13 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत संपन्न हुई ‘तीसरी ब्रिक्स परिवहन मंत्रियों की बैठक’ और नागपुर घोषणापत्र, भारतीय कपड़ा उद्योग को सस्टेनेबल बनाने के लिए ‘चक्रीय वस्त्र अर्थव्यवस्था रोडमैप’, केरल के महान समाज सुधारक मन्नत पद्मनाभन की प्रतिमा का अनावरण व नायर सर्विस सोसाइटी (NSS) का ऐतिहासिक योगदान, तटीय सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए आगामी ‘स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर’ अभियान 2026, तथा देश में वनीकरण को जन-आंदोलन बनाने के लिए केंद्रीय मंत्री द्वारा शुरू किए गए ‘वृक्ष मित्र अभियान’ और मिशनLiFE जैसे परीक्षा-उपयोगी विषयों का व्यावहारिक व नीतिगत विश्लेषण।
तीसरी ब्रिक्स परिवहन मंत्रियों की बैठक: नागपुर घोषणापत्र और लॉजिस्टिक्स कूटनीति
- प्रारंभिक परीक्षा: ब्रिक्स समूह, नागपुर घोषणापत्र, सतत विमानन ईंधन (SAF), ब्रिक्स रेलवे अनुसंधान नेटवर्क।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से जुड़े समझौते; बुनियादी ढांचा: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, हवाई अड्डे, रेलवे; सतत विकास और हरित परिवहन।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हाल ही में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के तहत महाराष्ट्र के नागपुर में तीसरी ब्रिक्स परिवहन मंत्रियों की बैठक (3rd BRICS Transport Ministers’ Meeting) सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस उच्च स्तरीय बैठक में सदस्य देशों ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और परिवहन क्षेत्र को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए सर्वसम्मति से एक ऐतिहासिक मंत्रिस्तरीय घोषणापत्र (Nagpur Ministerial Declaration) को अपनाया है।
घोषणापत्र के प्रमुख स्तंभ और सहयोग के क्षेत्र
इस रणनीतिक बैठक में ब्रिक्स देशों के बीच परिवहन कूटनीति को नया आयाम देने के लिए छह मुख्य प्राथमिकताओं पर सहमति बनी है:
1. परिवहन डीकार्बोनाइजेशन
- वैश्विक उत्सर्जन को कम करने के लिए परिवहन क्षेत्र में कार्बन फुटप्रिंट को घटाने पर विशेष बल दिया गया है, जिसके तहत सार्वजनिक और माल ढुलाई परिवहन को हरित ऊर्जा (Green Energy) की ओर स्थानांतरित किया जाएगा।
2. सतत विमानन ईंधन (Sustainable Aviation Fuel – SAF)
- विमानन क्षेत्र से होने वाले प्रदूषण से निपटने के लिए पारंपरिक एटीएफ (ATF) के स्थान पर जैव-ईंधन आधारित ‘सतत विमानन ईंधन’ (SAF) के विकास, उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सदस्य देश मिलकर काम करेंगे।
3. बुनियादी ढांचे में चक्रीयता
- नई सड़कों और परिवहन परियोजनाओं के निर्माण में पर्यावरण अनुकूल दृष्टिकोण अपनाते हुए सामग्रियों के पुनर्चक्रण (Recycling and Reuse) को अनिवार्य करने पर सहमति बनी है, ताकि प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कम हो सके।
4. शहरी गतिशीलता हब
- ब्रिक्स देशों के बढ़ते शहरों में ट्रैफिक और प्रदूषण की समस्या को हल करने के लिए आधुनिक, एकीकृत और सुलभ ‘अर्बन मोबिलिटी हब्स’ का विकास किया जाएगा, जो मेट्रो, बसों और ई-वाहनों को एक स्थान पर जोड़ेंगे।
5. लॉजिस्टिक्स और आपूर्ति श्रृंखला सहयोग
- वैश्विक व्यापार में आने वाली रुकावटों को दूर करने के लिए ब्रिक्स देशों के बीच निर्बाध और लचीली लॉजिस्टिक्स आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain Cooperation) को मजबूत किया जाएगा, जिससे व्यापारिक लागत में कमी आएगी।
6. ब्रिक्स रेलवे अनुसंधान नेटवर्क
- रेलवे के आधुनिकीकरण, हाई-स्पीड कनेक्टिविटी और सुरक्षा तकनीकों को साझा करने के लिए एक समर्पित अनुसंधान नेटवर्क के माध्यम से वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| विशिष्ट घटक / तथ्य | महत्वपूर्ण तथ्य |
| बैठक का स्थल | तीसरी ब्रिक्स परिवहन मंत्रियों की बैठक नागपुर, महाराष्ट्र में आयोजित की गई। |
| ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 | वर्ष 2026 के लिए ब्रिक्स (BRICS) समूह की अध्यक्षता भारत के पास है। |
| अडॉप्टेड फ्रेमवर्क | परिवहन मंत्रियों की बैठक से ठीक पहले 9-10 जुलाई को परिवहन कार्य समूह (Transport Working Group – TWG) के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस पूरे एजेंडे को अंतिम रूप दिया था। |
| सतत विमानन ईंधन (SAF) | यह कृषि अपशिष्ट, प्रयुक्त खाना पकाने के तेल और ठोस कचरे से बनने वाला ईंधन है, जो विमानन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन को 80% तक कम कर सकता है। |
भारत के कपड़ा क्षेत्र में चक्रीय अर्थव्यवस्था
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (NPOP), जूट-ICARE, पीएम मित्रा (PM MITRA) पार्क, MSE-GIFT, MSE-SPICE, इको-मार्क योजना 2024।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोजगार से संबंधित विषय; औद्योगिक नीति और औद्योगिक विकास; पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण (सस्टेनेबिलिटी)।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
वैश्विक स्तर पर पर्यावरण के अनुकूल (Sustainable) उत्पादों की बढ़ती मांग के बीच भारत सरकार ने कपड़ा मूल्य श्रृंखला (Textile Value Chain) में चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक रोडमैप प्रस्तुत किया है। राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी 2025 के अनुसार, कपड़ा क्षेत्र भारत के जीडीपी में लगभग 2% और विनिर्माण जीवीए (Manufacturing GVA) में 11% का योगदान देता है। भारत दुनिया का छठा सबसे बड़ा कपड़ा निर्यातक है। 4.5 करोड़ से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार देने वाले इस क्षेत्र को वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए अब कच्चे माल से लेकर कचरा प्रबंधन (Waste Management) तक पूरी श्रृंखला को सस्टेनेबल बनाया जा रहा है।
कपड़ा क्षेत्र में चक्रीयता के मुख्य आंकड़े
भारत की पारंपरिक संसाधन-सचेत संस्कृति के कारण देश के कपड़ा क्षेत्र में रीसाइक्लिंग और पुनरुत्पादन का एक मजबूत ढांचा पहले से मौजूद है:
- कचरा प्रबंधन: भारत में सालाना प्रबंधित होने वाले लगभग 7.8 मिलियन टन कपड़ा कचरे में से 90% से अधिक हिस्सा घरेलू कारखानों के स्क्रैप और उपयोग के बाद के कचरे से आता है।
- रिकवरी और पुनर्चक्रण: कुल कपड़ा कचरे का 70% से अधिक हिस्सा वर्तमान में पुनर्चक्रण (Recycling), अपसाइकलिंग या पुनरुपयोग के माध्यम से रिकवर कर लिया जाता है। कारखानों से निकलने वाले कचरे (Pre-consumer waste) के मामले में यह रिकवरी दर 95% तक है।

- लैंडफिल से बचाव: उपयोग किए जा चुके कपड़ों (Post-consumer textiles) का लगभग 55% हिस्सा कचरे के ढेरों (Landfills) में जाने से बचा लिया जाता है।
- आजीविका सहायता: यह पूरा चक्रीय इकोसिस्टम देश में 40-45 लाख आजीविका को सहारा देता है, जिसमें वंचित समुदायों की महिलाएं कचरा संग्रहण और छंटनी में अग्रणी भूमिका निभाती हैं।
स्थानीय कपड़ा कचरा रिकवरी के तीन सफल मॉडल
1. नवी मुंबई मॉडल
- बेलापुर (नवी मुंबई) में भारत की पहली नगर निगम कपड़ा रिकवरी सुविधा (Municipal Textile Recovery Facility) स्थापित की गई है।
- इसने 30 मीट्रिक टन कपड़ा कचरा एकत्र कर 41,000 से अधिक वस्तुओं का प्रसंस्करण किया है और 1.14 लाख परिवारों तक पहुंच बनाकर महिला कारीगरों को बाजार उपलब्ध कराया है।
2. पानीपत हब (डाउनस्ट्रीम रीसाइक्लिंग)
- हरियाणा का पानीपत शहर कपड़ा रीसाइक्लिंग का एक विशाल केंद्र बन चुका है। यह प्रतिदिन 3,500 से 5,250 टन कचरे को संभालता है। यहाँ अन्य कपड़ा क्लस्टरों से आने वाले कतरनों को प्रसंस्कृत और पुनर्चक्रित किया जाता है।
3. मंगोलपुरी का कतरन बाजार
- दिल्ली के मंगोलपुरी का कतरन बाजार अनौपचारिक नेटवर्क की ताकत को दिखाता है। यहाँ नोएडा, गुरुग्राम और जयपुर जैसे शहरों से आने वाले कपड़ा कतरनों की रंग के आधार पर छंटनी की जाती है और रोजाना 10 टन से अधिक छंटनीशुदा कचरा पानीपत के औपचारिक रीसाइक्लिंग क्लस्टरों को भेजा जाता है।
उत्पादन के विभिन्न चरणों में सरकारी पहल
| उत्पादन का चरण | प्रमुख सरकारी योजना/पहल | मुख्य उद्देश्य एवं तथ्य |
| इनपुट चरण (कच्चा माल) | राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (NPOP) | इसके तहत जैविक कपास फाइबर (Organic Cotton) के प्रमाणीकरण मानकों को विनियमित किया जाता है, जिसे यूरोपीय आयोग द्वारा भी मान्यता प्राप्त है। |
| जूट-ICARE (लॉन्च: 2015) | जूट की उन्नत और वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देना। वर्ष 2024-25 तक इसका कवरेज बढ़कर 10 राज्यों के 2.15 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। | |
| न्यू एज फाइबर मिशन (MM-III) | सिंथेटिक फाइबर के विकल्प के रूप में रामी, सिसाल और फ्लैक्स जैसे नए जमाने के प्राकृतिक फाइबर के उत्पादन को बढ़ावा देना। | |
| विनिर्माण चरण (उत्पादन) | पीएम मित्रा (PM MITRA) पार्क | इसके तहत ₹4,445 करोड़ के परिव्यय से 7 मेगा टेक्सटाइल पार्क (तमिलनाडु, तेलंगाना, गुजरात, कर्नाटक, मप्र, यूपी, महाराष्ट्र) स्वीकृत किए गए हैं, जहाँ वेस्ट-वाटर रीसाइक्लिंग अनिवार्य है। दिसंबर 2025 तक ₹27,434 करोड़ के निवेश समझौते हो चुके हैं। |
| MSE-GIFT और MSE-SPICE (2023) | कपड़ा क्षेत्र के MSMEs को हरित प्रौद्योगिकियां अपनाने के लिए 2% ब्याज सबवेन्शन (GIFT) तथा चक्रीय समाधानों के लिए 25% पूंजीगत सब्सिडी (SPICE) प्रदान करना। | |
| भारतीय कार्बन बाजार (ICM) | कपड़ा क्षेत्र को कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) के तहत अनिवार्य अनुपालन तंत्र में शामिल किया गया है, जिसके तहत कंपनियों को अपने स्कोप-1 और स्कोप-2 ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का खुलासा करना होगा। | |
| पोस्ट-प्रोडक्शन (कचरा प्रबंधन) | ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2026 | 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी इन नियमों के तहत औद्योगिक इकाइयों (जैसे सीमेंट प्लांट) के लिए अपने ईंधन में कपड़ा कचरे से बने रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल (RDF) का उपयोग 6 वर्षों में 5% से बढ़ाकर 15% करना अनिवार्य है। |
| बाजार और प्रचार चरण | इको-मार्क योजना, 2024 | पर्यावरणीय मानदंडों को पूरा करने वाले कपड़ा उत्पादों के लिए 13 भारतीय मानक श्रेणियों के तहत ‘इको मार्क’ प्रमाणीकरण प्रदान करना। |
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- हानिकारक रसायनों पर प्रतिबंध: कपड़ा आपूर्ति श्रृंखला से खतरनाक रसायनों को हटाने के लिए चलाए जा रहे पायलट प्रोजेक्ट के तहत 400 फैक्टरियों में 10,530 टन हानिकारक रसायनों के उपयोग को कम करने का लक्ष्य है। भारत में बेंज़िडाइन-आधारित रंगों और 70 अज़ो रंगों (Azo Dyes) के उपयोग को पूरी तरह प्रतिबंधित किया जा चुका है।
- स्टॉकहोम कन्वेंशन: भारत ने वर्ष 2006 में इस वैश्विक संधि की पुष्टि की थी, जो मानव स्वास्थ्य को परसिस्टेंट ऑर्गेनिक पॉल्यूटेंट्स (POPs) से बचाने के लिए काम करती है।
- कस्तूरी कॉटन और सिल्क मार्क: यह प्रीमियम भारतीय कपास और रेशम को वैश्विक बाजारों में एक विशिष्ट पहचान तथा आपूर्ति श्रृंखला में पूर्ण पारदर्शिता (Traceability) प्रदान करने की ब्रांडिंग पहल है।
- SURE (सस्टेनेबल रेजोल्यूशन): यह भारतीय परिधान उद्योग की सबसे बड़ी स्वैच्छिक स्थिरता प्रतिबद्धता है, जिसे केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय, संयुक्त राष्ट्र (UN in India) और रिलायंस ब्रांड्स लिमिटेड द्वारा संयुक्त रूप से चलाया जा रहा है।
- भारत टेक्स 2026): यह भारत का प्रमुख वैश्विक कपड़ा आयोजन है, जो फाइबर से लेकर फैशन तक पूरी मूल्य श्रृंखला को एक मंच पर लाता है।
मन्नाथु पद्मनाभन प्रतिमा अनावरण और मन्नम स्मृति मंडपम का उद्घाटन
- प्रारंभिक परीक्षा: मन्नाथु पद्मनाभन, नायर सर्विस सोसाइटी (NSS), केरल का सामाजिक पुनर्जागरण, ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 1): 18वीं सदी के मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्वपूर्ण व्यक्ति, विषय और उनके योगदान; भारतीय संस्कृति के मुख्य पहलू (कथकली, मोहिनीअट्टम, कलरीपायट्टु)।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हाल ही में भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने नई दिल्ली के द्वारका स्थित मन्नम इंटरनेशनल सेंटर में महान समाज सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी मन्नाथु पद्मनाभन की प्रतिमा का अनावरण किया और ‘मन्नम स्मृति मंडपम’ का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम का आयोजन नायर सर्विस सोसाइटी (NSS), दिल्ली द्वारा किया गया था। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत एक पौधा भी लगाया।
मन्नाथु पद्मनाभन: जीवन और सामाजिक योगदान
- केरल के पुनर्जागरण के अग्रदूत: उन्हें केरल में सामाजिक समानता, समावेशन और कुप्रथाओं के खिलाफ आवाज उठाने वाले अग्रणी नेताओं में गिना जाता है। उनका मानना था कि वास्तविक सामाजिक प्रगति तभी संभव है जब समाज में न्याय और करुणा हो।
- नायर सर्विस सोसाइटी (NSS) की स्थापना: उन्होंने 1914 में नायर सर्विस सोसाइटी की स्थापना की थी। इस संस्था का उद्देश्य केवल एक समुदाय का विकास नहीं, बल्कि शिक्षा, आत्मनिर्भरता और सामुदायिक सेवा के माध्यम से पूरे समाज का उत्थान करना था।
- संस्था निर्माता: उनका दृढ़ विश्वास था कि महान संस्थाओं का निर्माण धन से नहीं, बल्कि महान प्रतिबद्धता (Commitment) से होता है। उन्होंने आम घरों से मामूली योगदान स्वीकार करके कई शैक्षणिक और सामाजिक संस्थानों की स्थापना की।
- ऐतिहासिक आंदोलनों में भागीदारी:
- उन्होंने केरल में अस्पृश्यता के खिलाफ हुए प्रसिद्ध वायकोम सत्याग्रह 1924 और गुरुवायूर सत्याग्रह 1931 में सक्रिय भूमिका निभाई थी, जिसका उद्देश्य निचली जातियों के लिए मंदिरों में प्रवेश का अधिकार सुनिश्चित करना था।
केरल की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण
इस आयोजन के दौरान उपराष्ट्रपति ने दिल्ली-एनसीआर में केरल की समृद्ध सांस्कृतिक और पारंपरिक कलाओं को संरक्षित करने में नायर सर्विस सोसाइटी के प्रयासों की सराहना की। इसमें तीन प्रमुख कला रूप शामिल हैं:
- कलरीपायट्टु: भारत की सबसे पुरानी और प्रसिद्ध पारंपरिक मार्शल आर्ट (युद्ध कला), जिसकी उत्पत्ति केरल में हुई थी।
- कथकली: केरल का शास्त्रीय नृत्य-नाटक (Classical Dance-Drama), जो अपने भारी मेकअप, जीवंत वेशभूषा और मूक अभिनय (मूक भावभंगिमाओं) के लिए जाना जाता है।
- मोहिनीअट्टम: केरल का एक अन्य प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्य, जो अपनी सलीके से भरी गतियों और लास्य (स्त्रीत्व प्रधान) तत्वों के लिए पहचाना जाता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| विशिष्ट घटक / शब्दावली | महत्वपूर्ण तथ्य |
| मन्नाथु पद्मनाभन | केरल के महान समाज सुधारक, स्वतंत्रता सेनानी और नायर सर्विस सोसाइटी (1914) के संस्थापक। |
| श्री सी. पी. राधाकृष्णन | वर्तमान में भारत के उपराष्ट्रपति हैं, जिन्होंने इस स्मारक का उद्घाटन किया। |
| ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान | पर्यावरण संरक्षण और वनीकरण को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार द्वारा संचालित एक राष्ट्रव्यापी वृक्षारोपण अभियान। |
| नृत्य और युद्ध कला | कलरीपायट्टु, कथकली और मोहिनीअट्टम तीनों का संबंध मूल रूप से केरल राज्य से है। |
‘स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर’ अभियान 2026 और विज्ञान मंत्रालयों की संयुक्त समीक्षा
- प्रारंभिक परीक्षा: स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर अभियान 2026, अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF), राष्ट्रीय क्वांटम मिशन, SARAL_AI प्लेटफॉर्म, DBT Quest।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोजमर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव; वैज्ञानिक संस्थानों का एकीकरण; पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण (तटीय प्रदूषण); आपदा प्रबंधन।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हाल ही में केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली के CSIR-साइंस सेंटर में भारत सरकार के सभी विज्ञान मंत्रालयों और विभागों के सचिवों के साथ एक उच्च स्तरीय समन्वय बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी 10 से 19 सितंबर 2026 तक चलने वाले राष्ट्रव्यापी तटीय स्वच्छता अभियान ‘स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर’ की तैयारियों की समीक्षा करना तथा देश के वैज्ञानिक संस्थानों को अलग-अलग काम करने के बजाय एक एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र (Integrated Ecosystem) के रूप में कार्य करने के लिए प्रेरित करना था।
‘स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर’ अभियान 2026
यह अभियान भारत की लंबी तटरेखा को प्लास्टिक कचरे और समुद्री प्रदूषण से मुक्त करने के लिए दुनिया के सबसे बड़े तटीय स्वच्छता अभियानों में से एक है:
- समय सारणी: यह राष्ट्रव्यापी अभियान 10 से 19 सितंबर 2026 तक संचालित किया जाएगा।
- रणनीति: इसका उद्देश्य वैज्ञानिक नवाचार (Technological Innovation), अंतर-विभागीय सहयोग और व्यापक जन-भागीदारी (People’s Movement) को एक साथ लाना है।
- भागीदार: इसमें विभिन्न वैज्ञानिक संस्थान, सरकारी एजेंसियां, शैक्षणिक संस्थान, गैर-सरकारी संगठन और तटीय स्थानीय समुदाय मिलकर काम करेंगे।
विभिन्न विज्ञान विभागों की प्रमुख फ्लैगशिप पहल और रणनीतियाँ
1. विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) की पहल:
- अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF): देश में शोध और विकास (R&D) की संस्कृति को बढ़ावा देने वाला शीर्ष निकाय। इसके तहत शोधकर्ताओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए SARAL_AI नामक एक डिजिटल प्लेटफॉर्म को व्यापक रूप से अपनाने पर जोर दिया गया है।
- राष्ट्रीय क्वांटम मिशन: भारत को क्वांटम कंप्यूटिंग, संचार और तकनीक में वैश्विक लीडर बनाने के लिए संचालित मिशन।
- अंतर-विषयक साइबर-भौतिक प्रणालियों पर राष्ट्रीय मिशन (NM-ICPS): यह मिशन साइबर सुरक्षा, रोबोटिक्स और डेटा एनालिटिक्स जैसे आधुनिक क्षेत्रों में अनुसंधान को बढ़ावा देता है।
2. जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) की पहल:
- सार्वजनिक जुड़ाव: विभाग ने स्वास्थ्य, बायोइकोनॉमी, जीनोमिक्स और कृषि जैव प्रौद्योगिकी में भारत की प्रगति को प्रदर्शित करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान #DBT Quest लॉन्च किया है।
- सहयोग: सीएसआईआर, इसरो, बार्क (BARC) और डीबीटी मिलकर पूर्वोत्तर क्षेत्र (NER) के लिए विशेष जैव-प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य अनुसंधान कार्यक्रम चला रहे हैं।
3. वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (DSIR / CSIR):
- दस्तावेजीकरण: CSIR इस वर्ष अपने स्थापना दिवस पर पिछले 12 वर्षों की अपनी प्रमुख वैज्ञानिक उपलब्धियों का एक व्यापक प्रकाशन जारी करेगा।
- जनसंवाद: “इन्नोवेशन इन एक्शन” व्याख्यान श्रृंखला के माध्यम से आम जनता और छात्रों को भारतीय अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र से जोड़ा जा रहा है।
आगामी प्रमुख राष्ट्रीय वैज्ञानिक कार्यक्रम (2026)
- ESTIC-2026 (पर्यावरण और सतत तकनीक से जुड़ा वैज्ञानिक सम्मेलन)
- भारत अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (IISF) 2026
- राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस (National Space Day) 2026
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| विशिष्ट घटक / पहल | महत्वपूर्ण तथ्य |
| ‘स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर’ | 10-19 सितंबर 2026 तक चलने वाला तटीय स्वच्छता और समुद्री संरक्षण का एक राष्ट्रव्यापी अभियान। |
| SARAL_AI प्लेटफॉर्म | अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) के तहत शोधकर्ताओं की सुविधा और परियोजनाओं की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए विकसित एआई-संचालित डिजिटल प्लेटफॉर्म। |
| ANRF | Anusandhan National Research Foundation — भारत में अकादमिक, उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच कड़ियों को मजबूत करने वाला वैधानिक ढांचा। |
| NM-ICPS | National Mission on Interdisciplinary Cyber-Physical Systems — एआई, आईओटी (IoT) और साइबर-फिजिकल सुरक्षा के लिए डीएसटी (DST) की प्रमुख पहल। |
‘वृक्ष मित्र अभियान’ और ग्रीन इंडिया: केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का जन-आंदोलन रोडमैप
- प्रारंभिक परीक्षा: वृक्ष मित्र अभियान, मिशन LiFE (Lifestyle for Environment), हरियाली अमावस्या (12 अगस्त), गोवर्धन पूजा।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण; जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और वैज्ञानिक चेतना; धारणीय कृषि (Sustainable Agriculture) और मृदा स्वास्थ्य; समावेशी विकास और जन-आंदोलन।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हाल ही में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली के पूसा कॉम्प्लेक्स में लगभग 17,000 ‘वृक्ष मित्रों’ के साथ वर्चुअल और प्रत्यक्ष संवाद किया। इस उच्च स्तरीय ‘पर्यावरण संरक्षण संकल्प कार्यक्रम’ में पद्म भूषण से सम्मानित पर्यावरणविद् श्री अनिल जोशी और प्रख्यात चिकित्सक डॉ. अनूप हजेला भी शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकारी नीतियों तक सीमित न रखकर इसे देश के प्रत्येक नागरिक की दैनिक आदत और एक व्यापक राष्ट्रव्यापी जन-आंदोलन (Mass Movement) का रूप देना है।
‘वृक्ष मित्र अभियान’ का रणनीतिक रोडमैप
1. व्यक्तिगत संकल्प: “हर वर्ष एक पेड़ और पांच नए साथी”
- प्रत्येक नागरिक को वर्ष में कम से कम एक पेड़ लगाने और इस अभियान से न्यूनतम पांच नए लोगों को जोड़ने का संकल्प लेना होगा।
- इस जुड़ाव को बढ़ावा देने के लिए वृक्ष मित्र अपनी सामाजिक जिम्मेदारी की घोषणा सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से करेंगे, ताकि 12 अगस्त 2026 को आने वाली हरियाली अमावस्या तक एक सुदृढ़ डिजिटल और जमीनी नेटवर्क तैयार किया जा सके।
2. पारिवारिक और सांस्कृतिक जुड़ाव
- शुभ अवसरों पर पौधारोपण: प्रत्येक परिवार अपने जीवन के महत्वपूर्ण अवसरों जैसे- जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ, बच्चों के जन्म और माता-पिता की स्मृति में अनिवार्य रूप से पौधारोपण करेगा।
- इन आयोजनों को ‘वृक्ष उत्सव’ के रूप में मनाया जाएगा। साथ ही, विवाह के निमंत्रण पत्रों और सामाजिक-धार्मिक कार्यक्रमों में भी पौधे लगाने की अपील शामिल की जाएगी।
3. ‘वृक्ष मित्र परिवार’ का राष्ट्रीय संस्थागत ढांचा
- वृक्षारोपण के इन व्यक्तिगत प्रयासों को बिखरा हुआ छोड़ने के बजाय ‘वृक्ष मित्र परिवार’ नाम से एक सुव्यवस्थित सांगठनिक ढांचा तैयार किया जाएगा।
- इसकी समितियां राष्ट्रीय, राज्य, जिला, ब्लॉक और ग्राम स्तर तक गठित की जाएंगी और इस पूरे नेटवर्क का औपचारिक पंजीकरण (Registration) कराया जाएगा। इसका एक समर्पित डिजिटल पोर्टल और विशिष्ट लोगो भी जारी किया जाएगा।
4. संरक्षण की गारंटी और सरकारी योजनाओं से जुड़ाव
- वृक्ष मित्र स्थल: प्रत्येक ग्राम पंचायत और शहरी स्थानीय निकाय (ULB) अपने क्षेत्र में 2-3 एकड़ भूमि चिह्नित करेंगे, जहाँ नियमित पौधारोपण होगा।
- योजनाओं के साथ एकीकरण: ग्रामीण विकास की प्रमुख योजनाओं— जैसे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY), प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY), लखपति दीदी योजना तथा कृषि विभाग के अन्य कार्यक्रमों की शुरुआत अनिवार्य रूप से पौधारोपण के साथ की जाएगी।
कृषि सुरक्षा और सतत जीवन शैली
इस अभियान के तहत पर्यावरण को सीधे तौर पर किसानों की आजीविका और नागरिकों के दैनिक व्यवहार से जोड़ा गया है:
- संतुलित खेती और मृदा स्वास्थ्य: रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से मिट्टी की घटती उर्वरता और जल संकट को दूर करने के लिए पर्यावरण संरक्षण को कृषि से जोड़ा गया है। मिट्टी की वहन क्षमता (Bearing Capacity) को ध्यान में रखकर सीमित दोहन और संतुलित खेती पर जोर दिया गया है।
- मिशन LiFE का क्रियान्वयन: प्रधानमंत्री के ‘मिशन लाइफ’ (पर्यावरण के लिए जीवन शैली) के तहत दैनिक जीवन में छोटे बदलावों को आदत बनाने का आह्वान किया गया है; जैसे कमरे से बाहर निकलते समय बत्तियां बुझाना, पानी की बर्बादी रोकना, गीला-सूखा कचरा अलग करना और सिंगल-यूज़ प्लास्टिक का त्याग करना।
- ऊर्जा संरक्षण व ग्रीन सर्टिफिकेशन: डॉ. अनूप हजेला के सुझावों के आधार पर ऊर्जा दक्ष उपकरणों (LED लाइट्स, BLDC पंखे) के उपयोग और देश के विभिन्न संस्थानों में ‘ग्रीन सर्टिफिकेशन’ व्यवस्था लागू करने पर बल दिया गया ताकि पानी, ऊर्जा और कचरा प्रबंधन को संस्थागत मजबूती मिले।
आईआईटी द्वारा वैज्ञानिक केस स्टडी
पर्यावरणविद् श्री अनिल जोशी ने अवगत कराया कि आईआईटी के वैज्ञानिक रिमोट सेंसिंग और आधुनिक तकनीकी माध्यमों से केंद्रीय मंत्री द्वारा चलाए गए पूर्व के वृक्षारोपण अभियानों का एक वैज्ञानिक अध्ययन कर रहे हैं। यह अध्ययन भविष्य के नीति निर्माताओं (Policymakers) के लिए एक “केस स्टडी” बनेगा, जिससे यह समझा जा सकेगा कि निरंतर और जन-आधारित प्रयासों से धरातल पर पर्यावरण में क्या वास्तविक सुधार आते हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| विशिष्ट घटक / पहल | महत्वपूर्ण तथ्य |
| वृक्ष मित्र अभियान | पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने के लिए शुरू की गई राष्ट्रव्यापी सांगठनिक पहल। |
| लक्ष्य तिथि (12 अगस्त 2026) | हरियाली अमावस्या के दिन देशव्यापी स्तर पर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कर इसे ‘वृक्ष उत्सव’ के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य। |
| मिशन LiFE | Lifestyle for Environment — वैश्विक जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने की भारत की वैश्विक पहल। |
| रिमोट सेंसिंग स्टडी | आईआईटी वैज्ञानिकों द्वारा वनीकरण अभियानों के जमीनी प्रभावों का आकलन करने के लिए किया जा रहा तकनीकी अध्ययन। |