27 & 28 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत यूनेस्को द्वारा बौद्ध विरासत सारनाथ को विश्व धरोहर स्थल घोषित किए जाने, अमेरिकी व्यापार नीति के सेक्शन 301 टैरिफ के तहत भारत, वर्ष 2014 से 2026 तक के 8 प्रमुख संविधान संशोधन, आंध्र प्रदेश में FCV तंबाकू बाजार की समीक्षा, खगोलविदों द्वारा सक्रिय रूप से बनते ‘ब्लू स्ट्रैग्लर स्टार’ की अभूतपूर्व खोज, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण हेतु म्यूजियम ग्रांट स्कीम, बिहार में सिंचाई व बाढ़ नियंत्रण के लिए कोसी-मेची अंतःराज्यीय लिंक परियोजना, महाराष्ट्र के महान संत संत गजानन महाराज के 150वें प्रकट दिन पर राष्ट्रीय मान्यता की मांग, तथा पेरिस समझौते के तहत भारत के एनडीसी (NDC) लक्ष्यों की नवीनतम प्रगति का अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।
सारनाथ बना यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल
- प्रारंभिक परीक्षा: प्राचीन इतिहास (भगवान बुद्ध और बौद्ध धर्म), यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (UNESCO World Heritage Site), सारनाथ के प्रमुख स्मारक।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 1): भारतीय संस्कृति, प्राचीन कला एवं वास्तुकला; बौद्ध धर्म की शिक्षाएं और भारत के वैश्विक सांस्कृतिक संबंध (Cultural Diplomacy)।
चर्चा में क्यों?
उत्तर प्रदेश के प्राचीन बौद्ध स्थल सारनाथ को आधिकारिक तौर पर यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची (UNESCO World Heritage List) में शामिल कर लिया गया। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए इसे भारत की सभ्यतागत और आध्यात्मिक विरासत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताया। यह मान्यता भारत में बौद्ध पर्यटन (Buddhist Circuit) को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने और भगवान बुद्ध के ज्ञान, करुणा व शांति के संदेशों को दुनिया भर में फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
मुख्य बिंदु: सारनाथ का ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और स्थापत्य महत्व
1. धार्मिक एवं ऐतिहासिक प्रासंगिकता
- धम्मचक्कप्पवत्तन (धर्मचक्रप्रवर्तन): ज्ञान प्राप्ति के बाद भगवान बुद्ध ने सारनाथ के मृगदाव (हिरण पार्क) में अपने पहले पांच शिष्यों को पहला उपदेश दिया था।
- बौद्ध संघ की स्थापना: यहीं से बौद्ध संघ की नींव पड़ी और बौद्ध धर्म के प्रसार की शुरुआत हुई।
- चतुराशीति बौद्ध स्थल: बौद्ध परंपरा में चार प्रमुख तीर्थ स्थलों (लुंबिनी, बोधगया, सारनाथ, कुशीनगर) में से सारनाथ का स्थान अत्यंत पवित्र है।
2. मुख्य स्मारक एवं वास्तुकला
- धमेख स्तूप: यह वह सटीक स्थान माना जाता है जहां बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था।
- चौखंडी स्तूप: यह स्तूप उस स्थान का प्रतीक है जहां बुद्ध की अपने प्रथम शिष्यों से भेंट हुई थी। (इस पर बाद में हुमायूं के आगमन की याद में एक अष्टकोणीय टॉवर बनाया गया था)।
- अशोक स्तंभ: सम्राट अशोक द्वारा निर्मित इस स्तंभ के शीर्ष पर बना ‘सिंह चतुर्मुख’ (Lion Capital) भारत का राष्ट्रीय प्रतीक है।
- मूलगंध कुटी विहार: प्राचीन काल में भगवान बुद्ध के ध्यान का स्थान।
3. वैश्विक और आर्थिक प्रभाव
- सांस्कृतिक कूटनीति: दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों (थाईलैंड, श्रीलंका, जापान, वियतनाम) के साथ भारत के संबंधों को मजबूती।
- पर्यटन एवं बुनियादी ढांचा: विश्व धरोहर का दर्जा मिलने से अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन मिलेगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| स्थल का नाम | सारनाथ (वाराणसी के पास, उत्तर प्रदेश)। |
| ऐतिहासिक घटना | धर्मचक्रप्रवर्तन (बुद्ध का प्रथम उपदेश)। |
| अंतरराष्ट्रीय दर्जा | यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (25 जुलाई 2026)। |
| प्रमुख संरचनाएं | धमेख स्तूप, चौखंडी स्तूप, मूलगंध कुटी विहार, अशोक स्तंभ। |
| राष्ट्रीय प्रतीक | सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ का सिंह शीर्ष (Lion Capital)। |
| प्राचीन नाम | ऋषिपतन या मृगदाव। |
अमेरिका का सेक्शन 301 टैरिफ: भारत को 10% के निचले टैरिफ ब्रैकेट में मिली जगह
- प्रारंभिक परीक्षा: अमेरिकी व्यापार अधिनियम 1974 का सेक्शन 301, सेक्शन 232, USTR, भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार संबंध।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): विकसित और विकासशील देशों की नीतियां और भारत के हितों पर उनका प्रभाव; अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और टैरिफ बाधाएं; भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते।
चर्चा में क्यों?
यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने अमेरिकी ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 301 के तहत अंतिम उपायों की घोषणा की। यह कार्रवाई बंधुआ श्रम से निर्मित वस्तुओं के आयात पर रोक से जुड़े नियमों की जांच के बाद की गई है। USTR ने इस जांच में भारत सहित 60 अर्थव्यवस्थाओं को शामिल किया था। भारत सरकार के कूटनीतिक प्रयासों के कारण प्रस्तावित 12.5% शुल्क को घटाकर अंतिम रूप से 10% अतिरिक्त शुल्क कर दिया गया है। इससे भारत को अन्य प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में निचले टैरिफ ब्रैकेट में जगह मिली है।
मुख्य बिंदु: टैरिफ छूट, निर्यात प्रभाव और रणनीतिक कूटनीति
1. धारा 301 शुल्क में राहत
- शुल्क दर में कटौती: 2 जून 2026 को USTR ने 12.5% का प्रारंभिक शुल्क प्रस्तावित किया था। भारत की सशक्त आपत्तियों और वार्ताओं के बाद इसे घटाकर 10% कर दिया गया।
- निचला टैरिफ ब्रैकेट: भारत को सबसे कम अतिरिक्त टैरिफ वाले देशों की श्रेणी में रखा गया है। इससे अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी बढ़त मिलेगी।
2. निर्यात पर प्रभाव और छूट
- 45% निर्यात सुरक्षित: भारत के लगभग 45% अमेरिकी निर्यात पर यह 10% अतिरिक्त टैरिफ लागू नहीं होगा।
- फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स मुक्त: जेनेरिक दवाएं, स्मार्टफोन और कुछ अन्य उत्पाद पूरी तरह इस शुल्क से बाहर हैं।
- धारा 232 वाले उत्पाद पृथक: स्टील, एल्युमिनियम और ऑटो पार्ट्स जैसे जिन उत्पादों पर ‘सेक्शन 232’ के तहत पहले से शुल्क लागू हैं, उन पर यह नया 10% शुल्क नहीं लगेगा।
- 55% निर्यात प्रभावित: शेष 55% भारतीय निर्यात पर 10% का अतिरिक्त शुल्क लगेगा। हालांकि, यह अन्य देशों पर लगे शुल्क की तुलना में काफी कम है।
3. वस्त्र क्षेत्र और भावी द्विपक्षीय व्यापार
- टेक्सटाइल मैकेनिज्म: अंतिम रिपोर्ट में उल्लिखित वस्त्र-विशिष्ट तंत्र (Textile-specific mechanism) को अभी लागू किया जाना बाकी है।
- भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता: 2 फरवरी 2026 को घोषित द्विपक्षीय व्यापार समझौते के तहत भारत इन मुद्दों पर अमेरिका से लगातार बातचीत कर रहा है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| अमेरिकी अधिनियम | यू.एस. ट्रेड एक्ट, 1974 (सेक्शन 301 एवं सेक्शन 232)। |
| जांच का आधार | जबरन श्रम/बंधुआ श्रम (Forced Labour) से बनी वस्तुओं का आयात। |
| अंतिम टैरिफ दर | भारत पर 10% अतिरिक्त शुल्क (प्रारंभिक प्रस्ताव: 12.5%)। |
| छूट प्राप्त निर्यात | भारत के 45% निर्यात (जेनेरिक दवाएं, स्मार्टफोन, स्टील, ऑटो पार्ट्स) मुक्त। |
| प्रभावित निर्यात | भारत के 55% निर्यात पर 10% अतिरिक्त शुल्क लागू। |
| जारी वार्ताएं | भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता (Bilateral Trade Agreement)। |
संविधान संशोधन अधिनियम (2014-2026): पिछले 12 वर्षों के 8 प्रमुख संशोधन
- प्रारंभिक परीक्षा: भारतीय राजव्यवस्था, संविधान संशोधन अधिनियम (99वां से 106वां)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): भारतीय संविधान- संशोधन, महत्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी ढांचा; न्यायिक समीक्षा; संघवाद; सामाजिक न्याय और आरक्षण।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में जानकारी दी कि पिछले 12 वर्षों (2014 से 2026) के दौरान भारतीय संविधान में कुल 8 संशोधन अधिनियम पारित किए गए हैं। ये संशोधन न्यायपालिका, कराधान, क्षेत्रीय सीमाओं, सामाजिक आरक्षण और महिला सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़े हैं।
मुख्य बिंदु: पिछले 12 वर्षों में पारित 8 संविधान संशोधन
1. 99वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2014 (NJAC)
- विषय: सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) का गठन।
- उद्देश्य: कोलिजियम प्रणाली को बदलना।
- विशेष टिप्पणी: इसे सर्वोच्च न्यायालय ने 2015 में असंवैधानिक घोषित कर रद्द कर दिया था।
2. 100वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2015 (भारत-बांग्लादेश भू-सीमा)
- विषय: भारत और बांग्लादेश के बीच ऐतिहासिक भू-सीमा समझौते (LBA) को लागू करना।
- प्रावधान: दोनों देशों के बीच अंतःक्षेत्रों (Enclaves) का आदान-प्रदान और सीमा का सीमांकन।
3. 101वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 (GST)
- विषय: वस्तु एवं सेवा कर (GST) की शुरुआत।
- प्रावधान: अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में सुधार। संविधान में अनुच्छेद 246A, 269A और 279A (GST परिषद) जोड़े गए।
4. 102वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2018 (NCBC)
- विषय: राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) को संवैधानिक दर्जा देना।
- प्रावधान: संविधान में अनुच्छेद 338B और 342A जोड़े गए।
5. 103वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2019 (EWS आरक्षण)
- विषय: आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) के लिए 10% आरक्षण।
- प्रावधान: सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश हेतु अनुच्छेद 15(6) और 16(6) जोड़े गए।
6. 104वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2019 (SC/ST आरक्षण विस्तार)
- विषय: लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में SC/ST सीटों के आरक्षण को 10 वर्षों (25 जनवरी 2030 तक) के लिए बढ़ाना।
- अन्य प्रावधान: आंग्ल-भारतीय समुदाय के मनोनीत करने के प्रावधान को समाप्त कर दिया गया।
7. 105वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2021 (OBC सूची अधिकार)
- विषय: सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों (SEBCs) की पहचान करने की राज्य सरकारों की शक्ति को बहाल करना।
- प्रावधान: मराठा आरक्षण फैसले के बाद अनुच्छेद 342A, 338B और 366 में संशोधन किया गया।
8. 106वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2023 (नारी शक्ति वंदन अधिनियम)
- विषय: लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करना।
- लागू होने की शर्त: यह आरक्षण परिसीमन (Delimitation) और जनगणना प्रक्रिया पूरी होने के बाद लागू होगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| संशोधन अधिनियम | वर्ष | मुख्य विषय-वस्तु | संबंधित प्रमुख अनुच्छेद |
| 99वां | 2014 | NJAC गठन (सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द) | Art 124A, 124B, 124C |
| 100वां | 2015 | भारत-बांग्लादेश भू-सीमा समझौता | प्रथम अनुसूची (First Schedule) |
| 101वां | 2016 | जीएसटी (GST) लागू | Art 246A, 269A, 279A |
| 102वां | 2018 | NCBC को संवैधानिक दर्जा | Art 338B, 342A |
| 103वां | 2019 | EWS हेतु 10% आरक्षण | Art 15(6), 16(6) |
| 104वां | 2019 | SC/ST आरक्षण 2030 तक बढ़ा, एंग्लो-इंडियन खत्म | Art 334 |
| 105वां | 2021 | राज्यों की OBC सूची बनाने की शक्ति बहाल | Art 342A, 366(26C) |
| 106वां | 2023 | महिलाओं को लोकसभा/विधानसभा में 33% आरक्षण | Art 330A, 332A, |
वाणिज्य मंत्रालय द्वारा आंध्र प्रदेश में FCV तंबाकू बाजार की समीक्षा
- प्रारंभिक परीक्षा: तंबाकू बोर्ड, फ़्लू-क्योर्ड वर्जीनिया (FCV) तंबाकू, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, ई-ऑक्शन प्लेटफॉर्म।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): कृषि उत्पादों का विपणन और मूल्य स्थिरता; वैधानिक निकायों की भूमिका; कृषि क्षेत्र में किसानों के हितों का संरक्षण और राज्य-केंद्र समन्वय।
चर्चा में क्यों?
भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल (अपर सचिव श्री नितिन कुमार यादव के नेतृत्व में) ने आंध्र प्रदेश का दौरा कर फ़्लू-क्योर्ड वर्जीनिया (FCV) तंबाकू की बाजार स्थितियों की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान केंद्रीय टीम ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडू, तंबाकू बोर्ड के अध्यक्ष और कार्यकारी निदेशक के साथ बैठक की। इस समीक्षा का मुख्य उद्देश्य FCV तंबाकू उत्पादक किसानों के हितों की रक्षा करना, नीलामी प्रक्रिया की पारदर्शिता जांचना और बाजार में मूल्य स्थिरता बनाए रखने के लिए दीर्घकालिक उपाय खोजना है।
मुख्य बिंदु: FCV तंबाकू बाजार समीक्षा और प्रशासनिक कदम
1. वेल्लामपल्ली ऑक्शन प्लेटफॉर्म का दौरा
- प्रत्यक्ष समीक्षा: प्रतिनिधिमंडल ने प्रकाशम/वेल्लामपल्ली स्थित तंबाकू बोर्ड के नीलामी मंच का दौरा कर जारी ई-ऑक्शन प्रक्रिया का निरीक्षण किया।
- पारदर्शिता का आकलन: वाणिज्य मंत्रालय ने तंबाकू बोर्ड द्वारा संचालित इलेक्ट्रॉनिक नीलामी प्रणाली (e-auction platform) के पारदर्शी और व्यवस्थित संचालन की सराहना की।
- किसान सहभागिता: केंद्रीय अधिकारियों ने स्थानीय FCV तंबाकू किसानों से बातचीत कर सीधे बाजार की मौजूदा चुनौतियों और कीमतों का फीडबैक लिया।
2. केंद्र और राज्य सरकार का साझा रुख
- मूल्य स्थिरता और निगरानी: भारत सरकार ने किसानों को आश्वासन दिया कि FCV तंबाकू बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव पर लगातार नजर रखी जा रही है।
- हितधारक समन्वय: वाणिज्य मंत्रालय, आंध्र प्रदेश सरकार और तंबाकू बोर्ड मिलकर तंबाकू किसानों के लिए बाजार सुरक्षा उपाय तैयार कर रहे हैं।
FCV तंबाकू क्या है और इसका क्या महत्व है?
- प्रसंस्करण की तकनीक: FCV (Flue-Cured Virginia) तंबाकू को खुले सूरज या आग की सीधी आंच में सुखाने के बजाय ‘फ़्लू’ (पाइपों) से आने वाली बाहरी ऊष्मा (External Heat) द्वारा सुखाया जाता है। इससे पत्तियों का रंग चमकीला पीला या नारंगी हो जाता है।
- निर्यात में योगदान: भारत से निर्यात होने वाली तंबाकू की कुल मात्रा में FCV तंबाकू की हिस्सेदारी सबसे प्रमुख है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / पहलू | महत्वपूर्ण तथ्य |
| तंबाकू बोर्ड (Tobacco Board) | वैधानिक निकाय (तंबाकू बोर्ड अधिनियम, 1975 के तहत 1976 में स्थापित)। |
| नोडल मंत्रालय | वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce and Industry)। |
| मुख्यालय | गुंटूर, आंध्र प्रदेश। |
| FCV तंबाकू में वैश्विक रैंक | भारत FCV तंबाकू का दुनिया में 4वां सबसे बड़ा उत्पादक (चीन, ब्राजील और जिम्बाब्वे के बाद)। |
| असंस्कृत तंबाकू निर्यात | भारत मात्रा के आधार पर दुनिया का 2रा सबसे बड़ा निर्यातक (ब्राजील के बाद)। |
| भारत में मुख्य उत्पादक राज्य | आंध्र प्रदेश (सबसे बड़ा FCV उत्पादक, 45%+ हिस्सेदारी) और कर्नाटक। |
सक्रिय रूप से बनते ‘ब्लू स्ट्रैग्लर स्टार’ की खोज
- प्रारंभिक परीक्षा: सामान्य विज्ञान (भौतिकी और अंतरिक्ष विज्ञान) — ब्लू स्ट्रैग्लर स्टार्स (BSS), बाइनरी स्टार सिस्टम, TESS मिशन, रोश लोब।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी — अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारतीय वैज्ञानिकों की उपलब्धियां, अनुसंधान और विकास।
चर्चा में क्यों?
भारतीय और अंतरराष्ट्रीय खगोलशास्त्रियों की एक टीम ने एक दुर्लभ ब्लू स्ट्रैग्लर स्टार (BSS) की खोज की।यह तारा अभी अपने साथी तारे से पदार्थ (mass) खींचकर सक्रिय रूप से बन रहा है। भारतीय खगोलभौतिकी संस्थान (IIA) और गौहाटी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा की गई यह खोज तारों के पुनरुत्जीवन (stellar rejuvenation) की प्रक्रिया का पहला सीधा अवलोकन प्रमाण प्रदान करती है।
मुख्य बिंदु: खोज का विवरण, प्रक्रिया और वैज्ञानिक महत्व
1. क्या होते हैं ‘ब्लू स्ट्रैग्लर स्टार्स’ (BSS)?
- असामान्य प्रकृति: ये पुराने स्टार क्लस्टर्स में पाए जाने वाले ऐसे तारे हैं जो अपने आसपास के बाकी तारों की तुलना में अधिक गर्म, नीले, भारी और ज्यादा चमकीले दिखते हैं।
- उम्र का रहस्य: तारों के सामान्य विकास नियम के अनुसार पुराने क्लस्टर के तारों को ठंडा और लाल होना चाहिए। हालांकि, ये तारे पड़ोसी तारे से द्रव्यमान (mass) छीनकर या आपस में विलय (merger) होकर फिर से युवा हो जाते हैं।
2. बाइनरी सिस्टम ‘TIC 327546480’ का अध्ययन
- स्थान: यह प्रणाली पृथ्वी से करीब 9,500 प्रकाश वर्ष दूर खुले तारा गुच्छ कोलेंडर 261 में स्थित है। यह क्लस्टर लगभग 7 अरब वर्ष पुराना है।
- द्रव्यमान का हस्तांतरण: यह एक अर्ध-पृथक बाइनरी सिस्टम (semidetached binary system) है। इसमें एक साथी तारा अपनी गुरुत्वाकर्षण सीमा (रोश लोब) से बाहर फैल चुका है, जिससे उसका पदार्थ BSS की ओर बह रहा है।
- X-Ray प्रमाण: इस सिस्टम से तीव्र एक्स-रे उत्सर्जन दर्ज किया गया है। यह साबित करता है कि BSS द्वारा साथी तारे का पदार्थ लगातार सोखा (accretion) जा रहा है।

3. प्रमुख तकनीकी आंकड़े और अवलोकन साधन
- नासा का TESS मिशन: नासा के ‘ट्रांजिटिंग एक्सोप्लैनेट सर्वे सैटेलाइट’ (TESS) के लाइट कर्व्स का उपयोग किया गया।
- ESO का VLT टेलीस्कोप: चिली में स्थित यूरोपियन साउदर्न ऑब्जर्वेटरी के ‘वेरी लार्ज टेलीस्कोप’ (VLT) से रेडियल वेलोसिटी मापी गई।
- वैज्ञानिक माप एवं आंकड़े:
- BSS का द्रव्यमान: सूर्य के द्रव्यमान से 1.67 गुना।
- साथी तारे का द्रव्यमान: सूर्य के द्रव्यमान का 0.32 गुना।
- घूर्णन गति: BSS 69.55 किमी/सेकंड की तेज गति से घूम रहा है।
- परिक्रमण काल (Orbital Period): 2.11 दिन।
- समय सीमा: द्रव्यमान हस्तांतरण की यह प्रक्रिया लगभग 5.46 अरब वर्ष पहले शुरू हुई थी और आज भी जारी है।
- प्रकाशन: यह शोध ‘द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स’ में प्रकाशित हुआ है। इसके मुख्य लेखक गौहाटी विश्वविद्यालय के पीएचडी छात्र और डीएसटी-इंसपायर फेलो अली हसन शेख हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| खोजकर्ता संस्थान | IIA (भारतीय खगोलभौतिकी संस्थान), गौहाटी विश्वविद्यालय, IUCAA आदि। |
| ब्लू स्ट्रैग्लर स्टार (BSS) | स्टार क्लस्टर के ऐसे तारे जो अपने साथियों की तुलना में अधिक गर्म, नीले और भारी होते हैं। |
| तारा प्रणाली का नाम | TIC 327546480 (कोलेंडर 261 क्लस्टर में स्थित)। |
| रोश लोब (Roche Lobe) | बाइनरी सिस्टम में किसी तारे के चारों ओर का वह गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र जिसके बाहर जाने पर पदार्थ दूसरे तारे की ओर खिंच जाता है। |
| प्रयुक्त प्रमुख उपकरण | TESS (नासा) और VLT (चिली स्थित ESO टेलीस्कोप)। |
| नोडल कार्यक्रम | DST का INSPIRE फेलोशिप कार्यक्रम। |
म्यूजियम ग्रांट स्कीम : सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण
- प्रारंभिक परीक्षा: भारतीय संस्कृति – संग्रहालय, प्राचीन पांडुलिपियां, सिक्के और विरासत संरक्षण योजनाएं।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 1): भारतीय संस्कृति के मुख्य पहलू, प्राचीन से आधुनिक काल तक के कला रूप, साहित्य और वास्तुकला; सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण।
चर्चा में क्यों?
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लोकसभा में म्यूजियम ग्रांट स्कीम के कार्यान्वयन और वित्तीय सहायता का विवरण साझा किया। यह योजना देश भर में नए संग्रहालयों की स्थापना, मौजूदा संग्रहालयों के आधुनिकीकरण, संग्रह के डिजिटलीकरण और वर्चुअल म्यूजियम के विकास के लिए केंद्र सरकार की प्रमुख पहल है।
मुख्य बिंदु: संग्रहालय अनुदान योजना का ढांचा और सहायता
1. योजना का उद्देश्य और पात्रता
- किन्हें वित्तीय सहायता: केंद्र/राज्य सरकारों, सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs), स्वायत्त निकायों, स्थानीय निकायों, विश्वविद्यालयों और पंजीकृत ट्रस्टों/सोसाइटियों द्वारा संचालित संग्रहालय।
- श्रेणीकरण (Classification):
- श्रेणी I: राज्य की राजधानियों में स्थित प्रसिद्ध केंद्र/राज्य सरकार या PSU के संग्रहालय (शर्त: पिछले 2 वर्षों में न्यूनतम 1 लाख वार्षिक दर्शक)।
- श्रेणी II: अन्य सभी केंद्र या राज्य सरकार और PSU के संग्रहालय।
- श्रेणी III: गैर-सरकारी सोसाइटियों, स्वायत्त निकायों, शैक्षणिक संस्थानों और ट्रस्टों द्वारा संचालित संग्रहालय (शर्त: न्यूनतम 3 वर्ष से संचालित, स्वयं की भूमि और गैर-लाभकारी स्वरूप)।
2. वित्तीय सहायता का पैटर्न
घटक (A): नए संग्रहालयों की स्थापना और सुदृढ़ीकरण
- श्रेणी I (राजधानी स्थित बड़े सरकारी संग्रहालय): अधिकतम ₹15 करोड़ तक अनुदान।
- श्रेणी II (अन्य सरकारी संग्रहालय): नए संग्रहालय हेतु अधिकतम ₹10 करोड़ और मौजूदा संग्रहालय के विकास हेतु ₹8 करोड़।
- श्रेणी III (सोसाइटियां/ट्रस्ट/अन्य): नए संग्रहालय हेतु अधिकतम ₹5 करोड़ और विकास हेतु ₹4 करोड़।
घटक (B) एवं (C): डिजिटलीकरण और व्यावसायिक प्रशिक्षण
- श्रेणी I: संग्रह के डिजिटलीकरण और प्रशिक्षण हेतु अधिकतम ₹50 लाख।
- श्रेणी II एवं III: अधिकतम ₹25 लाख तक वित्तीय सहायता।
3. अन्य प्रमुख विशेषताएं और पर्यटन प्रोत्साहन
- विशेष प्रोजेक्ट्स: संस्कृति मंत्रालय किसी भी श्रेणी I व II के प्रोजेक्ट को ‘राष्ट्रीय महत्व का प्रोजेक्ट’ घोषित कर संपूर्ण विकास कर सकता है।
- कवर किए गए विषय: प्राचीन सिक्के, वस्त्र, लोक कला, ऑनलाइन वर्चुअल संग्रहालय और अनुभवजन्य संग्रहालय (Virtual Experiential Museums)।
- पर्यटन संवर्धन: पर्यटन मंत्रालय अंतरराष्ट्रीय मंचों और सोशल मीडिया कैंपेन के जरिए इन संग्रहालयों को ग्लोबल टूरिज्म मैप पर प्रमोट करता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / पहलू | महत्वपूर्ण तथ्य |
| नोडल मंत्रालय | संस्कृति मंत्रालय (Ministry of Culture), भारत सरकार। |
| योजना की प्रकृति | केंद्रीय क्षेत्र की सहायता योजना (Financial Assistance Scheme)। |
| श्रेणी I की मुख्य शर्त | राज्य की राजधानी में स्थिति और वार्षिक 1 लाख+ दर्शक का ट्रैक रिकॉर्ड। |
| श्रेणी III की मुख्य शर्त | न्यूनतम 3 साल का अनुभव, स्वयं की भूमि और संस्था का गैर-लाभकारी (Non-profit) होना। |
| अधिकतम अनुदान | श्रेणी I के नए/विकासशील संग्रहालयों के लिए ₹15 करोड़। |
| डिजिटलीकरण बजट | सरकारी संग्रहालयों के लिए ₹50 लाख, अन्य के लिए ₹25 लाख। |
कोसी-मेची अंतःराज्यीय लिंक परियोजना: बिहार सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय नदियां, अंतःराज्यीय नदी जोड़ो परियोजनाएं (ILR), PMKSY-AIBP, भारत-नेपाल जल संबंध।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 1 & 3): भारत का भूगोल — जल संसाधन; आपदा प्रबंधन (बाढ़ नियंत्रण); बुनियादी ढांचा (सिंचाई प्रणाली); भारत-नेपाल द्विपक्षीय जल संबंध।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री ने राज्यसभा में कोसी-मेची अंतःराज्यीय लिंक परियोजना की प्रगति और वित्तीय स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना – त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (PMKSY-AIBP) के तहत शामिल किया गया है, जिसके बचे हुए कार्यों के लिए ₹6,143.22 करोड़ की स्वीकृत लागत में से केंद्र सरकार ₹3,652.56 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। मार्च 2029 तक पूरा होने के लक्ष्य के साथ, इसके तहत पूर्वी कोसी मुख्य नहर का सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। इसका प्राथमिक उद्देश्य उत्तर-पूर्वी बिहार (सीमांचल) में वृहद सिंचाई क्षमता विकसित करना और कोसी के अतिरिक्त जल को मेची नदी में मोड़कर क्षेत्र में बाढ़ के खतरे को कम करना है।
मुख्य बिंदु: वित्तीय आवंटन, प्रगति और भारत-नेपाल जल सहयोग
1. कोसी-मेची परियोजना और PMKSY-AIBP
- लागत एवं केंद्रीय सहायता: शेष बचे कार्यों की कुल लागत ₹6,143.22 करोड़ है। इसमें केंद्र सरकार ₹3,652.56 करोड़ की सहायता देगी।
- लक्ष्य वर्ष: परियोजना को मार्च 2029 तक पूरा करने की समयसीमा तय की गई है।
- पूर्वी कोसी मुख्य नहर का पुनर्निर्माण: 0.00 से 41.30 किमी तक की नहर के चौड़ीकरण/सुदृढ़ीकरण का काम ₹2,639.80 करोड़ के अनुबंध मूल्य पर शुरू किया गया है। अब तक 8.5% भौतिक प्रगति हासिल हुई है।
- लाभ: उत्तर-पूर्वी बिहार (विशेषकर सीमांचल क्षेत्र) में सिंचाई क्षमता का विस्तार होगा। इसके साथ ही कोसी नदी के अतिरिक्त पानी को मेची नदी में मोड़कर बाढ़ की विभीषिका कम की जाएगी।
2. भारत-नेपाल द्विपक्षीय जल वार्ता
- संयुक्त परियोजना कार्यालय (JPO-SKSKI): वर्ष 2003 में गठित इस कार्यालय का उद्देश्य डीपीआर (DPR) तैयार करना है।
- सप्त-कोसी बहुउद्देश्यीय परियोजना: टोपोग्राफिकल, जल गुणवत्ता, जल विज्ञान, भूकंपीय (Seismological) और ग्लेशियर झील विस्फोट बाढ़ (GLOF) अध्ययनों के साथ ड्रिंलिंग का काम पूरा हो गया है।
- सुन-कोसी कमला व्यपवर्तन (Diversion) परियोजना: इसके लिए भी GLOF, हाइड्रोलॉजिकल और सीस्मोलॉजिकल सर्वे पूरे किए जा चुके हैं।
- समीक्षा बैठक: वर्ष 2025-26 के दौरान इंडो-नेपाल संयुक्त समिति की कोई बैठक आयोजित नहीं हुई।
3. अन्य महत्वपूर्ण बिंदु
- बाढ़ प्रबंधन कोष: पिछले तीन वर्षों के दौरान सीमावर्ती क्षेत्रों और बाढ़ प्रबंधन कार्यक्रम के तहत बिहार को ₹206.77 करोड़ की केंद्रीय राशि जारी की गई है।
- बेसिन अथॉरिटी पर स्पष्टीकरण: केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि एक स्थायी ‘कोसी-गंडक बेसिन अथॉरिटी’ बनाने का कोई प्रस्ताव फिलहाल विचारधीन नहीं है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / पहलू | महत्वपूर्ण तथ्य |
| परियोजना का नाम | कोसी-मेची अंतःराज्यीय लिंक परियोजना (बिहार की पहली/देश की दूसरी बड़ी नदी जोड़ो परियोजना)। |
| शामिल योजना | PMKSY-AIBP (त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम)। |
| केंद्रीय सहायता | ₹3,652.56 करोड़ (कुल शेष लागत ₹6,143.22 करोड़)। |
| पूर्ण होने की समयसीमा | मार्च 2029। |
| मुख्य नदियां | कोसी (सप्तकोसी की मुख्य धारा) और मेची (महानंदा की सहायक नदी)। |
| नेपाल से जुड़ी परियोजनाएं | सप्त-कोसी और सुन-कोसी कमला बहुउद्देश्यीय परियोजनाएं (JPO-SKSKI, 2003 द्वारा DPR तैयार)। |
संत गजानन महाराज का 150वां प्रकट दिन: राष्ट्रीय मान्यता की मांग
- प्रारंभिक परीक्षा: भारतीय विरासत एवं संस्कृति (भक्ति आंदोलन, संत, प्रमुख धार्मिक ग्रंथ और ऐतिहासिक स्मारक)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 1): भारतीय संस्कृति के मुख्य पहलू, प्राचीन से आधुनिक काल तक के कला रूप, साहित्य और वास्तुकला; आधुनिक भारत का इतिहास (19वीं सदी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन)।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने भारत सरकार से श्री संत गजानन महाराज के 150वें प्रकट दिन के ऐतिहासिक अवसर पर एक ₹150 का स्मारक सिक्का (Commemorative Coin) और विशेष डाक टिकट (Postage Stamp) जारी करने का आग्रह किया है। मंत्री ने इसके लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को पत्र लिखकर राष्ट्रीय स्तर पर इस विरासत को सम्मानित करने का अनुरोध किया।
मुख्य बिंदु: मांग का कारण, संत की विरासत और संस्थागत योगदान
1. 150वां प्रकट दिन और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
- प्रकट दिन उत्सव: संत गजानन महाराज का 150वां प्रकट दिन 17 फरवरी 2028 को मनाया जाएगा।
- शेगांव में प्रथम उपस्थिति: संत गजानन महाराज पहली बार फरवरी 1878 में महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के शेगांव में एक युवा साधु/अवधूत के रूप में प्रकट हुए थे।
- आध्यात्मिक महत्व: तब से शेगांव भारत के सबसे प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक के रूप में उभरा है। संत गजानन महाराज को कई श्रद्धालु भगवान गणेश और दत्तात्रेय का अवतार मानते हैं।
2. संत गजानन महाराज की शिक्षाएं और साहित्य
- मूल संदेश: उनकी जीवन शैली और शिक्षाएं निष्काम सेवा, दया, भक्ति और मानव कल्याण पर केंद्रित थीं।
- श्री गजानन विजय ग्रंथ: संत महाराज के जीवन और चमत्कारों का विस्तृत वर्णन धार्मिक ग्रंथ ‘श्री गजानन विजय’ में दर्ज है, जिसे दास गनू महाराज ने लिखा था। यह पुस्तक उनके अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र मानी जाती है।
3. ‘श्री गजानन महाराज संस्थान’ का सामाजिक योगदान
- सामुदायिक सेवा: शेगांव स्थित ‘श्री गजानन महाराज संस्थान’ केवल एक धार्मिक ट्रस्ट नहीं है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, ग्रामीण विकास और सामाजिक कल्याण में भी अग्रणी भूमिका निभाता है।
- संस्थान की स्थापना: इस संस्थान की नींव स्वयं संत गजानन महाराज की उपस्थिति में 12 सितंबर 1908 को 12 ट्रस्टियों के साथ रखी गई थी।
- राष्ट्रपति की यात्रा: फरवरी 2026 में भारत के राष्ट्रपति ने आयुष मंत्रालय के तहत आयोजित ‘राष्ट्रीय आरोग्य मेले’ का उद्घाटन करने के लिए शेगांव का दौरा किया था, जिसने इस स्थान की सांस्कृतिक और सार्वजनिक सेवा प्रासंगिकता को रेखांकित किया।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / पहलू | महत्वपूर्ण तथ्य |
| प्रस्तावित पहल | ₹150 का स्मारक सिक्का और स्मारक डाक टिकट। |
| प्रकट दिन की तिथि | 17 फरवरी 2028 (150वां प्रकट दिवस)। |
| मुख्य कर्मभूमि/स्थल | शेगांव (बुलढाणा जिला, महाराष्ट्र)। |
| पवित्र ग्रंथ | ‘श्री गजानन विजय’ (रचयिता: दास गनू महाराज)। |
| संबंधित ट्रस्ट | श्री संत गजानन महाराज संस्थान, शेगांव (स्थापना: 1908)। |
| ऐतिहासिक संदर्भ | लोकमान्य तिलक ने भी शिव जयंती के अवसर पर संत गजानन महाराज से आशीर्वाद लिया था। |
भारत के एनडीसी लक्ष्य: पेरिस समझौते के तहत नवीनतम प्रगति
- प्रारंभिक परीक्षा: पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी – जलवायु परिवर्तन, पेरिस समझौता, एनडीसी (NDCs), एनएपीसीसी।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन; सतत विकास; आपदा प्रबंधन।
चर्चा में क्यों?
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री श्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) लक्ष्यों की प्रगति पर लिखित उत्तर दिया। संसद में प्रस्तुत इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने समय से पहले कई महत्वपूर्ण जलवायु लक्ष्य हासिल कर लिए हैं। साथ ही वर्ष 2035 के लिए अपने लक्ष्यों को और अधिक बढ़ा दिया है।
मुख्य बिंदु: भारत के एनडीसी लक्ष्य और अद्यतन स्थिति
1. भारत के तीन मात्रात्मक एनडीसी लक्ष्य: 2022-2026 की प्रगति
भारत के एनडीसी में तीन मुख्य मात्रात्मक लक्ष्य शामिल हैं। इनकी वर्तमान स्थिति नीचे दी गई है:
- उत्सर्जन तीव्रता (Emissions Intensity): 2005 के स्तर की तुलना में जीडीपी की उत्सर्जन तीव्रता को 2030 तक 45% कम करना है। भारत ने 2022 तक ही 37.38% की कमी हासिल कर ली है।
- गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता: 2030 तक कुल स्थापित बिजली क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन का हिस्सा 50% करना था। भारत ने इसे जून 2025 में ही पार कर लिया (निर्धारित समय से 5 साल पहले)। 30 जून 2026 तक यह आंकड़ा 54.18% पर पहुंच गया है।
- कार्बन सिंक: अतिरिक्त वन और वृक्ष आवरण के माध्यम से 2030 तक 2.5 से 3.0 बिलियन टन $CO_2$ के बराबर अतिरिक्त कार्बन सिंक बनाना है। भारत ने 2005 से 2022 के दौरान 2.44 बिलियन टन CO_2 के बराबर कार्बन सिंक तैयार कर लिया है।
2. वर्ष 2035 के लिए संवर्धित नए एनडीसी लक्ष्य
भारत ने वर्ष 2035 के लिए अपने जलवायु लक्ष्यों को अधिक महत्वाकांक्षी बनाया है:
- जीडीपी उत्सर्जन तीव्रता: 2005 के स्तर से 47% की कमी।
- गैर-जीवाश्म विद्युत क्षमता: कुल स्थापित क्षमता का 60% हिस्सा।
- अतिरिक्त कार्बन सिंक: वन आवरण से 3.5 से 4.0 बिलियन टन CO_2 तुल्यांक कार्बन सिंक का निर्माण।
गुणात्मक लक्ष्य (Qualitative Targets): भारत के एनडीसी में ‘विकासशील भारत @2047’ के दृष्टिकोण के अनुरूप सतत जीवन शैली (LiFE) और जलवायु-अनुकूल विकास को बढ़ावा देने वाले 5 गुणात्मक लक्ष्य भी शामिल हैं।
कार्यान्वयन एवं संस्थागत ढांचा
1. जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC)
NAPCC के तहत 9 राष्ट्रीय मिशन संचालित हैं। इनमें से 6 मिशन जलवायु अनुकूलन (Adaptation) पर केंद्रित हैं:
- राष्ट्रीय सौर मिशन
- संवर्धित ऊर्जा दक्षता के लिए राष्ट्रीय मिशन
- सुस्थिर निवास पर राष्ट्रीय मिशन
- राष्ट्रीय जल मिशन
- हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय मिशन
- ‘हरित भारत’ के लिए राष्ट्रीय मिशन
- सतत कृषि के लिए राष्ट्रीय मिशन
- जलवायु परिवर्तन के लिए रणनीतिक ज्ञान पर राष्ट्रीय मिशन
- मानव स्वास्थ्य मिशन (हालिया जोड़ा गया नौवां मिशन)
2. प्रमुख फ्लैगशिप योजनाएं
- स्वच्छ ऊर्जा और परिवहन: राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, पीएम-सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना, पीएम-कुसुम, स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के लिए पीएलआई (PLI) योजना और हाइड्रोजन संचालित ट्रेन।
- तटीय सुरक्षा: मैंग्रोव संरक्षण के लिए मिष्टी (MISHTI) योजना, राष्ट्रीय तटीय मिशन और तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) ढांचा।
- राज्यीय प्रयास: राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों ने अपनी स्थानीय प्राथमिकताओं के अनुसार 34 राज्य जलवायु कार्य योजनाएं (SAPCC) तैयार की हैं।
3. निगरानी एवं समीक्षा तंत्र
- घरेलू निकाय: प्रधानमंत्री जलवायु परिवर्तन परिषद (PMCCC), जलवायु परिवर्तन पर कार्यकारी समिति (ECCC) और पेरिस समझौते के कार्यान्वयन के लिए शीर्ष समिति (AIPA)।
- अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्टिंग: पेरिस समझौते के अनुच्छेद 13 के संवर्धित पारदर्शिता ढांचे (ETF) के तहत भारत द्विवार्षिक पारदर्शिता रिपोर्ट (BTR) और राष्ट्रीय संचार (National Communications) जमा करता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / पहलू | महत्वपूर्ण तथ्य |
| नेचुरल कार्बन सिंक प्रगति | 2005-2022 के बीच 2.44 बिलियन टन CO_2 तुल्यांक (2030 का लक्ष्य: 2.5–3.0 बिलियन टन)। |
| गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता | 54.18% (30 जून 2026 तक) — 50% का लक्ष्य जून 2025 में ही हासिल। |
| 2035 का नया लक्ष्य | उत्सर्जन तीव्रता में 47% कमी, गैर-जीवाश्म क्षमता 60%, कार्बन सिंक 3.5-4.0 बिलियन टन। |
| NAPCC मिशनों की संख्या | 9 मिशन (6 मिशन मुख्य रूप से अनुकूलन पर आधारित)। |
| नेट-ज़ीरो लक्ष्य | वर्ष 2070 तक शुद्ध-शून्य (Net-Zero) उत्सर्जन हासिल करने का संकल्प। |
| तटीय योजना | मिष्टी (MISHTI) — Shoreline Habitats & Tangible Incomes के लिए मैंग्रोव पहल। |