21 June 2026 PIB Summary for UPSC में भारत की वैश्विक सॉफ्ट पावर और पर्यावरण नीतियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम शामिल हैं। मुख्य आकर्षणों में कोलकाता में आयोजित ‘स्वस्थ आयु के लिए योग’ थीम पर आधारित 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस, जैव विविधता अधिनियम के तहत स्थानीय समुदायों को लाभ पहुंचाने वाला सफल एबीएस (ABS) फ्रेमवर्क, और पश्चिम बंगा दिवस के अवसर पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान का स्मरण प्रमुख हैं।
‘निर्भय चेतना’ अभियान (Nirbhay Chetna)
यह टॉपिक UPSC Civil Services Examination के GS Paper II (Governance, Panchayati Raj Institutions) और GS Paper III (Issues Related to Women & Gender Equality) के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
चर्चा में क्यों है?
हाल ही में, पंचायती राज मंत्रालय (MoPR) ने नई दिल्ली में 17-19 जून 2026 तक ‘निर्भय चेतना’ (Nirbhay Chetna) के तहत तीन दिवसीय ‘ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स’ (ToT) कार्यक्रम का आयोजन किया। यह जमीनी स्तर पर लैंगिक समानता और महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुरुषों को संवेदनशील बनाने की अपनी तरह की पहली वैश्विक पहल है।
‘निर्भय चेतना’ (Nirbhay Chetna) क्या है?
यह निर्भया फंड (Nirbhaya Fund) के तहत पंचायती राज मंत्रालय की एक अनूठी राष्ट्रीय पहल है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर शासन को जेंडर-रिस्पॉन्सिव (Gender-Responsive Governance) बनाना है।
- मूल उद्देश्य: पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) में निर्वाचित पुरुष प्रतिनिधियों (Male Elected Representatives) को महिलाओं की सुरक्षा, अधिकारों और उनके नेतृत्व के प्रति संवेदनशील बनाना।
- प्रशिक्षण मॉड्यूल: इसका ट्रेनिंग मॉड्यूल ‘ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया’ (Transform Rural India – TRI) द्वारा तैयार किया गया है।
- प्रशिक्षण मॉडल: यह एक ‘कैस्केडिंग मॉडल’ (Cascading Model) पर काम करेगा, जिसमें पहले मास्टर ट्रेनर्स तैयार होंगे, जो आगे चलकर ब्लॉक और विलेज स्तर पर ट्रेनिंग देंगे।
- पायलट प्रोजेक्ट: पहले बैच में 6 राज्यों (असम, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तराखंड) के 40 मास्टर ट्रेनर्स ने भाग लिया।
‘निर्भय रहो’ (Nirbhay Raho) पहल के तीन स्तंभ
‘निर्भय चेतना’ वास्तव में पंचायती राज मंत्रालय द्वारा 11 मार्च 2026 को शुरू की गई ‘निर्भय रहो’ व्यापक योजना का एक हिस्सा है। इस योजना के तीन प्रमुख घटक (Components) हैं:
| घटक का नाम | मुख्य फोकस / कार्य |
| 1. निर्भय नेत्री (Nirbhay Netri) | निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों (EWRs) की क्षमता निर्माण (Capacity Building) और उन्हें कानूनी रूप से जागरूक बनाना। |
| 2. निर्भय चेतना (Nirbhay Chetna) | निर्वाचित पुरुष प्रतिनिधियों को जेंडर इक्वलिटी और महिला सुरक्षा के मुद्दों पर संवेदनशील बनाना। |
| 3. निर्भय दृष्टि (Nirbhay Drishti) | तकनीकी सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पंचायतों के रणनीतिक ग्रामीण स्थानों पर CCTV कैमरे लगाना। |
इस पहल के बड़े लक्ष्य (Data & Targets)
- मास्टर ट्रेनर्स का निर्माण: राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर 28,500 मास्टर ट्रेनर्स का एक मजबूत कैडर तैयार किया जाएगा।
- विशाल कवरेज: इन ट्रेनर्स के माध्यम से देश भर के 17.5 लाख से अधिक निर्वाचित पुरुष प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित और संवेदनशील किया जाएगा।
मुख्य विषय और कार्यप्रणाली (Themes & Methodology)
इस कार्यक्रम में केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया गया है:
- पॉजिटिव मस्कुलिनिटी (Positive Masculinity): पुरुषों में रूढ़िवादिता को तोड़ना और उन्हें महिला सुरक्षा में भागीदार बनाना।
- सामुदायिक भागीदारी: सुरक्षा को केवल पुलिस का काम न मानकर, इसे एक सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में विकसित करना।
- प्रशिक्षण का तरीका: केस स्टडीज, ग्रुप डिस्कशन और ‘एक्सपेरिमेंटल लर्निंग’ (Experiential Learning) पर आधारित।
पश्चिम बंगा दिवस और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी
यह टॉपिक UPSC Civil Services Examination के GS Paper I (Modern Indian History & Post-Independence Consolidation) और Prelims (Important Personalities) के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
चर्चा में क्यों है?
20 जून 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘पश्चिम बंगा दिवस’ (Paschimbanga Divas) के अवसर पर पश्चिम बंगाल के नागरिकों को बधाई दी। इसके साथ ही, उन्होंने भारत के एकीकरण में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के अमूल्य योगदान को याद किया। आपको बता दें कि वर्ष 2026 डॉ. मुखर्जी की 125वीं जयंती (125th Jayanti) का वर्ष भी है।
पश्चिम बंगा दिवस (20 जून) का ऐतिहासिक महत्व
UPSC प्रीलिम्स और मेन्स दोनों के लिए इस तारीख का बैकग्राउंड समझना जरूरी है:
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (1947): 20 जून 1947 को बंगाल प्रांतीय विधानसभा (Bengal Legislative Assembly) के सदस्यों ने एक ऐतिहासिक बैठक की थी।
- विभाजन का निर्णय: इस बैठक में यह तय किया गया कि मुस्लिम बहुल इलाके पाकिस्तान का हिस्सा बनेंगे (जो बाद में पूर्वी पाकिस्तान और अब बांग्लादेश बना) और हिंदू बहुल इलाके भारत संघ का हिस्सा रहेंगे।
- अखंडता की रक्षा: इसी दिन यह सुनिश्चित हुआ था कि पश्चिम बंगाल भारत का एक अभिन्न अंग बना रहेगा।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और उनका योगदान
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी आधुनिक भारत के इतिहास में एक बेहद प्रभावशाली व्यक्तित्व रहे हैं।
| क्षेत्र | महत्वपूर्ण तथ्य / योगदान |
| जन्म एवं प्रारंभिक जीवन | उनका जन्म 1901 में हुआ था (वर्ष 2026 उनकी 125वीं जयंती है)। वे कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे कम उम्र के कुलपति (Vice-Chancellor) बने थे। |
| बंगाल विभाजन में भूमिका | उन्होंने मुस्लिम लीग के पूरे बंगाल को पाकिस्तान में मिलाने के प्लान का कड़ा विरोध किया और हिंदू बहुल क्षेत्रों के लिए पश्चिम बंगाल राज्य की स्थापना सुनिश्चित की। |
| राजनीतिक करियर | वे स्वतंत्र भारत की पहली कैबिनेट (1947) में उद्योग और आपूर्ति मंत्री (Minister for Industry and Supply) बने। |
| इस्तीफा और नई पार्टी | जवाहरलाल नेहरू के साथ ‘लियाकत-नेहरू समझौते’ (1950) पर वैचारिक मतभेद के कारण उन्होंने कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद 1951 में उन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना की। |
| जम्मू-कश्मीर मुद्दा | उन्होंने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 का पुरजोर विरोध किया और ‘एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे’ का नारा दिया। |
पश्चिम बंगाल का भारत में योगदान
- सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना: साहित्य, संगीत, कला और अध्यात्म (स्वामी विवेकानंद, रवींद्रनाथ टैगोर, श्री अरबिंदो)।
- वैज्ञानिक प्रगति: जगदीश चंद्र बोस, सत्येंद्र नाथ बोस जैसे वैज्ञानिकों ने वैश्विक मंच पर भारत का नाम रोशन किया।
- सामाजिक सुधार: राजा राममोहन राय और ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने सती प्रथा उन्मूलन और महिला शिक्षा जैसे आंदोलनों से आधुनिक भारत की नींव रखी।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 (International Day of Yoga)
यह टॉपिक UPSC Civil Services Examination के GS Paper I (Indian Culture – Ancient Knowledge Traditions), GS Paper II (Social Sector – Health & Governance) और Prelims के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
चर्चा में क्यों है?
21 जून 2026 को दुनिया भर में 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (IDY 2026) मनाया गया। इस वर्ष का मुख्य राष्ट्रीय कार्यक्रम कोलकाता में आयोजित किया गया। 2015 में अपनी शुरुआत के बाद से, यह आयोजन अब एक वार्षिक उत्सव से आगे बढ़कर प्रिवेंटिव हेल्थकेयर (बीमारियों से बचाव वाली स्वास्थ्य प्रणाली) का दुनिया का सबसे बड़ा जन-आंदोलन बन चुका है।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 की थीम (Theme)
थीम: ‘स्वस्थ आयु के लिए योग’ (Yoga for Healthy Ageing)
- महत्व: यह थीम बदलती वैश्विक जनसांख्यिकी (Aging Population) और लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों (NCDs) को ध्यान में रखकर चुनी गई है। इसका मुख्य उद्देश्य केवल जीवन के साल बढ़ाना नहीं, बल्कि उम्र बढ़ने के साथ जीवन की गुणवत्ता और शारीरिक-मानसिक क्षमता को बनाए रखना है।
योग का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक सफर (Historical Legacy)
- प्राचीन जड़े: योग की उत्पत्ति सिंधु-सरस्वती सभ्यता (लगभग 2700 ईसा पूर्व) में मिलती है। ‘योग’ शब्द संस्कृत की ‘युज’ धातु से बना है, जिसका अर्थ है जोड़ना या मिलना (शरीर और चेतना का मिलन)।
- साहित्यिक प्रमाण: वेदों, उपनिषदों, बौद्ध-जैन परंपराओं, रामायण और महाभारत में योग का विस्तृत उल्लेख है।
- व्यवस्थित रूप: महर्षि पतंजलि ने अपने ‘योग सूत्र’ के माध्यम से योगिक परंपराओं को संहिताबद्ध और व्यवस्थित ढांचा प्रदान किया।
- वैश्विक मान्यता (UN Recognition): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र (UN) ने 2014 में 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया, जिसे रिकॉर्ड 175 देशों का समर्थन मिला।
- UNESCO धरोहर: वर्ष 2016 में योग को यूनेस्को (UNESCO) की ‘अमूर्त सांस्कृतिक विरासत’ (Intangible Cultural Heritage) की सूची में शामिल किया गया।
कॉमन योग प्रोटोकॉल (Common Yoga Protocol – CYP)
दुनिया भर के लोग एक साथ, एक ही लय में योग कर सकें, इसके लिए आयुष मंत्रालय (Ministry of Ayush) ने शीर्ष योग गुरुओं के साथ मिलकर इसे तैयार किया है।
- अवधि: यह 45 मिनट का एक मानकीकृत (Standardized) अभ्यास क्रम है। इसमें शिथिलीकरण (Loosening practices), योगासन, कपालभाति, प्राणायाम और ध्यान शामिल हैं।
- 2026 का नया नियम: इस वर्ष संस्थाओं को मुख्य प्रोटोकॉल के साथ अपनी सुविधानुसार 15 मिनट का अतिरिक्त अभ्यास (जैसे- योग निद्रा, ध्यान या सत्संग) जोड़ने की अनुमति दी गई है।
योग दिवस 2026 से जुड़े प्रमुख मील के पत्थर (Key Highlights)
इस वर्ष योग दिवस की तैयारियों को देश की संस्कृति और वैश्विक मंच से जोड़ने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए:
| आयोजन / अभियान | मुख्य विशेषता / स्थान |
| मुख्य राष्ट्रीय समारोह | कोलकाता (पश्चिम बंगाल) में आयोजित। |
| गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड | 14 जून 2026 को एक विशेष लाइव सत्र में 4 लाख से अधिक लोगों ने एक साथ भाग लेकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया। |
| 100 दिवसीय काउंटडाउन | इसकी शुरुआत विज्ञान भवन (नई दिल्ली) से हुई। इसके बाद 75वें दिन लोनार क्रेटर (महाराष्ट्र), 50वें दिन कान्हा शांति वनम (हैदराबाद) और 25वें दिन खजुराहो के स्मारकों में योग कार्यक्रम हुए। |
| विशेष अभियान | ‘100 दिन, 100 शहर, 100 संगठन’ अभियान के जरिए योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया। |
स्वस्थ उम्र बढ़ने (Healthy Ageing) में योग की भूमिका
उम्र बढ़ने के साथ शरीर में होने वाले बदलावों को रोकने में योग विज्ञान बेहद व्यावहारिक भूमिका निभाता है:
- शारीरिक गतिशीलता और लचीलापन: ताड़ासन और त्रिकोणासन जैसे आसन रीढ़ की हड्डी को मजबूत रखते हैं और उठने-बैठने के गलत तरीकों (Postural Defects) को सुधारते हैं।
- तनाव और मानसिक स्वास्थ्य: अनुलोम-विलोम और भ्रामरी प्राणायाम मस्तिष्क को शांत करते हैं, जिससे बुजुर्गों में मानसिक एकाग्रता बढ़ती है और अकेलापन या अवसाद जैसी समस्याएं कम होती हैं।
भारत का ABS फ्रेमवर्क और जैव विविधता संरक्षण
यह टॉपिक UPSC Civil Services Examination के GS Paper III (Environment & Biodiversity – Conservation, Environmental Impact Assessment) और Prelims के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
चर्चा में क्यों है?
हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत के एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (ABS – Access and Benefit Sharing) फ्रेमवर्क ने जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की है। इस तंत्र के तहत अब तक 266 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई जा चुकी है, जिसमें से लगभग 145 करोड़ रुपये सीधे जमीनी स्तर के लाभार्थियों और स्थानीय समुदायों को वितरित किए गए हैं।
एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (ABS) क्या है?
यह जैव विविधता अधिनियम, 2002 (Biological Diversity Act, 2002) के तहत स्थापित एक कानूनी और व्यावहारिक ढांचा है।
- मूल अवधारणा: जब कोई कंपनी या अनुसंधान संस्थान किसी क्षेत्र के जैविक संसाधनों (जैसे- औषधीय पौधे, बीज, जड़ी-बूटियां) या पारंपरिक ज्ञान का व्यावसायिक उपयोग करता है, तो उससे होने वाले आर्थिक लाभ का एक निश्चित हिस्सा वहां के स्थानीय संरक्षकों (स्थानीय समुदायों, किसानों, पारंपरिक ज्ञान धारकों) के साथ साझा करना अनिवार्य होता है।
- संचालन: इसे राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (National Biodiversity Authority – NBA) द्वारा संचालित किया जाता है।
- फंड ट्रांसफर मैकेनिज्म: जैव विविधता नियम, 2024 के अनुसार, NBA इस राशि का 85 से 90 प्रतिशत हिस्सा संबंधित राज्य जैव विविधता बोर्डों (SBBs) को ट्रांसफर करता है, जो इसे आगे जमीनी लाभार्थियों तक पहुंचाते हैं।
प्रमुख आंकड़े और लाभार्थियों का दायरा (Key Data & Targets)
- कुल संचित राशि: वर्ष 2008 से अब तक 266 करोड़ रुपये से अधिक जुटाए गए (वित्तीय वर्ष 2025-26 में ₹21.26 करोड़ जुटाए गए)।
- कुल संवितरण: लगभग 145 करोड़ रुपये लाभार्थियों को दिए जा चुके हैं, जिसमें केवल वित्त वर्ष 2025-26 में ₹78 करोड़ बांटे गए।
- विशाल नेटवर्क: इस लाभ का सीधा फायदा 23 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों की 10,500 से अधिक जैव विविधता प्रबंधन समितियों (BMCs), 230 से अधिक किसानों और 6 राज्य वन विभागों को मिला है।
क्षेत्र-वार योगदान (Sector-Wise Analysis)
ABS मैकेनिज्म में मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों की हिस्सेदारी लगभग 91 प्रतिशत है:
| क्षेत्र (Sector) | योगदान (रुपये में) | कुल प्रतिशत हिस्सेदारी |
| लाल चंदन (Red Sanders) | ₹120 करोड़ | 45% (सबसे बड़ा हिस्सा) |
| बीज क्षेत्र (Seed Sector) | ₹84.61 करोड़ | 32.3% |
| फार्मास्यूटिकल्स और आयुष (AYUSH) | ₹36.61 करोड़ | 13.8% |
प्रमुख कॉर्पोरेट भागीदार: डाबर इंडिया, हिमालया वैलनेस, आर्गेनिक इंडिया, टाटा केमिकल्स और आईओसी (IOCL) जैसी बड़ी कंपनियां इस फ्रेमवर्क के तहत नियमों का अनुपालन कर रही हैं।
स्थानीय स्तर पर इन पैसों का उपयोग कहां होता है?
प्राप्त फंड का उपयोग पंचायतों और ग्रामीण स्तर पर पर्यावरण को बचाने के लिए किया जाता है:
- पीपुल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर (PBR): स्थानीय जैविक संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान का दस्तावेजीकरण करना।
- पर्यावरण बहाली: स्थानीय जैव विविधता का संरक्षण और नष्ट हो रहे प्राकृतिक आवासों का पुनर्धार (Habitat Restoration) करना।
- सामुदायिक बुनियादी ढांचा: औषधीय पादप पार्कों (Medicinal Plant Parks) और सामुदायिक जीन बैंकों की स्थापना करना।
- आजीविका संवर्द्धन: ग्रामीण और जनजातीय समुदायों के लिए सतत आजीविका के साधन विकसित करना।
वैश्विक समझौतों से जुड़ाव (International Synergy)
भारत का यह घरेलू मॉडल कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को सीधा पूरा करता है:
- नागोया प्रोटोकॉल (Nagoya Protocol): यह प्रोटोकॉल आनुवंशिक संसाधनों तक पहुंच और उनके उपयोग से होने वाले लाभों के निष्पक्ष साझाकरण से संबंधित है।
- कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क: यह विशेष रूप से इसके लक्ष्य 13 (Target 13) को मजबूत करता है जो न्यायसंगत लाभ साझाकरण की बात करता है।
- राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्य योजना (NBSAP) 2024-2030: भारत के अपने दीर्घकालिक पर्यावरण लक्ष्यों को पूरा करने में सहायक।
19वां मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (MIFF 2026) और ऑस्कर विजेता लघु फिल्में
यह टॉपिक UPSC Civil Services Examination के GS Paper I (Indian Culture – Art Forms & Contemporary Cinema Trends) और Prelims (Awards & Festivals) के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।
चर्चा में क्यों है?
जून 2026 में आयोजित 19वें मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (MIFF 2026) के अंतिम चरण में ‘ऑस्कर विजेता’ (Oscar Winners) सेक्शन दर्शकों और फिल्म समीक्षकों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा। इस विशेष श्रेणी के तहत भारतीय दर्शकों और नवोदित निर्देशकों को वैश्विक सिनेमा की चार कालजयी और ऑस्कर से सम्मानित शॉर्ट फिल्मों को देखने तथा उनकी अनूठी कहानी कहने की शैलियों (Storytelling Styles) को समझने का एक दुर्लभ अवसर प्राप्त हुआ।
MIFF 2026 में प्रदर्शित मुख्य ऑस्कर विजेता फिल्में
महोत्सव में दिखाई गई चारों लघु फिल्में अपनी विषय-वस्तु और तकनीकी नवाचार के कारण वैश्विक स्तर पर शीर्ष स्थान पा चुकी हैं:
| फिल्म का नाम | देश | निर्देशक | श्रेणी और मुख्य कथ्य (Theme) |
| आई एम नॉट ए रोबोट (I Am Not a Robot) | बेल्जियम, नीदरलैंड | विक्टोरिया वार्मरडैम | 2025 बेस्ट लाइव एक्शन शॉर्ट फिल्म: यह एक डार्क साई-फाई कॉमेडी है, जो ऑनलाइन कैप्चा (CAPTCHA) टेस्ट में बार-बार फेल होने वाली एक महिला की पहचान के संकट को मजाकिया अंदाज में दिखाती है। |
| इन द शैडो ऑफ साइप्रस (In the Shadow of Cypress) | ईरान | शिरीन सोहानी और हुसैन मोलायेमी | 2025 बेस्ट एनिमेटेड शॉर्ट फिल्म: समुद्र के किनारे की पृष्ठभूमि पर आधारित यह फिल्म पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) से जूझ रहे एक सेवानिवृत्त कप्तान और उसकी बेटी के जटिल रिश्तों को एनिमेट करती है। |
| द गर्ल हू क्राइड पर्ल्स (The Girl Who Cried Pearls) | कनाडा | क्रिस लैविस और मैसिएक स्ज़ेर्बोव्स्की | 2026 बेस्ट एनिमेटेड शॉर्ट फिल्म (98वें ऑस्कर): 20वीं सदी के मॉन्ट्रियल की इस कहानी में एक ऐसी लड़की को दिखाया गया है जिसके आंसू मोतियों में बदल जाते हैं, जो लालच और सच्चे प्यार के बीच के द्वंद्व को दर्शाती है। |
| टू पीपल एक्सचेंजिंग सलीवा (Two People Exchanging Saliva) | फ्रांस, अमेरिका | नताली मस्टियाटा और एलेक्जेंडर सिंह | 2026 बेस्ट लाइव एक्शन शॉर्ट फिल्म: एक ऐसी काल्पनिक और बेतुकी दुनिया की कहानी जहां थप्पड़ को मुद्रा (Currency) माना जाता है और चूमने पर मौत की सजा का प्रावधान है। |

मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (MIFF) के बारे में बुनियादी तथ्य
- स्थापना: यह दक्षिण एशिया में गैर-फीचर (वृत्तचित्र, लघु और एनिमेटेड) फिल्मों के लिए सबसे पुराना और सबसे बड़ा अंतर्राष्ट्रीय फिल्म उत्सव है, जिसकी शुरुआत 1989 में हुई थी।
- नोडल मंत्रालय: इसका आयोजन सूचना और प्रसारण मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (NFDC) द्वारा किया जाता है।
- उद्देश्य: दुनिया भर के वृत्तचित्र और लघु फिल्म निर्माताओं को एक साझा मंच प्रदान करना ताकि वे तकनीकी और कलात्मक विचारों का आदान-प्रदान कर सकें।