11&12 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत TReDSप्लेटफॉर्म की अनिवार्यता, भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हस्ताक्षरित ऐतिहासिक ‘खेल सहयोग रोडमैप’, भारत-न्यूजीलैंड द्विपक्षीय वार्ता के तहत रणनीतिक साझेदारी व 2030 व्यापार लक्ष्य, खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में PMFME योजना का 2 लाखवां मील का पत्थर, तथा देश की तटीय और डिजिटल सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए नवगठित ‘ब्यूरो ऑफ पोर्ट सिक्योरिटी’BoPS की उच्च स्तरीय समीक्षा जैसे गेम-चेंजर विषयों का व्यावहारिक व परीक्षा-उपयोगी विश्लेषण हैं।
IND को वैश्विक सम्मान: एगमोंट ग्रुप प्लेनरी में मिली बड़ी कामयाबी
- प्रारंभिक परीक्षा: वित्तीय खुफिया इकाई-भारत (FIU-IND), एगमोंट ग्रुप (Egmont Group), एगमोंट सिक्योर वेब (ESW), धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): मनी लॉन्ड्रिंग और इसकी रोकथाम; साइबर सुरक्षा; विभिन्न सुरक्षा बल और एजेंसियां और उनके जनादेश; अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से सीमा पार वित्तीय अपराधों से निपटना।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हाल ही में अज़रबैजान की राजधानी बाकू में आयोजित ‘एगमोंट ग्रुप प्लेनरी’ के दौरान, भारत की वित्तीय खुफिया इकाई (FIU-IND) द्वारा सुलझाए गए एक बड़े पैमाने के साइबर धोखाधड़ी मामले को वैश्विक स्तर पर मान्यता देते हुए प्रतिष्ठित ‘बेस्ट एगमोंट केस अवार्ड’ (BECA) 2026 का रनर-अप (द्वितीय स्थान) घोषित किया गया है। निदेशक श्री अमित मोहन गोविल के नेतृत्व में FIU-IND द्वारा प्रस्तुत इस मामले को दुनिया भर के 182 सदस्य देशों के बीच शीर्ष दो फाइनलिस्टों में चुना गया, जो वित्तीय खुफिया और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ लड़ाई में भारत के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व को दर्शाता है।
क्रिप्टो और साइबर फ्रॉड का बड़ा नेटवर्क
यह पूरा ऑपरेशन भारत के भीतर विभिन्न एजेंसियों के बीच मजबूत घरेलू समन्वय और वैश्विक स्तर पर त्वरित खुफिया जानकारी साझा करने का एक बेहतरीन उदाहरण है:
- शुरुआती इनपुट: इस मामले की शुरुआत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) द्वारा साझा की गई खुफिया जानकारी से हुई थी, जिसने देश में बड़े पैमाने पर हो रहे एक साइबर फ्रॉड की ओर इशारा किया था।
- नेटवर्क का पर्दाफाश: FIU-IND ने जब इस इनपुट का गहराई से वित्तीय विश्लेषण किया, तो लगभग ₹868 करोड़ के साइबर अपराध की कमाई (Proceeds of Crime) को छुपाने वाले एक बेहद जटिल मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट का पता चला।
- म्यूल अकाउंट्स और क्रिप्टो का खेल: अपराधियों ने इस काले धन को ठिकाने लगाने के लिए 5,000 से अधिक ‘म्यूल बैंक खातों’ (दूसरों के नाम पर खोले गए फर्जी खाते) का इस्तेमाल किया था और जाँच से बचने के लिए इसे बहु-क्षेत्रीय (Cross-border) जटिल क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन में बदल दिया था।
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग: विदेशी कड़ियों को जोड़ने के लिए FIU-IND ने एगमोंट सिक्योर वेब (ESW) का उपयोग करके कई मित्र देशों की वित्तीय खुफिया इकाइयों के साथ वास्तविक समय में खुफिया डेटा साझा किया, जिससे सीमा पार के क्रिप्टो लेनदेन और वैश्विक मनी लॉन्ड्रिंग ट्रेल को सफलतापूर्वक ट्रैक किया जा सका।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई और कानूनी परिणाम
FIU-IND की परिचालन विश्लेषण रिपोर्ट के आधार पर, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तुरंत देश भर में व्यापक कानूनी और खोजी कार्रवाई शुरू की:
- छापेमारी और जब्ती: ईडी ने 13 अलग-अलग ठिकानों पर सघन तलाशी अभियान चलाकर ₹47 लाख नकद और लगभग ₹13.6 करोड़ मूल्य की क्रिप्टोकरेंसी (USDT) को जब्त कर लिया।
- संपत्ति की कुर्की: जांच के दौरान इस अपराध से अर्जित ₹8.67 करोड़ की अन्य संपत्तियों को भी कुर्क किया गया।
- अभियोजन शिकायतें: इस पूरे नेटवर्क के कर्ता-धर्ताओं के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के सख्त प्रावधानों के तहत अदालत में दो औपचारिक अभियोजन शिकायतें (Prosecution Complaints) दर्ज की गई हैं।
प्रारम्भिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| विशिष्ट संस्था / प्रणाली / पुरस्कार | महत्वपूर्ण तथ्य |
| FIU-IND (वित्तीय खुफिया इकाई-भारत) | यह वित्त मंत्रालय के तहत वर्ष 2004 में स्थापित एक केंद्रीय राष्ट्रीय एजेंसी है, जो संदिग्ध वित्तीय लेनदेन (STRs) से संबंधित सूचनाएं प्राप्त करने, उनका विश्लेषण करने और उन्हें केंद्रीय जांच एजेंसियों को भेजने के लिए जिम्मेदार है। |
| एगमोंट ग्रुप | यह दुनिया भर के 182 देशों की वित्तीय खुफिया इकाइयों (FIUs) का एक अंतरराष्ट्रीय अनौपचारिक नेटवर्क है, जो मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग से निपटने के लिए खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान को बढ़ावा देता है। |
| BECA (बेस्ट एगमोंट केस अवार्ड) | एगमोंट ग्रुप द्वारा प्रतिवर्ष दिया जाने वाला यह पुरस्कार उन असाधारण परिचालन मामलों को मान्यता देता है जो वित्तीय खुफिया, जटिल जांच और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का सर्वोत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं। |
| एगमोंट सिक्योर वेब (ESW) | यह एक अत्यंत सुरक्षित, एन्क्रिप्टेड और निजी डिजिटल नेटवर्क है जिसके माध्यम से दुनिया भर की वित्तीय खुफिया इकाइयाँ संवेदनशील वित्तीय डेटा और मनी लॉन्ड्रिंग ट्रेल को आपस में साझा करती हैं। |
| I4C (भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र) | यह केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के तहत संचालित एक नोडल निकाय है, जो देश में सभी प्रकार के साइबर अपराधों से निपटने के लिए विभिन्न राज्यों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को एक एकीकृत मंच प्रदान करता है। |
मानव-वन्यजीव संघर्ष (HWC) पर उत्कृष्टता केंद्र और राष्ट्रीय पोर्टल का शुभारंभ
- प्रारंभिक परीक्षा: मानव-वन्यजीव संघर्ष पर उत्कृष्टता केंद्र, राष्ट्रीय मानव-वन्यजीव संघर्ष पोर्टल, भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), साकन।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, जैव विविधता का नुकसान, मानव-वन्यजीव संघर्ष के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव और तकनीकी समाधान।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हाल ही में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित WII-SACON परिसर में मानव-वन्यजीव संघर्ष पर उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence on Human–Wildlife Conflict) का आधिकारिक उद्घाटन किया। इसके साथ ही देश भर में इस संकट की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए ‘राष्ट्रीय मानव-वन्यजीव संघर्ष पोर्टल’ (National Human-Wildlife Conflict Portal) भी लॉन्च किया गया। इस अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में “संघर्ष के बजाय सह-अस्तित्व और सद्भाव (Coexistence and Harmony)” को पारिस्थितिक स्थिरता का मूलमंत्र घोषित किया गया।
सरकार की नई पहल और उसके रणनीतिक उद्देश्य
बढ़ते आवास विखंडन (Habitat Fragmentation) और बदलते भूमि उपयोग पैटर्न के कारण मानव और वन्यजीवों के बीच टकराव भारत की सबसे बड़ी संरक्षण चुनौती बन गया है। इससे निपटने के लिए सरकार ने त्रि-आयामी रणनीति अपनाई है:
1. उत्कृष्टता केंद्र (CoE) की स्थापना
- पृष्ठभूमि: इस केंद्र की स्थापना की घोषणा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL) की 7वीं बैठक के दौरान की थी।
- भूमिका: यह केंद्र मानव-वन्यजीव संघर्ष के वैज्ञानिक और साक्ष्य-आधारित प्रबंधन (Evidence-based Management) के लिए एक राष्ट्रीय हब के रूप में काम करेगा। यह मुख्य रूप से अनुसंधान, नीति निर्माण में सहयोग, क्षमता निर्माण (Capacity Building) और सर्वोत्तम प्रथाओं के प्रसार पर ध्यान केंद्रित करेगा।
- विशिष्ट फोकस: यह केंद्र विशेष रूप से बाघ अभयारण्यों (Tiger Reserves) से बाहर निकलने वाले बाघों, तेंदुओं और हाथियों के साथ होने वाले मानवीय संघर्षों के प्रबंधन के लिए विशिष्ट नीतियां तैयार करेगा।
2. राष्ट्रीय मानव-वन्यजीव संघर्ष पोर्टल (National HWC Portal)
- डिजिटल समाधान: यह एक केंद्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म है जिसे देश भर में मानव-वन्यजीव संघर्ष के डेटा प्रबंधन, ज्ञान साझाकरण और त्वरित निर्णय सहायता (Decision Support System) के लिए डिजाइन किया गया है।

- फायदा: इसके माध्यम से वन विभाग और शोधकर्ता संघर्ष-संभावित क्षेत्रों (Conflict Hotspots) की पहचान कर सकेंगे और समय रहते निवारक तकनीकी कदम (जैसे जियो-फेन्सिंग या पूर्व चेतावनी प्रणाली) उठा सकेंगे।
3. महत्वपूर्ण वैज्ञानिक रिपोर्ट का विमोचन
- इस अवसर पर ‘भारत में मानव-वन्यजीव संघर्ष की वर्तमान स्थिति: एक अवलोकन’ (Current Status of Human–Wildlife Conflict in India: An Overview) नामक प्रकाशन का पहला संस्करण जारी किया गया। यह रिपोर्ट देश में इस संकट के बदलते रुझानों और उभरती चुनौतियों का व्यापक मूल्यांकन प्रदान करती है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन के लिए व्यावहारिक रणनीतियाँ
राष्ट्रीय कार्यशाला के तकनीकी सत्रों के दौरान तीन मुख्य स्तंभों पर ध्यान केंद्रित किया गया:
- प्रजाति-विशिष्ट और क्षेत्र-विशिष्ट उपाय: हाथियों (Human-Elephant) और बड़े बिल्ली परिवार के जीवों (Human-Big Cat) जैसे बाघ और तेंदुओं के व्यवहार अलग होते हैं, इसलिए उनके संरक्षण और न्यूनीकरण के उपाय भी स्थानीय भूगोल के अनुसार अलग होने चाहिए।
- मशीन और मिशन मोड जागरूकता: समाज में फैले डर (Panic) को दूर करने के लिए ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में वन्यजीवों के साथ मुठभेड़ के समय किए जाने वाले व्यवहार के प्रति जागरूकता अभियान चलाना।
- बहु-हितधारक परामर्श: वन विभागों को स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर सुरक्षात्मक उपाय करने चाहिए ताकि पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक (जैसे ड्रोन और थर्मल इमेजिंग) का एक साथ उपयोग किया जा सके।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| विशिष्ट पहल / संस्थान | महत्वपूर्ण तथ्य |
| CoE on HWC | मानव-वन्यजीव संघर्ष पर भारत का पहला केंद्रीय उत्कृष्टता केंद्र, जिसे कोयंबटूर (तमिलनाडु) में स्थापित किया गया है। |
| WII-SACON | Wildlife Institute of India – Salim Ali Centre for Ornithology and Natural History। साकन को अब भारतीय वन्यजीव संस्थान (Dehradun) के साथ एकीकृत कर उन्नत अनुसंधान केंद्र बनाया गया है। |
| राष्ट्रीय HWC पोर्टल | संघर्ष की घटनाओं की मैपिंग, डेटा संग्रह और नीतिगत निर्णयों के लिए लॉन्च किया गया देश का पहला एकीकृत राष्ट्रीय डिजिटल पोर्टल। |
| प्रजाति सुधार कार्यक्रम | इसके तहत संकटग्रस्त प्रजातियों के आवासों को बहाल करके भी मानव-वन्यजीव संघर्ष को प्राकृतिक रूप से कम करने का प्रयास किया जाता है। |
TReDS अनिवार्य मैंडेट: एमएसएमई को वित्तीय सुरक्षा और त्वरित भुगतान
- प्रारंभिक परीक्षा: ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS) प्लेटफॉर्म, उद्यम पंजीकरण पोर्टल (Udyam Portal), भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियामक दायरे।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय; औद्योगिक नीति और एमएसएमई (MSMEs) का विकास; बैंकिंग और गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
केंद्रीय बजट 2026–27 में की गई एक बड़ी घोषणा को अमलीजामा पहनाते हुए, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (Ministry of MSME) ने एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की है। इसके तहत अब सभी कार्यरत केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) के लिए अपने MSME आपूर्तिकर्ताओं से खरीदे गए सामान और सेवाओं के सभी इनवॉइस (Invoices/विधेयकों) का निपटान अनिवार्य रूप से TReDS प्लेटफॉर्म के माध्यम से करना होगा। यह ऐतिहासिक निर्णय देश के लाखों छोटे उद्यमों को बिना किसी गारंटी (Collateral-free) के तत्काल कार्यशील पूंजी (Working Capital) सुनिश्चित करेगा।
TReDS मैंडेट की प्रमुख विशेषताएं और रणनीतिक स्तंभ
Delayed Payments के संकट को जड़ से समाप्त करने के लिए सरकार ने इस अधिसूचना में तीन कड़े और दूरदर्शी प्रावधान किए हैं:
1. अनिवार्य निपटान और पारदर्शिता
- अनिवार्य रूटिंग: सभी परिचालन CPSEs के लिए अब यह कानूनी रूप से बाध्यकारी है कि वे MSMEs से की गई अपनी हर खरीद के इनवॉइस को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा अधिकृत TReDS प्लेटफार्मों के माध्यम से ही संसाधित (Route) करेंगे।
- सख्त ऑडिट और जवाबदेही: CPSEs को सालाना ऑडिट के दौरान TReDS पंजीकरण और इसके पूर्ण अनुपालन का एक वैधानिक ऑडिटर प्रमाणपत्र (Statutory Auditor’s Certificate) प्राप्त करना होगा। साथ ही, उन्हें TReDS के माध्यम से निपटाए गए सभी इनवॉइस का विवरण सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित (Disclose) करना होगा।
- कॉर्पोरेट इंडिया के लिए बेंचमार्क: यह कदम सरकारी उद्यमों को समय पर भुगतान अनुशासन के मामले में निजी क्षेत्र की बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों के लिए एक रोल मॉडल के रूप में स्थापित करेगा।
2. भारत के लिए MSME क्षेत्र का महत्व
- आंकड़े जो उत्तर में काम आएंगे: वर्तमान में ‘उद्यम पंजीकरण पोर्टल’ और ‘उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म’ पर 8.70 करोड़ से अधिक MSMEs पंजीकृत हैं, जो देश में 38 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं।
- समस्या का समाधान: पहले बिल पास होने में महीनों लग जाते थे, जिससे MSMEs की पूंजी फंस जाती थी। अब TReDS के जरिए बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा इनवॉइस की फाइनेंसिंग (Invoice Financing) कर तुरंत भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।
3. MSMEs के लिए इसके क्या मायने हैं? (What This Means for MSMEs)
- त्वरित नकदी (Quicker Cash): MSME विक्रेता अपने स्वीकृत इनवॉइस को उसकी देय तिथि (Due Date) से बहुत पहले नकद में बदल सकते हैं।
- बिना गारंटी और नॉन-रिकोर्स फाइनेंसिंग: यह पूरी प्रक्रिया कोलेटरल-मुक्त होती है। साथ ही यह ‘विदाउट रिकोर्स’ होती है, यानी अगर खरीदार (CPSE) बाद में डिफॉल्ट करता है, तो बैंक MSME से पैसा वापस नहीं मांग सकता।
- प्रतिस्पर्धी दरें: प्लेटफार्म पर कई बैंक और NBFCs इनवॉइस को डिस्काउंट करने के लिए प्रतिस्पर्धी बोलियां (Bidding) लगाते हैं, जिससे MSME को बहुत कम ब्याज दर पर तुरंत कार्यशील पूंजी मिल जाती है।
TReDS के बारे में (About TReDS)
- नियामक: यह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विनियमित एक पूर्णतः डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो 2017 से संचालित है।
- कार्यप्रणाली: यह MSMEs के व्यापार प्राप्य (Trade Receivables) को कॉर्पोरेट खरीदारों, सरकारी विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) से प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से भुनाने (Discounting) की सुविधा देता है।
- वर्तमान में संचालित 5 प्लेटफॉर्म: RXIL, M1xchange, Invoicemart, C2treds और DTX।
- अभूतपूर्व विकास: TReDS पर इनवॉइस डिस्काउंटिंग का वॉल्यूम वित्तीय वर्ष 2021-22 के ₹40,000 करोड़ से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2025-26 में ₹3.47 लाख crore हो गया है, जो इसकी जबरदस्त सफलता को दर्शाता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| विशिष्ट प्रणाली / पोर्टल / नियम | महत्वपूर्ण तथ्य |
| TReDS (ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम) | वर्ष 2017 में लॉन्च हुआ, RBI द्वारा विनियमित एक इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म, जो MSMEs के बिलों को भुनाने (Discounting) का काम करता है। |
| उद्यम पोर्टल | MSMEs के स्व-घोषणा आधारित मुफ्त ऑनलाइन पंजीकरण के लिए कपड़ा/MSME मंत्रालय का केंद्रीय पोर्टल। |
| कोलेटरल-फ्री लोन | TReDS पर मिलने वाले पैसे के लिए MSMEs को अपनी कोई संपत्ति बैंक के पास गिरवी नहीं रखनी पड़ती। |
| वैधानिक ऑडिट अनिवार्य | अब CPSEs के लिए सालाना ऑडिट में TReDS अनुपालन का चार्टर्ड अकाउंटेंट (Statutory Auditor) से प्रमाण पत्र लेना कानूनी रूप से अनिवार्य कर दिया गया है। |
भारत-ऑस्ट्रेलिया खेल सहयोग रोडमैप: सॉफ्ट पावर और खेल कूटनीति का नया ढांचा
- प्रारंभिक परीक्षा: भारत-ऑस्ट्रेलिया खेल सहयोग रोडमैप, वाडा (WADA), राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (NADA), राष्ट्रीय खेल संघ।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): भारत और उसके द्विपक्षीय संबंध; भारत के हितों और नीति निर्माण पर विकसित व विकासशील देशों की नीतियों का प्रभाव; सॉफ्ट पावर कूटनीति।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हाल ही में भारत और ऑस्ट्रेलिया ने वर्ष 2023 के पुराने समझौता ज्ञापन (MoUs) को आगे बढ़ाते हुए एक भविष्य-उन्मुख ‘भारत-ऑस्ट्रेलिया खेल सहयोग रोडमैप’ (India-Australia Roadmap for Sports Collaboration) को अंतिम रूप दिया है। आगामी दशक में होने वाले बड़े खेल आयोजनों जैसे—अहमदाबाद में 2030 के राष्ट्रमंडल खेल (Commonwealth Games), ब्रिस्बेन में 2032 के ओलंपिक और पैरालंपिक खेल, तथा भविष्य में ओलंपिक की मेजबानी करने की भारत की महत्वाकांक्षा को देखते हुए यह समझौता दोनों देशों के खेल पारिस्थितिकी तंत्र (Sport Ecosystem) को मजबूत करने के लिए किया गया है।
रोडमैप के 5 प्रमुख स्तंभ और सहयोग के क्षेत्र
A. क्षमता निर्माण (Capacity Building)
- हाई-परफॉर्मेंस सेंटर: भारत में प्राथमिकता वाले खेलों के लिए उच्च प्रदर्शन खेल केंद्रों (High-Performance Sports Centres) की स्थापना और संचालन में ऑस्ट्रेलिया अपनी सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करेगा।
- पैरा-स्पोर्ट्स: दिव्यांग एथलीटों के लिए पैरालंपिक वर्गीकरण, कोचिंग और प्रदर्शन सहायता में ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञता का लाभ उठाया जाएगा, जिसमें दोनों देशों के विश्वविद्यालय भी शामिल होंगे।
- ट्रेन द ट्रेनर: कोच विकास मॉडल के तहत भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच कोचों और शारीरिक शिक्षा शिक्षकों का द्विपक्षीय आदान-प्रदान कार्यक्रम शुरू किया जाएगा।
- योग और योगासन: भारत में स्थित ‘विश्व योगासन फेडरेशन’ के माध्यम से ऑस्ट्रेलिया में योग को एक खेल के रूप में बढ़ावा देने और भागीदारी बढ़ाने के अवसर तलाशे जाएंगे।
- छात्रवृत्तियां: भारत सरकार के वित्तपोषण से प्रतिभाशाली युवा भारतीय खिलाड़ियों को ऑस्ट्रेलिया के उच्च प्रदर्शन कार्यक्रमों में प्रशिक्षण के लिए विश्वविद्यालयों में छात्रवृत्ति दी जाएगी।
B. सहयोगात्मक खेल विज्ञान और तकनीकी अनुसंधान
- संयुक्त अनुसंधान (R&D): दोनों देशों के विश्वविद्यालय मिलकर एथलीट प्रदर्शन विश्लेषण (Analytics), चोट की रोकथाम, खेल पोषण (Sports Nutrition), पहनने योग्य प्रदर्शन तकनीक (Wearable Tech) और रिकवरी तकनीकों पर संयुक्त शोध करेंगे।
- खेल सत्यनिष्ठा (Sport Integrity): भारत की राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (NADA) और ‘स्पोर्ट इंटीग्रिटी ऑस्ट्रेलिया’ मिलकर विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (WADA) के क्षमता निर्माण कार्यक्रमों और यूनेस्को के डोपिंग रोधी कन्वेंशन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग करेंगे।
C. प्रमुख खेल आयोजन
- मेजबानी का अनुभव साझा करना: बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की सफल मेजबानी के लिए ऑस्ट्रेलिया के राज्यों और राष्ट्रीय खेल संगठनों के साथ अनुभवों का आदान-प्रदान होगा।
- पारंपरिक खेलों का प्रदर्शन: ऑस्ट्रेलिया में भारत के पारंपरिक खेलों (जैसे कबड्डी और खो-खो) तथा भारत में ऑस्ट्रेलियाई खेलों (जैसे ऑस्ट्रेलियाई फुटबॉल लीग – AFL और बास्केटबॉल) के प्रदर्शनी मैच और युवा प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा।
- क्रिकेट कूटनीति: दिसंबर 2026 में चेन्नई में होने वाले पहले बिग बैश लीग (BBL) मैच का स्वागत करते हुए दोनों देश अब भारत में हर साल वार्षिक BBL मैचों के आयोजन के लिए प्रतिबद्धता जता रहे हैं।
D. खेल उद्योग और निवेश मंच
- दिसंबर 2026 में मुंबई में आयोजित होने वाले ‘स्पोर्ट्स इंडस्ट्री समिट’ के आधार पर खेल उपकरण निर्माण, खेल मीडिया, ब्रॉडकास्टिंग और स्पोर्ट्स स्टार्टअप्स में दोनों देशों की कंपनियों के बीच व्यावसायिक सहयोग बढ़ाया जाएगा।
- भारत से उच्च गुणवत्ता वाले और प्रतिस्पर्धी दरों वाले खेल सामानों (Sports Goods) के ऑस्ट्रेलिया को निर्यात का विस्तार किया जाएगा।
E. खेलों में महिलाओं की भागीदारी (Women in Sports)
- महिला एथलीटों के लिए द्विपक्षीय टूर्नामेंटों का आयोजन करके खेल के माध्यम से महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, स्वास्थ्य, नेतृत्व और सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त पहल शुरू की जाएगी।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| विशिष्ट शब्दावली / संस्था | महत्वपूर्ण तथ्य |
| 2030 राष्ट्रमंडल खेल | इस रोडमैप में अहमदाबाद (भारत) को 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों के संभावित/प्रस्तावित स्थल के रूप में उल्लेखित किया गया है। |
| 2032 ओलंपिक खेल | वर्ष 2032 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक और पैरालंपिक खेल ब्रिस्बेन (ऑस्ट्रेलिया) में आयोजित किए जाएंगे। |
| NADA और WADA | NADA भारत में डोपिंग नियंत्रण कार्यक्रम चलाती है, जबकि WADA (मुख्यालय: मॉन्ट्रियल, कनाडा) वैश्विक स्तर पर खेलों में ड्रग्स के उपयोग की निगरानी करने वाली सर्वोच्च संस्था है। |
| विश्व योगासन फेडरेशन | यह भारत में आधारित एक अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघ है जो योग को एक प्रतिस्पर्धी खेल (Yogasana Sports) के रूप में वैश्विक मान्यता दिलाने के लिए काम कर रहा है। |
PMFME योजना का ऐतिहासिक मील का पत्थर: 2 लाख लाभार्थियों को मिला ऋण लिंक
- प्रारंभिक परीक्षा: पीएम सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME), एक जिला एक उत्पाद (ODOP), उद्यम आधार, FSSAI।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारत में खाद्य प्रसंस्करण और संबंधित उद्योग- कार्यक्षेत्र और महत्व, स्थान, अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम आवश्यकताएं, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन; समावेशी विकास और रोजगार सृजन।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हाल ही में केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्री चिराग पासवान ने नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में ‘प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना’ (PMFME) के तहत एक ऐतिहासिक मील का पत्थर पार करने की घोषणा की है। इस योजना के अंतर्गत अब तक 2 लाख से अधिक सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों के ऋण (Credit-Linked Loans) स्वीकृत किए जा चुके हैं। इस अवसर पर झारखंड के रांची के रहने वाले श्री इंद्रजीत सिंह को ‘2 लाखवें लाभार्थी’ के रूप में सम्मानित किया गया।
PMFME योजना की प्रमुख उपलब्धियां और आर्थिक प्रभाव
इस योजना ने भारत के असंगठित खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को संगठित करने में अभूतपूर्व सफलता पाई है:
1. निवेश और रोजगार सृजन
- भारी निवेश: 2 लाख से अधिक ऋण स्वीकृतियों के माध्यम से इस योजना ने बाजार में ₹20,300 करोड़ से अधिक का कुल परियोजना निवेश जुटाने (Leverage) में सफलता हासिल की है।
- रोजगार के अवसर: इस योजना ने देश के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में लगभग 11 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा किए हैं।
2. समावेशी विकास और महिला नेतृत्व (Women-Led Development)
- नए उद्यमी: योजना के कुल लाभार्थियों में से लगभग 90% पहली पीढ़ी के उद्यमी (First-Generation Entrepreneurs) हैं, जिन्होंने पहली बार अपना व्यवसाय शुरू किया है।
- महिला सशक्तिकरण: कुल लाभार्थियों में 44% महिलाएं हैं। इसके अतिरिक्त, क्षमता निर्माण के तहत प्रशिक्षित 1.76 लाख लाभार्थियों में से 77% महिलाएं हैं, जो ‘विकसित भारत’ के तहत महिला-नेतृत्व वाले विकास को दर्शाती हैं।

- स्वयं सहायता समूह (SHGs): योजना के तहत 4.18 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह सदस्यों को सीड कैपिटल (प्रारंभिक पूंजी) सहायता प्रदान की गई है।
3. औपचारिक अर्थव्यवस्था में प्रवेश (Formalisation of Economy)
- पंजीकरण और अनुपालन: योजना के समर्थन से 75,000 से अधिक सूक्ष्म उद्यमों ने पहली बार संगठित या औपचारिक अर्थव्यवस्था में प्रवेश किया है। इन्होंने उद्यम आधार, उद्यम असिस्ट, FSSAI (खाद्य सुरक्षा मानक) और GST के तहत अपने व्यवसायों का पंजीकरण कराया है।
- जमीनी नेटवर्क: योजना के तहत कार्यरत जिला संसाधन व्यक्तियों (DRPs) का नेटवर्क जमीनी स्तर पर ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को आपस में जोड़ने का काम कर रहा है।
4. ODOP दृष्टिकोण और इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट
- एक जिला एक उत्पाद (ODOP): इस दृष्टिकोण के माध्यम से स्थानीय स्तर पर मखाना, बाजरा (Millets), मसाले और भौगोलिक संकेतक (GI-Tagged) वाले उत्पादों के आसपास स्थानीय मूल्य श्रृंखलाओं (Value Chains) को मजबूत किया जा रहा है।
- साझा ब्रांडिंग: इसके तहत 40 साझा ब्रांडों (Common Brands) को मंजूरी दी गई है जो लगभग 200 स्थानीय उत्पादों को बाजार लिंकेज और ब्रांडिंग प्रदान करते हैं।
- इंक्यूबेशन सेंटर: देश के 27 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 80 सामान्य ऊष्मायन केंद्रों (Common Incubation Centres) को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 32 केंद्र पूरी तरह चालू (Commissioned) हो चुके हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| विशिष्ट घटक / पहल | महत्वपूर्ण तथ्य |
| PMFME योजना | यह खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) द्वारा शुरू की गई एक केंद्रीय प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) है, जिसका उद्देश्य सूक्ष्म खाद्य उद्यमों को वित्तीय, तकनीकी और व्यावसायिक सहायता देना है। |
| सीड कैपिटल | स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के कार्यशील पूंजी और छोटे उपकरणों के लिए दी जाने वाली शुरुआती वित्तीय सहायता (प्रति सदस्य ₹40,000 तक)। |
| कॉमन इंक्यूबेशन सेंटर | ऐसे अत्याधुनिक प्रसंस्करण केंद्र जहां छोटे उद्यमी और SHGs बिना भारी मशीनरी खरीदे, किराए पर अपनी फसलों/खाद्य उत्पादों की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग कर सकते हैं। |
| अग्रणी राज्य | योजना को जमीनी स्तर पर लागू करने में बिहार, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश देश के सबसे अग्रणी राज्य बनकर उभरे हैं। |
भारत-न्यूजीलैंड विशेष कार्यक्रम: “एक विजयी साझेदारी” और रणनीतिक संबंध
- प्रारंभिक परीक्षा: भारत-न्यूजीलैंड रणनीतिक साझेदारी, द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौता (FTA), स्पोर्ट्स जॉइंट एक्शन प्लान, राष्ट्रमंडल खेल 2030।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से जुड़े और/या भारत के हितों को प्रभावित करने वाले समझौते; विकसित देशों की नीतियां और कूटनीति।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हाल ही में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री राइट ऑनरेबल क्रिस्टोफर लक्सन द्वारा आयोजित एक विशेष गाला लंच कार्यक्रम में भाग लिया, जिसकी थीम ”इंडिया-न्यूजीलैंड: ए विनिंग पार्टनरशिप” थी। इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान दोनों देशों के संबंधों को औपचारिक रूप से रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) के स्तर पर उन्नत (Elevate) किया गया है। साथ ही व्यापार और खेलों को बढ़ावा देने के लिए कई बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
द्विपक्षीय वार्ता के प्रमुख नीतिगत स्तंभ और तथ्य
1. द्विपक्षीय संबंधों का उन्नयन (Strategic Partnership)
- दोनों देशों ने अपने राजनयिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करते हुए इन्हें ‘रणनीतिक साझेदारी’ का दर्जा दिया है। यह कदम हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में दोनों देशों के बीच गहरे होते भू-राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग को रेखांकित करता है।
2. ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) और व्यापार लक्ष्य
- रिकॉर्ड समय में समापन: दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के रिकॉर्ड समय में संपन्न होने की सराहना की।
- आर्थिक लाभ: यह समझौता दोनों देशों के व्यवसायों, युवाओं और किसानों के लिए नए बाजार और अवसर खोलेगा।
- द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य: इस FTA के प्रभावी कार्यान्वयन के माध्यम से वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
3. स्पोर्ट्स जॉइंट एक्शन प्लान
- क्रिकेट से आगे का सहयोग: दोनों देशों के बीच खेल जुड़ाव के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक ‘स्पोर्ट्स जॉइंट एक्शन प्लान’ को अंतिम रूप दिया गया है। इसका उद्देश्य दोनों देशों के संबंधों को केवल क्रिकेट तक सीमित न रखकर अन्य खेलों में भी विस्तारित करना है।
- उच्च प्रदर्शन खेल (High Performance Sports): दोनों नेताओं ने कार्यक्रम स्थल पर प्रदर्शित किए गए तकनीकी और नवोन्मेषी खेल उपकरणों (Innovative Sports Equipments) का अवलोकन किया और न्यूजीलैंड के विशिष्ट एथलीटों व खेल विशेषज्ञों से बातचीत की।
- 2030 राष्ट्रमंडल खेल: यह खेल सहयोग विशेष रूप से भारत द्वारा राष्ट्रमंडल खेल 2030 (Commonwealth Games 2030) की मेजबानी की तैयारियों के संदर्भ में दोनों देशों के खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में मदद करेगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| विशिष्ट समझौता / शब्दावली | महत्वपूर्ण तथ्य |
| 2030 व्यापार लक्ष्य | भारत और न्यूजीलैंड ने अपने नए हस्ताक्षरित FTA के माध्यम से वर्ष 2030 तक आपसी व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। |
| स्पोर्ट्स जॉइंट एक्शन प्लान | भारत और न्यूजीलैंड के बीच 100 वर्षों के खेल संबंधों को चिह्नित करने और क्रिकेट से इतर अन्य खेलों में तकनीकी सहयोग बढ़ाने के लिए शुरू की गई कार्य योजना। |
| क्रिस्टोफर लक्सन | वर्तमान में न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने ‘इंडिया-न्यूजीलैंड: ए विनिंग पार्टनरशिप’ कार्यक्रम की मेजबानी की। |
| राष्ट्रमंडल खेल 2030 | आधिकारिक पीआईबी विज्ञप्ति के अनुसार, भारत इन खेलों की मेजबानी के लिए अपनी तैयारियां कर रहा है। |