30 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत प्रोजेक्ट टाइगर की उपलब्धियों व अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस 2026 के अवसर पर भारत में बाघ संरक्षण के प्रयासों, ग्राम पंचायतों में डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाली ‘दानवीर’ पहल, देश में वामपंथी उग्रवाद (LWE) के प्रभावी उन्मूलन, ग्वालियर में स्थापित भारत के पहले दूरसंचार निर्माण क्षेत्र (TMZ), लद्दाख के हानले में हिमालयन चंद्रा टेलिस्कोप के 25 सफल वर्षों के खगोलीय योगदान, पारदर्शी कोयला बाजार हेतु जारी कोयला विनिमय नियम 2026, तथा स्टार्टअप्स व तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा देने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड (EDF) का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस और भारत में बाघ संरक्षण प्रयास
- प्रारंभिक परीक्षा: पर्यावरण और पारिस्थितिकी (Environment & Ecology), जैव विविधता (Biodiversity) तथा बाघ संरक्षण परियोजनाएं।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन; मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict)।
चर्चा में क्यों?
‘अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस’ (Global Tiger Day) के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों और वन्यजीव प्रेमियों को बधाई दी। उन्होंने भारत के संरक्षण प्रयासों की सराहना करते हुए वैश्विक स्तर पर बाघों की आबादी और भारत की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत दुनिया की लगभग 70% बाघों की आबादी का घर है। उन्होंने विज्ञान आधारित संरक्षण, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने की भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया।
मुख्य बिंदु: वैश्विक बाघ आबादी, संरक्षण रणनीति एवं सामुदायिक भागीदारी
1. वैश्विक बाघ आबादी और भारत की स्थिति
- वैश्विक हिस्सेदारी: भारत वर्तमान में दुनिया की लगभग 70% बाघ आबादी का आवास स्थल है।
- सांस्कृतिक जुड़ाव: भारत का बाघ संरक्षण दृष्टिकोण प्रकृति के साथ सामंजस्य (Harmony with Nature) की सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत पर आधारित है।
2. संरक्षण के तीन मुख्य स्तंभ
- विज्ञान-आधारित संरक्षण (Science-based Conservation): आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक निगरानी पद्धतियों का उपयोग।
- सामुदायिक भागीदारी (Community Participation): स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाना और संरक्षण प्रक्रिया में उनका सहयोग लेना।
- सतत विकास (Sustainable Development): विकास गतिविधियों के साथ पर्यावरण और जैव विविधता का संतुलन।
3. मानव-वन्यजीव संघर्ष एवं हितधारकों की भूमिका
- हितधारकों का योगदान: वन कर्मियों (Forest Personnel), वैज्ञानिकों और संरक्षणवादियों (Conservationists) के समर्पण को इस सफलता का मुख्य आधार बताया गया है।
- संघर्ष में कमी: स्थानीय समुदायों के अधिकारों को सुरक्षित करते हुए मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) को न्यूनतम करने का लक्ष्य।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| पहलू / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| ग्लोबल टाइगर डे तिथि | प्रतिवर्ष 29 जुलाई को मनाया जाता है। |
| वैश्विक बाघ आबादी में भारत का हिस्सा | लगभग 70%। |
| सेंट पीटर्सबर्ग घोषणापत्र (2010) | 2010 के बाघ सम्मेलन में 2022 तक बाघों की संख्या दोगुनी करने (Tx2) का लक्ष्य रखा गया था। |
| प्रोजेक्ट टाइगर (Project Tiger) | 1973 में शुरू किया गया भारत सरकार का प्रमुख संरक्षण कार्यक्रम। |
| नोडल संस्था | राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA – Statutory Body under Wildlife Protection Act, 1972)। |
| अंतर्राष्ट्रीय पहल | भारत ने इंटरनेशनल बिग कैट्स एलायंस (IBCA) की शुरुआत की है। |
दानवीर पहल: ग्राम पंचायतों में डिजिटल अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण
- प्रारंभिक परीक्षा: पंचायती राज, ई-गवर्नेंस, डिजिटल इंडिया और सरकारी पहलें।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): शासन व्यवस्था, पारदर्शी एवं जवाबदेह ई-गवर्नेंस, स्थानीय स्वशासन (पंचायती राज संस्थाएं) और सार्वजनिक सेवा वितरण।
चर्चा में क्यों?
पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने नई दिल्ली में ‘दानवीर’ पहल का शुभारंभ किया। यह एक नागरिक सहभागिता (Citizen Participation) मंच है। इसका मुख्य उद्देश्य देश की ग्राम पंचायतों के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाना है। नागरिक इसके जरिए ‘मेरी पंचायत ऐप’ के माध्यम से स्वेच्छा से कंप्यूटर दान कर सकते हैं।
मुख्य बिंदु: डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, संस्थागत ढांचा एवं नागरिक सहभागिता
1. दानवीर पहल का स्वरूप और नोडल निकाय
- सहयोगी विकास: यह पंचायती राज मंत्रालय की पहल है। इसे राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) और डिगीहाट के सहयोग से विकसित किया गया है।
- प्लेटफॉर्म की टैगलाइन: “गिव बैक टू योर विलेज” टैगलाइन के साथ यह पूरी तरह स्वैच्छिक मॉडल पर आधारित है।
- इंटरफेस: यह सुविधा ‘मेरी पंचायत’ मोबाइल ऐप पर उपलब्ध है।
2. कार्यप्रणाली और पारदर्शिता
- एकीकृत ई-मार्केटप्लेस: ‘मेरी पंचायत’ ऐप को DigiHaat मार्केटप्लेस के साथ जोड़ा गया है।
- पूर्व-स्वीकृत कंप्यूटर बंडल: दाता राज्य-विशिष्ट तकनीकी विशिष्टताओं के अनुसार गुणवत्ता-सत्यापित (Quality-Verified) कंप्यूटर बंडल चुन सकते हैं।
- एंड-टू-एंड ट्रैकिंग: योगदानकर्ता कंप्यूटर के डिस्पैच से लेकर पंचायत में इंस्टॉलेशन तक लाइव ट्रैकिंग कर सकते हैं।
- प्रमाणपत्र जारी करना: योगदान पूरा होने पर दाता को एक डिजिटल प्रशंसा पत्र (Digital Certificate of Appreciation) मिलता है।
3. ग्रामीण ई-गवर्नेंस और प्रवासी जुड़ाव
- स्थानीय शासन सुदृढ़ीकरण: भारत की लगभग 2.5 लाख ग्राम पंचायतों में ई-सेवाओं का दायरा बढ़ाना।
- विद्यमान डिजिटल पारितंत्र का विस्तार: यह मॉडल e-GramSwaraj, Meri Panchayat, Sabha Saar, AuditOnline और Gram Manchitra जैसे मौजूदा पोर्टल्स को मजबूती देता है।
- प्रवासी भारतीय एवं नागरिक जुड़ाव: अपनी जड़ों से दूर रह रहे नागरिकों और एनआरआई (NRI) को अपने पैतृक गाँव के विकास में योगदान का पारदर्शी मंच।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| पहल / प्लेटफॉर्म | नोडल मंत्रालय / संस्था | मुख्य कार्य / तथ्य |
| दानवीर | पंचायती राज मंत्रालय + NIC + DigiHaat | ग्राम पंचायतों को स्वेच्छा से कंप्यूटर दान करने का डिजिटल प्लेटफॉर्म। |
| इंटरफेस ऐप | मेरी पंचायत ऐप | दानवीर सुविधा इसी मोबाइल ऐप के भीतर उपलब्ध है। |
| ई-कॉमर्स पार्टनर | डिगीहाट | मानकों के अनुरूप प्री-अप्रूव्ड कंप्यूटर बंडल खरीदने का प्लेटफॉर्म। |
| मूल दर्शन | “Give Back to Your Village” | ग्रामीण ई-गवर्नेंस में स्वैच्छिक नागरिक भागीदारी और पारदर्शिता। |
| संबंधित डिजिटल टूल | e-GramSwaraj, AuditOnline, Gram Manchitra | पंचायती राज मंत्रालय के अन्य प्रमुख ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म। |
भारत में वामपंथी उग्रवाद (LWE) का उन्मूलन और सुरक्षा स्थिति
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएं, शासन व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े बुनियादी तथ्य।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विकास और फैलते उग्रवाद के बीच संबंध; आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौतियां उत्पन्न करने वाले शासन-विरोधी तत्व; संगठित अपराध और आतंकवाद का संबंध।
चर्चा में क्यों?
गृह मंत्रालय के राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में भारत में वामपंथी उग्रवाद (LWE) की अद्यतन स्थिति पर एक लिखित उत्तर प्रस्तुत किया। लगभग छह दशकों तक देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा रहे वामपंथी उग्रवाद को भारत सरकार और राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों से पूरी तरह नियंत्रित कर लिया गया है। देश के उग्रवाद-प्रभावित जिलों की संख्या घटकर “शून्य” हो गई है। सरकार अब सुरक्षा व्यवस्था की मजबूती और बुनियादी विकास को गति देने पर जोर दे रही है।
मुख्य बिंदु: सुरक्षा रणनीति, बुनियादी ढांचा और पुनर्वास
1. राष्ट्रीय नीति और कार्रवाई योजना 2015 (National Policy and Action Plan)
- समग्र दृष्टिकोण (Whole of Government Approach): 2015 में स्वीकृत इस नीति के तहत सुरक्षा उपायों, विकासात्मक कार्यों और स्थानीय समुदायों के अधिकारों की सुरक्षा को एक साथ जोड़ा गया।
- प्रभावित जिलों की घटती संख्या: 2018 में प्रभावित जिलों की संख्या 126 थी, जो जुलाई 2021 में घटकर 70, अप्रैल 2024 में 38, दिसंबर 2025 में 8 और मार्च/अप्रैल 2026 तक “शून्य” हो गई।
- विशिष्ट वर्गीकरण: वर्तमान में 37 जिलों को ‘विरासत एवं बल’ (Legacy & Thrust) जिलों की श्रेणी में रखा गया है और 1 जिला ‘चिंता का विषय’ (District of Concern) घोषित किया गया है ताकि उग्रवाद की पुनः वापसी को पूरी तरह रोका जा सके।
2. सुरक्षा अवसंरचना और वित्तीय मदद
- विशेष सुरक्षा योजनाएं: ‘सुरक्षा संबंधी व्यय’ (SRE) योजना के तहत 2014-15 से ₹3,805.04 करोड़ जारी किए गए। वहीं, ‘विशेष अवसंरचना योजना’ (SIS) के तहत राज्यों के विशेष बलों और फोर्टिफाइड पुलिस थानों के लिए ₹1,761 करोड़ स्वीकृत हुए।
- फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशन: उग्रवाद से सुरक्षा हेतु अब तक कुल 663 फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशन निर्मित किए जा चुके हैं।
- वित्तीय प्रवाह पर रोक: केंद्रीय एजेंसियों और राज्य पुलिस के समन्वय से सीपीआई (माओवादी) और उनके वित्तीय समर्थकों के फंडिंग नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया गया।
3. आत्मसमर्पण-सह-पुनर्वास नीति
- आर्थिक सहायता: शीर्ष माओवादी कैडरों को आत्मसमर्पण पर ₹5 लाख और अन्य कैडरों को ₹2.5 लाख की वित्तीय सहायता दी जाती है।
- कौशल विकास व वजीफा: आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों को वोकेशनल ट्रेनिंग के साथ 3 साल तक ₹10,000 प्रति माह का वजीफा (Stipend) दिया जाता है।
4. अवसंरचना, वित्तीय समावेशन और विकास पहलें
- सड़क एवं दूरसंचार नेटवर्किंग: RRP और RCPLWEA योजनाओं के अंतर्गत 15,189 किमी सड़कें बनीं तथा 9,497 टेलीकॉम टावर स्थापित किए गए।
- शिक्षा व कौशल विकास: आदिवासी क्षेत्रों में 179 ‘एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय’ (EMRS), 47 ITI और 49 कौशल विकास केंद्र खोले गए।
- बैंकिंग सुविधाएं: डाक विभाग ने 6,025 नए डाकघर खोले तथा 1,804 बैंक शाखाएं व 1,321 एटीएम चालू किए।
- जन सुविधा केंद्र: सुरक्षा शिविरों के खाली होने पर उनमें से एक-तिहाई को ‘जन सुविधा केंद्रों’ में बदला जा रहा है। पहला केंद्र छत्तीसगढ़ के जगदलपुर (नेतानार) में ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा केंद्र’ नाम से खुला।
- युवा सहभागिता: ‘जनजातीय युवा विनिमय कार्यक्रम’ (TYEP) के तहत 2014 से अब तक 37,655 आदिवासी युवाओं को देश भ्रमण व प्रदर्शन अध्ययन (Exposure Visit) कराया गया।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| पहलू / योजना | नोडल निकाय / प्रावधान | प्रमुख तथ्य |
| संवैधानिक प्रावधान | 7वीं अनुसूची (राज्य सूची) | ‘पुलिस’ और ‘लोक व्यवस्था’ राज्य के विषय हैं। |
| राष्ट्रीय नीति (LWE) | गृह मंत्रालय (MHA) | 2015 में शुरू; मल्टी-प्रॉंग्ड स्ट्रैटेजी पर आधारित। |
| SRE योजना | गृह मंत्रालय | आत्मसमर्पण, क्षतिपूर्ति और सुरक्षा बलों के परिचालन व्यय की प्रतिपूर्ति। |
| पहला जन सुविधा केंद्र | जगदलपुर (छत्तीसगढ़) | ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा केंद्र’। |
| ACALWEMS योजना | केंद्रीय एजेंसियां | हेलीकॉप्टर सहायता और बेस कैंप अवसंरचना हेतु वित्त पोषण। |
| TYEP कार्यक्रम | MHA + नेहरू युवा केंद्र | जनजातीय युवाओं के राष्ट्रीय एकीकरण हेतु एक्सपोजर विजिट्स। |
भारत का पहला दूरसंचार निर्माण क्षेत्र (Telecom Manufacturing Zone – TMZ): ग्वालियर
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएं, संचार और बुनियादी ढांचा, सरकारी नीतियां।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना; उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन; बुनियादी ढांचा: दूरसंचार; मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत।
चर्चा में क्यों?
दूरसंचार विभाग (DoT) और मध्य प्रदेश सरकार के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में होने वाले इस कार्यक्रम का उद्देश्य मध्य प्रदेश के ग्वालियर में भारत के पहले दूरसंचार निर्माण क्षेत्र (TMZ – Phase-I) की स्थापना करना है। इस अवसर पर केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मौजूद रहेंगे।
मुख्य बिंदु: घरेलू विनिर्माण, निवेश और विज़न
1. आत्मनिर्भर भारत और घरेलू पारितंत्र का सुदृढ़ीकरण
- विजन: यह पहल प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत दृष्टिकोण को आगे बढ़ाती है।
- लक्ष्य: दूरसंचार उपकरणों के स्वदेशी डिजाइन और घरेलू विनिर्माण (Domestic Manufacturing) को बढ़ावा देना।
- तकनीकी विकास: अगली पीढ़ी के दूरसंचार उत्पादों (Next-Gen Telecom Products) के विकास को गति देना।
2. आर्थिक और औद्योगिक प्रभाव
- निवेश आकर्षण: वैश्विक और घरेलू निवेश आकर्षित कर एक विश्वस्तरीय निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र बनाना।
- इकोसिस्टम का विकास: दूरसंचार क्षेत्र की एमएसएमई (MSMEs), स्टार्टअप्स और तकनीक कंपनियों को बढ़ावा।
- रोजगार सृजन: बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करना और क्षेत्रीय औद्योगिक विकास को गति देना।
- सप्लाई चेन मजबूती: दूरसंचार क्षेत्र में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain Resilience) को मजबूत करना।
3. केंद्र-राज्य भागीदारी
- सहमति ढांचा: यह MoU केंद्र सरकार (DoT) और मध्य प्रदेश सरकार के बीच सहयोग के लिए एक औपचारिक ढांचा तैयार करता है।
- ग्लोबल हब: भारत को दूरसंचार विनिर्माण और नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने का प्रयास।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| पहलू / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य / विवरण |
| पहला TMZ स्थान | ग्वालियर (मध्य प्रदेश)। |
| भागीदार संस्थाएं | दूरसंचार विभाग (DoT) + मध्य प्रदेश सरकार। |
| चरण (Phase) | TMZ चरण-I (Phase-I)। |
| मुख्य उद्देश्य | दूरसंचार उपकरणों का स्वदेशी विनिर्माण और नवाचार। |
| संबंधित विजन | ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’। |
हानले में हिमालयन चंद्रा टेलिस्कोप के 25 वर्ष
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व की वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकी घटनाएं, अंतरिक्ष विज्ञान और प्रमुख खगोलीय वेदशालाएं।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियां; प्रौद्योगिकी का देशीयकरण और नवीन प्रौद्योगिकी का विकास; अंतरिक्ष एवं खगोल विज्ञान क्षेत्र में भारत की प्रगति।
चर्चा में क्यों?
लद्दाख के हानले में 2-मीटर ‘हिमालयन चंद्रा टेलिस्कोप’ (HCT) के सफल संचालन के 25 वर्ष पूरे हो गए हैं। इस उपलब्धि को चिन्हित करने के लिए भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) ने एक 3-दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया। केंद्रीय बजट में हानले के लिए घोषित 3.7-मीटर अपग्रेटेड एचसीटी और 13.7-मीटर राष्ट्रीय विशाल ऑप्टिकल-इंफ्रारेड टेलिस्कोप की दिशा में इस पड़ाव को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मुख्य बिंदु: स्थापना, तकनीकी विशेषताएं एवं वैज्ञानिक योगदान
1. स्थान का चयन और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
- नोडल एजेंसी: योजना आयोग के सुझाव पर वर्ष 1989 में भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) को नोडल एजेंसी बनाया गया था।
- स्थान और ऊंचाई: वर्ष 1993 की खोजों के बाद लद्दाख के हानले में समुद्र तल से 4,517 मीटर ऊपर स्थित ‘दिग्पा रत्सा री’ पर्वत चोटी को चुना गया।
- अनुकूल परिस्थितियां: यहाँ वर्ष में 250 से अधिक साफ रातें मिलती हैं। मानसून की अनुपस्थिति, न्यूनतम जलवाष्प (< 2.5 मिमी) और न्यूनतम प्रकाश प्रदूषण इसे ऑप्टिकल व नियर-इंफ्रारेड प्रेक्षणों के लिए आदर्श बनाते हैं।
- स्थापना व नामकरण: इसका शिलान्यास 1997 में हुआ। सितंबर 2000 में इसने पहली बार काम शुरू किया और अगस्त 2001 में इसे नोबेल पुरस्कार विजेता सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर के नाम पर राष्ट्र को समर्पित किया गया।
2. अनूठी रिमोट ऑपरेटिंग तकनीक
- उपग्रह लिंक: जून 2001 से यह टेलिस्कोप ISRO के INSAT-3B उपग्रह लिंक के माध्यम से होसकोटे (बेंगलुरु) स्थित IIA परिसर से रियल-टाइम में रिमोटली नियंत्रित होता है।
- उपकरण विन्यास: HCT वर्तमान में तीन मुख्य उपकरणों- HFOSC (कैमरा स्पेक्ट्रोग्राफ), uTIRSPEC (नियर-इंफ्रारेड स्पेक्ट्रोमीटर) और HESP (हाई-रिज़ॉल्यूशन स्पेक्ट्रोग्राफ) से लैस है।
3. प्रमुख वैज्ञानिक खोजें और बहु-विषयक शोध
- ग्रह और एक्सोप्लैनेट: प्रसिद्ध TRAPPIST-1b एक्सोप्लैनेट की खोज में भाग लिया तथा धूमकेतुओं एवं एस्टेरॉयड का अध्ययन किया।
- तारा भौतिकी (Stellar Physics): सुपरनोवा, नोवा, तारा निर्माण क्षेत्रों की इंफ्रारेड मैपिंग और बाइनरी स्टार सिस्टम का दीर्घकालिक विश्लेषण।
- गैलेक्सी एवं ब्रह्मांड विज्ञान: गामा-रे बर्स्ट (GRB) के ऑप्टिकल आफ्टरग्लो (2001 में पहला परिणाम), लेंस वाले क्वासर और एक्टिव गैलेक्टिक न्यूक्लिआई पर शोध।
4. भविष्य की योजनाएं और हानले डार्क स्काई रिजर्व
- सह-स्थित टेलिस्कोप: हानले परिसर में ग्रोथ-इंडिया (IIT बॉम्बे के साथ), मैस और हागर गामा-रे टेलिस्कोप (BARC व TIFR के साथ) भी कार्यरत हैं।
- डार्क स्काई संरक्षण: कृत्रिम रोशनी को नियंत्रित करने के लिए यहाँ हानले डार्क स्काई रिजर्व की स्थापना की गई है।
- भविष्य के प्रोजेक्ट्स: IIA के नेतृत्व में यहाँ जल्द ही 3.7-मीटर अपग्रेटेड HCT और 13.7-मीटर नेशनल लार्ज ऑप्टिकल-इंफ्रारेड टेलिस्कोप स्थापित किए जाएंगे।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| पहलू / घटक | महत्वपूर्ण विवरण |
| हिमालयन चंद्रा टेलिस्कोप (HCT) | 2-मीटर व्यास वाला ऑप्टिकल व नियर-इंफ्रारेड टेलिस्कोप। |
| अवस्थिति | दिग्पा रत्सा री (दिग्पा रत्सा री पर्वत चोटी), हानले, लद्दाख (ऊंचाई: 4,517 मी)। |
| नोडल व संचालक संस्थान | भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA – DST का स्वायत्त निकाय)। |
| रिमोट नियंत्रण केंद्र | होसकोटे (बेंगलुरु) से INSAT-3B उपग्रह के माध्यम से। |
| नामकरण | नोबेल पुरस्कार विजेता सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर के नाम पर। |
| प्रमुख खोजों में भूमिका | TRAPPIST-1b एक्सोप्लैनेट खोज और गामा-रे बर्स्ट स्टडी। |
| आगामी विशाल परियोजनाएं | 3.7-मीटर अपग्रेटेड HCT व 13.7-मीटर नेशनल लार्ज ऑप्टिकल-इंफ्रारेड टेलिस्कोप। |
कोयला विनिमय नियम 2026
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की आर्थिक एवं नीतिगत घटनाएं, संसाधन प्रबंधन (कोयला), खान और खनिज अधिनियम।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने से संबंधित विषय; औद्योगिक नीतियां, बुनियादी ढांचा: ऊर्जा व खनन क्षेत्र में सुधार।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने लोकसभा में ‘कोयला विनिमय नियम, 2026’ की विस्तृत जानकारी साझा की। मंत्रालय द्वारा 4 जून 2026 को अधिसूचित ये नियम भारत में कोयला और लिग्नाइट के पारदर्शी व प्रतिस्पर्धी ऑनलाइन व्यापार के लिए एक नया कानूनी और नियामक ढांचा प्रदान करते हैं।
मुख्य बिंदु: नियामक ढांचा, बाजार निगरानी एवं संचालन तंत्र
1. वैधानिक आधार और नियामक प्राधिकरण
- अधिनियम व धारा: ये नियम खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 18B के तहत जारी किए गए हैं।
- नियामक संस्था: कोयला नियंत्रक संगठन (CCO) को कोयला एक्सचेंजों को पंजीकृत, विनियमित और रद्द करने वाला मुख्य प्राधिकरण बनाया गया है।
- कोयला एक्सचेंज की परिभाषा: यह एक ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म है जहाँ कोयले और उसके प्रसंस्कृत रूपों के क्रेता व विक्रेता व्यापार और अनुबंध करते हैं।
2. बाजार निगरानी, निपटान और सुरक्षा उपाय
- निपटान गारंटी कोष (SGF): प्रत्येक एक्सचेंज एक ‘सेटलमेंट गारंटी फंड’ बनाएगा। इसका कम से कम 50% हिस्सा सुरक्षित/तरल साधनों (जैसे- सरकारी प्रतिभूतियों, ट्रेजरी बिलों, सार्वजनिक बैंकों की FD) में निवेश होगा।
- बाजार नियंत्रण: CCO कार्टेलाइजेशन (गठबंधन), इनसाइडर ट्रेडिंग, और बाजार में अनुचित दबदबा बनाने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाएगा।
- व्यापार निरंतरता: एक्सचेंजों को स्वचालित ऑडिट ट्रेल, आईटी सुरक्षा ऑडिट, बाजार निगरानी विभाग और डिजास्टर रिकवरी साइट रखना अनिवार्य होगा।
3. मूल्य निर्धारण और बाजार सहभागिता
- व्यापक भागीदारी: कैप्टिव और वाणिज्यिक खनिक, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां और गैर-नियमित क्षेत्र के छोटे-मध्यम उपभोक्ता इस पर डिलीवरी-आधारित अनुबंध कर सकेंगे।
- गुणवत्ता-आधारित मूल्य समायोजन: प्रतिस्पर्धी और तटस्थ नीलामी तंत्र के माध्यम से कीमतें तय होंगी। कोयले की अंतिम कीमत में उसकी वास्तविक गुणवत्ता के आधार पर समायोजन किया जाएगा।
- संचालन की समयावधि: समर्पित ऑनलाइन पोर्टल (15 जुलाई 2026 से खुला) पर आवेदन मिलने के 12 महीने के भीतर नियमित कोयला एक्सचेंज चालू होने का अनुमान है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| पहलू / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य / विवरण |
| मूल अधिनियम | खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 (धारा 18B)। |
| नियामक प्राधिकरण (Authority) | कोयला नियंत्रक संगठन (CCO)। |
| SGF निवेश मानदंड | कम से कम 50% राशि G-Secs, T-Bills या PSU बैंक की FD में सुरक्षित। |
| प्लेटफ़ॉर्म का प्रकार | इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग सिस्टम (ऑनलाइन स्पॉट व डिलीवरी-बेस्ड कॉन्ट्रैक्ट)। |
| शिकायत निवारण तंत्र | ग्रीवांस रीड्रेसल फोरम अनिवार्य। |
इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड (EDF)
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की आर्थिक एवं वैज्ञानिक घटनाएं, इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग (ESDM), सरकारी फंड एवं प्रमुख पहलें।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था, औद्योगिक नीतियां, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी—प्रौद्योगिकी का देशीयकरण, नवीन तकनीक का विकास और बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR)।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड (EDF) का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड पेश किया। इस फंड ने देश में इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग (ESDM) और आईटी क्षेत्र के स्टार्टअप्स को जोखिम पूंजी (Risk Capital) मुहैया कराकर घरेलू तकनीक और नवाचार को नई दिशा दी है।
मुख्य बिंदु: संरचना, निवेश ढांचा एवं उपलब्धियां
1. फंड की संरचना और कार्यप्रणाली
- फंड ऑफ फंड्स: EDF एक क्लोज-एंडेड ‘फंड ऑफ फंड्स’ है। यह सीधे कंपनियों में निवेश नहीं करता। इसके बजाय यह सेबी पंजीकृत ‘डॉटर फंड्स’ में पैसा लगाता है।
- एंकर निवेशक व फंड मैनेजर: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) इसका एंकर निवेशक है। केनबैंक वेंचर कैपिटल फंड्स लिमिटेड (CVCFL) इसका फंड मैनेजर है।
- वर्तमान स्थिति: EDF ने फरवरी 2024 में अपना निवेश चरण पूरा कर लिया था। अभी यह ‘डाइवस्टमेंट चरण’ में चल रहा है।
2. निवेश और स्टार्टअप चयन मानदंड
- चयन के आधार: स्टार्टअप्स का चयन उनकी इनोवेशन क्षमता, स्वदेशी तकनीक विकास, बौद्धिक संपदा (IP) निर्माण की संभावना, संस्थापक टीम की दक्षता और टिकाऊ बिजनेस मॉडल के आधार पर किया जाता है।
- कुल निवेश (30 जून 2026 तक):
- EDF ने 8 डॉटर फंड्स में ₹257.77 करोड़ का निवेश किया।
- इन डॉटर फंड्स ने आगे 128 कंपनियों/स्टार्टअप्स में ₹1,335.77 करोड़ का कुल निवेश किया।
- इन 128 कंपनियों में से 77 ESDM क्षेत्र की और 51 आईटी (IT) क्षेत्र की हैं।
3. राज्य-वार निवेश का विवरण (प्रमुख राज्य)
- कर्नाटक: सबसे ज्यादा 90 कंपनियां (बेंगलुरु में 89, बेलगावी में 1) | कुल निवेश: ₹854.54 करोड़।
- महाराष्ट्र: 8 कंपनियां (मुंबई में 4, पुणे में 4) | कुल निवेश: ₹142.48 करोड़।
- तेलंगाना: 7 कंपनियां (हैदराबाद में) | कुल निवेश: ₹129.97 करोड़।
- दिल्ली: 6 कंपनियां | कुल निवेश: ₹99.20 करोड़।
- अन्य राज्य: तमिलनाडु (5), केरल (6), हरियाणा (3), राजस्थान (1), पश्चिम बंगाल (1) और उत्तर प्रदेश (1)।
4. प्रमुख उपलब्धियां
- फंड लेवरेज: डॉटर फंड्स ने EDF निवेश की मदद से बाजार से लगभग 5 गुना (5X) अधिक धन जुटाया।
- बाजार पूंजी जुटाव: समर्थित स्टार्टअप्स ने बाजार से कुल ₹22,553.82 करोड़ का फंड जुटाने में सफलता पाई।
- बौद्धिक संपदा (IP) निर्माण: निवेश पाने वाले स्टार्टअप्स द्वारा कुल 373 बौद्धिक संपदा (IPs) का निर्माण या अधिग्रहण किया गया।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| पहलू / मापदंड | महत्वपूर्ण तथ्य |
| फंड का प्रकार (Nature) | SEBI-पंजीकृत डॉटर फंड्स के लिए ‘फंड ऑफ फंड्स’। |
| एंकर निवेशक | इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)। |
| फंड मैनेजर | केनबैंक वेंचर कैपिटल फंड्स लिमिटेड (CVCFL)। |
| लक्ष्य क्षेत्र | ESDM (इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन व मैन्युफैक्चरिंग) और IT। |
| वर्तमान चरण | डाइवस्टमेंट फेज (निवेश चरण फरवरी 2024 में समाप्त)। |
| सृजित बौद्धिक संपदा (IP) | 373 आईपी (IPs)। |
अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस 2026: भारत में बाघ संरक्षण की स्थिति
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व के पर्यावरणीय मुद्दे, जैव विविधता, बाघ संरक्षण पहल (NTCA, प्रोजेक्ट टाइगर)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन; जैव विविधता का संरक्षण।
चर्चा में क्यों?
नई दिल्ली में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा ‘अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस’ (Global Tiger Day) समारोह आयोजित किया गया। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत में बाघों की बढ़ती संख्या, नए टाइगर रिजर्व और वैज्ञानिक संरक्षण के उपायों को रेखांकित किया।
मुख्य बिंदु: प्रमुख पहलें, रिपोर्ट और संरक्षण डेटा
1. नए डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और जागरूकता अभियान
- NTCA ईको-टूरिज्म वेबपेज: सभी टाइगर रिजर्व की जानकारी को एक एकीकृत मंच पर लाने के लिए इस वेबपेज को लॉन्च किया गया। यह जिम्मेदार और टिकाऊ प्रकृति-आधारित पर्यटन को बढ़ावा देगा।
- इको-क्लब जागरूकता अभियान: देश भर के स्कूलों, विशेषकर टाइगर रिजर्व के पास स्थित स्कूलों में पर्यावरण शिक्षा कार्यक्रम के तहत बाघ संरक्षण अभियान चलाया गया।
2. जारी की गई 5 प्रमुख प्रकाशन/रिपोर्ट्स
- स्ट्राइप्स: NTCA की आउटरीच पत्रिका का जुलाई 2026 संस्करण।
- 24 टाइगर रिजर्व की सुरक्षा ऑडिट रिपोर्ट: वन्यजीव सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था का विश्लेषण।
- स्लॉथ बियर हैबिटेट असेसमेंट रिपोर्ट: भारत के टाइगर लैंडस्केप में स्लॉथ बियर (आलसी भालू) के लिए उपयुक्त आवास का वैज्ञानिक मूल्यांकन।
- टाइगर्स ऑफ द वर्ल्ड: इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA) और ग्लोबल टाइगर फोरम (GTF) द्वारा संयुक्त रूप से प्रकाशित रिपोर्ट।
- ‘द रहमान खेड़ा टाइगर’ पुस्तक: वरिष्ठ वन अधिकारियों चंद्र प्रकाश गोयल और सत्य प्रकाश यादव द्वारा लिखित।
3. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और ज़मीनी प्रयास
- अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस (IBCA): बाघों और अन्य प्रमुख कैट प्रजातियों के संरक्षण हेतु वैश्विक स्तर पर ज्ञान व सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान में भारत की भूमिका।

- NTCA पुरस्कार: बाघ संरक्षण और संरक्षित क्षेत्र प्रबंधन में अनुकरणीय योगदान देने वाले वन अधिकारियों और फ्रंटलाइन कर्मियों को सम्मानित किया गया।
पृष्ठभूमि: अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस
- ऐतिहासिक संदर्भ: 100 वर्ष पहले एशिया में लगभग 1,00,000 जंगली बाघ थे। वर्तमान में ये अपने ऐतिहासिक क्षेत्र के 8% से भी कम हिस्से में सीमित हैं।
- विलुप्त उप-प्रजातियां: बाघों की तीन उप-प्रजातियां—बाली, जावा, और कैस्पियन पूरी तरह विलुप्त हो चुकी हैं।
- सेंट पीटर्सबर्ग शिखर सम्मेलन (2010): 13 बाघ रेंज वाले देशों (Tiger Range Countries) ने मिलकर ‘ग्लोबल टाइगर रिकवरी प्रोग्राम’ (GTRP) शुरू किया था।
- TX2 लक्ष्य: 2022 तक जंगली बाघों की आबादी को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसी सम्मेलन में प्रतिवर्ष 29 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस मनाने का निर्णय लिया गया।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| पहलू / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| आयोजन की तिथि | 29 जुलाई (प्रतिवर्ष)। |
| भारत में कुल बाघों की संख्या | 3,682 (नवीनतम गणना के अनुसार)। |
| भारत में कुल टाइगर रिजर्व | 58 (देश भर में फैला नेटवर्क)। |
| नोडल एजेंसी | राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA – वैधानिक निकाय)। |
| वैश्विक मंच | इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA) और ग्लोबल टाइगर फोरम (GTF)। |
| विलुप्त बाघ उप-प्रजातियां | बाली, जावा और कैस्पियन बाघ। |