड्रोन सिस्टम, नौसेना के लिए अत्याधुनिक समुद्री बारूदी सुरंगें, तथा वायु सेना के लिए ‘हाई एल्टीट्यूड सूडो सैटेलाइट’ (FW-HAPS) जैसे फिफ्थ-जनरेशन सैन्य उपकरणों को शामिल किया गया है,
पशुजन्य युद्ध अभ्यास (PYA) 2026 — ज़ूनोटिक रोगों के खिलाफ भारत का ‘वन हेल्थ’ सुरक्षा कवच
- प्रारंभिक परीक्षा: पशुजन्य युद्ध अभ्यास (PYA), वन हेल्थ दृष्टिकोण, ज़ूनोटिक रोग (H1N1), राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी—रोजमर्रा के जीवन में विकास और उनके अनुप्रयोग; जैव सुरक्षा, पशु स्वास्थ्य आपातकाल और आपदा प्रबंधन।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
3 जुलाई 2026 को केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के तहत पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD) ने मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के खारी गांव में ‘पशुजन्य युद्ध अभ्यास’ (PYA) नामक 5-दिवसीय राष्ट्रीय स्तर के मॉक ड्रिल को सफलतापूर्वक संपन्न किया। 29 जून से 3 जुलाई 2026 तक चला यह अभ्यास भारत के ‘राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन’ के तहत तीसरा आपातकालीन प्रतिक्रिया अभ्यास था, जिसका उद्देश्य पशुधन से इंसानों में फैलने वाली महामारियों (Zoonotic Diseases) से निपटने के लिए भारत की जमीनी तैयारियों को परखना था।
क्या है पशुजन्य युद्ध अभ्यास (PYA) और ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण?
सरल शब्दों में कहें तो, कोविड-19 या बर्ड फ्लू जैसी बीमारियों ने हमें सिखाया है कि जानवरों, इंसानों और पर्यावरण का स्वास्थ्य एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। इसी को ‘वन हेल्थ’ कहा जाता है। पशुजन्य युद्ध अभ्यास (PYA) कोई सैन्य अभ्यास नहीं है, बल्कि यह एक स्वास्थ्य रक्षा अभ्यास (Health Mock Drill) है जिसमें इंसानों, पशुओं और वन्यजीवों के डॉक्टरों के साथ-साथ जिला प्रशासन ने मिलकर महामारी को रोकने का अभ्यास किया।
मॉक ड्रिल की कार्यप्रणाली और सिमुलेशन
- काल्पनिक संकट: अभ्यास के दौरान इन्फ्लूएंजा ए (H1N1) वायरस के प्रकोप का एक कृत्रिम संकट (Simulation) तैयार किया गया, जिसमें यह दिखाया गया कि यह वायरस पशुओं से इंसानों और वन्यजीवों में फैलने की क्षमता रखता है।
- पूरी चेन का परीक्षण: पहले अलर्ट से लेकर वायरस के नियंत्रण तक, पूरी आपातकालीन प्रतिक्रिया श्रृंखला का परीक्षण किया गया, जिसमें निम्नलिखित चरण शामिल थे:
- रोग की निगरानी और प्रारंभिक चेतावनी (Early Warning)।
- फील्ड महामारी विज्ञान (Field Epidemiology) और रोग की जांच।
- नमूनों (Samples) का सुरक्षित संग्रह, पैकेजिंग और परिवहन।
- राष्ट्रीय BSL-3 प्रयोगशाला नेटवर्क द्वारा सटीक निदान।
- बायो-सिक्योरिटी, संक्रमित क्षेत्र की नाकेबंदी (Movement Control) और सार्वजनिक संचार।
अभ्यास में शामिल प्रमुख हितधारक और एजेंसियां
यह अभ्यास नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम (NJORT) के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ, जिसमें भारत के शीर्ष वैज्ञानिक और प्रशासनिक संस्थानों ने एक साथ काम किया:
- पशु स्वास्थ्य क्षेत्र: पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD) तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)।
- मानव स्वास्थ्य क्षेत्र: राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC), भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और एम्स (AIIMS) भोपाल।
- प्रयोगशालाएं: ICAR-राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशुरोग संस्थान (NIHSAD), भोपाल।
- वन्यजीव और प्रशासन: केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC), मध्य प्रदेश का वन विभाग और विदिशा जिला प्रशासन।
CCRAS की 5वीं कार्यकारी समिति की बैठक — आयुर्वेद अनुसंधान में तीन नई पहलें
- प्रारंभिक परीक्षा: केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान परिषद (CCRAS), आयुष मंत्रालय, ‘प्रयत्न 2026-27’ (PRAYATNA), आयुर्वेद प्रबोधिनी ग्रंथमाला, डिजिटल इकोसिस्टम डैशबोर्ड।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- स्वदेशीकरण और नई तकनीकों का विकास; साक्ष्य-आधारित पारंपरिक चिकित्सा (Evidence-based Traditional Medicine)।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
3 जुलाई 2026 को आयुष मंत्रालय के तहत शीर्ष अनुसंधान निकाय केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान परिषद (CCRAS) की 5वीं कार्यकारी समिति (Executive Committee) की बैठक आयोजित की गई। आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में भारत के ‘साक्ष्य-आधारित आयुर्वेद अनुसंधान’ (Evidence-based Ayurveda Research) पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए तीन बड़े राष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिक पहलों की शुरुआत की गई।
लॉन्च की गई तीन ऐतिहासिक पहलें (Three Landmark Initiatives)
बैठक के दौरान आयुर्वेद शिक्षा, अनुसंधान, वैज्ञानिक संचार और डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए निम्नलिखित तीन पहलों को लॉन्च किया गया:
1. रिसर्च मेथोडोलॉजी टेक्स्टबुक (आयुर्वेद प्रबोधिनी ग्रंथमाला)
- विवरण: ‘आयुर्वेद प्रबोधिनी ग्रंथमाला’ श्रृंखला के तहत अनुसंधान पद्धति (Research Methodology) पर एक अत्याधुनिक पाठ्यपुस्तक का विमोचन किया गया। इसे 50 अनुसंधान वैज्ञानिकों और संकाय सदस्यों ने मिलकर तैयार किया है।
- उद्देश्य: यह पुस्तक भारतीय चिकित्सा प्रणाली राष्ट्रीय आयोग (NCISM) द्वारा स्नातकोत्तर (MD/MS) और डॉक्टरेट (Ph.D.) स्तर की आयुष शिक्षा के लिए निर्धारित ‘परिणाम-आधारित गतिशील पाठ्यक्रम’ (Outcome-Based Dynamic Curriculum) के अनुरूप है। यह युवा स्कॉलर्स में वैज्ञानिक सोच और साक्ष्य-आधारित शोध क्षमताओं को निखारेगी।
2. CCRAS प्रयत्न 2026-27
- विवरण: परिषद ने अपने प्रमुख कार्यक्रम ‘CCRAS प्रयत्न 2026-27’ के लिए ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ (EoI) और इसका आधिकारिक पोस्टर लॉन्च किया।
- उद्देश्य: यह आयुर्वेद के पोस्टग्रेजुएट और पीएच.डी. छात्रों के बीच वैज्ञानिक लेखन (Scientific Writing) और शोध प्रकाशन कौशल को बढ़ावा देने की एक अनूठी पहल है। इसके तहत संरचित और संस्थान-आधारित कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी ताकि युवा शोधकर्ता वैश्विक मानकों के अनुसार अपने शोध पत्र लिख सकें।
3. CCRAS डिजिटल इकोसिस्टम डैशबोर्ड
- वेबसाइट:
dashboard.ccras.org.in - विवरण: यह परिषद के सभी वेब-आधारित और डिजिटल संसाधनों को एक स्थान पर प्रदर्शित करने वाला एक एकीकृत प्लेटफॉर्म है।
- उद्देश्य: इसका लक्ष्य अनुसंधान परिणामों और संस्थागत संसाधनों के प्रसार में पारदर्शिता, सुगमता (Accessibility) और जनसंपर्क को बेहतर बनाना है।
CCRAS की अन्य हालिया उपलब्धियां
- इसके विभिन्न संस्थानों को 21 NABH और NABL प्रमाणपत्र (Accreditations) प्राप्त हो चुके हैं, जो गुणवत्ता का प्रमाण हैं।
- आयुष दीक्षा (Ayush Diksha) प्लेटफॉर्म की स्थापना।
- किशोरियों में एनीमिया (रक्तअल्पता) पर बड़े पैमाने पर किया गया शोध।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| घटक / बिंदु | तथ्य |
| संस्था का नाम | केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान परिषद (CCRAS) — आयुष मंत्रालय के तहत शीर्ष निकाय। |
| प्रयत्न (PRAYATNA) 2026-27 | आयुर्वेद शोधार्थियों के लिए वैज्ञानिक लेखन और प्रकाशन कौशल सुधारने की पहल। |
| आयुर्वेद प्रबोधिनी ग्रंथमाला | NCISM के नए पाठ्यक्रम के अनुसार MD/MS/PhD हेतु तैयार रिसर्च मेथोडोलॉजी पुस्तक श्रृंखला। |
| डिजिटल डैशबोर्ड | dashboard.ccras.org.in (अनुसंधान डेटा को पारदर्शी और सुलभ बनाने हेतु)। |
| नियामक ढांचा | NCISM (National Commission for Indian System of Medicine) — आयुष शिक्षा का नियामक। |
फिक्की मर्सिडीज-बेंज भारत इनोवेशन चैलेंज — स्टार्टअप्स के लिए नया संबल
- प्रारंभिक परीक्षा: उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT), फिक्की मर्सिडीज-बेंज भारत इनोवेशन एंड बिजनेस आइडियाज चैलेंज, स्टार्टअप इंडिया।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, वृद्धि, विकास और रोजगार से संबंधित विषय; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास, अनुप्रयोग और नए नवाचार।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
3 जुलाई 2026 को उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) ने ‘फिक्की मर्सिडीज-बेंज भारत इनोवेशन एंड बिजनेस आइडियाज चैलेंज प्रोग्राम’ (FICCI Mercedes-Benz Bharat Innovation & Business Ideas Challenge) के तहत चयनित स्टार्टअप्स के साथ एक महत्वपूर्ण वर्चुअल संवाद में भाग लिया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य देश के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना और विनिर्माण, संधारणीयता (Sustainability) एवं ऑटोमोटिव जैसे उभरते क्षेत्रों में काम कर रहे उच्च क्षमता वाले भारतीय स्टार्टअप्स को सीधे कॉर्पोरेट और सरकारी सहयोग प्रदान करना है।
चैलेंज कार्यक्रम के मुख्य बिंदु और सहायता तंत्र
यह कार्यक्रम निजी क्षेत्र (मर्सिडीज-बेंज), उद्योग निकाय (FICCI) और भारत सरकार (DPIIT) के बीच एक उत्कृष्ट त्रिपक्षीय सहयोग का उदाहरण है, जो स्टार्टअप्स को केवल वित्तीय मदद ही नहीं बल्कि एक संपूर्ण व्यावसायिक सुरक्षा तंत्र प्रदान करता है।
1. प्रमुख फोकस क्षेत्र
इस चैलेंज के तहत उन स्टार्टअप्स को प्राथमिकता दी गई है जो राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप निम्नलिखित क्षेत्रों में काम कर रहे हैं:
- विनिर्माण (Manufacturing) और डीकार्बोनाइजेशन।
- संधारणीयता (Sustainability) और शिक्षा।
- ऑटोमोटिव और इलेक्ट्रिक वाहन (EVs) प्रौद्योगिकी।
2. वित्तीय और रणनीतिक सहायता
- चयन प्रक्रिया: देशव्यापी आवेदनों में से विशेषज्ञों द्वारा 32 स्टार्टअप्स को शॉर्टलिस्ट किया गया, जिनमें से अंतिम रूप से 7 सर्वश्रेष्ठ स्टार्टअप्स का चयन किया गया है।
- वित्तीय अनुदान: इन सभी 7 चयनित स्टार्टअप्स को ₹30 लाख प्रत्येक की फंडिंग (वित्तीय सहायता) दी गई है।
3. पोस्ट-फंडिंग मेंटरिंग ढांचा (Mentoring Framework)
फंडिंग प्राप्त करने के बाद स्टार्टअप्स अक्सर तकनीकी या विनियामक बाधाओं के कारण विफल हो जाते हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए चयनित स्टार्टअप्स को एक ‘स्ट्रक्चर्ड पोस्ट-फंडिंग मेंटरिंग और हैंडहोल्डिंग सपोर्ट’ दिया जाएगा, जिसके तहत निम्नलिखित क्षेत्रों में विशेषज्ञ मार्गदर्शन मिलेगा:
- नियामक और कानूनी अनुपालन (Regulatory & Legal Compliance): कराधान (Taxation), फंड का सही उपयोग और डेटा गोपनीयता (Data Privacy) नियम।
- बौद्धिक संपदा और सुरक्षा: आईपीआर (Intellectual Property Protection) और साइबर सुरक्षा (Cybersecurity) मानकों को सुदृढ़ करना।
- निवेश की तैयारी (Investment Readiness): वैल्यूएशन फंडामेंटल्स, टर्म शीट वार्ता और भविष्य के लिए ‘फंडरेजिंग स्ट्रैटेजी’ तैयार करना।
4. ‘साउंडिंग बोर्ड’ और ‘डेमो डेज़’ (Innovative Platforms)
- साउंडिंग बोर्ड प्रोग्राम: यह एक रणनीतिक मेंटरशिप पहल है, जहां उद्योग जगत के शीर्ष नेता (Leaders) स्टार्टअप्स को उनके बिजनेस मॉडल को रिफाइन करने और बाजार की वास्तविकताओं के अनुसार बदलाव करने की सलाह देंगे।
- डेडिकेटेड डेमो डेज़: स्टार्टअप्स को देश और विदेश के बड़े निवेशकों, मेंटर्स और उद्योगपतियों के सामने अपने बिजनेस मॉडल को प्रदर्शित करने का मौका मिलेगा, जिससे उनके लिए नए निवेश के द्वार खुलेंगे।
मैरीटाइम इन्वेस्टमेंट फंड (MIF) पर उद्योग परामर्श — नीली अर्थव्यवस्था को वित्तीय संबल
- प्रारंभिक परीक्षा: मैरीटाइम इन्वेस्टमेंट फंड (MIF), मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड (MDF), सागरमाला फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (SMFCL), SBI वेंचर्स लिमिटेड (SVL), पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): बुनियादी ढांचा: बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग; भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, विकास और वृद्धि से संबंधित विषय; नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy) का विकास।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
3 जुलाई 2026 को पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) ने सागरमाला फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (SMFCL) और SBI वेंचर्स लिमिटेड (SVL) के सहयोग से मुंबई में मैरीटाइम इन्वेस्टमेंट फंड (MIF) पर एक महत्वपूर्ण ‘उद्योग परामर्श’ (Industry Consultation) बैठक बुलाई। मंत्रालय के सचिव श्री विजय कुमार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत के समुद्री बुनियादी ढांचे को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए इस महत्वाकांक्षी फंड के डिजाइन, रणनीति और कार्यान्वयन के तौर-तरीकों पर चर्चा करना था।

मैरीटाइम इन्वेस्टमेंट फंड (MIF): संरचना और महत्व
यह फंड भारत सरकार के व्यापक मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड (MDF) के तहत स्थापित एक प्रमुख स्तंभ है, जो भारतीय जहाजरानी (Shipping) और बंदरगाह (Port) क्षेत्र में दीर्घकालिक पूंजी की भारी कमी को दूर करने का काम करेगा।
1. वित्तीय संरचना और कोष (Fund Structure & Corpus)
- कुल कोष: मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड (MDF) का कुल बजटीय और रणनीतिक कोष ₹25,000 करोड़ स्वीकृत किया गया है।
- MIF का हिस्सा: इस ₹25,000 करोड़ में से अकेले मैरीटाइम इन्वेस्टमेंट फंड (MIF) का कॉर्पस ₹20,000 करोड़ है (शेष ₹5,000 करोड़ ‘इंटरेस्ट इंसेंटिवाइजेशन फंड’ यानी IIF के लिए सुरक्षित है)।
- सरकारी योगदान: भारत सरकार (GoI) इस फंड में अधिकतम 49% इक्विटी प्रतिबद्धता (यानी ₹9,800 करोड़) बजटीय सहायता के रूप में देगी।
- बाकी 51% की हिस्सेदारी: शेष 51% पूंजी को घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय संस्थागत निवेशकों, निजी इक्विटी फंडों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) और प्रमुख पोर्ट अथॉरिटीज से जुटाया जाएगा।
2. ‘पेशेंट कैपिटल’ और इक्विटी फाइनेंसिंग गैप
समुद्री बुनियादी ढांचा (जैसे नए बंदरगाह बनाना या शिपयार्ड का आधुनिकीकरण) बहुत अधिक समय लेने वाली और जोखिम भरी परियोजनाएं होती हैं। पारंपरिक बैंक इसके लिए आसानी से लोन नहीं देते।
- MIF का मुख्य उद्देश्य व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य (Viable) समुद्री व्यवसायों को ‘पेशेंट इक्विटी कैपिटल’ यानी ऐसा निवेश प्रदान करना है जिसे लंबे समय तक परियोजना में टिकाए रखा जा सके।
- यह फंड ब्लेंडेड फाइनेंस (मिश्रित वित्त) दृष्टिकोण पर काम करेगा, जिससे निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ेगी और जोखिम कम होगा।
3. भविष्य के उभरते विषय
परामर्श के दौरान नीति निर्माताओं और उद्योगपतियों ने नए युग की प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित किया, जिनमें शामिल हैं:
- हरित नौवहन (Green Shipping): कार्बन उत्सर्जन को कम करने वाली टिकाऊ प्रौद्योगिकियों का विकास।
- शिप लीजिंग (Ship Leasing) और मैरीटाइम टेक्नोलॉजी: भारत में जहाजों को पट्टे पर देने की वित्तीय व्यवस्था को सुगम बनाना।
- मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स: बंदरगाहों को सड़क और रेलवे से जोड़कर रसद लागत (Logistics Cost) को कम करना।
राष्ट्रीय विजन के साथ जुड़ाव (Alignment with National Visions)
यह फंड भारत सरकार की तीन बड़ी रणनीतिक योजनाओं को पूरा करने की रीढ़ बनेगा:
- सागरमाला कार्यक्रम: भारत के 11,000 किलोमीटर से अधिक लंबे समुद्र तट का उपयोग करके पोर्ट-आधारित औद्योगिक विकास सुनिश्चित करना।
- मैरीटाइम इंडिया विजन 2030: अगले दशक में भारतीय बंदरगाहों की क्षमता और परिचालन दक्षता को वैश्विक स्तर पर लाना।
- मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047: भारत को ‘विकसित भारत @ 2047’ के तहत दुनिया की अग्रणी समुद्री शक्तियों में से एक बनाना।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| घटक / बिंदु | प्रारंभिक परीक्षा हेतु त्वरित तथ्य |
| नोडल मंत्रालय | पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW)। |
| सहयोगी संस्थाएं | सागरमाला फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (SMFCL) और SBI वेंचर्स लिमिटेड (SVL)। |
| मूल योजना | यह फंड मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड (MDF) के तहत एक मुख्य घटक है। |
| फंड का आकार (MIF) | कुल ₹20,000 करोड़ (जिसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 49% या ₹9,800 करोड़ है)। |
| पूंजी का प्रकार | इक्विटी-आधारित पेशेंट कैपिटल (दीर्घकालिक और कम लागत वाला निवेश)। |
| लक्षित क्षेत्र | बंदरगाह (Ports), शिपिंग, शिपबिल्डिंग (जहाज निर्माण), अंतर्देशीय जलमार्ग (Inland Waterways) और लॉजिस्टिक्स। |
7वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार — जल समृद्ध भारत की दिशा में एक कदम
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय जल पुरस्कार (NWA), जल शक्ति मंत्रालय, राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल, ‘जल समृद्ध भारत’ विजन, जल संचय जल भागीदारी (JSJB) कार्यक्रम।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 1 & 3): जल संसाधनों का वितरण और संरक्षण; बुनियादी ढांचा: जल संसाधन और प्रबंधन; सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
3 जुलाई 2026 को जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग (DoWR, RD & GR) ने आधिकारिक तौर पर ‘7वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार’ के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस वर्ष के पुरस्कारों के लिए सभी आवेदन गृह मंत्रालय के एकीकृत ‘राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल’ (www.awards.gov.in) के माध्यम से ऑनलाइन स्वीकार किए जा रहे हैं, जिसकी अंतिम तिथि 28 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है।
राष्ट्रीय जल पुरस्कार (NWA): उद्देश्य और विकास
ये पुरस्कार भारत सरकार के ‘जल समृद्ध भारत’ (Water Prosperous India) विजन को प्राप्त करने की दिशा में किए गए उत्कृष्ट प्रयासों को मान्यता देने और बढ़ावा देने के लिए प्रदान किए जाते हैं।
- शुरुआत: राष्ट्रीय जल पुरस्कारों का पहला संस्करण वर्ष 2018 में शुरू किया गया था। अब तक इसके 6 संस्करण सफलतापूर्वक आयोजित किए जा चुके हैं और वर्ष 2026 का यह आयोजन इसका 7वां संस्करण है।
- मूल उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य जनता को जल के महत्व के प्रति संवेदनशील बनाना, हितधारकों को जल संसाधन प्रबंधन के प्रति एक ‘समग्र दृष्टिकोण’ (Holistic Approach) अपनाने के लिए प्रेरित करना तथा भूजल एवं सतही जल के विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना है।
- पुरस्कार का स्वरूप: विजेताओं को भारत के राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति द्वारा एक गरिमामयी समारोह में ट्रॉफ़ी और प्रशस्ति पत्र (Citation) प्रदान किया जाता है।
पुरस्कार श्रेणियाँ, पात्रता और चयन प्रक्रिया
इस वर्ष के पुरस्कारों की संरचना को अधिक पारदर्शी और डेटा-आधारित (Data-driven) बनाया गया है। पाँच प्रमुख श्रेणियों के तहत पुरस्कार दिए जाएंगे:
7वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार 2026 की विस्तृत संरचना
| क्र.सं. | पुरस्कार श्रेणी (Category) | उप-श्रेणी (Sub-category) | पात्र संस्थाएँ (Eligible Entities) | पुरस्कारों की संख्या | चयन का मुख्य आधार / स्रोत |
| 1. | सर्वश्रेष्ठ राज्य | * जल संसाधन प्रबंधन * जल संचय जल भागीदारी (JSJB) * जल जीवन मिशन (JJM) | राज्य और केंद्र शासित प्रदेश (UTs) | प्रत्येक उप-श्रेणी में 3 पुरस्कार (प्रथम, द्वितीय, तृतीय) | * MHA पोर्टल आवेदन * JSJB मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क * JJM-IMIS, जल सेवा आकलन (JSAn) और WQMIS डेटा |
| 2. | सर्वश्रेष्ठ जिला | * जल संसाधन प्रबंधन * जल संचय जल भागीदारी (JSJB) * जल जीवन मिशन (JJM) | जिला प्रशासन / डीएम / डीसी | प्रत्येक उप-श्रेणी में 15 पुरस्कार (5 भौगोलिक क्षेत्रों से प्रति क्षेत्र 3 पुरस्कार) | * उत्तर, दक्षिण, पश्चिम, पूर्व और उत्तर-पूर्वी ज़ोन के आधार पर विभाजन। * केंद्रीय डेटाबेस (IMIS/WQMIS) का उपयोग। |
| 3. | सर्वश्रेष्ठ शहरी स्थानीय निकाय (ULB) | * जल संसाधन प्रबंधन * जल संचय जल भागीदारी (JSJB) | नगर निगम / नगर पालिका | प्रत्येक उप-श्रेणी में 5 पुरस्कार (5 जोनों से 1-1 पुरस्कार) | * MHA पोर्टल आवेदन * JSJB डेटाबेस |
| 4. | सर्वश्रेष्ठ कार्यान्वित परियोजना | इस वर्ष का विशेष विषय: बांध सुरक्षा (Dam Safety) | परियोजना कार्यान्वयन प्राधिकरण / डैम एजेंसियां | कुल 3 पुरस्कार (प्रथम, द्वितीय, तृतीय) | * MHA पुरस्कार पोर्टल पर प्राप्त आवेदन। |
| 5. | सर्वश्रेष्ठ कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) पहल | जल क्षेत्र में कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व | औद्योगिक इकाइयाँ (Industries) | कुल 3 पुरस्कार (प्रथम, द्वितीय, तृतीय) | * कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय (MCA) के CSR पोर्टल्स से चयन। |
चयन की त्रि-स्तरीय प्रक्रिया
- स्क्रीनिंग कमेटी: प्राप्त आवेदनों की प्राथमिक जांच और शॉर्टलिस्टिंग जल संसाधन विभाग की स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा की जाती है।
- जूरी कमेटी: शॉर्टलिस्ट किए गए आवेदनों को विभाग द्वारा गठित एक उच्च-स्तरीय जूरी कमेटी के समक्ष रखा जाता है।
- अंतिम अनुमोदन: जूरी की सिफारिशों को अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है।
दक्ष (DAKSH) नेतृत्व कार्यक्रम — सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के लिए ‘भावी नेतृत्व’
- प्रारंभिक परीक्षा: क्षमता निर्माण आयोग (CBC), मिशन कर्मयोगी, लोक उद्यम विभाग (DPE), केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम (CPSEs)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): सुशासन (Governance) और प्रशासनिक सुधार; ‘होल ऑफ गवर्नमेंट’ दृष्टिकोण; सरकारी नीतियों और हस्तक्षेपों के माध्यम से विकास; सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) की दक्षता और सुधार।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
3 जुलाई 2026 को केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली में केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) के वरिष्ठ कार्यकारियों के लिए ‘दक्ष’ (DAKSH – Development of Aspiration, Knowledge, Succession and Harmony) नेतृत्व कार्यक्रम के तीसरे बैच का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने भारत सरकार के ‘होल ऑफ गवर्नमेंट’ दृष्टिकोण पर बल देते हुए कहा कि क्षमता निर्माण (Capacity Building) अब केवल व्यक्तिगत योग्यता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए विभिन्न संस्थागत क्षमताओं का एकीकरण (Convergence) भी अनिवार्य है।
दक्ष नेतृत्व कार्यक्रम क्या है?
सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (जैसे ONGC, NTPC, BHEL आदि) को भविष्य में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए उनके शीर्ष अधिकारियों को आधुनिक प्रबंधन और रणनीतिक सोच से लैस करना इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है।
- संयुक्त पहल: यह क्षमता निर्माण आयोग (CBC) और स्थायी सार्वजनिक उद्यम सम्मेलन (SCOPE) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एक एक-वर्षीय नेतृत्व विकास कार्यक्रम है।
- शैक्षणिक भागीदार: इस कार्यक्रम को इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB) के सहयोग से संचालित किया जा रहा है।
- लक्ष्य समूह: CPSEs के वरिष्ठ अधिकारी, जिन्हें भविष्य में ‘बोर्ड-स्तरीय’ (Board-level) जिम्मेदारियां (जैसे निदेशक या सीएमडी पद) संभालने के लिए तैयार किया जा रहा है।
- ट्रैक रिकॉर्ड: इस कार्यक्रम की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसके पिछले बैचों के कई प्रतिभागी पहले ही बोर्ड-स्तरीय पदों पर पदोन्नत हो चुके हैं।
प्रशासनिक दर्शन और ‘होल-ऑफ-गवर्नमेंट’ दृष्टिकोण
मंत्री महोदय ने विकसित भारत @ 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए शासन व्यवस्था (Governance) में आ रहे महत्वपूर्ण बदलावों को रेखांकित किया:
- संस्थागत एकीकरण (Institutional Convergence): अब सरकारी विभाग अलग-अलग (In Isolation) काम नहीं कर सकते। ‘होल-ऑफ-गवर्नमेंट’ और ‘होल-ऑफ-नेशन’ दृष्टिकोण का अर्थ है कि विभिन्न संस्थान अपनी विशिष्ट क्षमताओं को मिलाकर एक साझा राष्ट्रीय लक्ष्य के लिए काम करें।
- सार्वजनिक और निजी क्षेत्र का धुंधला अंतर: आधुनिक अर्थव्यवस्था में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच का अंतर धीरे-धीरे कम हो रहा है। इसलिए, ‘दक्ष’ कार्यक्रम के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के अधिकारियों को निजी क्षेत्र की सर्वोत्तम प्रथाओं (Best Practices) और वैश्विक प्रबंधन मॉडलों से परिचित कराया जा रहा है।
- निरंतर अधिगम (Continuous Learning): आज के तकनीकी युग में अर्जित ज्ञान बहुत तेजी से पुराना हो जाता है। इसलिए, अधिकारियों में ‘लाइफलोंग लर्निंग’ (Lifelong Learning) और अनुकूलन क्षमता (Adaptability) को बढ़ावा देना अनिवार्य है। इसके तहत पाठ्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उभरती प्रौद्योगिकियों को शामिल किया जा रहा है।
मिशन कर्मयोगी और क्षमता निर्माण आयोग (CBC)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के तहत शुरू किया गया ‘मिशन कर्मयोगी’ (सिविल सेवा क्षमता निर्माण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम) भारतीय प्रशासनिक इतिहास का सबसे बड़ा सुधार है। क्षमता निर्माण आयोग (CBC) इसी मिशन का केंद्रीय स्तंभ है, जो सभी सरकारी अधिकारियों और सार्वजनिक उपक्रमों के लिए प्रशिक्षण मानकों और साझा शिक्षण मंचों को तैयार करता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| घटक / बिंदु | तथ्य |
| कार्यक्रम का नाम | दक्ष (DAKSH) — Development of Aspiration, Knowledge, Succession and Harmony |
| अवधि और प्रकृति | 1 वर्ष का रणनीतिक नेतृत्व विकास कार्यक्रम। |
| नोडल आयोजक | क्षमता निर्माण आयोग (CBC) और SCOPE। |
| ज्ञान भागीदार (Knowledge Partner) | इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB)। |
| लक्षित लाभार्थी | केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) के वरिष्ठ अधिकारी। |
| मूल मिशन का हिस्सा | मिशन कर्मयोगी के व्यापक क्षमता निर्माण सिद्धांतों से प्रेरित। |
रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) द्वारा ₹52,000 करोड़ के प्रस्तावों को मंजूरी — रक्षा बल हुए हाई-टेक
- प्रारंभिक परीक्षा: रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC), आकाश तरंग (AKASH TARANG), MPATGM, V-SHORADS, FW-HAPS, मल्टी इन्फ्लुएंस ग्राउंड माइन (MIGM)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विभिन्न सुरक्षा बल और एजेंसियां तथा उनके जनादेश; सुरक्षा चुनौतियां और उनका प्रबंधन; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी—स्वदेशीकरण और नई तकनीकों का विकास (सैन्य आधुनिकीकरण)।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
3 जुलाई 2026 को रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (Defence Acquisition Council – DAC) की एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में भारतीय सशस्त्र बलों (थल सेना, नौसेना और वायु सेना) की युद्धक तैयारी (Combat Readiness) और परिचालन क्षमता को बढ़ावा देने के लिए लगभग ₹52,000 करोड़ के विभिन्न पूंजीगत अधिग्रहण प्रस्तावों को ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ (Acceptance of Necessity – AoN) यानी सैद्धांतिक प्रशासनिक मंजूरी दे दी गई है।
तीनों सेनाओं के लिए स्वीकृत प्रमुख रक्षा उपकरण और उनका महत्व
इस रणनीतिक मंजूरी के तहत भारतीय सेनाओं को आधुनिक युद्ध (Modern Warfare) जैसे ड्रोन हमलों, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (EW) और उन्नत हवाई खतरों से निपटने के लिए अत्याधुनिक प्रणालियों से लैस किया जाएगा।
1. भारतीय थल सेना के लिए स्वीकृतियां
थल सेना को मजबूत करने और टैंकों व इन्फैंट्री (पैदल सेना) की सुरक्षा बढ़ाने के लिए कई स्वदेशी और उन्नत प्रणालियों को मंजूरी दी गई है:
- ‘आकाश तरंग’ (AKASH TARANG): यह एक एंटी-अनमैन्ड एरियल व्हीकल (Anti-UAV) इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम है। यह अग्रिम मोर्चे पर तैनात सेना की टुकड़ियों को दुश्मन के ड्रोन हमलों से सुरक्षा (Anti-Drone Protection) प्रदान करेगा।
- मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) सिस्टम: यह सैनिकों द्वारा आसानी से उठाकर ले जाई जा सकने वाली मिसाइल प्रणाली है, जो दुश्मन के बख्तरबंद वाहनों और टैंकों को नष्ट कर इन्फैंट्री की मारक क्षमता को बढ़ाएगी।
- मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (MRSAM) प्रणाली: यह दुश्मन के लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों और मिसाइलों के खिलाफ मध्यम दूरी का हवाई सुरक्षा कवच प्रदान करती है।
- वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (V-SHORADS): मल्टी-स्पेक्ट्रल सेंसिंग से लैस यह प्रणाली कम दूरी से आने वाले हवाई खतरों को तुरंत भांपकर उन्हें हवा में ही नष्ट करने में सक्षम है।
- टैंकों के लिए एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम (APS): यह प्रणाली दुश्मन की मिसाइलों या गोलों को टैंक से टकराने से पहले ही हवा में नष्ट कर देती है, जिससे भारतीय टैंकों की युद्ध क्षेत्र में ‘सर्वाइवेबिलिटी’ (बचे रहने की क्षमता) बढ़ जाती है।
- जेट-आधारित कामिकेज़ ड्रोन सिस्टम (Jet-Based Kamikaze Drone): ये ‘सुसाइड ड्रोन’ कहलाते हैं। जेट इंजन पर आधारित होने के कारण इनकी गति और मारक क्षमता पारंपरिक ड्रोनों से कहीं अधिक होती है, जो लागत प्रभावी होने के साथ-साथ उच्च इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता प्रदान करते हैं।
2. भारतीय नौसेना के लिए स्वीकृतियां
समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और हिंद महासागर में निगरानी को मजबूत करने के लिए तीन बड़े फैसलों को मंजूरी मिली:
- मल्टी इन्फ्लुएंस ग्राउंड माइन (MIGM): ये समुद्र के तल में बिछाई जाने वाली आधुनिक बारूदी सुरंगें हैं, जो दुश्मन के युद्धपोतों और पनडुब्बियों की आवाजाही को पूरी तरह से रोक देंगी।
- नेवल शिपबोर्न अनमैन्ड एरियल सिस्टम (NSUAS): युद्धपोतों से संचालित होने वाले ये उन्नत ड्रोन समुद्र में भारतीय नौसेना की ‘सिचुएशनल अवेयरनेस’ (जमीनी स्थिति की जानकारी) और टोही क्षमता को बढ़ाएंगे।
- इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम के लिए लैंड बेस्ड टेस्टिंग फैसिलिटी (LBTF): भविष्य के भारतीय नौसैनिक जहाजों के लिए इलेक्ट्रिक मोटर्स और संबद्ध प्रणोदन प्रणालियों के परीक्षण के लिए एक समर्पित जमीनी परीक्षण सुविधा स्थापित की जाएगी।
3. भारतीय वायु सेना के लिए स्वीकृतियां
- फिक्स्ड-विंग बेस्ड हाई एल्टीट्यूड सूडो सैटेलाइट (FW-HAPS): यह इस अधिग्रहण का सबसे आधुनिक हिस्सा है। यह एक ऐसा ड्रोन या विमान होता है जो समताप मंडल (Stratosphere) में महीनों तक रहकर एक उपग्रह (Satellite) की तरह काम करता है।
- उपयोगिता: यह वायुसेना के लिए लगातार खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी रखने, टोह लेने (ISR), दूरसंचार और रिमोट सेंसिंग (दूर संवेदन) के कार्यों को बिना उपग्रह के बेहद कम लागत पर अंजाम देगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| रक्षा उपकरण / प्रणाली | प्रकार / मुख्य तथ्य |
| आकाश तरंग (AKASH TARANG) | थल सेना के लिए एंटी-ड्रोन (Anti-UAV) इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम। |
| FW-HAPS | समताप मंडल में रहकर उपग्रह की तरह काम करने वाला हाई एल्टीट्यूड सूडो सैटेलाइट (IAF हेतु)। |
| कामिकेज़ ड्रोन (Kamikaze) | जेट-आधारित ‘सुसाइड ड्रोन’ जो दुश्मन के ठिकानों पर खुद टकराकर विस्फोट करते हैं। |
| MIGM | नौसेना के लिए मल्टी इन्फ्लुएंस ग्राउंड माइन (समुद्री बारूदी सुरंग)। |
| LBTF | नौसैनिक जहाजों के इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन (प्रणोदन) सिस्टम के परीक्षण के लिए स्थापित होने वाली लैंड-बेस्ड फैसिलिटी। |
| DAC (रक्षा अधिग्रहण परिषद) | रक्षा खरीद को मंजूरी देने वाली शीर्ष संस्था; अध्यक्ष: रक्षा मंत्री। |
प्रथम भारत-माली निर्यात संवर्धन मंच — पश्चिम अफ्रीका में नए आर्थिक संबंध
- प्रारंभिक परीक्षा: प्रथम भारत-माली निर्यात संवर्धन मंच, ड्यूटी-फ्री टैरिफ प्रेफरेंस (DFTP) योजना, माली की भौगोलिक स्थिति, विजन माली 2063।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से जुड़े और/या भारत के हितों को प्रभावित करने वाले समझौते; भारत के हितों पर विकसित और विकासशील देशों की नीतियों और राजनीति का प्रभाव।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
3 जुलाई 2026 को भारत और माली ने बमाको (माली की राजधानी) में आयोजित ‘प्रथम भारत-माली निर्यात संवर्धन मंच’ (Inaugural India–Mali Forum for the Promotion of Exports) के माध्यम से अपनी व्यावसायिक साझेदारी को औपचारिक रूप दिया। “व्यापार और रणनीतिक साझेदारी को सुदृढ़ करना” (Reinforcing Trade and Strategic Partnerships) विषय पर आधारित इस दो-दिवसीय मंच की अध्यक्षता माली की संक्रमणकालीन सरकार के प्रधानमंत्री मेजर जनरल अब्दौलाये मैगा ने की, जिसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को गहरा करना है।
भारत-माली आर्थिक सहयोग के मुख्य बिंदु
यह मंच दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी की नींव रखता है, जो भारत की अफ्रीका-नीति (Africa Outreach) के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
1. द्विपक्षीय व्यापार में रिकॉर्ड उछाल
- व्यापार का आकार: वित्तीय वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 326.61 मिलियन अमेरिकी डॉलर को पार कर गया।
- अभूतपूर्व वृद्धि: पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में इस व्यापार में 55 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है।
- भविष्य की संभावनाएं: माली के कुल वैश्विक निर्यात (लगभग $4 बिलियन) को देखते हुए, भारतीय बाजार में माली के लिए अभी भी लगभग $3.96 बिलियन की अप्रयुक्त (Untapped) निर्यात क्षमता मौजूद है।
2. प्रमुख व्यापारिक वस्तुएं (Trade Basket)
| भारत द्वारा माली को निर्यात (India’s Exports) | माली द्वारा भारत को निर्यात (Mali’s Exports) |
| * फार्मास्यूटिकल्स (दवाइयाँ) * सूती कपड़े (Cotton Fabrics) * दुपहिया और तिपहिया वाहन (जैसे महिंद्रा, टाटा मोटर्स) * साइकिल और सोनालीका ट्रैक्टर | * कच्चा कपास (Raw Cotton) * तैयार चमड़ा (Finished Leather) * काजू (Cashew) और सीसा (Lead) * गोंद अरबी (Gum Arabic) और तिल (Sesame) |
3. रणनीतिक सहयोग और पारस्परिक माँगें
बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B), बिजनेस-टू-जी (B2G) और सरकार-टू-सरकार (G2G) स्तर पर गहन चर्चा हुई, जिसमें मुख्य चिंताएं निम्नलिखित थीं:
- प्राथमिकता वाले क्षेत्र: कपड़ा, खनन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि-उद्योग, शीया प्रसंस्करण (Shea processing) और सामाजिक बुनियादी ढांचा (स्वास्थ्य एवं शिक्षा)।
- माली का अनुरोध: माली ने अपने उत्पत्ति प्रमाणपत्र (Certificate of Origin) प्रणाली को डिजिटल बनाने में भारत से तकनीकी सहायता मांगी है और भारतीय दवाओं के अपने देश में त्वरित पंजीकरण की मांग की है।
- भारत की चिंताएं: भारत ने माली द्वारा लगाए गए शीया-नट के निर्यात प्रतिबंध पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया। इसके साथ ही, माली में काम कर रहे भारतीय नागरिकों और भारतीय निवेश की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया।
मुंगेर का बरगद — वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित भारत का सबसे पुराना वृक्ष
- प्रारंभिक परीक्षा: मुंगेर बरगद वृक्ष (Ficus benghalensis), रेडियोकार्बन डेटिंग, एक्सेलरेटर मास स्पेक्ट्रोमेट्री (AMS), बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (BSIP)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियां; प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण और नई तकनीक विकसित करना; पर्यावरण और जैव विविधता संरक्षण।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हाल ही में वैज्ञानिकों ने बिहार के मुंगेर में स्थित एक विशाल बरगद के वृक्ष की आयु का वैज्ञानिक आकलन किया है। रेडियोकार्बन डेटिंग तकनीक के उपयोग से इस वृक्ष की आयु लगभग 700 वर्ष आंकी गई है। इसके साथ ही यह लोककथाओं या ऐतिहासिक दस्तावेजों के बजाय विशुद्ध वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर सटीक रूप से आंका गया भारत का सबसे पुराना बरगद का पेड़ बन गया है। यह शोध प्रतिष्ठित जर्नल क्वाटरनरी रिसर्च में प्रकाशित हुआ है।
वैज्ञानिक खोज और उन्नत तकनीकी पद्धति
उष्णकटिबंधीय चौड़ी पत्ती वाले (Tropical broadleaf) पेड़ों में वार्षिक विकास वलय (Annual growth rings) स्पष्ट नहीं होते। इसी कारण पारंपरिक डेंड्रोक्रोनोलॉजी (वृक्ष-वलय कालक्रम) तकनीक से इनकी सही उम्र जानना असंभव था। इस चुनौती को भारतीय वैज्ञानिकों ने एक नई कार्यप्रणाली से हल किया है।
1. शोध टीम और संस्थान
- नेतृत्व: लखनऊ स्थित बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (BSIP) की डॉ. तृना बोस, डॉ. मयंक शेखर और डॉ. अखिलेश के. यादव।
- सहयोग: बिहार वन विभाग के आमंत्रण पर इस वैज्ञानिक अन्वेषण को अंजाम दिया गया।
2. आयु निर्धारण की वैज्ञानिक प्रक्रिया
- अल्फा-सेल्युलोज निष्कर्षण: वैज्ञानिकों ने पेड़ की द्वितीयक शाखा (Secondary trunk) और सबसे पुरानी प्राथमिक शाखा के मज्जा (Pith – पेड़ के तने का सबसे आंतरिक/शुरुआती भाग) के पास से लकड़ी के नमूने लिए। इन नमूनों से पौधों की कोशिका भित्ति (Cell wall) के सबसे स्थिर घटक ‘अल्फा-सेल्युलोज’ को निकाला गया।
- AMS तकनीक: इस सेल्युलोज का एक्सेलरेटर मास स्पेक्ट्रोमेट्री (AMS) के माध्यम से उच्च-सटीकता वाली रेडियोकार्बन डेटिंग विश्लेषण किया गया।
- कैलिब्रेशन: सटीक निष्कर्ष के लिए डेटा को आधुनिक IntCal20 कैलिब्रेशन कर्व और OxCal सॉफ्टवेयर से सत्यापित किया गया।
ऐतिहासिक और पारिस्थितिक महत्व
यह खोज ऐतिहासिक घटनाओं के क्रम को एक नया नजरिया देती है और संरक्षण की आधुनिक राह दिखाती है।
- इतिहास का पुनर्लेखन: पहले यह माना जाता था कि मुंगेर के इस बरगद को लेट-मुगल या ब्रिटिश काल (लगभग 300-350 वर्ष पहले) के ऐतिहासिक ‘बुढ़वा बंगला’ (Burra Bunglow) के सामने लगाया गया था। वैज्ञानिक कालक्रम ने साबित कर दिया कि यह पेड़ 700 साल पुराना है। इसका सीधा अर्थ है कि यह पेड़ उस क्षेत्र में कभी रहे प्राकृतिक जंगल का अंतिम जीवित अवशेष है, जिसके सामने बाद में इस ऐतिहासिक इमारत का निर्माण हुआ।
- पारिस्थितिकी का आधार: बरगद के पेड़ अपने जटिल हवाई जड़ों (Prop roots) के जाल के कारण पक्षियों, कीड़ों और छोटे जीवों को एक समृद्ध निवास स्थान (Habitat) प्रदान करते हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| प्रमुख बिंदु | प्रारंभिक परीक्षा हेतु तथ्य |
| पेड़ का स्थान | आईटीसी (ITC) परिसर, मुंगेर, बिहार। |
| प्रमाणित आयु | लगभग 700 वर्ष (वैज्ञानिक रूप से पुष्ट भारत का सबसे पुराना बरगद)। |
| संस्थान | बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (BSIP), लखनऊ (विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग – DST के तहत स्वायत्त संस्थान)। |
| प्रमुख तकनीक | एक्सेलरेटर मास स्पेक्ट्रोमेट्री (AMS) आधारित रेडियोकार्बन डेटिंग। |
| लक्ष्य घटक | लकड़ी के पिथ (Pith) से निकाला गया अल्फा-सेल्युलोज। |