22 june 2026 PIB Summary for upsc in hindi : आज के व्यापक पीआईबी (PIB) विश्लेषण में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण रणनीतिक, रक्षा और कूटनीतिक विकासों को कवर किया गया है। इसमें जीएस पेपर-3 (विज्ञान, प्रौद्योगिकी व रक्षा) के तहत भारतीय नौसेना में तीन स्वदेशी युद्धपोतों—अत्याधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट INS दूनागिरी, सबसे उन्नत हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण पोत INS संशोधक और एंटी-सबमरीन वारफेयर क्राफ्ट INS अग्रय के शामिल होने का रक्षा विश्लेषण प्रस्तुत है; साथ ही, ‘भारी जल बोर्ड बड़ौदा’ में नई परमाणु सुविधाओं का उद्घाटन भी शामिल है। जीएस पेपर-2 (अंतर्राष्ट्रीय संबंध) के अंतर्गत भारत की अध्यक्षता में गुरुग्राम में होने वाली 11वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक और आगरा में संपन्न हुए पहले ब्रिक्स एमएसएमई फोरम (BRICS MSME Forum) के मुख्य निष्कर्षों को रेखांकित किया गया है। अंत में, कला और संस्कृति के तहत मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (MIFF 2026) में प्रदर्शित भारतीय महिला नायिकाओं पर आधारित एनीमेशन श्रृंखला ‘भारती और बीबो’ का यूपीएससी-उन्मुख विश्लेषण शामिल है।
भारती और बीबो (MIFF 2026)
चर्चा में क्यों है?
- विश्व प्रीमियर: 19वें मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (MIFF 2026) में भारत की महिला प्रतीकों को समर्पित एक हिंदी एनिमेशन श्रृंखला ‘भारती और बीबो’ का वर्ल्ड प्रीमियर किया गया।
- निर्माण व निर्देशन: इस श्रृंखला का निर्माण राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (NFDC) और पपेटिका मीडिया के सहयोग से किया गया है, जिसका निर्देशन स्नेहा रविशंकर ने किया है।
पाठ्यक्रम (UPSC Syllabus)
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएँ, भारतीय कला और संस्कृति (एनिमेशन और आधुनिक मीडिया)।
- मुख्य परीक्षा:
- भारतीय विरासत और संस्कृति: भारतीय इतिहास की महत्वपूर्ण महिला व्यक्तित्व।
- सामाजिक मुद्दे: महिला अधिकार, लैंगिक समानता, और महिला सशक्तिकरण।
श्रृंखला की विशेषताएं
यह एडुटेनमेंट (शिक्षा और मनोरंजन) श्रृंखला युवा ‘भारती’ और उसके जादुई साथी ‘बीबो’ (जो भारत का स्त्री रूप है) के माध्यम से देश की चार महान महिला नायिकाओं की वास्तविक जीवन गाथाओं को प्रदर्शित करती है:
- अहिल्याबाई होल्कर: इंदौर की मराठा रानी के प्रशासनिक कौशल, कूटनीति और उनके नेतृत्व क्षमता के विकास को दर्शाया गया है।
- रानी दुर्गावती: गोंडवाना की रानी द्वारा अकबर के मुगल साम्राज्य के खिलाफ किए गए साहसपूर्ण प्रतिरोध और उनके बलिदान की कहानी है। इसमें पारंपरिक रूप से कोमलता का प्रतीक माने जाने वाले ‘गुलाबी रंग’ को साहस की सेना के रूप में उपक्रमित (subvert) किया गया है।
- रानी राशमोनी: कोलकाता की इस समाज सुधारक ने ईस्ट इंडिया कंपनी को चुनौती दी, सामाजिक कल्याण के बुनियादी ढांचे का निर्माण किया और ईश्वर चंद्र विद्यासागर के साथ मिलकर बहुविवाह पर रोक लगाने जैसे सुधारों का समर्थन किया।
- सालुमारदा थिम्मक्का: कर्नाटक की इस पर्यावरणविद् ने औपचारिक शिक्षा न मिलने के बावजूद सैकड़ों पेड़ों को अपने बच्चों की तरह पाला, जिसके लिए उन्हें ‘पद्म श्री’ से सम्मानित किया गया।
विशेष दृष्टिकोण: यह श्रृंखला केवल एक मातृसत्तात्मक ढांचे के बजाय एक संतुलित नारीवादी दृष्टिकोण को अपनाती है। इसमें रूढ़िवादिता को तोड़ते हुए महिलाओं को चालकों, किसानों, कलाकारों और वैज्ञानिकों के रूप में भी दिखाया गया है।
Prelims current affairs based Question
प्रश्न. हाल ही में चर्चा में रही एनिमेशन श्रृंखला ‘भारती और बीबो’ के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- इसका प्रीमियर 19वें मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (MIFF 2026) में किया गया था।
- यह श्रृंखला केवल भारत की स्वतंत्रता सेनानी महिलाओं के इतिहास पर केंद्रित है।
- इसका निर्माण राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (NFDC) के सहयोग से किया गया है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 2 और 3
(C) केवल 1 और 3
(D) 1, 2 और 3
उत्तर: (C) केवल 1 और 3
व्याख्या: कथन 2 गलत है क्योंकि इसमें स्वतंत्रता सेनानियों के अलावा पर्यावरणविद् (सालुमारदा थिम्मक्का) और मध्यकालीन व आधुनिक भारत की प्रशासनिक व सामाजिक सुधारक महिलाओं को भी शामिल किया गया है।
INS दुनागिरी, INS संशोधक और INS अग्रय
स्रोत: पीआईबी (PIB)
सिलेबस: GS Paper 3: बुनियादी ढांचा, सुरक्षा, और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी) तथा प्रारंभिक परीक्षा के लिए।
चर्चा में क्यों?
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 21 जून 2026 (अंतरराष्ट्रीय योग दिवस और विश्व हाइड्रोग्राफी दिवस) को श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट, कोलकाता (पश्चिम बंगाल) में भारतीय नौसेना के तीन स्वदेशी युद्धपोतों को राष्ट्र को समर्पित किया।
नव-कमीशन किए गए युद्धपोत और उनकी विशेषताएं
भारतीय नौसेना की युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो (Warship Design Bureau) द्वारा डिजाइन किए गए और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), कोलकाता द्वारा निर्मित इन तीनों जहाजों में 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है।
| युद्धपोत का नाम | प्रकार/श्रेणी | मुख्य भूमिका और सामरिक महत्व |
| INS दुनागिरी (INS Dunagiri) | एडवांस्ड स्टील्थ फ्रिगेट (Project 17A) | दुश्मन के रडार से बचने की क्षमता, तटीय सुरक्षा और आक्रामक अभियानों में सहायक। |
| INS संशोधक (INS Sanshodhak) | सर्वे वेसल – लार्ज (SVL) | गहरे समुद्र में हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण, महत्वपूर्ण खनिजों, ऊर्जा स्रोतों की खोज और मानचित्रण। |
| INS अग्रय (INS Agray) | एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW SWC) | तटीय जल में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने में सक्षम। |
भारत की समुद्री और रक्षा क्षमता
- बढ़ती स्वदेशी क्षमता: वर्तमान में भारतीय नौसेना के 45 प्रमुख नौसैनिक प्लेटफॉर्म निर्माणाधीन हैं, जबकि पिछले कुछ वर्षों में 40 से अधिक स्वदेशी युद्धपोत और पनडुब्बियां शामिल की जा चुकी हैं।
- रक्षा उत्पादन में उछाल: वर्ष 2014 में देश का कुल रक्षा उत्पादन लगभग ₹40,000 करोड़ था, जो वर्ष 2026 तक बढ़कर लगभग ₹1.8 लाख करोड़ हो गया है।
- रक्षा निर्यात में ऐतिहासिक वृद्धि: भारत का रक्षा निर्यात वर्ष 2014 के ₹700 करोड़ से बढ़कर वर्तमान में लगभग ₹40,000 करोड़ तक पहुंच गया है, और भारतीय रक्षा उपकरण दुनिया के 80 से अधिक देशों में निर्यात किए जा रहे हैं।
- MSME की भागीदारी: इन तीनों जहाजों के निर्माण में 200 से अधिक MSMEs ने योगदान दिया है, जो रक्षा क्षेत्र में व्यापक रोजगार सृजन को दर्शाता है।
नौसैनिक और समुद्री क्षेत्र से जुड़े नीतिगत सुधार
- शिपबिल्डिंग वित्तीय प्रोत्साहन: सरकार ने घरेलू निर्माण और मरम्मत क्षमताओं को बढ़ावा देने के लिए शिपिंग सेक्टर हेतु ₹70,000 करोड़ के प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की है।
- मिशन मोड दृष्टिकोण: पोत निर्माण (Shipbuilding), जहाज मरम्मत, रीसाइक्लिंग और MRO (Maintenance, Repair, and Overhaul) को अब एक प्रमुख राष्ट्रीय मिशन के रूप में देखा जा रहा है।
- सागरमाला परियोजना: बंदरगाहों के आधुनिकीकरण, कनेक्टिविटी में सुधार और तटीय क्षेत्रों में लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने के लिए इस एकीकृत दृष्टिकोण पर काम किया जा रहा है।
- ब्लू इकोनॉमी का केंद्र: पश्चिम बंगाल और हुगली नदी का क्षेत्र आने वाले समय में भारत की ‘ब्लू इकोनॉमी’, समुद्री विनिर्माण और तटीय विकास के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरने के लिए तैयार है।
“शांति की रक्षा के लिए शक्ति आवश्यक है, समृद्धि की सुरक्षा के लिए सुरक्षा जरूरी है, और भविष्य के निर्माण के लिए आत्मनिर्भरता अनिवार्य है।” भारत वर्तमान में रक्षा क्षेत्र में ‘क्रेता’ (Buyer) से ‘निर्माता’ (Producer) बनने की ओर तेजी से अग्रसर है।
हाल ही में ख़बरों में रहे ‘INS दुनागिरी’, ‘INS संशोधक’ और ‘INS अग्रय’ के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- इन तीनों युद्धपोतों का निर्माण गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), कोलकाता द्वारा किया गया है।
- INS दुनागिरी प्रोजेक्ट 17A के तहत एक उन्नत स्टील्थ फ्रिगेट है, जो ब्रह्मोस मिसाइलों से लैस है।
- INS संशोधक एक एंटी-सबमरीन वारफेयर क्राफ्ट है जिसे तटीय जल में पनडुब्बियों को नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (a)
व्याख्या: कथन 1 और 2 बिल्कुल सही हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि INS संशोधक एक ‘सर्वे वेसल – लार्ज’ (जल सर्वेक्षण पोत) है, जबकि एंटी-सबमरीन वारफेयर क्राफ्ट ‘INS अग्रय’ है।
GS Paper 3 – (बुनियादी ढांचा और सुरक्षा)
भारत के बढ़ते रक्षा विनिर्माण और निर्यात ग्राफ को रेखांकित करते हुए समझाइए कि ‘सागरमाला परियोजना’ और ‘ब्लू इकोनॉमी’ (नीली अर्थव्यवस्था) नीतियां किस प्रकार देश को वैश्विक मंच पर एक निर्णायक विनिर्माण केंद्र (Manufacturing Hub) के रूप में स्थापित कर सकती हैं? (150 शब्द, 10 अंक)
11वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक: भारत करेगा मेजबानी
22 June 2026 PIB Notes for UPSC: भारत अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता (BRICS Chairship 2026) के तहत 25-26 जून 2026 को गुरुग्राम, हरियाणा में 11वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करने जा रहा है। यह चौथा मौका है जब भारत ब्रिक्स की कमान संभाल रहा है।
सिलेबस: अंतर्राष्ट्रीय संबंध (GS Paper 2) और बुनियादी ढांचा व ऊर्जा (GS Paper 3)।
बैठक की थीम और मुख्य एजेंडा
- ब्रिक्स 2026 की मुख्य थीम: “Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability (BRICS)”।
- ऊर्जा ट्रैक की थीम: इस बार भारत ने “सर्वेषां ऊर्जम्” (Energy for All) का विचार सामने रखा है, जिसका सीधा मतलब है कि ऊर्जा पर सबका समान हक हो।
- तीन मुख्य प्राथमिकताएं: भारत ने इस पूरी चर्चा को तीन बड़े मुद्दों पर केंद्रित किया है:
- ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता (Energy Security and Sustainability)
- ऊर्जा तक पहुंच और निष्पक्षता (Energy Access and Equity)
- प्रौद्योगिकी और नवाचार (Technology and Innovation)
ब्रिक्स (BRICS) का नया स्वरूप और ताकत
विस्तार के बाद ब्रिक्स में अब 11 सदस्य देश शामिल हैं:
सदस्य देश: ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE)।
ये 11 देश मिलकर दुनिया की लगभग आधी आबादी और वैश्विक जीडीपी (GDP) का 40% हिस्सा संभालते हैं। इनमें प्रमुख तेल उत्पादक (जैसे सऊदी अरब, यूएई, ईरान) और सबसे बड़े उपभोक्ता (भारत, चीन) दोनों शामिल हैं, जो इस मंच को वैश्विक ऊर्जा नीतियों के लिए सबसे पावरफुल बनाते हैं।
भारत का ‘ऊर्जा परिवर्तन’
इस बैठक में भारत वैश्विक मंच पर अपनी उन बड़ी उपलब्धियों को सामने रखेगा, जो विकसित भारत 2047 के विजन का आधार हैं:
| क्षेत्र/पहल | भारत की उपलब्धि और लक्ष्य |
| सौर ऊर्जा | पिछले एक दशक में भारत ने अपनी सौर ऊर्जा क्षमता को 50 गुना से अधिक बढ़ाया है। |
| स्मार्ट मीटर | देश भर में अब तक 6 करोड़ से अधिक स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। |
| ऊर्जा भंडारण | साल 2032 तक 410 GWh ऊर्जा भंडारण (Energy Storage) क्षमता हासिल करने का लक्ष्य है। |
| बायोफ्यूल्स | भारत ने 20% एथेनॉल सम्मिश्रण का लक्ष्य पा लिया है और अब 80-85% एथेनॉल वाले E85 ईंधन को रोलआउट किया जा रहा है। |
| वैश्विक नेतृत्व | भारत इंटरनेशनल सोलर एलायंस (ISA) और ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस (GBA) के जरिए दुनिया का नेतृत्व कर रहा है। |
प्रमुख वैश्विक पहलें: OSOWOG
भारत इस बैठक के जरिए ‘वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड’ (OSOWOG) और ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर जैसी योजनाओं को बढ़ावा देगा। इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया भर के सौर ऊर्जा ग्रिडों को आपस में जोड़ना है ताकि जहां सूरज डूब रहा हो, वहां उस हिस्से से बिजली भेजी जा सके जहां सूरज चमक रहा है। इसके अलावा, बैठक से ठीक पहले कार्बन कैप्चर (CCUS) और ऊर्जा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका पर भी विशेष सेमिनार आयोजित किए गए हैं।
प्रीलिम्स के लिए अभ्यास प्रश्न (Prelims Practice Question)
प्रश्न: वर्ष 2026 में आयोजित हो रही 11वीं ब्रिक्स (BRICS) ऊर्जा मंत्रियों की बैठक के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- इस बैठक की मेजबानी भारत द्वारा गुरुग्राम में की जा रही है।
- इस वर्ष के ऊर्जा ट्रैक की थीम “सर्वेषां ऊर्जम्” (Energy for All) रखी गई है।
- सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ब्रिक्स के पूर्णकालिक सदस्य के रूप में इसमें भाग ले रहे हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
A) केवल 1 और 2
B) केवल 2 और 3
C) केवल 1 और 3
D) 1, 2 और 3
उत्तर: D (1, 2 और 3)
व्याख्या: तीनों कथन सही हैं। भारत 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और ऊर्जा मंत्रियों की बैठक गुरुग्राम में हो रही है। नए विस्तार के बाद सऊदी अरब और यूएई भी इसके सदस्य हैं।
प्रथम ब्रिक्स एमएसएमई फोरम: आगरा में सफल आयोजन
22 June 2026 PIB Notes for UPSC: भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता (BRICS Chairship 2026) के तहत उत्तर प्रदेश के आगरा में प्रथम ब्रिक्स एमएसएमई फोरम (1st BRICS MSME Forum) और तीसरी एसएमई वर्किंग ग्रुप (SME Working Group) की बैठक का सफल आयोजन किया गया। केंद्रीय एमएसएमई मंत्री श्री जीतन राम मांझी ने इस मंच से ब्रिक्स देशों के बीच छोटे उद्योगों को मजबूत करने के लिए सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया।
सिलेबस: अंतर्राष्ट्रीय संबंध (GS Paper 2) और भारतीय अर्थव्यवस्था व औद्योगिक विकास (GS Paper 3)
बैठक की मुख्य थीम और दृष्टिकोण
- केंद्रीय थीम: “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” (लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण)।
- वर्किंग ग्रुप का एजेंडा: ‘Building MSME Ecosystem – Sustainable Roots to Global Routes’ (एमएसएमई पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण – वैश्विक मार्गों के लिए टिकाऊ जड़ें)।
- भागीदारी: इस बैठक में ब्रिक्स के सदस्य देशों (जैसे ब्राजील, चीन, रूस, दक्षिण अफ्रीका, यूएई, ईरान, मिस्र आदि) के साथ-साथ सहयोगी देशों (जैसे बेलारूस, क्यूबा, मलेशिया, युगांडा) के नीति निर्माताओं और उद्यमियों ने हिस्सा लिया।
ब्रिक्स एमएसएमई सहयोग के प्रमुख स्तंभ
केंद्रीय मंत्री और नीति निर्माताओं ने ब्रिक्स देशों के बीच वार्ता से आगे बढ़कर व्यावहारिक सहयोग (Actionable Cooperation) पर जोर दिया, जिसके तहत निम्नलिखित बिंदुओं को रेखांकित किया गया:
- सस्ती वित्तीय पहुंच (Affordable Finance): छोटे उद्योगों को विकास के लिए आसानी से और कम लागत पर ऋण उपलब्ध कराना।
- डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI): भारत ने वैश्विक मंच पर प्रदर्शित किया कि कैसे उसका डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे UPI, ONDC) छोटे व्यवसायों को सशक्त बना रहा है।
- वैश्विक मूल्य श्रृंखला (Global Value Chains): एमएसएमई को केवल स्थानीय बाजारों तक सीमित न रखकर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Resilient Supply Chains) से जोड़ना।
- तकनीक और नवाचार (Technology Adoption): डिजिटल परिवर्तन और पर्यावरण के अनुकूल (Sustainable) व्यावसायिक तौर-तरीकों को साझा करना।
उत्तर प्रदेश का ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) मॉडल
इस फोरम में उत्तर प्रदेश के एमएसएमई मॉडल की विशेष सराहना की गई:
- पारंपरिक शिल्प कौशल: राज्य के जीवंत एमएसएमई क्षेत्र को प्रदर्शित करने के लिए एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।
- ODOP का महत्व: उत्तर प्रदेश की ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) जैसी पहलों ने स्थानीय उद्यमियों को सीधे वैश्विक बाजारों से जोड़ा है, जिससे ग्रामीण आजीविका मजबूत हुई है। इसे ब्रिक्स देशों के बीच ‘बेस्ट प्रैक्टिस’ के रूप में साझा किया गया।
एमएसएमई को ग्लोबल साउथ (Global South) और ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाओं में “आर्थिक विकास का इंजन” माना जाता है। भारत के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को प्राप्त करने के लिए इन उद्योगों का औपचारिकरण, डिजिटल समावेशन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग अनिवार्य है।
भारत का परमाणु कार्यक्रम: हेवी वाटर बोर्ड की नई उपलब्धियां
जीएस पेपर: GS-3 (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास)
प्रीलिम्स फोकस: VDPP, न्यूक्लियर-ग्रेड सोडियम, फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR)।
चर्चा में क्यों? (Context)
- 21 जून 2026: परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) के सचिव और परमाणु ऊर्जा आयोग (AEC) के अध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार मोहंती ने भारी जल बोर्ड सुविधा (HWBF, बड़ौदा) में दो स्वदेशी और रणनीतिक सुविधाओं का उद्घाटन किया:
- VDPP (बहुमुखी ड्यूटेरेटेड यौगिक उत्पादन संयंत्र)।
- 24 kA प्रोटोटाइप सोडियम सेल (Prototype Sodium Cell)।
दोनों तकनीकों का महत्व (Why Does This Matter?)
क) VDPP (Deuterated Compounds Production Plant)
- यह क्या है?: यह उच्च शुद्धता वाले विशिष्ट ‘ड्यूटेरेटेड सॉल्वैंट्स’ और यौगिकों का स्वदेशी उत्पादन करने वाला प्लांट है।
- महत्व: उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान और भारत के रणनीतिक/सीमांत तकनीकी कार्यक्रमों (Frontier Technologies) के लिए यह सामग्री बेहद जरूरी है। अभी तक इसके लिए आयात पर निर्भरता थी, जो अब कम होगी।
ख) 24 kA प्रोटोटाइप सोडियम सेल
- यह क्या है?: औद्योगिक पैमाने पर ‘न्यूक्लियर-ग्रेड सोडियम’ (Nuclear-grade Sodium) का उत्पादन करने वाली स्वदेशी तकनीक।
- FBR के लिए रीढ़ की हड्डी: यह भारत के फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR) कार्यक्रम के लिए सबसे महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
भारत के तीन चरणों वाले परमाणु कार्यक्रम से जुड़ाव (The Big Picture Connect)
- द्वितीय चरण (Stage-2) को मजबूती: भारत के परमाणु कार्यक्रम का दूसरा चरण फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों (FBR) पर आधारित है। इन रिएक्टरों में तरल सोडियम (Liquid Sodium) का उपयोग कूलेंट (Coolant – शीतलक) के रूप में किया जाता है।
- आत्मनिर्भरता: न्यूक्लियर-ग्रेड सोडियम का देश में ही बड़े पैमाने पर उत्पादन होने से भारत अपने दूसरे चरण के परमाणु लक्ष्यों को बिना किसी बाहरी रुकावट के हासिल कर सकेगा।
भारत का अंतरिक्ष अभियान: विज़न 2047
सिलेबस: GS-3 (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की उपलब्धियां)
प्रीलिम्स फैक्ट्स फोकस: मिशन वर्ष, तकनीकी विशेषताएं, वैश्विक रैंकिंग।
1. भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र का बदलता ढांचा (The Big Picture)
पिछले 12 वर्षों में भारत का स्पेस प्रोग्राम ‘केवल वैज्ञानिक अनुसंधान’ से बदलकर रणनीतिक एवं आर्थिक परिसंपत्ति (Strategic & Economic Asset) बन चुका है।
- प्रमुख प्रेरक तत्व (Drivers): आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया और विकसित भारत @2047।
- स्टार्टअप क्रांति: वर्ष 2014 में देश में केवल 1 स्पेस स्टार्टअप था, जो फरवरी 2026 तक बढ़कर 400 से अधिक हो चुके हैं।
- नीतिगत सुधार: प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) मानदंडों का उदारीकरण, निजी क्षेत्र की भागीदारी और NSIL (न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड) द्वारा व्यावसायिक उपयोग को बढ़ावा।
2. चंद्रयान कार्यक्रम
भारत ने चंद्रमा के रहस्यों को सुलझाने में वैश्विक स्तर पर अग्रणी भूमिका निभाई है:
| मिशन | लॉन्च वर्ष | मुख्य उपलब्धि / लक्ष्य |
| चंद्रयान-1 | 2008 | चंद्रमा की सतह पर जल के अणुओं ($H_2O$) और हाइड्रॉक्सिल की खोज की। |
| चंद्रयान-2 | 2019 | इसके ऑर्बिटर ने 30 सेमी तक की उच्चतम रिज़ॉल्यूशन वाली तस्वीरें प्रदान कीं। |
| चंद्रयान-3 | 23 अगस्त 2023 | चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव (69.3° S) पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला दुनिया का पहला देश बना। सतह पर सल्फर (S) की उपस्थिति की पुष्टि की। |
| चंद्रयान-4 | 2027 (प्रस्तावित) | चंद्रमा की सतह से सैंपल रिटर्न (नमूने वापस लाना) मिशन। |
| चंद्रयान-5 / LUPEX | आगामी | जापानी स्पेस एजेंसी (JAXA) के साथ मिलकर स्थायी छाया वाले क्षेत्रों में पानी की खोज। |
3. अंतर्ग्रहीय एवं सौर मिशन (Interplanetary & Solar Missions)
क) मंगलयान (Mars Orbiter Mission – MOM)
- लॉन्च: 2014 में अपने पहले ही प्रयास में मंगल की कक्षा में प्रवेश करने वाला भारत दुनिया का पहला देश बना।
- उपलब्धि: 6 महीने के जीवनकाल के लिए डिज़ाइन किया गया यह मिशन 8 से अधिक वर्षों तक सक्रिय रहा। इसने मंगल के वायुमंडल और सौर हवाओं का अध्ययन किया।
ख) आदित्य-L1 (Aditya-L1)
- प्रकृति: भारत की पहली समर्पित सौर वेधशाला (Solar Observatory)।
- स्थिति: इसे पृथ्वी से 15 लाख किमी दूर सूर्य-पृथ्वी लैग्रेंज बिंदु 1 ($L_1$) के हेलो ऑर्बिट में स्थापित किया गया है।
- डेटा: अब तक 27 TB से अधिक वैज्ञानिक डेटा सार्वजनिक किया जा चुका है, जो सौर कोरोना और स्पेस वेदर (अंतरिक्ष मौसम) के अध्ययन में मदद कर रहा है।
4. उन्नत अंतरिक्ष विज्ञान और डॉकिंग तकनीक
क) खगोल विज्ञान मिशन
- एस्ट्रोसैट (AstroSat): भारत की पहली मल्टी-वेवलेंथ स्पेस वेधशाला, जिसने सितंबर 2025 में कक्षा में 10 वर्ष पूरे किए।
- एक्सपोसैट (XPoSat): 1 जनवरी 2024 को लॉन्च किया गया, जो एक्स-रे ध्रुवणमापन (X-ray Polarimetry) के लिए समर्पित है।
ख) स्पैडेक्स (SPADEX – Space Docking Experiment)
- लॉन्च: जनवरी 2025।
- महत्व: भारत अंतरिक्ष में स्वायत्त डॉकिंग और अनडॉकिंग (Autonomous Docking) तकनीक का प्रदर्शन करने वाला दुनिया का चौथा देश बना।
- उपयोगिता: यह तकनीक आगामी भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) और चंद्रयान-4 के लिए रीढ़ की हड्डी साबित होगी।
ग) शुक्रयान (Venus Orbiter Mission)
- लॉन्च लक्ष्य: मार्च 2028।
- उद्देश्य: शुक्र ग्रह की भूविज्ञान, वायुमंडल और सौर गतिविधियों के प्रभाव का अध्ययन।
- चुनौती: इसमें पहली बार एयरोब्रेकिंग (Aerobraking) और उन्नत थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम का उपयोग किया जाएगा।
5. मानव अंतरिक्ष उड़ान और भविष्य का इंफ्रास्ट्रक्चर
क) गगनयान मिशन (Gaganyaan)
- लक्ष्य: 3 भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को 400 किमी की निचली पृथ्वी कक्षा (LEO) में 3 दिनों के लिए भेजना और सुरक्षित वापस लाना।
- वर्तमान स्थिति: वर्ष 2025-2026 में अंतिम चरण के परीक्षण जारी हैं।
प्रीलिम्स बूस्टर: एक्सीओम-4 (Axiom-4) मिशन
जून-जुलाई 2025 में इसरो-नासा के सहयोग से ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने स्पेसएक्स ड्रैगन अंतरिक्ष यान के जरिए अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की यात्रा की। वहाँ उन्होंने सूक्ष्म-गुरुत्वाकर्षण (Microgravity) में फसल व्यवहार और मांसपेशियों के पुनर्जनन से जुड़े 7 महत्वपूर्ण प्रयोग किए।
ख) भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Bharatiya Antariksh Station – BAS)
- परिकल्पना: यह स्पेस विज़न 2047 का मुख्य स्तंभ है। यह 5 मॉड्यूल वाला एक स्टेशन होगा।
- पहला चरण: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसके पहले मॉड्यूल BAS-01 को 2028 तक लॉन्च करने की मंजूरी दे दी है।
6. निजी क्षेत्र की भागीदारी और नीतिगत सुधार (Private Sector & Reforms)
वर्ष 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी खिलाड़ियों के लिए खोलने और भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 के बाद भारत में एक जीवंत स्पेस इकोसिस्टम तैयार हुआ है।
- इकोसिस्टम का विकास: वर्ष 2014 में देश में केवल 1 पंजीकृत स्पेस स्टार्टअप था, जो फरवरी 2026 तक बढ़कर 400+ हो गया है। इसमें अब तक $500 मिलियन से अधिक का निवेश आ चुका है (अकेले 2025 में $150 मिलियन)।
- प्रमुख स्टार्टअप्स: Pixxel, Dhruva Space, Skyroot Aerospace, Agnikul Cosmos, और Bellatrix Aerospace।
- नियामक ढांचा (NGP 2024): IN-SPACe द्वारा ‘Norms, Guidelines and Procedures (NGP) 2024’ जारी किया गया है, जो निजी गतिविधियों के लिए पारदर्शी और एकल-खिड़की प्राधिकरण (Single-window authorization) प्रदान करता है।
उदारीकृत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नीति (फरवरी 2024)
| क्षेत्र / गतिविधि | एफडीआई (FDI) सीमा | रूट (Route) |
| सैटेलाइट निर्माण और संचालन, डेटा उत्पाद | Up to 74% | ऑटोमैटिक रूट (Automatic) |
| लॉन्च व्हीकल (रॉकेट), स्पेसपोर्ट और संबद्ध सिस्टम | Up to 49% | ऑटोमैटिक रूट (Automatic) |
| सैटेलाइट और ग्राउंड-सेगमेंट के पुर्जे/उपप्रणाली निर्माण | 100% | ऑटोमैटिक रूट (Automatic) |
- वित्तीय प्रोत्साहन: सरकार द्वारा ₹1,000 करोड़ का वेंचर कैपिटल फंड और ₹500 करोड़ का टेक्नोलॉजी अडॉप्शन फंड शुरू किया गया है।
7. अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का व्यावसायीकरण (Space Economy)
- वर्तमान स्थिति: भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था वर्तमान में $8 बिलियन (वैश्विक हिस्सेदारी का 2–3%) है।
- लक्ष्य: अगले दशक में इसे 5 गुना बढ़ाकर $40–45 बिलियन करना और 2030 तक वैश्विक हिस्सेदारी 8% तक पहुँचाना।
प्रमुख संस्थागत परिणाम (Economic Survey 2025-26)
- NSIL (न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड – स्थापना 2019): इसका राजस्व FY 2021-22 के ₹321.77 करोड़ से बढ़कर FY 2024-25 में ₹3,246.09 करोड़ हो गया है। यह इसरो की तकनीकों और लॉन्च सेवाओं का व्यावसायिक उपयोग करती है।
- तकनीक हस्तांतरण (Technology Transfer): 31 जनवरी 2026 तक IN-SPACe ने इसरो की 71 तकनीकों को निजी उद्योगों और स्टार्टअप्स को ट्रांसफर किया है। इसमें SSLV तकनीक का HAL को हस्तांतरण (2025) शामिल है।
- निजी उपग्रह: 6 गैर-सरकारी संस्थाओं (NGEs) ने 18 उपग्रह लॉन्च किए हैं और 25 पेलोड POEM प्लेटफॉर्म पर भेजे गए हैं।
- पीपीपी मॉडल (2026): इसके तहत ‘अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट कंसोर्टियम’ को मंजूरी दी गई है।
8. आत्मनिर्भर अंतरिक्ष परिवहन और इंफ्रास्ट्रक्चर (Launch Vehicles)
वर्तमान क्षमता (Operational Fleet)
भारत वर्तमान में अपने तीन मुख्य रॉकेटों—PSLV, GSLV और LVM3 के माध्यम से:
- निचली पृथ्वी कक्षा (LEO) में 10 टन तक।
- जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में 4.2 टन तक के उपग्रह भेजने में आत्मनिर्भर है।
भविष्य की तैयारी (Next-Gen Tech)
- NGLV (Next Generation Launch Vehicle): सरकार ने इसके विकास को मंजूरी दी है, जो LEO में 30 टन तक पेलोड ले जाने में सक्षम होगा।
- पुनः प्रयोज्य तकनीक (Reusable Tech): लागत कम करने के लिए NGLV का एक आंशिक रूप से पुनः प्रयोज्य (Partially Reusable) संस्करण विकसित किया जा रहा है (क्षमता: 14 टन LEO)। इसके अतिरिक्त एक ‘विंग्ड बॉडी अपर स्टेज’ पर काम चल रहा है जो अंतरिक्ष से लौटकर रनवे पर स्वायत्त लैंडिंग (Autonomous landing) करेगा।
9. नए स्पेसपोर्ट और बुनियादी ढांचा (New Spaceports)
- कुलशेखरपट्टिनम (तमिलनाडु): यहाँ भारत का दूसरा स्पेसपोर्ट विकसित किया जा रहा है।
- SSLV कॉम्प्लेक्स: इसका शिलान्यास 28 फरवरी 2024 को किया गया, जो सालाना 20–25 छोटे उपग्रहों की लॉन्चिंग को सपोर्ट करेगा। इसकी पहली लॉन्चिंग का लक्ष्य FY 2026-27 है।
- तीसरा लॉन्च पैड (श्रीहरिकोटा): जनवरी 2025 में ₹3,984.86 करोड़ की लागत से इसकी मंजूरी दी गई, जो विशेष रूप से नेक्स्ट-जेन रॉकेट्स, मानव अंतरिक्ष मिशन (गगनयान) और भविष्य के चंद्र मिशनों को सहायता देगा।
10. प्रणोदन प्रौद्योगिकियों में प्रगति (Propulsion Technologies)
इसरो मिशनों की परिचालन लचीलापन, पेलोड क्षमता और लागत दक्षता बढ़ाने के लिए अगली पीढ़ी की प्रोपल्शन तकनीकों का विकास कर रहा है:
- इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम (EPS): यह तकनीक उपग्रहों के जीवनकाल को बढ़ाएगी। EPS का उपयोग करने वाले भारत के पहले परिचालन उपग्रह का प्रक्षेपण वर्ष 2026-27 के दौरान प्रस्तावित है।
- विकाश इंजन (Vikas Engine): इसके थ्रॉटलिंग (Throttling) क्षमताओं में महत्वपूर्ण सफलता मिली है, जो रॉकेटों की वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग (VTOL – Reusable Rockets) के लिए आवश्यक है।
- CE20 क्रायोजेनिक इंजन: इसमें नई बूटस्ट्रैप इग्निशन टेक्नोलॉजी (Bootstrap Ignition Technology) जोड़ी गई है, जो अंतरिक्ष में मिशन के दौरान इंजन को मल्टीपल रीस्टार्ट (कई बार शुरू) करने की सुविधा देती है।
- SSLV अपग्रेड: स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल के ऊपरी चरण (Upper Stage) के द्रव्यमान (Mass) को कम करके इसकी पेलोड क्षमता में ~90 किलोग्राम का सुधार किया गया है।
11. पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण यान (RLV-TD प्रोग्राम)
अंतरिक्ष में पहुँच की लागत को कम करने के लिए इसरो का RLV-TD (Reusable Launch Vehicle – Technology Demonstrator) एक विंग्ड (पंखों वाले) विमान के आकार का फ्लाइंग टेस्ट बेड है।
- मुख्य उद्देश्य: हाइपरसोनिक उड़ान, स्वायत्त लैंडिंग (Autonomous Landing) और एकीकृत उड़ान प्रबंधन जैसी तकनीकों का विकास।
- उपलब्धि: 2016 के पहले सफल परीक्षण के बाद से, इस कार्यक्रम ने अब तक तीन सफल स्वायत्त रनवे लैंडिंग प्रयोग (Autonomous Runway Landing Experiments) पूरे कर लिए हैं।
12. स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑन-बोर्ड सिस्टम
विदेशी घटकों पर निर्भरता कम करने और मिशन सुरक्षा को मजबूत करने के लिए मेक इन इंडिया के तहत महत्वपूर्ण विकास:
- VIKRAM3201: इसरो और सेमीकंडक्टर प्रयोगशाला (SCL, चंडीगढ़) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित भारत का पहला पूर्णतः स्वदेशी 32-बिट स्पेस माइक्रोप्रोसेसर है।
- KALPANA32: उच्च-विश्वसनीयता (High-reliability) वाले अंतरिक्ष मिशनों के लिए निर्मित स्वदेशी चिप/सिस्टम।
13. वैश्विक मंच पर भारत की साख (International Cooperation)
अंतरिक्ष कूटनीति के मामले में पिछले दशक में भारत की विश्वसनीयता और वैश्विक नेतृत्व में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है:
- विदेशी उपग्रहों का प्रक्षेपण:
- 1990 के दशक से 2014 के बीच: केवल 35 विदेशी उपग्रह लॉन्च किए गए।
- 2014 के बाद से मार्च 2026 तक: यह संख्या तेजी से बढ़कर 399 विदेशी उपग्रहों तक पहुँच गई।
- अंतर्राष्ट्रीय समझौते: वर्ष 2026 तक भारत ने 61 देशों और 5 बहुपक्षीय संगठनों के साथ 300 से अधिक अंतरिक्ष सहयोग समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।
“नेबरहुड फर्स्ट” नीति: BIMSTEC स्पेस प्रोग्राम भारत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के माध्यम से बिम्सटेक (BIMSTEC) देशों का नेतृत्व कर रहा है। इसके तहत उत्तर-पूर्वी अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (NESAC) आपदा प्रबंधन और उपग्रह अनुप्रयोगों में क्षेत्रीय देशों को प्रशिक्षण दे रहा है। इसके साथ ही भारत ने साझा मौसम पूर्वानुमान के लिए बिम्सटेक मौसम और जलवायु केंद्र तथा क्षेत्रीय नैनो-सैटेलाइट्स का प्रस्ताव रखा है।
14. अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग एवं कूटनीति (Global Space Alliances)
भारत ने दुनिया की प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसियों के साथ रणनीतिक भागीदारी (Strategic Partnerships) स्थापित की है, जो भारत की तकनीकी विश्वसनीयता को दर्शाती है:
क) भारत-रूस सहयोग (ISRO & ROSCOSMOS)
- ऐतिहासिक संदर्भ: सोवियत संघ ने 1975 में भारत का पहला उपग्रह आर्यभट्ट लॉन्च किया था। 1984 में विंग कमांडर राकेश शर्मा सोवियत सोयुज T-11 मिशन के जरिए अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय बने।
- गगनयान में भूमिका: वर्ष 2018 में हुए समझौते के तहत रूस ने भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों (Gagandhoots) को प्रशिक्षण, लाइफ-सपोर्ट सिस्टम और क्रू-सेफ्टी (चालक दल सुरक्षा) तकनीक प्रदान की है।
- नेविगेशन: दोनों देश अपने उपग्रह नेविगेशन सिस्टम—NavIC (भारत) और GLONASS (रूस) के बीच सहयोग बढ़ा रहे हैं।
ख) भारत-अमेरिका सहयोग (ISRO & NASA)
- निसार (NISAR – NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar): यह दोनों देशों का संयुक्त पृथ्वी अवलोकन मिशन है, जिसे 30 जुलाई 2025 को GSLV-F16 रॉकेट के माध्यम से श्रीहरिकोटा से सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया।
- उपयोगिता: यह भूमि, ग्लेशियर, जंगलों और महासागरों में होने वाले सूक्ष्म बदलावों को ट्रैक कर जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के अध्ययन में मदद कर रहा है।
ग) भारत-फ्रांस सहयोग (ISRO & CNES)
- तृष्णा मिशन (TRISHNA – Thermal InfraRed Imaging Satellite): इसे वर्ष 2026 में लॉन्च किया जाना निर्धारित है।
- तकनीक व उपयोग: इसमें फ्रांस (CNES) का थर्मल इन्फ्रारेड उपकरण और इसरो का ऑप्टिकल सेंसर लगा है। यह फसलों के जल-तनाव (Crop water stress), शहरी पारिस्थितिकी तंत्र और ग्लेशियरों की उच्च-रिज़ॉल्यूशन थर्मल इमेजिंग करेगा।
घ) भारत-जापान सहयोग (ISRO & JAXA)
- लुपेक्स / चंद्रयान-5 (LUPEX – Lunar Polar Exploration): यह 2027-28 में जापान के H3 रॉकेट द्वारा लॉन्च किया जाने वाला एक संयुक्त चंद्र मिशन है।
- संरचना: इसमें इसरो द्वारा विकसित लैंडर और जापान (JAXA) का रोवर शामिल होगा। यह चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्रों में सतह के नीचे ड्रिलिंग करके पानी/बर्फ की खोज करेगा। इसमें नासा (NASA) और ईएसए (ESA) के उपकरण भी शामिल होंगे।
ङ) भारत-यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ISRO & ESA)
- संयुक्त आशय वक्तव्य (7 मई 2025): दोनों एजेंसियों ने मानव अंतरिक्ष मिशन (लो अर्थ ऑर्बिट और मून एक्सप्लोरेशन) के लिए समझौता किया है।
- भविष्य की राह: इसके तहत यूरोपीय अंतरिक्ष यात्रियों को भारत के आगामी भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) के मिशनों में शामिल होने के अवसर मिलेंगे।
15. अन्य द्विपक्षीय एवं क्षेत्रीय रणनीतिक कूटनीति
क) विकसित देशों के साथ नए जुड़ाव
- भारत-जर्मनी (जून 2026): भारत अब तक 11 जर्मन उपग्रह लॉन्च कर चुका है। जून 2026 की उच्च-स्तरीय बैठक में दोनों देशों ने सैटेलाइट/ऑप्टिकल कम्युनिकेशन, सूक्ष्म-गुरुत्वाकर्षण अनुसंधान (Microgravity) और ड्रोन तकनीक में सहयोग की पहचान की।
- भारत-इटली सामरिक कार्य योजना (2025-2029): नवंबर 2024 (जी20 शिखर सम्मेलन, रियो) में घोषित। इसके तहत इसरो और इतालवी अंतरिक्ष एजेंसी (ASI) पृथ्वी अवलोकन, हेलियोफिज़िक्स (Heliophysics – सूर्य का अध्ययन) और चंद्र विज्ञान पर वाणिज्यिक और वैज्ञानिक सहयोग बढ़ाएंगे।
ख) पश्चिम एशिया और उप-क्षेत्रीय कूटनीति
- भारत-सऊदी अरब (अप्रैल 2025): उपग्रह विकास, अंतरिक्ष विज्ञान और शिक्षा/अकादमिक क्षेत्र में सहयोग के लिए पहली बार समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
- भारत-मॉरीशस (जनवरी 2024): इसरो और मॉरीशस अनुसंधान और नवाचार परिषद (MRIC) संयुक्त रूप से ₹20 करोड़ की लागत से एक छोटा उपग्रह विकसित कर रहे हैं, जिसे भारत द्वारा वित्तपोषित किया जा रहा है।
ग) “नेबरहुड फर्स्ट” नीति: भारत-भूटान सहयोग
- शांतिपूर्ण उपयोग के लिए समझौता: वर्ष 2020 के अंत में हस्ताक्षरित इस समझौते के तहत पृथ्वी अवलोकन, उपग्रह संचार और नेविगेशन के क्षेत्र में भारत-भूटान संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group) काम कर रहा है, जो भूटान में आपदा प्रबंधन और संसाधन प्रशासन कोspace-based समाधान दे रहा है।
16. नाविक: भारत की स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली (NavIC)
विदेशी प्रणालियों (जैसे GPS) पर निर्भरता कम करने और रणनीतिक स्वायत्तता सुनिश्चित करने के लिए इसरो ने NavIC (Navigation with Indian Constellation) विकसित किया है।
- कवरेज क्षेत्र: यह भारत की मुख्य भूमि और उसकी सीमाओं से 1,500 किलोमीटर तक सटीक स्थिति (Positioning), नेविगेशन और समय (Timing) सेवाएं प्रदान करता है।
- पीढ़ीगत सुधार (Second-Gen Satellites): नेटवर्क को मजबूत करने के लिए मई 2023 में NVS-01 और जनवरी 2025 में NVS-02 का सफल प्रक्षेपण किया गया। विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए NVS-01 से NVS-05 तक कुल 5 उपग्रहों की योजना है।
- दैनिक जीवन में अनुप्रयोग:
- पावर-ग्रिड सिंक्रोनाइजेशन और वास्तविक समय में ट्रेनों की ट्रैकिंग।
- वाहनों की निगरानी, सार्वजनिक सुरक्षा अलर्ट और प्रशासनिक उपकरणों का जियो-टैगिंग (Geo-tagging)।
- मोबाइल चिपसेट्स में एकीकरण के लिए इसरो ने Qualcomm के साथ साझेदारी की है।
अंतर्राष्ट्रीय विस्तार: वर्ष 2025 में भारत ने दक्षिण अफ्रीका के साथ एक समझौता किया है, जिसके तहत वहाँ एक NavIC रेफरेंस स्टेशन (Reference Station) स्थापित किया जाएगा, जो इसकी वैश्विक पहुंच और सटीकता को बढ़ाएगा।
17. डेटा-संचालित शासन और लोक कल्याण (Space-Based Governance)
अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी वर्तमान में कृषि, जल शक्ति, ग्रामीण विकास मंत्रालयों और राज्य सरकारों के लिए बुनियादी ढांचा बन चुकी है:
क) खाद्य एवं जल सुरक्षा
- कृषि नियोजन: उपग्रह डेटा का उपयोग फसल क्षेत्र की मैपिंग, उत्पादन पूर्वानुमान, सूखा मूल्यांकन और उपज अनुमान के लिए किया जाता है (जो पीएम फसल बीमा योजना में सहायक है)।
- जल संसाधन: राष्ट्रीय जल विज्ञान परियोजना के तहत ‘इंडिया वाटर रिसोर्सेज इंफॉर्मेशन सिस्टम’ (India-WRIS) जल संसाधन नियोजन को बेहतर बना रहा है।
ख) आपदा प्रबंधन और प्रारंभिक चेतावनी (Disaster Management)
- निगरानी: चक्रवात, बाढ़, भूस्खलन और वनों की आग (Forest fires) की रियल-टाइम ट्रैकिंग।
- NDEM 5.0: राष्ट्रीय आपातकालीन प्रबंधन डेटाबेस (National Database for Emergency Management) निर्णय-समर्थन उपकरण और भू-स्थानिक जानकारी प्रदान करता है।
- SASAR: सैटेलाइट एडेड सर्च एंड रेस्क्यू (Satellite Aided Search and Rescue) कार्यक्रम संकटकालीन अलर्ट और आपातकालीन प्रतिक्रिया सेवाओं को संचालित करता है।
ग) ग्रामीण विकास एवं अवसंरचना
- पारदर्शिता: मनरेगा (MGNREGA), पीएम ग्राम सड़क योजना (PMGSY), पीएम कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) और अमृत (AMRUT) मिशन के तहत विकास कार्यों की जियो-टैगिंग और निगरानी।
- तटीय समुदाय: मछुआरों के लिए संभावित मत्स्य पालन क्षेत्र (PFZ – Potential Fishing Zone) परामर्श जारी करना, जिससे उनके ईंधन और समय की बचत होती है। सुरक्षा के लिए स्वदेशी डिस्ट्रेस अलर्ट ट्रांसमीटर (DATs) का उपयोग।
18. स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल प्लेटफॉर्म
क) टेलीमेडिसिन और सुदूर शिक्षा
- टेलीमेडिसिन: सुदूर और उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों (जैसे जम्मू-कश्मीर, लेह, लद्दाख और सियाचिन) में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने के लिए 179 टेलीमेडिसिन नोड्स संचालित हैं (इनमें से ~80 केवल उच्च-ऊंचाई वाले रणनीतिक क्षेत्रों में हैं)।
- पीएम ई-विद्या (PM e-VIDYA): शिक्षा की पहुंच बढ़ाने के लिए GSAT-15 और GSAT-9 उपग्रहों के माध्यम से 370 शैक्षणिक टीवी चैनलों का प्रसारण किया जा रहा है।
साउथ एशिया सैटेलाइट (GSAT-9) – अंतरिक्ष कूटनीति भारत द्वारा ₹450 करोड़ की लागत से पूरी तरह वित्तपोषित यह 2,230 किलोग्राम का भूस्थैतिक संचार उपग्रह मई 2017 में लॉन्च किया गया था। यह भारत की “नेबरहुड फर्स्ट” नीति के तहत सार्क (SAARC) क्षेत्र के पड़ोसी देशों (अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, मालदीव, नेपाल और श्रीलंका) के लिए एक उपहार है। इसमें 12 Ku-बैंड ट्रांसपोंडर हैं (प्रत्येक देश के लिए एक)। पाकिस्तान ने इस परियोजना से बाहर रहने का विकल्प चुना था। इसकी मिशन अवधि 12 वर्ष है।
ख) भू-पोर्टल (Geoportals) और नागरिक सेवाएं
इसरो विभिन्न नागरिक-केंद्रित और प्रशासनिक उपयोगों के लिए विशिष्ट भू-पोर्टल संचालित करता है:
- Bhuvan (भुवन), Bhoonidhi (भूनिधि), MOSDAC, और VEDAS: पृथ्वी अवलोकन, मौसम सेवाओं, बाढ़ प्रबंधन और बुनियादी ढांचे की निगरानी के लिए।
- DIGIPIN एकीकरण: राष्ट्रीय एड्रेसिंग सिस्टम (National Addressing System) के माध्यम से डिजिटल एड्रेसिंग को मजबूत करना।
निष्कर्ष: एक जिम्मेदार अंतरिक्ष महाशक्ति
पिछले 12 वर्षों में भारत की ‘स्पेस ओडिसी’ ने सिद्ध किया है कि उच्च तकनीकी प्रगति सीधे तौर पर जनकल्याण (Jan Kalyan) और विकास को गति दे सकती है। स्पेस विज़न 2047 की ओर बढ़ते हुए, भारत का ध्यान न केवल वैज्ञानिक सीमाओं को लांघने पर है, बल्कि वैश्विक मंच पर शांतिपूर्ण, जिम्मेदार और समावेशी विकास के लिए अंतरिक्ष मलबे के शमन और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने पर भी है।
एफआईएच हॉकी महिला नेशंस कप में भारत की जीत
जीएस पेपर: GS-1 (सामाजिक मुद्दे – महिला सशक्तिकरण) और GS-3 (खेल विकास और राष्ट्रीय गौरव)
प्रीलिम्स फैक्ट्स फोकस: एफआईएच (FIH) नेशंस कप, विजेता टीम, खेल के क्षेत्र में भारत की प्रगति।
चर्चा में क्यों?
- जून 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एफआईएच हॉकी महिला नेशंस कप (FIH Hockey Women’s Nations Cup) का खिताब जीतने पर भारतीय महिला हॉकी टीम को बधाई दी।
- प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर बधाई देते हुए इस जीत को देश के लिए गौरव और आने वाले युवाओं के लिए हॉकी खेलने की एक बड़ी प्रेरणा बताया।
एफआईएच महिला नेशंस कप:
- प्रतिस्पर्धा का स्वरूप: यह अंतर्राष्ट्रीय हॉकी महासंघ (FIH) द्वारा आयोजित एक महत्वपूर्ण टूर्नामेंट है, जो शीर्ष टीमों को प्रो-लीग (Pro-League) में पदोन्नति (Promotion) का अवसर देता है।
- भारतीय टीम का प्रदर्शन: भारतीय महिला हॉकी टीम ने पूरे टूर्नामेंट में असाधारण खेल का प्रदर्शन करते हुए चैंपियनशिप अपने नाम की।
- महत्व: यह जीत भारतीय महिला हॉकी के बढ़ते स्तर, बेहतर बुनियादी ढांचे और खिलाड़ियों के मानसिक और शारीरिक कौशल की मजबूती को प्रदर्शित करती है।
खेल क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी और महत्व
यूपीएससी मुख्य परीक्षा के दृष्टिकोण से खेल जगत में महिलाओं की ऐसी सफलताएं निम्नलिखित पहलुओं को मजबूत करती हैं:
- महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment): अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं की जीत पारंपरिक लैंगिक रूढ़ियों (Gender Stereotypes) को तोड़ती है और ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों की लड़कियों को खेलों को करियर के रूप में चुनने के लिए प्रेरित करती है।
- सॉफ्ट पावर और राष्ट्रीय गौरव (Soft Power & National Pride): खेल कूटनीति और वैश्विक टूर्नामेंटों में जीत भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को मजबूत करती है।
- बुनियादी ढांचे का प्रभाव: ‘खेलो इंडिया’ (Khelo India) और ‘टॉप्स’ (TOPS – Target Olympic Podium Scheme) जैसी सरकारी योजनाओं का जमीनी स्तर पर सकारात्मक परिणाम अब खेल के मैदानों में दिखने लगा है।