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24 June 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf 

24 June 2026 PIB Summary for UPSC प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विकास को समाहित करता है। आज के प्रमुख घटनाक्रमों में भारत के ‘क्रिटिकल मिनरल मिशन’ के तहत रणनीतिक खनिज ब्लॉकों की सफल नीलामी, वस्त्र मंत्रालय द्वारा कपड़ा निर्यात को 2030 तक $100 बिलियन पहुंचाने का रोडमैप, और IEPFA द्वारा लावारिस वित्तीय संपत्तियों को अनलॉक करने की नई पहल शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, INCOIS द्वारा जारी भारत का पहला विशेष ‘एल नीनो बुलेटिन’ हमारी ब्लू इकोनॉमी और तटीय सुरक्षा के लिए नए नीतिगत आयाम प्रस्तुत करता है।

चर्चा में क्यों? (Why in News?)

22 जून 2026 को संसद सदस्य श्री कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी द्वारा INCOIS का पहला विशेष एल नीनो बुलेटिन जारी किया गया। इस एडवाइजरी का मुख्य उद्देश्य चालू एल नीनो (El Niño) इवेंट के कारण भारत के समुद्री क्षेत्रों और तटीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों के प्रति सचेत करना है।

मुख्य चेतावनी: वर्तमान एल नीनो नवंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच अपने चरम (Peak) पर होगा, जिसके प्रभावस्वरूप हिंद महासागर में समुद्र की सतह का तापमान (SST) अप्रैल/मई 2027 तक सामान्य से अधिक बना रहेगा।

समुद्री क्षेत्रों पर एल नीनो का प्रभाव (Impacts of El Niño)

Super El Nino
24 June 2026 PIB Summary for UPSC

बुलेटिन के अनुसार, उत्तर हिंद महासागर (अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों) का समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र आगामी महीनों में, विशेष रूप से मार्च-मई 2027 के दौरान, भारी थर्मल स्ट्रेस (तापीय तनाव) से गुजरेगा। 24 June 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf 

क) मरीन इकोसिस्टम और मत्स्य पालन पर प्रभाव

  • कोरल ब्लीचिंग (प्रवाल विरंजन): तापमान बढ़ने से कोरल रीफ के बड़े पैमाने पर विरंजन होने का खतरा बढ़ गया है।
  • मरीन हीट वेव्स (Marine Heat Waves): समुद्र में गर्म लहरों के बार-बार आने की घटनाएं बढ़ेंगी।
  • मछलियों का पलायन: अनुकूल तापमान न मिलने के कारण सार्डिन और मैकेरल (Sardine & Mackerel) जैसी महत्वपूर्ण व्यावसायिक मछलियां अन्य क्षेत्रों में पलायन कर सकती हैं।
  • आकार में कमी: बदलते समुद्री वातावरण के कारण मछलियां अपने वांछित और सामान्य आकार तक नहीं बढ़ पाएंगी, जिससे मत्स्य उद्योग को सीधा नुकसान होगा।

ख) तटीय और समुद्री स्थिति (Sea State Indicator)

समुद्री परिस्थितियों को समझने के लिए नीचे दी गई तालिका को देखें:

क्षेत्र / तटसंभावित समुद्री स्थिति (Sea State)आर्थिक और सुरक्षा प्रभाव
बंगाल की खाड़ी / पूर्वी तटअत्यधिक अशांत (Rough) मानसूनतटीय क्षरण (Coastal Erosion) और बाढ़/जलभराव का खतरा अधिक।
अरब सागर / पश्चिमी तटसामान्य से अधिक शांत (Calmer)समुद्री ऑपरेटरों के लिए बेहतर वर्किंग विंडो; तटीय क्षरण का कम खतर

चर्चा में क्यों? (Why in News?)

23 जून 2026 को केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट अथॉरिटी (VOCPA – तूतीकोरिन, तमिलनाडु) में हरित ऊर्जा, डिजिटल नवाचार और सामाजिक बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई दूरगामी परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित किया।

इस अवसर पर पोर्ट की पहली ‘सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट’ जारी की गई, जिसमें बताया गया कि बंदरगाह ने अपने नेट कार्बन उत्सर्जन में 45% की ऐतिहासिक कमी दर्ज की है। इसके अतिरिक्त, स्वच्छ ऊर्जा और कम कार्बन वाले ऑपरेशन्स को सफलतापूर्वक अपनाने के कारण इसे आधिकारिक तौर पर ‘स्कोप-2 एमिशन फ्री पोर्ट’ (Scope-2 Emission Free Port) के रूप में मान्यता दी गई है, जो भारतीय समुद्री क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर है।

मुख्य आकर्षण और उपलब्धियां (Key Highlights & Achievements)

VOC पोर्ट ने पिछले चार वर्षों के भीतर पर्यावरण, तकनीक और समाज के मोर्चे पर व्यापक बदलाव किए हैं, जिन्हें नीचे वर्गीकृत किया गया है:

क) पर्यावरण और हरित ऊर्जा संक्रमण (Green Energy Transition)

  • नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy): पोर्ट की कुल बिजली खपत के समकक्ष लगभग 94% हिस्सा अब पूरी तरह रिन्यूएबल एनर्जी (सौर और पवन ऊर्जा) स्रोतों से पूरा हो रहा है।
  • कार्बन तीव्रता में गिरावट: पिछले 4 वर्षों में प्रति टन कार्गो हैंडलिंग पर होने वाले कार्बन उत्सर्जन (Carbon Intensity) को घटाकर लगभग आधा कर दिया गया है।
  • देश का पहला ग्रीन हाइड्रोजन पायलट: यह भारत का पहला ऐसा प्रमुख बंदरगाह बन गया है जहां हरित हाइड्रोजन पायलट प्रोजेक्ट को चालू किया गया है। इस बदलाव पर आईआईएम कलकत्ता ने “The Hydrogen Pivot” शीर्षक से एक विशेष केस स्टडी भी जारी की है।

ख) डिजिटल और सामाजिक बुनियादी ढांचा (Digital & Social Infrastructure)

  • PortGPT मोबाइल ऐप: VOC पोर्ट उद्यम-स्तर (Enterprise-grade) की जेनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म को मोबाइल ऐप के रूप में लागू करने वाला देश का पहला प्रमुख बंदरगाह बन गया है, जो डेटा-संचालित निर्णयों को तेज करेगा।
  • शैक्षणिक सहयोग: सतत बंदरगाह संचालन और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए गति शक्ति विश्वविद्यालय, वडोदरा के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) किया गया है, जिसके तहत यहाँ ‘मैरीटाइम लॉजिस्टिक्स एंड पोर्ट मैनेजमेंट’ में एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित होगा।
  • केंद्रीय विद्यालय: पोर्ट परिसर में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से एक नए केंद्रीय विद्यालय की शुरुआत की गई है, जो स्थानीय और पोर्ट कर्मचारियों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण CBSE शिक्षा प्रदान करेगा।

24 June 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf 

विशेषताविवरण
अवस्थिति (Location)तूतीकोरिन (Thoothukudi), तमिलनाडु (पूर्वी तट)।
प्रकृति (Nature)यह भारत के 12 प्रमुख बंदरगाहों (Major Ports) में से एक है और पूरी तरह एक कृत्रिम बंदरगाह (Artificial Port) है।
रणनीतिक महत्वमन्नार की खाड़ी में स्थित होने के कारण यह पूर्व-पश्चिम अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों के अत्यंत निकट है।

चर्चा में क्यों? (Why in News?)

23 जून 2026 को खान मंत्रालय (Ministry of Mines) ने भारत की खनिज सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की। केंद्र सरकार द्वारा आयोजित सातवें दौर (Seventh Tranche) की नीलामी के तहत 10 नए क्रिटिकल और रणनीतिक खनिज ब्लॉकों को सफलतापूर्वक नीलाम किया गया है।

इसके साथ ही, देश में अब तक सफलतापूर्वक नीलाम किए जा चुके महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉकों की कुल संख्या बढ़कर 56 हो गई है। इसके अलावा, अन्वेषण पारिस्थितिकी तंत्र (Exploration Ecosystem) को गति देने के लिए अन्वेषण लाइसेंस (Exploration Licence – EL) के दूसरे दौर के तहत 11 ब्लॉकों की नीलामी भी पूरी कर ली गई है।

मुख्य विशेषताएं और भौगोलिक विस्तार (Key Highlights)

खनिज क्षेत्र में किए गए इन हालिया सुधारों और नीलामियों के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

क) महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉक (Critical Mineral Blocks)

  • सफलता दर: केंद्र सरकार द्वारा नीलामी के लिए रखे गए 88 अनूठे खनिज ब्लॉकों में से 56 की सफल नीलामी हो चुकी है, जो 63% से अधिक की सफलता दर को दर्शाता है।
  • नए राज्यों में प्रवेश: सातवें दौर की नीलामी के माध्यम से पहली बार गुजरात, उत्तराखंड और तेलंगाना में महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉकों की नीलामी की गई है।
  • शामिल प्रमुख खनिज: इस दौर में ग्रेफाइट (Graphite), दुर्लभ मृदा तत्व (REE), वेनेडियम (Vanadium), टाइटेनियम (Titanium), ग्लौकोनाइट, रॉक फॉस्फेट और उनसे जुड़े खनिजों को शामिल किया गया है।

ख) अन्वेषण लाइसेंस (EL) फ्रेमवर्क का विस्तार

  • गहरे दबे खनिजों की खोज: निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की भागीदारी के जरिए गहरे दबे (Deep-seated) और महत्वपूर्ण खनिजों के व्यवस्थित अन्वेषण के लिए EL फ्रेमवर्क काम करता है।
  • नया भौगोलिक विस्तार: इसके दूसरे दौर के तहत पहली बार अरुणाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और ओडिशा तक इस ढांचे का विस्तार किया गया है। अब तक कुल 11 EL ब्लॉक नीलाम किए जा चुके हैं।

महत्वपूर्ण खनिज: रणनीतिक उपयोग (Critical Minerals & Strategic Sectors)

महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals)प्रमुख रणनीतिक अनुप्रयोग (Strategic Applications)
दुर्लभ मृदा तत्व (REE) और वेनेडियमइलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उपकरण, उन्नत विनिर्माण (Advanced Manufacturing)।
ग्रेफाइट और टाइटेनियमइलेक्ट्रिक वाहन (EV) बैटरी, स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियां, एयरोस्पेस।
रॉक फॉस्फेट और ग्लौकोनाइटकृषि क्षेत्र (उर्वरक उत्पादन) और औद्योगिक रसायन।

चर्चा में क्यों? (Why in News?)

23 जून 2026 को वस्त्र मंत्रालय (Ministry of Textiles) ने नई दिल्ली में दो दिवसीय विभागीय शिखर सम्मेलन का उद्घाटन किया, जिसका मुख्य विषय “Textiles for Global Markets: Strategy for Achieving USD 100 Billion Exports by 2030” है।

यह सम्मेलन कैबिनेट सचिवालय की ‘विभागीय शिखर सम्मेलन’ पहल के तहत आयोजित किया जा रहा है। इसका प्राथमिक उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग को मजबूत करके भारत के कपड़ा निर्यात को वर्तमान के लगभग 37 बिलियन डॉलर से बढ़ाकर 2030 तक 100 बिलियन डॉलर करना है।

शिखर सम्मेलन के मुख्य बिंदु और रणनीतिक स्तंभ (Key Highlights & Strategies)

यह शिखर सम्मेलन 36 राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों और लगभग 200 जिला-स्तरीय परामर्शों के बाद आयोजित किया गया है, जिसके तहत 36 राज्य निर्यात कार्य योजना (SEAPs) और 200 जिला निर्यात कार्य योजना (DEAPs) तैयार की गई हैं। सम्मेलन की रणनीतियों को तीन मुख्य स्तंभों में विभाजित किया गया है:

क) पीएम का ‘5F’ विजन (The 5F Vision)

यह पूरा रोडमैप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 5F दृष्टिकोण पर आधारित है:

यह दृष्टिकोण कच्चे माल के उत्पादन से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अंतिम उत्पाद की डिलीवरी तक पूरी आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को एकीकृत करता है।

ख) क्लस्टर और जिला-नेतृत्व वाली निर्यात रणनीति

  • प्रमुख क्लस्टर्स का विश्लेषण: सम्मेलन में भारत के चार बड़े कपड़ा केंद्रों—लुधियाना, तिरुपुर, सूरत और भदोही के विकास मॉडल और उनकी चुनौतियों पर गहन चर्चा की गई।
  • उत्पादन का विविधीकरण: वैश्विक मांग को देखते हुए भारत को केवल कपास (Cotton) पर निर्भर रहने के बजाय मैन-मेड फाइबर (MMF – कृत्रिम फाइबर जैसे पॉलिएस्टर, नायलॉन) आधारित कपड़ों के उत्पादन की ओर तेजी से बढ़ने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
  • पूर्वोत्तर और जीआई (GI) उत्पाद: पूर्वोत्तर राज्यों की पारंपरिक कपड़ा पहचान और जीआई उत्पादों (जैसे पश्मीना, स्थानीय हथकरघा) की ब्रांडिंग और ट्रेसबिलिटी (Traceability) बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

ग) निर्यात को गति देने वाले कारक (Export Enablers)

  • पीएम-मित्रा पार्क (PM-MITRA Parks): एकीकृत कपड़ा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना ताकि लॉजिस्टिक्स लागत को कम किया जा सके।
  • महत्वपूर्ण प्रकाशन: सम्मेलन के दौरान दो मार्गदर्शिकाएँ जारी की गईं — “Leveraging India’s recent FTAs – A Textiles Perspective” (हालिया मुक्त व्यापार समझौतों का लाभ उठाना) और “How to Export – A Textiles Perspective”

भारत के प्रमुख कपड़ा क्लस्टर और उनकी विशेषज्ञता

कपड़ा क्लस्टर (Cluster)राज्यमुख्य विशेषज्ञता / उत्पाद
लुधियाना (Ludhiana)पंजाबऊनी कपड़े (Woolens) और होजरी उद्योग।
तिरुपुर (Tiruppur)तमिलनाडुबुने हुए कपड़े (Knitted Garments) और रेडीमेड परिधान (कॉटन)।
सूरत (Surat)गुजरातसिंथेटिक और मैन-मेड फाइबर (MMF) टेक्सटाइल।
भदोही (Bhadohi)उत्तर प्रदेशहस्तनिर्मित कालीन (Hand-knotted Carpets) – जीआई टैग प्राप्त।

महत्त्वपूर्ण तथ्य

  • यह क्षेत्र भारत में कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता है।
  • 100 बिलियन डॉलर का लक्ष्य केवल बड़े उद्योगों से नहीं, बल्कि ‘चैंपियन और एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स’ (Aspirational Districts) के विकेंद्रीकृत विकास और तकनीकी वस्त्रों (Technical Textiles) में नवाचार के माध्यम से ही हासिल किया जा सकता है।

22 जून 2026 को कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के तहत काम करने वाले निवेशक शिक्षा और संरक्षण कोष प्राधिकरण (IEPFA) ने नई दिल्ली में “आपकी पूंजी आपका अधिकार – लर्निंग एंड वे फॉरवर्ड” विषय पर एक उच्च स्तरीय पैनल चर्चा का आयोजन किया।

इस अवसर पर देश में निष्क्रिय वित्तीय संपत्तियों को अनलॉक करने और निवेशकों को जागरूक बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पुस्तक “Claiming the Unclaimed: Unlocking the Potential of Idle Financial Assets in India” का विमोचन किया गया। इसका प्राथमिक उद्देश्य नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और वित्तीय संस्थानों के लिए एक व्यापक ज्ञान संसाधन तैयार करना है ताकि लावारिस पड़ी संपत्तियों को उनके सही मालिकों तक सुगमता से पहुँचाया जा सके।

विशेषताविवरण
मंत्रालय (Ministry)कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय (Ministry of Corporate Affairs), भारत सरकार।
प्राथमिक कार्यभारत में ‘निवेशक शिक्षा और संरक्षण कोष’ (IEPF) का प्रबंधन और प्रशासन करना।
सुरक्षा का दायरायह फंड में स्थानांतरित किए गए शेयरों (Shares), लावारिस लाभांश (Unclaimed Dividends), परिपक्व जमा (Matured Deposits) और डिबेंचर को उनके वास्तविक मालिकों को वापस दिलाने (Refund) की सुविधा प्रदान करता है।
उद्देश्यनिवेशकों के हितों की रक्षा करना और देश भर में वित्तीय साक्षरता/जागरूकता को बढ़ावा देना।

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