Give The Best…..Take The Best

17 June 2026 PIB Notes for UPSC in Hindi

आज के 17 June 2026 PIB Notes for UPSC के इस विशेष अंक में हम केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कई दूरगामी कदमों का व्यापक विश्लेषण करेंगे। इनमें पारदर्शिता बढ़ाने के लिए लॉन्च किया गया ग्रीन हाइड्रोजन सर्टिफिकेशन पोर्टल, देश में रोजगार के औपचारिकरण को गति देने वाली प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY), और खाद्यान्नों की आधुनिक ट्रैकिंग के लिए शुरू किया गया स्मार्ट वेयरहाउसिंग सिस्टम शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, रक्षा उत्पादन में भारत द्वारा हासिल किए गए ₹1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर और मरुस्थलीकरण से निपटने के लिए बॉन चैलेंज के तहत भारत की शानदार प्रगति जैसे मुख्य विषयों को परीक्षा-उपयोगी डेटा बैंक, फ्लोचार्ट और अभ्यास प्रश्नों के साथ नीचे विस्तार से समझाया गया है।

ग्रीन हाइड्रोजन सर्टिफिकेशन पोर्टल (GHCI)

 

चर्चा में क्यों?

केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) को मजबूत करने के लिए ‘ग्रीन हाइड्रोजन सर्टिफिकेशन पोर्टल’ (GHCI) लॉन्च किया है। यह कदम भारत को वैश्विक हरित ऊर्जा का केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।

ग्रीन हाइड्रोजन सर्टिफिकेशन पोर्टल (GHCI)

  • विकासकर्ता: नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE)।
  • उद्देश्य: भारत के ‘ग्रीन हाइड्रोजन सर्टिफिकेशन स्कीम’ के तहत पारदर्शी प्रमाणन (Certification) और नियामक अनुपालन को आसान बनाना।
  • महत्व: यह पोर्टल हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, मानकों और पारदर्शिता को ट्रैक करने में मदद करेगा, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।

राज्यों की भागीदारी और नीतियां

  • समर्पित नीतियां: 6 राज्यों ने अपनी विशेष हरित हाइड्रोजन नीतियां अधिसूचित की हैं।
  • एकीकृत नीतियां: 7 राज्यों ने हाइड्रोजन को अपनी मौजूदा औद्योगिक और नवीकरणीय ऊर्जा नीति में शामिल किया है।
  • प्रक्रिया में: 4 अन्य राज्य जल्द ही अपनी नीतियां फाइनल करने वाले हैं।

मिशन की अब तक की प्रमुख उपलब्धियां

  • घरेलू विनिर्माण (Domestic Manufacturing): स्वदेशी इलेक्ट्रोलाइज़र निर्माण क्षमता (Electrolyser Manufacturing Capacity) विकसित करने के लिए 15 कंपनियों को वित्तीय प्रोत्साहन दिया गया है ताकि आयात पर निर्भरता कम हो सके।
  • रिफाइनरी क्षेत्र: IOCL, BPCL, HPCL और NRL को 30,000 MTPA हरित हाइड्रोजन की आपूर्ति के अनुबंध दिए गए हैं।
  • स्टील क्षेत्र: स्टील सेक्टर में 100% हाइड्रोजन इंजेक्शन के परीक्षण के लिए ₹84 करोड़ की पायलट परियोजनाएं मंजूर की गई हैं।
  • स्वच्छ गतिशीलता (Clean Mobility): 37 हाइड्रोजन-ईंधन वाले वाहनों और 9 रणनीतिक रिफ्यूजिंग स्टेशनों के लिए लगभग ₹208 करोड़ आवंटित किए गए हैं।
  • स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा: हरित हाइड्रोजन तकनीकों में लगे स्टार्ट-अप्स के लिए ₹100 करोड़ का आवंटन किया गया है, जिसमें से पहले चरण में 9 स्टार्ट-अप्स को ₹22 करोड़ की फंडिंग मंजूर की गई है।
  • SIGHT कार्यक्रम: इस योजना के तहत 8,62,000 MTPA हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता के लिए प्रोत्साहन दिए जा चुके हैं।

केस स्टडी (Case Study): नवंबर 2025 में JSW द्वारा 3,600 MTPA क्षमता वाले ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र का सफल संचालन शुरू किया जा चुका है, जो इस क्षेत्र में निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (NGHM) के बारे में

यह मिशन साल 2023 में ₹19,744 करोड़ के कुल परिव्यय (Outlay) के साथ शुरू किया गया था।

लक्ष्य सूचकांक निर्धारित लक्ष्य
उत्पादन क्षमता सालाना 5 MMT (Million Metric Tonne) हरित हाइड्रोजन बनाना।
नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता इसके लिए 125 GW की समर्पित रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता जोड़ना।
कुल निवेश ₹8 लाख करोड़ से अधिक का निवेश आकर्षित करना।
रोजगार सृजन 6 लाख से अधिक नौकरियों के अवसर पैदा करना।
पर्यावरण प्रभाव सालाना 50 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना।

प्रीलिम्स के लिए संभावित प्रश्न (Prelims Practice Question)

प्रश्न: राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (NGHM) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. इसका उद्देश्य भारत में प्रतिवर्ष कम से कम 5 MMT हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता का विकास करना है।
  2. हाल ही में लॉन्च किया गया ग्रीन हाइड्रोजन सर्टिफिकेशन पोर्टल नीति आयोग द्वारा विकसित किया गया है।

ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

A) केवल 1

B) केवल 2

C) 1 और 2 दोनों

D) न तो 1 और न ही 2

राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (NSC) में नए अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति

 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) ने राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (National Statistical Commission – NSC) के नए अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) कोलकाता के पूर्व निदेशक डॉ. सैबल चट्टोपाध्याय को आयोग का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

नई नियुक्तियों का विवरण

कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) द्वारा अनुमोदित नई नियुक्तियां इस प्रकार हैं:

  • अध्यक्ष (Part-time Chairperson): डॉ. सैबल चट्टोपाध्याय (पूर्व निदेशक, IIM कोलकाता और सांख्यिकी विशेषज्ञ)।
  • सदस्य (Part-time Members):
    1. प्रो. शुभब्रत दास: प्रोफेसर, IIM बैंगलोर (सांख्यिकी, ऑपरेशनल रिसर्च और एक्चुरियल मैथमेटिक्स विशेषज्ञ)।
    2. श्री सत्येंद्र बहादुर सिंह: सेवानिवृत्त अधिकारी, भारतीय सांख्यिकी सेवा (ISS – 1987 बैच)। उन्हें आधिकारिक और आर्थिक सांख्यिकी में 3 दशकों से अधिक का अनुभव है।
    3. डॉ. माधवन मुकुंद: निदेशक, चेन्नई गणितीय संस्थान (Chennai Mathematical Institute)। कंप्यूटर साइंस विशेषज्ञ।

राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (NSC) के बारे में

  • स्थापना: रंगराजन आयोग (2001) की सिफारिशों के आधार पर सरकार ने 2005 में एक प्रस्ताव के जरिए इसकी स्थापना की थी। यह 12 जुलाई 2006 से पूरी तरह क्रियाशील हुआ।
  • उद्देश्य: देश की सभी प्रमुख सांख्यिकी गतिविधियों के लिए एक नोडल निकाय के रूप में कार्य करना। इसका काम सांख्यिकीय प्राथमिकताओं और मानकों को विकसित, मॉनिटर और लागू करना है।
  • संरचना:
    • एक अंशकालिक (Part-time) अध्यक्ष।
    • सांख्यिकी के विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वाले चार अंशकालिक सदस्य।
    • नीति आयोग (NITI Aayog) के सीईओ इसके पदेन (Ex-officio) सदस्य होते हैं।
    • सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के सचिव इस आयोग के सचिव के रूप में कार्य करते हैं।

राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के मुख्य कार्य और शक्तियां

  • नीति निर्धारण: सांख्यिकीय प्रणाली से संबंधित राष्ट्रीय नीतियों और प्राथमिकताओं को विकसित करना।
  • जनता का भरोसा बढ़ाना: आधिकारिक सांख्यिकी (Official Statistics) में जनता का विश्वास और विश्वसनीयता मजबूत करने के उपाय करना।
  • मानकीकरण: विभिन्न सांख्यिकीय क्षेत्रों में मानक अवधारणाओं, परिभाषाओं, वर्गीकरणों और कार्यप्रणाली (Methodology) को निर्धारित करना।
  • सांख्यिकीय ऑडिट: सांख्यिकीय उत्पादों की गुणवत्ता और अखंडता सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न सांख्यिकीय गतिविधियों का ऑडिट करना।
  • बेहतर समन्वय: केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और राज्य सरकारों के बीच सांख्यिकीय गतिविधियों में तालमेल बिठाना।

प्रीलिम्स के लिए अभ्यास प्रश्न (Prelims Practice Question)

प्रश्न: राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (NSC) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. इस आयोग की स्थापना रंगराजन समिति की सिफारिशों के आधार पर की गई थी।
  2. नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) इस आयोग के पदेन (Ex-officio) सदस्य होते हैं।
  3. सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के सचिव इसके अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं।

ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? A) केवल 1 और 2

B) केवल 2 और 3

C) केवल 1 और 3

D) 1, 2 और 3

प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY)

 

चर्चा में क्यों?

पीएम द्वारा 19 जून 2026 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में एक विशेष कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) के तहत लगभग ₹2,400 करोड़ की प्रोत्साहन राशि वितरित करेंगे।

प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) क्या है?

यह भारत सरकार की एक प्रमुख रोजगार-संबद्ध प्रोत्साहन (Employment-Linked Incentive) योजना है। इसे देश में औपचारिक रोजगार को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

  • लागू होने की तिथि: यह योजना 1 अगस्त 2025 से प्रभावी हुई है।
  • कुल बजट (Outlay): इस योजना का कुल वित्तीय परिव्यय ₹99,446 करोड़ है।
  • मुख्य उद्देश्य:
    • रोजगार सृजन की गति को तेज करना।
    • अर्थव्यवस्था में रोजगार के औपचारिकरण (Formalisation) को बढ़ावा देना।
    • युवाओं की रोजगार क्षमता में सुधार करना।
    • सामाजिक सुरक्षा (Social Security) के दायरे को बढ़ाना।

योजना के तहत मिलने वाले मुख्य लाभ और प्रोत्साहन

यह योजना अनूठी है क्योंकि यह कर्मचारियों और नियोक्ताओं (Employers) दोनों को वित्तीय प्रोत्साहन देती है:

  • नए कर्मचारियों के लिए: कार्यबल (Workforce) में पहली बार शामिल होने वाले कर्मचारियों को ₹15,000 तक का प्रोत्साहन दिया जाता है।
  • नियोक्ताओं (कंपनियों) के लिए: अतिरिक्त रोजगार सृजित करने वाले नियोक्ताओं को प्रति अतिरिक्त कर्मचारी ₹3,000 प्रति माह तक का प्रोत्साहन मिलता है।
  • सेक्टर-वार अवधि:
    • विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing Sector): आर्थिक विकास में इसकी रणनीतिक भूमिका को देखते हुए इस क्षेत्र के नियोक्ताओं को 4 वर्षों के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
    • अन्य सभी क्षेत्र: विनिर्माण के अलावा बाकी सेक्टर्स के नियोक्ता 2 वर्षों के लिए इस प्रोत्साहन का लाभ उठा सकते हैं।

अब तक की प्रगति और आगामी लक्ष्य

  • रोजगार सृजन: इस योजना ने अब तक देश भर में 15 लाख रोजगार के अवसरों को सहायता प्रदान की है।
  • भविष्य का लक्ष्य: दो साल की अवधि में 3.5 करोड़ से अधिक नौकरियों के सृजन को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य है।
  • नए कार्यबल का लक्ष्य: इन 3.5 करोड़ लाभार्थियों में से लगभग 1.92 करोड़ लाभार्थी ऐसे होने की उम्मीद है जो पहली बार औपचारिक कार्यबल में प्रवेश करेंगे।

भारत में श्रम बल का एक बहुत बड़ा हिस्सा अनौपचारिक क्षेत्र (Informal Sector) में काम करता है, जहाँ सामाजिक सुरक्षा (जैसे- पीएफ, पेंशन, बीमा) नहीं मिलती। PM-VBRY जैसी योजनाएं सीधे तौर पर नियोक्ताओं की लागत कम करके और कर्मचारियों को वित्तीय लाभ देकर रोजगार के ‘औपचारिकरण’ को बढ़ावा देती हैं, जो ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक है।

प्रीलिम्स के लिए अभ्यास प्रश्न (Prelims Practice Question)

प्रश्न: ‘प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना’ (PM-VBRY) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. इसके तहत पहली बार नौकरी पाने वाले कर्मचारियों को ₹15,000 तक का वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाता है।
  2. नए रोजगार पैदा करने पर नियोक्ताओं को प्रति अतिरिक्त कर्मचारी ₹3,000 प्रति माह तक का प्रोत्साहन मिलता है।
  3. विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing) और सेवा क्षेत्र (Service Sector) दोनों के नियोक्ताओं को समान रूप से 4 वर्षों के लिए यह प्रोत्साहन दिया जाता है।

ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

A) केवल 1 और 2

B) केवल 2 और 3

C) केवल 1 और 3

D) 1, 2 और 3

खाद्यान्न भंडारण के लिए ‘स्मार्ट वेयरहाउसिंग सिस्टम’ और ‘डिपो दर्पण’

 

हाल ही में, केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली के भारत मंडपम में खाद्यान्न भंडारण के लिए ‘स्मार्ट वेयरहाउसिंग सिस्टम’ (Smart Warehousing System) लॉन्च किया गया है। इसके साथ ही बेहतर प्रदर्शन करने वाले गोदामों को ‘डिपो दर्पण’ (Depot Darpan) फ्रेमवर्क के तहत सम्मानित भी किया गया।

स्मार्ट वेयरहाउसिंग सिस्टम (Smart Warehousing System) क्या है?

यह देश के सार्वजनिक खाद्यान्न भंडारण बुनियादी ढांचे (Public Storage Infrastructure) को आधुनिक और तकनीक-सक्षम बनाने के लिए खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (DFPD) द्वारा शुरू किया गया एक एकीकृत समाधान है।

  • तकनीकी समावेश: इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), ऑटोमेशन और डेटा एनालिटिक्स जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग किया गया है।
  • प्रमुख विशेषताएं:
    • ऑटोमेशन: गोदाम के मुख्य गेट और वेब्रिज (तौलकांटा) संचालन का पूरी तरह ऑटोमेशन।
    • डिजिटल एक्सेस: गोदामों में सुरक्षा और प्रवेश के लिए डिजिटल एक्सेस मैनेजमेंट।
    • स्मार्ट मॉनिटरिंग: अनाज की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए गोदाम के भीतर तापमान, नमी, कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) और फॉस्फीन गैस के स्तर की इंटेलिजेंट ट्रैकिंग।
    • डैशबोर्ड आधारित निगरानी: एकीकृत डैशबोर्ड के माध्यम से इन्वेंट्री की वास्तविक समय (Real-time) में दृश्यता और परिचालन की ओवरसाइट।

डिपो दर्पण (Depot Darpan) मूल्यांकन ढांचा

यह खाद्य भारतीय निगम (FCI), केंद्रीय भंडारण निगम (CWC) और अन्य राज्य/निजी गोदामों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग और उनके प्रदर्शन के मूल्यांकन के लिए पेश किया गया एक संरचित ढांचा (Performance-monitoring framework) है।

  • मूल्यांकन के आधार (Rating Criteria):
    • बुनियादी ढांचा (Infrastructure): सुरक्षा व्यवस्था, पर्यावरणीय कारक, तकनीकी समावेशन और नियमों का अनुपालन।
    • परिचालन दक्षता (Operational Efficiency): स्टॉक का टर्नओवर, अनाज का नुकसान, स्पेस (स्थान) का उपयोग, लागत प्रभावशीलता और स्वच्छता।
  • उद्देश्य: गोदाम प्रबंधकों के बीच प्रतिस्पर्धा की भावना पैदा करना ताकि बुनियादी ढांचे, सुरक्षा, स्वच्छता और सेवा तत्परता में निरंतर सुधार हो सके।
  • दायरा: यह देश भर के लगभग 2,278 गोदामों को कवर करता है।

राष्ट्रीय अभियानों के साथ जुड़ाव और महत्व

यह पहल भारत सरकार की विभिन्न रणनीतिक दूरदृष्टि के अनुकूल है:

  • Digital India और IndiaAI मिशन: भंडारण डेटा को डिजिटल और स्वचालित करने के लिए।
  • PM GatiShakti: खाद्यान्न की सुगम और कुशल रसद (Logistics) एवं आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए।
  • खाद्य सुरक्षा (Food Security): यह आधुनिक प्रणाली देश के 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों तक पहुंचने वाले अनाज की बर्बादी (Storage Losses) को रोकेगी, जिससे दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

प्रीलिम्स के लिए अभ्यास प्रश्न (Prelims Practice Question)

प्रश्न: हाल ही में चर्चा में रहे ‘डिपो दर्पण’ (Depot Darpan) पोर्टल का मुख्य उद्देश्य क्या है?

A) देश के सभी रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण और सुरक्षा बढ़ाना।

B) खाद्यान्न भंडारण डिपो/गोदामों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग और उनका प्रदर्शन मूल्यांकन करना।

C) उर्वरक वितरण प्रणाली को पारदर्शी और सुगम बनाना।

D) कृषि मंडियों में फसलों की ई-नीलामी को बढ़ावा देना।

भारत का रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड स्तर (₹1.78 लाख करोड़) पर

 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष (FY) 2025-26 में भारत का वार्षिक रक्षा उत्पादन (Defence Production) अब तक के सर्वकालिक उच्च स्तर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंच गया है। यह उपलब्धि ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत रक्षा विनिर्माण में बढ़ती आत्मनिर्भरता को प्रदर्शित करती है।

रक्षा उत्पादन: मुख्य सांख्यिकी और विकास दर

  • वार्षिक वृद्धि: वित्तीय वर्ष 2025-26 का उत्पादन पिछले वित्त वर्ष (2024-25) के ₹1.54 लाख करोड़ की तुलना में 15.6% की वृद्धि दर्शाता है।
  • दीर्घकालिक प्रगति:
    • वित्त वर्ष 2020-21 (₹84,643 करोड़) की तुलना में इसमें 110% की भारी बढ़ोतरी हुई है।
    • वित्त वर्ष 2013-14 (₹43,746 करोड़) की तुलना में स्वदेशी रक्षा उत्पादन में लगभग चार गुना की वृद्धि दर्ज की गई है।

सार्वजनिक बनाम निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी

रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र (Defence Ecosystem) में निजी क्षेत्र की भूमिका तेजी से बढ़ रही है:

  • सार्वजनिक क्षेत्र (PSUs): रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (DPSUs) और अन्य सार्वजनिक उपक्रमों का कुल उत्पादन में सबसे बड़ा हिस्सा 76% रहा।
  • निजी क्षेत्र (Private Sector): कुल उत्पादन में निजी क्षेत्र का योगदान बढ़कर 24% (लगभग ₹42,000 करोड़) हो गया है, जो इसका अब तक का सबसे उच्च स्तर है (यह वित्त वर्ष 2024-25 में 22% था)।

रक्षा निर्यात (Defence Exports) में उछाल

  • रक्षा उत्पादन में हुई इस अभूतपूर्व वृद्धि ने भारत के रक्षा निर्यात को मजबूत करने में मदद की है।
  • वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात ₹38,424 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।

इस वृद्धि के पीछे प्रमुख नीतिगत सुधार

भारत सरकार द्वारा रक्षा औद्योगिक आधार (Defence Industrial Base) को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं:

  • सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियाँ (Positive Indigenisation Lists): 5,000 से अधिक रक्षा मदों/कलपुर्जों के आयात पर चरणबद्ध प्रतिबंध लगाया गया है, जिससे घरेलू उद्योगों को बढ़ावा मिला।
  • iDEX (Innovations for Defence Excellence): रक्षा क्षेत्र में नवाचार और स्टार्ट-अप्स को शामिल करने के लिए वित्त पोषण।
  • रक्षा गलियारे (Defence Corridors): उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में विशेष रक्षा औद्योगिक गलियारों की स्थापना।
  • पूंजीगत बजट का सरलीकरण: घरेलू रक्षा खरीद के लिए रक्षा बजट का एक बड़ा हिस्सा आरक्षित किया जाना।

मरुस्थलीकरण और सूखा रोकथाम विश्व दिवस 2026

UPSC GS Paper 3 (पर्यावरण, पारिस्थितिकी और सतत विकास) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

चर्चा में क्यों?

हाल ही में, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने नई दिल्ली में ‘मरुस्थलीकरण और सूखा रोकथाम विश्व दिवस’ (World Day to Combat Desertification and Drought) के अवसर पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस दौरान भारत की ‘बॉन चैलेंज प्रगति रिपोर्ट’ (Bonn Challenge Progress Report) का दूसरा संस्करण भी जारी किया गया।

मरुस्थलीकरण और सूखा रोकथाम विश्व दिवस 2026

  • तिथि: हर साल 17 जून को यह दिवस मनाया जाता है।
  • वैधानिक ढांचा: यह आयोजन संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम अभिसमय (UNCCD) के तहत वैश्विक स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के लिए किया जाता है।
  • वर्ष 2026 की थीम: “Rangelands: Recognize. Respect. Restore.” (चारागाह भूमि: पहचानें। सम्मान करें। पुनर्स्थापित करें।)

बॉन चैलेंज (Bonn Challenge) और भारत की प्रगति

बॉन चैलेंज साल 2011 में शुरू की गई एक वैश्विक पहल है, जिसका उद्देश्य 2030 तक दुनिया भर में 350 मिलियन हेक्टेयर ख़राब और वनों से कटी हुई भूमि को बहाल (Restore) करना है।

  • भारत का लक्ष्य: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2030 तक 26 मिलियन हेक्टेयर बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने का वैश्विक संकल्प लिया है।
  • भारत की वर्तमान स्थिति (2026): भारत अपने लक्ष्य के मुकाबले अब तक 21.76 मिलियन हेक्टेयर भूमि को बहाली (Restoration) के प्रयासों के तहत ला चुका है।
  • रोजगार सृजन: इन बहाली गतिविधियों ने देश में लगभग 1.22 बिलियन मानव-दिवस (Person-days) का रोजगार पैदा किया है।

भारत में मरुस्थलीकरण की स्थिति

  • भारत का शुष्क क्षेत्र: देश में लगभग 228 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र शुष्क भूमि (Drylands) के अंतर्गत आता है।
  • क्षरण का दायरा: ‘भारत मरुस्थलीकरण और भूमि क्षरण एटलस’ के अनुसार, देश की 29.77% भौगोलिक भूमि (लगभग 97.85 मिलियन हेक्टेयर) वर्तमान में भूमि क्षरण और मरुस्थलीकरण से प्रभावित है।

भूमि बहाली के लिए भारत सरकार की प्रमुख पहलें

सरकार नीतिगत प्रतिबद्धता, वैज्ञानिक नवाचार और जनभागीदारी के समन्वय से काम कर रही है:

  • अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट (Aravalli Green Wall Initiative): इस बड़े लैंडस्केप-स्तरीय कार्यक्रम ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान अपने वार्षिक लक्ष्यों को पार कर लिया है।
  • PM कृषि सिंचाई योजना (WDC-PMKSY): इसके वाटरशेड विकास घटक के तहत 27 मिलियन हेक्टेयर से अधिक भूमि का उपचार किया गया है।
  • मिश्ती योजना (MISHTI): इसके तहत साल 2028 तक 54,000 हेक्टेयर मैंग्रोव क्षेत्र को पुनर्स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • संयुक्त वन प्रबंधन (JFM): यह लगभग 81.53 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करता है और दुनिया की सबसे बड़ी समुदाय-आधारित वन प्रबंधन प्रणालियों में से एक है।
  • सॉइल हेल्थ कार्ड (Soil Health Card): देश भर में 260 मिलियन से अधिक मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जा चुके हैं, जो मिट्टी के स्वास्थ्य को सुधारकर मरुस्थलीकरण रोकने में सहायक हैं।
  • डिजिटल मॉनिटरिंग: विज्ञान-आधारित योजना और निगरानी के लिए भुवन (Bhuvan), वेदास (VEDAS) और युक्तधारा (Yuktdhara) जैसे भू-स्थानिक (Geospatial) प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा रहा है।

प्रीलिम्स के लिए अभ्यास प्रश्न (Prelims Practice Question)

प्रश्न: ‘बॉन चैलेंज’ (Bonn Challenge), जो हाल ही में खबरों में देखा गया था, निम्नलिखित में से किससे संबंधित है?

A) वैश्विक स्तर पर ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को 50% तक कम करना।

B) खराब हो चुकी और वनों से कटी हुई भूमि की बहाली (Restoration) करना।

C) महासागरों में प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने के लिए एक वैश्विक संधि।

D) लुप्तप्राय प्रजातियों के अवैध शिकार को रोकने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top