NCERT Notes Class 6 science Chapter 3: Mindful Eating: A Path to a Healthy Body के अंतर्गत मानव स्वास्थ्य और पोषण के केंद्र में स्थित हमारा शरीर प्राचीन काल के पारंपरिक आहार विज्ञान से लेकर आधुनिक पोषण जैव-प्रौद्योगिकी तक के क्रमिक और जैविक विकास का एक अनूठा उदाहरण है। केवल पेट भरने की अचेतन आदतों से मुक्त होकर, पोषक तत्वों (Nutrients) की सचेत समझ और संतुलित आहार (Balanced Diet) के संकल्प के साथ, इस जैविक तंत्र ने अपनी आंतरिक ऊर्जा और रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्राप्त किया। कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन और खनिजों के संतुलित उपभोग के माध्यम से क्रमिक रूप से विकसित होता यह विषय, हमारी थाली के सूक्ष्म घटकों से लेकर शरीर के समग्र उपापचय (Metabolism) तक एक सुदृढ़ स्वास्थ्य ताने-बाने में बंधा है।
हम क्या खाते हैं? / What Do We Eat?
- बुनियादी घटक: भोजन मानव जीवन का सबसे अनिवार्य घटक (Essential component) है। हमारे दैनिक आहार में व्यक्तिगत और क्षेत्रीय स्तर पर अत्यधिक विविधता (Variety) पाई जाती है।
विभिन्न क्षेत्रों में भोजन / Food in different regions
- खाद्य विविधता का भौगोलिक कारण: भारत एक कृषि प्रधान देश है जहाँ विविध प्रकार की मिट्टी (Soil types) और जलवायु परिस्थितियाँ (Climatic conditions) पाई जाती हैं। इन्हीं भौगोलिक विविधताओं के कारण अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग फसलें उगाई जाती हैं।
- फसलों और खान-पान का अंतर्संबंध: किसी भी राज्य का पारंपरिक भोजन (Traditional food) मुख्य रूप से वहां स्थानीय स्तर पर उगाई जाने वाली फसलों (Locally grown crops) पर निर्भर करता है।
- विविधता के निर्धारक कारक: भोजन का चयन स्थानीय फसल उत्पादन के अलावा व्यक्तिगत स्वाद, क्षेत्रीय संस्कृति (Culture) और ऐतिहासिक परंपराओं द्वारा तय होता है।
भारतीय राज्यों के स्थानीय कृषि उत्पाद और पारंपरिक व्यंजन
| राज्य (State) | स्थानीय फसलें | पारंपरिक व्यंजन | स्थानीय पेय (Beverages) |
| पंजाब | मक्का, गेहूं, चना, दालें | मक्के दी रोटी, सरसों दा साग, छोले भटूरे, परांठा, हलवा, खीर | लस्सी, छाछ, दूध, चाय |
| कर्नाटक | चावल, रागी, उड़द, नारियल | इडली, डोसा, सांभर, नारियल चटनी, रागी मुड्डे, पल्या, रसम, चावल | छाछ, कॉफी, चाय |
| मणिपुर | चावल, बांस, सोयाबीन | चावल, एरोम्बा (चटनी), उती (पीली मटर और हरी प्याज की करी), सिंग्जु, कांगसोई | काली चाय (Black Tea) |
समय के साथ खाना पकाने के तरीकों में क्या बदलाव आया है?
- पाक कला में बदलाव (Culinary Shifts): समय के साथ भोजन के चयन और उसे तैयार करने की तकनीकों (Culinary practices) में व्यापक बदलाव आया है।
- तकनीकी प्रतिस्थापन (Technological Replacement):
- पारंपरिक चूल्हा बनाम आधुनिक गैस स्टोव: पहले खाना पकाने के लिए लकड़ी/गोबर के उपलों वाले पारंपरिक चूल्हे का उपयोग होता था, जिसका स्थान अब एलपीजी (LPG) या आधुनिक गैस स्टोव ने ले लिया है।
- सिल-बट्टा बनाम इलेक्ट्रिकल ग्राइंडर: मसालों की मैन्युअल पिसाई के लिए इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक ‘सिल-बट्टे’ की जगह अब विद्युत चालित ग्राइंडर (Electrical grinder) का उपयोग किया जाता है।
- बदलाव के मुख्य कारण: खाना पकाने के तौर-तरीकों में आए इन बदलावों के पीछे तकनीकी विकास (Technological development), परिवहन तंत्र में सुधार (Improved transportation) और बेहतर संचार व्यवस्था (Better communication) प्रमुख कारक रहे हैं।
भोजन के घटक क्या हैं? / What are the Components of Food?
- पोषक तत्व (Nutrients): भोजन के वे घटक जो शरीर को ऊर्जा देते हैं, वृद्धि व मरम्मत में सहायता करते हैं और बीमारियों से रक्षा करते हैं, पोषक तत्व कहलाते हैं। मुख्य पोषक तत्व कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन और खनिज (Minerals) हैं।
- अपवाद (Non-organic sources): सभी पोषक तत्व केवल पौधों या जंतुओं से नहीं मिलते; जैसे नमक (खनिज) हमें समुद्री जल या चट्टानों से प्राप्त होता है।
1. ऊर्जा देने वाले भोजन (Energy-giving Foods)
A. कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrates)
- कार्य: यह हमारे शरीर को ऊर्जा देने का प्राथमिक स्रोत है। ग्लूकोज इसका एक सरल रूप है जो शरीर को तुरंत ऊर्जा (Instant energy) प्रदान करता है।

- स्रोत: अनाज (गेहूं, चावल, बाजरा, मक्का), सब्जियां (आलू, शकरकंद) और फल (केला, आम, अनानास, गन्ना)। सामान्य चीनी (Sugar) भी कार्बोहाइड्रेट का एक प्रकार है।
B. वसा (Fats)
- कार्य: यह शरीर में संचित ऊर्जा (Stored energy) का स्रोत है। सर्दियों में शरीर को गर्म रखने और भुखमरी/हाइबरनेशन (जैसे पोलर बियर का शीतनिद्रा में जाना) के दौरान ऊर्जा देने का काम वसा ही करती है।
- पादप स्रोत: मूंगफली, अखरोट, बादाम, काजू, तिल, सूरजमुखी और कद्दू के बीज, सोयाबीन।
- जंतु स्रोत: घी, मक्खन, दूध, मलाई।
2. शरीर का निर्माण करने वाले भोजन (Body-building Foods)
प्रोटीन (Proteins)
- कार्य: शरीर की उचित वृद्धि (Growth) और क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत करना। बढ़ते बच्चों और खिलाड़ियों (Muscles building के लिए) को इसकी अधिक मात्रा में आवश्यकता होती है।
- पादप स्रोत: दालें (मूंग, तुअर, चना), मटर, बीन्स, सोयाबीन और बादाम। खाद्य मशरूम (Edible Mushrooms) भी प्रोटीन का एक बेहतरीन पादप स्रोत हैं।
- जंतु स्रोत: दूध, पनीर, अंडा, मछली और मांस।
3. रक्षात्मक पोषक तत्व (Protective Nutrients)
विटामिन और खनिज शरीर की रोगों से रक्षा करते हैं। ये कम मात्रा में आवश्यक होते हैं लेकिन अच्छे स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य हैं।
विटामिन और खनिज: कार्य, स्रोत एवं कमी से होने वाले रोग
| पोषक तत्व | मुख्य कार्य | प्रमुख स्रोत | कमी से रोग (Deficiency) | मुख्य लक्षण (Symptoms) |
| विटामिन A | आंखों और त्वचा को स्वस्थ रखना। | गाजर, पपीता, आम, दूध | रतोंधी (Loss of vision) | कमजोर दृष्टि, अंधेरे में दिखाई न देना। |
| विटामिन B1 | हृदय को स्वस्थ रखना और शारीरिक क्रियाओं में मदद। | फलियां (Legumes), साबुत अनाज, मेवे, दूध उत्पाद | बेरीबेरी | हाथ-पैरों में सूजन/जलन, सांस लेने में तकलीफ। |
| विटामिन C | रोगों से लड़ने की क्षमता (Immunity) बढ़ाना। | आंवला, अमरूद, नींबू, संतरा, हरी मिर्च | स्कर्वी | मसूड़ों से खून आना, घावों का देरी से भरना। |
| विटामिन D | हड्डियों और दांतों के लिए कैल्शियम का अवशोषण। | सूर्य का प्रकाश (त्वचा स्वयं बनाती है), दूध, मक्खन, अंडा | सूखा रोग (Rickets) | हड्डियां मुलायम होकर मुड़ जाती हैं। |
| कैल्शियम | हड्डियों और दांतों की मजबूती। | दूध, दही, पनीर, सोया मिल्क | अस्थि और दंत क्षय | कमजोर हड्डियां, दांतों का सड़ना। |
| आयोडीन | शारीरिक और मानसिक विकास का नियमन। | आयोडीन युक्त नमक, समुद्री घास (Seaweed), सिंघाड़ा | घेंघा रोग (Goitre) | गर्दन के अग्र भाग में सूजन। |
| लोहा (Iron) | रक्त (हीमोग्लोबिन) का निर्माण करना। | हरी पत्तेदार सब्जियां, चुकंदर, अनार | एनीमिया | शरीर में कमजोरी, सांस फूलना। |
4. आहारीय रेशे और जल (Dietary Fibres and Water)
- आहारीय रेशे / रूक्षांश: ये शरीर को कोई पोषण नहीं देते, लेकिन अपचित भोजन को बाहर निकालने और मल त्याग (Smooth passage of stools) को आसान बनाने के लिए अनिवार्य हैं।
- स्रोत: ताजे फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और मेवे।
- जल: यह भोजन से पोषक तत्वों को अवशोषित करने में मदद करता है और पसीने व मूत्र के माध्यम से अपशिष्ट पदार्थों (Wastes) को शरीर से बाहर निकालता है।
भोजन पकाते समय पोषक तत्वों का नुकसान
- उच्च तापमान का प्रभाव: अत्यधिक आंच पर खाना पकाने से विटामिन C जैसे संवेदनशील पोषक तत्व पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं। इसलिए आहार में कुछ कच्चे फल और बिना पकी सब्जियां (जैसे सलाद) शामिल करनी चाहिए।
- धोने की गलत आदत: सब्जियों और फलों को छीलने या काटने के बाद धोने से उनके पानी में घुलनशील विटामिन बह जाते हैं। इन्हें काटने से पहले अच्छी तरह धोना चाहिए।
ऐतिहासिक मामले (Historical Cases)
- स्कर्वी का समाधान (1746): स्कॉटिश चिकित्सक जेम्स लिंड ने पाया कि लंबी समुद्री यात्राओं पर जाने वाले नाविक जो मसूड़ों की सूजन (स्कर्वी) से पीड़ित थे, वे नींबू और संतरे (विटामिन C) खाने से ठीक हो गए।
- हिमालयी क्षेत्र में घेंघा (1960s): भारतीय वैज्ञानिकों ने पाया कि हिमालय और उत्तरी मैदानों की मिट्टी में आयोडीन की कमी के कारण वहां के भोजन और पानी में आयोडीन कम था, जिससे आबादी में घेंघा (Goitre) महामारी की तरह फैला। इसके बाद सरकार ने आम नमक का फोर्टिफिकेशन कर आयोडीन युक्त नमक अनिवार्य किया।
- अगारिया जनजाति: गुजरात के कच्छ के रण में नमक बनाने का पारंपरिक काम करने वाला एक विशिष्ट जनजातीय समुदाय।
डॉ. कोलथुर गोपालन (1918–2019)
- योगदान: इन्हें भारत में पोषण अनुसंधान का जनक माना जाता है। इन्होंने 500 से अधिक भारतीय खाद्य पदार्थों के पोषण मूल्य का विश्लेषण किया।
- नीतिगत प्रभाव: इनके देशव्यापी कुपोषण सर्वे (प्रोटीन और ऊर्जा की कमी) के आधार पर ही भारत सरकार ने 2002 में मध्याह्न भोजन कार्यक्रम (Mid Day Meal Scheme) लागू किया, जिसे वर्तमान में ‘पीएम पोषण’ पहल के रूप में जाना जाता है।
भोजन के विभिन्न घटकों का परीक्षण कैसे करें? / How to Test Different Components of Food?
- परीक्षण का सिद्धांत: भोजन में मौजूद स्टार्च (एक प्रकार का कार्बोहाइड्रेट), वसा (Fat) और प्रोटीन का पता लगाने के लिए कुछ सरल रासायनिक और भौतिक परीक्षणों का उपयोग किया जाता है।
- मल्टी-न्यूट्रिएंट्स तथ्य: कोई भी प्राकृतिक खाद्य पदार्थ केवल एक पोषक तत्व तक सीमित नहीं होता, बल्कि उसमें एक से अधिक पोषक तत्व शामिल हो सकते हैं (जैसे- मूंगफली में वसा और प्रोटीन दोनों प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं)।
स्टार्च के लिए परीक्ष / Test for starch
- आवश्यक रसायन: तनु आयोडीन विलयन (Diluted Iodine Solution)।
- विधि: खाद्य पदार्थ (जैसे आलू का टुकड़ा, उबले चावल या ब्रेड) पर ड्रॉपर से 2-3 बूंदें आयोडीन की डालते हैं।
- परिणाम: यदि खाद्य पदार्थ का रंग बदलकर नीला-काला (Blue-Black) हो जाता है, तो यह उसमें स्टार्च की उपस्थिति को प्रमाणित करता है।
वसा के लिए परीक्षण / Test for fats
- आवश्यक सामग्री: एक साफ कागज का टुकड़ा।
- विधि: खाद्य पदार्थ (जैसे मूंगफली, मक्खन या तेल) को कागज के टुकड़े पर रखकर धीरे से दबाते हैं। यदि भोजन में पानी है, तो कागज को थोड़ी देर सूखने देते हैं।
- परिणाम: सूखने के बाद भी कागज पर एक तैलीय धब्बा (Oily Patch) रह जाना वसा की उपस्थिति दर्शाता है। इस धब्बे के आर-पार देखने पर प्रकाश धुंधला या मंद (Faintly shining) दिखाई देता है।
प्रोटीन के लिए परीक्षण / Test for proteins
- आवश्यक रसायन:
- कॉपर सल्फेट विलयन (Copper Sulfate Solution) — 2 बूंदें।
- कास्टिक सोडा विलयन (Sodium Hydroxide Solution) — 10 बूंदें।
- विधि: खाद्य पदार्थ का पेस्ट या पाउडर बनाकर परखनली (Test tube) में लेते हैं, थोड़ा पानी मिलाकर हिलाते हैं, फिर दोनों रसायनों को निर्धारित मात्रा में डालकर कुछ मिनट के लिए छोड़ देते हैं।

- परिणाम: यदि परखनली के मिश्रण का रंग बैंगनी (Violet) हो जाता है, तो यह भोजन में प्रोटीन की उपस्थिति को निश्चित करता है।
खाद्य पदार्थों के परीक्षण और उनके परिणाम
| खाद्य घटक (Nutrient) | प्रयुक्त रीएजेंट / सामग्री | अंतिम रंग / प्रेक्षण (Observation) | मुख्य उदाहरण (Sources) |
| स्टार्च | तनु आयोडीन विलयन | नीला-काला (Blue-Black) | आलू, ब्रेड, उबले चावल |
| वसा (Fat) | सादा कागज | पारभासी तैलीय धब्बा (Oily Patch) | तेल, मक्खन, नारियल, मूंगफली |
| प्रोटीन ( | कॉपर सल्फेट + कास्टिक सोडा | बैंगनी (Violet) | सोयाबीन, मटर, मूंगफ |
संतुलित आहार / Balanced Diet
- परिभाषा: वह आहार जिसमें शरीर की उचित वृद्धि, विकास और दैनिक कार्यों के लिए सभी आवश्यक पोषक तत्व (Nutrients), रूक्षांश और जल सही अनुपात व सही मात्रा में उपलब्ध हों, संतुलित आहार कहलाता है।
- परिवर्तनीय कारक: पोषण की आवश्यकता सभी व्यक्तियों के लिए एक समान नहीं होती है। यह मुख्य रूप से निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करती है:
- आयु (Age) और लिंग (Gender)
- शारीरिक सक्रियता (Physical activity)
- स्वास्थ्य की स्थिति (Health status) और जीवनशैली (Lifestyle)
जंक फूड बनाम पौष्टिक भोजन (Junk Food vs Healthy Food)
- जंक फूड: ऐसे खाद्य पदार्थ जिनमें अत्यधिक चीनी और वसा (Fat) के कारण कैलोरी तो बहुत अधिक (High calories) होती है, लेकिन प्रोटीन, खनिज, विटामिन और आहारीय रेशे अत्यंत निम्न मात्रा में होते हैं। उदाहरण: पोटैटो वेफर्स, कैंडी बार, कार्बोनेटेड ड्रिंक्स।
- स्वास्थ्य पर प्रभाव: बार-बार जंक फूड खाने से व्यक्ति मोटापे (Obesity) का शिकार हो जाता है, जिससे कई अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
पोटैटो वेफर्स बनाम भुना चना: पोषण तुलनात्मक सारणी (Per 100 g)
| पोषण घटक (Nutrients) | पोटैटो वेफर्स | भुना चना (Roasted Chana) | विश्लेषण |
| ऊर्जा (Energy) | 536 kcal (अत्यधिक उच्च) | 355 kcal (संतुलित) | वेफर्स में वसा के कारण कैलोरी अधिक है। |
| वसा (Fats) | 35.0 g (हानिकारक स्तर) | 6.26 g (कम वसा) | वेफर्स में लगभग 6 गुना अधिक वसा है। |
| प्रोटीन | 7.0 g (न्यूनतम) | 18.64 g (उच्च प्रोटीन) | चना मांसपेशियों के विकास के लिए बेहतर है। |
| आहारीय रेशा (Fibre) | 4.8 g | 16.8 g (अत्यधिक उच्च) | चना पाचन क्रिया और आंतों के लिए सर्वोत्तम है। |
खाद्य सुदृढ़ीकरण और नियामक ढांचा (Food Fortification & Regulation)
- खाद्य सुदृढ़ीकरण (Food Fortification): प्रसंस्करण (Processing) के दौरान खाद्य पदार्थों की पोषण गुणवत्ता में सुधार करने के लिए जब उनमें बाहर से अतिरिक्त विटामिन या खनिज मिलाए जाते हैं, तो इस प्रक्रिया को फोर्टिफिकेशन कहते हैं। उदाहरण: आयोडीन युक्त नमक, फोर्टिफाइड बेबी फूड।
- पैकेज्ड फूड मानदंड: भारत में प्रत्येक पैकेज्ड खाद्य पदार्थ के कवर पर उसमें मौजूद पोषक तत्वों की मात्रा (Nutritional Information) की स्पष्ट सूची होना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
बाजरा (मोटा अनाज): पोषण से भरपूर अनाज / Millets: Nutrition-rich Cereals
- मूल भारतीय फसलें (Native Crops): ज्वार, बाजरा, रागी और सांवा (Barnyard millet) भारत की अपनी स्वदेशी फसलें हैं जो सदियों से हमारे पारंपरिक आहार का एक मुख्य हिस्सा रही हैं।
- जलवायु के प्रति लचीलापन (Climate Resilience): इन फसलों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इन्हें बहुत ही कम पानी में और अलग-अलग तरह की कठिन जलवायु परिस्थितियों (Climatic conditions) में भी आसानी से उगाया जा सकता है।
- न्यूट्री-सीरियल्स (Nutri-cereals): अपने असाधारण स्वास्थ्य लाभों के कारण ये अनाज आज दुनिया भर में फिर से लोकप्रिय हो रहे हैं। इन्हें ‘न्यूट्री-सीरियल्स’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये विटामिन्स, खनिज (विशेष रूप से आयरन और कैल्शियम) और आहारीय रेशों (Dietary fibres) के बेहतरीन स्रोत होते हैं।
- संतुलित आहार में भूमिका: यह छोटा अनाज हमारे शरीर के सामान्य और सुचारू कामकाज के लिए आवश्यक संतुलित आहार (Balanced diet) में बहुत बड़ा योगदान देता है।
मुख्य मोटे अनाज और उनके पोषण संबंधी लाभ
| अनाज का नाम (Millet) | प्रमुख विशेषता | महत्वपूर्ण |
| ज्वार, बाजरा, सांवा | विटामिन्स और प्रचुर मात्रा में आहारीय रेशा (Dietary Fibre)। | पाचन तंत्र को सुधारने और कुपोषण से लड़ने में सहायक। |
| रागी | कैल्शियम का बेहद समृद्ध स्रोत। | हड्डियों की मजबूती और हिडन हंगर (Hidden Hunger) के समाधान के लिए सर्वोत्तम। |
फूड माइल्स: खेत से हमारी थाली तक / Food Miles: From Farm to Our Plate
- मूल अवधारणा (Definition): अनाज या किसी भी खाद्य सामग्री द्वारा उसके मूल उत्पादक (किसान के खेत) से लेकर अंतिम उपभोक्ता (हमारी थाली) तक पहुँचने में तय की गई संपूर्ण दूरी को ‘फूड माइल्स’ कहा जाता है।
- सप्लाई चेन के मुख्य चरण (The Chapati Story): खेत से थाली तक भोजन की यात्रा एक जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया है, जिसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित चरण शामिल हैं:
- कृषि उत्पादन: किसान द्वारा खेत में फसल (जैसे गेहूं) उगाना और उसकी देखरेख करना।
- प्रारंभिक प्रसंस्करण: फसल कटाई के बाद दानों को अलग करने के लिए मड़ाई और ओसाई (Threshing and winnowing) करना।
- भंडारण: उत्पादित अनाज को सुरक्षित रखने के लिए गोदामों में भंडारण (Storage) करना।
- द्वितीयक प्रसंस्करण: मिलों में अनाज की पिसाई करके उसे आटा बनाना और थैलियों में पैक (Grinding & Packing) करना।
- परिवहन व वितरण: पैकेटों को खुदरा दुकानों, बाजारों या राशन की दुकानों तक ट्रांसपोर्ट करना।
- उपभोग: भोजन तैयार होकर उपभोक्ता की थाली तक पहुँचना।
फूड माइल्स को कम करने का महत्व (Importance of Reducing Food Miles)
| लाभ का क्षेत्र | मुख्य प्रभाव | महत्वपूर्ण |
| लागत में कमी (Cost Control) | लंबी दूरी के परिवहन, बिचौलियों और कोल्ड स्टोरेज पर होने वाले खर्च में भारी कटौती होती है। | खाद्य सामर्थ्य (Food Affordability) |
| प्रदूषण नियंत्रण (Pollution Reduction) | वाहनों के कम संचालन से कार्बन उत्सर्जन (Carbon Footprint) और ग्रीनहाउस गैसों का स्राव घटता है। | जलवायु परिवर्तन शमन (Climate Mitigation) |
| स्थानीय अर्थव्यवस्था (Local Economy) | स्थानीय स्तर पर उपभोग बढ़ने से क्षेत्रीय किसानों को सीधा आर्थिक लाभ और सुरक्षा मिलती है। | ग्रामीण विकास (Rural Development) |
| स्वास्थ्य लाभ (Health & Freshness) | भोजन को दूर से नहीं लाना पड़ता, जिससे वह अधिक ताजा, पौष्टिक और प्रिजर्वेटिव-मुक्त बना रहता है। | पोषण सुरक्षा (Nutritional Security) |