9 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत भारत-ऑस्ट्रेलिया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEOs) फोरम, हाई-सीज़ (High Seas) मत्स्यपालन के लिए प्राधिकरण पत्र (LoA), भुवनेश्वर घोषणापत्र (TRIs का कायाकल्प), उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (AISHE रिपोर्ट), ब्रिक्स महिला मंत्रिस्तरीय बैठक और रक्षा क्षेत्र में पिनाका रॉकेट प्रणाली के नए मील के पत्थर जैसे महत्वपूर्ण विषयों को यूपीएससी पाठ्यक्रम (UPSC Syllabus) के अनुसार विश्लेषित किया गया है।
वर्षा सिंचित क्षेत्रों के लिए डेटा सृजन और सुलभता को मजबूत करना
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय वर्षा सिंचित क्षेत्र प्राधिकरण (NRAA), भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD), कृषि और प्राकृतिक संसाधन डेटा।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): मुख्य फसलें- देश के विभिन्न भागों में फसलों का पैटर्न; सिंचाई के विभिन्न प्रकार और सिंचाई प्रणाली; कृषि उत्पाद का विपणन और परिवहन तथा मुद्दे और संबद्ध बाधाएं; ई-प्रौद्योगिकी।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हाल ही में 8 जुलाई 2026 को केंद्रीय कृषि मंत्रालय के तहत कार्यरत राष्ट्रीय वर्षा सिंचित क्षेत्र प्राधिकरण (NRAA) ने नई दिल्ली के पूसा (PUSA) परिसर में एक दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श बैठक का आयोजन किया है। इस परामर्श का मुख्य विषय “भारत के वर्षा सिंचित क्षेत्रों में कुशल परियोजना योजना और कार्यान्वयन के लिए गुणवत्तापूर्ण डेटा सृजन और प्रसार: बाधाओं को दूर करने की चुनौतियों का समाधान” था। इस बैठक का प्राथमिक उद्देश्य राज्यों के कृषि विभागों की वास्तविक डेटा आवश्यकताओं को समझना और गुणवत्तापूर्ण डेटा की कमी से पैदा होने वाली जमीनी बाधाओं को दूर करना है।
भारत का लगभग 50% से अधिक कृषि क्षेत्र वर्षा पर निर्भर है, जहाँ बिना सटीक डेटा के किसी भी कल्याणकारी योजना का सफल होना असंभव है:
वर्षा सिंचित क्षेत्रों के लिए गुणवत्तापूर्ण डेटा की आवश्यकता क्यों?
- सटीक परियोजना योजना: वर्षा, मिट्टी के स्वास्थ्य, भूमि उपयोग, जल संसाधनों और सामाजिक-आर्थिक स्थितियों पर व्यापक डेटाबेस होने से नीति निर्माता स्थानीय प्राथमिकताओं के आधार पर स्थान-विशिष्ट (Location-specific) योजनाएं बना सकते हैं।
- संसाधनों का इष्टतम आवंटन: आनुभविक डेटा के माध्यम से संकटग्रस्त क्षेत्रों की पहचान आसान हो जाती है, जिससे खाद, बीज, और सिंचाई के लिए बजटीय आवंटन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।
- पुरानी योजनाओं की कमियों में सुधार: एनआरएए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) डॉ. चंद्रशेखर कुमार के अनुसार, पिछली योजनाओं के प्रदर्शन डेटा का विश्लेषण करके वर्तमान में चल रही जमीनी योजनाओं की दक्षता और उनके परिणामों को सुधारा जा सकता है।
डेटा सृजन और साझाकरण की संस्थागत व्यवस्था
इस राष्ट्रीय परामर्श के दौरान दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिसमें देश के प्रमुख अनुसंधान संगठनों ने अपने डेटाबेस और चुनौतियों को प्रस्तुत किया:
- डेटा प्रदाता संगठन: इस बैठक में IMD (मौसम डेटा), NBSSLUP (राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण और भूमि उपयोग योजना ब्यूरो), IARI (कृषि अनुसंधान), IWMI (अंतर्राष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान), MNCFC (महालनोबिस राष्ट्रीय फसल पूर्वानुमान केंद्र) और CRIDA (केंद्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान) के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
- डेटा उपयोगकर्ता (राज्य): तमिलनाडु, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, असम, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों ने तकनीकी डेटा प्राप्त करने में आने वाली व्यावहारिक प्रशासनिक कठिनाइयों और सुलभता (Accessibility) के मुद्दों को साझा किया।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| संगठन / संस्थान | महत्वपूर्ण तथ्य |
| NRAA (राष्ट्रीय वर्षा सिंचित क्षेत्र प्राधिकरण) | यह केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के तहत एक विशेषज्ञ निकाय है, जो देश के शुष्क और वर्षा आधारित क्षेत्रों के सतत विकास के लिए नीतियां बनाता है। |
| क्रिडा | केंद्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, जो हैदराबाद में स्थित है और बारानी (Dryland) खेती पर शोध करता है। |
| NBSSLUP | राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण और भूमि उपयोग योजना ब्यूरो, जो भारत की मृदा आनुवंशिकी और भूमि क्षमता का मानचित्रण करता है। |
| MNCFC | महालनोबिस राष्ट्रीय फसल पूर्वानुमान केंद्र, जो कृषि में रिमोट सेंसिंग और उपग्रह डेटा के उपयोग को बढ़ावा देता है। |
भुवनेश्वर घोषणापत्र — जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (TRIs) का कायाकल्प
- प्रारंभिक परीक्षा: भुवनेश्वर घोषणापत्र, मॉडल टीआरआई फ्रेमवर्क 2030, राष्ट्रीय टीआरआई अनुसंधान एजेंडा (2027-2032), जनजातीय मामलों का मंत्रालय।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): अतिसंवेदनशील वर्गों (ST) के लिए कल्याणकारी योजनाएं और उनका प्रदर्शन; इन तंत्रों के संरक्षण और बेहतरी के लिए गठित निकाय और संस्थान।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हाल ही में 7-8 जुलाई 2026 को जनजातीय मामलों के मंत्रालय और ओडिशा सरकार द्वारा भुवनेश्वर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन ऐतिहासिक ‘भुवनेश्वर घोषणापत्र’ को अपनाने के साथ हुआ। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य देश के जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (Tribal Research Institutes – TRIs) की संस्थागत क्षमता को मजबूत करना और उन्हें ‘विकसित भारत @2047’ के विजन के अनुरूप साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण (Evidence-based policymaking) के केंद्रों के रूप में विकसित करना है।
भुवनेश्वर घोषणापत्र के प्रमुख बिंदु
- मॉडल टीआरआई फ्रेमवर्क 2030: इसके तहत राज्यों में टीआरआई के संचालन, स्टाफिंग और शोध की गुणवत्ता को आधुनिक बनाने के लिए मानक तय किए जाएंगे, जिससे प्रत्येक राज्य एक निश्चित समय सीमा में अपने संस्थान में सुधार कर सके।
- राष्ट्रीय टीआरआई अनुसंधान एजेंडा (2027-2032): राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों के अनुरूप जनजातीय शोध प्राथमिकताओं को तय करने के लिए 5 साल की एक राष्ट्रीय योजना तैयार की जाएगी।

- परिणाम और रैंकिंग फ्रेमवर्क: टीआरआई के बीच प्रदर्शन-आधारित विकास और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए NTRP पोर्टल के माध्यम से रैंकिंग प्रणाली लागू की जाएगी।
- नोडल टीआरआई प्रणाली और नवाचार नेटवर्क: पुराने और स्थापित टीआरआई नए संस्थानों को मेंटरशिप (मार्गदर्शन) प्रदान करेंगे। साथ ही, स्थानीय स्तर पर सफल समाधानों को बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए एक ‘नवाचार नेटवर्क’ बनाया जाएगा।
कार्यशाला के रणनीतिक सत्र
- ज्ञान और सांस्कृतिक संसाधन केंद्र: जनजातीय भाषाओं, स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों, संगीत, व्यंजनों और लुप्त हो रही कलाओं का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण (Documentation) और डिजिटल रिपोजिटरी बनाना।
- साक्ष्य-आधारित विकास: शोध की गुणवत्ता में सुधार के लिए ‘पीयर रिव्यू’ और डेटा प्रबंधन मानकों को अनिवार्य बनाना ताकि नीतियां कागजी न होकर जमीनी आवश्यकताओं (Ground-level requirements) पर आधारित हों।
- प्रौद्योगिकी का एकीकरण (Technology Integration): जनजातीय डेटा के विश्लेषण, नीति नियोजन और सेवा वितरण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) जैसी तकनीकों के उपयोग के लिए एक ‘साझा-सेवा मॉडल’ (Shared-Service Model) अपनाना।
- संस्थागत सुदृढ़ीकरण: इन संस्थानों को अधिक वित्तीय और प्रशासनिक स्वायत्तता (Autonomy) प्रदान करना तथा डोमेन विशेषज्ञों को आकर्षित करने के लिए मानव संसाधन में सुधार करना।
सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले संस्थान
कार्यशाला में जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और उत्कृष्ट शोध के लिए देश के 7 सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले TRIs को सम्मानित किया गया:
| राज्य | पुरस्कृत जनजातीय अनुसंधान संस्थान (TRI) |
| छत्तीसगढ़ | जनजातीय अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान (TRTI) |
| ओडिशा | अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान (SCSTRTI) |
| त्रिपुरा | जनजातीय अनुसंधान और सांस्कृतिक संस्थान (TRCI) |
| महाराष्ट्र | जनजातीय अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान (TRTI) |
| केरल | किर्टाड्स (KIRTADS – केरल अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति जनजातीय अनुसंधान संस्थान) |
| तेलंगाना | जनजातीय सांस्कृतिक अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान (TCRTI) |
| झारखंड | डॉ. रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण अनुसंधान संस्थान |
माउंटेन ख्याम त्सो मैसिफ पर सफल पर्वतारोहण अभियान
- प्रारंभिक परीक्षा: ख्याम त्सो मैसिफ, रुमत्से फू क्षेत्र, जवाहर पर्वतारोहण और शीतकालीन खेल संस्थान (JIM & WS)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 1 & 3): भारत का भौतिक भूगोल (लद्दाख क्षेत्र की पर्वत श्रृंखलाएं); आपदा प्रबंधन और साहसिक खेल अवसंरचना (Adventure Tourism/Sports)।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हाल ही में 8 जुलाई 2026 को रक्षा मंत्रालय के तहत कार्यरत जवाहर पर्वतारोहण और शीतकालीन खेल संस्थान (JIM & WS), पहलगाम के 22 सदस्यीय दल ने लद्दाख के सुदूर रुमत्से फू क्षेत्र में स्थित माउंट ख्याम त्सो मैसिफ पर सफलतापूर्वक फतह हासिल की है। कर्नल हेम चंद्र सिंह के नेतृत्व में 26 जून 2026 को शुरू हुए इस अभियान ने न केवल दुर्गम चोटियों को फतह किया, बल्कि इस क्षेत्र में साहसिक खेलों के मामले में कुछ नए रिकॉर्ड भी स्थापित किए हैं।
अभियान की मुख्य उपलब्धियां और भौगोलिक तथ्य
अत्यंत प्रतिकूल मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का सामना करते हुए इस दल ने एक ही श्रृंखला (Massif) की कई चोटियों पर तिरंगा फहराया:
- माउंट पीक Pt 5901M (2 जुलाई 2026): टीम ने सबसे पहले इस चोटी पर चढ़ाई पूरी की। इसी चोटी पर टीम लीडर ने 5600 मीटर की ऊंचाई से पहली बार पैराग्लाइडिंग उड़ान भरकर एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया।
- तकनीकी रूप से कठिन चोटियाँ (3 जुलाई 2026): टीम ने अत्यंत चुनौतीपूर्ण मौसम में ख्याम त्सो मैसिफ की 6090 मीटर ऊँची अज्ञात चोटी और माउंट पीक Pt 5944M पर सफल चढ़ाई की।
- अंतिम फतह (5 जुलाई 2026): अभियान के आखिरी चरण में दल ने इस श्रृंखला की अंतिम चोटी माउंट ख्याम-III (6018 मीटर) पर तिरंगा फहराया और सुरक्षित वापस बेस कैंप लौट आया।
मैसिफ क्या होता है?: भूगोल में ‘मैसिफ’ पहाड़ों के उस समूह या ब्लॉक को कहा जाता है, जो अपनी ही श्रृंखला में आसपास की चोटियों से बहुत अधिक स्पष्ट और ऊंचा होता है। यह आपस में जुड़ी कई चोटियों का एक दुर्गम समूह होता है।
संस्थान की पृष्ठभूमि: JIM & WS
- स्थापना और मुख्यालय: जवाहर पर्वतारोहण और शीतकालीन खेल संस्थान (JIM & WS) का मुख्यालय पहलगाम, जम्मू-कश्मीर में स्थित है।
- प्रशासन: यह रक्षा मंत्रालय और जम्मू-कश्मीर सरकार के संयुक्त तत्वावधान में काम करने वाला देश का एक अग्रणी पर्वतारोहण संस्थान है।
- उद्देश्य: इसका मुख्य कार्य युवाओं को पर्वतारोहण, स्कीइंग, खोज और बचाव (Search and Rescue) अभियानों तथा आपदा प्रबंधन का आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण देना है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| भौगोलिक स्थल / शब्दावली | महत्वपूर्ण तथ्य |
| ख्याम त्सो मैसिफ | यह लद्दाख केंद्रशासित प्रदेश के रुमत्से फू क्षेत्र में स्थित एक अत्यंत दुर्गम और अल्प-अन्वेषित (Unexplored) पर्वत श्रृंखला है। |
| ऐतिहासिक रिकॉर्ड | लद्दाख की किसी चोटी पर 5600 मीटर की ऊंचाई से पहली बार पैराग्लाइडिंग की सफल लॉन्चिंग की गई। |
| JIM & WS | रक्षा मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत कार्य करने वाला शीतकालीन खेल और पर्वतारोहण संस्थान (पहलगाम)। |
ब्रिक्स महिला मंत्रिस्तरीय बैठक 2026 — वैश्विक मंच पर महिला-नेतृत्व वाला पंचायती राज
- प्रारंभिक परीक्षा: ब्रिक्स महिला मंत्रिस्तरीय बैठक, सशक्त पंचायत नेत्री अभियान, मॉडल वीमेन-फ्रेंडली ग्राम पंचायत, पंचायत प्रगति सूचकांक (PAI)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): भारतीय संविधान का 73वां संशोधन; लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण; स्थानीय शासन में महिलाओं की भूमिका और चुनौतियाँ; शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हाल ही में 8 जुलाई 2026 को भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत केरल के कोच्चि में ‘ब्रिक्स महिला मंत्रिस्तरीय बैठक’ का आयोजन किया गया। इस बैठक के दौरान पंचायती राज मंत्रालय ने “जमीनी स्तर पर महिला नेतृत्व को आगे बढ़ाना” विषय पर एक विशेष सत्र आयोजित किया। इसमें भारत ने दुनिया के सामने अपने ‘महिला-नेतृत्व वाले पंचायती राज’ को समावेशी और लोकतांत्रिक शासन के एक वैश्विक मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया।
भारतीय स्थानीय स्वशासन में महिला सशक्तिकरण के प्रमुख स्तंभ
मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, भारत ने जमीनी स्तर पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई नीतिगत सुधार किए हैं:
1. वास्तविक नेतृत्व और राष्ट्रीय पुरस्कारों में पहचान
- सफल नेतृत्व: राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कारों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली 42 ग्राम पंचायतों में से 25 का नेतृत्व महिला सरपंचों द्वारा किया गया, जो यह साबित करता है कि महिलाएं अब केवल नाममात्र की प्रतिनिधि नहीं बल्कि प्रभावी नीति निर्माता हैं।
2. सशक्त पंचायत नेत्री अभियान
- शुरुआत और उद्देश्य: इसे मार्च 2025 में शुरू किया गया था। यह निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों (EWRs) की नेतृत्व क्षमताओं को निखारने का एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम है।
- उपलब्धि: इस अभियान के माध्यम से अब तक लगभग 1.5 लाख महिला प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है, ताकि वे बिना किसी बाहरी दबाव के अपने निर्णय खुद ले सकें।
- सरपंच पति (प्रॉक्सी प्रतिनिधि) प्रथा पर रोक: इस अभियान का एक मुख्य उद्देश्य पंचायतों में महिलाओं के स्थान पर उनके पतियों या पुरुष रिश्तेदारों द्वारा शासन चलाने की ‘प्रॉक्सी व्यवस्था’ को पूरी तरह समाप्त करना है।

3. मॉडल वीमेन-फ्रेंडली ग्राम पंचायत
- देशव्यापी नेटवर्क: देश के प्रत्येक जिले में एक ‘मॉडल महिला-अनुकूल ग्राम पंचायत’ विकसित की जा रही है।
- वैश्विक सहयोग: संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) के सहयोग से वर्तमान में देश की 744 ग्राम पंचायतों को इस मॉडल के रूप में तैयार किया जा रहा है। इनका मुख्य ध्यान महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, कौशल विकास, सुरक्षा और उनके अनुकूल सार्वजनिक सेवाओं पर है।
4. सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) का स्थानीयकरण और PAI
- 9 नागरिक-केंद्रित थीम: भारत ने वैश्विक सतत विकास लक्ष्यों को 9 स्थानीय विषयों में विभाजित किया है, जिससे अनपढ़ या कम पढ़ी-लिखी महिला प्रतिनिधि भी अपनी पंचायत की प्राथमिकताओं को आसानी से समझ सकें।
- पंचायत प्रगति सूचकांक (PAI – Panchayat Advancement Index): इसमें लगभग 150 मापने योग्य संकेतक (Measurable Indicators) शामिल हैं। इसके माध्यम से हर ग्राम पंचायत अपने विकास के स्तर को खुद माप सकती है और साक्ष्य-आधारित विकास को गति दे सकती है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| योजना / सूचकांक / बैठक | महत्वपूर्ण तथ्य |
| BRICS महिला मंत्रिस्तरीय बैठक 2026 | इसका आयोजन भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत केरल के कोच्चि में किया गया। |
| सशक्त पंचायत नेत्री अभियान | मार्च 2025 में शुरू हुआ पंचायती राज मंत्रालय का कार्यक्रम, जो महिला जनप्रतिनिधियों के क्षमता निर्माण और ‘सरपंच पति’ प्रथा को रोकने पर केंद्रित है। |
| UNFPA का सहयोग | भारत के सभी जिलों में 744 मॉडल महिला-अनुकूल ग्राम पंचायतें बनाने में तकनीकी सहायता दे रहा है। |
| पंचायत प्रगति सूचकांक (PAI) | 150 संकेतकों वाला इंडेक्स, जो पंचायतों के विकास और उनके आनुभविक मूल्यांकन (Data-driven assessment) के लिए उपयोग होता है। |
अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (AISHE) रिपोर्ट 2022-23 और 2023-24
- प्रारंभिक परीक्षा: अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (AISHE), सकल नामांकन अनुपात (GER), लैंगिक समानता सूचकांक (GPI), स्टेम (STEM) नामांकन।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): शिक्षा, मानव संसाधन, विकास और प्रबंधन से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हाल ही में 8 जुलाई 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने देश में उच्च शिक्षा की स्थिति को दर्शाने वाली अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (All India Survey on Higher Education – AISHE) 2022-23 और 2023-24 की संयुक्त वार्षिक रिपोर्ट जारी की है। यह रिपोर्ट भारत में उच्च शैक्षणिक संस्थानों (HEIs) द्वारा पोर्टल पर अपलोड किए गए स्व-रिपोर्टेड डेटा (Self-reported data) पर आधारित है, जो नीति निर्माण और इस क्षेत्र की निगरानी के लिए आधिकारिक सांख्यिकी का प्राथमिक स्रोत है। इस सर्वेक्षण में देश के 90% से अधिक पंजीकृत संस्थानों ने सक्रिय रूप से भाग लिया है।
AISHE 2023-24 के मुख्य निष्कर्ष
पिछले एक दशक (2014-15 से 2023-24) के रुझानों को शामिल करते हुए इस नवीनतम रिपोर्ट के मुख्य आंकड़े निम्नलिखित हैं:
1. सकल नामांकन अनुपात (Gross Enrolment Ratio – GER)
उच्च शिक्षा में 18-23 वर्ष के आयु वर्ग की आबादी के सापेक्ष छात्रों के कुल नामांकन को GER कहा जाता है।
- कुल GER में वृद्धि: वर्ष 2014-15 में भारत का उच्च शिक्षा GER जो मात्र 23.7 था, वह लगातार बढ़ते हुए वर्ष 2022-23 में 29.5 और वर्ष 2023-24 में 30.0 के स्तर पर पहुंच गया है।
- महिलाओं का उत्कृष्ट प्रदर्शन: महिला GER पुरुषों की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ा है। यह वर्ष 2014-15 के 22.9 से बढ़कर 2022-23 में 30.2 और वर्ष 2023-24 में 31.2 हो गया है।
- वंचित वर्गों का समावेशन:
- अनुसूचित जाति (SC): GER 2014-15 के 18.9 से बढ़कर 27.8 हुआ।
- अनुसूचित जनजाति (ST): GER 2014-15 के 13.5 से बढ़कर 22.8 पर पहुंच गया।
2. लैंगिक समानता सूचकांक (Gender Parity Index – GPI)
- वर्ष 2023-24 के लिए भारत का उच्च शिक्षा GPI 1.08 दर्ज किया गया है।
- पिछले सात लगातार वर्षों से भारत का GPI 1.0 से ऊपर बना हुआ है, जो यह प्रमाणित करता है कि उच्च शिक्षा में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की भागीदारी और पहुंच लगातार बेहतर हो रही है।
3. कुल नामांकन संख्या
- कुल छात्र संख्या: देश में उच्च शिक्षा लेने वाले छात्रों की कुल संख्या 2014-15 के 3.42 करोड़ से 31.5% बढ़कर वर्ष 2023-24 में 4.50 करोड़ हो गई है।
- महिला नामांकन: उच्च शिक्षा में कुल महिला छात्र संख्या 2014-15 के 1.57 करोड़ से 42.2% की भारी वृद्धि के साथ 2023-24 में 2.24 करोड़ पर पहुंच गई है।
- श्रेणीवार कुल नामांकन वृद्धि (2014-15 की तुलना में):
- SC छात्र: 51.4% की वृद्धि के साथ 69.72 लाख।
- ST छात्र: 75.7% की भारी वृद्धि के साथ 28.83 lakh।
- OBC छात्र: 60.2% की वृद्धि के साथ 1.80 करोड़।
4. स्टेम शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी
- देश में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) पाठ्यक्रमों में कुल नामांकन पिछले दशक के 91.5 लाख से बढ़कर 1.02 करोड़ (2023-24) हो गया है।
- विशेष बात यह है कि STEM नामांकन में महिला छात्रों की हिस्सेदारी 38.4% से बढ़कर अब 44% हो गई है, जो लैंगिक समावेशिता (Gender Inclusivity) का एक बेहतरीन वैश्विक उदाहरण है।
5. संकाय/शिक्षक (Faculty Strength)
- उच्च शिक्षा में कुल शिक्षकों की संख्या बढ़कर 17.32 लाख हो गई है।
- कुल कार्यबल में 55.1% पुरुष और 44.9% महिला शिक्षक हैं। महिला शिक्षकों की संख्या 2014-15 के 5.69 लाख से बढ़कर अब 7.78 लाख हो गई है।
डेटा की सीमाएं
यह सर्वेक्षण स्व-रिपोर्टिंग (Self-reported) मॉडल पर काम करता है। हालांकि शिक्षा मंत्रालय अंतर्निहित सत्यापन (Inbuilt validation) के माध्यम से इसकी जांच करता है, फिर भी बड़े पैमाने पर होने वाले सर्वेक्षणों की सामान्य सीमाएं इस रिपोर्ट के परिणामों को आंशिक रूप से प्रभावित कर सकती हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष महत्वपूर्ण तथ्य
| सूचकांक / डेटा बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| AISHE सर्वेक्षण | केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित आधिकारिक उच्च शिक्षा सांख्यिकी का सबसे बड़ा वेब-आधारित स्रोत। |
| वर्तमान GER (2023-24) | भारत का कुल उच्च शिक्षा सकल नामांकन अनुपात 30 है, जिसमें महिला GER 31.2 है। |
| लैंगिक समानता सूचकांक (GPI) | वर्तमान मूल्य 1.08 है (1.0 से अधिक होना महिलाओं की उच्च भागीदारी को दर्शाता है)। यह लगातार 7वें वर्ष 1 से ऊपर है। |
| STEM में महिलाएं | भारत में कुल स्टेम (STEM) छात्रों में से 44% महिलाएं हैं। |
आईआईसीए (IICA) द्वारा ‘प्रमाणित मध्यस्थता कार्यक्रम’ (ICAP) के दूसरे बैच का शुभारंभ
- प्रारंभिक परीक्षा: भारतीय कॉर्पोरेट मामलों का संस्थान (IICA), वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR), भारतीय मध्यस्थता परिषद (ACI), आर्बिट्रेशन एंड कॉन्सिलिएशन एक्ट 1996।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): न्यायपालिका की संरचना, संगठन और कार्यप्रणाली; सरकारी नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप; व्यापार करने में आसानी (Ease of Doing Business)।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हाल ही में 8 जुलाई 2026 को कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के तहत कार्यरत भारतीय कॉर्पोरेट मामलों के संस्थान (IICA) के वैकल्पिक विवाद समाधान उत्कृष्टता केंद्र (CEADR) द्वारा अपने प्रमुख कार्यक्रम “आईआईसीए प्रमाणित मध्यस्थता कार्यक्रम” (IICA Certified Arbitration Program – ICAP) के दूसरे बैच का वर्चुअल उद्घाटन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ‘विकसित भारत @2047’ के विजन के अनुरूप भारत को वैश्विक मध्यस्थता (Global Hub of Arbitration) के केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए विश्व स्तरीय मध्यस्थता पेशेवरों (Arbitration Professionals) का एक पूल तैयार करना है।
भारत में मध्यस्थता (Arbitration) और एडीआर (ADR) का महत्व
- न्यायपालिका पर बोझ कम करना: मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति ए.के. सीकरी (पूर्व न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय) के अनुसार, आधुनिक वाणिज्यिक अर्थव्यवस्था में दुनिया की कोई भी न्यायपालिका अकेले मुकदमों (Litigation) के माध्यम से विवादों का निपटारा नहीं कर सकती है। मध्यस्थता उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में वाणिज्यिक विवाद समाधान की एक “लोड़-बेयरिंग वॉल” (मुख्य आधार स्तंभ) है।
- ऑनलाइन मध्यस्थता (Virtual Arbitration): महामारी के बाद से वर्चुअल और हाइब्रिड सुनवाई आपातकालीन व्यवस्था से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मध्यस्थता अभ्यास का एक स्थायी हिस्सा बन चुकी है।
- निवेशक विश्वास (Investor Confidence): विधायी विभाग के सचिव डॉ. राजीव मणि ने कहा कि भारत की तीव्र आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने और विदेशी निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए मध्यस्थता निर्णयों (Arbitral Awards) का त्वरित प्रवर्तन (Enforcement) और एक मजबूत वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) प्रणाली अनिवार्य है।
मध्यस्थता पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए सरकारी प्रयास
भारत को मध्यस्थता का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए सरकार और आईआईसीए (IICA) निम्नलिखित रणनीतियों पर काम कर रहे हैं:
1. भारतीय मध्यस्थता परिषद (Arbitration Council of India – ACI)
- देश में संस्थागत मध्यस्थता को बढ़ावा देने, मध्यस्थों की ग्रेडिंग करने और अकादमिक नीतियों को तैयार करने के लिए सरकार जल्द ही भारतीय मध्यस्थता परिषद (ACI) की स्थापना करेगी।
2. विधायी सुधार
- ‘आर्बिट्रेशन एंड कॉन्सिलिएशन एक्ट, 1996’ के प्रभावी कार्यान्वयन और इसकी कमियों को दूर करने के लिए सरकार विभिन्न विधायी संशोधनों पर विचार कर रही है।
3. आईसीएपी कार्यक्रम का प्रारूप
- यह 9 महीने का एक व्यापक कार्यक्रम है, जिसमें वैश्विक विशेषज्ञों द्वारा 250 से अधिक घंटे की व्यावहारिक सामग्री और 20 से अधिक मॉड्यूल शामिल हैं। इसमें ‘आर्बिट्रल अवार्ड राइटिंग’ (मध्यस्थता निर्णय लेखन) पर व्यावहारिक कार्यशालाएं भी शामिल हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष महत्वपूर्ण तथ्य
| संस्थान / शब्दावली | महत्वपूर्ण तथ्य |
| IICA (भारतीय कॉर्पोरेट मामलों का संस्थान) | यह केंद्रीय कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के तहत एक केंद्रीय थिंक-टैंक और क्षमता निर्माण संस्थान है, जो मानेसर (हरियाणा) में स्थित है। |
| ICAP कार्यक्रम | भारत में मध्यस्थता पेशेवरों को प्रशिक्षित करने के लिए आईआईसीए का ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ कूटनीतिक प्रशिक्षण कार्यक्रम। |
| ADR (वैकल्पिक विवाद समाधान) | अदालतों से बाहर विवादों को सुलझाने का तरीका, जिसमें मध्यस्थता (Arbitration), सुलह (Conciliation), और मध्यस्थता (Mediation) शामिल हैं। |
| ACI (भारतीय मध्यस्थता परिषद) | मध्यस्थता संस्थानों को संस्थागत रूप देने और उन्हें विनियमित करने के लिए प्रस्तावित वैधानिक निकाय |
पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट (LRGR) का सफल परीक्षण
- प्रारंभिक परीक्षा: पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट (LRGR), डीआरडीओ (DRDO), एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) चांदीपुर।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- भारत में प्रौद्योगिकी का विकास और स्वदेशीकरण; रक्षा प्रौद्योगिकी और देश की सुरक्षा क्षमताएं।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हाल ही में 8 जुलाई 2026 को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) से पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट (Pinaka Long Range Guided Rocket – LRGR) का सफल उड़ान परीक्षण किया है। इस परीक्षण के दौरान रॉकेट को सेना द्वारा निर्धारित न्यूनतम 60 किलोमीटर की सीमा के लिए परखा गया। रॉकेट ने उड़ान के दौरान योजना के अनुसार सभी युद्धाभ्यासों (Manoeuvres) को प्रदर्शित किया और सटीक सटीकता (Textbook precision) के साथ अपने लक्ष्य पर प्रहार किया।
पिनाका LRGR की तकनीकी विशेषताएं और महत्व
यह परीक्षण भारत की आर्टिलरी (तोपखाने) मारक क्षमता को आधुनिक और अचूक बनाने की दिशा में एक बड़ी सफलता है:
- सटीक निशाना (Guided Capability): पारंपरिक पिनाका रॉकेट एक ‘फ्री-फ्लाइट’ रॉकेट प्रणाली थी, लेकिन यह नया संस्करण एक गाइडेड रॉकेट है। इसका मतलब है कि इसमें इन-फ्लाइट नेविगेशन और कंट्रोल सिस्टम लगा है, जो इसे हवा में ही अपना रास्ता सुधारने और लक्ष्य को बिल्कुल सटीक तरीके से भेदने की क्षमता देता है।
- मौजूदा लॉन्चर से अनुकूलता (Versatility): इस गाइडेड रॉकेट को सेना में पहले से शामिल (In-service) पिनाका लॉन्चर से ही लॉन्च किया गया। यह सिद्ध करता है कि एक ही लॉन्चर से अलग-अलग रेंज और क्षमता वाले पिनाका वेरिएंट्स को आसानी से दागा जा सकता है, जिससे सेना के लॉजिस्टिक्स का बोझ कम होगा।
- न्यूनतम और अधिकतम रेंज: इस विशिष्ट परीक्षण में इसकी न्यूनतम रेंज (60 किमी) को परखा गया है, जो अग्रिम मोर्चे पर दुश्मन के ठिकानों को नष्ट करने के लिए आदर्श है।
स्वदेशी विकास और सहयोगी प्रयोगशालाएं
पिनाका LRGR का डिजाइन और विकास पूरी तरह से स्वदेशी आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। इसके निर्माण में DRDO की निम्नलिखित विशेषज्ञ प्रयोगशालाओं ने काम किया है:
- ARDE (आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट): मुख्य डिजाइनिंग एजेंसी।
- HEMRL (हाई एनर्जी मैटेरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी): रॉकेट के लिए उच्च क्षमता वाले प्रणोदक (Propellant/Fuel) का विकास।
- DRDL और RCI (रिसर्च सेंटर इमारत): रॉकेट के गाइडेंस, नेविगेशन और नियंत्रण प्रणालियों का विकास।
- परीक्षण समन्वय: एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) और प्रूफ एंड एक्सपेरिमेंटल एस्टेब्लिशमेंट (PXE) द्वारा।
प्रंभिक परीक्षा के लिए विशेष महत्वपूर्ण तथ्य
| तकनीक / संस्थान | महत्वपूर्ण तथ्य |
| पिनाका (Pinaka) | यह भारत का स्वदेशी मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर (MBRL) सिस्टम है, जिसका नाम भगवान शिव के धनुष ‘पिनाक’ पर रखा गया है। |
| LRGR वेरिएंट | लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट संस्करण, जो नेविगेशन प्रणाली से लैस है और पारंपरिक पिनाका की तुलना में अत्यधिक सटीक है। |
| चांदीपुर (ITR) | ओडिशा के तट पर स्थित भारत का प्रमुख मिसाइल और रॉकेट परीक्षण केंद्र। |
| ARDE और RCI | क्रमशः पुणे और हैदराबाद में स्थित डीआरडीओ की प्रतिष्ठित प्रयोगशालाएं। |
फुट एंड माउथ डिजीज (FMD) के लिए कंपार्टमेंटलाइजेशन और ज़ोनिंग पर राष्ट्रीय कार्यशाला
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NADCP), फुट एंड माउथ डिजीज (FMD), ‘रेट माई लेबोरेटरी’ ऐप, डेयरी विकास पोर्टल, विद्यापीठ पोर्टल, पशुधन क्षेत्र का GVA।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): अर्थशास्त्र- पशुपालन का अर्थशास्त्र; भारत के विकास में पशुधन क्षेत्र का योगदान; प्रमुख पशु रोग और उनका खाद्य सुरक्षा एवं व्यापार पर प्रभाव।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हाल ही में 8 जुलाई 2026 को केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD) द्वारा ओडिशा के भुवनेश्वर में “फुट एंड माउथ डिजीज (FMD) के लिए कंपार्टमेंटलाइजेशन और ज़ोनिंग” पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला की शुरुआत की गई। इस कार्यशाला का प्राथमिक उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप भारत को वर्ष 2030 तक FMD-मुक्त (खुरपका-मुंहपका रोग मुक्त) बनाने के लिए एक ठोस रणनीति तैयार करना है, जिससे पशुधन उत्पादों के घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को सुरक्षित रूप से बढ़ावा दिया जा सके।
लॉन्च की गई प्रमुख डिजिटल पहलें
पशुपालन क्षेत्र में पारदर्शिता, डिजिटल गवर्नेंस और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह द्वारा निम्नलिखित डिजिटल टूल्स लॉन्च किए गए:
- ‘रेट माई लेबोरेटरी’ ऐप: महामारी कोष के तहत विकसित यह ऐप वास्तविक समय में उपयोगकर्ताओं से फीडबैक लेकर पशु चिकित्सा नैदानिक सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करेगा।
- डेयरी विकास पोर्टल: यह दूध संग्रह के बुनियादी ढांचे जैसे बल्क मिल्क कूलर (BMCs) और दुग्ध संग्रह केंद्रों (MCCs) की वास्तविक समय में निगरानी करने वाला एक केंद्रीकृत मंच है, जो डेटा-आधारित नीति निर्माण में मदद करेगा।
- विद्यापीठ पोर्टल: मान्यता प्राप्त कृत्रिम गर्भाधान प्रशिक्षण संस्थानों (Artificial Insemination Training Institutes) के प्रबंधन, प्रशिक्षुओं के रिकॉर्ड और QR-आधारित डिजिटल प्रमाणन के लिए एक व्यापक प्लेटफॉर्म।
- मैस्टाइटिस नियंत्रण SOP: डेयरी पशुओं में थनैला रोग (Mastitis) की रोकथाम और नियंत्रण के लिए एक ‘मानक संचालन प्रक्रिया’ (SOP) और वीडियो जारी किया गया, ताकि दूध की गुणवत्ता और उत्पादकता सुधारी जा सके।
भारतीय अर्थव्यवस्था में पशुधन क्षेत्र का महत्व और FMD की स्थिति
कार्यशाला के दौरान भारत के पशुधन क्षेत्र के आर्थिक योगदान और FMD नियंत्रण कार्यक्रम की सफलताओं पर महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए गए:
1. आर्थिक योगदान
- कृषि GVA में हिस्सेदारी: पशुधन क्षेत्र अकेले भारत के कृषि और संबद्ध क्षेत्र के सकल मूल्य वर्धित (Agricultural GVA) में लगभग 31% का योगदान देता है।
- कुल GVA में हिस्सेदारी: देश के कुल सकल मूल्य वर्धित (Overall GVA) में इसका योगदान लगभग 5.5% है, जो 8 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों (विशेषकर महिलाओं) की आजीविका का मुख्य आधार है।
2. FMD नियंत्रण में भारत की प्रगति
- विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण कार्यक्रम: राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NADCP) के तहत अब तक 1.4 बिलियन (140 करोड़) से अधिक FMD वैक्सीन खुराक दी जा चुकी हैं। भारत की वार्षिक उत्पादन क्षमता वर्तमान में 116 करोड़ खुराक है।
- संक्रमण दर में गिरावट: गैर-संरचनात्मक प्रोटीन (NSP) की सकारात्मकता दर जो वर्ष 2022 में 16.6% थी, वह वर्ष 2026 में घटकर 7.8% रह गई है।
- सेरोटाइप नियंत्रण: पिछले तीन वर्षों में देश में एशिया-1 सेरोटाइप का एक भी मामला सामने नहीं आया है।
डिसेंट्रलाइज्ड एप्रोच: कंपार्टमेंटलाइजेशन और ज़ोनिंग क्या है?
अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों (WOAH मानकों) के तहत पूरे देश को एक साथ रोग-मुक्त घोषित करने के बजाय भौगोलिक आधार पर ‘ज़ोन’ और विशिष्ट जैविक सुरक्षा वाले फार्मों के आधार पर ‘कंपार्टमेंट’ बनाए जाते हैं।
- भारत सरकार ने प्रारंभिक चरण में इसके कार्यान्वयन के लिए 9 प्राथमिक राज्यों (Priority States) की पहचान की है।
- इन क्षेत्रों में कान-टैगिंग (Ear-tagging) और जियो-टैग्ड तस्वीरों के माध्यम से शत-प्रतिशत पशुओं की ट्रैकिंग की जा रही है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष महत्वपूर्ण तथ्य
| शब्दावली / पोर्टल | महत्वपूर्ण तथ्य |
| लक्ष्य वर्ष 2030 | भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी तरह से FMD-मुक्त बनाने का राष्ट्रीय लक्ष्य। |
| FMD (खुरपका-मुंहपका) | यह मवेशियों, भैंसों, भेड़ों और बकरियों जैसे खुर वाले पशुओं में होने वाला एक अत्यधिक संक्रामक विषाणु जनित (Viral) रोग है। |
| थनैला रोग (Mastitis) | डेयरी पशुओं के अयन (Udder) में होने वाला जीवाणु संक्रमण, जिससे दूध उत्पादन और उसकी गुणवत्ता बुरी तरह प्रभावित होती है। |
| रेट माई लेबोरेटरी ऐप | केंद्रीय पशुपालन विभाग द्वारा प्रयोगशालाओं की रेटिंग और रियल-टाइम फीडबैक के लिए लॉन्च किया गया ऐप। |