29 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत समुद्री लॉजिस्टिक्स को गति देने वाली तटीय मालवहन संवर्धन योजना, ग्रामीण स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाले स्टार्टअप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम (SVEP), और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा अनुसूचित जाति सशक्तीकरण हेतु PM-AJAY योजना (2026-31) , द्विपक्षीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाले भारत-नेपाल रेल व्यापार की पहली सीधी व्यावसायिक कंटेनर मालगाड़ी के सफल संचालन, स्थानीय लोकतंत्र व सुशासन के लिए पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) के सशक्तीकरण, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा हेतु साइबर अपराध शमन केंद्र एवं नई सुरक्षा पहलों, तथा वित्तीय समावेशन को बल देने वाले क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) के सर्वकालिक उच्च लाभ व प्रदर्शन समीक्षा का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
तटीय मालवहन संवर्धन योजना
- प्रारंभिक परीक्षा: बुनियादी ढांचा (पोर्ट्स, जलमार्ग), सरकारी नीतियां एवं योजनाएं।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): बुनियादी ढांचा: बंदरगाह, जलमार्ग; परिवहन लागत में कमी; समावेशी विकास और सागरमाला कार्यक्रम।
चर्चा में क्यों?
बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने राज्यसभा में तटीय मालवहन संवर्धन योजना (Coastal Cargo Promotion Scheme) के कार्यान्वयन और तटीय शिपिंग को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी साझा की। केंद्रीय बजट 2026 में घोषित इस योजना का मुख्य लक्ष्य वर्ष 2047 तक देश के कुल लॉजिस्टिक्स में अंतर्देशीय जलमार्गों और तटीय शिपिंग की हिस्सेदारी को 6% से बढ़ाकर 12% करना है।
मुख्य बिंदु: नीतिगत सुधार, इंफ्रास्ट्रक्चर और लाभ
1. सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख नीतिगत कदम
- बंदरगाह शुल्कों में छूट: तटीय मालवाहक जहाजों (Coastal cargo vessels) के लिए पोत और कार्गो संबंधी शुल्कों में 40% की छूट दी जा रही है।
- प्राथमिकता बर्थिंग नीति: जहाजों का टर्नअराउंड समय घटाने के लिए प्राथमिकता के आधार पर बर्थिंग (Priority berthing) की सुविधा अधिसूचित की गई है।
- कर में राहत: भारतीय झंडे वाले जहाजों द्वारा उपयोग किए जाने वाले बंकर ईंधन पर GST को 18% से घटाकर 5% कर दिया गया है।
- ग्रीन चैनल क्लीयरेंस: बंदरगाहों पर तटीय कार्गो की त्वरित निकासी के लिए यह व्यवस्था शुरू की गई है।
- कानूनी ढांचा: तटीय नौवहन को विनियमित करने और बढ़ावा देने के लिए तटीय नौवहन अधिनियम, 2025 लागू किया गया है।
2. इंफ्रास्ट्रक्चर विकास (सागरमाला योजना)
- परियोजनाएं: सागरमाला के तहत Ro-Ro, Ro-Pax और पैसेंजर फेरी सेवाओं के लिए 30 बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें से ₹739 करोड़ की 18 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं।
- विशेष तटीय बर्थ: देश के 10 प्रमुख बंदरगाहों (Major Ports) पर समर्पित तटीय बर्थ (Dedicated Coastal Berths) विकसित किए गए हैं।
3. सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
- समय की बचत: गुजरात में घोघा-हजीरा मार्ग पर रो-पैक्स फेरी ने सड़क के 12 घंटे के सफर को घटाकर समुद्र से 4 घंटे कर दिया है। इसी तरह, महाराष्ट्र में मुंबई-मांडवा मार्ग पर अलीबाग की यात्रा 4 घंटे से घटकर 1 घंटा रह गई है।
- लाभार्थी: इन Ro-Pax और फेरी सेवाओं से अब तक 65 लाख से अधिक यात्रियों और 15 लाख से अधिक वाहनों/ट्रकों को लाभ मिला है।
10 प्रमुख बंदरगाहों पर समर्पित तटीय बर्थ
| क्र.सं. | बंदरगाह का नाम | समर्पित बर्थ की संख्या |
| 1 | पारादीप पोर्ट अथॉरिटी (ओडिशा) | 5 (सर्वाधिक) |
| 2 | मुंबई पोर्ट अथॉरिटी / श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट (कोलकाता) | 3-3 |
| 3 | कामराजार पोर्ट (तमिलनाडु) / न्यू मंगलौर पोर्ट (कर्नाटक) | 2-2 |
| 4 | चेन्नई / कोचीन / JNPA (मुंबई) / VOCPA (तूतीकोरिन) / विशाखापट्टनम | 1-1 |
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / पहलू | महत्वपूर्ण तथ्य |
| 2047 का लक्ष्य | तटीय/जलमार्गों की हिस्सेदारी को 6% से बढ़ाकर 12% करना। |
| बंकर ईंधन पर GST | 18% से घटाकर 5% किया गया। |
| पोर्ट शुल्क में छूट | तटीय मालवाहक जहाजों को 40% की छूट। |
| कानूनी ढांचा | तटीय नौवहन अधिनियम, 2025। |
| सर्वाधिक तटीय बर्थ | पारादीप पोर्ट अथॉरिटी (कुल 5 बर्थ)। |
स्टार्टअप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम (SVEP): ग्रामीण उद्यमिता का कायाकल्प
- प्रारंभिक परीक्षा: सामाजिक-आर्थिक विकास — गरीबी उन्मूलन, ग्रामीण विकास योजनाएं, स्वयं सहायता समूह (SHG)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): समावेशी विकास; गरीबी और भूख से जुड़े मुद्दे; ग्रामीण अर्थव्यवस्था; गैर-कृषि रोजगार और महिला सशक्तीकरण।
चर्चा में क्यों?
ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, स्टार्टअप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम (SVEP) ने 30 जून 2026 तक देश भर में 4.32 लाख से अधिक ग्रामीण गैर-कृषि उद्यमों को सफलतापूर्वक समर्थन दिया है। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी-केंद्रित स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र का विस्तार कर रही है। इसमें सामाजिक समावेशिता को प्राथमिकता दी गई है, जहाँ लगभग 86% लाभार्थी SC, ST, अल्पसंख्यक और OBC वर्गों से आते हैं।
मुख्य बिंदु: योजना की संरचना, कार्यान्वयन और प्रभाव
1. योजना का स्वरूप और उद्देश्य
- मूल योजना: यह दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) की एक उप-योजना है, जिसे 2016 में शुरू किया गया था।
- प्राथमिक लक्ष्य: स्वयं सहायता समूहों (SHG) और उनके परिवारों को ग्रामीण क्षेत्रों में गैर-कृषि (Non-farm) छोटे उद्यम स्थापित करने में मदद करना।
- सहयोग का स्वरूप: इसमें वित्तीय सहायता, व्यावसायिक प्रशिक्षण, सॉफ्ट स्किल्स विकास और बैंक लिंकेज (जैसे प्रधानमंत्री मुद्रा योजना) की सुविधा मिलती है।
2. ब्लॉक-स्तरीय कार्यान्वयन ढांचा
- लागत संरचना: प्रत्येक ब्लॉक के लिए ₹6.50 करोड़ का प्रावधान है। प्रति उद्यम औसतन ₹27,083 का निवेश किया जाता है।
- नोडल नोड्स: ब्लॉक स्तर पर ब्लॉक रिसोर्स सेंटर-एंटरप्राइज प्रमोशन (BRC-EP) योजना का संचालन करते हैं।
- CRP-EP कैडर:कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन – एंटरप्राइज प्रमोशन (CRP-EPs) स्थानीय स्तर पर तकनीकी मदद और मेंटरशिप देते हैं।
- 90% से अधिक CRP-EPs का चयन SHG परिवारों से होता है।
- इस कैडर में कम से कम 60% महिलाएं शामिल हैं।
- एक CRP-EP अधिकतम 50 उद्यमों को सहायता प्रदान करता है।
3. सामाजिक समावेशिता और बजटीय आवंटन
- महिलाओं की हिस्सेदारी: योजना का अनिवार्य नियम है कि कम से कम 60% लाभार्थी महिलाएं हों।
- शीर्ष प्रदर्शनकर्ता राज्य: असम, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश में सबसे अधिक उद्यम स्थापित हुए हैं।

- बजट विस्तार: फरवरी 2026 तक केंद्र सरकार ने कुल ₹942.09 करोड़ की राशि जारी की है, जो 2016-18 के शुरुआती चरण की तुलना में लगभग 738% अधिक है।
4. भारतीय गुणवत्ता परिषद (QCI) के मूल्यांकन के मुख्य निष्कर्ष
- लाभप्रदता: SVEP द्वारा समर्थित 99% उद्यम लाभदायक पाए गए।
- आय का स्रोत: इन उद्यमों का पारिवारिक आय में 57% योगदान रहा।
- औसत राजस्व: ग्रामीण उद्यमों का औसत मासिक राजस्व ₹39,000 रहा (विनिर्माण क्षेत्र में यह ₹47,800 तक देखा गया)।
- बचत और स्वामित्व: 96% उद्यमियों की बचत बढ़ी और लगभग 75% उद्यमों का स्वामित्व या प्रबंधन महिलाओं के हाथ में है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / पहलू | महत्वपूर्ण तथ्य |
| मूल नोडल योजना | DAY-NRLM (ग्रामीण विकास मंत्रालय)। शुरुआत: 2016। |
| लक्ष्य क्षेत्र | ग्रामीण गैर-कृषि क्षेत्र (Non-farm sector) में सूक्ष्म उद्यम। |
| सामाजिक समावेशन | 86% लाभार्थी वंचित वर्गों (SC/ST/OBC/अल्पसंख्यक) से। |
| महिला कोटा | कम से कम 60% महिला उद्यमी अनिवार्य। |
| स्थानीय मेंटर कैडर | CRP-EPs (कम से कम 60% महिलाएं, 90% SHG पृष्ठभूमि से)। |
| वित्तीय कोष | कम्युनिटी एंटरप्राइज फंड (CEF) के जरिए सामुदायिक ऋण प्रबंधन। |
PM-AJAY योजना: अनुसूचित जाति सशक्तीकरण के लिए 2026-31 हेतु नए वित्तीय परिव्यय का प्रस्ताव
- प्रारंभिक परीक्षा: सामाजिक-आर्थिक विकास — कल्याणकारी योजनाएं, गरीबी उन्मूलन और संवेदनशील वर्गों (SC/ST) का सशक्तीकरण।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): केंद्र एवं राज्यों द्वारा आबादी के संवेदनशील वर्गों के लिए चलाए जा रहे कल्याणकारी कार्यक्रम और इन योजनाओं का प्रदर्शन; सामाजिक न्याय।
चर्चा में क्यों?
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठवाले ने लोकसभा में प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (PM-AJAY) की प्रगति रिपोर्ट पेश की। सरकार ने नीति आयोग के डेवलपमेंट मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन ऑफिस (DMEO) के सकारात्मक मूल्यांकन के बाद इस योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक अधिक बजट के साथ जारी रखने का प्रस्ताव दिया है।
मुख्य बिंदु: योजना की संरचना, वित्तीय स्थिति और प्रभाव
1. PM-AJAY के मुख्य तीन घटक
यह योजना 2021-22 में शुरू की गई थी। इसे तीन पूर्ववर्ती योजनाओं को मिलाकर एक एकीकृत रूप दिया गया:
- आदर्श ग्राम: अनुसूचित जाति बहुल गांवों में बुनियादी ढांचा और नागरिक सुविधाएं विकसित करना।
- अनुदान-सहायता (Grants-in-Aid): कौशल विकास, आजीविका परियोजनाओं और सूक्ष्म-उद्यमों के लिए वित्तीय सहायता देना।
- छात्रावास (Hostels): अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा संस्थानों में हॉस्टल का निर्माण और रख-रखाव।
2. वित्तीय आवंटन और प्रगति (2021-22 से 2025-26)
- कुल जारी राशि: केंद्र सरकार ने 30 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को ₹4,276.62 करोड़ जारी किए।
- उपयोग की गई राशि: राज्यों और यूटी ने इंफ्रास्ट्रक्चर और आजीविका निर्माण पर ₹3,185.07 करोड़ खर्च किए।
- 2025-26 का आवंटन: अकेले वर्ष 2025-26 के दौरान ₹1,100.09 करोड़ की राशि जारी की गई।
3. आदर्श ग्राम घटक की स्थिति
- वर्ष 2018-19 से अब तक कुल 3,112 गांवों की पहचान की गई।

- तमिलनाडु में 3,111 गांवों को ‘आदर्श ग्राम’ घोषित किया जा चुका है, जहां सार्वजनिक सेवाओं और नागरिक सुविधाओं में सुधार हुआ है।
4. नीति आयोग (DMEO) के मूल्यांकन निष्कर्ष
नीति आयोग के अध्ययन में पाया गया कि इस योजना से:
- बैंकिंग, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा तक SC समुदायों की पहुंच आसान हुई है।
- बुनियादी ढांचे के निर्माण से गांव स्तर पर स्थायी आजीविका के अवसर पैदा हुए हैं।
- लक्षित समुदायों के जीवन स्तर में प्रत्यक्ष रूप से सुधार आया है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / पहलू | महत्वपूर्ण तथ्य |
| मंत्रालय | सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय। |
| प्रारंभ वर्ष | 2021-22 (2026-31 तक विस्तार प्रस्तावित)। |
| योजना का प्रकार | केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme)। |
| मूल तीन घटक | आदर्श ग्राम, अनुदान-सहायता (Grants-in-Aid), हॉस्टल निर्माण। |
| मूल्यांकन संस्था | DMEO (नीति आयोग)। |
| आदर्श ग्राम में अग्रणी | तमिलनाडु (3,111 गांव आदर्श ग्राम घोषित)। |
भारत-नेपाल रेल व्यापार: पहली सीधी व्यावसायिक कंटेनर मालगाड़ी का सफल संचालन
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएं (Current Events of National and International Importance)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): भारत और उसके पड़ोसी संबंध; द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह; बुनियादी ढांचा (रेलवे), लॉजिस्टिक्स और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार।
चर्चा में क्यों?
कोलकाता पोर्ट से नेपाल के बिराटनगर कस्टम्स यार्ड के लिए पहली सीधी व्यावसायिक कंटेनर मालगाड़ी सफलता पूर्वक पहुंची। 40 डिब्बों (वैगनों) वाली यह ट्रेन कैनोला लेकर नेपाल पहुंची है। यह पूरा संचालन संशोधित ‘भारत-नेपाल रेल ट्रांजिट प्रोटोकॉल’ के तहत हुआ है, जो दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों को एक नई ऊंचाई देगा।
मुख्य बिंदु: सीमा पार व्यापार और लॉजिस्टिक्स में बदलाव
1. बिना रुकावट सीधा माल परिवहन (End-to-End Transport)
- ट्रांसशिपमेंट की झंझट खत्म: इस नई सेवा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सीमा (Border) पर माल को दूसरे ट्रकों या ट्रेनों में नहीं चढ़ाना-उतारना पड़ता।
- समय और लागत की बचत: सीमा पर माल न बदलने से लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी। ट्रांजिट टाइम कम होगा और सामान खराब या क्षतिग्रस्त होने का जोखिम भी कम हो जाएगा।
- सप्लाई चेन में सुधार: निर्यातकों, आयातकों और उद्योगों को तेजी से और अधिक पारदर्शी तरीके से सामान मिल सकेगा।
2. द्विपक्षीय समझौते और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
- जोगबनी-बिराटनगर ब्रॉड-गेज लिंक: भारत के जोगबनी (बिहार) और नेपाल के बिराटनगर के बीच इस ब्रॉड-गेज रेल लाइन का उद्घाटन जून 2023 में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों द्वारा किया गया था।
- संशोधित प्रोटोकॉल (LoE): इसके बाद नवंबर 2025 में संशोधित लेटर ऑफ एक्सचेंज (Letter of Exchange – LoE) पर हस्ताक्षर किए गए। इसी समझौते ने इस सीधे व्यावसायिक रेल आवागमन का रास्ता साफ किया।
3. आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ
- पर्यावरण के अनुकूल: सड़क परिवहन की तुलना में रेल परिवहन कार्बन उत्सर्जन को काफी कम करता है।
- ईज ऑफ डूइंग बिजनेस: बेहतर लॉजिस्टिक्स नेटवर्क से क्षेत्रीय व्यापार को गति मिलेगी। यह कदम भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति को भी मजबूत करता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / पहलू | महत्वपूर्ण तथ्य |
| मार्ग (Route) | कोलकाता पोर्ट (भारत) से बिराटनगर कस्टम्स यार्ड (नेपाल)। |
| सीमा पार रेल लिंक | जोगबनी (बिहार, भारत) — बिराटनगर (नेपाल) ब्रॉड-गेज नेटवर्क। |
| नीतिगत ढांचा | भारत-नेपाल रेल ट्रांजिट प्रोटोकॉल (संशोधित LoE, नवंबर 2025)। |
| पहला कार्गो | कैनोला ले जाने वाले 40 वैगन/डिब्बे। |
| मुख्य उद्देश्य | नो-ट्रांसशिपमेंट आधारित निर्बाध क्रॉस-बॉर्डर व्यापार। |
पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) का सशक्तीकरण
- प्रारंभिक परीक्षा: भारतीय राज्यव्यवस्था और शासन — संविधान, पंचायती राज, सार्वजनिक नीति और अधिकार संबंधी मुद्दे।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): स्थानीय स्तर पर शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण तथा उसकी चुनौतियां; 73वां संविधान संशोधन; शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही (Digital Governance)।
चर्चा में क्यों?
पंचायती राज केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने लोकसभा में पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) के वित्तीय और प्रशासनिक सशक्तीकरण पर विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। फरवरी 2025 में जारी “राज्यों में पंचायतों को हस्तांतरण की स्थिति: एक सांकेतिक साक्ष्य-आधारित रैंकिंग, 2024” रिपोर्ट का हवाला दिया गया। इसमें ‘डेवोल्यूशन इंडेक्स’ के जरिए संविधान के भाग-IX के तहत आने वाले राज्यों/UTs का मूल्यांकन किया गया।
मुख्य बिंदु: संवैधानिक प्रावधान, चुनौतियां और सरकारी पहलें
1. संवैधानिक एवं प्रशासनिक ढांचा
- राज्य सूची का विषय: संविधान की 7वीं अनुसूची के अनुसार ‘पंचायती राज’ राज्य सूची (State List) का विषय है।
- अनुच्छेद 243G: यह राज्य विधायिका को पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय की योजनाएं तैयार करने हेतु शक्ति व उत्तरदायित्व सौंपने का अधिकार देता है।
- 11वीं अनुसूची: इसमें कुल 29 विषय शामिल हैं, जिन पर शक्तियों के हस्तांतरण की सिफारिश की गई है।
- मौजूदा चुनौतियां: अपर्याप्त वित्तीय संसाधन, मैनपावर की कमी और सीमित प्रशासनिक अधिकार।
2. वित्तीय आवंटन (15वां वित्त आयोग और RGSA)
- 15वां वित्त आयोग (2020-21 से 2025-26): पंचायतों के लिए आवंटित कुल ₹2,97,555 करोड़ में से ₹2,82,632 करोड़ (लगभग 95%) जारी किए जा चुके हैं।
- संशोधित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA): वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 के दौरान राज्यों/UTs को ₹3,601.77 करोड़ की राशि जारी की गई।
3. क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण (Capacity Building)
- प्रशिक्षित प्रतिनिधि: वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2026-27 (10 जुलाई 2026 तक) के बीच 1.66 करोड़ से अधिक निर्वाचित प्रतिनिधियों और हितधारकों को प्रशिक्षित किया गया।
- नेतृत्व विकास (MDP): IIMs और IITs जैसे शीर्ष संस्थानों के माध्यम से 3,490 प्रतिनिधियों को ‘लीडरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम’ दिया गया।
4. डिजिटल गवर्नेंस एवं वित्तीय पारदर्शिता
- ई-ग्रामस्वराज): योजना, बजट, ऑनलाइन भुगतान और निगरानी का एकीकृत मंच।
- AuditOnline: CFC फंड के ऑनलाइन ऑडिट हेतु अप्रैल 2020 में लॉन्च। FY 2024-25 में 90.73% PRIs (2,40,435 में से) ने ऑडिट रिपोर्ट जनरेट की।
- SAMARTH Panchayat: पंचायतों द्वारा राजस्व के अपने स्रोतों (Own Sources of Revenue – OSR) के डिजिटाइजेशन हेतु पोर्टल।
- आत्मनिर्भर पंचायत विशेष पुरस्कार (ANPSA): OSR बढ़ाने वाली पंचायतों को प्रोत्साहित करने के लिए 2025 में शुरू।
- नागरिक केंद्रित ऐप्स: ‘मेरी पंचायत’ (कार्यों की जानकारी हेतु) और ‘पंचायत निर्णय’ (ग्राम सभा की बैठकों में पारदर्शिता हेतु)।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / पहलू | महत्वपूर्ण तथ्य |
| संविधान भाग एवं सूची | भाग-IX, अनुच्छेद 243G, 11वीं अनुसूची (29 विषय), 7वीं अनुसूची की राज्य सूची। |
| डेवोल्यूशन इंडेक्स के 6 स्तंभ | 1. ढांचा (Framework), 2. कार्य (Functions), 3. वित्त (Finances), 4. कर्मी (Functionaries), 5. क्षमता वृद्धि (Capacity), 6. जवाबदेही (Accountability)। |
| डिजिटल प्लेटफॉर्म्स | eGramSwaraj (प्लानिंग), AuditOnline , SAMARTH (OSR टैक्स संग्रह)। |
| पारदर्शिता ऐप्स | Meri Panchayat (प्रगति ट्रैकिंग), Panchayat NIRNAY (ग्राम सभा प्रबंधन)। |
| 15वां वित्त आयोग जारी राशि | ₹2,82,632 करोड़ (कुल आवंटन का 95%)। |
| ऑडिट रिपोर्ट (FY 2024-25) | 90.73% पंचायतों ने AuditOnline पर ऑडिट रिपोर्ट जनरेट की। |
भारत में साइबर अपराध शमन केंद्र और सुरक्षा पहलें
- प्रारंभिक परीक्षा: साइबर सुरक्षा, I4C, प्रमुख डिजिटल पोर्टल (NCRP, CFCFRMS, समन्वय, सहयोग) और डिजिटल गवर्नेंस।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप; आंतरिक सुरक्षा, साइबर सुरक्षा के बुनियादी ढांचे, संचार नेटवर्क के माध्यम से चुनौतियां और संस्थागत उपाय।
चर्चा में क्यों?
राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने लोकसभा में भारत में साइबर अपराधों और वित्तीय धोखाधड़ी से निपटने की व्यापक समीक्षा प्रस्तुत की। सरकार ने बताया कि ‘इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर’ (I4C) के तहत कई तकनीकी पहलों के जरिए साइबर सुरक्षा ग्रिड को मजबूत किया जा रहा है। इसके तहत ‘सिटीजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम’ (CFCFRMS) और 1930 हेल्पलाइन के जरिए ₹11,158 करोड़ से अधिक की राशि बचाई जा चुकी है। इसके अलावा, वित्तीय धोखाधड़ी के पीड़ितों के पैसे तेजी से लौटाने हेतु अप्रैल 2026 से ‘मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल’ और ‘ग्रीवांस रीड्रेसल मॉड्यूल’ जैसे नए तंत्र पूरी तरह से कार्यात्मक कर दिए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
1. संवैधानिक एवं प्रशासनिक ढांचा
- राज्य सूची का विषय: भारतीय संविधान की 7वीं अनुसूची के तहत ‘पुलिस’ और ‘लोक व्यवस्था’ (Public Order) राज्य के विषय हैं।
- केंद्र की भूमिका: साइबर अपराधों की रोकथाम और जांच मुख्य रूप से राज्यों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों (LEAs) की जिम्मेदारी है। केंद्र सरकार वित्तीय सहायता, परामर्श और क्षमता निर्माण से सहयोग करती है।
2. संस्थागत ढांचा और प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म (I4C)
- इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C): देश में साइबर अपराधों से व्यापक रूप से निपटने के लिए गृह मंत्रालय का नोडल कार्यालय।
- CFCFRMS एवं 1930 हेल्पलाइन: वित्तीय धोखाधड़ी की त्वरित रिपोर्टिंग के लिए 2021 में शुरू। इसके जरिये 30 जून 2026 तक ₹11,158 करोड़ से अधिक की राशि बचाई गई है।
- समन्वय प्लेटफॉर्म: अंतर-राज्यीय डेटा शेयरिंग और एनालिटिक्स का मंच। इसका ‘प्रतिबिंब’ मॉड्यूल अपराधियों और उनके इंफ्रास्ट्रक्चर की लाइव लोकेशन मैप करता है।
- सहयोग पोर्टल: IT अधिनियम, 2000 की धारा 79(3)(b) के तहत अवैध सामग्री हटाने हेतु आईटी कंपनियों को तेजी से नोटिस भेजने की सुविधा।
3. प्रवर्तन और क्षमता निर्माण पहलें
- संदिग्ध रजिस्ट्री (Suspect Registry): बैंकों के सहयोग से ₹25,698 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन रोके गए हैं। साथ ही 15.75 लाख SIM और 5.77 लाख IMEI ब्लॉक किए गए।
- साइबर कमांडो: क्रिटिकल इन्फॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा हेतु 281 साइबर कमांडो का विशेष विंग प्रशिक्षित किया गया है।
- CyTrain: पुलिस और न्यायिक अधिकारियों के लिए ऑनलाइन (MOOC) ट्रेनिंग पोर्टल, जिस पर अब तक 1.61 लाख से अधिक सर्टिफिकेशन जारी किए जा चुके हैं।
- नए सुरक्षा मॉड्यूल: अप्रैल 2026 से पीड़ितों के पैसे जल्द लौटाने हेतु ‘मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल’ और ‘ग्रीवांस रीड्रेसल मॉड्यूल’ लागू किए गए हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| प्रमुख पहल / घटक | संबंधित मंत्रालय / नोडल संस्था | मुख्य कार्य / तथ्य |
| I4C | गृह मंत्रालय (MHA) | साइबर अपराधों से निपटने के लिए केंद्रीय समन्वय केंद्र। |
| हेल्पलाइन 1930 | I4C के अंतर्गत | साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज करने हेतु टोल-फ्री नंबर। |
| प्रतिबिंब | I4C (समन्वय प्लेटफॉर्म का हिस्सा) | साइबर अपराधियों की लोकेशन को लाइव मैप पर ट्रैक करने वाला टूल। |
| सहयोग पोर्टल | भारत सरकार (I4C) | IT एक्ट 2000 के तहत आपत्तिजनक/अवैध सामग्री हटाने हेतु नोटिस भेजना। |
| CyTrain | I4C | पुलिस/न्यायिक अधिकारियों हेतु ऑनलाइन (MOOC) साइबर ट्रेनिंग पोर्टल। |
| संवैधानिक स्थिति | 7वीं अनुसूची (राज्य सूची) | ‘पुलिस’ और ‘लोक व्यवस्था’ राज्यों के अधिकार क्षेत्र में। |
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRBs): सर्वकालिक उच्च लाभ और प्रदर्शन समीक्षा
- प्रारंभिक परीक्षा: भारतीय अर्थव्यवस्था, बैंकिंग क्षेत्र, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRBs) और वित्तीय समावेशन।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, संवृद्धि, विकास और रोजगार से संबंधित विषय; समावेशी विकास और बैंकिंग क्षेत्र में सुधार।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) के वित्तीय प्रदर्शन की रिपोर्ट प्रस्तुत की। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान RRBs ने इतिहास में अब तक का सबसे अधिक ₹10,177 करोड़ का समेकित शुद्ध लाभ (Consolidated Net Profit) दर्ज किया है। सरकार द्वारा चलाए जा रहे नियमित समीक्षा बैठकों, प्रौद्योगिकी उन्नयन और वित्तीय समावेशन पहलों के कारण बैंकिंग संकेतकों में यह बड़ा सुधार देखने को मिला है।
मुख्य बिंदु: वित्तीय प्रदर्शन, सरकारी समीक्षा एवं समावेशन
1. वित्तीय प्रदर्शन और प्रमुख आर्थिक संकेतक (FY 2025-26)
- सर्वकालिक उच्च लाभ: RRBs का शुद्ध लाभ FY 2024-25 के ₹6,820 करोड़ से बढ़कर FY 2025-26 में ₹10,177 करोड़ हो गया।
- जमा एवं ऋण वृद्धि: कुल जमा राशि बढ़कर ₹7,68,621 करोड़ और बकाया ऋण (Loans Outstanding) बढ़कर ₹5,78,349 करोड़ पर पहुंच गया।
- क्रेडिट-डिपॉजिट (CD) अनुपात: क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात सुधरकर 75.2% हो गया (जो FY 2023-24 में 71.4% था)।
- संपत्ति की गुणवत्ता (NPA में कमी): ग्रॉस एनपीए (GNPA) घटकर 5.3% और नेट एनपीए (NNPA) 2.1% पर बना हुआ है।
- पूंजी पर्याप्तता (CRAR): जोखिम भारित परिसंपत्ति अनुपात (CRAR) सुधरकर 15.0% हो गया, जो न्यूनतम विनियामक मानकों से अधिक है।
2. सरकारी समीक्षा और प्रौद्योगिकी उन्नयन
- नियमित समीक्षा बैठकें: वित्त मंत्री और वित्तीय सेवाएं विभाग (DFS) द्वारा राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तरों (उत्तर-पूर्व, दक्षिण, उत्तर, पश्चिम-मध्य, पूर्व) पर प्रदर्शन की लगातार समीक्षा की जाती है।
- समीक्षा एजेंडा के मुख्य बिंदु: वित्तीय मापदंडों की समीक्षा, प्रौद्योगिकी का उन्नयन, लोन पोर्टफोलियो का विविधीकरण (कृषि-संबद्ध, MSME और खुदरा क्षेत्र) और सुदूर क्षेत्रों में बैंकिंग विस्तार।
3. वित्तीय समावेशन और फ्लेगशिप योजनाएं
- योजनाओं का क्रियान्वयन: केंद्र सरकार (DFS) द्वारा तय किए गए लक्ष्यों के अनुसार RRBs ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन को गहरा कर रहे हैं।
- प्रमुख योजनाएं: प्रधानमंत्री जन-धन योजना (PMJDY), प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY), प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY), प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) और अटल पेंशन योजना (APY) के तहत प्रगति की निरंतर निगरानी की जा रही है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| वित्तीय संकेतक / पहलू | FY 2024-25 | FY 2025-26 | महत्वपूर्ण बिंदु |
| समेकित शुद्ध लाभ (Net Profit) | ₹6,820 करोड़ | ₹10,177 करोड़ | इतिहास में सर्वाधिक। |
| कुल जमा (Total Deposits) | ₹7,13,800 करोड़ | ₹7,68,621 करोड़ | निरंतर वृद्धि दर्ज। |
| क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात (CD Ratio) | 73.4% | 75.2% | ग्रामीण अर्थव्यवस्था में अधिक ऋण प्रवाह। |
| ग्रॉस एनपीए (GNPA %) | 5.4% | 5.3% | परिसंपत्ति की गुणवत्ता में सुधार। |
| जोखिम भारित परिसंपत्ति अनुपात (CRAR %) | 14.4% | 15.0% | वित्तीय स्थिरता और मजबूत पूंजी आधार। |
| डेटा स्रोत | NABARD | NABARD | NABARD द्वारा आंकड़े संकलित किए जाते हैं |