27 July 2026 The Hindu Notes In Hindi Pdf के माध्यम से हम आपके लिए लेकर आए हैं द हिंदू के चुनिंदा और महत्वपूर्ण लेखों का सार। इस अंक में यूनेस्को की नई विश्व धरोहर सूची, बिटचैट (BitChat) ऐप ब्लॉक मामला, भारत की चीन और अमेरिका नीति, आरबीआई के आर्थिक उपाय, परीक्षा सुधार और दिशा 2.0 योजना जैसे समसामयिक विषयों को सरल और परीक्षा-उपयोगी हिंदी में शामिल किया गया है, जो मुख्य परीक्षा (Mains) और निबंध लेखन में अत्यंत लाभकारी साबित होंगे।
दिशा 2.0 योजना: तकनीक के माध्यम से न्याय तक पहुंच
मुख्य समाचार (Context)
- घोषणा: केंद्रीय विधि और न्याय मंत्रालय द्वारा संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, देशभर में तकनीक के माध्यम से न्याय तक पहुंच (Access to Justice) को आसान बनाने के लिए 255 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ ‘दिशा 2.0’ (DISHA 2.0 – Designing Innovative Solutions for Holistic Access to Justice) योजना का शुभारंभ किया गया है।
- कार्यान्वयन अवधि: वर्ष 2026 से 2031 (5 वर्ष की अवधि)।
‘दिशा 2.0’ योजना के चार प्रमुख घटक (Four Key Components)
यह योजना एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना (Central Sector Scheme) है, जिसके निम्नलिखित चार प्रमुख स्तंभ हैं:
- टेली-लॉ: रीचिंग द अनरीच्ड (Tele-Law: Reaching the Unreached):
- नागरिकों को मोबाइल ऐप, टोल-फ्री नंबर 14454 और कॉमन सर्विस सेंटर्स (CSC) के माध्यम से मुकदमे से पहले मुफ्त कानूनी सलाह (Pre-litigation Advice) प्रदान करना।
- सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए आकांक्षी प्रखंडों (Aspirational Blocks) में ‘न्याय सहायकों’ की तैनाती की गई है।
- न्याय बंधु (Nyaya Bandhu – Pro Bono Legal Services):
- वकीलों द्वारा स्वेच्छा से समाज के वंचित और पिछड़े वर्गों (विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 12 के तहत) को मुफ्त कानूनी सहायता देना।
- देश के 23 उच्च न्यायालयों में प्रो-बोनो पैनल और विधि विद्यालयों में ‘प्रो-बोनो क्लब’ स्थापित किए गए हैं।
- विधिक साक्षरता एवं विधिक जागरूकता कार्यक्रम (LLLAP):
- जमीनी स्तर पर क्षमता निर्माण, कानूनी रूप से सशक्तिकरण, कार्यशालाओं, वेबिनार और प्रसार भारती के सहयोग से विधिक जागरूकता फैलाना।
- विधि (Vision for Integrated Delivery of Harmonized Legal Initiatives) – संजीवनी:
- योजना की निगरानी के लिए एक केन्द्रीकृत और एकीकृत डैशबोर्ड (Real-time Dashboard) बनाना।
- इसका लक्ष्य 5 वर्षों में 50 लाख लाभार्थियों तक पहुंचना है।
- इसे ‘न्याय सेतु एआई चैटबॉट’ के साथ एकीकृत किया गया है।
न्याय सेतु एआई चैटबॉट
- शुभारंभ: 29 मार्च 2026 को लॉन्च किया गया।
- विशेषताएँ:
- यह जेनरेटिव एआई पर आधारित है और 22 भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करता है।
- यह वॉइस-फर्स्ट इंटरफेस (Voice-first Interface) और टेक्स्ट के जरिए कानूनी प्रक्रियाओं व अधिकारों को समझने में मदद करता है।
- यह हाइब्रिड आरएजी (Retrieval-Augmented Generation) तकनीक का उपयोग करता है, जिससे एआई ‘हैलुसिनेशन’ (गलत या भ्रामक जवाब) का जोखिम कम होता है।
परीक्षा सुधार और उच्च-स्तरीय टास्क फोर्स
मुख्य समाचार (Context)
- घटना: केंद्र सरकार द्वारा देश की परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह से पारदर्शी, लीक-प्रूफ और तकनीक-संचालित बनाने के लिए एक उच्च-स्तरीय टास्क फोर्स (High-powered Task Force) के गठन की घोषणा की गई है।
- नेतृत्व: इस बहु-विषयक (Multidisciplinary) विशेषज्ञ पैनल की अध्यक्षता विशिष्ट प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ और यूआईडीएआई (Unique Identification Authority of India) के पूर्व अध्यक्ष नंदन नीलेकणी करेंगे।
टास्क फोर्स की संरचना और प्रमुख सदस्य
नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता वाली इस समिति में देश के जाने-माने तकनीकी, प्रशासनिक और अंतरिक्ष विशेषज्ञ शामिल हैं:
- एस. सोमनाथ: पूर्व अध्यक्ष, इसरो (ISRO)
- तपन डेका: पूर्व निदेशक, आईबी (IB)
- वी. कामakoti: निदेशक, आईआईटी-मद्रास (IIT-Madras)
- अनिता करवाल: पूर्व शिक्षा सचिव
- अमृत लाल मीना: रसद (Logistics) विशेषज्ञ
टास्क फोर्स के प्रमुख उद्देश्य और कार्य
- राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) का कायाकल्प: विशेष रूप से प्रौद्योगिकी के दृष्टिकोण से एनटीए की कार्यप्रणाली और परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह से सुरक्षित और आधुनिक बनाना।
- तकनीक-संचालित समाधान: प्रश्नपत्रों के वितरण, मूल्यांकन और डिजिटल सुरक्षा में उन्नत तकनीकों (जैसे AI और ब्लॉकचेन) का उपयोग सुनिश्चित करना ताकि पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोका जा सके।
आरबीआई के पूंजी प्रवाह उपाय और आर्थिक स्थिति
मुख्य समाचार (Context)
- घोषणा: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार, विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए जून नीतिगत उपायों के बाद से बैंकों ने मुख्य रूप से विदेशी मुद्रा गैर-आवासीय (बैंक) [FCNR(B)] जमा के माध्यम से लगभग 32 बिलियन डॉलर जुटाए हैं।
- सरकारी प्रतिभूतियाँ: सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) में भी 7 बिलियन डॉलर से अधिक का विदेशी प्रवाह आया है।
मुख्य आर्थिक बिंदु (Key Highlights)
- बाहरी स्थिति मजबूत: इन inflows ने भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और अस्थिर वैश्विक पूंजी प्रवाह के बीच भारत की बाह्य स्थिति (External Position) को और मजबूत किया है।
- हेजिंग लागत और फॉरेक्स स्वैप: आरबीआई गवर्नर ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक के पास खुद को बीमाकृत (Insured) रखने की एक फुलप्रूफ प्रणाली है, जिसके तहत प्राप्त अतिरिक्त विदेशी मुद्रा को विदेशी संपत्तियों में निवेश किया जाता है।
- रुपये की स्थिति:
- रुपये में हालिया गिरावट देश की आर्थिक बुनियादी कमजोरियों को नहीं दर्शाती, बल्कि यह भू-राजनीतिक तनाव, डॉलर की मजबूती और वैश्विक अस्थिरता के कारण है।
- आरबीआई किसी विशिष्ट विनिमय दर को लक्षित नहीं करता, बल्कि उसका हस्तक्षेप केवल ‘अत्यधिक अस्थिरता’ को रोकने के लिए होता है। रुपये को नॉमिनल और रियल इफेक्टिव एक्सचेंज रेट (REER) दोनों ही रूपों में ‘अंडरवैल्यूड’ माना जा सकता है।
मौद्रिक नीति और मुद्रास्फीति (Monetary Policy & Inflation)
- प्राथमिकता: मुद्रास्फीति नियंत्रण (Inflation Control) और मूल्य स्थिरता (Price Stability) आरबीआई की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है, साथ ही मौद्रिक नीति समिति (MPC) विकास के जोखिमों के प्रति भी सतर्क है।
- दृष्टिकोण: एमपीसी डेटा-संचालित (Data-dependent) दृष्टिकोण अपनाना जारी रखेगी।
महत्वपूर्ण शब्दावली
- FCNR(B) Deposits: अनिवासी भारतीयों (NRIs) द्वारा विदेशी मुद्रा में रखी जाने वाली सावधि जमा (Term Deposits), जिन पर विनिमय जोखिम (Exchange Risk) बैंक वहन करते हैं।
- REER (Real Effective Exchange Rate): घरेलू मुद्रा के मूल्य का कई देशों की मुद्राओं के बास्केट के मुकाबले मुद्रास्फीति-समायोजित सूचकांक।
चीन के सामने घुटने न टेकें, अमेरिका पर निर्भर न रहें।
वाशिंगटन की अस्थिरता और नई दिल्ली में चिंता
- ट्रंप प्रशासन की नीतियां: वाशिंगटन में अस्थिर राजनीतिक माहौल और डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की अनिश्चित नीतियों (जैसे स्टील-एल्युमिनियम पर दंडात्मक टैरिफ, तरजीही व्यापार दर्जे को समाप्त करना, पाकिस्तान से संबंध सुधारना और H-1B वीज़ा नियमों को कड़ा करना) ने नई दिल्ली में रणनीतिक चिंता पैदा कर दी है।
- व्यावसायिक लॉबी की मांग: एक प्रभावशाली व्यावसायिक लॉबी चीन नीति में बुनियादी बदलाव (रिसेट) की वकालत कर रही है। उनका तर्क है कि चीन के साथ टकराव अमेरिकी एजेंडे के तहत था, जबकि भारत चीन की तकनीक, सप्लाई चेन और पूंजी पर निर्भर है। चीन-विरोधी रुख से भारत का विकास रुकता है और अमेरिका के ‘फ्लिप-फ्लॉप’ से भारत रणनीतिक रूप से कमजोर होता है।
चीन की शत्रुता और आक्रामकता का वास्तविक रिकॉर्ड
लेखक इस तर्क को रणनीतिक अदूरदर्शिता बताता है और चीन के पिछले एक दशक के hostile track record को रेखांकित करता है:
- सीमा पर आक्रामकता: देपसांग (2013), चुमार (2014), डोकलाम (2017) और गलवान घाटी (2020) में हिंसक झड़पें। चीन, वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) को बदलने की कोशिश कर रहा है।
- क्षेत्रीय और आंतरिक हस्तक्षेप: अरुणाचल प्रदेश पर बेतुके दावे, भौगोलिक नामों को बदलना, और जम्मू-कश्मीर व अरुणाचल के नागरिकों को स्टेपल्ड वीज़ा जारी करना।
- आर्थिक जबरदस्ती: महत्वपूर्ण मशीनरी, दुर्लभ पृथ्वी (rare earths) और टनल-बोरिंग मशीनों की आपूर्ति को राजनीतिक हथियार के रूप में रोकना।
- पाकिस्तान को सैन्य समर्थन: ऑपरेशन सिंदूर (मई 2025) के दौरान पाकिस्तान को रियल-टाइम सामरिक उपग्रह डेटा और खुफिया जानकारी प्रदान करके चीन ने प्रत्यक्ष रूप से भारत के खिलाफ शत्रुतापूर्ण भूमिका निभाई है।
परस्परता (Reciprocity) का मिथक और आर्थिक खतरे
- एशिया में प्रभुत्व की चाह: चीन एशिया में unipolar (एकध्रुवीय) स्थिति चाहता है और भारत को अपना समकक्ष नहीं मानता।
- कूटनीतिक अवरोध: चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों को बचाया है और भारत की UNSC व परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (NSG) की सदस्यता में बाधा डाली है।
- व्यापार घाटा और ‘किल-स्विच’: चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 100 अरब डॉलर से अधिक है। बिना किसी शर्त के चीन के सामने झुकने से भारत का उपभोक्ता बाजार चीन के लिए खुल जाएगा और वह भारतीय अर्थव्यवस्था पर एक ‘किल-स्विच’ हासिल कर लेगा।
- गलवान के बाद चीनी ऐप्स, निवेश और टेलीकॉम पर लगाए गए प्रतिबंध महत्वपूर्ण कूटनीतिक हथकंडे हैं। इन्हें हटाना एकतरफा निरस्त्रीकरण होगा।
अमेरिका की स्थिति और भारत का सही मार्ग
- अमेरिका की अविश्वसनीयता: वाशिंगटन के दूत (सर्जियो गोर) के उत्साह के बावजूद, अमेरिका केवल अपने हितों को प्राथमिकता देता है—लद्दाख की ऊंचाइयों पर भारत अकेला खड़ा है।
- संतुलित दृष्टिकोण: अमेरिका पर अत्यधिक निर्भरता से बचना सही है, लेकिन इसका अर्थ चीन के सामने आर्थिक और राजनीतिक आत्मसमर्पण करना नहीं है।
- भारत का सही रास्ता:
- रणनीतिक धैर्य और आंतरिक मजबूती।
- सप्लाई चेन की मजबूती और यूरोप, पूर्वी एशिया व ग्लोबल साउथ के साथ व्यापार का विस्तार।
- अल्पकालिक लागत के बावजूद घरेलू विनिर्माण (manufacturing) क्षमताओं का निर्माण।
- भारत को किसी भी एक पक्ष की ओर “झुकने” के बजाय सीधे चलने की ताकत विकसित करनी चाहिए
BitChat ऐप ब्लॉक मामला
मुख्य घटना और आदेश
- निर्देश देने वाली संस्था: गृह मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने 23 जुलाई को GitHub को निर्देश दिया।
- लक्षित ऐप: ‘BitChat’—जो X (पूर्व में ट्विटर) के सह-संस्थापक जैक डोर्सी द्वारा विकसित एक ब्लूटूथ मेश मैसेजिंग ऐप है।
- आदेश का कारण: आरोप है कि इस ऐप का उपयोग सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी स्थितियों में गैरकानूनी सभाओं को समन्वित करने और अधिकारियों द्वारा लगाए गए वैध प्रतिबंधों से बचने के लिए किया जा सकता है। यह आदेश ऐसे समय आया है जब विरोध स्थलों के पास बार-बार इंटरनेट शटडाउन के कारण प्रदर्शनकारी ब्लूटूथ-आधारित मैसेजिंग प्लेटफार्मों पर निर्भर हो रहे हैं।
- समयसीमा और चेतावनी: GitHub को एंड्रॉइड ऐप और उसकी रिलीज़ फ़ाइलों सहित तीन रिपॉजिटरी (repositories) को 3 घंटे के भीतर हटाने का निर्देश दिया गया है। अनुपालन न करने पर आपराधिक अभियोजन की चेतावनी दी गई है।
BitChat क्या है?
- विशेषताएं: यह एक विकेंद्रीकृत पीयर-टू-पीयर (peer-to-peer) मैसेजिंग ऐप है जो ब्लूटूथ मेश नेटवर्क पर काम करता है।
- बिना इंटरनेट के संचालन: इसके लिए किसी इंटरनेट कनेक्शन, सर्वर या फोन नंबर की आवश्यकता नहीं होती।
- तकनीक: यह भौतिक निकटता वाले उपकरणों का उपयोग करके एड-हक (ad hoc) नेटवर्क बनाता है। प्रत्येक डिवाइस क्लाइंट और सर्वर दोनों के रूप में काम करती है, जो स्वचालित रूप से पीयर की खोज करती है और नेटवर्क का विस्तार करने के लिए संदेशों को रिले करती है।
- लाभ: यह सेंसरशिप-प्रतिरोधी, सर्विलांस-प्रतिरोधी और बुनियादी ढांचा-स्वतंत्र है। यह इंटरनेट आउटेज, प्राकृतिक आपदाओं या विरोध प्रदर्शनों के दौरान भी काम करता है।
आदेश के मुख्य बिंदु और तर्क
- कानूनी बाधाएं: आदेश के अनुसार, ऐप बिना अनिवार्य यूजर रजिस्ट्रेशन या फोन नंबर सत्यापन के अनाम (anonymous) संचार की अनुमति देता है। इसकी तकनीकी वास्तुकला कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा वैध अवरोधन (lawful interception) और जांच में बाधा डालती है।
- संभावित दुरुपयोग: यह मंच सार्वजनिक व्यवस्था, दंगों, आतंकवाद, संगठित अपराध या इंटरनेट शटडाउन के दौरान कानून प्रवर्तन से बचने और अवैध सभाओं, हिंसक प्रदर्शनों, दुष्प्रचार, और कट्टरपंथ को बढ़ावा देने के लिए शोषित किया जा सकता है।
यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में नए स्थल
मुख्य घोषणा
- दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित यूनेस्को समिति की बैठक (जो बुधवार तक चलेगी) में रविवार को दुनिया भर के कई नए स्थलों को विश्व धरोहर सूची (World Heritage List) में शामिल किया गया।
प्रमुख नए स्थल:
- फ्रांस के डी-डे लैंडिंग समुद्र तट (D-Day landing beaches)
- ऐतिहासिक महत्व: 6 जून 1944 को यहाँ 1,50,000 से अधिक मित्र देशों (Allied) के सैनिक उतरे थे। यह द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाजी कब्जे से पश्चिमी यूरोप को मुक्त कराने के अभियान का केंद्र बिंदु था।
- माउंट ओलंपस (ग्रीस): ग्रीस का यह प्रतिष्ठित पर्वत भी इस सूची में जोड़ा गया है।
- असुका और फुजिवारा (जापान): जापान की इन प्राचीन राजधानियों को ऐतिहासिक महत्व के कारण शामिल किया गया है।
- बोमा-बडिंगिलो माइग्रेटरी लैंडस्केप (दक्षिण सूडान): यह दुनिया के सबसे बड़े स्थलीय स्तनधारी प्रवास (land mammal migration) का घर है और दक्षिण सूडान का पहला विश्व धरोहर स्थल है।
संविधान की मूल संरचना और समकालीन बहस
संदर्भ (Context)
- घटना: द हिंदू ग्रुप पब्लिशिंग प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक एन. राम द्वारा कोझिकोड (केरल) में ‘चिंता रवींद्रन मेमोरियल लेक्चर’ के दौरान दिए गए व्याख्यान से संबंधित।
- चर्चा का विषय: व्याख्यान का मुख्य केंद्र बिंदु भारतीय संविधान की मूल संरचना (Basic Structure) और हिंदुत्व प्राधिकारवाद के बीच कथित टकराव तथा इसके राजनीतिक-कानूनी आयाम थे।
संविधान की ‘मूल संरचना’ (Basic Structure Doctrine): मुख्य अवधारणा
- उत्पत्ति: यह सिद्धांत सीधे तौर पर संविधान में लिखित नहीं है, बल्कि इसे न्यायपालिका द्वारा विकसित किया गया है।
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:
- केशवानंद भारती वाद (1973): सर्वोच्च न्यायालय ने अपने ऐतिहासिक फैसले में यह प्रतिपादित किया कि संसद को अनुच्छेद 368 के तहत संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन करने की शक्ति है, किन्तु वह संविधान की ‘मूल संरचना’ (Basic Structure) को नष्ट या परिवर्तित नहीं कर सकती।
- मूल संरचना के प्रमुख तत्व:
- संविधान की सर्वोच्चता
- संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य का स्वरूप
- शक्तियों का पृथक्करण (Separation of Powers)
- न्यायपालिका की स्वतंत्रता
- मौलिक अधिकार और नीति निर्देशक तत्वों के बीच संतुलन
बहस के प्रमुख बिंदु (Key Arguments in the Discourse)
- मूल संरचना और राजनीतिक विचारधाराओं का टकराव:
- आलोचकों का तर्क है कि भारत की बहुसंस्कृतिवाद और पंथनिरपेक्षता (Secularism) की अवधारणा संविधान के मूल ढांचे का आधार है।
- दूसरी ओर, वैचारिक स्तर पर विभिन्न राजनीतिक समूहों द्वारा राष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान और बहुसंख्यक आकांक्षाओं को लेकर अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत किए जाते रहे हैं।
- न्यायपालिका की भूमिका:
- मूल संरचना एक “न्यायिक रूप से प्रशासित मानक” (Judicially administered standard) है। इसकी रक्षा करना और इसकी व्याख्या करना पूरी तरह से न्यायपालिका की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और कार्यकारी दबावों से मुक्त रहने की क्षमता पर निर्भर करता है।