प्राकृतिक सौंदर्य और भू-गर्भिक विविधता से समृद्ध The hills of Northeast India (पूर्वोत्तर भारत की पहाड़ियाँ) देश के भूगोल में एक विशिष्ट स्थान रखती हैं। ब्रह्मपुत्र घाटी के बाद दक्षिण की ओर मुड़ने वाली ये पहाड़ियाँ पटकाई बुम, नागा, मणिपुर और मिजो हिल्स जैसी विभिन्न उप-श्रृंखलाओं में विभाजित हैं। यह क्षेत्र न केवल भारत और म्यांमार के बीच एक प्राकृतिक सीमारेखा का निर्माण करता है, बल्कि जैव-विविधता और भारी वर्षा के कारण अत्यधिक अनाच्छादन (Denudation) का गवाह भी है, जो इसे भौगोलिक अध्ययन के लिए बेहद महत्वपूर्ण बनाता है।
भौगोलिक पृष्ठभूमि
भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र भौगोलिक दृष्टिकोण से व्यापक भिन्नता रखता है। इस क्षेत्र में हिमालय, पूर्वांचल पहाड़ियाँ, प्रायद्वीपीय पठार के अन्तर्गत शिलांग का पठार तथा विशाल मैदान के अन्तर्गत असम का मैदान अवस्थित है।
पूर्वोत्तर भारत की पहाड़ियों का वर्गीकरण
(A) हिमालय पर्वत की पहाड़ियाँ
- मिरि पहाड़ियाँ
- डाफ्ला पहाड़ियाँ
- अबोर पहाड़ियाँ
- मिश्मी पहाड़ियाँ
(B) प्रायद्वीपीय पठार की पहाड़ियाँ (शिलांग का पठार
- जयंतिया पहाड़ियाँ
- पूर्वी खासी पहाड़ियाँ
- पश्चिमी खासी पहाड़ियाँ
- पूर्वी गारो पहाड़ियाँ
- पश्चिमी गारो पहाड़ियाँ
- तुरा पहाड़ियाँ
(C) पूर्वांचल की पहाड़ियाँ
- पटकाई बुम
- नागा पहाड़ियाँ
- पूर्वी मणिपुर पहाड़ियाँ
- पश्चिमी मणिपुर पहाड़ियाँ (लाइमातोल श्रृंखला)
- मिजो पहाड़ियाँ (लुसाई पहाड़ियाँ)
- भुवन पहाड़ियाँ
- पूर्वांचल पहाड़ियाँ
- त्रिपुरा पहाड़ियाँ
- बरैल पहाड़ियाँ
- रंगमा पहाड़ियाँ
- मिकिर पहाड़ियाँ
पूर्वांचल पहाड़ियों की मुख्य विशेषताएँ
- विस्तार एवं स्थिति: ब्रह्मपुत्र घाटी के पश्चात् उत्तरी पर्वतीय समूह की श्रृंखला उत्तर एवं दक्षिण दिशा में विस्तारित है, जो ‘पूर्वांचल’ के नाम से जानी जाती है। इनमें से कई भारत और म्यांमार की सीमारेखा (अराकान योमा) के समानान्तर फैली हैं।
- ऊँचाई व प्रसार: इसकी औसत ऊँचाई 2000-3000 मीटर तक है। राज्यों के दृष्टिकोण से इसका विस्तार अरूणाचल प्रदेश से दक्षिण की तरफ मिजोरम तक है।
- ढाल और आकार: ये पहाड़ियाँ भी चापाकार स्थिति में हैं और इसका उत्तल ढाल असम के मैदान की ओर है। उत्तर से दक्षिण की ओर जाने पर इसकी ऊँचाई घटती जाती है।
- प्रमुख श्रृंखलाएँ और जल-विभाजक: पूर्वांचल कटा-छटा भाग है और इसमें कई छोटी-छोटी श्रृंखलाओं का विकास हुआ है; जैसे—पटकाई बुम, नागा हिल्स, मणिपुर-पहाड़ी, मिजो हिल्स आदि। इनमें पटकाई बुम और नागा हिल्स भारत-म्यांमार की सीमा बनाने के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्रों में जल-विभाजक का कार्य भी करती हैं।
- अपक्षय/अनाच्छादन: अधिक वर्षा के कारण अनाच्छादन के फलस्वरूप पूर्वांचल श्रृंखला कई छोटी-छोटी पहाड़ियों में विभक्त हो गयी है।
विद्वानों का मत / भू-गर्भिक तथ्य: कुछ विद्वानों के अनुसार पूर्वांचल श्रृंखला का दक्षिणी विस्तार बंगाल की खाड़ी में अण्डमान के रूप में दिखाई देता है, परन्तु प्लेट विवर्तनिक (Plate Tectonics) सिद्धांत से इस बात की पुष्टि नहीं होती है।