8 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत भारत की डिजिटल कूटनीति की बड़ी सफलता के रूप में भारत के ONDC मॉडल पर आधारित इंडोनेशिया ओपन नेटवर्क (ION) की शुरुआत, प्रधानमंत्री को मिला इंडोनेशिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बिंतंग अदिपूर्णा’, शिक्षा मंत्रालय की ऐतिहासिक UDISE+ 2025-26 रिपोर्ट, राज्यों व जिलों के लिए परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI 2.0 और PGI-D) का विमोचन, तथा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में पूर्वोत्तर भारत को वैश्विक पहचान दिलाने वाली मिजोरम के नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम को भारत का 21वां नामित रिपोजिटरी घोषित किए जाने की अधिसूचना।
कामराजार पोर्ट बना 18-मीटर ड्राफ्ट क्षमता वाला देश का दूसरा प्रमुख बंदरगाह
- प्रारंभिक परीक्षा: कामराजार पोर्ट लिमिटेड (केपीएल), केप-कम्प्लाइंट पोर्ट, कैपिटल ड्रेजिंग चरण-VI, विशाखापत्तनम पोर्ट, मैरीटाइम इंडिया विजन 2030।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): बुनियादी ढांचा: बंदरगाह, सड़क, विमानन, रेलवे आदि; भारत का EXIM व्यापार, लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना और वैश्विक व्यापार प्रतिस्पर्धात्मकता।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हाल ही में 7 जुलाई 2026 को पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी सूचना के अनुसार, कामराजार पोर्ट लिमिटेड (KPL) ने अपने ‘कैपिटल ड्रेजिंग चरण-VI’ (Capital Dredging Phase VI) प्रोजेक्ट को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है. इस विकास के साथ ही यह बंदरगाह अब 18.0 मीटर के परिचालन ड्राफ्ट (Operational Draft) की क्षमता हासिल करने वाला विशाखापत्तनम पोर्ट के बाद देश का दूसरा ‘मेजर पोर्ट’ बन गया है।
प्रोजेक्ट के मुख्य वित्तीय और तकनीकी घटक
बंदरगाह की परिचालन क्षमता को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं:
- पूंजीगत निवेश: इस रणनीतिक बुनियादी ढांचा परियोजना को कुल ₹440 करोड़ के निवेश के साथ पूरा किया गया है।
- केप-कम्प्लाइंट क्षमता: इस ड्रेजिंग (तलछट की सफाई और गहराई बढ़ाना) के बाद कामराजार पोर्ट पूरी तरह से ‘केप कम्प्लाइंट’ बन गया है. इसका सीधा मतलब यह है कि अब यह बंदरगाह 1,70,000 DWT (डेडवेट टनेज) तक के पूरी तरह से लदे बड़े ‘केपसाइज जहाजों’ को आसानी से संभाल सकता है।
- चैनलों का गहरा होना (Deepening Dimensions):
- बाहरी पहुंच चैनल (Outer Approach Channel) को 20.0 मीटर से बढ़ाकर 23.0 मीटर किया गया।
- आंतरिक प्रवेश चैनल (Inner Entrance Channel) को 19.0 मीटर से बढ़ाकर 22.0 मीटर गहरा किया गया है।
- इसके अलावा, हार्बर बेसिन और बर्थ के साथ वाले नौवहन क्षेत्रों को भी 18 मीटर ड्राफ्ट के अनुकूल बनाया गया है।
रणनीतिक और आर्थिक महत्व (Economic & Strategic Impacts)
यह परियोजना ‘मैरीटाइम इंडिया विजन 2030’ और ‘मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047’ के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है:
- लॉजिस्टिक्स लागत में कमी: गहरे ड्राफ्ट के कारण अब वैश्विक शिपिंग लाइनें बड़े जहाजों (Larger Vessels) को तैनात कर सकेंगी. इससे ‘इकोनॉमीज ऑफ स्केल’ (बड़े पैमाने की बचत) के माध्यम से माल ढुलाई या फ्रेट लागत (Freight Costs) में भारी कमी आएगी।
- EXIM व्यापार को गति: बड़े जहाजों के सीधे आने से कार्गो-हैंडलिंग की दक्षता बढ़ेगी और भारत के आयात-निर्यात (EXIM) व्यापार को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बढ़त मिलेगी।
- ईज ऑफ डूइंग बिजनेस: यह क्षमता कामराजार पोर्ट को थोक कार्गो (Bulk Cargo) प्रबंधन में दुनिया के अग्रणी अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों की श्रेणी में ला खड़ा करती है, जिससे व्यापार करना और सुगम होगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| बंदरगाह / घटक | महत्वपूर्ण तथ्य |
| कामराजार पोर्ट | यह तमिलनाडु के चेन्नई (एन्नोर) में स्थित है. यह भारत का पहला कॉरपोरेटाइज्ड मेजर पोर्ट (कंपनी के रूप में पंजीकृत सरकारी बंदरगाह) है। |
| 18-मीटर ड्राफ्ट वाले भारत के मेजर पोर्ट | पहला: विशाखापत्तनम पोर्ट (आंध्र प्रदेश), दूसरा: कामराजार पोर्ट (तमिलनाडु)। |
| Capesize Vessels | ये वे बहुत बड़े मालवाहक जहाज होते हैं जो स्वेज या पनामा नहरों से नहीं गुजर सकते और उन्हें ‘केप ऑफ गुड होप’ या ‘केप हॉर्न’ से होकर जाना पड़ता है. इनके लिए गहरा ड्राफ्ट (कम से कम 18 मीटर) अनिवार्य होता है। |
| डेडवेट टनेज (DWT) | यह किसी जहाज की कुल सुरक्षित वजन उठाने की क्षमता (कार्गो, ईंधन, चालक दल आदि सहित) का माप है। |
कपास उत्पादकता मिशन (कपास कांति) — भारतीय कपड़ा क्षेत्र में नई क्रांति
- प्रारंभिक परीक्षा: कपास उत्पादकता मिशन (कपास कांति), कस्तूरी कॉटन प्रमाणन, किसान कपास ऐप।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): मुख्य फसलें- देश के विभिन्न भागों में फसलों का पैटर्न; कृषि तकनीक, उत्पादकता, किसानों की आय और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हाल ही में 7 जुलाई 2026 को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान और वस्त्र मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन को कपास उत्पादकता मिशन (कपास कांति) की प्रगति और रूपरेखा के बारे में विस्तृत जानकारी दी. उपराष्ट्रपति ने इस मिशन के समग्र दृष्टिकोण की सराहना करते हुए नई तकनीकों को तेजी से अपनाने और वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति मजबूत करने पर जोर दिया।
मिशन के तीन सबसे महत्वपूर्ण घटक
- अनुसंधान और उत्पादकता में सुधार:
- वैज्ञानिक अनुसंधान, उन्नत कृषि पद्धतियों और नई तकनीकों के माध्यम से प्रति एकड़ कपास की पैदावार (Per-acre Yield) को बढ़ाना।
- भारत और दुनिया के अग्रणी कपास उत्पादक देशों के बीच उत्पादकता के अंतर को कम करने के लिए स्पष्ट और मापने योग्य लक्ष्य निर्धारित करना।
- गुणवत्ता नियंत्रण और डिजिटल सुगमता:
- कस्तूरी कॉटन प्रमाणन: भारतीय कपास को अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक प्रीमियम ब्रांड के रूप में पहचान दिलाना ताकि इसकी उच्च गुणवत्ता की गारंटी दी जा सके।

- किसान कपास ऐप: डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसानों को कपास की निर्बाध और पारदर्शी आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ना।
- नए जमाने के प्राकृतिक रेशे (New-Age Natural Fibres):
- कपड़ा क्षेत्र में स्थिरता (Sustainability) और पर्यावरण अनुकूल नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए नए प्रकार के प्राकृतिक रेशों के उपयोग को प्रोत्साहित करना।
मिशन की रणनीतिक आवश्यकता और मुख्य एजेंडा
- समयबद्ध मंजूरी (Time-bound Approvals): उपराष्ट्रपति ने इस बात पर विशेष बल दिया कि कृषि क्षेत्र में नए तकनीकी नवाचारों को समय पर लागू करने के लिए प्रशासनिक स्वीकृतियों में देरी नहीं होनी चाहिए।
- वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता (Global Competitiveness): भारत को अपनी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मांग को पूरा करने के लिए कपास की गुणवत्ता और लागत प्रभावशीलता में दुनिया के अन्य बड़े देशों को कड़ी टक्कर देनी होगी।
- जन जागरूकता और विपणन: मिशन की सफलताओं को व्यापक स्तर पर प्रसारित करने के लिए टेलीविजन वृत्तचित्रों (Documentaries) और बाजार-उत्तरदायी रणनीतियों (Market-responsive strategies) का उपयोग किया जाएगा ताकि आम जनता और किसान इसके प्रति जागरूक हो सकें।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| संगठन / पहल | महत्वपूर्ण तथ्य |
| मिशन का नाम | कपास उत्पादकता मिशन (कपास कांति)। |
| संबंधित मंत्रालय | कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और वस्त्र मंत्रालय की संयुक्त पहल। |
| कस्तूरी कॉटन | भारतीय कपास की ब्रांडिंग, ट्रेसेबिलिटी और प्रीमियम गुणवत्ता प्रमाणन के लिए भारत सरकार की फ्लैगशिप पहल। |
| किसान कपास ऐप | कपास किसानों की बाजार तक पहुंच और डिजिटल सहायता सुनिश्चित करने वाला ऐप। |
राज्यों और जिलों के लिए परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI 2.0 और PGI-D) रिपोर्ट 2025-26
- प्रारंभिक परीक्षा: परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI-S 2.0), PGI-Districts (PGI-D), शिक्षा मंत्रालय, UDISE+, परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय; शासन व्यवस्था और नीतिगत हस्तक्षेप।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हाल ही में 7 जुलाई 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स 2.0 (PGI-S) और जिलों के लिए परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI-D) की संयुक्त रिपोर्ट (वर्ष 2025-26) जारी की है. भारत की विशाल स्कूली शिक्षा प्रणाली (14.67 लाख से अधिक स्कूल, 1.03 करोड़ शिक्षक और लगभग 24.72 करोड़ छात्र) की गुणवत्ता और प्रशासनिक कमियों को ट्रैक करने के लिए यह रिपोर्ट एक मार्गदर्शक का काम करती है।
परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI-S 2.0): राज्यों की ग्रेडिंग
PGI-S का मुख्य उद्देश्य राज्यों को रैंक देने के बजाय उन्हें ‘समान प्रदर्शन बैंड’ या ग्रेड में रखकर एक स्वस्थ और रचनात्मक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना है।
- कुल अंक और संकेतक: इसमें कुल 1000 अंकों का भार (Weightage) है, जो 70 संकेतकों पर आधारित है।
- श्रेणियां (Categories): इन संकेतकों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा गया है:
- परिणाम (Outcome)
- शासन और प्रबंधन (Governance & Management)
- 6 मुख्य डोमेन (Domains): इसके तहत राज्यों का मूल्यांकन छह विशेष मोर्चों पर होता है:
- सीखने के परिणाम और गुणवत्ता (Learning Outcomes and Quality)
- पहुंच (Access)
- बुनियादी ढांचा और सुविधाएं (Infrastructure & Facilities)
- समता या समानता (Equity)
- शासन प्रक्रियाएं (Governance Processes)
- शिक्षक शिक्षा और प्रशिक्षण (Teachers Education & Training)
- डेटा स्रोत: इसका डेटा पूरी तरह से UDISE+, परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024 (PARAKH), पीएम पोषण पोर्टल, प्रबंध (PRABANDH) पोर्टल और विद्यांजलि पोर्टल से लिया जाता है।
जिलों के लिए परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI-D)
राज्यों के बाद शासन की सबसे छोटी प्रशासनिक इकाई यानी जिला स्तर पर शिक्षा की वास्तविक स्थिति को मापने के लिए शिक्षा मंत्रालय PGI-D सूचकांक जारी करता है. इसका मुख्य फोकस शैक्षिक नीतियों के परिणाम आधारित मापन (Outcome Measurement) पर है।
- कुल अंक और संकेतक: जिला स्तर के सूचकांक में कुल 600 अंकों का भार है, जिसे 70 संकेतकों में विभाजित किया गया है।
- 6 मुख्य श्रेणियां (Categories):
- परिणाम (Outcomes)
- प्रभावी कक्षा संपादन (Effective Classroom Transaction)
- बुनियादी ढांचा सुविधाएं और छात्र पात्रताएं
- स्कूल सुरक्षा और बाल संरक्षण (School Safety & Child Protection)
- डिजिटल लर्निंग (Digital Learning)
- शासन प्रक्रिया (Governance Process)
- 11 डोमेन (Domains): इन 6 श्रेणियों को आगे 11 सूक्ष्म डोमेन में बांटा गया है, जिसमें सीखने के परिणाम, शिक्षकों की उपलब्धता, लर्निंग मैनेजमेंट, डिजिटल शिक्षा, फंड का अभिसरण और उपयोग (Funds Convergence), उपस्थिति निगरानी प्रणाली (Attendance Monitoring) और स्कूल नेतृत्व विकास (Leadership Development) शामिल हैं।
- डेटा स्रोत: PGI-D के लिए डेटा मुख्य रूप से UDISE+, परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024 और प्रबंध पोर्टल से प्राप्त किया जाता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| सूचकांक / घटक | महत्वपूर्ण तथ्य |
| नोडल मंत्रालय | केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय (स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग)। |
| PGI-S 2.0 (राज्यों के लिए) | कुल 1000 अंक, 2 मुख्य श्रेणियां और 6 डोमेन पर आधारित। |
| PGI-D (जिलों के लिए) | कुल 600 अंक, 6 श्रेणियां और 11 डोमेन पर आधारित। |
| मुख्य डेटा प्रदाता | UDISE+ (यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस) और परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024। |
मिजोरम का नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम बना भारत का 21वां नामित रिपोजिटरी
- प्रारंभिक परीक्षा: जैव विविधता अधिनियम 2002 (Biological Diversity Act), राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA), इंडो-बर्मा बायोडायवर्सिटी हॉटस्पॉट, एक्स-सिटू संरक्षण (Ex-situ Conservation), कुनमिंग-मॉन्ट्रियल ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन; जैव विविधता शासन ढांचा।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हाल ही में 7 जुलाई 2026 को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, मिजोरम विश्वविद्यालय, आइजोल के नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम (NHM) को जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 39 के तहत ‘नामित रिपोजिटरी’ (Designated Repository) घोषित किया गया है. 19 जून 2026 को जारी इस आधिकारिक अधिसूचना के बाद यह म्यूजियम भारत का 21वां नामित रिपोजिटरी बन गया है, जो उत्तर-पूर्वी भारत की समृद्ध जैविक संपदा के संरक्षण में एक बड़ा मील का पत्थर है।
नामित रिपोजिटरी (Designated Repository) क्या है और इसका महत्व?
भारत के जैव विविधता शासन ढांचे (Biodiversity Governance Framework) में इनका स्थान बेहद महत्वपूर्ण होता है:
- प्रमाणित जैविक नमूनों का संरक्षण: जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत एकत्र किए गए जैविक नमूनों (Biological Specimens) को इन रिपोजिटरी में सुरक्षित और प्रमाणित करके रखा जाता है।
- प्रजातियों की पहचान और सुराग (Traceability): ये केंद्र नई खोजी गई प्रजातियों के ‘टाइप स्पेसिमेन’ यानी मूल संदर्भ नमूनों को संभालते हैं, जिससे भविष्य के वैज्ञानिक अनुसंधानों और प्रजातियों की सटीक पहचान में मदद मिलती है।
- पारिस्थितिक पुनर्स्थापन (Ecological Restoration): यदि भविष्य में प्राकृतिक आपदा, निवास स्थान के नुकसान (Habitat Loss) या जलवायु परिवर्तन के कारण कोई प्रजाति विलुप्त होने की कगार पर पहुंचती है, तो इन रिपोजिटरी में सुरक्षित आनुवंशिक सामग्री (Genetic Material) की मदद से उन्हें पुनर्जीवित या पुनर्स्थापित किया जा सकता है।
मिजोरम नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम (NHM) की विशेषताएं
- भौगोलिक अवस्थिति: यह वैश्विक स्तर पर संवेदनशील इंडो-बर्मा जैव विविधता हॉटस्पॉट के भीतर स्थित है. मिजोरम और व्यापक उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में फूलों के पौधों की 7,500 से अधिक और जीवों की 2,000 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं।
- विशिष्ट वर्गीकरण (Taxonomic Expertise): यह म्यूजियम विशेष रूप से कम अध्ययन किए गए समूहों जैसे कि टेरिडोफाइट्स (फर्न प्रजाति), मैक्रोफंगी, पतंगे (Moths), भृंग (Beetles), तितलियां, सरीसृप और मछलियों के वाउचर नमूनों का रखरखाव करेगा।
- Leptobrachella tamdil: यह मिजोरम के जंगलों में हाल ही में खोजा गया एक दुर्लभ उभयचर (Amphibian/मेढक की प्रजाति) है. यह म्यूजियम ऐसे स्थानिक (Endemic) जीवों के दस्तावेजीकरण का मुख्य केंद्र होगा।
वैश्विक और राष्ट्रीय लक्ष्यों से जुड़ाव
- राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्य योजना (2024-2030): यह अधिसूचना भारत के राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्य-4 (National Biodiversity Target 4) को आगे बढ़ाती है।
- वैश्विक फ्रेमवर्क: यह कुनमिंग-मॉन्ट्रियल ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क (KMGBF) के लक्ष्य-4 के अनुरूप है, जो एक्स-सिटू (Ex-situ – बाह्य-स्थानिक) संरक्षण और आनुवंशिक विविधता के संरक्षण पर जोर देता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| घटक / शब्दावली | महत्वपूर्ण तथ्य |
| 21वां नामित रिपोजिटरी | नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम (NHM), मिजोरम विश्वविद्यालय, आइजोल। |
| वैधानिक प्रावधान | जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 39 के तहत केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित (राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण – NBA की सिफारिश पर)। |
| Leptobrachella tamdil | मिजोरम में खोजी गई एक स्थानिक उभयचर (Amphibian) प्रजाति। |
| बायोडायवर्सिटी हॉटस्पॉट | मिजोरम भारत के इंडो-बर्मा हॉटस्पॉट का हिस्सा है। |
| Ex-situ Conservation | जीवों या वनस्पतियों को उनके प्राकृतिक आवास से दूर (जैसे म्यूजियम, जीन बैंक, चिड़ियाघर में) संरक्षित करना। |
प्रधानमंत्री को मिला इंडोनेशिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बिंतंग अदिपूर्णा’
- प्रारंभिक परीक्षा: बिंतंग अदिपूर्णा (Bintang Adipurna), भारत-इंडोनेशिया द्विपक्षीय संबंध, सागर (SAGAR) विजन, एक्ट ईस्ट पॉलिसी (Act East Policy)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): भारत के हितों पर विकसित और विकासशील देशों की नीतियों और राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय; द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से जुड़े या भारत के हितों को प्रभावित करने वाले समझौते।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हाल ही में 7 जुलाई 2026 को इंडोनेशिया के राष्ट्रपति महामहिम प्रबोवो सुबियांतो (Prabowo Subianto) ने भारतीय प्रधानमंत्री को इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बिंतंग अदिपूर्णा’ (Bintang Adipurna of the Republic of Indonesia) पदक से सम्मानित किया है. यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रधानमंत्री को उनके अनुकरणीय वैश्विक नेतृत्व और भारत-इंडोनेशिया रणनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने में उनके असाधारण योगदान के लिए दिया गया है. प्रधानमंत्री ने इस सम्मान को भारत की 140 करोड़ जनता और दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक व सभ्यतागत संबंधों (Civilizational Ties) को समर्पित किया।
पुरस्कार का महत्व और भारत-इंडोनेशिया संबंध
यह नागरिक सम्मान केवल एक कूटनीतिक औपचारिकता नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे रणनीतिक और वैश्विक कारण निहित हैं:
- रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership): पिछले कुछ वर्षों में भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक मोर्चे पर अभूतपूर्व प्रगति हुई है, जिसे यह पुरस्कार मान्यता देता है।
- इंडो-पैसिफिक में भूमिका: दोनों देश हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए प्रमुख भागीदार हैं।
- आर्थिक सहयोग: इंडोनेशिया आसियान (ASEAN) क्षेत्र में भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है, और दोनों देश मिलकर ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) की आवाज को मजबूत कर रहे हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| घटक / टर्म | महत्वपूर्ण तथ्य |
| सर्वोच्च सम्मान का नाम | ‘बिंतंग अदिपूर्णा’ — यह इंडोनेशिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। |
| प्रदानकर्ता | इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो (जुलाई 2026 में प्रदत्त)। |
| ऐतिहासिक जुड़ाव | भारत और इंडोनेशिया के बीच ‘समुद्री पड़ोसी’ (Maritime Neighbors) का संबंध है; दोनों देशों की संस्कृतियों में रामायण और बौद्ध विरासत की गहरी समानताएं हैं। |
| नीतिगत संरेखण | यह सम्मान भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ (Act East Policy) और ‘सागर विजन’ (SAGAR – Security and Growth for All in the Region) की कूटनीतिक सफलता को दर्शाता है। |
स्कूली शिक्षा पर यूडीआईएसई प्लस (UDISE+) रिपोर्ट 2025-26
- प्रंभिक परीक्षा: यूडीआईएसई प्लस (UDISE+), छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR), सकल नामांकन अनुपात (GER), ड्रॉपआउट दर (Dropout Rate), नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP 2020)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): शिक्षा, मानव संसाधन, सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हाल ही में 7 जुलाई 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने भारत में स्कूली शिक्षा को लेकर यूडीआईएसई प्लस (Unified District Information System for Education Plus – UDISE+) 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट जारी की है। यह रिपोर्ट भारतीय स्कूली शिक्षा प्रणाली में शिक्षकों की संख्या, छात्रों के ठहराव (Retention) और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) में आए सकारात्मक बदलावों का एक व्यापक डेटाबेस प्रस्तुत करती है।
UDISE+ 2025-26 के मुख्य निष्कर्ष
1. शिक्षकों की संख्या और छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) में सुधार
- शिक्षकों की बढ़ती संख्या: वर्ष 2022-23 की तुलना में 2025-26 में शिक्षकों की संख्या में 8.3% की वृद्धि हुई है। वर्तमान में देश में कुल शिक्षकों की संख्या 1,02,73,020 (1.02 करोड़ से अधिक) हो गई है।
- बेहतर पीटीआर (PTR): नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के 30:1 के अनुशंसित अनुपात की तुलना में भारत ने सभी स्तरों पर बेहतर प्रदर्शन किया है:
- फाउंडेशनल (Foundational): 10
- प्रिपेरेटरी (Preparatory): 12
- मिडल (Middle): 17
- सेकेंडरी (Secondary): 21
- एकल शिक्षक और शून्य नामांकन वाले स्कूलों में कमी: देश में सिर्फ एक शिक्षक वाले स्कूलों (Single Teacher Schools) की संख्या में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 3% की कमी आई है। वहीं, जिन स्कूलों में एक भी छात्र का दाखिला नहीं था (Zero Enrolment Schools), उनकी संख्या में 29% की भारी गिरावट देखी गई है।
2. छात्र ड्रॉपआउट दर में कमी और बेहतर रिटेंशन
- कम होती ड्रॉपआउट दर: बच्चे अब बीच में स्कूल कम छोड़ रहे हैं। प्रिपेरेटरी स्तर पर ड्रॉपआउट दर घटकर 1.8% और सेकेंडरी स्तर पर 7.0% रह गई है।
- छात्र ठहराव (Retention Rate) में उछाल: सेकेंडरी स्तर पर छात्रों का स्कूल में टिके रहने का अनुपात 2024-25 के 47.2% से बढ़कर 51.9% हो गया है। इसका एक बड़ा कारण सेकेंडरी स्कूलों की संख्या में विस्तार होना है, जिससे बच्चों के लिए पहुंच आसान हुई है।
- स्टेज ट्रांजिशन (Transition Rate): एक स्तर से दूसरे स्तर में जाने वाले छात्रों की दर में सुधार हुआ है। फाउंडेशनल से प्रिपेरेटरी में जाने वाले छात्र अब 99.2% हैं, जबकि मिडल से सेकेंडरी में जाने वाले 88.3% हैं।
3. सकल नामांकन अनुपात (GER) में वृद्धि
- सेकेंडरी स्तर (Secondary Level) पर सकल नामांकन अनुपात (GER) में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। यह पिछले वर्ष के 68.5% से बढ़कर 71.7% पर पहुंच गया है, जो उच्च स्कूली शिक्षा में बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।
4. डिजिटल और बुनियादी ढांचे का कायाकल्प
स्कूलों में बुनियादी और डिजिटल सुविधाओं के विकास में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिसे नीचे दी गई तालिका से समझा जा सकता है:
| बुनियादी ढांचा / सुविधा | वर्ष 2024-25 (%) | वर्ष 2025-26 (%) |
| कंप्यूटर पहुंच (Computer Access) | 64.7% | 69.9% |
| इंटरनेट सुविधा (Internet Facility) | 63.5% | 67.4% |
| बिजली आपूर्ति (Electricity) | 93.6% | 95.0% |
| सुरक्षित पेयजल (Drinking Water) | 99.3% | 99.5% |
| बालिकाओं के लिए शौचालय (Girls Toilets) | 97.3% | 98.5% |
| बालकों के लिए शौचालय (Boys Toilets) | 96.2% | 97.2% |
| दिव्यांगों के लिए रैंप और रैलिंग | 54.9% | 58.2% |
भारत-इंडोनेशिया द्विपक्षीय वार्ता 2026 — रणनीतिक और सांस्कृतिक साझेदारी के नए आयाम
- प्रारंभिक परीक्षा: आसियान-भारत व्यापक रणनीतिक साझेदारी, महासागर विजन, ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC), प्रम्बानन मंदिर परिसर, टैगोर-देवांतर वर्ष।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से जुड़े या भारत के हितों को प्रभावित करने वाले समझौते; भारत की एक्ट ईस्ट नीति और हिंद-प्रशांत क्षेत्र।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हाल ही में 7 जुलाई 2026 को भारत के प्रधानमंत्री ने इंडोनेशिया की अपनी राजकीय यात्रा के दौरान जकार्ता के इस्ताना मरडेका (राष्ट्रपति भवन) में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति महामहिम प्रबोवो सुबियांतो के साथ उच्च स्तरीय आधिकारिक वार्ता की। जनवरी 2025 में भारत के 76वें गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रपति प्रबोवो की भारत यात्रा के बाद, दोनों नेताओं के बीच यह पहली आधिकारिक मुलाकात है। इस बैठक में दोनों देशों ने रक्षा, अंतरिक्ष, डिजिटल तकनीक और संस्कृति सहित कई क्षेत्रों में आपसी सहयोग को मजबूत करने के लिए ऐतिहासिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।
द्विपक्षीय वार्ता के प्रमुख रणनीतिक बिंदु
इस उच्च स्तरीय बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) की समीक्षा की गई और कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं:
1. डिजिटल और वित्तीय प्रौद्योगिकी (ION और ONDC)
- भारत की डिजिटल सफलता की तर्ज पर, दोनों नेताओं ने इंडोनेशिया ओपन नेटवर्क (ION) की शुरुआत का स्वागत किया।
- यह नेटवर्क भारत के ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) के मॉडल पर आधारित है, जो इंडोनेशिया के डिजिटल वाणिज्य और ई-कॉमर्स पारिस्थितिकी तंत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।
2. सांस्कृतिक और शैक्षिक कूटनीति (टैगोर-देवांतर वर्ष)
- वर्ष 1927 में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने इंडोनेशिया की ऐतिहासिक यात्रा की थी।
- इस यात्रा के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में, वर्ष 2027 को दोनों देश संयुक्त रूप से “सांस्कृतिक और शैक्षिक कूटनीति के लिए टैगोर-देवांतर वर्ष” के रूप में मनाएंगे।
3. भू-राजनीतिक और क्षेत्रीय सहयोग
- हिंद-प्रशांत क्षेत्र: दोनों देशों ने एक स्वतंत्र, खुले और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत (Free, Open and Rules-based Indo-Pacific) क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
- महासागर विजन: प्रधानमंत्री ने भारत के MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) दृष्टिकोण को रेखांकित किया, जो समुद्री सुरक्षा और क्षेत्र में सामूहिक विकास पर केंद्रित है।
- BRICS और आसियान: राष्ट्रपति प्रबोवो ने वर्ष 2026 में भारत की ब्रिक्स (BRICS) अध्यक्षता के लिए इंडोनेशिया के पूर्ण समर्थन की घोषणा की, साथ ही आसियान-भारत रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर सहमति जताई।
समझौता ज्ञापनों (MoUs) का आदान-प्रदान और सांस्कृतिक संरक्षण
वार्ता के बाद दोनों देशों के बीच रक्षा, अंतरिक्ष और उन्नत विज्ञान सहित कई प्रमुख क्षेत्रों में MoUs का आदान-प्रदान किया गया:
- क्षेत्र: रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज और दुर्लभ पृथ्वी तत्व (Critical Minerals & Rare Earths), विज्ञान और प्रौद्योगिकी, शिक्षा, चुनाव प्रणाली, दूरसंचार, कृषि, समुद्री सुरक्षा, अंतरिक्ष, स्टील आपूर्ति श्रृंखला, आपदा प्रबंधन और स्वास्थ्य कार्यबल सहयोग।
- प्रम्बानन मंदिर संरक्षण: भारत ने इंडोनेशिया के योग्यकर्ता में स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल ‘प्रम्बानन मंदिर परिसर’ के संरक्षण और बहाली (Conservation and Restoration) में सहायता के लिए एक आशय पत्र (Letter of Intent) साझा किया।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| पहल / शब्दावली | महत्वपूर्ण तथ्य |
| ION (Indonesia Open Network) | भारत के ONDC (ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स) मॉडल पर आधारित इंडोनेशिया का डिजिटल कॉमर्स ढांचा। |
| टैगोर-देवांतर वर्ष (2027) | रवींद्रनाथ टैगोर की 1927 की इंडोनेशिया यात्रा के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में घोषित सांस्कृतिक कूटनीति वर्ष। |
| महासागर विजन | समुद्री सुरक्षा और सामूहिक क्षेत्रीय विकास के लिए भारत का नीतिगत दृष्टिकोण। |
| प्रम्बानन मंदिर | इंडोनेशिया के योग्यकर्ता में स्थित एक प्रसिद्ध यूनेस्को विश्व धरोहर हिंदू मंदिर परिसर (जिसके संरक्षण में भारत सहयोग कर रहा है)। |
| BRICS 2026 | वर्तमान वर्ष 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत के पास है। |