14 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत वित्तीय क्षेत्र के लिए जारी ‘डिजिटल थ्रेट रिपोर्ट 2025-26’, प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए आयोजित ‘एआई चैंपियन्स फॉर डिजिटल गवर्नेंस समिट’ तथा शिलॉन्ग में आयोजित ‘नेक्स्ट-जेन ई-गवर्नेंस प्रशासनिक सुधार सम्मेलन’ की प्रमुख नीतिगत चर्चाओं को शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त, शहरी जल सुरक्षा के लिए ‘कैच द रेन’ (AMRUT 2.0) अभियान, ड्रोन तकनीक में आत्मनिर्भरता बढ़ाने वाली ‘NIDAR 2.0’ (SwaYaan पहल) तथा भारत-जापान रक्षा नीति संवाद के 8वें संस्करण सहित सुरक्षा और संगठित अपराधों पर प्रहार करने वाले ‘ऑपरेशन वज्र’ (CBN) का संपूर्ण विश्लेषण किया गया है।
RBI की फॉरेक्स स्वैप योजनाएं: FCNR(B), ECB और OFCB के जरिए विदेशी मुद्रा प्रवाह को मजबूती
- प्रारंभिक परीक्षा: FCNR(B) जमा खाता, बाह्य वाणिज्यिक उधार (ECB), ओवरसीज फॉरेन करेंसी बॉरोइंग्स (OFCB), आरबीआई की विदेशी मुद्रा स्वैप (Forex Swap) योजना, गिफ्ट सिटी।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, वृद्धि, विकास और रोजगार से संबंधित विषय; बाह्य क्षेत्र (External Sector) और भुगतान संतुलन।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हाल ही में 13 जुलाई 2026 को केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने नई दिल्ली में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) और वित्तीय संस्थानों के प्रमुखों (MDs & CEOs) के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य जून 2026 में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा घोषित FCNR(B) जमा, ECB (बाह्य वाणिज्यिक उधार) और OFCB (विदेशी मुद्रा उधार) के लिए विशेष फॉरेक्स स्वैप पहलों की प्रगति की समीक्षा करना और विदेशी मुद्रा प्रवाह को और गति देना है।
फॉरेक्स स्वैप योजनाएं क्या हैं और इनका उद्देश्य?
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) को मजबूत करने और भुगतान संतुलन (BoP) को अनुकूल बनाए रखने के लिए यह योजनाएं एक महत्वपूर्ण रक्षा कवच हैं:
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: आरबीआई गवर्नर द्वारा 5 जून 2026 के मौद्रिक नीति वक्तव्य में इन विशेष स्वैप सुविधाओं की घोषणा की गई थी।
- प्रमुख घटक:
- FCNR(B) स्वैप: नए FCNR(B) डिपॉजिट के लिए ‘यूएस डॉलर-रुपया फॉरेक्स स्वैप सुविधा’। इसके तहत बैंकों के लिए जमा दरों पर लगी ब्याज सीमा (Interest Rate Ceiling) को हटा दिया गया है, जिससे वे NRI ग्राहकों को आकर्षक ब्याज दे पा रहे हैं।
- ECB और OFCB रियायती स्वैप: बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा विदेशी बाजारों से ली जाने वाली उधारी (ECB और OFCB) के लिए रियायती दरों पर स्वैप सुविधा प्रदान करना।
- समय सीमा:
- FCNR(B) जमा इस योजना के तहत 30 सितंबर 2026 तक पात्र हैं।
- ECB और OFCB योजना के तहत 31 दिसंबर 2026 तक पात्र हैं।
समीक्षा बैठक के मुख्य निष्कर्ष और रणनीतियाँ
- मजबूत विदेशी प्रवाह (Capital Inflow): प्रवासी भारतीयों (NRIs) ने इस योजना में गहरी रुचि दिखाई है। विशेष रूप से सिंगापुर, हांगकांग, पश्चिम एशिया (West Asia), यूके और अमेरिका के अनिवासी भारतीयों (NRIs) से बड़े पैमाने पर जमा प्राप्त हो रहे हैं।
- तीसरी तिमाही (Q3) में बढ़ोतरी की उम्मीद: सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2026) के दौरान विदेशी वाणिज्यिक उधारी (ECB) की गति और तीव्र होगी।
- गिफ्ट सिटी का उपयोग: बैंकों द्वारा विदेशी फंड जुटाने के लिए गुजरात के गिफ्ट सिटी में स्थित इंटरनेशनल बैंकिंग यूनिट्स (IBUs) का सक्रिय रूप से उपयोग किया जा रहा है। वित्त मंत्री ने बैंकों को गिफ्ट सिटी के वित्तीय बुनियादी ढांचे का अधिकतम लाभ उठाने का निर्देश दिया।
- आरबीआई का सहयोग: आरबीआई के डिप्टी गवर्नर ने आश्वस्त किया कि बैंकों को विदेशी फंड जुटाने के लिए हर संभव मदद दी जा रही है। इसकी दैनिक प्रगति की निगरानी के लिए एक पारदर्शी डेली रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क लागू किया गया है।
प्रारंभिक परीक्षा हेतु मुख्य तथ्य
| शब्दावली / घटक | मुख्य तथ्य |
| FCNR(B) खाता | Foreign Currency Non-Resident (Bank) जमा खाता। इसे अनिवासी भारतीय (NRIs) भारत में विदेशी मुद्रा (जैसे डॉलर, पाउंड) में ही खोलते हैं। इसमें जमाकर्ता को विनिमय दर का जोखिम (Exchange Rate Risk) नहीं होता। |
| ECB | External Commercial Borrowings (बाह्य वाणिज्यिक उधार)। भारतीय कॉरपोरेट्स और बैंक व्यावसायिक गतिविधियों के लिए विदेशी स्रोतों से जो वाणिज्यिक ऋण लेते हैं, उसे ECB कहा जाता है। |
| फॉरेक्स स्वैप | यह एक ऐसी वित्तीय प्रक्रिया है जिसमें आरबीआई बैंकों से डॉलर खरीदता है और उसके बदले रुपये देता है, साथ ही भविष्य की एक निश्चित तारीख पर इसे वापस करने का समझौता होता है। यह बाजार में तरलता (Liquidity) और विनिमय दर को स्थिर रखता है। |
BFSI क्षेत्र के लिए डिजिटल थ्रेट रिपोर्ट 2025-26: साइबर सुरक्षा और AI असंतुलन
- प्रारंभिक परीक्षा: डिजिटल थ्रेट रिपोर्ट 2025-26, CERT-In, CSIRT-Fin, SISA, 4-लेयर गैप आर्किटेप फ्रेमवर्क।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): आंतरिक सुरक्षा; साइबर सुरक्षा की चुनौतियाँ; बैंकिंग और भुगतान बुनियादी ढांचे की सुरक्षा; अर्थव्यवस्था पर साइबर हमलों का प्रभाव; कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के दोहरे उपयोग से जुड़े खतरे।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हाल ही में 13 जुलाई 2026 को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने CERT-In, CSIRT-Fin और साइबर सुरक्षा फर्म SISA के सहयोग से भारत के बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा (BFSI) तथा भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के लिए ‘डिजिटल थ्रेट रिपोर्ट 2025-26’ का दूसरा संस्करण जारी किया है। यह रिपोर्ट वित्तीय संस्थानों और नियामकों को डिजिटल भुगतान क्षेत्र में उभरते साइबर खतरों से निपटने का रोडमैप प्रदान करती है।
रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष
यह रिपोर्ट दर्शाती है कि तकनीकी नवाचार (Innovation) और उसके दुरुपयोग (Exploitation) के बीच का समय अब वर्षों से घटकर कुछ हफ्तों का रह गया है:
- परंपरागत खतरों का नया स्वरूप: सोशल इंजीनियरिंग, क्रेडेंशियल चोरी, सप्लाई-चेन से समझौता और क्लाउड का दुरुपयोग अब सामान्य हमले बन चुके हैं। आधुनिक साइबर हमले किसी बाहरी घुसपैठ जैसे नहीं दिखते, बल्कि वे वैध यूजर सत्र (Legitimate Sessions), स्वीकृत भुगतान या सामान्य यूजर व्यवहार के रूप में सामने आते हैं, जिससे नुकसान होने से पहले उनकी पहचान करना लगभग असंभव हो जाता है।
- एआई असंतुलन (AI Asymmetry): यह रिपोर्ट वित्तीय क्षेत्र के लिए ‘AI असंतुलन’ को सबसे बड़ा खतरा मानती है। जो साइबर हमले पहले बड़े संसाधनों और विशेषज्ञ टीमों द्वारा हफ्तों में किए जाते थे, वे अब कम संसाधन वाले हैकर्स द्वारा AI टूल्स की मदद से मशीन की गति (Machine Speed) से किए जा रहे हैं। आक्रामक एआई (Offensive AI) का विकास रक्षात्मक प्रणालियों की तुलना में बहुत तेज गति से हो रहा है।
- अनाटमी ऑफ साइबर फेल्योर: इस संस्करण में ‘4-लेयर गैप आर्किटेप फ्रेमवर्क’ पेश किया गया है। यह ढांचा किसी व्यक्तिगत घटना से परे जाकर उन क्रमिक कमजोरियों (Compounding Weaknesses) की श्रृंखला को डिकोड करता है जिसके कारण कोई सुरक्षित प्रणाली भी साइबर हमले के सामने विफल हो जाती है।
- 18 महीने का रोडमैप: रिपोर्ट में वित्तीय संस्थानों के लिए अगले 18 महीनों का एक रणनीतिक मार्गचित्र (Roadmap) दिया गया है, जो बुनियादी सुरक्षा नियंत्रणों को मजबूत करने से लेकर एक लचीली सुरक्षा वास्तुकला (Resilient Security Architecture) के निर्माण पर केंद्रित है।
साइबर सुरक्षा से जुड़े प्रमुख संस्थान
1. CERT-In (इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम)
- प्रकृति: सूचना प्रौद्योगिकी संशोधन अधिनियम, 2008 के तहत नामित कंप्यूटर सुरक्षा घटनाओं से निपटने वाली राष्ट्रीय नोडल एजेंसी।
- मुख्य कार्य: साइबर घटनाओं पर डेटा एकत्र और विश्लेषण करना, साइबर चेतावनियाँ/अलर्ट जारी करना, आपातकालीन उपाय करना और सूचना सुरक्षा प्रथाओं के लिए दिशानिर्देश व श्वेत पत्र (Whitepapers) जारी करना।
2. CSIRT-Fin (कंप्यूटर सिक्योरिटी इंसिडेंट रिस्पॉन्स टीम इन फाइनेंस)
- प्रकृति: भारतीय वित्तीय क्षेत्र (Financial Sector) के लिए समर्पित एक विशिष्ट क्षेत्रीय (Sectoral) नोडल एजेंसी।
- मुख्य कार्य: बैंकिंग, प्रतिभूति बाजार (Securities Market), बीमा और पेंशन फंड संस्थाओं में साइबर घटनाओं का प्रबंधन और समन्वय करना। यह वित्तीय क्षेत्र में गतिशील साइबर सुरक्षा ढांचे को बनाए रखने की निगरानी करती है।
3. SISA
- प्रकृति: यह भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र (Payment Ecosystem) के लिए साइबर सुरक्षा और एआई-संचालित फोरेंसिक जांच में काम करने वाली एक प्रमुख वैश्विक संस्था है, जो वास्तविक दुनिया के इंटेलिजेंस डेटा के आधार पर बुनियादी ढांचे को सुरक्षित करती है।
प्रारंभिक परीक्षा हेतु त्वरित तथ्य
| विशिष्ट शब्द / निकाय | मुख्य विशेषताएं |
| CSIRT-Fin | वित्तीय क्षेत्र के लिए विशिष्ट नोडल एजेंसी, जो बैंकिंग, शेयर बाजार, बीमा और पेंशन फंड के साइबर सुरक्षा प्रयासों का समन्वय करती है। |
| AI Asymmetry | वह स्थिति जहाँ साइबर अपराधियों के पास सुरक्षा नियामकों की तुलना में AI तकनीकों का उपयोग करके तेजी से और सस्ते में हमला करने की अधिक क्षमता होती है। |
| 4-Layer Gap Archetype | साइबर सुरक्षा में किसी प्रणालीगत विफलता के पीछे क्रमिक और आपस में जुड़ी कमजोरियों की पहचान करने वाला विश्लेषण ढांचा। |
‘एआई चैंपियन्स फॉर डिजिटल गवर्नेंस’ शिखर सम्मेलन: लोक प्रशासन में एआई और डेटा-आधारित निर्णय क्षमता
- प्रारंभिक परीक्षा: इंडियाएआई मिशन, क्षमता निर्माण आयोग (CBC), लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA), आईटीडीसी, स्कोप।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): ई-गवर्नेंस- अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएं, सीमाएं और क्षमताएं; सुशासन (Good Governance); विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- कंप्यूटर, सूचना प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के अनुप्रयोग; लोक सेवकों की क्षमता निर्माण (Capacity Building)।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हाल ही में 13 से 15 जुलाई 2026 तक नई दिल्ली के होटल सम्राट में तीन दिवसीय ‘एआई चैंपियन्स फॉर डिजिटल गवर्नेंस’ शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह सम्मेलन भारत पर्यटन विकास निगम (ITDC), स्टैंडिंग कॉन्फ्रेंस ऑफ पब्लिक एंटरप्राइजेस (SCOPE) और लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया, जो भारत सरकार के ‘इंडियाएआई मिशन’ के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
शिखर सम्मेलन के मुख्य और रणनीतिक बिंदु
यह तीन दिवसीय कार्यक्रम सार्वजनिक क्षेत्र के नेतृत्व और प्रशासनिक अधिकारियों में व्यावहारिक एआई क्षमताओं के विकास पर केंद्रित है:
- प्रशासनिक परिवर्तन: सम्मेलन का मुख्य जोर केवल एआई उपकरणों को सीखने पर नहीं, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं, डेटा-आधारित निर्णय लेने (Data-based Decision Making) और शासन (Governance) में जनरेटिव एआई के जिम्मेदार उपयोग पर है।
- व्यावहारिक कौशल प्रशिक्षण: इस कार्यशाला में अधिकारियों को प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, क्लॉड जैसे आधुनिक एआई मॉडल के माध्यम से दस्तावेज़ विश्लेषण (Document Analysis), डेटा निष्कर्षण (Data Extraction) और सरकारी ड्राफ्टिंग (Drafting) जैसे व्यावहारिक प्रशासनिक कार्यों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

- LBSNAA की नई पहल: यह पहला अवसर है जब लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) द्वारा देश की राजधानी नई दिल्ली में इस तरह के क्षमता निर्माण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।
- नेतृत्व और क्षमता निर्माण: क्षमता निर्माण आयोग (CBC) की अध्यक्ष श्रीमती एस. राधा चौहान के अनुसार, एआई अब एक वैकल्पिक कौशल नहीं बल्कि एक अनिवार्य प्रशासनिक क्षमता है। एआई की वास्तविक उपयोगिता अंततः डेटा की गुणवत्ता, मानवीय विवेक (Human Judgment) और संस्थानों द्वारा इसके जिम्मेदार उपयोग पर निर्भर करेगी।
आयोजक और सहयोगी संस्थान
इस राष्ट्रीय सम्मेलन को सफल बनाने में शामिल प्रमुख निकायों की प्रशासनिक भूमिका निम्नलिखित है:
1. लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA)
- यह भारत में सिविल सेवा के अधिकारियों (विशेषकर IAS) के प्रशिक्षण के लिए सर्वोच्च राष्ट्रीय संस्थान है, जो मसूरी (उत्तराखंड) में स्थित है। यह शासन में नेतृत्व और नीतिगत क्षमता निर्माण का नेतृत्व करता है।
2. क्षमता निर्माण आयोग (Capacity Building Commission – CBC)
- ‘मिशन कर्मयोगी’ (राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता निर्माण कार्यक्रम) के तहत गठित एक स्वतंत्र निकाय। इसका मुख्य कार्य सिविल सेवकों के लिए मानकीकृत प्रशिक्षण और रणनीतिक क्षमता निर्माण योजनाओं की रूपरेखा तैयार करना है।
3. SCOPE (स्टैंडिंग कॉन्फ्रेंस ऑफ पब्लिक एंटरप्राइजेस)
- यह भारत के केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) का प्रतिनिधित्व करने वाला एक शीर्ष पेशेवर निकाय है, जो सार्वजनिक उपक्रमों में प्रबंधन, नवाचार और तकनीकी प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देता है।
4. ITDC (भारत पर्यटन विकास निगम)
- पर्यटन मंत्रालय के तहत कार्यरत एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम, जो पर्यटन बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ इस सम्मेलन के डिजिटल और संस्थागत क्रियान्वयन में सहयोगी है।
प्रारंभिक परीक्षा हेतु मुख्य तथ्य
| विशिष्ट घटक / पहल | मुख्य तथ्य |
| इंडियाएआई मिशन | भारत सरकार की एक व्यापक राष्ट्रीय पहल जिसका उद्देश्य देश में एआई के नवाचार, कंप्यूटिंग बुनियादी ढांचे, स्टार्टअप्स और जिम्मेदार एआई उपयोग को बढ़ावा देना है। |
| मिशन कर्मयोगी / CBC | सिविल सेवा में ‘नियम-आधारित’ (Rule-based) व्यवस्था से ‘भूमिका-आधारित’ (Role-based) व्यवस्था में बदलाव लाने के लिए क्षमता निर्माण आयोग (CBC) नोडल एजेंसी है। |
| विकसित भारत @2047 | भारत को अपनी स्वतंत्रता के 100वें वर्ष (2047) तक एक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने का विजन, जिसमें डिजिटल गवर्नेंस और एआई सक्षम प्रशासन एक मुख्य आधार स्तंभ है। |
नेक्स्ट-जेन प्रशासनिक और ई-गवर्नेंस सुधार: शिलॉन्ग राष्ट्रीय सम्मेलन 2026
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन, शिलॉन्ग घोषणापत्र 2.0, CPGRAMS, NeSDA, जन धन-आधार-मोबाइल (JAM) ट्रिनिटी।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही; ई-गवर्नेंस- अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएं और सीमाएं; प्रशासनिक सुधार; नागरिक केंद्रित नागरिक चार्टर (Citizen Centric Governance)।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
13 जुलाई 2026 को केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शिलॉन्ग (मेघालय) में प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) तथा मेघालय सरकार द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित ‘नेक्स्ट जनरेशन प्रशासनिक और ई-गवर्नेंस सुधार’ पर दो-दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। पीएम मोदी के “रिफॉर्म एक्सप्रेस” के आह्वान के तहत, यह सम्मेलन विकसित भारत @2047 के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एआई और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) आधारित भविष्य के सुधारों का खाका तैयार करता है।
प्रमुख प्रशासनिक सुधार और डिजिटल पहल
1. अप्रचलित नियमों की समाप्ति (Repeal of Obsolete Rules)
- शासन को सरल बनाने के लिए लगभग 2,000 पुराने और प्रासंगिकता खो चुके नियमों व अनुपालनों को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। इसकी जगह आधुनिक कल्याणकारी राज्य के अनुकूल नागरिक-अनुकूल व्यवस्था अपनाई गई है।
2. CPGRAMS का कायाकल्प (Grievance Redressal)
- केंद्रीय लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (CPGRAMS) को दुनिया के सबसे बड़े तकनीक-संचालित शिकायत मंचों में बदला गया है।
- वार्षिक शिकायतें 2014 के 2 लाख से बढ़कर अब 25 लाख हो गई हैं, जो जनता के बढ़ते भरोसे को दिखाता है।
- इसमें अब बहुभाषी एआई चैटबॉट जोड़े गए हैं, जबकि अंतिम स्तर पर मानवीय संवाद को बनाए रखा गया है।
3. डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) की सफलता
- वित्तीय समावेशन: देश में 56 करोड़ से अधिक जन धन खाते खोले जा चुके हैं।
- डिजिटल भुगतान: यूपीआई (UPI) वर्तमान में हर महीने 18 बिलियन (1,800 करोड़) से अधिक लेनदेन को प्रोसेस कर वैश्विक नेता बन चुका है।
- डीबीटी (DBT): आधार-सक्षम सेवा वितरण और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर ने बिचौलियों को खत्म कर दिया है।
4. अन्य महत्वपूर्ण शासन नवाचार
- फेसियल रिकग्निशन तकनीक: इसके माध्यम से पेंशनभोगियों के लिए ‘डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र’ (Digital Life Certificates) की शुरुआत।
- ई-ऑफिस: सरकारी फाइलों का तेजी से डिजिटल मूवमेंट।
- अंतिम छोर तक पहुंच: ‘प्रशासन गांवों की ओर’ अभियान, राज्य सहयोगात्मक पहल और राष्ट्रीय ई-सेवा वितरण आकलन (NeSDA)।
विशेष राष्ट्रव्यापी अभियान’ की उपलब्धियां
वर्ष 2021 से शुरू किए गए लंबित मामलों के निपटान और स्वच्छता के विशेष अभियान ने बड़े परिणाम दिए हैं:
- स्क्रैप (कबाड़) और पुरानी सामग्रियों के वैज्ञानिक निपटान से सरकार को 4,000 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ।
- सरकारी कार्यालयों में लगभग 700 लाख वर्ग फुट जगह को फालतू कबाड़ से मुक्त कराकर उत्पादक उपयोग में लाया गया।
मेघालय और पूर्वोत्तर का प्रशासनिक मॉडल (North East Governance Model)
- शिलॉन्ग घोषणापत्र 2.0: इस सम्मेलन के निष्कर्षों को आगे बढ़ाने के लिए ‘शिलॉन्ग घोषणापत्र 2.0’ जारी किए जाने की उम्मीद है।
- कम्युनिटी-ले्ड डेवलपमेंट: प्रधानमंत्री द्वारा ‘मन की बात’ में सराहे गए मेघालय के ‘लिविंग रूट ब्रिज’ सामुदायिक शासन का बेहतरीन उदाहरण हैं।
- न्यू शिलॉन्ग प्रशासनिक शहर: यह आधुनिक बुनियादी ढांचे को डिजिटल गवर्नेंस और दीर्घकालिक प्रशासनिक योजना के साथ जोड़ने का नया मॉडल बन रहा है।
प्रारंभिक परीक्षा हेतु मुख्य बिंदु
| पहल / शब्दावली | मुख्य बिंदु |
| DARPG | प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग; यह केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के तहत नोडल विभाग है। |
| CPGRAMS | एक ऑनलाइन 24×7 प्लेटफॉर्म जहां नागरिक अपनी शिकायतें दर्ज कर सकते हैं। यह अब AI चैटबॉट से लैस है। |
| NeSDA | National e-Services Delivery Assessment; यह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ई-सेवा वितरण प्रभावशीलता का आकलन करता है। |
| शिलॉन्ग घोषणापत्र | पूर्वोत्तर राज्यों में ई-गवर्नेंस सेवाओं के बेहतर एकीकरण और प्रशासनिक सुधारों को गति देने से संबंधित संकल्प। |
जल-सुरक्षित शहरों की ओर: शहरी भारत में ‘कैच द रेन’ अभियान में तेजी
- प्रारंभिक परीक्षा: कैच द रेन अभियान, अमृत 2.0, उथला जलभृत प्रबंधन (Shallow Aquifer Management – SAM) कार्यक्रम।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 1 & 3): शहरीकरण और उनकी समस्याएँ व उपाय (Urbanization); जल संरक्षण और जल सुरक्षा; आपदा प्रबंधन (शहरी बाढ़ या अर्बन फ्लडिंग); पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
13 जुलाई 2026 को आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) ने अमृत 2.0 योजना के तहत देश के शहरी क्षेत्रों में ‘कैच द रेन – जहाँ गिरे, जब गिरे’ (Where it Falls, When it Falls) अभियान को तेज करने की घोषणा की है। इस राष्ट्रव्यापी पहल के तहत जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) और शहरी जल निकायों के कायाकल्प के माध्यम से शहरों को जल-सुरक्षित और जलवायु-लचीला (Climate Resilient) बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
अभियान के मुख्य बिंदु और प्रगति
शहरी भारत में जल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए विभिन्न राज्यों और शहरी स्थानीय निकायों को बड़े पैमाने पर लामबंद (Mobilize) किया गया है:
- व्यापक भागीदारी: इस अभियान में अब तक 27 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 900 शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) ने सक्रिय रूप से भाग लिया है।
- संस्थागत अभिसरण (Convergence): आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) तथा जल शक्ति मंत्रालय (MoJS) ने जल शक्ति अभियान-जन भागीदारी (JSJB) 2.0 के तहत हाथ मिलाया है। इसके अंतर्गत 79 नगर निगमों द्वारा 1,99,278 पुनर्भरण संरचनाएं तथा 738 ULBs में 73,036 संरचनाएं बनाई जा रही हैं।
- जल निकायों का पुनरुद्धार (WBR): अमृत 2.0 के वाटर बॉडी कायाकल्प घटक के तहत लगभग 1.21 लाख एकड़ जल निकायों का पुनरुद्धार किया जा रहा है। इसमें गाद निकालना (Desilting), इनलेट-आउटलेट में सुधार, तटरेखा संरक्षण और जैव विविधता बढ़ाना शामिल है ताकि शहरी बाढ़ (Urban Floods) को रोका जा सके।
- हरित क्षेत्रों का विकास: शहरी ताप द्वीप प्रभाव (Urban Heat Island Effect) को कम करने और भूजल सोखने की क्षमता बढ़ाने के लिए शहरों में 18,750 एकड़ से अधिक क्षेत्र में पार्क और ग्रीन स्पेस विकसित किए जा रहे हैं।
उथला जलभृत प्रबंधन (Shallow Aquifer Management – SAM) कार्यक्रम
अमृत 2.0 के तहत वैज्ञानिक तरीकों से भूजल स्तर सुधारने के लिए SAM कार्यक्रम के जरिए देश के अलग-अलग शहरों में विशिष्ट भौगोलिक हस्तक्षेप (Targeted Interventions) किए जा रहे हैं:
- बर्धवान (पश्चिम बंगाल) और विजयनगरम (आंध्र प्रदेश): यहाँ वर्षा जल को सीधे गहरे जलभृतों (Deeper Aquifers) तक पहुँचाने के लिए इंजेकशन बोरवेल से जुड़े रिचार्ज पिट्स का निर्माण किया गया है।
- ईटानगर (अरुणाचल प्रदेश): पहाड़ी क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए रूफटॉप (छत) वर्षा जल संचयन प्रणाली को भंडारण टैंकों के साथ जोड़ा गया है, जिससे घरेलू जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण दोनों हो रहे हैं।
- कोरबा (छत्तीसगढ़) और वारंगल (तेलंगाना): इन शहरों ने मानसून के आने से पहले ही अपनी पुनर्भरण संरचनाओं को क्रियाशील (Operational) कर दिया है ताकि मौसमी वर्षा के पानी का अधिकतम उपयोग किया जा सके।
प्रारंभिक परीक्षा हेतु मुख्य बिंदु
| योजना / शब्दावली | मुख्य बिंदु |
| AMRUT 2.0 | यह आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय की प्रमुख योजना है, जिसका लक्ष्य सभी वैधानिक शहरों (Statutory Towns) में पानी की विश्वसनीय आपूर्ति और जल निकायों का कायाकल्प सुनिश्चित करना है। |
| SAM कार्यक्रम | Shallow Aquifer Management; अमृत 2.0 के तहत शहरों में वैज्ञानिक एक्विफर मैपिंग (Aquifer Mapping) के जरिए उथले भूजल स्तर को रिचार्ज करने की तकनीक। |
| कैच द रेन | राष्ट्रीय जल मिशन (NWM) के तहत शुरू किया गया अभियान, जिसे अब अमृत 2.0 के माध्यम से शहरी भारत में जमीनी स्तर पर लागू किया जा रहा है। |
NIDAR 2.0: भारत के स्वदेशी चिप ‘VEGA’ से उड़ान भरेंगे देश के ड्रोन
- प्रारंभिक परीक्षा: NIDAR 2.0 चैलेंज, SwaYaan पहल, डिजिटल इंडिया RISC-V (DIR-V) कार्यक्रम, VEGA प्रोसेसर, C-DAC।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- स्वदेशी तकनीक का विकास और नई तकनीक का अनुप्रयोग; आईटी, कंप्यूटर और रोबोटिक्स क्षेत्र में विकास; रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
13 जुलाई 2026 को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया (DFI) के सहयोग से नई दिल्ली में SwaYaan पहल के अंतर्गत NIDAR 2.0 (National Innovation Challenge for Drone Application and Research 2026-27) के दूसरे संस्करण को लॉन्च किया। इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों को भारत में निर्मित VEGA माइक्रोप्रोसेसर का उपयोग करके अधिक स्मार्ट और स्वायत्त (Autonomous) ड्रोन प्रणालियां विकसित करने के लिए प्रेरित करना है।
NIDAR 2.0: मुख्य विशेषताएं और दोहरे ट्रैक
NIDAR 1.0 (2025-26) की भारी सफलता के बाद (जिसमें 3,448 छात्रों ने भाग लिया था), NIDAR 2.0 को दो विशेष तकनीकी ट्रैक्स पर केंद्रित किया गया है:
1: ड्रोन इनोवेशन
- स्वायत्त झुंड ड्रोन (Autonomous Swarm Drones): छात्रों को ऐसे ड्रोन समूह बनाने होंगे जो बिना किसी बाहरी संचार नेटवर्क (No Communication Network) के आपदा क्षेत्रों में जीवित बचे लोगों की खोज कर सकें और मेडिकल पार्सल पहुंचा सकें।
- GPS-मुक्त नेविगेशन (GPS-Denied Navigation): औद्योगिक निरीक्षण के लिए बंद और संकीर्ण इनडोर स्थानों में बिना जीपीएस के सुरक्षित रूप से नेविगेट करने वाले ड्रोनों का विकास।
2: कंपोनेंट इनोवेशन
- स्वदेशी फ्लाइट कंट्रोलर: इसके तहत भारत के अपने VEGA प्रोसेसर के इर्द-गिर्द स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक घटकों का उपयोग करके ऑटोपायलट और फ्लाइट कंट्रोलर सिस्टम डिजाइन करना है।
- तकनीकी सहायता: मूल्यांकन के बाद शीर्ष 100 टीमों को विकास और परीक्षण के लिए 2-2 ‘VEGA प्रोसेसर किट’ निःशुल्क प्रदान किए जाएंगे।
‘SwaYaan’ पहल और VEGA प्रोसेसर क्या हैं?
1. SwaYaan पहल
- शुरुआत और बजट: जुलाई 2022 में MeitY द्वारा पांच वर्षों के लिए ₹89.87 करोड़ के बजट के साथ स्वीकृत।
- उद्देश्य: मानवरहित विमान प्रणालियों (UAS) और ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में कुशल कार्यबल (Skilled Workforce) तैयार करना।
- मॉडल: यह हब-एंड-स्पोक मॉडल पर काम करता है, जिसमें देश के 30 प्रमुख संस्थान (IITs, IISc, NITs, C-DAC और NIELIT) शामिल हैं।
- प्रगति: अब तक 51,000 से अधिक लोगों को प्रशिक्षित किया जा चुका है और यह एम.टेक व अन्य शैक्षणिक स्तरों पर ड्रोन पाठ्यक्रमों का समर्थन करता है।
2. VEGA प्रोसेसर
- विकासकर्ता: इसे इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के माइक्रोप्रोसेसर विकास कार्यक्रम के तहत C-DAC (सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग) द्वारा डिजाइन किया गया है।
- आर्किटेक्चर: यह ओपन-सोर्स RISC-V (DIR-V) आर्किटेक्चर पर आधारित स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसरों का एक परिवार है।
- महत्व: यह विदेशी चिप डिजाइन और उनके लाइसेंसिंग शुल्क पर भारत की निर्भरता को समाप्त कर ड्रोन के ‘दिमाग’ को पूरी तरह भारतीय तकनीक से लैस करता है।
सुरक्षा और नागरिक क्षेत्र में दोहरे अनुप्रयोग (Dual-Use Technology)
- सैन्य अनुप्रयोग: GPS-बाधित क्षेत्रों में स्वायत्त उड़ान और बिना नेटवर्क के काम करने वाले झुंड ड्रोन (Swarm Drones) युद्ध क्षेत्र और सीमा निगरानी में गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं।
- नागरिक उपयोग: आपदा प्रबंधन, औद्योगिक सुरक्षा निरीक्षण, कृषि निगरानी और दूरदराज के क्षेत्रों में चिकित्सा आपूर्ति।
प्रारंभिक परीक्षा हेतु मुख्य बिंदु
| तथ्य / शब्दावली | मुख्य बिंदु |
| C-DAC | इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत वैज्ञानिक अनुसंधान और विकास संस्था, जो सुपरकंप्यूटर (जैसे परम) और प्रोसेसर बनाती है। |
| DIR-V | Digital India RISC-V कार्यक्रम; इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर उपयोग होने वाले ओपन-सोर्स आर्किटेक्चर के आधार पर भारत के अपने सेमीकंडक्टर और चिप्स विकसित करना है। |
| DFI | Drone Federation of India; ड्रोन उद्योग को बढ़ावा देने वाला एक गैर-लाभकारी उद्योग निकाय। |
ऑपरेशन वज्र: केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो ने पुणे में हाई-टेक सिंथेटिक ड्रग्स लैब का किया भंडाफोड़
- प्रारंभिक परीक्षा: केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN), एनडीपीएस (NDPS) अधिनियम 1985, ऑपरेशन वज्र, मेफेड्रोन (MD)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): आंतरिक सुरक्षा; संगठित अपराध (Organized Crime) और नशीली दवाओं की तस्करी का लिंक; सीमा पार और अंतर-राज्यीय सुरक्षा चुनौतियां; नशा मुक्त भारत अभियान।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हाल ही में 13 जुलाई 2026 को केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) की मध्य प्रदेश इकाई ने एक बड़े अंतर-राज्यीय अभियान ‘ऑपरेशन वज्र’ के तहत महाराष्ट्र के पुणे में चल रही एक बेहद आधुनिक और अवैध मेफेड्रोन (MD) निर्माण प्रयोगशाला का भंडाफोड़ किया है। इस देशव्यापी कार्रवाई के दौरान सीबीएन ने मध्य प्रदेश के उज्जैन और राजस्थान के जोधपुर से इस पूरे ड्रग सिंडिकेट के दो मुख्य साजिशकर्ताओं को गिरफ्तार कर उनके नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया है।
‘ऑपरेशन वज्र’ और सिंडिकेट का भंडाफोड़
यह बड़ी कार्रवाई फरवरी 2026 में मंदसौर में 8.17 किलोग्राम मेफेड्रोन की जब्ती और उसके बाद महू (इंदौर) में पकड़ी गई एक अवैध लैब की कड़ियों को जोड़ते हुए की गई है:
- बहु-शहरी नेटवर्क का खात्मा: इस सिंडिकेट का जाल कई राज्यों में फैला हुआ था, जिसमें मुख्य सरगना फर्जी पहचान दस्तावेजों का उपयोग करके लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था, जिसे अंततः उज्जैन पुलिस की मदद से आधी रात को गिरफ्तार किया गया।
- पुणे में अवैध मैन्युफैक्चरिंग हब: जांच के बाद पता चला कि इस सिंडिकेट ने पुणे के भोसरी (दिग्गी) में एक और अत्याधुनिक प्रयोगशाला स्थापित की थी, जिसकी फंडिंग और समन्वय जोधपुर में बैठे एक सह-साजिशकर्ता द्वारा किया जा रहा था।
- भारी मात्रा में उपकरणों की जब्ती: 9 जुलाई 2026 को पुणे और जोधपुर में एक साथ की गई छापेमारी में डिजिटल मशीनरी, भारी ग्लासवेयर, प्रीकर्सर केमिकल (दवा बनाने वाले रसायन) और सुरक्षात्मक गियर जब्त किए गए, जिन्हें एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के तहत कब्जे में लिया गया है।
- सीबीएन की वर्ष 2026 की प्रगति: इस कैलेंडर वर्ष में सीबीएन ने ‘नशा मुक्त भारत’ के राष्ट्रीय दृष्टिकोण को साकार करने के लिए अब तक 142 मामले दर्ज कर 193 गिरफ्तारियां की हैं और चार गुप्त अवैध प्रयोगशालाओं को नष्ट किया है।
केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) का संस्थागत ढांचा
- मंत्रालय और मुख्यालय: यह केंद्रीय वित्त मंत्रालय (राजस्व विभाग) के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत कार्य करने वाली एक प्रमुख नियामक और कानून प्रवर्तन एजेंसी है, जिसका मुख्यालय ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में स्थित है।
- दोहरी भूमिका (Dual Function): सीबीएन कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ एक विशेष प्रशासनिक संतुलन पर काम करता है:
- वैध नियमन: यह भारत में अफीम की खेती (Opium Poppy) के कानूनी लाइसेंस जारी करने, किसानों से फसल की सरकारी खरीद करने और मनोदैहिक पदार्थों (Psychotropic Substances) व रासायनिक घटकों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार की निगरानी करता है।
- प्रवर्तन (Enforcement): यह अवैध नशीली दवाओं की तस्करी को रोकने के लिए एनडीपीएस अधिनियम के तहत अपराधों की जांच करता है और तस्करों की अवैध संपत्तियों को जब्त करता है।
प्रारंभिक परीक्षा हेतु मुख्य बिंदु
| विशिष्ट घटक / कानून | मुख्य बिंदु |
| मेफेड्रोन (MD) | यह एक अत्यधिक नशीला और खतरनाक सिंथेटिक उत्तेजक (Synthetic Stimulant) पदार्थ है, जिसे बोलचाल की भाषा में ‘ड्रोन’ या ‘म्याऊ म्याऊ’ भी कहा जाता है। |
| NDPS अधिनियम, 1985 | Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act। यह कानून भारत में नशीले पदार्थों के निर्माण, परिवहन और उपभोग पर कड़ा प्रतिबंध लगाता है और इसके तहत सीबीएन को जब्ती व गिरफ्तारी के विशेष अधिकार प्राप्त हैं। |
| प्रीकर्सर केमिकल | वे वैध औद्योगिक रसायन जिनका उपयोग अवैध रूप से सिंथेटिक ड्रग्स (जैसे एमडी या हेरोइन) बनाने के लिए किया जाता है। सीबीएन इनके घरेलू व्यापार पर कड़ी नजर रखता है। |