18 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) द्वारा स्पाइसजेट पर ‘डार्क पैटर्न्स’ (भ्रामक डिजिटल डिज़ाइन) के उपयोग के लिए लगाया गया ₹1 लाख का जुर्माना डिजिटल गवर्नेंस और उपभोक्ता अधिकारों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार कार्यालय (OEA) ने कोर उद्योगों के सूचकांक (ICI) में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए आधार वर्ष को 2022-23 कर दिया है और ‘लौह अयस्क‘ को 9वें मूल उद्योग के रूप में शामिल किया है। कौशल विकास मंत्रालय द्वारा पूर्वोत्तर क्षेत्र (NER) के लिए ‘पीएम-नैप्स’ योजना के तहत अतिरिक्त ₹1,500 मासिक प्रोत्साहन के साथ विस्तार किया गया है।
नीति आयोग सूचकांक: इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स (IFI)
- प्रारंभिक परीक्षा: वैधानिक, नियामक और विभिन्न अर्ध-न्यायिक निकाय (नीति आयोग की भूमिका); सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद (Cooperative & Competitive Federalism)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय; निवेश मॉडल (Investment Models)।
चर्चा में क्यों?
नीति आयोग ने आधिकारिक तौर पर “इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स” IFI रिपोर्ट जारी की है। यह सूचकांक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) के स्तर पर व्यापार और निवेश के माहौल को बेहतर बनाने, सुधारों को गति देने तथा ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक डेटा-संचालित (Data-Driven) ढांचा प्रदान करता है।
सूचकांक का ढांचा, कार्यप्रणाली और महत्व
1. पृष्ठभूमि और विकास
- पीएम का निर्देश: जुलाई 2024 में नीति आयोग की 9वीं शासी परिषद (Governing Council) की बैठक में प्रधानमंत्री ने निवेश आकर्षित करने के लिए एक ‘इन्वेस्टमेंट-फ्रेंडली चार्टर’ तैयार करने का कार्य सौंपा था।
- बजट घोषणा: इसके बाद केंद्रीय बजट 2025-26 में इस सूचकांक को विकसित करने की औपचारिक घोषणा की गई ताकि राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दिया जा सके।
2. सूचकांक के 8 प्रमुख स्तंभ
यह इंडेक्स कुल 84 संकेतकों पर आधारित है, जिसमें प्राथमिक निवेशक सर्वेक्षण और द्वितीयक डेटा दोनों को शामिल किया गया है। मूल्यांकन इन 8 स्तंभों के तहत होता है:
- बुनियादी ढांचा (Infrastructure)
- व्यावसायिक माहौल (Business Climate)
- संसाधन (Resources)
- सरकारी नीति (Government Policy)
- नियामक सुगमता (Regulatory Ease)
- संस्थागत वातावरण (Institutional Environment)
- वित्तीय स्थिति (Financial Health)
- पर्यावरणीय लचीलापन (Environmental Resilience)
3. राज्यों का वर्गीकरण और रैंकिंग प्रदर्शन
विविधता को ध्यान में रखते हुए राज्यों को तीन सहकर्मी समूहों (Peer Groups) में बांटा गया है:
- शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्य (Top Performers – स्कोर 50 से अधिक): गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गोवा और ओडिशा।
| समूह | प्रथम स्थान (Rank 1) | द्वितीय स्थान (Rank 2) | तृतीय स्थान (Rank 3) |
| बड़े राज्य (Large States) | गुजरात | महाराष्ट्र | तमिलनाडु |
| पहाड़ी और उत्तर-पूर्वी राज्य | उत्तराखंड | असम | हिमाचल प्रदेश |
| केंद्र शासित प्रदेश और सिटी स्टेट | गोवा | दिल्ली | चंडीगढ़ |
4. इस सूचकांक का वास्तविक महत्व और लाभ
- प्रतिस्पर्धी संघवाद: यह राज्यों को एक-दूसरे से सीखने और अपने व्यापारिक माहौल को सुधारने के लिए प्रेरित करता है।
- जमीनी हकीकत का आकलन: राज्य प्रोफाइलों में न केवल डेटा है, बल्कि निवेशकों की वास्तविक प्रतिक्रिया (Feedback) भी शामिल है, जिससे नीति निर्माताओं को सटीक सुधार करने में मदद मिलेगी।
- निजी निवेश को बढ़ावा: भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए निजी निवेश अनिवार्य है; यह इंडेक्स राज्यों को निवेश के अनुकूल पारदर्शी नीतियां बनाने का व्यावहारिक टूल देता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| घटक / बिंदु | प्रारंभिक परीक्षा हेतु त्वरित तथ्य |
| जारीकर्ता संस्था | नीति आयोग द्वारा तैयार और जारी। |
| घोषणा वर्ष | केंद्रीय बजट 2025-26 में इस इंडेक्स को विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया था। |
| कुल संकेतक | कुल 84 संकेतक और 8 स्तंभों के आधार पर राज्यों का मूल्यांकन किया जाता है। |
| समग्र शीर्ष राज्य | समग्र रैंकिंग में गुजरात पहले, महाराष्ट्र दूसरे और तमिलनाडु तीसरे स्थान पर है। |
| पहाड़ी राज्यों में शीर्ष | उत्तराखंड पहाड़ी और उत्तर-पूर्वी राज्यों की श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला राज्य है। |
ईपीएफओ ‘विश्वास, 2026’ योजना: विवाद समाधान की नई पहल
- प्रारंभिक परीक्षा: सरकारी नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप; शासन व्यवस्था (Governance) और अर्ध-न्यायिक निकाय।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था तथा नियोजन, संसाधनों को जुटाना, विकास और रोजगार; श्रम सुधार (Labour Reforms) और सामाजिक सुरक्षा (Social Security)।
चर्चा में क्यों?
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के तहत कार्यरत कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने नियोक्ताओं (Employers) के लिए एक बड़ी राहत देते हुए “विश्वास, 2026” नामक एकमुश्त विवाद समाधान योजना (One-time Dispute Resolution Initiative) की शुरुआत की है। इस योजना का उद्देश्य नियोक्ताओं पर लगाए गए हर्जाने/जुर्माने से जुड़े पुराने विवादों का सौहार्दपूर्ण और त्वरित निपटारा करना है।
मुख्य बिंदु: योजना का ढांचा, रियायतें और संचालन प्रक्रिया
1. विधिक पृष्ठभूमि और कार्यान्वयन अवधि
- संवैधानिक/विधिक प्रावधान: यह योजना कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 की धारा 14B और सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 की धारा 128 के तहत लगाए गए जुर्माने/हर्जाने के विवादों पर लागू होती है।
- अधिसूचना और अवधि: इसे राजपत्र अधिसूचना G.S.R. 525(E) के माध्यम से 29 जून 2026 को अधिसूचित किया गया था और यह अधिसूचना की तारीख से छह महीने की अवधि के लिए चालू रहेगी।
2. शामिल होने वाले मामलों की 4 श्रेणियां
- ऐसे मामले जहां जुर्माने/हर्जाने के आदेशों को किसी न्यायिक मंच (न्यायालय/ट्रिब्यूनल) में चुनौती दी गई है।
- वे अंतिम आदेश जहां जुर्माने की वसूली अभी लंबित है या आंशिक रूप से हुई है (RRC मामले शामिल)।
- ऐसे मामले जहां नियोक्ताओं को कारण बताओ नोटिस जारी हो चुके हैं, लेकिन अंतिम आदेश आना बाकी है।
- वे मामले जहां नियमों के उल्लंघन के लिए जुर्माना लगाने वाले नोटिस अभी जारी किए जाने हैं।
3. वित्तीय रियायतें
14 जून 2024 से पहले की चूक या डिफ़ॉल्ट अवधि के लिए हर्जाने की गणना अब बेहद कम और रियायती दरों पर की जाएगी:
| डिफ़ॉल्ट की अवधि | संशोधित रियायती दर |
| 2 महीने तक की देरी पर | 0.25% प्रति माह |
| 2 से 4 महीने तक की देरी पर | 0.50% प्रति माह |
| 4 महीने से अधिक की देरी पर | 1.00% प्रति माह |
4. लाभ उठाने की अनिवार्य शर्तें और अपवर्जन
- ब्याज का पूर्ण भुगतान: नियोक्ता को योजना का लाभ लेने से पहले अधिनियम की धारा 7Q (या सामाजिक सुरक्षा संहिता की धारा 127) के तहत देय पूरा वैधानिक ब्याज जमा करना होगा।
- अपील वापस लेने का वचन: आवेदक को यह लिखित वचन देना होगा कि इस योजना के तहत मामला सुलझने के बाद वह किसी भी उच्च न्यायिक फोरम में अपील नहीं करेगा।
- किसे लाभ नहीं मिलेगा (Exclusions): जहां जुर्माना पहले ही पूरा वसूला जा चुका है; जहां धोखाधड़ी, हेराफेरी या रिकॉर्ड की जानबूझकर की गई जालसाजी का मामला शामिल है।
5. पूर्णतः डिजिटल और पारदर्शी प्रक्रिया
- ऑनलाइन आवेदन: नियोक्ताओं को ईपीएफओ नियोक्ता पोर्टल पर डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र (DSC) या ई-साइन का उपयोग करके ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
- प्रशासनिक तंत्र: सुचारू संचालन के लिए ईपीएफओ के क्षेत्रीय और जिला कार्यालयों में समर्पित ‘विश्वास सेल’ स्थापित किए जा रहे हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| घटक / बिंदु | त्वरित तथ्य |
| नोडल संगठन व मंत्रालय | कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO), श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार। |
| योजना की प्रकृति | एकमुश्त विवाद समाधान योजना, जो कुल 6 महीने के लिए खुली है। |
| कट-ऑफ तिथि | 14 जून 2024 से पहले की डिफ़ॉल्ट अवधियों के लिए ही रियायती दरों पर हर्जाने की गणना का लाभ मिलेगा। |
| धारा 14B और धारा 7Q | धारा 14B ईपीएफओ को डिफ़ॉल्ट पर हर्जाना (Damages) लगाने का अधिकार देती है, जबकि धारा 7Q विलंबित भुगतान पर ब्याज (Interest) से संबंधित है। |
| मुख्य उद्देश्य | मुकदमों (Litigation) को कम करना, व्यापार सुगमता बढ़ाना और सामाजिक सुरक्षा प्रशासन को सुदृढ़ करना। |
सूर्य के वायुमंडल में ‘मैग्नेटिक ट्री’ और प्लाज्मा प्रवाह की खोज
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं दैनिक जीवन में इसका अनुप्रयोग; अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी (Space Technology), विज्ञान के क्षेत्र में भारतीयों की उपलब्धियां।
चर्चा में क्यों?
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के स्वायत्त संस्थान आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (ARIES) के नेतृत्व में भारतीय और वैश्विक वैज्ञानिकों ने सूर्य की दृश्य सतह और उसकी ऊपरी परतों के बीच एक छिपे हुए जुड़ाव की खोज की है। इस शोध ने पहली बार सूर्य के ऊपरी वायुमंडल में मध्याह्न प्रवाह (Meridional Flow) की मौजूदगी के पुख्ता सबूत दिए हैं, जो पृथ्वी पर उपग्रहों, वैश्विक संचार प्रणालियों, जीपीएस नेविगेशन नेटवर्क और पावर ग्रिड को प्रभावित करने वाले अंतरिक्ष मौसम (Space Weather) की सटीक समझ विकसित करने में मदद करेगा।
शोध के प्रमुख निष्कर्ष और वैज्ञानिक महत्व
1. मध्याह्न प्रवाह क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
- सौर कन्वेयर बेल्ट: यह सूर्य के भीतर गर्म गैस या प्लाज्मा का एक धीमा लेकिन निरंतर होने वाला प्रवाह है जो सूर्य की भूमध्य रेखा (Equator) से ध्रुवों (Poles) की ओर बढ़ता है।
- 11-वर्षीय सौर चक्र का नियमन: यह प्रवाह एक विशाल कन्वेयर बेल्ट की तरह काम करते हुए सूर्य के चुंबकीय क्षेत्रों को उसकी सतह पर स्थानांतरित करता है, जिससे सौर कलंक (Sunspots) की उत्पत्ति और 11 साल का सौर चक्र नियंत्रित होता है।
- अनुसंधान में नया मोड़: अब तक वैज्ञानिकों का मानना था कि यह प्रवाह केवल सूर्य की निचली वायुमंडलीय परतों तक सीमित है, लेकिन इस नए अध्ययन ने प्रमाणित किया है कि प्लाज्मा का यह प्रवाह अनुमान से कहीं अधिक ऊपर तक जारी रहता है।
2. अनुसंधान की अनोखी कार्यप्रणाली और डेटा
- 27 वर्षों का दीर्घकालिक डेटा: वैज्ञानिकों की टीम ने जापान के नोबेयामा रेडियोहेलियोग्राफ द्वारा पिछले तीन दशकों में एकत्र किए गए रेडियो अवलोकनों का गहन विश्लेषण किया।

- इमेज-कोरिलेशन तकनीक: पारंपरिक रूप से व्यक्तिगत सनस्पॉट को ट्रैक करने के बजाय वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक विकसित की, जिसके तहत एक दिन के अंतराल पर ली गई सूर्य की हजारों पूर्ण-डिस्क रेडियो छवियों की तुलना करके उनकी चमक के पैटर्न में आए सूक्ष्म बदलावों को मापा गया।
3. ‘मैग्नेटिक ट्री’ (चुंबकीय वृक्ष) परिकल्पना की वास्तविक पुष्टि
- गहरी परतों से जुड़ाव: रेडियो छवियों में दिखने वाली अत्यधिक चमकीली आकृतियां सूर्य के चुंबकीय क्षेत्रों के परिवहन के साथ बिल्कुल तालमेल मिलाकर ध्रुवों की ओर बढ़ती पाई गईं।
- परिकल्पना का प्रमाण: यह खोज लंबे समय से चली आ रही ‘मैग्नेटिक ट्री’ परिकल्पना को मजबूत दृश्य और अवलोकन संबंधी प्रमाण प्रदान करती है। इस सिद्धांत के अनुसार, सूर्य की सतह से काफी ऊपर तक फैली चुंबकीय संरचनाएं सूर्य की आंतरिक परतों से ठीक उसी तरह जुड़ी होती हैं जैसे किसी पेड़ की शाखाएं अपनी जड़ों और तने से जुड़ी रहती हैं।
- प्रवाह की गति: शोध के अनुसार, ऊपरी क्रोमोस्फीयर में प्लाज्मा 5 से 15 मीटर प्रति सेकंड की गति से ध्रुवों की ओर स्थानांतरित होता है, जो सूर्य की निचली परतों में दर्ज गति के समान है।
4. इस खोज का व्यावहारिक और रणनीतिक महत्व
- अंतरिक्ष मौसम का सटीक पूर्वानुमान: यह सौर तूफानों और अंतरिक्ष मौसम की घटनाओं की सटीक भविष्यवाणी करने में मदद करेगा, जिससे पृथ्वी के चक्कर काट रहे उपग्रह और संचार अवसंरचनाएं सुरक्षित रह सकेंगी।
- सोलर डायनेमो मॉडल को समझना: यह अध्ययन ‘सोलर डायनेमो’ (वह आंतरिक भौतिक प्रक्रिया जो सूर्य का चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है और सौर चक्र को ऊर्जा देती है) को गहराई से समझने के लिए रेडियो खगोल विज्ञान के क्षेत्र में एक नया व्यावहारिक उपकरण प्रदान करता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| प्रमुख सहयोगी शोध संस्थान | ARIES (नैनीताल) के नेतृत्व में फिजिकल रिसर्च लैबोरेटरी (PRL), IIT दिल्ली, IIST और नासा का गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर। |
| ऊपरी क्रोमोस्फीयर | यह सूर्य की दृश्य सतह (प्रकाशमंडल/Photosphere) से लगभग 3,000 किलोमीटर ऊपर स्थित वायुमंडलीय क्षेत्र है, जहाँ यह प्रवाह खोजा गया है। |
| प्लाज्मा प्रवाह की गति | ऊपरी क्रोमोस्फीयर में प्लाज्मा प्रवाह की गति 5 से 15 मीटर प्रति सेकंड दर्ज की गई है। |
| मुख्य डेटा स्रोत | जापान का नोबेयामा रेडियोहेलियोग्राफ। |
| शोध का प्रकाशन | यह ऐतिहासिक खगोलीय शोध प्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका ‘The Astrophysical Journal’ में प्रकाशित हुआ है। |
समाधान पोर्टल 2.0 और डिजिटल श्रम प्रशासन
- प्रारंभिक परीक्षा: महत्वपूर्ण ई-गवर्नेंस अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएं, सीमाएं और क्षमताएं; सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था तथा नियोजन, संसाधनों को जुटाना, विकास और रोजगार; औद्योगिक संबंध (Industrial Relations) और श्रम सुधार।
चर्चा में क्यों?
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) के दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय ने ट्रेड यूनियन प्रतिनिधियों के लिए ‘समाधान पोर्टल 2.0’ पर एक व्यापक जागरूकता सत्र का सफल आयोजन किया है। नई दिल्ली के ‘श्रमेव जयते भवन’ में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से श्रमिक संघों को सशक्त बनाना तथा औद्योगिक विवादों के त्वरित निवारण तंत्र को मजबूत करना है।
समाधान पोर्टल 2.0, विशेषताएं और महत्व
1. समाधान पोर्टल क्या है?
- तकनीकी नाम: समाधान का अर्थ है Software for Application in Monitoring and Disposal of Handling Industrial Disputes and Mutual Consultation (औद्योगिक विवादों के निपटारे और निगरानी के लिए सॉफ्टवेयर)।
- संचालन इकाई: यह श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) यानी CLC(C) के कार्यालय द्वारा संचालित एक समर्पित डिजिटल प्लेटफॉर्म है।
2. पोर्टल की प्रमुख विशेषताएं
- ऑनलाइन शिकायत दर्ज करना: श्रमिक या ट्रेड यूनियन अब बिना किसी कार्यालय के चक्कर काटे किसी भी औद्योगिक विवाद (Industrial Dispute) को सीधे ऑनलाइन माध्यम से दर्ज करा सकते हैं।
- दावा प्रस्तुतीकरण: नए और आधुनिक श्रम संहिताओं (Labour Codes) के तहत विभिन्न प्रकार के वैधानिक दावों और मुआवजों को इस पोर्टल के जरिए सीधे जमा किया जा सकता है।
- रीयल-टाइम ट्रैकिंग: आवेदक अपनी दर्ज शिकायतों और विवाद समाधान की वर्तमान स्थिति (Status Track) को वास्तविक समय में ऑनलाइन देख सकते हैं, जिससे प्रशासनिक जवाबदेही तय होती है।
3. डिजिटल श्रम प्रशासन का रणनीतिक महत्व
- पारदर्शिता और सुगमता: यह मंच श्रम प्रशासन में मानवीय हस्तक्षेप को कम करके पारदर्शिता बढ़ाता है और जटिल कागजी प्रक्रियाओं को खत्म कर नागरिक-केंद्रित शासन को बढ़ावा देता है।
- श्रमिकों के अधिकारों का संरक्षण: देश के प्रमुख केंद्रीय श्रमिक संगठनों (जैसे BMS, INTUC, AITUC, HMS, CITU और AICCTU) ने इस मंच की सराहना की है क्योंकि यह विवादों के सौहार्दपूर्ण और समयबद्ध निपटारे को सुनिश्चित करता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| संबंधित मंत्रालय | श्रम एवं रोजगार मंत्रालय (Ministry of Labour & Employment), भारत सरकार। |
| कार्यान्वयन एजेंसी | मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) – Chief Labour Commissioner (Central) का कार्यालय। |
| मूल उद्देश्य | औद्योगिक विवादों और श्रमिक शिकायतों का ऑनलाइन, पारदर्शी और समयबद्ध निवारण करना। |
| शामिल हितधारक | व्यक्तिगत श्रमिक, नियोक्ता (Employers) और विभिन्न पंजीकृत ट्रेड यूनियन। |
| आयोजन स्थल | जागरूकता सत्र का आयोजन श्रमेव जयते भवन, नई दिल्ली में किया गया। |
पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए ‘पीएम-नैप्स’ के तहत विशेष हस्तक्षेप का विस्तार
- प्रारंभिक परीक्षा: सरकारी नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप; मानव संसाधन और विकास से जुड़े सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के प्रबंधन से संबंधित विषय।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था तथा नियोजन, संसाधनों को जुटाना, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय; समावेशी विकास (Inclusive Growth)।
चर्चा में क्यों?
कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) ने पूर्वोत्तर क्षेत्र (NER) के युवाओं के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय शिक्षुता प्रोत्साहन योजना (PM-NAPS) के तहत ‘विशेष हस्तक्षेप योजना’ के विस्तार की घोषणा की है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए शुरू की गई इस विस्तारित योजना का कार्यान्वयन भारतीय उद्यमिता संस्थान (IIE), गुवाहाटी द्वारा किया जाएगा, जिसका उद्देश्य पूर्वोत्तर के सभी 8 राज्यों में कौशल विकास और रोजगार के अवसरों को बढ़ाना है।
योजना का बदला हुआ स्वरूप, लक्ष्य और वित्तीय बजटीय आवंटन
1. पृष्ठभूमि और विस्तारित लक्ष्य
- पायलट चरण की सफलता: मई 2025 में शुरू किए गए इस पहल के पायलट चरण की सफलता के बाद अब इसका विस्तार किया गया है।
- लक्ष्य में 15% की वृद्धि: वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कुल 30,000 शिक्षुओं (Apprentices) को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है, जो पिछले पायलट चरण से 15% अधिक है।
- रणनीतिक विभाजन: इस लक्ष्य को दो बराबर भागों में बांटा गया है:
- 15,000 शिक्षु: इन्हें पूर्वोत्तर क्षेत्र से बाहर (देश के अन्य राज्यों में) सरकारी विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) में अवसर दिए जाएंगे।
- 15,000 शिक्षु: इन्हें पूर्वोत्तर क्षेत्र के भीतर ही (उनके मूल गृह राज्यों सहित) स्थानीय स्तर पर नियोजित किया जाएगा।
2. बजटीय आवंटन और अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन
- वित्तीय परिव्यय: इस विशेष पहल के लिए सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹57.58 करोड़ का बजट आवंटित किया है, जो PM-NAPS के पूर्वोत्तर क्षेत्र घटक से पूरा किया जाएगा।
- संशोधित वजीफा (Stipend) नीति: योजना के तहत नियमित PM-NAPS सहायता के अतिरिक्त ₹1,500 प्रति माह का अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाएगा।
- नीति में बड़ा बदलाव: पायलट चरण में यह अतिरिक्त ₹1,500 केवल अपने राज्य से बाहर जाने वाले युवाओं को मिलता था, लेकिन अब संशोधित नीति के तहत पूर्वोत्तर में अपने ही गृह राज्य में काम करने वाले शिक्षुओं को भी यह अतिरिक्त लाभ दिया जाएगा।
3. पायलट चरण (2025-26) के उत्साहजनक परिणाम
- 90% से अधिक लक्ष्य हासिल: 26,000 के शुरुआती लक्ष्य के मुकाबले 23,470 शिक्षुओं को सफलतापूर्वक जोड़ा गया।
- रिफॉर्म और वृद्धि: पूर्वोत्तर में शिक्षुता जुड़ाव में 51% की भारी वृद्धि दर्ज की गई (वर्ष 2024-25 के 15,562 से बढ़कर 2025-26 में 23,470)।
- राज्यों में प्रदर्शन: राज्यों में मेघालय ने 95% की वृद्धि के साथ सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया। इसके अलावा महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय सुधार हुआ और सरकारी प्रतिष्ठानों में नियुक्ति दोगुनी हो गई।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| संबंधित मंत्रालय | कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE), भारत सरकार। |
| कार्यान्वयन एजेंसी | भारतीय उद्यमिता संस्थान (IIE), गुवाहाटी (पूर्वोत्तर में जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन हेतु)। |
| PM-NAPS का परिचय | राष्ट्रीय शिक्षुता प्रोत्साहन योजना (2016 में लॉन्च) — इसका उद्देश्य नियोक्ताओं को वित्तीय सहायता देकर देश में शिक्षुता (Apprenticeship) को बढ़ावा देना है। |
| अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि | पूर्वोत्तर के युवाओं के लिए सामान्य वजीफे के ऊपर ₹1,500 प्रति माह की अतिरिक्त वित्तीय सहायता। |
| कवरेज क्षेत्र | पूर्वोत्तर क्षेत्र (NER) के सभी आठ राज्य (अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा)। |
स्पाइसजेट पर डार्क पैटर्न्स के लिए CCPA का जुर्माना
- प्रारंभिक परीक्षा: सरकारी नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप; शासन व्यवस्था (Governance) – नागरिक चार्टर, उपभोक्ता अधिकारों का संरक्षण और वैधानिक निकाय (CCPA)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था – उपभोक्ता संरक्षण, ई-कॉमर्स विनियम; सूचना प्रौद्योगिकी और डिजिटल गवर्नेंस के मुद्दे।
चर्चा में क्यों?
मुख्य आयुक्त श्रीमती निधि खरे की अध्यक्षता वाले केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने विमानन कंपनी स्पाइसजेट लिमिटेड पर ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) का जुर्माना लगाया है। यह दंडात्मक कार्रवाई स्पाइसजेट द्वारा अपने ऑनलाइन फ्लाइट बुकिंग प्लेटफॉर्म पर उपभोक्ताओं को धोखा देने वाली डिजाइन प्रथाओं, जिन्हें ‘डार्क पैटर्न्स’ कहा जाता है, का उपयोग करने के कारण की गई है।
डार्क पैटर्न्स का उल्लंघन और नियामक फ्रेमवर्क
1. स्पाइसजेट द्वारा किए गए प्रमुख उल्लंघन (CCPA की टिप्पणियां)
CCPA की जांच में स्पाइसजेट के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाली तीन मुख्य डिजिटल हेरफेर पकड़ी गईं:
- फॉर्स्ड एक्शन: फ्लाइट बुक करते समय ग्राहकों को उनकी स्पष्ट सहमति के बिना, एक पहले से टिक किए गए चेसबॉक्स (Pre-ticked Checkbox) के माध्यम से ‘स्पाइसक्लब लॉयल्टी प्रोग्राम’ में स्वचालित रूप से नामांकित कर दिया गया।
- इंटरफ़ेस इंटरफेरेंस: कंपनी ने अपनी व्यावसायिक पसंद के विकल्प को ‘डिफ़ॉल्ट विकल्प’ (Default Choice) के रूप में सेट करके ग्राहकों के स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित किया।

- ट्रिक क्वेश्चन: सहमति के लिए भ्रमित करने वाली और नकारात्मक भाषा का प्रयोग किया गया ताकि उपभोक्ता अनजाने में कंपनी की शर्तों को स्वीकार कर लें।
- नियामक आदेश की अनदेखी: CCPA द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद भी कंपनी ने तकनीकी रूप बदलकर व्हाट्सएप, एसएमएस और ईमेल पर प्रमोशनल संदेश भेजने के लिए प्री-टिक्ड बॉक्स की प्रथा जारी रखी, जिसे कंपनी ने बाद में ‘तकनीकी त्रुटि’ बताया।
2. उल्लंघन के दायरे में आने वाले विधिक प्रावधान
CCPA ने स्पष्ट किया कि स्पाइसजेट की ये भ्रामक प्रथाएं भारत के निम्नलिखित उपभोक्ता संरक्षण कानूनों का सीधा उल्लंघन करती हैं:
- उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019: इसके तहत अनुचित व्यापार प्रथाओं (Unfair Trade Practices) और भ्रामक प्रस्तुतीकरण का दोषी पाया गया।
- उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 का नियम 4(9): यह नियम अनिवार्य करता है कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर उपभोक्ताओं की सहमति केवल स्पष्ट और सकारात्मक कार्रवाई (Explicit & Affirmative Action) के माध्यम से ही ली जानी चाहिए, न कि पहले से टिक किए गए बॉक्स से।
- डार्क पैटर्न्स की रोकथाम और विनियमन के लिए दिशानिर्देश, 2023: डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर उपभोक्ताओं की स्वायत्तता को नुकसान पहुंचाने वाले डिजाइन को प्रतिबंधित करने वाले नियमों का उल्लंघन।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| CCPA (केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण) | उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत स्थापित एक वैधानिक निकाय (Statutory Body), जो उपभोक्ता अधिकारों को बढ़ावा देने और लागू करने का कार्य करता है। |
| डार्क पैटर्न्स | इंटरनेट या डिजिटल इंटरफ़ेस पर उपयोग किए जाने वाले ऐसे भ्रामक या हेरफेर वाले डिज़ाइन, जो उपभोक्ताओं को ऐसी चीज़ें करने के लिए मजबूर या गुमराह करते हैं जो वे आम तौर पर नहीं करते (जैसे अनचाही सेवा खरीदना)। |
| ई-कॉमर्स नियम 2020 (नियम 4-9) | इसके अनुसार किसी भी अतिरिक्त सेवा या उत्पाद के लिए प्री-टिक्ड चेकबॉक्स का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है; उपभोक्ता की सहमति स्वैच्छिक होनी चाहिए। |
| नियामक नेतृत्व (2026) | वर्तमान में CCPA का नेतृत्व मुख्य आयुक्त श्रीमती निधि खरे और आयुक्त श्री अनुपम मिश्रा द्वारा किया जा रहा है। |
मूल उद्योगों के सूचकांक (ICI) में बड़ा बदलाव: नया आधार वर्ष और 9वां उद्योग शामिल
- प्रारंभिक परीक्षा: सरकारी नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप; महत्वपूर्ण आर्थिक संकेतक और उनकी विनियामक संरचना।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था तथा नियोजन, प्रगति, विकास और रोजगार; औद्योगिक नीति और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP)।
चर्चा में क्यों?
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार कार्यालय (OEA) ने घोषणा की है कि वह 20 जुलाई 2026 को मूल उद्योगों के सूचकांक (Index of Core Industries – ICI) की एक संशोधित श्रृंखला जारी करने जा रहा है। इस नई श्रृंखला में आधार वर्ष (Base Year) को बदलकर 2022-23 कर दिया गया है (जो वर्तमान में 2011-12 था)। इसके अतिरिक्त, भारत के औद्योगिक परिदृश्य को सटीक रूप से दर्शाने के लिए कोर उद्योगों की संख्या को आठ से बढ़ाकर नौ कर दिया गया है।
मुख्य बिंदु: सूचकांक में किए गए 3 बड़े बदलाव और कार्यप्रणाली
1. 9वें मूल उद्योग के रूप में ‘लौह अयस्क’ शामिल
- औद्योगिक महत्व: औद्योगिक उत्पादन में व्यापक उपयोग और आर्थिक विकास में बड़े योगदान को देखते हुए लौह अयस्क को अब मूल उद्योगों की सूची में शामिल कर लिया गया है।
- संख्या में वृद्धि: इसके साथ ही भारत के बुनियादी ढांचा क्षेत्र को मापने वाले मुख्य (कोर) उद्योगों की कुल संख्या अब 8 से बढ़कर 9 हो गई है।
2. स्टील और कोयला क्षेत्र के भारण में सुधार
- स्टील सूचकांक: औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के साथ सामंजस्य बिठाने के लिए, संशोधित ICI श्रृंखला में अब स्टील के शुद्ध उत्पादन (Net Production) के स्थान पर सकल उत्पादन डेटा (Gross Production Data) का उपयोग किया जाएगा।
- कोयला क्षेत्र: दोहरी गणना की समस्या को समाप्त करने के लिए अब केवल कच्चे कोयले (Raw Coal) को सूचकांक में रखा गया है। कच्चे कोयले से ही बनने वाले ‘कोल मिडलिंग्स’ और ‘वाश्ट कोल’ को इस बास्केट से बाहर कर दिया गया है।
3. भार आवंटन की कार्यप्रणाली
- IIP से जुड़ाव: संशोधित सूचकांक (2022-23) के लिए वस्तुओं का भार सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा जारी औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) की 2022-23 श्रृंखला से लिया गया है।
- प्रो-राटा पुनर्वितरण: IIP बास्केट से चुनी गई इन 9 वस्तुओं के मूल भार को प्रो-राटा (अनुपात) के आधार पर पुनर्वितरित करके कुल योग 100 निर्धारित किया गया है। 20 जुलाई को जारी होने वाली रिपोर्ट में जून 2026 के अनंतिम डेटा के साथ-साथ अप्रैल 2023 से मई 2026 तक के 38 महीनों का पिछला डेटा (Back Series) भी जारी किया जाएगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | प्रारंभिक परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य |
| संकलन एवं प्रकाशन संस्था | आर्थिक सलाहकार कार्यालय (OEA), उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय। |
| नया आधार वर्ष | 2022–23 (पुरानी श्रृंखला का आधार वर्ष 2011–12 था)। |
| कुल कोर उद्योग (अब 9) | कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, स्टील, सीमेंट, बिजली और नया शामिल: लौह अयस्क। |
| आवृत्ति (Frequency) | इस सूचकांक को मासिक आधार पर संकलित और जारी किया जाता है। |
| IIP में योगदान | यह सूचकांक भारत के कुल औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में शामिल मदों के भार का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा (लगभग 40% से अधिक) कवर करता है। |