भारत – भारतीय क्षेत्र का उद्गम प्राचीन काल की सांस्कृतिक चेतना से लेकर आधुनिक संप्रभु राष्ट्र बनने तक के ऐतिहासिक और भू-राजनीतिक विकास का एक अनूठा उदाहरण है। औपनिवेशिक काल के खंडित राजनीतिक मानचित्र से मुक्त होकर, स्वतंत्रता के समय मौजूद 560 से अधिक रियासतों के भारत संघ में ऐतिहासिक विलय और मजबूत लौह संकल्प के साथ, इस महान देश ने अपनी भौगोलिक अखंडता को पुनः प्राप्त किया। भारतीय संविधान के भाग-1 और ऐतिहासिक राज्यों के पुनर्गठन अधिनियमों के माध्यम से क्रमिक रूप से विकसित होता यह क्षेत्र, उत्तर में जम्मू-कश्मीर व लद्दाख से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी और सुदूर द्वीपों तक एक सुदृढ़ प्रशासनिक ताने-बाने में बंधा है।
भारतीय भू-भाग की उत्पत्ति (Origin of Indian Territory)
- प्रारंभिक अवस्था: भारतीय भू-भाग की उत्पत्ति आज से 300 करोड़ वर्ष पूर्व चट्टानों के निर्माण से प्रारम्भ हुई।
- आज से करीब 22.5 करोड़ वर्ष पूर्व सारे महाद्वीप दक्षिणी ध्रुव के पास पैंजिया के रूप में अवस्थित थे, जो आपस में जुड़े हुये थे।
- इसी काल (कार्बोनिफरस) में पैंजिया विखंडित होकर दो भागों (अंगारा लैंड तथा गोंडवाना लैंड) में विभाजित हो गया (बीच का भाग टेथिस सागर कहलाया)।
- एशिया महाद्वीप जो कि अंगारा लैंड का भाग है जबकि वर्तमान भारत का अधिकांश भाग गोंडवाना लैंड का हिस्सा है। यही कारण है कि भू-गर्भिक संरचना की दृष्टि से भारत को एशिया महाद्वीप का हिस्सा नहीं माना जाता है।
महाद्वीपीय विस्थापन और विभाजन (Continental Drift)
- ऐसा अनुमान है कि भारत आज से 16 करोड़ वर्ष पहले जुरैसिक काल में अफ्रीका महाद्वीप से जुड़ा हुआ था और इसी काल में अफ्रीका तथा भारत, आस्ट्रेलिया तथा मेडागास्कर अलग हुए।
- आज से लगभग 13.5 करोड़ वर्ष पूर्व आस्ट्रेलिया का भाग भारत तथा मेडागास्कर से पृथक हो गया और ऐसा अनुमान है कि लगभग 10 करोड़ वर्ष पूर्व भारत मेडागास्कर से पृथक हुआ।
क्रैटॉन और प्राचीन वलित-संरचनाएँ
- भारतीय प्रायद्वीप पठार में प्री-कैम्ब्रियन काल की कई पठारीय संरचनायें पायी जाती हैं, जिसे क्रैटॉन कहा जाता है।
- उदाहरण:
- बस्तर क्रैटॉन
- बघेलखण्ड क्रैटॉन
- बुन्देलखण्ड क्रैटॉन
- शिलांग क्रैटॉन
- प्री-कैम्ब्रियन युग (57 करोड़ वर्ष पूर्व) में ही भारत में दो वलित-संरचनाओं (अरावली तथा पूर्वी घाट) का विकास हो चुका था, जिसे प्राचीनतम् श्रृंखला माना जाता है।
पश्चिमी घाट और दक्कन ट्रैप का निर्माण
- भारत आज से लगभग 7.5 करोड़ वर्ष पूर्व दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थित था।
- भूमध्य रेखा को पार करने के दौरान ही भारतीय भू-खण्ड के पश्चिमी हिस्से में दरारें पड़ने लगीं, इन्हीं दरारों के सहारे लगभग 5.5 करोड़ वर्ष पहले पश्चिमी घाट जिसे एक पर्वतीय कगार कहते हैं, की उत्पत्ति हुई।
- पश्चिमी घाट बनने के क्रम में ही अरब सागर का विस्तार हुआ और धीरे-धीरे इसकी गहरायी में वृद्धि हुई।
- लगभग 6.5 करोड़ वर्ष पूर्व ज्वालामुखी क्रिया द्वारा दक्कन ट्रैप का निर्माण हो चुका था।
यूरेशियाई प्लेट से टक्कर और हिमालय की उत्पत्ति
- भारतीय भू-खण्ड, यूरेशियाई भू-खण्ड से लगभग 5.5 करोड़ वर्ष पूर्व टस नामक क्षेत्र से टकराया। इस टक्कर से पूर्व भारतीय प्लेट की गति 15 से.मी./वर्ष हुआ करती थी जो अब 5 सेंटीमीटर प्रतिवर्ष माना जाता है।
हिमालय की विभिन्न श्रेणियों की उत्पत्ति का कालक्रम निम्नवत है:
- 5.5 से 3.8 करोड़ वर्ष पूर्व — इओसीन (आदि नूतन) काल: महान हिमालय की उत्पत्ति हुई।
- 3.8 से 2.5 करोड़ वर्ष पूर्व — ओलिगोसीन (अल्प नूतन) काल: लघु हिमालय की उत्पत्ति हुई।
- 2.5 से 0.5 करोड़ वर्ष पूर्व — मायोसीन (मध्य नूतन) काल: शिवालिक की उत्पत्ति हुई।
विशाल मैदानों का निर्माण
- शिवालिक श्रृंखलाओं के निर्माण के पश्चात् हिमालय तथा प्रायद्वीपीय भू-खण्ड के मध्य एक गर्त की उत्पत्ति हुई और इसी गर्त में भारत के अपवाह तंत्रों ने अवसादों को एकत्रित किया जिससे विशाल मैदानों का निर्माण हुआ ये निर्माण प्रक्रिया आज भी जारी है।